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कोडरमा : 14 जुलाई  से 14 अगस्त तक जिला और प्रखंड स्तर पर निबंधन को लेकर चलेगा विशेष अभियान
Published / 2023-07-07 19:09:06
कोडरमा : 14 जुलाई से 14 अगस्त तक जिला और प्रखंड स्तर पर निबंधन को लेकर चलेगा विशेष अभियान

जिला स्तरीय जन्म-मृत्यु निबंधन से संबंधित प्रशिक्षण-सह कार्यशाला आयोजितटीम एबीएन, कोडरमा। आज समाहरणालय सभागार में  जिला स्तरीय जन्म-मृत्यु निबंधन से संबंधित प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया।  इस प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में सभी उपस्थित सदस्यों को जिला सांख्यिकी पदाधिकारी कृष्ण मूर्ति  द्वारा जन्म व मृत्यु निबंधन की महत्ता व उद्देश्यों की जानकारी दी गयी।साथ ही बताया गया कि आगामी 14 जुलाई 2023 से 14 अगस्त 2023 तक राज्य में जिला स्तर एवं प्रखण्ड स्तर पर कोविड- 19 अवधि के दौरान छुटे हुए एवं अन्य छुटे हुए घटनाओं के शत-प्रतिशत निबंधन हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान जन-जागरूकता हेतु एवं आमजनों में जन्म-मृत्य की घटना के निबंधन के महत्व को समझाने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार का कायक्रम चलाया जाएगा। इस कार्य में जन्म-मृत्य निबंधन से जुड़े निबंधकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं सहिया, सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं अन्य सम्बन्धित पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। 05 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों की सूची विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा उपलब्ध करायी जाएगी। सूची में डुप्लीकेसी की जांच प्रखंडों व जिला स्तरपर की जाएगी। इस अभियान में 100 फीसदी निबंधन का कार्य पूर्ण किया जाना है।कार्यशाला में विभिन्न समयावधि में निबंधन हेतु आवेदन करने पर लगने वाले शुल्क और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी गयी। साथ ही जिला, अनुमंडल व प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स के गठन, आयोजित होने वाले बैठकों की जानकारी दी गयी और आवश्यक प्रारूप उपलब्ध कराये गये। कार्यशाला में  अनुमंडल पदाधिकारी  संदीप कुमार मीना, निदेशक डीआरडीए भागीरथ प्रसाद, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी, जिला शिक्षा अधीक्षक नयन कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी शिवनंदन बड़ाइक, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी व अंचल अधिकारी, सांख्यिकी विभाग से मो.असद जालिल समेत अन्य मौजूद थे।

रांची : आज डोरंडा के एक लाख लोगों को नहीं मिलेगा पानी
Published / 2023-07-07 14:44:52
रांची : आज डोरंडा के एक लाख लोगों को नहीं मिलेगा पानी

टीम एबीएन, रांची। फ्लाइओवर निर्माण के दौरान डोरंडा कब्रिस्तान के पास गुरुवार को 18 इंच का पाइप क्षतिग्रस्त हो गया। इस कारण डोरंडा व आसपास के करीब एक लाख लोगों को पानी नहीं मिला। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। इंजीनियरों के अनुसार, मरम्मत का कार्य शुक्रवार की देर रात तक चलेगा। इस वजह से शुक्रवार को डोरंडा, रिसालदार नगर, कुसई, निवारणपुर, अनंतपुर, छप्पन सेट, नेपाल हाउस, हाथी खाना व बेलदार मोहल्ला समेत अन्य इलाकों में पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पायेगी। इंजीनियरों ने शनिवार से पेयजल आपूर्ति सामान्य होने की संभावना जतायी है।

कोडरमा : वज्रपात से एक बच्चे समेत दो की मौत
Published / 2023-07-07 14:40:20
कोडरमा : वज्रपात से एक बच्चे समेत दो की मौत

आकाशीय बिजली के कहर से पूरा झारखंड भयभीतटीम एबीएन, कोडरमा/ रांची। रखंड में मानसून में होने वाली बारिश के साथ वज्रपात की घटना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। ताजा मामला गुरुवार का है, जहां दो व्यक्ति की वज्रपात से मौत हो गयी। बताया जा रहा है कि बारिश के दौरान ये दोनों खुले स्थानों पर थे। जिला में मानसून की दस्तक के साथ ही वज्रपात की घटना भी देखी जा रहा है। कोडरमा के चंदवारा थाना क्षेत्र स्थित खांडी में बारिश के दौरान वज्रपात से दो लोगों की मौत हो गयी। मरने वालों में एक बच्चा शामिल है। घटना को लेकर मिली जानकारी के अनुसार खांडी के हरिजन मोहल्ला के रहने वाले जोवल यादव खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान तेज बारिश होने लगी। बारिश से बचने के लिए जोवल यादव खेत के बगल में बांस के पेड़ के पास जाकर छुप गये तभी जोरदार आवाज के साथ ठनका गिरा और वो उसकी चपेट में आ गया। इसके बाद परिजन उन्हें सदर अस्पताल ले गये लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं खांडी गांव में ही एक 4 वर्षीय बच्चा कारू रविदास अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी क्रम में वो वज्रपात की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गयी। घटना के बाद परिजन बच्चे को सदर अस्पताल ले गये, जहां चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। वहीं वज्रपात की घटना में दो अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है. बता दें कि बारिश के इस मौसम में मेघ गर्जन के दौरान पेड़ के नीचे छुपना या खेतों में काम करना जानलेवा होता है। ऐसे वक्त में लोगों को सावधान रहने की जरूरत हैं। मौसम विभाग की ओर से भी आकाशीय बिजली से बचने के लिए लोगों की जागरुकता और सतर्कता के लिए समय समय पर चेतावनी भी जारी की जाती है।

सीपीआई का आरोप- केंद्र के इशारे पर नहीं मिल रहा अनाज
Published / 2023-07-07 14:35:31
सीपीआई का आरोप- केंद्र के इशारे पर नहीं मिल रहा अनाज

केंद्र सरकार के इशारे पर FCI ने झारखंड सरकार को अनाज देने से किया इनकार : सीपीआईटीम एबीएन, रांची। झारखंड में सीपीआई राज्य कार्यकारिणी सदस्य सह रांची जिला मंत्री अजय सिंह ने कहा कि भारत सरकार के द्वारा संचालित भारतीय खाद्य निगम की ओर से राज्य सरकार को ग्रीन राशन कार्ड धारियों के लिए अनाज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है।उन्होंने कहा कि इंकार कर देने की वजह से नवंबर 2022 से ही अनाज नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद राज्य सरकार की ओर टेंडर निकाल कर चावल की खरीद प्रक्रिया पूरी की। टेंडर 6 माह के नवंबर 2022 से अप्रैल 2023 के लिए है। सरकार के इस कदम से राज्य के गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 24802 परिवारों जिनका ग्रीन राशन कार्ड बना हुआ, उन्हें फिर से राशन मिलना शुरू हो गया है। यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्ड से वंचित गरीब परिवारों के लिए झारखंड सरकार चला रही है। श्री सिंह ने कहा कि खाद्य आपूर्ति मंत्री रामेश्वर उरांव ने बताया कि एफसीआई ने अचानक बिना झारखंड सरकार से बात किये हुए राशन वितरण बंद कर दिया था और एफसीआई ने अनाज देना बंद कर दिया।तब झारखंड सरकार ने राज्यहित में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर अनाज उपलब्ध करा रही है। सरकार 36 रुपये की दर से चावल की खरीद कर रही है। पैकेट व ट्रांसर्पोटेशन की कॉस्ट की वजह से एक किलो चावल की लागत 36-39 रुपये पड़ रही है।

सुखाड़ से निपटने को वैकल्पिक व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा
Published / 2023-07-07 14:32:36
सुखाड़ से निपटने को वैकल्पिक व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा

टीम एबीएन, रांची। भारत सरकार के हॉट्रीकल्चर कमिश्नर डॉक्टर प्रभात कुमार और झारखंड सरकार के कृषि विभाग के सचिव व अन्य पदाधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की गयी। इसका उद्देश्य झारखंड में खरीफ बुआई की प्रगति के साथ-साथ सूखे से निपटने की तैयारी और खरीफ फसल संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की गयी।इसके अलावा राज्य के सभी संबंधित योजना नोडल अधिकारियों की उपस्थिति में कृषि क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न योजनाओं और केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं के कार्यान्वयन का विस्तार से पुनरावलोकन किया गया। बैठक के दौरान झारखंड सरकार के कृषि सचिव और निदेशक अबू बकर सिद्दीक और चंदन कुमार ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें झारखंड में कृषि संबंधी गतिविधियों, मुख्य फसलों और लागू की जा रही योजनाओं का अवलोकन किया गया। उन्होंने राज्य में सूखे से निपटने की तैयारी के लिए किये जा रहे उपायों का भी उल्लेख किया। इस बात की भी स्वीकृत अभिव्यक्ति रही कि सूखे से निपटने की तैयारी के लिए केंद्र सरकार के सभी निर्देश सरकार को प्राप्त हो गये हैं और उसी के तहत योजना बनायी जा रही है तथा जरुरत के अनुसार समय-समय पर आवश्यक कदम उठाये जायेंगे।भारत सरकार के हॉटिर्कल्चर आयुक्त डॉक्टर प्रभात कुमार ने बताया कि वातावरण में आ रहे नित नये बदलाव एक चिंता का कारण है और इसका सीधा प्रभाव कृषि पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि कृषि अगर प्रभावित होगी तो किसान और पूरा देश प्रभावित होगा। समीक्षा बैठक में खरीफ फसल की बुआई को लेकर राज्य सरकार की तैयारी क्या है इसे लेकर विस्तृत चर्चा हुई है। साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था सिंचाई के लिए क्या हो सकती है उस पर मंथन किया गया है।उन्होंने बताया कि 20 से 25 जुलाई तक मानसून की स्थिति स्पष्ट हो पायेगी। अगर मानसून अनुकूल रहता है तो बेहतर है, लेकिन प्रतिकूल होने की स्थिति में राज्य में जल के स्रोतों की क्या स्थिति है, उस पर समीक्षा की गयी। उन्होंने कहा कि अन्न योजना पर केंद्र सरकार काम कर रही है और झारखंड में भी इस योजना पर काम किया जा रहा है। यह योजना सुखाड़ की स्थिति में विकल्प के रूप में लागू की जायेगी।

दवा दुकानों को फार्मासिस्टों के बिना संचालित करने के आदेश को वापस लेने की मांग
Published / 2023-07-06 23:27:59
दवा दुकानों को फार्मासिस्टों के बिना संचालित करने के आदेश को वापस लेने की मांग

क्या पीसीआई के आग्रह पर विचार करेगी सरकार?टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिना फार्मासिस्ट के ही दवा दुकानें को खोलने का निर्णय लिया था। वहीं इस निर्णय को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने झारखंड सरकार से वापस लेने को कहा है। इसको लेकर पीसीआई अध्यक्ष डॉ. मोंटू कुमार पटेल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को इस बारे में पत्र लिखा है। पीसीआई अध्यक्ष पटेल ने कहा कि अतीत में फार्मेसी में कोई ज्ञान या शिक्षा नहीं रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा फार्मेसी के पेशे का अभ्यास करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। लेकिन इस तरह की अनियमित प्रथा से लोगों के स्वास्थ्य को बहुत नुकसान हुआ और इसे ध्यान में रखते हुए फार्मेसी के पेशे और अभ्यास को विनियमित करने के लिए फार्मेसी अधिनियम, 1948 बनाया गया था। आगे उन्होंने कहा कि सरकार का यह आदेश पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की अधिसूचना फार्मेसी अधिनियम 1948 और फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन 2015 का उल्लंघन है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि सरकार हालिया अधिसूचना को वापस ले और जनहित में झारखंड में फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन, 2015 लागू करें।पीसीआई (फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया) भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है और फार्मेसी अधिनियम, 1948 की रक्षा करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।पीसीआई अध्यक्ष डॉ मोंटू कुमार पटेल ने कहा कि फार्मेसी अधिनियम की धारा 42 में कहा गया है कि पंजीकृत फार्मासिस्ट के अलावा कोई भी व्यक्ति चिकित्सक के नुस्खे पर किसी भी दवा को मिश्रित, तैयार, मिश्रण या वितरित नहीं करेगा और जो कोई भी इसका उल्लंघन करता है, वह छह महीने की सजा के लिए उत्तरदायी है या जुर्माना एक हजार रुपये से या इससे अधिक देना होगा।

विकास योजनाओं पर पैसे खर्च करने में फिर पिछड़ा झारखंड
Published / 2023-07-06 23:22:40
विकास योजनाओं पर पैसे खर्च करने में फिर पिछड़ा झारखंड

पंचायती राज संस्थाएं नहीं खर्च कर सकीं 1040 करोड़, केंद्र ने रोकी इस साल की ग्रांटटीम एबीएन, रांची। झारखंड में पंचायती राज संस्थाएं विकास के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि खर्च करने में फिसड्डी हैं। पिछले साल पंद्रहवें वित्त आयोग से मिली राशि में से तकरीबन 1,040 करोड़ पड़े रह गये। नतीजा यह हुआ कि आयोग ने इस साल से लिए ग्रांट रोक दी है।झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में जिला स्तर पर जिला परिषद, प्रखंड स्तर पर पंचायत समिति और सबसे निचले स्तर पर ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं। विकास योजनाओं के लिए तीनों स्तर पर प्रति वर्ष राशि आवंटित की जाती है।सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्तीय वर्ष में जिला परिषदों ने कुल ग्रांट का मात्र 11 प्रतिशत, पंचायत समितियों ने 17 प्रतिशत और ग्राम पंचायतों ने 27 प्रतिशत ही खर्च किया है। यानी जिला परिषदों के मुकाबले पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों में राशि के उपयोग की स्थिति थोड़ी बेहतर है। जिला परिषदों के पास 171.54 करोड़ रुपये, पंचायत समितियों के पास 183.02 करोड़ रुपये तथा ग्राम पंचायतों के पास 685.43 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग नहीं हो पाया है।राशि खर्च करने के मामले में सबसे खराब स्थिति रामगढ़ जिला परिषद की है। रामगढ़ जिला परिषद ने 4.42 करोड़ रुपये में एक पैसा भी खर्च नहीं किया है। इसी तरह गढ़वा जिला परिषद ने एक, हजारीबाग जिला परिषद ने दो और लोहरदगा जिला परिषद ने चार प्रतिशत राशि खर्च की है।लातेहार, दुमका और पूर्वी सिंहभूम की जिला परिषदें पांच-पांच फीसदी राशि खर्च कर पायीं। हालांकि, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले साल चुनाव कराये जाने में विलंब की वजह से योजनाएं बनाने, पारित करने और खर्च करने का काम प्रभावित हुआ।

रांची : डुमरीगढ़ी जंगल में पत्थर से कूच कर एक महिला की हत्या
Published / 2023-07-06 23:17:43
रांची : डुमरीगढ़ी जंगल में पत्थर से कूच कर एक महिला की हत्या

टीम एबीएन, अनगड़ा (रांची)। रांची जिला अंतर्गत अनगड़ा थाना क्षेत्र के डुमरगढ़ी वन में एक महिला की पत्थर से कूचकर हत्या कर दी गयी। शव पर धारदार हथियार से वार करने का निशान भी है। अनगड़ा पुलिस ने शव को बरामद किया है। महिला की पहचान डुमरगढ़ी की सुमित्रा देवी (40 वर्ष) के रूप में हुई है। बताया गया कि महिला तीन जुलाई, 2023 को मोबाइल पर फोन आने के बाद अकेले ही जंगल की तरफ गयी थी। चार जुलाई को महिला का शव ग्रामीणों ने जंगल में पड़ा देखा, ग्रामीणों की सूचना पर अनगड़ा पुलिस ने शव को बरामद किया। ग्रामीणों के अनुसार, हत्या का करण प्रेम प्रसंग हो सकता है। महिला को एक युवक के साथ अक्सर देखा जाता था। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

लातेहार : स्कूल ग्राउंड में पढ़ने को मजबूर हैं स्कूली विद्यार्थी
Published / 2023-07-06 09:55:55
लातेहार : स्कूल ग्राउंड में पढ़ने को मजबूर हैं स्कूली विद्यार्थी

बालूमाथ में खुली शिक्षा व्यवस्था की पोलएबीएन न्यूज नेटवर्क, लातेहार। राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त होने या करने को लेकर भले ही दावा करती हो, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। लातेहार में शिक्षा विभाग की हालत इतनी बदतर है कि पढ़ने वाले छात्रों को ना पर्याप्त कमरे उपलब्ध है और ना ही उतने शिक्षक हैं, जितने होने चाहिए। दरअसल, लातेहार के बालूमाथ प्रखंड मुख्यालय स्थित राजकीय कृत प्लस टू उच्च विद्यालय में महज 17 कमरे हैं, जिसमें से कुल 10 कमरों में पढ़ाई होती है, बाकी कमरों का उपयोग लाइबेरी, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर रूम, ऑफिस समेत अन्य कार्यों के लिए किया जाता है।कमरे के अभाव में स्कूल फील्ड में पढ़ाई करने को मजबूर छात्र कुल कमरों के हिसाब से स्कूल में 1000 बच्चों के ही बैठने की क्षमता है। एबीएन की पड़ताल में यह बात सामने आई कि साल 2023-24 में 9वीं कक्षा में 397 बच्चों का नामंकन हुआ है। वहीं, 10वीं कक्षा में 457, 11वीं में 1,200 छात्रों का नामांकन किया गया है। 12वीं के बच्चों को मिलाकर कुल 3,500 बच्चे मौजूदा समय में अध्ययनरत हैं, जिन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए दो-चार होना पड़ रहा है।शिक्षा व्यवस्था बदहालसरकारी शिक्षा का स्तर कैसा हो गया है, ये बात किसी से छिपी नहीं है। शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने की कई वजह है। दरअसल, जिस स्कूल की बात हम कर रहे हैं उस स्कूल में एक कक्षा को चलाने के लिए तीन सेक्शन बनाये गये हैं। 9वीं कक्षा में कुल तीन सेक्शन है, जिसमें प्रत्येक सेक्शन में 200 बच्चे हैं। 10वीं क्लास में भी तीन सेक्शन हैं और एक सेक्शन में 200 बच्चे पढ़ते हैं, जबकि 11वीं कक्षा में आर्ट्स में तीन सेक्शन हैं, एक सेक्शन में 350 बच्चों को बैठाया जाता है। वहीं, साइंस और कॉमर्स में एक-एक सेक्शन हैं।3,500 नामांकन वाले विद्यालय में मात्र 17 कमरेआपको बता दें कि स्कूल में खेलने के लिए एक बड़ा मैदान भी है। इस मैदान में बालूमाथ के सभी तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यहां कई पदाधिकारी व नेता का आवागमन होते रहता है। फिर भी किसी भी पदाधिकारी व नेता का इस विद्यालय पर कोई ध्यान नहीं है। वहीं, 3,500 नामांकन वाले विद्यालय में मात्र 17 कमरा व 17 शिक्षक के भरोसे विद्यालय को चलाया जा रहा है।प्रिंसिपल ने दी सफाईस्कूल की प्रिंसिपल रूबी बानो से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जो संसाधन उपलब्ध कराया गया है। प्रिंसिपल ने इस बात से पूरी तरह इनकार कर दिया है कि कोई भी छात्र बाहर फील्ड में कभी पढ़ाई नहीं करते है। प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल में कुल 27 कमरे हैं, जिसमे 17 कमरों में पढ़ाई होती है। उन्होंने यह स्वीकार किया है कि स्कूल में शिक्षकों की कमी है। इधर, छात्रों का दावा है कि वह बाहर पढ़ाई करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि जगह नहीं होने के कारण कई बार छात्र वापस घर भी लौट जाते हैं। छात्रों ने यह भी दावा किया है कि एक बेंच जिसमे 4 बच्चों की क्षमता है, उसमें 7 से 8 छात्रों को बैठाया जाता है।छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़इधर स्कूल के ही एक शिक्षक राजीव रंजन ने बताया कि छात्रों की संख्या ज्यादा होने पर उन्हें बाहर फील्ड में बैठकर पढ़ाया जाता है। उन्होंने बताया कि स्कूल में कुल 17 ही कमरे हैं, जिसमे लगभग 10 कमरों में पढ़ाई होती है। बाकी अन्य कमरे ऑफिस समेत अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर कौन क्या छुपा रहा है। इससे एक बात तो साफ है कि स्कूल में छात्रों को कमरे और शिक्षक दोनों की ही कमी खल रही है। उनके भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। आखिर इन हजारों छात्रों के भविष्य से कौन खिलवाड़ कर रहा है। क्या इनकी समस्या पर जिला प्रशासन या सरकार कोई एक्शन लेगी?

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