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रेड कार्पेट की जगह मिलता है बाहर का रास्ता!
Published / 2026-10-30 21:33:49
रेड कार्पेट की जगह मिलता है बाहर का रास्ता!

अजय सानी एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। दुनिया के किसी भी कोने में अगर दो ओपनर मिलकर पावरप्ले के 6 ओवर में बिना कोई विकेट खोये 118 रन कूट दें, तो अगली सुबह मैनेजमेंट उनके नाम की आरती उतारता है और अगले मैच में उतरने के लिए रेड कार्पेट बिछा देता है। लेकिन हमारे यहां का सिस्टम ही अलग ग्रह से आपरेट होता है। यहां पावरप्ले में गेंदबाजों का धागा खोलने का ईनाम यह मिलता है कि अगले मैच में सीधे डगआउट की ठंडी बेंच पर बिठाकर हाथ में पानी की बोतलें थमा दी जाती हैं! और सबसे बड़ा मजाकिया पहलू तो देखिये- आज का मैदान सीरीज का सबसे छोटा मैदान है! ऐसा लगता है कि टीम मैनेजमेंट और थिंक टैंक को इसी बात का खौफ सता रहा था कि अगर आज इस लड़के को इस छोटे ग्राउंड पर बल्ला घुमाने की छूट दे दी, तो कहीं यह टी-20 में ही दोहरा शतक न ठोंक दे और विरोधी गेंदबाजों का क्रिकेट से भरोसा ही न उठ जाये। आखिर ऐसी क्या मजबूरी या किस बात का डर था? या फिर यह मान लिया जाए कि क्रिकेट के पूरे इतिहास में सोशल मीडिया और फैंस से गालियां खाने के प्रति इतना गहरा समर्पण और अटूट निष्ठा आज तक किसी दूसरे टीम मैनेजमेंट में नहीं देखी गयी? जब पूरी दुनिया फियरलेस क्रिकेट की माला जप रही है और आपकी टीम में एक ऐसा युवा हीरा मौजूद है जो मैदान पर कदम रखते ही पहली गेंद से तबाही मचाने का माद्दा रखता है, तब उसे अचानक ड्रॉप करके वही घिसी-पिटी रोटेशन पॉलिसी का चूर्ण बांटना समझ से परे है। अभिषेक और वैभव की उस आतिशबाजी के बाद फैंस आज उसी तूफान का दूसरा पार्ट देखने के लिए स्क्रीन से चिपके बैठे थे, लेकिन मैनेजमेंट ने ऐसा बेतुका फैसला सुनाया कि देखने वाले सिर्फ माथा पीट कर रह गये। इसे रणनीति नहीं, सीधे-सीधे अपनी ही चलती गाड़ी के पहिए में खुद डंडा फंसाना कहते हैं। अगर 118 रन की ऐतिहासिक शुरुआत देने के बाद भी खिलाड़ी को बेंच ही नसीब होनी है, तो फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठकर निडर और बेखौफ क्रिकेट का लंबा-चौड़ा ज्ञान बघारना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।

तीन दिवसीय जूनियर आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स राज्य चैंपियनशिप 2026-27 का शुभारंभ
Published / 2026-10-30 20:48:48
तीन दिवसीय जूनियर आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स राज्य चैंपियनशिप 2026-27 का शुभारंभ

एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क (चक्रधरपुर, पश्चिमी सिंहभूम)। झारखंड जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन के तत्वावधान में तीन दिवसीय जूनियर आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स राज्य चैंपियनशिप 2026-27 का शुभारंभ शुक्रवार को सेरसा स्टेडियम, चक्रधरपुर, पश्चिमी सिंहभूम में हुआ। यह प्रतियोगिता 30 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित की जा रही है। इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य झारखंड में जिम्नास्टिक्स खेल को बढ़ावा देना, खिलाड़ियों को बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक मंच प्रदान करना तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की तैयारी एवं चयन करना है। प्रतियोगिता में झारखंड के विभिन्न जिलों के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। पूरी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता झारखंड आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स के टेक्निकल प्रभारी जितेंद्र कुमार की देखरेख में संपन्न होगी। प्रतियोगिता के अंतर्गत विभिन्न स्पर्धाओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर विजेताओं का चयन किया जायेगा। उद्घाटन समारोह में झारखंड जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन की ओर से निशिकांत पाठक, तूलिका श्रीवास्तव एवं दीपक गुप्ता उपस्थित थे। वहीं पश्चिमी सिंहभूम जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष सुहित्रा रॉय ठाकुर एवं सचिव पारुल सिंह सिंह, देवाशीष सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। उक्त जानकारी झारखंड जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन की सचिव तूलिका श्रीवास्तव ने दी।

अभिषेक के तूफान ने दिलायी न्यूजीलैंड से सीरीज जीत
Published / 2026-10-27 17:29:15
अभिषेक के तूफान ने दिलायी न्यूजीलैंड से सीरीज जीत

अभिषेक के तूफान में उड़ा न्यूजीलैंड: भारत ने तीसरा टी-20 छह विकेट से जीता, सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल की, भारत ने सीरीज जीती एबीएन स्पोटर्स डेस्क। भारत ने तीसरे टी-20 में न्यूजीलैंड को छह विकेट से हरा दिया है। 199 रन का लक्ष्य भारत ने 13.2 ओवर में हासिल कर लिया। अभिषेक शर्मा के तूफान में कीवी उड़ गये। अभिषेक ने 38 गेंद में 113 रन की पारी खेली। वहीं, वैभव सूर्यवंशी ने 19 गेंद में 45 रन की पारी खेली। इससे पहले न्यूजीलैंड ने डेरिल मिचेल के नाबाद 89 रन के दम पर 198 रन बनाये थे।मिचेल के अलावा फिन एलन ने 40 रन बनाये थे। इस जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की टी-20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। दोनों टीमों के बीच चौथा टी-20 30 अक्तूबर को आॅकलैंड में खेला जायेगा। अभिषेक का 35 गेंदों में शतक अभिषेक ने 35 गेंदों में शतक जड़ दिया है। यह उनके टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर का चौथा शतक है। हालांकि, वह सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गये। शतक लगाने वाला सबसे तेज भारतीय अभिषेक ही हैं। उन्होंने 30 गेंद में शतक लगाया था। भारत ने 10 ओवर में दो विकेट गंवाकर 178 रन बना लिये हैं। अभिषेक 10वें ओवर में आउट हुए। उन्हें जेमीसन ने कैच आउट कराया। अभिषेक ने 38 गेंद में नौ चौके और 11 छक्के लगाये और 113 रन की पारी खेली।

झारखंड के विकास कुमार गोप का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन
Published / 2026-10-25 17:53:35
झारखंड के विकास कुमार गोप का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन

भारत में कलात्मक तैराकी के विकास को मिलेगी नयी दिशा टीम एबीएन, रांची। झारखंड के रांची निवासी विकाश कुमार गोप ने अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में राज्य और देश का नाम रोशन किया है। उनका चयन विश्व जलीय खेल महासंघ के अंतर्गत आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय कलात्मक तैराकी प्रशिक्षक प्रमाणन पाठ्यक्रम में हुआ है। यह पाठ्यक्रम मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित किया जायेगा। इसमें आयु वर्ग के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विकास कुमार गोप इस अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम के लिए चयनित होने वाले भारत के पहले व्यक्ति हैं। उनका यह चयन भारतीय खेल जगत, विशेषकर कलात्मक तैराकी के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विकास कुमार गोप वर्तमान में झारखंड खेल प्रोत्साहन सोसाइटी के अंतर्गत जिम्नास्टिक प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। वे जिम्नास्टिक और योग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। खेल के क्षेत्र में अपने अनुभव, मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनायी है। पिछले तीन वर्षों से वे भारतीय राष्ट्रीय कलात्मक तैराकी टीम को प्रदर्शन संबंधी प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। उनके अनुभव और कौशल से भारत में कलात्मक तैराकी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है। विश्व जलीय खेल महासंघ के अंतर्गत आयोजित होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उन्हें कलात्मक तैराकी की आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण पद्धतियों तथा खिलाड़ियों को तैयार करने के अंतरराष्ट्रीय मानकों का ज्ञान प्रदान करेगा। इससे देश में इस खेल के प्रशिक्षण स्तर को बेहतर बनाने, नयी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने में मदद मिलेगी। विकास कुमार गोप के इस गौरवपूर्ण चयन पर झारखंड तैराकी संघ ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। संघ के शैलेंद्र कुमार तिवारी ने उनकी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह झारखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने आशा जतायी कि विकास कुमार गोप अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग भारत में कलात्मक तैराकी के विकास के लिए करेंगे तथा भविष्य में देश को नयी उपलब्धियां दिलाने में योगदान देंगे। विकास कुमार गोप की यह उपलब्धि झारखंड के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन राज्य की खेल प्रतिभा, कठिन परिश्रम और समर्पण का परिचायक है। उम्मीद है कि उनके प्रयासों से भारत में कलात्मक तैराकी को नयी पहचान मिलेगी और अधिक से अधिक युवा इस खेल से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। उक्त जानकारी झारखंड तैराकी संघ के शैलेंद्र कुमार तिवारी (91999 90412) और विकास गोप (7484914066) ने दी।

भारत ने न्यूजीलैंड से दूसरा टी-20 चार विकेट से जीता
Published / 2026-10-24 21:44:41
भारत ने न्यूजीलैंड से दूसरा टी-20 चार विकेट से जीता

70 रन पर गिरे पांच विकेट, फिर तिलक वर्मा ने पलटी बाजी एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। भारत ने दूसरे टी-20 मुकाबले में न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली। इस जीत के हीरो तिलक वर्मा रहे, जिन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाये। मैच के बाद तिलक ने खुलासा किया कि मुकाबले से पहले कोच गौतम गंभीर और सितांशु कोटक ने उनसे कहा था कि पूरी टीम और पूरे भारत को उन पर भरोसा है। तिलक और नीतीश कुमार रेड्डी की नाबाद 69 रनों की साझेदारी ने भारत को 181 रनों का लक्ष्य हासिल करने में मदद की। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गये दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में टीम इंडिया ने रोमांचक जीत दर्ज की। भारतीय टीम ने 181 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड को छह विकेट से हराया। इस जीत के हीरो रहे तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी, जिन्होंने दबाव में शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारत को जीत दिलाई। मैच के बाद तिलक वर्मा ने खुलासा किया कि मुकाबले से पहले मुख्य कोच गौतम गंभीर और बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने उन्हें खास संदेश दिया था। 181 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरूआत अच्छी नहीं रही। टीम ने 10.5 ओवर में 70 रन के स्कोर पर अपने पांच विकेट गंवा दिये थे। ऐसे मुश्किल समय में तिलक वर्मा ने पारी को संभाला और एक छोर पर टिककर बल्लेबाजी की। तिलक का साथ देने आये नमन धीर ने भी आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। नमन ने 17 गेंदों पर 31 रन बनाये। दोनों बल्लेबाजों के बीच छठे विकेट के लिए 42 रनों की अहम साझेदारी हुई, जिसने भारत की जीत की उम्मीदों को जिंदा रखा। तिलक ने बताया कि उन्होंने नमन से अंत तक टिके रहने और स्कोरबोर्ड को लगातार आगे बढ़ाने के लिए कहा था। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की टी-20 सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। मुश्किल परिस्थिति से निकलकर हासिल की गयी है। इस जीत ने एक बार फिर तिलक वर्मा की दबाव में बल्लेबाजी करने की क्षमता को साबित किया।

समझ से परे होती जा रही है टीम इंडिया...
Published / 2026-10-23 08:16:12
समझ से परे होती जा रही है टीम इंडिया...

एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। सच कहा जाए तो इस कप्तानी के साये में अगर आप जसप्रीत बुमराह को भी ले आएं, तो शायद उनके भी चार ओवरों में पचास रन लुट जाएंगे! न्यूजीलैंड के खिलाफ इस पहले टी-20 मुकाबले में श्रेयस अय्यर का टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला ही गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। कप्तान साहब शायद यह भूल गए कि पिछले कुछ सालों में जब भी टीम इंडिया ने 200 से बड़े पहाड़ों जैसे लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा है, तो उस अजेय रथ की धुरी सूर्यकुमार यादव ही हुआ करते थे। अब अगर इस भारी-भरकम लक्ष्य को पार करना है, तो खुद श्रेयस को ही मोर्चे से अगुवाई करते हुए कोई चमत्कारी पारी खेलनी होगी।इस मैच ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि श्रेयस अय्यर फिलहाल टी-20 फॉर्मेट की कप्तानी के सांचे में बिल्कुल फिट नहीं बैठते। जरा मैदान पर उनके रणनीतिक फैसलों पर गौर कीजिए जिस भुवनेश्वर कुमार का टी-20 करियर ही डेथ ओवर्स में महंगी गेंदबाजी के चलते लगभग खत्म होने की कगार पर था, कप्तान उनसे वही पुरानी और घातक गलती फिर दोहराने को कह रहे हैं। जब आपके पास अर्शदीप सिंह और एक्सप्रेस पेसर मयंक यादव जैसे धुरंधर मौजूद हों, तो पारी के अंतिम ओवरों का दबाव नीतीश रेड्डी जैसे युवा ऑलराउंडर पर डालना किसी भी क्रिकेट फैन की समझ से परे है। पावरप्ले में मयंक यादव से पहला ओवर न करवाने की यह रणनीतिक चूक टीम को बहुत भारी पड़ी।अगर गेंदबाजों का रोटेशन सूझबूझ के साथ हुआ होता, तो कीवी टीम किसी भी हाल में 225 रनों के उस विशाल स्कोर तक नहीं पहुंच पाती। अभी हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भी हमने उनकी कप्तानी की इसी रक्षात्मक सोच को करीब से देखा था, जहां बारिश ने एक मैच में टीम की लाज बचा ली थी। अब क्रिकेट के जानकारों और फैंस के बीच यह तस्वीर बिल्कुल साफ हो चुकी है कि अगर टीम इंडिया को टी-20 में फिर से उसी बेखौफ और अजेय अंदाज में लौटना है, तो विश्व विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव को दोबारा कमान सौंपने में ही भलाई है।

श्रीलंका ने निकाली अंग्रेजों की हवा
Published / 2026-10-23 08:10:07
श्रीलंका ने निकाली अंग्रेजों की हवा

एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। दोहरा शतक लगाकर हैरी ब्रुक और इंग्लैंड की पुरी टीम घमंड मे चूर हो गई थी लेकिन श्रीलंका ने सारा घमंड तोड़ दिया। 429 रन का पहाड़… फिर भी नहीं मानी हार! श्रीलंका ने इंग्लैंड को हराकर रच दिया इतिहास! इंग्लैंड ने स्कोरबोर्ड पर रनों का ऐसा तूफान खड़ा किया कि दुनिया को लगा अब श्रीलंका की हार तय है! लेकिन शायद इंग्लैंड भूल गया था कि सामने श्रीलंका के वो शेर हैं, जो आखिरी सांस तक लड़ना जानते हैं! एक तरफ 429 रनों का विशाल लक्ष्य… दूसरी तरफ जीतने का जुनून! और फिर शुरू हुई क्रिकेट इतिहास में याद रखी जाने वाली वो लड़ाई, जिसने हर क्रिकेट प्रेमी की धड़कनें बढ़ा दीं। पवन रत्ननायके के 130 रन!जब टीम को उम्मीद की जरूरत थी, तब पवन ने अपने बल्ले को हथियार बना लिया। हर चौका इंग्लैंड के घमंड पर चोट कर रहा था और हर रन श्रीलंकाई फैंस की उम्मीदों को जिंदा कर रहा था। यह सिर्फ एक पारी नहीं, बल्कि हौसले की मिसाल थी!  दासुन शनाका के 97 रन! शतक से सिर्फ 3 रन दूर रह गए, लेकिन शनाका ने जो किया, उसे सिर्फ आंकड़ों में नहीं मापा जा सकता। जब दबाव सबसे ज्यादा था, तब उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया। शतक भले ही छूट गया, लेकिन करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया! और फिर आया आखिरी ओवर…!मैदान पर सन्नाटा, फैंस की धड़कनें तेज और हर गेंद के साथ बदलती उम्मीदें। ऐसा लग रहा था मानो जीत और हार के बीच सिर्फ एक पतली-सी लकीर बची हो।लेकिन इन लंकाई शेरों के इरादे कुछ और ही थे! सिर्फ एक गेंद बाकी थी… और श्रीलंका ने इतिहास के पन्नों पर अपना नाम लिख दिया! 2 विकेट से ऐतिहासिक जीत! इंग्लैंड के विशाल स्कोर को पीछे छोड़कर श्रीलंका ने बता दिया कि क्रिकेट सिर्फ बड़े स्कोर का खेल नहीं, बड़े कलेजे का खेल भी है आज यह जीत सिर्फ श्रीलंका की नहीं है। यह उन तमाम फैंस की जीत है, जिन्होंने मुश्किल वक्त में भी अपनी टीम पर भरोसा बनाए रखा। यह उन खिलाड़ियों की जीत है, जिन्होंने दुनिया की उम्मीदों को चुनौती दी और आखिरी पल तक लड़ते रहे। याद रखना दुनिया वालों… स्कोरबोर्ड पर रन लिखे जाते हैं, लेकिन इतिहास हौसले लिखते हैं! सलाम है श्रीलंका के इन शेरों को!पवन रत्ननायके की बल्लेबाजी, दासुन शनाका का जज्बा और पूरी टीम की लड़ने की भावना आज क्रिकेट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब तक आखिरी गेंद बाकी है, तब तक उम्मीद बाकी है! एक सवाल हर क्रिकेट फैन से क्या आपने कभी इससे ज्यादा रोमांचक रन चेज देखा है?अगर श्रीलंका की इस ऐतिहासिक लड़ाई ने आपका दिल जीत लिया, तो पोस्ट को शेयर करके इन शेरों को सलाम जरूर कीजिए!

न्यूजीलैंड दौरा : भारत की जीत में चमके संजू सैमसन और नमन धीर
Published / 2026-10-22 20:42:40
न्यूजीलैंड दौरा : भारत की जीत में चमके संजू सैमसन और नमन धीर

संजू और नमन चमके; भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराकर 5 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बनायी एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। पहले टी-20 मैच में संजू सैमसन की शानदार अर्धशतकीय पारी और नमन धीर के बेहतरीन फिनिशिंग टच की बदौलत भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हरा दिया। क्राइस्टचर्च में गुरुवार को भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पहले टी-20 मैच में संजू सैमसन की शानदार अर्धशतकीय पारी और नमन धीर के बेहतरीन फिनिशिंग टच की बदौलत भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हरा दिया। संजू सैमसन ने 67 रनों की शानदार पारी खेलकर भारत के लिए जीत की नींव रखी। हालांकि, उनके आउट होने के बाद भारतीय टीम लड़खड़ा गयी, जिससे मेहमान टीम (भारत) दबाव में आ गयी। ऐसे नाजुक मौके पर नमन धीर और कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी संभाली, पारी को संवारा और भारत को जीत तक पहुंचाया। नमन धीर 15 गेंदों पर 42 रन बनाकर नाबाद रहे। उन्होंने अपनी पारी में 5 चौके और 2 गगनचुंबी छक्के लगाये, जिससे भारत को जीत मिली और 5 मैचों की टी-20 सीरीज में भारत ने 1-0 की बढ़त बना ली।

क्या छक्का मारना ही क्रिकेट का असली मकसद हो गया है?
Published / 2026-10-21 18:35:27
क्या छक्का मारना ही क्रिकेट का असली मकसद हो गया है?

बासुकीनाथ पाण्डेय एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। आज के क्रिकेटरों को देखिए! जिम में तराशी हुई मांसपेशियां, शरीर पर टैटू और बल्ला उठाते ही गेंद को स्टेडियम के बाहर पहुंचाने का इरादा। ऐसा लगता है मानो क्रिकेट खेलने के लिए हुनर से ज्यादा ताकत और शरीर का गठीला होना जरूरी हो गया है। लेकिन जरा उस दौर को याद कीजिए, जब क्रिकेट सिर्फ छक्के मारने का खेल नहीं था। जब एक खूबसूरत कवर ड्राइव पर दर्शक अपना दिल हार बैठते थे, जब गेंद बल्ले के बीचोंबीच लगती थी तो उसकी आवाज भी सुकून देती थी और जब मैदान पर किसी खिलाड़ी की सफलता में पूरा देश अपनी खुशी तलाशता था। उस दौर का सबसे बड़ा उदाहरण थे सचिन तेंदुलकर! जिस खिलाड़ी के नाम से दुनिया के खतरनाक गेंदबाजों के पसीने छूटते थे, उसका शरीर देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह लड़का आगे चलकर क्रिकेट की दुनिया का सबसे बड़ा नाम बनेगा। छोटी-सी कद-काठी, मासूम चेहरा और पतली-सी आवाज। लेकिन जब बल्ला उठता था तो अच्छे-अच्छे गेंदबाजों का आत्मविश्वास डगमगाने लगता था। नब्बे के दशक का भारत आज की तरह आत्मविश्वास से भरा हुआ नहीं था। विदेशी धरती पर जीतना मुश्किल था और बड़े मुकाबलों में भारतीय टीम से उम्मीदें भी सीमित ही रहती थीं। ऐसे दौर में सचिन का बल्ला चलता था तो लगता था कि हमारी अपनी जीत हो रही है। वह चौका लगाता था तो सिर्फ स्कोरबोर्ड नहीं बदलता था, करोड़ों भारतीयों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी। हमारी एक पूरी पीढ़ी सचिन को खेलते देखकर बड़ी हुई है। आज उस पीढ़ी की उम्र बढ़ गयी है, जिम्मेदारियां बढ़ गयी हैं, जिंदगी की परेशानियां बढ़ गयी हैं, लेकिन सचिन के उन दिनों की याद आज भी मन को उसी तरह खुश कर देती है। और सिर्फ सचिन ही क्यों? जवागल श्रीनाथ को देख लीजिए। दुबला-पतला शरीर, कंधों पर उभरी हड्डियां और गेंदबाजी करते समय चेहरे पर मेहनत साफ दिखाई देती थी। लेकिन जब वह दौड़कर गेंद फेंकता था तो अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों को संभलने का मौका नहीं मिलता था। अनिल कुंबले का चश्मा याद है? वह किसी इंजीनियर की तरह दिखाई देते थे, लेकिन उनकी फिरकी दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों की समझ से बाहर हो जाती थी। सौरव गांगुली को देखकर कौन कह सकता था कि यह आदमी आगे चलकर भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल देगा? मैदान पर उनकी चाल में भले ही कोई खास फुर्ती नहीं दिखाई देती थी, लेकिन आॅफ स्टंप के बाहर जाती गेंद को कवर और पॉइंट के बीच से निकालने का उनका अंदाज ही अलग था। वह चौका लगाते थे तो लगता था जैसे गेंद को उसकी मंजिल पहले से मालूम हो। मोहम्मद अजहरुद्दीन की कलाइयों का जादू, राहुल द्रविड़ की तकनीक, वीवीएस लक्ष्मण की कलात्मक बल्लेबाजी और वीरेंद्र सहवाग का बेखौफ अंदाज। इनमें से हर खिलाड़ी की अपनी अलग पहचान थी। किसी ने ताकत से नहीं, किसी ने तकनीक से, किसी ने टाइमिंग से तो किसी ने अपने स्वाभाविक खेल से दुनिया को अपना दीवाना बनाया। कपिल देव को देखिए। रवि शास्त्री को देखिये। दिलीप वेंगसरकर और कृष्णमाचारी श्रीकांत को याद कीजिये। इनमें से कोई आज के जिम में तराशे गए बॉडीबिल्डर जैसा नहीं था, लेकिन क्रिकेट के मैदान पर इनका कद किसी से छोटा भी नहीं था। उस दौर में खिलाड़ी के शरीर से ज्यादा उसके खेल की चर्चा होती थी। बल्लेबाज की पहचान उसके कवर ड्राइव, पुल शॉट और डिफेंस से होती थी। गेंदबाज की पहचान उसकी स्विंग, लाइन-लेंथ और बल्लेबाज को परेशान करने की क्षमता से होती थी। तब बल्लेबाज का काम सिर्फ गेंद को सीमारेखा के पार भेजना नहीं था। उसे नयी गेंद का सामना करना होता था, उछाल लेती पिचों पर टिकना होता था और दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों के सामने अपनी तकनीक की परीक्षा देनी होती थी। टेस्ट क्रिकेट में घंटों बल्लेबाजी करना, खराब गेंद का इंतजार करना और सही गेंद को सही जगह खेलना भी एक कला थी। आज की तरह हर गेंद पर बड़ा शॉट लगाने की मजबूरी नहीं थी। और हां, उस दौर में हार का दर्द भी था, लेकिन जीत की खुशी कुछ अलग ही होती थी। जब भारतीय टीम लगातार हारती थी, तब भी हम उसका साथ नहीं छोड़ते थे। कभी किसी बल्लेबाज का शतक हमें खुश कर देता था, कभी किसी गेंदबाज के पांच विकेट लेने पर हम गर्व से भर जाते थे। आज जीत की आदत हो गई है, लेकिन उस दौर में जीत हासिल करना ही किसी उत्सव से कम नहीं था। यही वजह है कि उस समय के खिलाड़ी आज भी हमारे दिलों में बसे हुए हैं। वे सिर्फ क्रिकेटर नहीं थे, हमारी यादों का हिस्सा थे। मैं आधुनिक क्रिकेट के खिलाफ नहीं हूं। खिलाड़ियों की फिटनेस जरूरी है, ताकत भी जरूरी है और खेल के साथ बदलना भी जरूरी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या क्रिकेट में ताकत का बढ़ता महत्व उस हुनर को पीछे छोड़ रहा है, जिसने इस खेल को खूबसूरत बनाया था? आज गेंदबाज पूरी तैयारी से गेंद फेंकता है और बल्लेबाज कई बार उसे सिर्फ ताकत के दम पर सीमा के पार पहुंचाने की कोशिश करता है। छक्के लगाना बुरा नहीं है, लेकिन क्रिकेट की खूबसूरती सिर्फ छक्कों में भी तो नहीं है। कभी-कभी लगता है कि बल्ले का कद इतना बढ़ा दिया गया है कि गेंदबाज की मेहनत ही छोटी दिखाई देने लगी है। बल्लेबाज के लंबे छक्के सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन गेंदबाज की बेहतरीन गेंद पर बल्लेबाज का चकमा खा जाना अब उतना आकर्षण पैदा नहीं करता। क्रिकेट का असली मजा तो इसी मुकाबले में है। बल्लेबाज की कला और गेंदबाज की चुनौती में है। अगर हर गेंद पर सिर्फ छक्के की उम्मीद होगी तो फिर गेंदबाज के हुनर की कद्र कौन करेगा? मेरे लिए क्रिकेट आज भी सिर्फ जीत और हार का खेल नहीं है। यह मेहनत, धैर्य, तकनीक और प्रतिभा का संगम है। यही वजह है कि पुराने खिलाड़ियों को याद करते समय उनके रिकॉर्ड से ज्यादा उनका अंदाज याद आता है। और अंत में एक बात! क्रिकेट में भगवान के नाम पर बहस करने वालों को शायद यह समझना चाहिए कि कुछ खिलाड़ियों को किसी उपाधि की जरूरत नहीं होती। उनका खेल ही उनकी पहचान होता है। भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में चौथे नंबर पर उतरने वाला वह छोटा-सा लड़का, जिसकी सीधी ड्राइव देखकर गेंदबाज भी अपनी बेबसी समझ जाता था, आज भी करोड़ों दिलों में उसी सम्मान के साथ मौजूद है। नाम बताने की जरूरत है क्या? सचिन तेंदुलकर! जिसने हमें सिखाया कि महान बनने के लिए विशाल शरीर नहीं, विशाल प्रतिभा चाहिए। गेंद को दूर पहुंचाने के लिए सिर्फ ताकत नहीं, सही टाइमिंग भी चाहिए और दुनिया पर राज करने के लिए ऊंची आवाज नहीं, अपने खेल में दम होना चाहिए। क्योंकि शरीर की ताकत देखकर लोग प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन दिल पर राज हमेशा हुनर ही करता है।

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