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रांची : सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव 12 से
Published / 2026-09-11 20:06:47
रांची : सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव 12 से

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव 12 सितंबर से, तैयारीयां पूरीटीम एबीएन, रांची। सराफ परिवार के तत्वावधान में भक्ति, ज्ञान और प्रेम के दिव्य संगम सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव का भव्य आयोजन आगामी 12 सितंबर से 18 सितंबर तक महाराजा अग्रसेन भवन रांची में किया गया है।कथा में जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान कराएंगे। उक्त जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा का आयोजन प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से संध्या 6 बजे तक होगा। आयोजन को लेकर सराफ परिवार द्वारा व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई है। सातों दिनों में श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों, भगवान के अवतारों, भक्त चरित्रों तथा श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा।प्रथम दिवस 12 सितंबर शनिवार को प्रातः 10 बजे लक्ष्मी नारायण मंदिर से कलश यात्रा निकाली जाएगी। तथा इसी दिन श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य एवं शुकदेव परीक्षित मिलन का प्रसंग होगा। सर्राफ परिवार ने बताया कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा, सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। कथा श्रवण से मनुष्य को आत्मिक शांति प्राप्त होती है तथा परिवार और समाज में संस्कार एवं सद्भाव की भावना मजबूत होती है।उन्होंने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सातों दिनों कथा में सपरिवार उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य ज्ञान, भक्ति और प्रेम का लाभ उठाने करने का आग्रह किया।

आज चौथे दिन उपासना दिवस पर आत्मदर्शन
Published / 2026-09-11 18:09:57
आज चौथे दिन उपासना दिवस पर आत्मदर्शन

आज चौथे दिन उपासना दिवस पर आत्मदर्शनशुद्ध भावना और कर्मों की निर्जरा का संदेशटीम एबीएन, रांची। दिगम्बर जैन भवन मे पर्यूषण महापर्व के अवसर पर नित्य धर्म आराधना जारी है छत्तीसगढ़ से पधारें साधर्मी स्वाध्यायी पुष्पा जी ओस्तवाल एवं ज्योति जी ओस्तवाल के द्वारा  प्रतिदिन धर्म लाभ दिया जा रहा हैं।इसी क्रम मे पुष्पा जी ओस्तवाल ने आज "उपासना दिवस" के अवसर पर धर्म, आत्मसाधना, शुद्ध भावना एवं कर्मों की निर्जरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैसी हमारी भावना होती है, वैसी ही हमारी अवस्था बनती है और वैसा ही हमारा अगला भाव निर्धारित होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन में दूसरों के प्रति सद्भाव, मैत्री और शुद्ध भावना रखनी चाहिए। स्वाध्यायी जी ने कहा कि किसी व्यक्ति के प्रति गलत भाव रखना स्वयं को ही गलत दिशा में ले जाता है। हमें जीवन में प्रदर्शन, प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा की भावना से बचना चाहिए। प्रदर्शन की प्रवृत्ति व्यक्ति को बाहरी दुनिया में उलझाती है, जबकि धर्म हमें प्रदर्शन से आत्मदर्शन की ओर ले जाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान इस बात पर नहीं होना चाहिए कि लोग हमारे कार्यों की कितनी प्रशंसा करेंगे या उससे हमारी प्रतिष्ठा कितनी बढ़ेगी, बल्कि इस पर होना चाहिए कि उस कर्म से हमारी आत्मा कितनी निर्मल हो रही है।भगवती सूत्र में भगवान महावीर के प्रश्नों के उत्तरस्वाध्यायी जी ने श्री भगवती सूत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जैन आगम साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्रों में से एक है। इसमें भगवान महावीर ने अपने शिष्यों द्वारा पूछे गए असंख्य प्रश्नों का समाधान एवं उत्तर दिया है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आगमों का अध्ययन और श्रवण केवल ज्ञान प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने के लिए होना चाहिए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। नाम और यश के लिए कभी कोई धार्मिक अथवा सामाजिक कार्य नहीं करना चाहिए। किसी को दान देते समय भी यह इच्छा नहीं होनी चाहिए कि हमारा नाम हो, हमारी प्रशंसा हो या लोग हमें दानी के रूप में जानें। सच्ची भावना से किया गया कार्य ही आत्मकल्याण का माध्यम बनता है।तपस्या एवं भजनममता पींचा, विशाल दस्सानी, खुशबू दस्सानी एवं पूजा बोहरा का आज चार उपवास, पायल कोठारी एवं नाहर बेगानी का तीन उपवास गतिमान है! आज सरिता दस्सानी एवं छोटेलाल जी चोरड़िया का तीन दिवसीय उपवास पूर्ण हुआ। छोटेलाल चोरड़िया एवं मोहनलाल पींचा द्वारा आठ दिवसीय मौन व्रत धारण किया हुआ है।प्रवचन के पश्चात ओसवाल संघ के मंत्री विमल जी दस्सानी ने गीत के माध्यम से आत्मचिंतन, साधना और आत्मकल्याण का संदेश दिया गया एवं घेवरचंद नाहटा ने अपने विचार व्यक्त किये साथ ही तपस्वियों के लिए मंगलभाव व्यक्त किया। वहीं श्री प्रकाश चंद जी नाहटा ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को अधिक से अधिक तपस्या करने और आत्मसाधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।16 सितंबर को लगेगा रक्तदान शिविरकार्यक्रम के दौरान तेरापंथ युवक परिषद की ओर से सामाजिक सेवा के अंतर्गत आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि 16 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक दिगंबर जैन भवन के ग्राउंड फ्लोर पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान कर इस सेवा कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया गया।आज के कार्यक्रम मे श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, कार्यक्रम का संचालन राजेश पींचा ने किया, इस अवसर पर ललित पींचा, मोहन लाल नाहटा, लाल चंद बोथरा, भास्कर पींचा, राकेश सुराणा, बसंत दस्सानी, प्रदीप चोरड़िया सहित अनेक गणमान्यजन सदस्य एवं 100-150 के लगभग संख्या मे श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी। 

आज चौथे दिन उपासना दिवस पर आत्मदर्शन
Published / 2026-09-11 18:09:38
आज चौथे दिन उपासना दिवस पर आत्मदर्शन

आज चौथे दिन उपासना दिवस पर आत्मदर्शनशुद्ध भावना और कर्मों की निर्जरा का संदेशटीम एबीएन, रांची। दिगम्बर जैन भवन मे पर्यूषण महापर्व के अवसर पर नित्य धर्म आराधना जारी है छत्तीसगढ़ से पधारें साधर्मी स्वाध्यायी पुष्पा जी ओस्तवाल एवं ज्योति जी ओस्तवाल के द्वारा  प्रतिदिन धर्म लाभ दिया जा रहा हैं।इसी क्रम मे पुष्पा जी ओस्तवाल ने आज "उपासना दिवस" के अवसर पर धर्म, आत्मसाधना, शुद्ध भावना एवं कर्मों की निर्जरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैसी हमारी भावना होती है, वैसी ही हमारी अवस्था बनती है और वैसा ही हमारा अगला भाव निर्धारित होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन में दूसरों के प्रति सद्भाव, मैत्री और शुद्ध भावना रखनी चाहिए। स्वाध्यायी जी ने कहा कि किसी व्यक्ति के प्रति गलत भाव रखना स्वयं को ही गलत दिशा में ले जाता है। हमें जीवन में प्रदर्शन, प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा की भावना से बचना चाहिए। प्रदर्शन की प्रवृत्ति व्यक्ति को बाहरी दुनिया में उलझाती है, जबकि धर्म हमें प्रदर्शन से आत्मदर्शन की ओर ले जाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान इस बात पर नहीं होना चाहिए कि लोग हमारे कार्यों की कितनी प्रशंसा करेंगे या उससे हमारी प्रतिष्ठा कितनी बढ़ेगी, बल्कि इस पर होना चाहिए कि उस कर्म से हमारी आत्मा कितनी निर्मल हो रही है।भगवती सूत्र में भगवान महावीर के प्रश्नों के उत्तरस्वाध्यायी जी ने श्री भगवती सूत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जैन आगम साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्रों में से एक है। इसमें भगवान महावीर ने अपने शिष्यों द्वारा पूछे गए असंख्य प्रश्नों का समाधान एवं उत्तर दिया है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आगमों का अध्ययन और श्रवण केवल ज्ञान प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने के लिए होना चाहिए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। नाम और यश के लिए कभी कोई धार्मिक अथवा सामाजिक कार्य नहीं करना चाहिए। किसी को दान देते समय भी यह इच्छा नहीं होनी चाहिए कि हमारा नाम हो, हमारी प्रशंसा हो या लोग हमें दानी के रूप में जानें। सच्ची भावना से किया गया कार्य ही आत्मकल्याण का माध्यम बनता है।तपस्या एवं भजनममता पींचा, विशाल दस्सानी, खुशबू दस्सानी एवं पूजा बोहरा का आज चार उपवास, पायल कोठारी एवं नाहर बेगानी का तीन उपवास गतिमान है! आज सरिता दस्सानी एवं छोटेलाल जी चोरड़िया का तीन दिवसीय उपवास पूर्ण हुआ। छोटेलाल चोरड़िया एवं मोहनलाल पींचा द्वारा आठ दिवसीय मौन व्रत धारण किया हुआ है।प्रवचन के पश्चात ओसवाल संघ के मंत्री विमल जी दस्सानी ने गीत के माध्यम से आत्मचिंतन, साधना और आत्मकल्याण का संदेश दिया गया एवं घेवरचंद नाहटा ने अपने विचार व्यक्त किये साथ ही तपस्वियों के लिए मंगलभाव व्यक्त किया। वहीं श्री प्रकाश चंद जी नाहटा ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को अधिक से अधिक तपस्या करने और आत्मसाधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।16 सितंबर को लगेगा रक्तदान शिविरकार्यक्रम के दौरान तेरापंथ युवक परिषद की ओर से सामाजिक सेवा के अंतर्गत आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि 16 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक दिगंबर जैन भवन के ग्राउंड फ्लोर पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान कर इस सेवा कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया गया।आज के कार्यक्रम मे श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, कार्यक्रम का संचालन राजेश पींचा ने किया, इस अवसर पर ललित पींचा, मोहन लाल नाहटा, लाल चंद बोथरा, भास्कर पींचा, राकेश सुराणा, बसंत दस्सानी, प्रदीप चोरड़िया सहित अनेक गणमान्यजन सदस्य एवं 100-150 के लगभग संख्या मे श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी। 

पर्युषण पर्व का तीसरा दिन यत्न दिवस के नाम
Published / 2026-09-10 19:37:05
पर्युषण पर्व का तीसरा दिन यत्न दिवस के नाम

पर्यूषण महापर्व के आज तीसरे दिवस मे यत्न दिवस पर छोटे-छोटे कर्मों में सजगता और समभाव का संदेश टीम एबीएन, रांची। पर्यूषण महापर्व के तीसरे दिवस यत्न दिवस के अवसर पर श्री साधुमार्गी जैन संघ, रांची द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वाध्यायी जी ने जीवन में प्रत्येक छोटे-बड़े कार्य को सजगता और सकारात्मक भाव से करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कर्मों में भी यत्न रखना आवश्यक है। आलस्य और प्रमाद एक ही रूप हैं। यदि हम अपने कार्यों को खुशी और कर्तव्य भावना से करते हैं तो कर्मबंधन को दूर करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में कार्य मजबूरी से नहीं, मंजूरी और प्रसन्नता से होना चाहिए। स्वाध्यायी जी ने कहा कि हम किसी कार्य को किस भाव से करते हैं, उसका प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भोजन बनाते समय अच्छे और सकारात्मक भाव रखता है तो उस भोजन को ग्रहण करने वाले पर भी उसका अच्छा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने माता-पिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे लोग अत्यंत सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें माता-पिता का सान्निध्य प्राप्त है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रात: माता-पिता का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने बच्चों को श्रवण कुमार जैसा बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने जीवनसाथी को श्रवण कुमार के आदर्शों पर चलने वाला बनाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अपने कर्मों और परिस्थितियों को समभाव से एवं विनयपूर्वक स्वीकार करना चाहिए। अंत:गड़ सूत्र में गजसुकुमाल मुनि के अद्भुत समभाव का प्रसंग:- अंत:गड़ सूत्र के वाचन को आगे बढ़ाते हुए स्वाध्यायी जी ने गजसुकुमाल मुनि के जीवन और उनकी अद्भुत सहनशीलता का मार्मिक प्रसंग सुनाया:- उन्होंने बताया कि जब माता देवकी की ममता उमड़ने लगी तो उन्होंने कृष्ण से कहा कि उन्होंने कभी अपने किसी बच्चे की बाल-क्रीड़ा का आनंद नहीं लिया। माता की इच्छा पूर्ण करने के लिए कृष्ण वासुदेव ने तपस्या की! इसके फलस्वरूप देवता के प्रकट होने पर उन्होंने देवकी माता के लिए पुत्र की कामना की, देवकी माता को एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम गजसुकुमाल रखा गया। बड़े होने पर गजसुकुमाल ने भगवान अरिष्टनेमी के पास दीक्षा ग्रहण कर ली। दीक्षा के उसी दिन उन्होंने भगवान से आज्ञा लेकर रात्रि में घोर श्मशान में जाकर कायोत्सर्ग ध्यान किया—अर्थात अचल खड़े होकर आत्मा के चिंतन में लीन हो गए।उसी रात उनके होने वाले ससुर सोमशर्मा वहां से गुजरे। मुनि वेश में अपने होने वाले दामाद को देखकर वे क्रोधित हो उठे। उन्हें लगा कि गजसुकुमाल ने विवाह से पीछे हटकर उनकी पुत्री सोमा का जीवन बर्बाद कर दिया है। प्रतिशोध की भावना में सोमशर्मा ने श्मशान की गीली मिट्टी से गजसुकुमाल मुनि के सिर पर पाल बनाई और उसमें जलते हुए दहकते अंगारे रख दिये। इतनी भीषण पीड़ा के बावजूद गजसुकुमाल मुनि अपने आत्मस्वरूप से तनिक भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने अपने ससुर के प्रति मन में रत्ती भर भी क्रोध या द्वेष नहीं आने दिया और पूर्ण क्षमा एवं समभाव बनाये रखा। वे शुक्लध्यान में लीन हो गये। इसी अद्वितीय समता और क्षमा भाव के कारण देह के पूरी तरह जलने से पूर्व ही उन्होंने अपने समस्त कर्मों का क्षय कर केवलज्ञान प्राप्त किया और उसी रात मोक्ष को प्राप्त हुए। स्वाध्यायी जी ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि वास्तविक साधना बाहरी परिस्थितियों को बदलना नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मन को शांत, क्षमाशील और समभाव में रखना है। कार्यक्रम में श्री विमल जी दस्सानी ने मन को शांत रखने की प्रेरणा देने वाला एक सुंदर गीत प्रस्तुत किया साथ ही पाक्षिक के उपलक्ष्य में श्री साधुमार्गी जैन संघ, रांची द्वारा सामूहिक एकासना का आयोजन 11 सितंबर 2026 शुक्रवार को दोपहर 1 बजे किया जा रहा है। संघ की ओर से अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाओं से इसमें सहभागी बनने का आह्वान किया गया है। इन दिनों छोटेलाल चोरड़िया, विशाल दस्सानी, खुशबू दस्सानी एवं ममता पींचा का तीन दिन का उपवास गतिमान है। आज के कार्यक्रम में मोहनलाल पींचा, चंदन कोठारी, राकेश बच्छावत, भास्कर पींचा, विकाश सुराणा, तेरापंथ सभा रांची के अध्यक्ष अमर चंद बेगानी, मंत्री विनोद बेगवानी एवं उपाध्यक्ष लालचंद बोथरा सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी।

रांची : कृष्णमय हुआ पुंदाग का श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर, भजनों पर झूमे श्रद्धालु
Published / 2026-09-10 19:25:07
रांची : कृष्णमय हुआ पुंदाग का श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर, भजनों पर झूमे श्रद्धालु

राधे राधे जपो चले आयेंगे बिहारी... पर झूम उठे लोग टीम एबीएन, रांची। परमहंस संत डॉ. सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का छठी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। छठी महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पूरे परिसर में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। महोत्सव के अवसर पर भगवान श्री राधा-कृष्ण का जड़ित एवं आकर्षक आभूषणों से भव्य और मनोहारी श्रृंगार किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को सुंदर झूले में विराजमान कर विधिवत झूलन उत्सव भी मनाया गया। श्रद्धालुओं ने प्रेम एवं श्रद्धाभाव से भगवान को झूला झुलाया और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति एवं मंगल की कामना की। बाल गोपाल के मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कराई। इस दौरान भगवान श्री राधा-कृष्ण को विभिन्न प्रकार के दिव्य एवं स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। भोग में विशेष रूप से केसरिया खीर, पेड़ा, माखन-मिश्री, पंजीरी, फल एवं नारियल शामिल रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान के बाल स्वरूप की आराधना कर भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पूजा में भाग लिया। पूजा-अर्चना के पश्चात भजन-जागरण का आयोजन हुआ। ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी एवं प्रणामी महिला समिति की सदस्यों ने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में मधुर एवं भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी। अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरम्, राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी तथा गोविंद बोलो, हरि गोपाल बोलो जैसे भजनों की मधुर धुनों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर झूमने लगे और वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की वेशभूषा में सजीव चित्रण भी प्रस्तुत किया गया। बाल श्रीकृष्ण के मनोहारी रूप ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। श्रद्धालु इस मनमोहक प्रस्तुति को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर भगवान श्री राधा-कृष्ण की विशेष सामूहिक महाआरती की गई। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने एक स्वर में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का छठी महोत्सव सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखता है। भगवान के बाल स्वरूप की पूजा से वात्सल्य, प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की भावना जागृत होती है। ऐसे आयोजन समाज में भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, संस्कार एवं आपसी सद्भाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महोत्सव में डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, सुरेश चौधरी,पवन पोद्दार, मनीष सोनी, संजय सर्राफ, विद्या देवी अग्रवाल, शोभा जालान, सुनीता अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, विमला जालान, संतोष देवी अग्रवाल, मंगला मोदी,आशा मुंजाल, पूनम अग्रवाल, ललिता अग्रवाल, अनीता जालान, सरिता अग्रवाल, सहित बड़ी संख्या में ट्रस्ट के सदस्य, प्रणामी महिला समिति की सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

श्री श्वेतांबर जैन मंदिर, डोरंडा में पर्युषण पर्व के दूसरे दिन हुई पूजा, प्रवचन, धर्म आराधना एवं भक्ति
Published / 2026-09-09 21:58:34
श्री श्वेतांबर जैन मंदिर, डोरंडा में पर्युषण पर्व के दूसरे दिन हुई पूजा, प्रवचन, धर्म आराधना एवं भक्ति

एबीएन सोशल डेस्क। पर्युषण पर्व का दुसरा दिन सुबह 7.30 बजे स्नात्र पुजा का 4.30 बजे से प्रवचन हुआ जिसमें पर्युषण का महत्व एवं पर्युषण के कर्तव्यों के बारे में बताया गया। क्षमापना के बारे में कहा गया है कि जिससे भी साल भर में आपका कोई बेर या मनमुटाव हुआ है, उससे भी स्वयं जाकर शुद्ध हृदय से क्षमायाचना करे एवं उसे शुद्ध क्षमा भी प्रदान करें। चंदनबाला और मृगावती-का क्षमापना पर उदाहरण भी दिया। अष्टम तप का पर्युषण में विशेष महत्व होता है तीन दिन उपवास करना या अलग अलग तीन दिनो तक उपवास करना, तप करके सिर्फ भूखा ही नहीं रहना है, तप करके दिखावा (माया) नहीं करना है, तप करके धन-धान्य और भौतिक सुख की कामना करने से तप व्यर्थ हो जाता है, मिथ्यात्व तप अपने धर्म के प्रति कभी शंशय नहीं करना चाहिए। पर्युषण मे चेत्य परिपाटी का विशेष महत्व बताया गया। आगे बताया कि जितने जिन मंदिर है, एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक गाजा बाजा आदि के साथ धूमधाम से जाना चाहिए। श्रावक के वर्ष भर में करने वाले 11 कर्तव्यों के वारे मे विस्तार पूर्वक बताया। आज उपस्थित लोगो में दिनेश भाई सेठ, सुभाष बोथरा, धर्म चन्द,रिखब चन्द भंसाली, अनिल कोठारी, शशी कोठारी, प्रभा बोथरा, प्रेमलता नाहटा, उषा कोठारी, सुमन जैन आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रमोद बोथरा ने दी।

पर्यूषण महापर्व में धर्म और जीवन जीने की कला पर हुआ प्रेरक प्रवचन
Published / 2026-09-09 21:57:38
पर्यूषण महापर्व में धर्म और जीवन जीने की कला पर हुआ प्रेरक प्रवचन

एबीएन सोशल डेस्क। श्री साधुमार्गी जैन संघ द्वारा आयोजित पर्यूषण महापर्व के धार्मिक कार्यक्रमों में स्वाध्यायी जी ने धर्म और जीवन जीने की कला विषय पर प्रेरणादायी प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि संतों का दर्शन, उनकी वाणी का श्रवण तथा उनके द्वारा बताये गये छोटे-छोटे व्रत और नियम भी व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा देकर उसमें बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। अंत:गड़ सूत्र के वाचन के दौरान स्वाध्यायी जी ने माता देवकी के जीवन के अत्यंत मार्मिक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब माता देवकी के छह पुत्रों की मृत्यु हुई, तब एक मां के रूप में उनके मन में यह भाव नहीं आया कि मेरे बच्चे कैसे मर गए? बल्कि उनके मन में यह विचार था कि अच्छा हुआ, मेरे भाई कंस को मेरे बच्चों को मारने का पाप नहीं करना पड़ा। अपने बच्चों को खोने के असहनीय दु:ख के बावजूद माता देवकी के मन में अपने भाई के प्रति दुर्भावना नहीं आई। यह प्रसंग क्षमा, करुणा और निर्मल भावनाओं की प्रेरणा देता है। स्वाध्यायी जी ने आगे बताया कि माता देवकी के छह पुत्रों का पालन-पोषण सुरसा के यहां हुआ। बड़े होने पर उन्होंने भगवान अरिष्टनेमी से दीक्षा ग्रहण की और बेले-बेले की तपस्या करते हुए साधना के मार्ग पर आगे बढ़े। एक बार द्वारका नगरी में विहार करते हुए वे माता देवकी के महल पहुंचे और भिक्षा की मांग की। भगवान अरिष्टनेमी ने जब माता देवकी को बताया कि ये साधु उनके ही पुत्र हैं, तो माता की ममता उमड़ पड़ी और वात्सल्य का भाव जाग उठा। उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक क्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने जीवन और मन को बदलना है। व्यक्ति को जो भी प्रत्याख्यान, व्रत या नियम लेना चाहिए, उसे पूर्ण करने का संकल्प भी रखना चाहिए। छोटे-छोटे नियमों का दृढ़ता से पालन व्यक्ति के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान राम ने 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। इससे हमें अपने संकल्प और वचन के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जीवन में हमेशा यह भाव रखना चाहिए कि जो होता है, अच्छे के लिए होता है। विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना ही जीवन को सुखी और सार्थक बनाता है। कार्यक्रम के दौरान स्वाध्यायी जी द्वारा रामामृतम ध्यान का भी आयोजन कराया गया, जिसमें उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मंच संचालन राजेश पींचा ने किया। इस अवसर पर मूल चंद सुराणा, हुक्मी चंद चोरड़िया, उत्तम कोठारी, सुमन बच्छावत, तेरापंथ सभा रांची के अध्यक्ष श्री अमर चंद जी बैगानी एवं मंत्री श्री विनोद जी बेगवानी सहित 100 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी।

श्री सती सावित्री माता कोटड़ी वाली मैया का तृतीय वार्षिक महोत्सव हर्षोल्लास से संपन्न
Published / 2026-09-09 19:07:22
श्री सती सावित्री माता कोटड़ी वाली मैया का तृतीय वार्षिक महोत्सव हर्षोल्लास से संपन्न

मंगलपाठ में 101 महिलाओं ने राजस्थानी वेशभूषा में लिया भाग, भजनों पर झूमे श्रद्धालु एबीएन सोशल डेस्क। श्री मैंढ क्षत्रिय स्वर्णकार सभा, रांची, झारखंड के तत्वावधान में श्री सती सावित्री माता कोटड़ी वाली मैया जी का तृतीय वार्षिक महोत्सव सह मंगलपाठ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ दिगंबर जैन भवन, रांची में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की और मंगलमय वातावरण में भक्ति का आनंद लिया। महोत्सव के अवसर पर माता श्री सती सावित्री कोटड़ी वाली मैया जी का भव्य, आकर्षक एवं नयनाभिराम श्रृंगार किया गया। रंग-बिरंगे पुष्पों, आभूषणों एवं सुंदर सजावट से माता का दरबार विशेष रूप से सुसज्जित किया गया था। श्रद्धालुओं के लिए माता के दर्शन का विशेष प्रबंध किया गया। विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई तथा माता को सवामणि भोग एवं छप्पन भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने माता के समक्ष सुख, शांति, समृद्धि एवं परिवार की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की। इसके पश्चात कोलकाता से पधारे प्रसिद्ध मंगल पाठ वाचक दीपक वर्मा एवं प्रीति वर्मा ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण वाणी से श्री सती सावित्री माता का मंगलपाठ प्रस्तुत किया। मंगलपाठ के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। विशेष आकर्षण के रूप में 101 महिलाओं ने पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में चुनरी ओढ़कर मंगलपाठ में सहभागिता निभाई। महिलाओं की सामूहिक भागीदारी ने कार्यक्रम की भव्यता और धार्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया। मंगलपाठ के उपरांत भजन संध्या का आयोजन किया गया। भजन गायक मदन मोहन सोनी, मनीष सोनी, विकास सुगंध एवं कैलाशी ने एक से बढ़कर एक मधुर एवं भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। माता के भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते और नृत्य करते रहे। पूरे सभागार में जयकारों और भक्तिमय संगीत से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के दौरान सभा के पदाधिकारियों ने मंगलपाठ वाचकों एवं भजन गायकों तथा आगंतुक अतिथियों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। सभा के मीडिया प्रभारी मनीष सोनी ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी परंपरा, संस्कार एवं धार्मिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम में सभा के अध्यक्ष ओम प्रकाश सोनी, कार्यकारी अध्यक्ष विष्णु सोनी, सचिव कन्हैया सोनी, प्रतीक वर्मा, किशन सोनी, अमित तोसवाड़, वीरेंद्र कुमार, मनीष सोनी, अमित कुमार सोनी, विकास सोनी शंकर सोनी अरुणसोनालिया, राजकुमार मोसून, नीलू सोनी, मनोज बेवरवाल, छगनलाल सोनी प्रदीप सोनी, शिखा तोसावर, तनु सोनी सोनू सोनी, सोनम सोनी, अंजू सोनी, बबली सोनी, रानी सोनी,सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में माता की विधिवत महाआरती की गयी। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया और इसी के साथ तृतीय वार्षिक महोत्सव सह मंगलपाठ श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी मनीष सोनी ने दी।

श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिवस भक्तों ने सुनी श्री कृष्ण रूक्मणी की कथा
Published / 2026-09-07 20:44:36
श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिवस भक्तों ने सुनी श्री कृष्ण रूक्मणी की कथा

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन उपलक्ष्य में कृष्णापुरी चुटिया अयोध्या बैंक्वेट हॉल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिवस श्री धाम वृंदावन से पधारे आचार्य भूपेंद्र जी महाराज ने एक विवाह के प्रसंग का वर्णन को कल सायंकाल ही श्री कृष्ण रूक्मणी की कथा श्रवण करवायी। आज भगवान के 16 हजार 107 और विवाहों की कथा श्रवण करवायी। भगवान कृष्ण की 16 हजार 108 रानिया हैं हर रानी से 10-10 पुत्र और एक एक पुत्री हुई। भगवान की गृहस्थी बहुत बड़ी है। पांडवों द्वारा राजसूय यज्ञ का निमंत्रण आया। भगवान ने अर्जुन और भीम के साथ जाकर भीम द्वारा जरासंध का उद्धार करवाया इसके बाद सुदामा चरित्र की कथा श्रवण करवाई सुदामा जी पर भगवान की कृपा हुई। द्वारिका पहुंचे तो 3 मुट्ठी चावल लेकर गये। भगवान ने दो मुट्ठी में ही दो लोक का सुख प्रदान किया। यदुवंश को ऋषियों का श्राप, नव योगेश्वर संवाद ठाकुर जी का स्वधाम गमन, शुकदेव विदाई, परीक्षित मोक्ष की कथा श्रवण करवायी। आज कथा का सप्त दिवसीय सत्र आज विश्राम हुआ। कल हवन और भंडारा होगा सभी श्रद्धालु भक्त सादर आमंत्रित है।

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