बिन्दकी दशहरा महोत्सव मैदान में दुकानों के आवंटन को लेकर दो गुटों में टकरावप्रशासन और मेला कमेटी की व्यवस्था पर उठे सवालबिन्दकी दशहरा महोत्सव में अव्यवस्थाओं की पोल खुली!मैदान में दुकान लगाने को लेकर दो गुटों में भिड़ंत की नौबत आखिर क्यों आई?दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?प्रशासन और मेला कमेटी जवाब दें—आखिर इस अव्यवस्था का जिम्मेदार कौन?एबीएन सेंट्रल डेस्क (बिन्दकी, फतेहपुर)। बिन्दकी दशहरा महोत्सव मैदान में दुकानें लगाने को लेकर दो गुटों के बीच विवाद और भिड़ंत की स्थिति उत्पन्न होने से मेला परिसर की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस महोत्सव का उद्देश्य क्षेत्र में सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना और लोगों को उत्सव का माहौल उपलब्ध कराना है, वहां दुकानदारों के बीच दुकान लगाने को लेकर विवाद होना आयोजन की व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है।मेला मैदान में दुकानदारों को दुकान लगाने के लिए स्थान निर्धारित करने, आवंटन में पारदर्शिता बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार के विवाद को समय रहते सुलझाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि मेला कमेटी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पहले से ही स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई होती, तो क्या ऐसी स्थिति उत्पन्न होती? यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।आखिर विवाद की नौबत क्यों आई? मेले में दुकान लगाने के इच्छुक दुकानदारों के बीच यदि स्थान को लेकर विवाद उत्पन्न हो रहा है, तो यह मेला प्रबंधन की कार्यप्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है। दुकानों के लिए स्थान निर्धारण, आवंटन की प्रक्रिया, दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश तथा विवाद निस्तारण की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष को मनमानी या भेदभाव की शिकायत का अवसर न मिले।दो गुटों के बीच टकराव की स्थिति पैदा होना इस बात की ओर संकेत करता है कि मौके पर समुचित समन्वय और विवाद रोकने के इंतजामों की पड़ताल जरूरी है। यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़े विवाद की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन और मेला कमेटी की जवाबदेही तय होइस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेला कमेटी ने दुकानों के आवंटन और व्यवस्था को लेकर क्या ठोस कदम उठाए थे? क्या दुकानदारों को पहले से स्थान आवंटित किए गए थे? क्या आवंटन की सूची सार्वजनिक की गई थी? विवाद की सूचना मिलने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों ने क्या कार्रवाई की? इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। प्रशासन को मामले का निष्पक्ष संज्ञान लेते हुए विवाद के वास्तविक कारणों की जांच करानी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दुकानदारों के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो और किसी भी व्यक्ति को नियमों से हटकर दुकान लगाने की अनुमति न मिले। महोत्सव की गरिमा बनाए रखना जरूरीबिन्दकी दशहरा महोत्सव क्षेत्र की महत्वपूर्ण सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल है। ऐसे आयोजन में सुरक्षा, अनुशासन और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। दुकानदारों के बीच विवाद की स्थिति पैदा होना केवल दो पक्षों का आपसी मामला मानकर टाल देना पर्याप्त नहीं होगा।बल्कि आयोजन की व्यवस्थाओं की समीक्षा भी आवश्यक है। अब देखना यह है कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी और मेला कमेटी इस प्रकरण से सबक लेते हुए व्यवस्था में सुधार करते हैं या फिर जिम्मेदारी तय किए बिना मामले को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जनहित में मांग है कि दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए, विवाद के कारणों की निष्पक्ष जांच हो तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि बिन्दकी दशहरा महोत्सव शांति, सुरक्षा और सुव्यवस्था के साथ संपन्न हो सके।
बिन्दकी दशहरा महोत्सव मैदान में दुकानों के आवंटन को लेकर दो गुटों में टकरावप्रशासन और मेला कमेटी की व्यवस्था पर उठे सवालबिन्दकी दशहरा महोत्सव में अव्यवस्थाओं की पोल खुली!मैदान में दुकान लगाने को लेकर दो गुटों में भिड़ंत की नौबत आखिर क्यों आई?दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?प्रशासन और मेला कमेटी जवाब दें—आखिर इस अव्यवस्था का जिम्मेदार कौन?एबीएन सेंट्रल डेस्क (बिन्दकी, फतेहपुर)। बिन्दकी दशहरा महोत्सव मैदान में दुकानें लगाने को लेकर दो गुटों के बीच विवाद और भिड़ंत की स्थिति उत्पन्न होने से मेला परिसर की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस महोत्सव का उद्देश्य क्षेत्र में सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना और लोगों को उत्सव का माहौल उपलब्ध कराना है, वहां दुकानदारों के बीच दुकान लगाने को लेकर विवाद होना आयोजन की व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है।मेला मैदान में दुकानदारों को दुकान लगाने के लिए स्थान निर्धारित करने, आवंटन में पारदर्शिता बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार के विवाद को समय रहते सुलझाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि मेला कमेटी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पहले से ही स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई होती, तो क्या ऐसी स्थिति उत्पन्न होती? यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।आखिर विवाद की नौबत क्यों आई? मेले में दुकान लगाने के इच्छुक दुकानदारों के बीच यदि स्थान को लेकर विवाद उत्पन्न हो रहा है, तो यह मेला प्रबंधन की कार्यप्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है। दुकानों के लिए स्थान निर्धारण, आवंटन की प्रक्रिया, दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश तथा विवाद निस्तारण की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष को मनमानी या भेदभाव की शिकायत का अवसर न मिले।दो गुटों के बीच टकराव की स्थिति पैदा होना इस बात की ओर संकेत करता है कि मौके पर समुचित समन्वय और विवाद रोकने के इंतजामों की पड़ताल जरूरी है। यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़े विवाद की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन और मेला कमेटी की जवाबदेही तय होइस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेला कमेटी ने दुकानों के आवंटन और व्यवस्था को लेकर क्या ठोस कदम उठाए थे? क्या दुकानदारों को पहले से स्थान आवंटित किए गए थे? क्या आवंटन की सूची सार्वजनिक की गई थी? विवाद की सूचना मिलने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों ने क्या कार्रवाई की? इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। प्रशासन को मामले का निष्पक्ष संज्ञान लेते हुए विवाद के वास्तविक कारणों की जांच करानी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दुकानदारों के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो और किसी भी व्यक्ति को नियमों से हटकर दुकान लगाने की अनुमति न मिले। महोत्सव की गरिमा बनाए रखना जरूरीबिन्दकी दशहरा महोत्सव क्षेत्र की महत्वपूर्ण सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल है। ऐसे आयोजन में सुरक्षा, अनुशासन और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। दुकानदारों के बीच विवाद की स्थिति पैदा होना केवल दो पक्षों का आपसी मामला मानकर टाल देना पर्याप्त नहीं होगा।बल्कि आयोजन की व्यवस्थाओं की समीक्षा भी आवश्यक है। अब देखना यह है कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी और मेला कमेटी इस प्रकरण से सबक लेते हुए व्यवस्था में सुधार करते हैं या फिर जिम्मेदारी तय किए बिना मामले को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जनहित में मांग है कि दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए, विवाद के कारणों की निष्पक्ष जांच हो तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि बिन्दकी दशहरा महोत्सव शांति, सुरक्षा और सुव्यवस्था के साथ संपन्न हो सके।
नागपुर में विजयदशमी उत्सव 2026: परमपूजनीय सरसंघचालक डा. मोहन भागवत के संबोधन की मुख्य बातेंएबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाक्टर मोहन भागवत ने नागपुर में मंगलवार को आयोजित विजयदशमी उत्सव को लगभग एक घंटे तक संबोधित करते हुए संघ की शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यों से लेकर विश्व की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। समारोह के मुख्य अतिथि दैनिक जागरण के प्रधान संपादक आदरणीय संजय गुप्त थे। संबोधन की मुख्य बातें।1. संघ के 100 वर्ष और राष्ट्र निर्माण का संकल्पराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पिछले 100 वर्षों में भारत को उसकी सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रीय चेतना और सनातन जीवन-दृष्टि के आधार पर संगठित करने का कार्य किया है। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।भारत को संगठित, शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनाने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को योगदान देना होगा। संत रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती, स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100 वर्ष, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की जन्मशताब्दी और राजनारायण बसु की 200वीं जयंती का उल्लेख किया गया। इन महापुरुषों के जीवन से त्याग, सेवा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आत्मबोध की प्रेरणा मिलती है।2. भारतीय संस्कृति और स्व का बोधभारत की वास्तविक शक्ति उसकी सनातन संस्कृति और जीवन-दृष्टि में निहित है। देशवासियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझकर उसे जीवन में अपनाना चाहिए। भारत की विविधता में एकता का आधार सभी मतों, पंथों, भाषाओं, जातियों और प्रांतों का सम्मान है। भारतीय परंपरा विविधताओं को स्वीकार करती है तथा समय के अनुसार अप्रासंगिक बातों में परिवर्तन की गुंजाइश रखती है। आत्मविस्मृति, सामाजिक विघटन और आपसी संपर्क की कमी समाज को कमजोर करती है। भारत को अपनी सांस्कृतिक चेतना के आधार पर संगठित होकर राष्ट्र की प्रगति के लिए कार्य करना होगा।3. संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमशताब्दी वर्ष में देशभर में संपर्क, संवाद और सामाजिक जागरण के व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए गए।संपर्क अभियान: 4,61,527 गांवों और 41,076 नगरीय बस्तियों में 10,19,88,511 घरों तक संपर्क किया गया।प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियां: 1,117 जिलों में आयोजित गोष्ठियों में 4,26,497 महिला एवं पुरुष शामिल हुए।सद्भावना बैठकें: 5,036 खंडों में आयोजित की गईं।हिंदू सम्मेलन: 34,187 मंडलों में संपन्न हुए।युवा सम्मेलन: इनमें 39,25,225 युवाओं ने भाग लिया।विदेशों में भी भारत, हिंदू समाज और संघ के कार्यों के बारे में जानकारी देने के लिए संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों से शुरू हुए संपर्क और संवाद को आगे भी निरंतर जारी रखने की आवश्यकता बताई गई।4. पंच परिवर्तन की पांच पहलसामाजिक समरसता: समाज में भेदभाव समाप्त कर समानता, सम्मान और सद्भाव को बढ़ावा देना।कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संस्कार, आत्मीयता और जिम्मेदारी की भावना मजबूत करना।पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति की रक्षा करना और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना।स्वबोध एवं स्वदेशी: अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझना और स्वदेशी विचार एवं व्यवहार को प्रोत्साहित करना।नागरिक अनुशासन: नागरिक कर्तव्यों का पालन करना और सामाजिक जिम्मेदारी निभाना। ये पांचों पहल केवल एक वर्ष के कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन में स्थायी परिवर्तन लाने की प्रक्रिया हैं। नियमित अभ्यास से अच्छी आदतें विकसित होती हैं और यही आदतें समाज के स्वभाव में परिवर्तन लाती हैं।5. नई पीढ़ी में संस्कार और विवेकपरिवार, विद्यालय और सामाजिक वातावरण से मिलने वाले संस्कारों में कमी चिंता का विषय है। नई पीढ़ी को सही और गलत के बीच अंतर करने का विवेक सिखाना आवश्यक है।ओटीटी प्लेटफार्म की सामग्री को लेकर व्यक्त सामाजिक चिंता पर शासन को विचार करने की आवश्यकता है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताते हुए सरकार, प्रशासन और समाज से संयुक्त प्रयास करने का आह्वान किया गया। अभिभावकों को बच्चों में अच्छे संस्कार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करनी चाहिए। युवाओं को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और नैतिक रूप से सक्षम बनना होगा।6.विज्ञान, तकनीक और संतुलित विकास विज्ञान और तकनीक का स्वागत करना चाहिए, लेकिन उनका उपयोग विवेक और नैतिकता के साथ होना चाहिए। तकनीक मानव जीवन को बेहतर बनाने का साधन है, स्वयं जीवन का उद्देश्य नहीं। केवल भौतिक सुविधाओं और उपभोग पर आधारित विकास से पर्यावरण और मानव जीवन को नुकसान हो सकता है।नेपाल की भीषण आपदा हमारे सामने है। कोलकाता की घटना भी दुखद है। परमाणु तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। भारत को पर्यावरण संरक्षण, नैतिकता, संयम और समन्वय पर आधारित संतुलित विकास का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।7. हिंदू भाव और राष्ट्रीय एकताहिंदू भाव भारत की राष्ट्रीय चेतना और एकता का महत्वपूर्ण आधार है। इसे किसी विशेष पूजा-पद्धति, भाषा, जाति, खानपान या राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं रहना है। आध्यात्मिकता, मानवता और विश्व बंधुत्व इसके प्रमुख लक्षण हैं।मातृभूमि के प्रति भक्ति, समान पूर्वजों की परंपरा का गौरव और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपनाना राष्ट्रीय एकता के महत्वपूर्ण आधार हैं। संगठित और शक्तिशाली हिंदू समाज का निर्माण सभी पंथों के सम्मान तथा राष्ट्रीय एकात्मता के विरुद्ध नहीं है। समाज में समावेशिता, सद्भाव और सदाचार को मजबूत करना आवश्यक है। कैप्टन मच्छर ने जो किया वह स्वाभाविक था।8.सामाजिक सद्भाव और जिम्मेदार व्यवहारभारत की विविधता में एकता बनाए रखने के लिए वाणी, व्यवहार और कर्म में सद्भाव दिखाई देना चाहिए। इतिहास से जुड़ी आशंकाओं को वर्तमान सामाजिक संबंधों में अविश्वास और संघर्ष का कारण नहीं बनने देना चाहिए। समाज को उकसाकर झगड़े पैदा करने वाली प्रवृत्तियों से सावधान रहना चाहिए।सरकार और प्रशासन को नीतियां लागू करते समय नागरिकों के सम्मान और संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए।आंदोलनों का उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करना। राजनीतिक लाभ, वोट और तात्कालिक लोकप्रियता की अपेक्षा विवेक, सद्भाव और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।9. सामाजिक समस्याओं के समाधान में समाज की भूमिकासमाज की सभी समस्याओं का समाधान केवल सरकार या आंदोलनों के माध्यम से संभव नहीं है। सामाजिक सहभागिता, संवाद और सामूहिक प्रयासों से भी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।21 प्रांतों के 210 जिलों के लगभग 1,296 विद्यालयों में स्वयंसेवकों और ग्रामीणों के प्रयासों से सकारात्मक बदलाव देखे गए। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति, सीखने के स्तर और अभिभावकों की सहभागिता में सुधार का उल्लेख किया गया।ग्रामीणों ने शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान दिया। सेवा कार्यों से समाज में आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता की भावना मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।10. राष्ट्रीय एकता और वंदे मातरम्संबोधन में बंगाल विभाजन के विरोध और वंदे मातरम् की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया गया। वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की प्रेरणा है। मातृभूमि के प्रति भक्ति, समान पूर्वजों का गौरव और भारतीय संस्कृति के मूल्य समाज को जोड़ते हैं। छोटी-छोटी पहचानों के कारण एकता के साझा आधारों को छोड़ना उचित नहीं है।विविधताओं को अलगाव का कारण मानने के बजाय उनके बीच एकता और अपनत्व को मजबूत करना चाहिए।11. भारत का वैश्विक दायित्व और विश्वगुरु बनने का लक्ष्यविश्व राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और पर्यावरणीय संकट जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत को अपनी सांस्कृतिक जीवन-दृष्टि और राष्ट्रीय मूल्यों के आधार पर विकास का नया मार्ग प्रस्तुत करना चाहिए।राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक न्याय, एकात्मता और प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। भारत को विश्व में सुख और शांति का मार्ग दिखाने वाला राष्ट्र बनाने के लिए सामूहिक पुरुषार्थ करना होगा। भारत का परम वैभव और विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठा प्रत्येक नागरिक के योगदान से संभव होगी।व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाकर राष्ट्रसेवा की जा सकती है।आरएसएस पर भी सवाल खड़े किए जाते हैं, जबकि संघ का कार्य शुद्ध सात्विक प्रेम है।भारत में परिवर्तन की बात की जाती है परंतु यहां न कभी हुआ और न होगा। फ्रांस की चर्चा करते हुए कहा कि वहां क्यों हो रहा है, यह सभी को पता है।
कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 श्रद्धालुओं की मौत पर संजय सर्राफ ने जताया गहरा शोकश्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सभी पूजा पंडालों में व्यापक व्यवस्था सुनिश्चित करे राज्य सरकारएबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोर बागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के दौरान 19 श्रद्धालुओं के आकस्मिक निधन की घटना पर विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एंव श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने गहरा शोक एवं संवेदना व्यक्त की है।उन्होंने इस हृदयविदारक घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए दिवंगत श्रद्धालुओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की तथा ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा आस्था, भक्ति, श्रद्धा एवं शक्ति की उपासना का महापर्व है। ऐसे पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के साथ इस प्रकार की दुखद घटना घटित होना अत्यंत पीड़ादायक है।उन्होंने शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हुए मां दुर्गा से प्रार्थना की कि इस असहनीय दुख की घड़ी में दिवंगत श्रद्धालुओं के परिजनों को धैर्य एवं दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। साथ ही, उन्होंने हादसे में घायल सभी श्रद्धालुओं के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। संजय सर्राफ ने पश्चिम बंगाल सरकार एवं संबंधित प्रशासन से आग्रह किया कि राज्य के सभी दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा के व्यापक एवं पुख्ता इंतजाम किए जाएं। भीड़ नियंत्रण, पर्याप्त पुलिस बल, सीसीटीवी निगरानी, अग्निशमन व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा, एंबुलेंस तथा आपातकालीन निकास मार्गों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और सभी श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में मां दुर्गा की आराधना कर सकें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आज संसद भवन, नई दिल्ली में कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समितिकी महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सांसद अनुराग ठाकुर ने किया।बैठक का मुख्य कार्य वर्ष 2026-27 के कार्यकाल के दौरान जांच के लिए विषयों के चयन पर जिस पर सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से अपनी सहमति दी।इस महत्वपूर्ण बैठक में लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने सुझाव देते हुए कहा कि 2026-27 के कार्यकाल के लिए जो विषय चुने जा रहे हैं, उनमें झारखंड जैसे खनिज प्रधान राज्यों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाये। उन्होंने आग्रह किया कि कोयला खदानों में सुरक्षा मानकों की जांच, इस्पात उद्योगों में आत्मनिर्भर भारत के तहत उत्पादन बढ़ाने, खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षणजैसे विषयों को जांच सूची में प्राथमिकता दी जाये।
16 साल की मासूम, 50 साल का दूल्हा, पांच लाख में तय हुआ रिश्ता, वक्त पर पहुंची टीम ने रुकवायी शादी एबीएन सेंट्रल डेस्क। महज 16 साल की एक किशोरी और 50 साल का विधुर। उम्र का इतना बड़ा फासला कि दोनों का रिश्ता पिता-पुत्री जैसा लगे। उत्तर प्रदेश में संभल जिले में एक किशोरी की शादी अधेड़ व्यक्ति से कराने की तैयारी थी। इसके लिए लड़की के परिवार ने पांच लाख रुपये लिये थे। शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, हल्दी की रस्म भी हो गयी थी और 15 अक्टूबर को बारात आनी थी। लेकिन इससे पहले ही जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठन प्रयत्न, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गयी और शादी रुकवा दी। टीम ने जब छापेमारी की, तब घर में शादी से जुड़ी रस्में चल रही थीं। कार्रवाई की भनक लगते ही लड़की के परिजन मौके से फरार हो गये। वहां केवल किशोरी मिली। जिस घर में शादी की तैयारियां की जा रही थीं, वह लड़की के परिवार का नहीं, बल्कि एक बिचौलिए का बताया जा रहा है। बिचौलिया भी पुलिस की पकड़ में नहीं आया, हालांकि उसकी पत्नी और बच्चे मौके पर मौजूद थे। टीम ने किशोरी को रेस्क्यू कर सुरक्षित वन स्टॉप सेंटर पहुंचाया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए देश भर में काम कर रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) की सहयोगी संस्था प्रयत्न के प्रोजेक्ट मैनेजर गौरीशंकर चौधरी ने बताया कि जिस व्यक्ति से किशोरी की शादी तय की गयी थी, उसकी उम्र करीब 50 साल है। वह पहले शादीशुदा था और अब विधुर है। गौरीशंकर चौधरी के मुताबिक, मामले में बाल विवाह के साथ-साथ खरीद-फरोख्त का पहलू भी सामने आया है। आरोप है कि इस व्यक्ति ने शादी के लिए किशोरी के परिवार को पांच लाख रुपये दिये थे। समय पर आकर मेरी बहुत मदद की पुलिस को दिये बयान में किशोरी ने बताया कि उसके घरवाले उसे बहला-फुसलाकर वहां लेकर आये थे। उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसकी शादी करायी जा रही है। वहां पहुंचने के बाद उसे पता चला कि शादी की तैयारियां चल रही हैं और उसी दिन हल्दी की रस्म होनी थी। किशोरी के मुताबिक, बारात 15 अक्टूबर को आने वाली थी। उसने पुलिस और बचाव दल से कहा, आप लोगों ने समय पर आकर मेरी बहुत मदद की है। इस मामले में नखासा के थाना प्रभारी संजय कुमार और चौकी प्रभारी रवींद्र चौधरी की भूमिका प्रशंसनीय रही। दोनों ने सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई कर एक बच्ची की जिंदगी नारकीय होने से बचा ली। समय रहते मिली सूचना और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई से किशोरी को बाल विवाह के खतरे से बचा लिया गया है। अब मामले में कथित लेन-देन, बिचौलिए की भूमिका और शादी की तैयारी में शामिल लोगों की जिम्मेदारी की जांच अहम होगी। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (859595082) से संपर्क कर सकते हैं।
कल के जनसैलाब से भाजपा के पैरों तले खिसकी जमीन, इसलिए लगा रही है बेबुनियाद आरोप : सांसद सुखदेव भगतएबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस सांसद एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत ने राहुल गांधी पर महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी साजिश बताया है। सांसद भगत ने कहा देखिए कल के जनसैलाब को देखकर भारतीय जनता पार्टी के पैरों तले जमीन खिसक गई है। और इस प्रकार के वो बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। वोट चोरी, SIR जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा इस तरह के हथकंडे अपना रही है।उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जी का पूरा राजनीतिक जीवन महिलाओं के सम्मान और पत्रकारों की स्वतंत्रता के लिए समर्पित रहा है। सुप्रीम कोर्ट परिसर में पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग और धक्का-मुक्की के बीच हुई किसी घटना को गलत तरीके से पेश करना दुर्भाग्यपूर्ण है।सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा प्रेस की आजादी का सम्मान किया है और अगर किसी पत्रकार को असुविधा हुई है तो उसका हमें खेद है, लेकिन इसे राहुल गांधी जी द्वारा जानबूझकर किया गया कृत्य बताना पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है।उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक कर दिए जाएं, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। INDIA गठबंधन का आंदोलन वोट के अधिकार और लोकतंत्र बचाने के लिए है, और भाजपा चाहे जितने आरोप लगा ले, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
शॉल ओढ़ाकर किया सम्मानित एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा/ नई दिल्ली। लोकसभा सांसद सह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत के नई दिल्ली स्थित आवास पर आज श्री धार्मिक लीला समिति, लाल किला के पदाधिकारीगण ने शिष्टाचार भेंट की। समिति के पदाधिकारियों ने सांसद को 10 दिवसीय ऐतिहासिक लाल किला दशहरा उत्सव एवं रामलीला मंचन में आमंत्रित किया। इस अवसर पर पदाधिकारियों ने सांसद सुखदेव भगत को शॉल ओढ़ाकर कर सम्मानित किया। समिति ने बताया कि वर्ष 1923 से लगातार आयोजित हो रहाहै जो 100 वर्ष से अधिक हो गया है। सांसद श्री भगत ने आमंत्रण के लिए समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्री राम के आदर्शों पर आधारित यह रामलीला हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और ऐसे पवित्र मंच से जुड़ना सौभाग्य की बात होती है। पिछले वर्ष भी सांसद सुखदेव भगत रामलीला मंचन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में पानीटंकी सीमा पर अहमदाबाद के एक 61 वर्षीय व्यक्ति को नेपाल जाते समय चेकिंग के बाद मिजोरम की दो 17 वर्षीय लड़कियों को ट्रैफिकिंग से बचाया गया। आरोपी एक लड़की को कैसीनो में नौकरी दिलाने के नाम पर नेपाल ले जा रहा था। इस कार्रवाई के बाद उसी रात सिलीगुड़ी स्थित उसके घर से दूसरी नाबालिग लड़की को भी बचाया गया। 11 अक्टूबर की शाम को भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठन कोसी लोक मंच के साथ समन्वय कर पहली लड़की को उस व्यक्ति के साथ रोका। शुरूआती पूछताछ में 17 वर्षीय लड़की ने बताया कि उसके माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है और वह उस व्यक्ति के साथ नेपाल जा रही थी। उसे बताया गया था कि वहां उसे एक कैसीनो में काम मिलेगा। लड़की ने यह भी कहा कि वह उस व्यक्ति को जानती है, क्योंकि वह लंबे समय से उसके माता-पिता का मित्र रहा है। हालांकि, उस व्यक्ति ने लड़की से अपने परिचय को लेकर अलग कहानी बतायी। पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि मुंबई और पुणे में उसके कई स्पा सेंटर हैं। उसने बताया कि मुंबई स्थित उसके एक प्रतिष्ठान में काम करने वाली महिला ने उसे इस नाबालिग लड़की से मिलवाया था। लड़की नौकरी की तलाश में थी। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उसे कैसीनो में नौकरी दिलाने के नाम पर नेपाल ले जा रहा था। व्यक्ति के मोबाइल फोन की जांच में नाबालिग लड़कियों से जुड़ी अश्लील तस्वीरें, वीडियो और बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (सी-सीम) मिली। इनमें मुक्त करायी लड़की से संबंधित सामग्री भी शामिल थी। आगे की पूछताछ में आरोपी के सिलीगुड़ी स्थित घर में मिजोरम की एक अन्य लड़की के रहने की जानकारी भी सामने आई। इस जानकारी के आधार पर टीम ने संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया और मामले की सूचना भक्ति नगर थाने को दी। शिकायत दर्ज कराने के बाद टीम उसी रात करीब 11 बजे उस व्यक्ति के घर पहुंची और दूसरी लड़की को वहां से मुक्त कराया। वह भी 17 वर्ष की है। उसे नौकरी दिलाने के नाम पर वहां लाया गया था, लेकिन उससे घर में घरेलू सहायिका का काम कराया जा रहा था। उसके मोबाइल फोन में भी नाबालिगों से जुड़ी अश्लील तस्वीरें, वीडियो और बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री मिली। इसमें नाबालिगों के साथ उस व्यक्ति की मौजूदगी वाली सामग्री भी शामिल थी। दूसरी लड़की को बचाने के बाद टीम पानीटंकी सीमा पर लौटी, जहां अधिकारियों की मदद से आरोपी को हिरासत में लिया गया। इसके बाद एसएसबी ने संबंधित दस्तावेज पुलिस को सौंपे और आगे की कार्रवाई के लिए शिकायत दर्ज कराई। खोरीबाड़ी थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम (आईटीपीए) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों लड़कियों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया गया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय सचिव ऋषि कांत ने कहा, भारत-नेपाल सीमा पर हाल के दिनों में की गई कार्रवाईयों से एक चिंताजनक पैटर्न सामने आया है। इसमें कम उम्र की लड़कियों को नौकरी या डांस कार्यक्रमों में काम दिलाने के बहाने ले जाया जा रहा है। उन्हें कहां ले जाया जाएगा और वहां उनसे किस तरह का काम कराया जाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं होना इन मामलों को और भी गंभीर बनाता है। ऐसी परिस्थितियों में एसएसबी की समय रहते की गई कार्रवाई बेहद अहम और प्रशंसनीय है, ताकि असुरक्षित परिस्थितियों में फंसी लड़कियां ट्रैफिकिंग गिरोह के चंगुल में न फंसे। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।
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