एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने आज नयी दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने खड़गे से मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। मुलाकात के दौरान झारखंड की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की मजबूती तथा कार्यकर्ताओं को और अधिक सशक्त बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से सकारात्मक चर्चा हुई।
बताया गया कि यह मुलाकात संगठनात्मक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण रही, जिसमें आगामी राजनीतिक रणनीतियों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कांग्रेस पार्टी को और अधिक मजबूत करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। धीरज प्रसाद साहू ने झारखंड में कांग्रेस की स्थिति, कार्यकर्ताओं की भूमिका तथा राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर अपनी बात राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष रखी।
सूत्रों के अनुसार, चर्चा के दौरान पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त करने, युवाओं एवं आम कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने तथा जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता के बीच ले जाने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, कांग्रेस की विचारधारा को आम लोगों तक पहुंचाने और पार्टी के प्रति विश्वास को और मजबूत करने को लेकर भी रणनीतिक पहलुओं पर मंथन हुआ।
पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके अनुभव, दूरदर्शिता एवं संगठनात्मक क्षमता से कांग्रेस पार्टी को निरंतर नयी ऊर्जा और दिशा मिल रही है। उन्होंने कहा कि खड़गे जैसे अनुभवी नेतृत्व का मार्गदर्शन पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके नेतृत्व में संगठन देशभर में मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।
इस मुलाकात को झारखंड कांग्रेस के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक विस्तार को लेकर पार्टी लगातार सक्रिय नजर आ रही है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं एवं केंद्रीय नेतृत्व के बीच संवाद को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देती रही है और संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कार्यकर्ताओं को और अधिक सशक्त एवं सक्रिय बनाकर पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जायेगा।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी संगठन को मजबूत बनाने और कार्यकर्ताओं के मनोबल को ऊंचा रखने पर बल दिया। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने तथा संगठनात्मक एकजुटता बनाये रखने की सलाह दी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की बैठकें संगठन को नई दिशा देने के साथ-साथ राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दिल्ली में हुई यह शिष्टाचार भेंट भी आने वाले समय में झारखंड कांग्रेस की गतिविधियों और संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (25 मई) को कहा कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) कम करने से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। उन्होंने लोगों में विश्वास जगाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि भारत भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता।
निर्मला सीतारमण की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब फ्यूल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है, जो 10 दिनों में चौथी बढ़ोतरी है। सोमवार को पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई, जिससे परिवारों के बजट और परिवहन लागत पर और दबाव बढ़ गया है।
भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (एसआईडीबीआई) की 37वीं वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए सीतारमण ने पीएम मोदी की अपील के बाद नकारात्मक बातों से फैल रहे निराशावादी माहौल की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता और शब्दों और कार्यों दोनों के जरिए नागरिकों में विश्वास जगाने की आवश्यकता है।
मिडिल ईस्ट संकट को तीन महीने होने वाले हैं। इसी को लेकर वित्त मंत्री सीतारमण ने फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) इन तीन एफ पर फोकस करने की अपील की। इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। वित्त मंत्री ने बढ़ते वैश्विक दबावों की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि उर्वरक की कीमतें अकल्पनीय स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि सोने की ऊंची कीमतें बाहरी मोर्चे पर कुछ चुनौतियां पैदा कर रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग इस स्थिति को इस तरह पेश कर रहे हैं जैसे सब कुछ बिखर रहा हो, जबकि उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा नहीं है। हमें यह समझना चाहिए कि चुनौतियां बाहरी कारणों से अधिक हैं। भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस साल जनवरी में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों की घोषणा हुई थी। राष्ट्रपति ने वर्ष 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी, इनमें से 66 हस्तियों को आज सम्मानित किया जा रहा है।
इस साल की सूची के मुताबिक कुल पांच लोगों को पद्म विभूषण, 13 विभूतियों को पद्म भूषण और 113 लोगों को पद्म श्री से नवाजा जायेगा। पद्म विभूषण सम्मान 2026 में सबसे पहले दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत) को प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी पत्नी और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने ग्रहण किया।
कला, समाज सेवा, सार्वजनिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान सहित कई क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाली हस्तियों को हर वर्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। पद्म विभूषण असाधारण सेवा, पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए है। पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस पर होती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। खाड़ी देश में चल रहे युद्ध का असर लगातार भारत में भी देखने को मिल रहा है। भारत में इस युद्ध के वजह से पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
आज तकड़े सुबह भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है, बताया जा रहा है कि फिर एक बार पेट्रोल और डीजलके दाम में बढ़ोतरी देखने को मिली है। बीते दस दिनों में यह चौथी बार है जब फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी हुई है। इस बार पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपए और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
देश की राजधानी दिल्ली में डीजल की कीमत बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत बढ़कर 102.12 रुपये हो गई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद झारखण्ड में भी यह महंगा हो गया है। राँची में अब पेट्रोल की कीमत 105.24 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल की कीमत 100.37 रुपये हो गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की खबरों के बीच इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने स्पष्ट किया है कि पूरे देश में ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और किसी तरह का व्यापक संकट नहीं है। कंपनी ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में देखी जा रही अस्थायी कमी स्थानीय मांग-आपूर्ति असंतुलन और मौसमी खपत बढ़ने का नतीजा है, न कि देशव्यापी सप्लाई समस्या।
आईओसी ने कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर बढ़ी हुई मांग का कारण फसल कटाई के समय डीजल की खपत में मौसमी वृद्धि, अपेक्षाकृत अधिक कीमत वाले निजी पेट्रोल पंपों से ग्राहकों का सरकारी क्षेत्र के पंपों की तरफ स्थानांतरण और थोक ईंधन की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुरूप वृद्धि के कारण संस्थागत खरीद में बढ़ोतरी है।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने एक बयान में कहा कि एक से 22 मई के दौरान पेट्रोल की बिक्री में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डीजल की बिक्री लगभग 18 प्रतिशत बढ़ी जो मांग में निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि को दर्शाता है, जिसे वह देशभर में पूरा कर रही है।
आईओसी ने कहा, हम ग्राहकों और आम जनता को यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई समग्र किल्लत नहीं है। कुछ खुदरा केंद्रों पर देखी जा रही स्थिति अत्यंत स्थानीय और अस्थायी है, जो स्थानीय मांग-आपूर्ति असंतुलन तथा चुनिंदा क्षेत्रों में बिक्री प्रवृत्ति के पुनर्संतुलन के कारण उत्पन्न हुई है।
बयान के मुताबिक, आईओसी के 42,000 से अधिक पेट्रोल पंपों के नेटवर्क में बहुत ही कम जगहों पर आपूर्ति बाधित हुई है, जबकि अधिकांश पंपों पर भंडार और आपूर्ति सामान्य एवं पर्याप्त बनी हुई है।
आईओसी ने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां देशभर में पर्याप्त ईंधन भंडार बनाये हुए हैं तथा अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पन्न इन सीमित बाधाओं को दूर करने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही हैं। आईओसी ने कहा, मांग में इस निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि के बावजूद इंडियन आॅयल देशभर में ग्राहकों की जरूरतों को लगातार पूरा कर रही है।
कंपनी ने उपभोक्ताओं से घबराकर खरीदारी से बचने की अपील करते हुए निर्बाध ईंधन उपलब्धता बनाये रखने की प्रतिबद्धता दोहरायी। बयान में कहा गया, इंडियन आॅयल अन्य तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार एवं आपूर्ति बनाये हुए है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क । भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महिला दल ने पहली बार एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ाई कर इतिहास रच दिया है। यह दल 19 अप्रैल को आईटीबीपी के दिल्ली स्थित मुख्यालय से रवाना हुआ था। इसमें 11 महिला पर्वतारोहियों सहित कुल 14 महिला सदस्य सम्मिलित थे।
आईटीबीपी की एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारत एवं नेपाल में चरणबद्ध प्रशिक्षण के बाद सभी 11 महिला पर्वतारोहियों ने नेपाल की ओर से साउथ कोल रुट से सफलतापूर्वक एवरेस्ट शिखर की चोटी पर चढ़ाई की। दल ने 21 मई की रात 12:52 पर चोटी पर भारतीय ध्वज फहराया।
पर्वतारोही दल ने 8,848 मीटर ऊँचे इस शिखर पर पहंचने के इस चुनौतीपूर्ण अभियान में कम ऑक्सीजन, तेज बर्फीली हवाओं, मुश्किल मौसम एवं कठिन रास्तों के बीच साहस, धैर्य, समन्वय एवं मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।
यह अभियान न केवल महिला सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक है, बल्कि इसके दौरान स्वच्छ हिमालय– ग्लेशियर बचाओ अभियान के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियाँ भी संचालित की गयी हैं।
गौरतलब है कि आईटीबीपी अब तक 232 पर्वतारोहण अभियान सफलतापूर्वक संचालित कर चुका है, जिनमें माउंट एवरेस्ट पर पाँच सफल आरोहण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त आईटीबीपी के पर्वतारोही दल विश्व की आठ-हज़ार मीटर की ऊंचाई वाली 14 चोटियों में से छह प्रमुख चोटियों माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालू, ल्होत्से, धौलागिरी एवं मानस्लु पर भी सफल आरोहण कर चुके हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों को तेजी से अपनाने से देश में प्रदूषण कम होगा और डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता घटेगी। इसके साथ ही ईंधन आयात पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा। पॉलिसी मेकर्स अब पैसेंजर ईवी से आगे बढ़कर कमर्शियल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, क्योंकि भारी वाहनों से उत्सर्जन का स्तर काफी ज्यादा होता है।
बता दें यह हाई-लेवल बैठक नयी दिल्ली के जीपीक्यूए-3 में आयोजित की गयी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने की। मंत्रालय का कहना है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य ईवी बसों और ट्रकों की फाइनेंसिंग से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों को समझना और समाधान तलाशना था।
इस बैठक में कई बड़े सरकारी और निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। जैसे स्टेट बैंक आॅफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, एचएडीएफसी बैंक आदि। इसके अलावा कई ट्रांसपोर्ट और बस आॅपरेटर्स एसोसिएशंस ने भी हिस्सा लिया, जिनमें अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस, बस आॅपरेटर परिसंघ और भारत कर्नाटक बस आॅपरेटर संघ जैसे संगठन शामिल थे।
निजी ट्रांसपोर्ट आॅपरेटर्स का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की शुरुआती कीमत अभी भी काफी ज्यादा है। ऐसे में कई आॅपरेटर्स के लिए बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना आसान नहीं है। बैंक भी हाई-कॉस्ट इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स पर लोन देते समय जोखिम को लेकर सतर्क रहते हैं। इसी वजह से सरकार अब नये फाइनेंस मॉडल्स पर काम कर रही है।
रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार निजी सेक्टर में ईवी बसों और ट्रकों को तेजी से अपनाने के लिए 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा के इंसेंटिव्स पर विचार कर रही है। अगर यह योजना लागू होती है, तो भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल मार्केट को बड़ा बूस्ट मिल सकता है।
भारत तेजी से ग्रीन मोबिलिटी की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसें और ट्रक सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय में ट्रांसपोर्ट कंपनियों के खर्च को कम करने में भी मदद कर सकते हैं। सरकार की नयी रणनीति से आने वाले समय में सड़कों पर ज्यादा इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स दिखाई दे सकते हैं, जिससे भारत का एश् इकोसिस्टम और मजबूत होगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति के महाराष्ट्र दौरे के दौरान, हमें पिछले दिन मुंबई स्थित डब्बावाला इंटरनेशनल एक्सपीरियंस सेंटर का दौरा करने का अवसर मिला। मुंबई के उन डब्बावालों की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका मिलना अत्यंत प्रेरणादायक रहा, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और समयबद्ध सेवा के माध्यम से लगभग 135 वर्षों से वैश्विक पहचान बनायी है।
लगभग 5,000 या उससे अधिक डब्बावाला, पूरी तरह से मानवीय प्रक्रिया के माध्यम से, प्रतिदिन लाखों लोगों तक घर का बना भोजन पहुंचाते हैं। उनके अद्भुत प्रबंधन कौशल, कोडिंग प्रणाली और अपने कार्य के प्रति समर्पण ने उन्हें विश्वव्यापी पहचान दिलायी है और उनका नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
यह एक्सपीरियंस सेंटर डब्बावालों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, परंपरा और नवाचार के अद्भुत संगम का एक जीवंत उदाहरण है। डब्बावालों के 135 वर्षों के इस सफर को आधुनिक तकनीक और वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से बेहद खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस तरह के मॉडल समाज में श्रम, संगठनात्मक क्षमता और सामूहिक कार्य संस्कृति को प्रेरित करते हैं।
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