छत्तीसगढ़ प्रभारी बनने पर बोले सांसद सुखदेव भगतपार्टी के भरोसे को कायम रखूंगा मेरा लक्ष्य छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनानाएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। छत्तीसगढ़ राज्य के कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त होने के बाद लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी हाईकमान ने मुझ पर जो भरोसा जताया है।उसके लिए मैं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय मल्लिका अर्जुन खड़गे, आदरणीय सोनिया गांधी, जननायक राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का दिल से आभार व्यक्त करता हूं। यह मेरे लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, शायद मेरी योग्यता से भी बड़ी। मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी से इस जिम्मेदारी को निभाऊंगा और पार्टी के भरोसे को कायम रखूंगा। उन्होंने कहा कि उनका प्राथमिक और सबसे बड़ा लक्ष्य छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार का गठन सुनिश्चित करना है। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन हम सभी कांग्रेसजनों को एक मंच पर एकजुट होकर सरकार बनाने के लक्ष्य के लिए काम करना होगा।
Pantheon का पहला दिन ड्रोन शोटेक्निकल क्लब इवेंट्स और पहला प्राइवेट सैटेलाइट विक्रम -1 टीम स्काई रूट के राकेश स्कॉट के द्वारा पूरा हुआ1. अमोनगसइसी क्रम में, बिट मेसरा के रोटरैक्ट क्लब द्वारा आयोजित एक अनौपचारिक कार्यक्रम अमंग अस का आयोजन प्रातः 11:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक शोरबाग-1 में किया गया। एक से चार सदस्यों वाली टीमों को वास्तविक जीवन की समस्या-समाधान चुनौती दी गई, जिसमें टीम के सदस्यों को अपनी सूझ-बूझ और तर्कशक्ति के आधार पर इम्पोस्टर की पहचान करनी थी, इससे पहले कि वह अपने उद्देश्य में सफल हो पाता। 2. पीट शॉप पिट स्टॉप, टीम एवियन रेसिंग द्वारा आयोजित एक फ्लैगशिप इवेंट, सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आई.सी. एरिना में आयोजित किया गया। दो से चार सदस्यों की टीमों को समय की बाध्यता के अंतर्गत, मानक ऑटोमोटिव वर्कशॉप उपकरणों का उपयोग करते हुए, बिना किसी सुरक्षा उल्लंघन के अत्यंत सटीक व्हील चेंज करने का कार्य सौंपा गया।प्रतिभागियों का मूल्यांकन गति, टीमवर्क, उपकरणों के सही उपयोग और सुरक्षा नियमों के पालन के आधार पर किया गया, जिसने पिट स्टॉप को एक रोमांचक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण अंत तक पहुँचाया।3. वेलोवर्स-II स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर क्लब द्वारा वेलोवर्स-II नामक एक हाई-ऑक्टेन 5वी5 वेलोरेंट ई-स्पोर्ट्स चैंपियनशिप का आयोजन 5 और 6 सितंबर 2026 को कॉलेज परिसर के आर.एंड.डी. भवन में स्थित लैब-7 में किया गया। यह प्रतियोगिता रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लगातार दो रातों तक चली। यह एक नॉकआउट टूर्नामेंट था जो दो दिनों तक चला जिसमें 20 से 25 टीमें हिस्सा लीं और प्रत्येक टीम में 5 खिलाड़ी होने थें। पहले दिन टीमों की जोड़ी रैंडम तरीके से बनाई गई और शेष टीमें दूसरे दिन खेलीं। शुरुआती नॉकआउट मुकाबलों के बाद शीर्ष 4 टीमों के बीच सेमीफाइनल खेली जाने वाली थीं। सेमीफाइनल की हारने वाली टीमें तीसरे स्थान के लिए भिड़ीं। जबकि फाइनल मुकाबला पहले और दूसरे स्थान का फैसला करने वाले था। भावनाएं दिखा पाता है- यही सफलता की पहचान थी।4. सिकाडाआई.ई.टी. और आई.ई.ई.ई. छात्र शाखाओं द्वारा आयोजित एक सामूहिक ऑनलाइन साइबर सुरक्षा प्रतियोगिता सिकाडा: कैप्चर द फ्लैग की शुरुआत 5 सितंबर 2026 को रात 12:00 बजे हुई। इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को कई स्तरों वाली पहेलियों को सुलझाने की चुनौती दी गई। हैकरों को आधुनिक क्रिप्टोग्राफी, स्टेगेनोग्राफी, मेमोरी करप्शन, रिवर्स इंजीनियरिंग और विभिन्न वेब इंजेक्शन तकनीकों जैसे जटिल क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं को हल करना था। टीमों का मूल्यांकन इस आधार पर किया गया कि उन्होंने कितने फ्लैग हासिल किए, उनकी सटीकता कैसी रही, और उन्होंने कितनी कठिन चुनौतियाँ पूरी कीं।5. डिबग प्रोटोकॉलआई.ई.टी. छात्र शाखा ने 5 सितंबर 2026 को सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक डिबग प्रोटोकॉल नामक एक कोडिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की उन क्षमताओं को परखा गया, जिनमें तार्किक ढंग से त्रुटियों को सुलझाना, समय की सीमा के भीतर प्रोग्राम की भाषा से जुड़ी गलतियों को खोजना, और समस्याओं के मूल एल्गोरिदम को प्रस्तुत करना शामिल था।6. डिज़ाइन द सिस्टमडिज़ाइन द सिस्टम नाम का एक औपचारिक कार्यक्रम आई.ई.ई.ई स्टूडेंट चैप्टर, बिट मेसरा द्वारा आयोजित किया गया, जो सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक लेक्चर हॉल-1 में हुआ। इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों की तकनीकी योग्यता जांचने के लिए उन्हें बड़ी कंपनियों जैसी जटिल परिस्थितियां दी गईं।टीमों को अपने आर्किटेक्चर को चित्रों, मॉडल और प्रेजेंटेशन के ज़रिए समझाना, उसका सिमुलेशन करना और उसका बचाव यानी सही ठहराना था। प्रतिभागियों को कई बातों के आधार पर अंक दिए गए, जैसे कि सिस्टम का ढांचा, उसकी क्षमता बढ़ाने की सुविधा, और उसकी विश्वसनीयता। कार्यक्रम डॉ. चंचल कुमार मिश्रा फैकल्टी कॉर्डिनेटर और पारितोष महत्ता फैकल्टी को कोऑर्डिनेटर के देख रेख मैं पूरा हुआ।
झारखंड के पत्रकारों ने ऐतिहासिक थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन का किया दौरा टीम एबीएन, रांची। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), रांची द्वारा आयोजित और पीआईबी, तिरुवनंतपुरम के समन्वय से केरल के प्रेस टूर पर आये झारखंड के पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज ऐतिहासिक थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (टीईआरएलएस) का दौरा किया। इस दौरान पत्रकारों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी दी गयी। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए एक परिचयात्मक ब्रीफिंग में बताया गया कि थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन की स्थापना वर्ष 1962 में डॉ। विक्रम साराभाई और डॉ होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में की गई थी। थुंबा का चयन इसलिए किया गया क्योंकि पृथ्वी का चुंबकीय भूमध्य रेखा इस स्थान से होकर गुजरता है, जो वायुमंडलीय एवं आयनमंडलीय अनुसंधान के लिए इसे विशेष रूप से उपयुक्त बनाता है। पत्रकारों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरूआती दौर की कहानी से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि उस समय क्षेत्र में मौजूद एकमात्र प्रमुख संरचना सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च थी, जिसे स्थानीय मछुआरा समुदाय ने उदारतापूर्वक अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराया। इसी चर्च परिसर का उपयोग भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने शुरुआती दौर में कार्यालय और प्रयोगशाला के रूप में किया। इन्हीं साधारण शुरुआतों से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। 21 नवंबर 1963 को भारत ने थुंबा से अपना पहला साउंडिंग रॉकेट नाइक-अपाचे प्रक्षेपित किया। पत्रकारों को बताया गया कि थुंबा आज भी नियमित रूप से साउंडिंग रॉकेट प्रक्षेपण और वैज्ञानिक गतिविधियों को संचालित करता है तथा भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत विभिन्न महत्वपूर्ण मिशनों की तैयारियां भी लगातार जारी हैं। अंतरिक्ष संग्रहालय में दिखी भारत की अंतरिक्ष यात्रा इसके बाद पत्रकारों को अंतरिक्ष संग्रहालय का भ्रमण कराया गया, जहां भारत के साथ-साथ विश्व के अंतरिक्ष अभियानों और अंतरिक्ष विज्ञान के विकास की यात्रा को प्रदर्शित किया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने उपग्रह प्रणालियों, प्रक्षेपण यानों तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न कार्यशील मॉडलों और प्रदर्शों को देखा। इन प्रदर्शों के माध्यम से अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं और आत्मनिर्भरता की दिशा में हासिल की गयी महत्वपूर्ण प्रगति को रेखांकित किया गया। इस दौरान पत्रकारों ने विशेष कलाम कॉर्नर का भी अवलोकन किया। यह कॉर्नर भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के प्रारंभिक वैज्ञानिक जीवन और उनके प्रेरणादायी योगदान को समर्पित है। डॉ कलाम ने थुंबा में भारत के शुरुआती अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। मानव अंतरिक्ष उड़ान से अंतरिक्ष स्टेशन तक भारत का लक्ष्य प्रतिनिधिमंडल को भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी गयी। पत्रकारों को विशेष रूप से गगनयान मिशन के बारे में बताया गया, जिसका उद्देश्य मानव को अंतरिक्ष में भेजने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करना और मानव-सक्षम अंतरिक्ष यान के विकास को आगे बढ़ाना है। गगनयान से आगे भारत की दीर्घकालिक अंतरिक्ष योजनाओं के तहत भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही भारत की व्यापक अंतरिक्ष दृष्टि-2047 के तहत मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। पत्रकारों को बताया गया कि भारत की दीर्घकालिक आकांक्षाओं में एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजना भी शामिल है। यह यात्रा थुंबा में शुरू हुई भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विनम्र शुरूआत से लेकर आज की आत्मनिर्भर और उन्नत अंतरिक्ष क्षमताओं तथा भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं तक के विकास को दर्शाती है।
राम मंदिर ट्रस्ट ने एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा को बनाया पहला सीईओ एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा को अयोध्या में राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया। जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी फाइटर पायलट रहे हैं। उन्होंने आॅपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले ही सीईओ पद के लिए गठित सर्च कमेटी ने तीन शॉर्टलिस्ट किये गये उम्मीदवारों के नाम ट्रस्ट को सौंपे थे। राम मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक और संचालन संबंधी कामकाज को देखते हुए ट्रस्ट ने पहली बार पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने का फैसला किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (गुना)। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में आगामी कबीर साहेब प्रकट दिवस को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसी कड़ी में संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने गुना जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें इस विशेष समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया। संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने बताया है कि ने गुना कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, और बमोरी विधायक को निमंत्रण पत्र सौंपा और बैतूल में आयोजित होने वाले समारोह में पधारने का आग्रह किया। इसके साथ ही बमोरी थाना प्रभारी, फतेहगढ़ थाना प्रभारी और तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों को भी निमंत्रण पत्र प्रदान किये गये। आयोजकों के अनुसार, बैतूल में होने वाले इस महा-समारोह में विशाल सत्संग, दहेज-मुक्त विवाह और नशा-मुक्ति जैसे सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। अब देखना होगा कि इस भव्य आयोजन में प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि किस रूप में सहभागिता करते हैं। समारोह को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्साह का माहौल बताया जा रहा है।
*संजू सिसोदिया*देवास जिले की सतवास तहसील में अन्नपूर्णा मुहिम के तहत बेसहारा परिवार को मिली मदद, राशन सामग्री पाकर खिले चेहरेएबीएन सेंट्रल डेस्क (देवास)। संपूर्ण भारत वर्ष में असहाय और जरूरतमंद परिवारों की मदद के उद्देश्य से संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम के तहत 30 अगस्त को मध्य प्रदेश के देवास जिले के एक छोटे से गांव लोहार टप्पर में एक बेसहारा परिवार को राशन सामग्री वितरित की गई। परिवार में कमाने वाले मुख्य सदस्यों के न होने के कारण यह परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, ऐसे में मिली इस राहत से परिवार के चेहरे पर खुशी छाई है। इस परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है।परिवार में एक बुजुर्ग मां जिनकी उम्र 48 साल हे व एक छोटी लड़की हे जिसकी उम्र 13 वर्ष हे जो कि स्कूल नहीं जा पाती आधार कार्ड न होने के कारण दोनों मां बेटी एक पल्ली से बनी झोपड़ी में रहते हे बसु बाई काम काज नहीं कर सकती उनके हाथों ओर पाव की सभी उंगलियां कटी हुई हे। परिवार के पास न तो कोई खेती-किसानी के लिए ज़मीन है और न ही आय का कोई अन्य साधन। खाने के लिए इधर उधर मांग कर अपना गुजारा चला रहे थे। ऐसे में 30 अगस्त को अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस परिवार को खाद्य सामग्री प्रदान कि गई। राशन सामग्री मिलने से परिवार को दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी राहत मिली है। स्थानीय लोगों ने इस मानवीय पहल की सराहना की है।
रायसेन में अन्नपूर्णा मुहिम के तहत बेसहारा परिवार को मिली मदद, राशन सामग्री पाकर खिले चेहरेएबीएन सेंट्रल डेस्क (रायसेन)। विश्व में असहाय और जरूरतमंद परिवारों की मदद के उद्देश्य से संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम के तहत 30 अगस्त को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के एक छोटे से गांव मऊ पथरई में एक बेसहारा परिवार को राशन सामग्री वितरित की गई। परिवार में कमाने वाले मुख्य सदस्यों के न होने के कारण यह परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, ऐसे में मिली इस राहत से परिवार के चेहरे पर खुशी छाई है। इस परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है। परिवार में दादी के पति और बेटे (बच्चों के पिता) दोनों का देहांत हो चुका है। लगभग 5 वर्ष पूर्व बेटे का निधन होने के बाद से घर में केवल 5 सदस्य, 60 वर्षीय मुखिया बल्लो बाई (दादी), उनकी बहू बबीता बाई जो बोलने में असमर्थ हैं। पोती साक्षी (14 वर्ष), पोता लकी (11 वर्ष) और 5 वर्षीय छोटी पोती सोनाक्षी रह रहे हैं। परिवार के पास न तो कोई खेती-किसानी के लिए ज़मीन है और न ही आय का कोई अन्य साधन। घर का पूरा गुजारा दादी और बहू को मिलने वाली कुल 1,200 रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सहारे ही चल रहा था।30 अगस्त को अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस परिवार को खाद्य सामग्री के साथ सभी सदस्यों को दो-दो जोड़ी कपड़े प्रदान किए गए। राशन सामग्री मिलने से परिवार को दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी राहत मिली है। स्थानीय लोगों ने इस मानवीय पहल की सराहना की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (अशोकनगर, मध्य प्रदेश)। गरीबी और अभाव के बीच जीवन गुजार रहे एक जरूरतमंद परिवार के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आयी है। आसपास के लोगों से परिवार को अन्नपूर्णा मुहिम की जानकारी मिली, जिसके बाद मुहिम के तहत अशोकनगर जिले की शाडोरा तहसील के ग्राम चिरौली में आर्थिक रूप से बेहद कमजोर और बेसहारा परिवार को राशन सामग्री सहित आवश्यक घरेलू सामान उपलब्ध कराया गया। परिवार में कुल दो सदस्य हैं। परिवार की मुखिया रामेति दासी (53 वर्ष), पत्नी स्वर्गीय कल्याण सिंह, पिछले 12 वर्षों से विधवा हैं। उनकी आंख का आॅपरेशन हो चुका है और वर्तमान में उन्हें आगे इलाज की आवश्यकता है। उनका पुत्र अनिल दास (36 वर्ष) दिव्यांग हैं और लकवे की बीमारी से पीड़ित हैं। बीमारी के कारण उन्हें चलने-फिरने, बोलने तथा बिस्तर से उठने में भी काफी कठिनाई होती है। उनका भी उपचार आवश्यक बताया गया है। परिवार की कुल मासिक आय लगभग 2,100 रुपये है। इसमें रामेति दासी को लाड़ली बहना योजना के तहत 1,500 रुपये तथा अनिल दास को पेंशन के रूप में 600 रुपये प्राप्त होते हैं। परिवार के पास खेती की जमीन, पशु, बैंक में बचत अथवा आय का कोई अन्य साधन नहीं है। अन्नपूर्णा मुहिम के तहत परिवार को आवश्यक राशन सामग्री प्रदान की गयी। इसमें 15 किलो आटा, 2.5 किलो चावल, 2 किलो चीनी, 2.5 किलो आलू, 2.5 किलो प्याज, विभिन्न प्रकार की दालें, काले चने, दूध पाउडर, अचार, सरसों तेल, साबुन, नमक, चाय पत्ती और मसाले शामिल थे। इसके अलावा मां और बेटे दोनों के लिए 2-2 जोड़ी कपड़े, गैस सिलेंडर, चारपाई, व कुर्सी भी उपलब्ध करायी गयी। सहायता मिलने से परिवार को दैनिक जरूरतों के लिए राहत मिली है।
ग्वालियर में दो जरूरतमंद परिवारों तक पहुंची मदद एबीएन सेंट्रल डेस्क (ग्वालियर)। आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे परिवारों के लिए समय पर मिलने वाली सहायता किसी संजीवनी से कम नहीं होती। इसी सेवा भावना के साथ संत रामपाल जी महाराज जी के मार्गदर्शन में संचालित अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के दो जरूरतमंद परिवारों को 31 अगस्त 2026 को नि:शुल्क राशन एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी गयी। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग प्रदान करना है, ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी जीवनयापन कर सकें। डबरा तहसील के जंगीपुरा निवासी 32 वर्षीय प्रीती कुशवाह के परिवार की स्थिति लंबे समय से संघर्षपूर्ण बनी हुई है। उनके पति का 8 वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। परिवार में उनकी तीन बेटियां हैं—16 वर्षीय पूर्वी, जो कक्षा 9वीं में अध्ययनरत है, भूमि कक्षा 8वीं और टिंकल कक्षा 6वीं में सरकारी विद्यालय में पढ़ रही हैं। परिवार की मासिक आय लगभग 3000 रुपये है, जिसमें 1500 रुपये लाड़ली बहना योजना से तथा करीब 1500 रुपये सिलाई कार्य से प्राप्त होते हैं। सीमित आय और स्थायी रोजगार के अभाव के कारण यह परिवार छोटे से कच्चे मकान में जीवन व्यतीत कर रहा है। इसी तरह ग्राम खड़बई, पोस्ट महाराजपुर निवासी 50 वर्षीय मीना जी भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। उनके पति का 10 वर्ष पहले निधन हो चुका है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद वह परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनके साथ 18 वर्षीय बेटी सम्मी वर्मा रहती हैं, जिन्हें आर्थिक परिस्थितियों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। परिवार की कुल मासिक आय लगभग 2100 रुपये है, जिसमें 600 रुपये वृद्धावस्था पेंशन और करीब 1500 रुपये माला बनाने के कार्य से प्राप्त होते हैं। परिवार के पास न तो खेती की जमीन है और न ही कोई अन्य स्थायी आय का साधन। 30़15 फीट के जर्जर मकान में यह परिवार अपना जीवन गुजार रहा है। दोनों परिवारों को अन्नपूर्णा मुहिम की जानकारी आसपास के लोगों के माध्यम से मिली। सूचना मिलने के बाद अन्नपूर्णा मुहिम के सेवादारों ने परिवारों की आर्थिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों का निरीक्षण किया और जरूरत को देखते हुए उन्हें राशन सहित दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी। संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहीम के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सहयोग देकर उनके जीवन में राहत और उम्मीद की नयी किरण पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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