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रायपुर में फिल्म सिटी के नाम पर हजारों पेड़ों की कटाई दुर्भाग्यपूर्ण : सुखदेव भगत
Published / 2026-10-28 21:46:04
रायपुर में फिल्म सिटी के नाम पर हजारों पेड़ों की कटाई दुर्भाग्यपूर्ण : सुखदेव भगत

लोहरदगा के कांग्रेस सांसद ने भाजपा पर बोला हमला एक तरफ एक पेड़ मां के नाम का नारा, दूसरी तरफ मां की गोद जैसी धरती को उजाड़ा जा रहा है - क्या यही है भाजपा का पर्यावरण प्रेम? एबीएन सेंट्रल डेस्क। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रस्तावित फिल्म सिटी के नाम पर हजारों हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को लेकर लोहरदगा लोकसभा के सांसद सह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर करारा प्रहार किया है। सांसद श्री भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फिल्म सिटी बनाने के नाम पर पेड़ों की कटाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। उन्होंने भाजपा के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा भाजपा का दोहरा चरित्र देखिये? एक तरफ बड़े-बड़े मंचों से एक पेड़ मां के नाम का नारा दिया जाता है, दूसरी तरफ फिल्म सिटी के नाम पर मां की गोद जैसी धरती को उजाड़ा जा रहा है। क्या भाजपा का पर्यावरण प्रेम सिर्फ भाषणों और तस्वीरों तक सीमित है? एक पेड़ मां के नामया फिर हजारों पेड़ सत्ता के नाम? सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि जब पेड़ काटे जा रहे हों, जंगल उजाड़े जा रहे हों और अपनी जमीन-जंगल बचाने के लिए आवाज उठाने वाले ग्रामीणों को ही हिरासत में लिया जा रहा हो, तब यह साफ हो जाता है कि भाजपा का पर्यावरण वाला नारा केवल एक राजनीतिक जुमला है। उन्होंने कहा विकास के नाम पर विनाश और विरोध करने वालों पर कार्रवाई, यही है भाजपा का कथित पर्यावरण प्रेम? श्री भगत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पर्यावरण और आदिवासियों के हक की लड़ाई में ग्रामीणों के साथ खड़ी है और इस विनाशकारी फैसले का पुरजोर विरोध करती है।

चक्रवात अर्नब को लेकर अलर्ट मोड में आपदा प्रबंधन विभाग
Published / 2026-10-27 23:22:50
चक्रवात अर्नब को लेकर अलर्ट मोड में आपदा प्रबंधन विभाग

चक्रवात अर्नब के संभावित असर और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड मेंटीम एबीएन, रांची। झारखंड में चक्रवात अर्नब के संभावित असर और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड में हैं। विभागीय मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर मौसम की संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके। स्कूलों को बंद रखने पर भी आपदा प्रबंधन विचार कर रहा है। 

झारखंड : चक्रवात अर्नब को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट
Published / 2026-10-27 17:50:36
झारखंड : चक्रवात अर्नब को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट

चक्रवाती तूफान के संभावित असर और भारी बारिश की आशंका को देख आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट टीम एबीएन, रांची। झारखंड में चक्रवात अर्नब के संभावित असर और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड में हैं। विभागीय मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर मौसम की संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए  हैं। ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके। स्कूलों को बंद रखने पर भी आपदा प्रबंधन विचार कर रहा है।

झारखंड : चक्रवाती तूफान से राज्यभर में बारिश के आसार
Published / 2026-10-26 20:37:10
झारखंड : चक्रवाती तूफान से राज्यभर में बारिश के आसार

चक्रवाती तूफान का असर : झारखंड में कब से शुरू होगी बारिश, जानिए मौसम का पूरा अपडेट टीम एबीएन, रांची। 26 अक्टूबर की मौसम रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना गहरा अवदाब पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और इसके चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) के बुलेटिन के अनुसार, 25 अक्टूबर की शाम 5:30 बजे इसका केंद्र 15.1 उत्तरी अक्षांश और 90.5 पूर्वी देशांतर पर था, जो विशाखापत्तनम से लगभग 820 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था। 26 अक्टूबर को चक्रवाती तूफान और 27 अक्टूबर तक गंभीर चक्रवाती तूफान बनने की आशंका जतायी गयी थी। अभी झारखंड के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि बारिश कब शुरू होगी और किन जिलों में इसका असर सबसे पहले देखने को मिलेगा। इसके लिए समुद्र में तूफान की स्थिति के साथ-साथ आईएमडी के जिला-वार मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी है। झारखंड में कब और कहां शुरू होगा असर? 26 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आईएमडी चेतावनियों और मौसम रिपोर्टों के आधार पर, झारखंड में 27 अक्टूबर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। 28 और 29 अक्टूबर को इसका असर अधिक व्यापक होने की आशंका है। 27 अक्टूबर : पूर्वी, दक्षिणी और मध्य झारखंड में पहले असर की संभावना राज्य के पूर्वी, दक्षिणी और आसपास के मध्यवर्ती जिलों में गरज-चमक, वज्रपात और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ कहीं-कहीं बारिश शुरू होने की संभावना है। 28 अक्टूबर : कई जिलों में बारिश का असर बढ़ने की आशंका रांची समेत राज्य के कई जिलों में बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। दक्षिणी और आसपास के मध्यवर्ती जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश तथा 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का खतरा जताया गया है। 29 अक्टूबर : उत्तर-पश्चिमी, दक्षिणी और मध्य झारखंड में असर इस दिन उत्तर-पश्चिमी, दक्षिणी और मध्य झारखंड में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी तेज हवाओं और वज्रपात का खतरा बना रह सकता है। 30 अक्टूबर : बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने की संभावना आईएमडी के राज्य-स्तरीय पूर्वानुमान के अनुसार, 30 अक्टूबर को भी भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी पर नजर रखना जरूरी होगा। वहीं, 31 अक्टूबर के लिए फिलहाल कोई चेतावनी दिखायी नहीं गयी है। किन जिलों पर रहेगी खास नजर 27 अक्टूबर : पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और आसपास के मध्यवर्ती इलाके। 28 अक्टूबर : रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम तथा दक्षिणी-मध्य क्षेत्र के अन्य जिले। 29 अक्टूबर : पलामू, गढ़वा, लातेहार सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र और दक्षिणी-मध्य झारखंड। यह जिला-वार सूची संभावित भौगोलिक असर के आधार पर तैयार की गयी है। इसे प्रत्येक जिले के लिए जारी आधिकारिक मौसम अलर्ट का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। सटीक जानकारी के लिए कटऊ का नवीनतम जिला-वार बुलेटिन देखना जरूरी है। फिलहाल क्या है मौसम का अनुमान? 26 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, झारखंड के लिए मुख्य असर 27 अक्टूबर से शुरू होकर 28 और 29 अक्टूबर को अधिक व्यापक हो सकता है। हालांकि, समुद्र में बने सिस्टम की दिशा और गति में बदलाव होने पर बारिश का समय, तीव्रता और प्रभावित जिलों में भी बदलाव हो सकता है।

झारखंड : 27 को बारिश के आसार, और बढ़ेगी ठंड
Published / 2026-10-24 21:49:26
झारखंड : 27 को बारिश के आसार, और बढ़ेगी ठंड

मौसम का मिजाज बदला: झारखंड में बढ़ने लगी ठंड, 27 अक्टूबर को बारिश के आसार टीम एबीएन, रांची। रांची समेत पूरे झारखंड में ठंड का असर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। सुबह और शाम कनकनी महसूस होने लगी है, जबकि कई इलाकों में सुबह के समय हल्का कोहरा और धुंध छा रही है। मौसम में आए इस बदलाव के बीच रांची का न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है।  मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों तक तापमान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन सुबह-शाम ठंड का एहसास बढ़ सकता है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, 22 और 23 अक्टूबर को रांची का न्यूनतम तापमान गिरकर 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं, अगले कुछ दिनों के दौरान अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। 24 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान 16 डिग्री और 25 अक्टूबर को 17 डिग्री सेल्सियस के करीब रह सकता है।  रात के तापमान में हो रही गिरावट मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की विदाई के बाद आसमान साफ रहने से रात के तापमान में गिरावट हो रही है। दिन में सूर्य की गर्मी से धरती की सतह गर्म होती है, लेकिन रात में आसमान साफ रहने के कारण धरती की गर्मी तेजी से बाहर निकल जाती है। इससे न्यूनतम तापमान में कमी आती है और सुबह-शाम ठंड का एहसास बढ़ जाता है। इसके अलावा, पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी का असर भी मौसम पर पड़ रहा है। इन परिस्थितियों के कारण झारखंड में ठंड की शुरूआती दस्तक महसूस होने लगी है। आने वाले दिनों में सुबह और रात के तापमान में गिरावट से कनकनी बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के पूवार्नुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक सुबह के समय धुंध और हल्का कुहासा छाया रह सकता है।  कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना  हालांकि, दिन चढ़ने के साथ आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। सुबह के समय धुंध के कारण कुछ इलाकों में द्दश्यता भी प्रभावित हो सकती है। वहीं, 27 अक्टूबर को राज्य के कुछ हिस्सों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूवार्नुमान के अनुसार, उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी झारखंड में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। सुबह के समय कुछ इलाकों में बादल और कुहासा छाए रह सकते हैं। फिलहाल राज्य में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है, लेकिन तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच सुबह और शाम ठंड का असर धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है।

टाटा जू में गूंजी बाघ के तीन शावकों की किलकारी, नामकरण के लिए सुझाव आमंत्रित
Published / 2026-10-14 22:05:00
टाटा जू में गूंजी बाघ के तीन शावकों की किलकारी, नामकरण के लिए सुझाव आमंत्रित

सुनैना ने दो मादा और एक नर शावक को दिया जन्म 19 अक्टूबर तक व्हाट्सऐप पर भेज सकेंगे नाम; विजेताओं को मिलेगा नि:शुल्क प्रवेश पास एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में बाघिन सुनैना ने 23 सितंबर की सुबह तीन शावकों को जन्म दिया। इनमें दो मादा और एक नर शावक है। चिड़ियाघर प्रबंधन ने बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए लोगों से तीनों शावकों के नाम सुझाने की अपील की है। शावकों के पिता रुद्र को नागपुर के गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर से लाया गया था। चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, शुरूआती देखभाल और निगरानी के बाद शावकों के जन्म की जानकारी सार्वजनिक की गई है। पहली बार मां बनी सुनैना से अनजाने में एक मादा शावक को चोट लग गई थी। पशु चिकित्सकों ने तत्काल उपचार कर घाव पर टांके लगाए। फिलहाल उसकी हालत में सुधार है।उसका वजन करीब 1.8 किलोग्राम है और वह खतरे से बाहर है। नर शावक का वजन 2.9 किलोग्राम और दूसरी मादा का वजन 2.53 किलोग्राम है। तीनों शावकों की सेहत पर डॉक्टर लगातार नजर रख रहे हैं। उनकी गतिविधियों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से भी की जा रही है। 19 अक्टूबर तक भेजें नाम चिड़ियाघर प्रबंधन ने लोगों से तीनों शावकों के लिए अलग-अलग नाम सुझाने को कहा है। सुझाव व्हाट्सऐप या संदेश के माध्यम से 9438291637 पर भेजे जा सकते हैं। नाम भेजने की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर है। चिड़ियाघर की टीम तीन सर्वश्रेष्ठ सुझावों का चयन करेगी। विजेताओं को नि:शुल्क प्रवेश पास और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य लोगों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना और चिड़ियाघर के नए सदस्यों के साथ उनका जुड़ाव बढ़ाना है।

दलमा वन्यजीव अभयारण्य में कॉटेज और गेस्ट हाउस पर वन विभाग को फटकार
Published / 2026-10-13 21:28:39
दलमा वन्यजीव अभयारण्य में कॉटेज और गेस्ट हाउस पर वन विभाग को फटकार

झारखंड: दलमा अभयारण्य में अवैध निर्माण पर केंद्रीय समिति सख्त, वन विभाग को लगायी फटकार एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। दलमा वन्यजीव अभयारण्य में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति के बिना कॉटेज और गेस्ट हाउस के निर्माण के मामले में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान समिति ने झारखंड वन विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए नियमों के उल्लंघन पर सवाल उठाये। समिति ने वन विभाग और पर्यटन विभाग को अपना पक्ष रखने के लिए ढाई सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है। दोनों विभागों के लिखित जवाब और शपथ पत्र मिलने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जायेगा। निर्माण कार्यों पर जतायी कड़ी आपत्ति सुनवाई के दौरान दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी वन विभाग की ओर से उपस्थित हुए। पीठ ने उनसे पूछा कि वन क्षेत्र में सरकारी राशि खर्च करने और निर्माण कार्य कराने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। समिति ने यह भी सवाल उठाया कि नियमों की अनदेखी कर निर्माण कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान वन विभाग और पर्यटन विभाग, दोनों में से किसी ने भी अपना लिखित जवाब या शपथ पत्र पेश नहीं किया। इस कारण समिति ने दोनों विभागों को अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया। मामले में याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा की ओर से अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने पक्ष रखते हुए निर्माण कार्यों पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने पीठ को बताया कि दलमा अभयारण्य के मकुलाकोचा और पिंड्राबेड़ा क्षेत्रों में पर्यटन विभाग की वित्तीय मदद से वन विभाग पर्यटक कॉटेज का निर्माण करा रहा है।याचिकाकर्ता के अनुसार, निर्माण से पहले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई और न ही वन संरक्षण कानून के प्रावधानों का पालन किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2020 में स्वीकृत दलमा अभयारण्य की प्रबंधन योजना के अध्याय आठ में नए कॉटेज के निर्माण का कोई प्रावधान नहीं है। याचिकाकर्ता ने समिति से दलमा अभयारण्य में चल रहे सभी कथित अवैध निर्माण कार्यों को तत्काल रोकने की मांग की है। साथ ही, बिना वैध अनुमति के विकास कार्यों को मंजूरी देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की सिफारिश करने का अनुरोध किया है। अभयारण्य क्षेत्र में निर्माण कार्य पहले ही रोक दिया गया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि वन विभाग और पर्यटन विभाग के लिखित जवाबों का अध्ययन करने के बाद ही मामले में अंतिम निर्णय लिया जायेगा।

प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ वन्यजीव सप्ताह 2026 का भव्य समापन
Published / 2026-10-07 21:22:05
प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ वन्यजीव सप्ताह 2026 का भव्य समापन

टीम एबीएन, रांची। वन्यजीव सप्ताह 2026 प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के संकल्प के साथ भव्य समापन समारोह संपन्न हुआ। वन्यजीवों एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा वन्यजीव सप्ताह 2026 जिसे 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक मनाया गया। जिसका दिनांक 7 अक्टूबर, 2026 को समापन समारोह पलाश हॉल, डोरंडा में आयोजित किया गया। सप्ताह भर चले विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।समापन समारोह की शुरुआत बच्चों द्वारा मनमोहक स्वागत गीत प्रस्तुत कर किया गया जिसने पूरे वातावरण को जीवंत कर दिया। सभागार में मौजूद अथितिगण एवं अन्य द्वारा बच्चों की मधुर प्रस्तुति की सराहना की गयी। इसके पश्चात बच्चों द्वारा वन्यजीवों एवं प्रकृति के संरक्षण पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता, प्राकृतिक आवासों के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी का प्रभावशाली संदेश दिया।  इसके बाद आरसीसीएफ एवं सीसीएफ वाइल्डलाइफ श्री एस. आर. नटेश-आईएफएस ने सभागार में उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए उन्होंने वन्यजीव सप्ताह के आयोजन को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।  कार्यक्रम में धरित्री कला केंद्र के छोटे बच्चों द्वारा आकर्षक नृत्य प्रस्तुति किया गया।  जिसे दर्शकों की खूब सराहना मिली।  बच्चों के नृत्य ने समारोह में उत्साह एवं उमंग का माहौल बना दिया। इसके बाद समापन समारोह के इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड आॅफ  फारेस्ट  फोर्स संजीव कुमार ने कहा कि वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य केवल एक सप्ताह तक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं था, बल्कि समाज में वन्यजीवों और प्रकृति के संरक्षण के प्रति स्थायी जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों द्वारा प्रस्तुत गीत, नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम यह दशार्ते हैं कि प्रकृति संरक्षण की भावना बचपन से ही विकसित की जानी चाहिए। आज के बच्चे ही कल के प्रकृति प्रहरी बनेंगे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आयोजन से जुड़े लोगों को बधाई देते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए जनभागीदारी को निरंतर मजबूत करने की आवश्यकता है और झारखंड की समृद्ध जैव-विविधता, वन और वन्यजीव हमारी अमूल्य प्राकृतिक विरासत हैं। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है और सामूहिक प्रयासों से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद सभी प्रतिभागियों एवं सभागार में उपस्थित सभी को संबोधित करते हुए  पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ एवं मुख्य वाइल्डलाइफ वार्डन रवि रंजन (आईएफएस) ने कहा कि प्रकृति हमारी विरासत है, वन्यजीव उसका अभिन्न हिस्सा हैं— प्रकृति बचेगी, वन्यजीव बचेंगे—तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा हमें मिलकर इसकी रक्षा करनी होगी। आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपनी प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध और संतुलित पर्यावरण छोड़ेंगे। इसके बाद वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे भाषण, एमसीक्यू, चित्रकला, ड्राइंग सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में बच्चों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, उनमे से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं विजेताओं को पुरस्कार एवं मेडल  देकर सम्मानित किया गया।

रांची : गेतलसूद में रिफॉर्म उत्सव के तहत किसान गोष्ठी सह जागरूकता अभियान
Published / 2026-10-07 21:01:49
रांची : गेतलसूद में रिफॉर्म उत्सव के तहत किसान गोष्ठी सह जागरूकता अभियान

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 6 अक्टूबर 2026 को इफको रांची के द्वारा रिफॉर्म उत्सव के तहत कृषक गोष्ठी का आयोजन अनगड़ा प्रखंड के गेतलसूद ग्राम में किया गया।  कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के तौर में झारखंड राज्य के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ शशिभूषण समदर्शी ने भाग लिया। इफको झारखंड के कृषि अनुभाग से संबित पात्रा। इफको रांची के कनीय क्षेत्र प्रबंधक सुशील कुमार, एसएफए कुलदीप कुमार के अलावा 60 स्थानीय कृषक बंधुओं ने भाग लिया। असंतुलित रसायनों के उपयोग से मिट्टी एवं पर्यावरण में हो रहे दुष्प्रभावों एवं उससे मानव शरीर में हो थी विकृतियों के बारे में विस्तार से बात किया गया। डॉ शशिभूषण समदर्शी ने किसानों एवं बिक्री केंद्र प्रभारियों को विकृत कृषि पद्धतियों से मिट्टी में जलवायु में हो रही क्षति के बारे में बताते हुए कहा कि असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग एवं कार्बनिक उर्वरकों के उपयोग की कमी के वजह से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ 0.5% से भी निचले स्तर में पहुंच गए हैं जिससे मिट्टी में उपयोगी सुक्ष्म जीव कम होते जा रहे हैं एवं किछुआ की भी खेत से खत्म होते जा रहे हैं। वर्तमान परिवेश में ये बहुत महत्वपूर्ण है कि किसान बंधु धान की पराली को न जलायें एवं इफको द्वारा बनाये जाने वाले बायोडकंपोजर का उपयोग करके, पराली से कंपोस्ट बनायें और मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ायें, जिससे मिट्टी को उर्वरक क्षमता बढ़ सके। उन्होंने मिट्टी को बचाने के लिए रासायनिक उर्वरकों की मात्रा को आधा करके नैनो उर्वरकों की उपयोग पर जोर दिया।उसकी संपूर्ण विधि को बताते हुए उन्होंने पौधों में आवश्यक विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका को क्रमवार तरीके से समझाया और बताया कि पारंपरिक यूरिया की उपयोग दक्षता केवल 30-35% तथा पारंपरिक डीएपी की उपयोग दक्षता मात्र 15-20% होती है। इसके असंतुलित उपयोग से फसलों में कई प्रकार के पोषण विकार उत्पन्न होते हैं। श्री पात्रा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पारंपरिक यूरिया एवं डीएपी की मात्रा को आधा करके नैनो उर्वरकों का उपयोग करने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके अंतर्गत 5-10 मिली नैनो डीएपी प्रति किलो बीज से बीज शोधन या 5 मिली नैनो डीएपी प्रति लीटर पानी से जड़ शोधन करने की सलाह दी गयी। साथ ही नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी को 4 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर धान में पहला छिड़काव 25-30 दिन तथा दूसरा छिड़काव 45-50 दिन पर करने से अच्छी उपज प्राप्त होने की जानकारी दी गयी। सुशील कुमार ने किसानों को विभिन्न फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा उन्होंने धान में लगने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके लक्षण और समाधान पर विस्तृत चर्चा की तथा इफको के अन्य उत्पादों जैसे नैनो जिंक, सागरिका, तरल कंसोर्टिया, जिंक सल्फेट मोनो और कैल्शियम नाइट्रेट की जानकारी भी दी। नैनो जिंक के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसका डोज 1 मिली प्रति लीटर पानी है। इसके प्रयोग से धान में खैरा रोग नहीं होता, अधिक कल्ले निकलते हैं, पत्तियां चौड़ी होती हैं तथा दानों का भराव अच्छा होता है, जिससे उपज में वृद्धि होती है। कंसोर्टिया के संबंध में उन्होंने बताया कि इसका उपयोग बीज उपचार, जड़ उपचार और मृदा उपचार के रूप में किया जा सकता है। यह जैविक खेती के लिए उपयुक्त है, जिससे रासायनिक खाद की खपत 15-20% तक कम होती है तथा उपज 10-20% तक बढ़ती है। साथ ही यह मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या को बढ़ाता है और खेती की लागत को कम करता है।

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