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Published / 2026-03-30 21:22:02
विश्व की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालता ईरान-इजराइल और अमेरिका युद्ध

ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध का दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर 

पश्चिम एशिया युद्ध के कारण होर्मुज और लाल सागर में व्यापार ठप होने से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है। अभी तक इसके समाप्त होने के आसार नहीं नजर आते। दोनों पक्षों ने ऐसी शर्तें रखी हैं जिन्हें पूरा करना उन दोनों के लिए लगभग नामुमकिन ही है। अमेरिका की 15 बिंदुओं वाली योजना में ईरान से ऐसी गारंटी मांगी गयी है जो उसे शत्रुतापूर्ण क्षेत्र में भविष्य के हमलों से बचाव करने में असमर्थ बना देगी। 

इसके जवाब में ईरान ने भी शर्तें रखीं, जैसे प्रतिबंध हटाना, नेतृत्व करने वालों की हत्याओं को रोकना और भविष्य में अमेरिकी आक्रामकता के खिलाफ गारंटी देना। पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये और सऊदी अरब द्वारा समझौता कराने के प्रयासों के बावजूद दोनों पक्षों का अड़ियल रवैया वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी आर्थिक बोझ डालने वाला है। पहले से ही एशियाई देश, जो पश्चिम एशियाई जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भर हैं, मुद्रास्फीति के प्रभाव और ईंधन की कमी से उत्पन्न कठिनाइयों को नियंत्रित करने के लिए जूझ रहे हैं, जिसका उनकी अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्त पर दीर्घकालिक प्रतिकूल असर पड़ेगा। 

उदाहरण के लिए, तेल विपणन कंपनियों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 10 रुपये प्रति लीटर कम करना, भारतीय सरकारी राजस्व को वार्षिक आधार पर 1.2 लाख करोड़ रुपये से 1.7 लाख करोड़ रुपये तक घटा सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए और अधिक कठिनाई सामने है, क्योंकि प्रतिशोधी हमलों की दोबारा शुरूआत और यमन के हूतियों द्वारा इजरायल के खिलाफ अप्रत्याशित आक्रामकता ने एक नया मोर्चा खोल दिया है। 

यह नया मोर्चा स्वेज नहर और लाल सागर होकर चलने वाले एक अन्य प्रमुख वैश्विक व्यापार मार्ग को खतरे में डाल सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री तेल और गैस व्यापार का एक चौथाई हिस्सा होता है और यह पश्चिम एशियाई जीवाश्म ईंधन उत्पादकों का मुख्य मार्ग है। अब तक ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में खनन और नाकेबंदी ने तेल की कीमतों को 73 डॉलर प्रति बैरल (बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड) से बढ़ाकर 110-119 डॉलर तक पहुंचा दिया है, साथ ही इसकी भारी कमी भी पैदा की है। पूर्वी एशिया पर इसका विशेष रूप से गंभीर असर पड़ा है क्योंकि 80 से 90 फीसदी कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से आते हैं।

सऊदी अरब ने नाकेबंदी का सामना करने के लिए अपने पूर्व-पश्चिम स्थलीय पाइपलाइन से लाल सागर के यनबू बंदरगाह तक तेल प्रवाह बढ़ाने की कोशिश की, जिससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ। लेकिन अब वह मार्ग भी खतरे में है। स्वेज नहर/लाल सागर दुनिया के कंटेनर यातायात का एक-तिहाई हिस्सा संभालता है, और दुनिया पहले ही 2023 और 2024 में हूती व्यवधानों का असर देख चुकी है। 

जहाजों को अफ्रीका के पश्चिमी तट से नीचे और केप आफ गुड होप के चारों ओर लंबा मार्ग लेना पड़ा, जिससे शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम सहित, तेजी से बढ़ गई और वैश्विक मुद्रास्फीति दबाव तथा आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और गहरा गया। यह लगातार स्पष्ट होता जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान की प्रतिक्रियाओं और क्षमताओं का गंभीर रूप से गलत आकलन किया है। 

ईरान के राजनीतिक और सुरक्षा नेतृत्व की हत्या ने भी उसे आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित नहीं किया। इसके विपरीत, उसने बार-बार अपने विरोधियों को चकमा देने वाले विभिन्न हथियारों का इस्तेमाल किया है। दुनिया के सबसे उन्नत हथियारों से एक महीने तक ईरान पर हमले करने के बावजूद, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि उसके मिसाइल भंडार और ड्रोन क्षमता का केवल लगभग एक-तिहाई ही नष्ट हुआ है। 

बाकी की स्थिति को लेकर वे अनिश्चित हैं। एक ऐसा देश जिसने ठीक इसी परिस्थिति के लिए योजना बनायी है और जिसे लंबे युद्ध और कठिनाइयों का अनुभव है, उसके लिए लंबा, असमान और थकाऊ युद्ध कोई नुकसान नहीं माना जाता। लेकिन अमेरिका और इजरायल के लिए सम्मानजनक निकास का रास्ता न मिलने से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावना लगातार दूर होती जा रही है।

Published / 2026-03-23 23:33:33
क्या सचमुच नॉर्मल हो रहे हैं ट्रंप!

  • क्या सचमुच नॉर्मल हो रहे हैं ट्रंप!
  • ट्रंप की एक पोस्ट और पलट गयी यूएस बाजार की तस्वीर
  • क्या भारतीय बाजार में सोमवार को होगी तेज शुरुआत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। तीन हफ्ते की तबाही के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथसोशल अकाउंट पर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को कम करने के संकेत दिये हैं। बस इतना ही काफी था और अमेरिकी शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स के मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग 900 बिलियन डॉलर की वृद्धि हुई। 

ग्लोबल बाजारों में भी हलचल मच गयी। अब भारतीय बाजार के एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोमवार को एशियाई और भारतीय बाजार फ्लैट से गैप-अप ओपनिंग दे सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह राहत टिकाऊ है या फिर ट्रंप का एक और व-टर्न बाजार को वापस पटखनी दे देगा?

Published / 2026-03-21 21:04:34
दावों के बीच बढ़ती ही जा रही खाड़ी देशों की जंग

  • ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर फिर बड़ा हमला, मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर 
  • नतांज परमाणु केंद्र शुरू से ही ईरान के दुश्मनों के निशाने पर रहा है। युद्ध के पहले हफ्ते में भी यहां हमला हुआ था, जिसमें कई इमारतों को नुकसान पहुंचा था 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मध्य पूर्व में चल रही जंग अब अपने चौथे हफ्ते में पहुंच चुकी है और हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। शनिवार को ईरान के सबसे अहम परमाणु संवर्धन केंद्र नतांज पर एक बार फिर हवाई हमला किया गया। इस हमले की पुष्टि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मिजान ने की है। एजेंसी के मुताबिक, राहत की बात यह है कि इस हमले के बाद किसी भी तरह के रेडिएशन (विकिरण) के रिसाव की कोई खबर नहीं है। 

नतांज परमाणु केंद्र शुरू से ही ईरान के दुश्मनों के निशाने पर रहा है। युद्ध के पहले हफ्ते में भी यहां हमला हुआ था, जिसमें कई इमारतों को नुकसान पहुंचा था। तब संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने कहा था कि रेडियोलॉजिकल खतरों की आशंका नहीं है। बता दें कि तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दूर स्थित यह वही जगह है जिसे जून 2025 में ईरान और इजरायल के बीच हुए 12 दिनों के युद्ध के दौरान भी इजरायली और अमेरिकी हमलों का सामना करना पड़ा था। 

ट्रंप के विरोधाभासी दावे और सैन्य घेराबंदी 

एक तरफ जहां युद्ध के मैदान में बारूद बरस रहा है, वहीं अमेरिका से मिल रहे संदेशों ने दुनिया को उलझन में डाल दिया है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को पूरा करने के करीब है और वह मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों को समेटने (वाइंडिंग डाउन) पर विचार कर रहे हैं। लेकिन जमीन पर हकीकत ट्रंप के दावों के उलट नजर आ रही है। अमेरिका एक तरफ कह रहा है कि वो मध्य पूर्व में अपने सैन्य अभियान कम करने पर सोच रहा है, लेकिन दूसरी तरफ वहां अपनी ताकत लगातार बढ़ा भी रहा है।

खबरों के मुताबिक, अमेरिका तीन नए युद्धपोत और करीब 2,500 अतिरिक्त मरीन सैनिक इलाके में भेज रहा है। इससे पहले भी इतनी ही संख्या में सैनिक प्रशांत क्षेत्र से यहां लाये जा चुके हैं, जिससे अब मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50,000 से ज्यादा हो गयी है। इसके साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस से इस युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर का अतिरिक्त बजट भी मांगा है। इससे साफ है कि फिलहाल यह लड़ाई जल्दी खत्म होती नहीं दिख रही। 

दुनिया भर के पर्यटन स्थलों पर हमले की धमकी 

ईरान ने अब इस लड़ाई को मध्य पूर्व से बाहर ले जाने के संकेत दिए हैं। ईरान के सैन्य प्रवक्ता जनरल अबुल फजल शेकरची ने चेतावनी दी है कि अब दुनिया भर में ईरान के दुश्मनों के लिए पार्क, पिकनिक स्पॉट और पर्यटन स्थल सुरक्षित नहीं रहेंगे। इस धमकी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है कि ईरान अब दबाव बनाने के लिए विदेशों में उग्रवादी हमलों का सहारा ले सकता है। ईरान के भीतर की स्थिति भी काफी धुंधली है।

सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने नौरोज (फारसी नववर्ष) के मौके पर एक लिखित संदेश जारी कर जनता के साहस की तारीफ की, लेकिन वे खुद लंबे समय से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिये हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायली हमले में मौत के बाद वे खुद भी घायल हुए थे। ईरान में भारी सेंसरशिप की वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वहां के परमाणु और सैन्य ठिकानों को असल में कितना नुकसान हुआ है और सत्ता की कमान इस वक्त किसके हाथ में है। 

महंगे तेल का संकट और पाबंदियों में ढील 

तीन हफ्तों से चल रही इस जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें जो युद्ध से पहले 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, अब 106 डॉलर के पार पहुंच गयी हैं। अमेरिका में शेयर बाजार गोता लगा रहे हैं और महंगाई आसमान छू रही है। इसी दबाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए उन ईरानी तेल जहाजों से प्रतिबंध हटा लिये हैं, जिन पर शुक्रवार तक तेल लोड हो चुका था। यह छूट 19 अप्रैल तक रहेगी। 

हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस कदम से तेल की सप्लाई में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होगी क्योंकि ईरान पहले से ही चोरी-छिपे तेल बेचता रहा है। इससे पहले अमेरिका ने रूस के तेल पर भी इसी तरह की अस्थायी छूट दी थी, जिसकी काफी आलोचना हुई थी। फिलहाल, युद्ध का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है; सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों पर भी लगातार ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया में ईंधन और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। लेबनान में भी इजरायली हमले जारी हैं, जहां अब तक 1,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

Published / 2026-03-17 21:22:03
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अस्पताल पर किया हवाई हमला, 400 से ज्यादा की मौत

  • अफगानिस्तान के अस्पताल पर पाकिस्तान के हवाई हमले में 400 लोगों की मौत 
  • पाकिस्तान ने पहले ही इन आरोपों से इनकार किया है। पाकिस्तान का कहना है कि काबुल और पूर्वी अफगानिस्तान में किये गये उसके हमलों में किसी भी नागरिक स्थल को निशाना नहीं बनाया 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हवाई हमले में 400 लोगों की मौत हो गयी। अफगानिस्तान सरकार के उप प्रवक्ता ने मंगलवार तड़के बताया कि अफगान राजधानी काबुल में नशा मुक्ति उपचार करने वाले एक अस्पताल पर पाकिस्तान के हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 400 हो गयी है। 

हामदुल्लाह फितरत ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सोमवार रात हुए इस हमले में अस्पताल का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया। उन्होंने बताया कि अब तक 400 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हुए हैं। फितरत के अनुसार, बचाव दल इमारत में लगी आग पर काबू पाने और मलबे से शव निकालने की कोशिश कर रहे हैं। 

हालांकि पाकिस्तान ने पहले ही इन आरोपों से इनकार किया है। पाकिस्तान का कहना है कि काबुल और पूर्वी अफगानिस्तान में सोमवार को किए गए उसके हमलों में किसी भी नागरिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया। अफगानिस्तान ने सोमवार को पाकिस्तान की सेना पर आरोप लगाया था कि उसने हवाई हमलों में काबुल के उस अस्पताल को निशाना बनाया, जहां नशे के आदी लोगों का इलाज किया जाता है। उस समय अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि हमले में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान ने स्थानीय मीडिया को दिये एक टेलीविजन इंटरव्यू में बताया कि ड्रग उपचार अस्पताल का लगभग पूरा ढांचा नष्ट हो गया है। अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद ने भी एक्स पर इस इंटरव्यू का वीडियो साझा किया। स्थानीय टीवी चैनलों पर दिखायी गयी फुटेज में दमकलकर्मी मलबे के बीच लगी आग बुझाने की कोशिश करते नजर आये। 

यह कथित हमला उस समय हुआ जब अफगान अधिकारियों ने बताया कि दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलीबारी हुई थी। इस गोलीबारी में अफगानिस्तान में चार लोगों की मौत हो गई। पड़ोसी देशों के बीच हाल के वर्षों की सबसे भीषण लड़ाई अब तीसरे सप्ताह में पहुंच गयी है। मुजाहिद ने पहले ही इस हमले की निंदा करते हुए कहा था कि यह अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि मरने और घायल होने वालों में अधिकांश लोग अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज थे। 

पाकिस्तान ने आरोपों को निराधार बताया 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि काबुल में किसी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि हमलों में काबुल और नंगरहार में सैन्य ठिकानों और आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। मंत्रालय के अनुसार ये ठिकाने पाकिस्तान के नागरिकों के खिलाफ हमलों के लिए इस्तेमाल किये जा रहे थे। 

मंत्रालय ने कहा कि हमले बेहद सटीक तरीके से किये गये ताकि किसी तरह का अतिरिक्त नुकसान न हो। साथ ही उसने अफगान प्रवक्ता के आरोपों को भ्रामक और गलत बताया। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का आह्वान किया। सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मिशन यूएनएएमए के कार्यकाल को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया। 

पकिस्तान का अफगनिस्तान पर बड़ा आरोप 

पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वहां की तालिबान सरकार पाकिस्तानी तालिबान और अन्य उग्रवादी संगठनों को सुरक्षित पनाह देती है, जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। काबुल इन आरोपों से इनकार करता है। 

इससे पहले अफगान अधिकारियों ने बताया था कि सोमवार को सीमा पर हुई गोलीबारी में दो बच्चों सहित चार लोग मारे गये और 10 अन्य घायल हो गए। अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के प्रवक्ता मुस्तघफर गुरबाज ने कहा कि पाकिस्तान से दागे गये मोर्टार गोले गांवों पर गिरे और कई घरों को नुकसान पहुंचा। 

दूसरी ओर पाकिस्तान ने कहा कि रविवार को अफगानिस्तान की ओर से दागा गया मोर्टार गोला उत्तर-पश्चिमी बाजौर जिले में एक घर पर गिरा, जिसमें एक परिवार के चार सदस्य मारे गए और दो अन्य घायल हुए। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान में ड्रोन हमले कर रेड लाइन पार कर दी है। इसके जवाब में पाकिस्तान वायुसेना ने सप्ताहांत में अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में उपकरण भंडारण और तकनीकी ढांचे पर हमले किये। 

काबुल में अफगानिस्तान के प्रशासनिक उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी ने कहा कि देश की संप्रभुता की रक्षा करना सभी नागरिकों का कर्तव्य है। उन्होंने हालिया पाकिस्तानी हमलों में नागरिकों की मौत पर दुख जताया और कहा कि यह युद्ध अफगानिस्तान पर थोपा गया है। यह संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ जब पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान ने सीमा पार हमले किये। इससे पहले कतर की मध्यस्थता में अक्टूबर में युद्धविराम हुआ था। 

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने रविवार को दावा किया कि पाकिस्तान की सेना ने 684 अफगान तालिबान लड़ाकों को मार गिराया है। हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक संख्या इससे कहीं कम है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि अफगान बलों ने 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है।

Published / 2026-03-16 21:54:34
कम होने का नाम ही नहीं ले रही कंगाल पाक की मुश्किलें

कंगाल पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, कमजोर टैक्स वसूली बनी गले की फांस, आईएमएफ ने रोका फंड 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईएमएफ अक्सर इस वित्तीय अंतर को कम करने के लिए बिजली दरें बढ़ाने पर जोर देता रहा है। लेकिन केवल दरें बढ़ाने से उस प्रणाली की समस्या हल नहीं होगी। पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच एक अरब डॉलर की किस्त जारी करने को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर ठप पड़ गयी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी वजह मौजूदा बजट की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल और टैक्स कलेक्शन का कम होना है। कराची के अखबार बिजनेस रिकॉर्डर के अनुसार, आईएमएफ ने एक बार फिर पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। आईएमएफ का कहना है कि राजस्व लक्ष्य हासिल होना मुश्किल दिखाई देता है। 

रिपोर्ट के कहा गया है कि यह चिंता जायज है। पाकिस्तान की टैक्स सिस्टम लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन करती रही है। देश का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात 9-10 प्रतिशत के आसपास ही अटका है, जो समान उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। कर दायरा सीमित है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और कर अनुपालन भी कमजोर है। 

टैक्स सिस्टम में सुधार की मांग 

दशकों से हर आईएमएफ कार्यक्रम में पाकिस्तान से कर प्रशासन सुधारने, कर आधार बढ़ाने और राजस्व लक्ष्य बढ़ाने की मांग की जाती रही है, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद नतीजे सीमित ही रहे हैं। औपचारिक क्षेत्र अभी भी कर का अधिकांश बोझ उठाता है, जबकि संपत्ति के बड़े हिस्से, खासतौर पर खुदरा कारोबार, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर बहुत कम कर लगता है या वे पूरी तरह व्यवस्था से बाहर हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, जिसे अक्सर जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत माना जाता है, काफी हद तक कर प्रणाली की पकड़ से बाहर है। 

राजस्व भी एक बड़ी समस्या 

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की वित्तीय समस्या केवल इतनी नहीं है कि सरकार बहुत कम राजस्व जुटाती है। उतनी ही बड़ी समस्या यह भी है कि सार्वजनिक क्षेत्र में भारी वित्तीय घाटा जारी है और इस पर निर्णायक सुधार नहीं हो पाए हैं। इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण घाटे में चलने वाले सार्वजनिक उपक्रमों से होने वाला लगातार नुकसान है। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) और पाकिस्तान स्टील मिल्स जैसी संस्थाओं ने वर्षों में भारी घाटा जमा किया है। 

इनकी देनदारियों का बोझ राष्ट्रीय खजाने पर पड़ता है, जिसे सब्सिडी, गारंटी और कर्ज पुनर्गठन के माध्यम से वहन किया जाता है। 
ये संस्थान मुख्य रूप से इसलिए जीवित हैं क्योंकि सरकारें इनके पुनर्गठन या निजीकरण से जुड़े राजनीतिक जोखिमों का सामना करने से हिचकती हैं। फिर भी इनके वित्तीय नुकसान हर साल सैकड़ों अरब रुपए तक पहुंच जाते हैं, जो चुपचाप सार्वजनिक संसाधनों को खत्म करते रहते हैं। 

एनर्जी सेक्टर पर भी बड़ा संकट 

रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि, अजीब बात यह है कि जहां आईएमएफ कार्यक्रम राजस्व लक्ष्यों पर बहुत जोर देते हैं, वहीं सार्वजनिक उपक्रमों में सुधार की तत्काल आवश्यकता उतनी मजबूत नहीं दिखाई देती। निजीकरण की योजनाएं धीमी गति से आगे बढ़ती हैं, पुनर्गठन की समय-सीमा बार-बार टलती है और घाटे में चल रही संस्थाओं को सरकारी वित्तीय सहायता मिलती रहती है। पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ा वित्तीय संकट मौजूद है। देश का सर्कुलर डेब्ट (बिजली व्यवस्था के भीतर बकाया भुगतान की जटिल श्रृंखला) कई लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। 

बिजली दरें बढ़ाने पर जोर 

आईएमएफ अक्सर इस वित्तीय अंतर को कम करने के लिए बिजली दरें बढ़ाने पर जोर देता रहा है। लेकिन केवल दरें बढ़ाने से उस प्रणाली की समस्या हल नहीं होगी जो अक्षमता और कमजोर प्रशासन से ग्रस्त है। बिजली वितरण कंपनियों के गहरे पुनर्गठन और बेहतर प्रबंधन के बिना यह सर्कुलर डेब्ट फिर से बढ़ जाता है। लेख में यह भी कहा गया कि एक अन्य पहलू जिस पर लगातार पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, वह है गैर-उत्पादक या अत्यधिक सार्वजनिक खर्च। 

केंद्र और प्रांतीय बजटों में अब भी भारी प्रशासनिक खर्च, गलत तरीके से दी जा रही सब्सिडी और राजनीतिक कारणों से शुरू की गई विकास योजनाएं शामिल हैं, जिनका आर्थिक लाभ सीमित होता है। लेख के अनुसार, वित्तीय अनुशासन केवल अधिक राजस्व जुटाने से हासिल नहीं हो सकता। इसके लिए यह भी जरूरी है कि सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जा रहा है, इसकी गंभीर समीक्षा की जाए।

Published / 2026-03-11 20:18:28
एआई में खरबों डॉलर निवेश की जरूरत: जेनसन हुआंग

एआई से इतिहास का सबसे बड़ा अवसंरचना निर्माण शुरू 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी एनवीडिया के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जेनसन हुआंग ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) मानव इतिहास में सबसे बड़े अवसंरचना निर्माण को गति दे रही है, जिसके लिए खरबों डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी और कुशल श्रमिकों की भारी मांग उत्पन्न होगी। हुआंग ने हाल ही में प्रकाशित एक ब्लॉग लेख में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) अब केवल एक साधारण अनुप्रयोग या एकल मॉडल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसे बिजली एवं इंटरनेट की तरह एक आवश्यक अवसंरचना के रूप में देखना चाहिए।  

उन्होंने लिखा, हमने अभी इस निर्माण की शुरूआत ही की है। अब तक इसमें कुछ सौ अरब डॉलर का निवेश हुआ है, जबकि अब भी खरबों डॉलर की अवसंरचना तैयार की जानी बाकी है। दुनिया भर में अभूतपूर्व स्तर पर चिप कारखाने, कंप्यूटर असेंबल संयंत्र और कृत्रिम मेधा (एआई) कारखाने बनाए जा रहे हैं। यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा अवसंरचना निर्माण बनता जा रहा है। 

हुआंग ने कृत्रिम मेधा (एआई) का पांच परतों वाले ढांचे के रूप उल्लेख किया जिसमें ऊर्जा, चिप, अवसंरचना, मॉडल और अनुप्रयोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा इसकी आधारभूत परत है और यह इस बात की प्रमुख सीमा तय करती है कि कोई प्रणाली कितनी बुद्धिमत्ता उत्पन्न कर सकती है। एनवीडिया प्रमुख ने कहा कि यह विशाल औद्योगिक बदलाव पारंपरिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र के बाहर भी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करेगा। 

उन्होंने कहा, इस निर्माण को समर्थन देने के लिए श्रम की जरूरत बहुत अधिक है। कृत्रिम मेधा (एआई) कारखानों को बिजली मिस्त्री, प्लंबर, पाइप फिट करने वाले कारीगर, इस्पात कर्मी, नेटवर्क तकनीशियन, संयोजन करने वाले कर्मचारी और संचालक चाहिए होंगे। ये सभी कुशल और अच्छे वेतन वाली नौकरियां हैं, जिनकी अभी कमी है। 

इस बदलाव में भाग लेने के लिए कंप्यूटर विज्ञान में पीएचडी करने की आवश्यकता नहीं है। हुआंग ने बताया कि कृत्रिम मेधा (एआई) ने पारंपरिक कंप्यूटिंग मॉडल को बदल दिया है, जो पहले संरचित आंकड़ों और सटीक प्रश्नों पर आधारित था। उन्होंने कहा, अब हर उत्तर नया होता है। हर जवाब आपके संदर्भ पर निर्भर करता है। यह ऐसा सॉफ्टवेयर नहीं है जो केवल संग्रहित निदेर्शों को पेश करे बल्कि यह मांग के अनुसार तर्क करके बुद्धिमत्ता प्रदान करता है। 

ब्लॉग में यह भी कहा गया कि पिछले वर्ष कृत्रिम मेधा (एआई) ने एक महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है क्योंकि मॉडल बड़े पैमाने पर अत्यधिक उपयोगी हो गये हैं और दवा खोज, लॉजिस्टिक, ग्राहक सेवा, सॉफ्टवेयर विकास तथा विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में वास्तविक आर्थिक मूल्य उत्पन्न कर रहे हैं। हुआंग ने मुक्त स्रोत मॉडल, विशेष रूप से डीपसीक-आर1 का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे अनुप्रयोग स्तर पर अपनाने की गति तेज हुई है जिसके परिणामस्वरूप अवसंरचना एवं ऊर्जा सहित पूरी कंप्यूटिंग प्रणाली में मांग बढ़ रही है।

Published / 2026-03-09 17:34:40
युद्ध रोको, नहीं तो $200 प्रति बैरल मिलेगा कच्चा तेल : ईरान

  • ईरान की बड़ी चेतावनी, युद्ध बढ़ा तो $200 प्रति बैरल तक जा सकता है कच्चा तेल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर एक कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि अगर उसके पड़ोसी देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अंकुश लगाने में विफल रहते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक प्रवक्ता ने सख्त लहजे में पड़ोसी देशों को संबोधित करते हुए कहा, यदि आप 200 डॉलर प्रति बैरल से अधिक की तेल कीमतों को सहन कर सकते हैं, तो इस खेल को जारी रखें। इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है।

इजरायल ने ईरान के 30 फ्यूल डिपो

रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को इजरायल ने ईरान के करीब 30 फ्यूल डिपो को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया। इस हमले के बाद तेहरान के कई इलाकों में भीषण आग लग गई और कई किलोमीटर दूर तक धुएं के गुबार दिखाई दिये। बताया जा रहा है कि इजरायल ने हमले की जानकारी पहले अमेरिका को दी थी लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमले का पैमाना उनकी उम्मीद से कहीं बड़ा था।

वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा असर

अमेरिका ने इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि अगर ईरान के ऊर्जा ढांचे पर इस तरह के हमले जारी रहे तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तेल से जुड़े ढांचे पर हमला होने से आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में तेजी आ सकती है।

इजरायल का कहना है कि जिन फ्यूल डिपो को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल ईरानी सेना और उससे जुड़े सैन्य ढांचे को ईंधन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता था। हालांकि इस हमले के बाद अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ऐसे हमले ईरान के अंदर सरकार के खिलाफ गुस्सा कम करने के बजाय लोगों को और अधिक एकजुट कर सकते हैं।

Published / 2026-03-06 20:51:59
ईरान और इजरायल युद्ध में सात दिनों में 1332 से ज्यादा की मौत

  • युद्ध के बीच ईरान में मचा कोहराम, 7 दिन में 1332 मौतें और 3000 घर हुए तबाह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान और इजरायल, अमेरिका के बीच युद्ध को आज सात दिन चुके हैं। इस युद्ध को लेकर खबर सामने आई है कि ईरान में मरने वालों की संख्या 1332 हो गई है, जबकि 3,000 से ज्यादा घर तबाह हुए हैं।

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