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Published / 2026-03-30 21:27:51
खाड़ी देशों में युद्ध से शेयर बाजार में हाहाकार

निवेशकों के डूबे लाखों करोड़ों, 5 बड़े कारणों से टूटा बाजार 

एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1,700 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 22,500 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। 

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1635.67 अंक (2.22%) गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक (2.14%) टूटकर 22,331.40 पर आ गया। इस गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपए घट गया यानि निवेशकों को 8 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। 

सभी सेक्टर दबाव में 

सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। एक्सिस बैंक के शेयरों में 3% से ज्यादा की गिरावट आई। ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 1.95% और स्मॉलकैप 2.31% गिरा। 

रुपये में गिरावट 

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार को रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर के पार पहुंच गया। यह अब तक का सबसे निचला स्तर है, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गयी है।

Published / 2026-03-21 21:05:32
क्या सचमुच घर खरीदना हुआ आसान!

7.10% से शुरू होम लोन दरें, जानें घर खरीदते समय कौन सा बैंक दे रहा सबसे सस्ता आॅफर 

मार्च 2026 में होम लोन दरें 7.10% से शुरू, जहां सरकारी बैंक सबसे सस्ते विकल्प दे रहे हैं और अन्य संस्थान प्रोफाइल के अनुसार अलग-अलग रेट आफर कर रहे हैं 

एबीएन बिजनेस डेस्क। मार्च महीने में होम लोन लेने की सोच रहे ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। देश के कई बैंकों में होम लोन की शुरूआती ब्याज दरें करीब 7.10 प्रतिशत से शुरू हो रही हैं। हालांकि, यह दर उधारकर्ता की प्रोफाइल, क्रेडिट स्कोर और लोन की राशि के आधार पर अलग अलग हो सकती है। यह जानकारी वित्तीय प्लेटफॉर्म के आंकड़ों से सामने आयी है। 

लोन राशि के अनुसार अलग अलग दरें 

अलग अलग बैंकों में लोन की राशि के हिसाब से ब्याज दरों में बदलाव देखा जा रहा है। 30 लाख रुपये तक, 30 से 75 लाख रुपये और 75 लाख रुपये से अधिक के लोन पर दरें अलग हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, स्टेट बैंक आॅफ इंडिया में सभी श्रेणियों में दरें लगभग 7.25 से 8.70 प्रतिशत तक हैं।  

होम लोन पर निजी बैंकों की दरें, शुरूआती रेट कम लेकिन ऊपरी सीमा ज्यादा 

मार्च महीने में होम लोन बाजार में निजी बैंकों की भी मजबूत मौजूदगी बनी हुई है। हालांकि इन बैंकों की शुरूआती ब्याज दरें सरकारी बैंकों के करीब हैं, लेकिन इनकी दरों में अंतर ज्यादा देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण जोखिम आधारित मूल्य निर्धारण है, जिसके तहत अलग अलग ग्राहकों के लिए ब्याज दरें उनके क्रेडिट प्रोफाइल के अनुसार तय की जाती हैं।

Published / 2026-03-19 18:27:04
खाड़ी देशों में युद्ध से संकट में शेयर बाजार

शेयर बाजार में सुनामी, 21 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, 11.62 लाख करोड़ डूबे 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार (19 मार्च) को बड़ी गिरावट देखने को मिली। 3 बजे के करीब सेंसेक्स 2579 अंक लुढ़क कर 74,125 के स्तर पर आ गया तो वहीं निफ्टी 813 अंक गिरकर 22,964 के स्तर आ गया। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 2496.89 अंक टूटकर 74,207.24 पर बंद हुआ। 

वहीं निफ्टी भी 775.65 अंकों की गिरावट के साथ 23,002.15 पर बंद हुआ। इसके साथ ही निफ्टी बैंक इंडेक्स भी करीब 2,000 अंक लुढ़क गया। यह पिछले 21 महीनों यानी जून 2024 के बाद से निफ्टी 50 की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इस तरह इरए में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज करीब 11.62 लाख करोड़ रुपये घटा है।  

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ा दबाव 

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है। ब्रेंट क्रूड करीब 5.7% बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसके साथ ही, एक प्रमुख छठॠ निर्यात सुविधा को नुकसान पहुंचने के बाद यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में 35% तक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गयी है, जिससे सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गयी है। 

सभी सेक्टर लाल निशान में 

बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिल रही है और सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट में हैं। आॅटो, फाइनेंस और रियल्टी जैसे रेट-सेंसिटिव सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में हैं, जो निवेशकों के रिस्क-आफ मूड को दर्शाता है। मेटल और आईटी सेक्टर भी कमजोरी में हैं, जबकि एफएमसीजी और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुए हैं, हालांकि इनमें भी गिरावट देखी जा रही है।  

निवेशकों के ?11.62 लाख करोड़ डूबे 

बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन आज घटकर 427.38 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो इसके पिछले कारोबारी दिन 439.00 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तरह बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज करीब 11.62 लाख करोड़ रुपए घटा है या दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों की संपत्ति में करीब 11.62 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आयी है।

Published / 2026-03-17 21:19:35
अदाणी एंटरप्राइजेज खरीदेगी जयप्रकाश एसोसिएट्स, एनसीएलटी से मिली मंजूरी

  • जयप्रकाश एसोसिएट्स ने कहा कि इस योजना में शेयरधारकों को कोई पैसा नहीं मिलेगा। कंपनी की संपत्ति का मूल्य इतना नहीं है कि कर्जदाताओं का पूरा पैसा चुकाया जा सके

एबीएन बिजनेस डेस्क। अदाणी एंटरप्राइजेज ने बताया कि नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए उसके समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। यह कर्ज में डूबी कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया में एक बड़ा कदम है। 

अदाणी एंटरप्राइजेज ने मंगलवार को बाजार बंद होने के बाद एक्सचेंज फाईलिंग में बताया कि यह मंजूरी 17 मार्च 2026 को मौखिक आदेश के जरिए दी गयी है। कंपनी ने कहा है कि लिखित आदेश आने के बाद पूरी जानकारी दी जायेगी। 

बता दें कि अदाणी एंटरप्राइजेज को पहले ही सफल बोलीदाता चुना जा चुका था। उसकी योजना को नवंबर 2025 में कर्जदाताओं की समिति ने मंजूरी दे दी थी। कंपनी ने कहा कि इस योजना को अदाणी एंटरप्राइजेज खुद, उसकी समूह कंपनियां या विशेष उद्देश्य वाली इकाइयों के जरिए लागू किया जा सकता है।

दूसरी ओर, जयप्रकाश एसोसिएट्स ने कहा कि इस योजना में शेयरधारकों को कोई पैसा नहीं मिलेगा। कंपनी की संपत्ति का मूल्य इतना नहीं है कि कर्जदाताओं का पूरा पैसा चुकाया जा सके। इसलिए शेयरधारकों के लिए बाहर निकलने की कीमत शून्य रखी गश्र है। 

जयप्रकाश एसोसिएट्स जयपी समूह की प्रमुख कंपनी है। कंपनी पर कुल 57,185 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके प्रमुख कर्जदाताओं में नैशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी भी शामिल है। कंपनी को जून 2024 में दिवालिया प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इस बीच, अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर मंगलवार को बीएसई पर मामूली गिरावट के साथ 1,975 रुपये पर बंद हुए। 

जयप्रकाश एसोसिएट्स को लेकर क्या है मामला? 

जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड, जिसे जेपी ग्रुप की प्रमुख कंपनी माना जाता है, सीमेंट, पावर, होटल, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट जैसे बिजनेस में सक्रिय है। यह कंपनी भारी कर्ज के चलते इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (कइउ), 2016 के तहत दिवालिया प्रक्रिया में शामिल की गई है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण इलाहाबाद बेंच ने 3 जून 2024 को इसे लेकर आदेश दिया था।

Published / 2026-03-13 18:12:06
शेयर बाजार धड़ाम, लगातार बिकवाली से चिंतित हैं निवेशक

  • बाजार धड़ाम; लगातार बिकवाली से निवेशक चिंता में

एबीएन बिजनेस डेस्क। पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण शुक्रवार को शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में भारी बिकवाली, विदेशी निधियों की लगातार निकासी और रुपये की कमजोरी ने भी निवेशकों के मनोबल को प्रभावित किया। बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 

लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज करते हुए, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान 1,579.82 अंक या 2 प्रतिशत गिरकर 74,454.60 पर आ गया। अंततः बेंचमार्क 1,470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,563.92 पर बंद हुआ। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ। 

रुपया 20 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 (अस्थायी) के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। तेज बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण से करीब 10 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल

सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से लार्सन एंड टुब्रो, टाटा स्टील, एसबीआई, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मारुति और अल्ट्राटेक सीमेंट प्रमुख रूप से पिछड़ने वाली कंपनियों में से थीं। हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारती एयरटेल को लाभ हुआ।

Published / 2026-03-11 20:20:04
खाड़ी देशों में वैश्विक तनाव से उबर नहीं पा रहा है शेयर मार्केट

वैश्विक तनाव से नहीं उबर पा रहा बाजार; सेंसेक्स 1342 अंक फिसला, निफ्टी 23900 से नीचे 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद एक दिन की राहत के बाद बुधवार को शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग दो प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा, विदेशी निधियों की निरंतर निकासी और ब्लू-चिप बैंक शेयरों की बिकवाली ने भी बाजारों को नीचे धकेल दिया। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 92.01 पर बंद हुआ। 

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,342.27 अंक या 1.72 प्रतिशत गिरकर 76,863.71 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इसमें 1,446.72 अंक या 1.84 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 76,759.26 पर पहुंचा। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 394.75 अंक या 1.63 प्रतिशत गिरकर 23,866.85 पर बंद हुआ।  

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल 

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, ट्रेंट, भारती एयरटेल और कोटक महिंद्रा बैंक प्रमुख रूप से पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। सन फार्मा और एनटीपीसी को लाभ हुआ। 

बाजार में सतर्कता बनी हुई है 

आनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि हालांकि मंगलवार को शेयर बाजारों में तकनीकी रूप से सुधार देखने को मिला, लेकिन अंतर्निहित भावना सतर्कता बनी हुई है क्योंकि पश्चिम एशिया में गहराता संकट ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान और निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति में बदलाव के माध्यम से वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित करना शुरू कर रहा है। 

उन्होंने आगे कहा कि इक्विटी बाजार के दृष्टिकोण से, इस तरह की भू-राजनीतिक उथल-पुथल से अस्थिरता के तीव्र दौर उत्पन्न होते हैं क्योंकि वैश्विक निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं और जोखिम-संवेदनशील बाजारों में अपना जोखिम कम करते हैं। लिवेलॉन्ग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट और संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि वैश्विक संकेत मिले-जुले बने हुए हैं क्योंकि निवेशक पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे तीव्र उतार-चढ़ाव पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। 

यूरोपीय बाजारों में दिखी गिरावट  

एशियाई बाजारों में, जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.43 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1.40 प्रतिशत चढ़ गया। शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक भी सकारात्मक दायरे में बंद हुआ, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ समाप्त हुआ। यूरोप के बाजारों में गिरावट देखी गयी। अमेरिकी बाजार मंगलवार को स्थिर रुख के साथ बंद हुआ। 

तेल की कीमतों में हुआ उछाल 

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक बेंचमार्क में तेजी आने से बुधवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमतें 460 रुपये बढ़कर 7,881 रुपये प्रति बैरल हो गयीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर, मार्च डिलीवरी के लिए कच्चे तेल की कीमत 460 रुपये या 6.2 प्रतिशत बढ़कर 7,881 रुपये प्रति बैरल हो गयी, जिसमें 16,930 लॉट का कारोबार हुआ। इसी प्रकार, अप्रैल अनुबंध में भी 462 रुपये या लगभग 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 7,833 लॉट में 7,815 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। 

ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 92.86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा 

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 5.76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 92.86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 4,672.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 6,333.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

Published / 2026-03-07 19:56:47
युद्ध का असर शुरू : घरेलू गैस सिलिंडर 60 रुपये महंगा हुआ

घरेलू एलपीजी की कीमत 60 रुपये बढ़ी, कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये महंगा 

एबीएन बिजनेस डेस्क। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत शनिवार, 7 मार्च से बढ़ा दी गयी है, जिससे देश भर में 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ गयी है। 

इसी तरह 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत भी आज से 115 रुपये बढ़ा दी गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कमर्शियल प्रतिष्ठानों जैसे बिजनेस पर असर पड़ा है। 

दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गयी है। मुंबई में घरेलू एलपीजी सिलेंडर का नया रेट अब 912.50 रुपये हो गया है जो पहले 852.50 रुपये था। 

इससे पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से ही स्थिर रही जब दिल्ली में बिना सब्सिडी वाला रेट 853 रुपये था। नवीनतम संशोधन घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उन कमर्शियल उपयोगकर्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है जो दैनिक कार्यों के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। 

यह बढ़ोतरी भारत की एनर्जी सप्लाई और फ्यूल की उपलब्धता पर चर्चा के बीच हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले भरोसा दिलाया था कि देश में एनर्जी की कोई कमी नहीं है। कंज्यूमर्स को सप्लाई में रुकावट की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

Published / 2026-03-06 21:07:00
आज फिर औंधे मुंह गिरा शेयर मार्केट

  • एक दिन की राहत के बाद आज फिर औंधे मुंह गिरा बाजार
  • इन 5 कारणों से आई भारी गिरावट

एबीएन बिजनेस डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 6 मार्च को फिर से गिरावट लौट आई। एक दिन की राहत के बाद बाजार दबाव में आ गया और कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1085 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,450 के नीचे फिसल गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। 

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स

1097.00 अंक यानी 1.37% की गिरावट के साथ 78,918.90 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 315.45 अंक या 1.27% टूटकर 24,450.45 के स्तर पर आ गया। 

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर किया है। इस संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने की आशंका बढ़ गई है, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बन सकता है।

कमजोर ग्लोबल संकेत

इसके अलावा एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स एक प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जिससे एशियाई बाजारों में दबाव का माहौल बना रहा।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली 

विदेशी संस्थागत निवेशक भी लगातार बिकवाली कर रहे हैं। गुरुवार को एफआईआई ने 3,752.52 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि मार्च महीने में अब तक करीब 16,000 करोड़ रुपये की बिकवाली हो चुकी है। इससे बाजार की धारणा और कमजोर हुई है।

कच्चे तेल में तेजी

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत गुरुवार को करीब 5% उछलकर 86.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो लगभग 20 महीनों का उच्च स्तर है। हालांकि शुक्रवार सुबह यह करीब 84.4 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। अगर ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाता है, तो इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।

बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

बैंकिंग शेयरों में भी आज भारी बिकवाली देखने को मिली। बैंक निफ्टी करीब 1% तक टूट गया, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी एक प्रतिशत से अधिक गिरावट में रहे। विश्लेषकों के अनुसार तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है और इसका असर बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन पर पड़ता है।

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