एबीएन सेंट्रल डेस्क (जमशेदपुर/ मुंबई)। देश की सबसे बड़ी निजी कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी खजाने में 2,16,472 करोड़ का योगदान दिया है। कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस राशि में टैक्स, ड्यूटी, लेवी और सरकार को किए गए अन्य भुगतान शामिल हैं।
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह योगदान 2,10,269 करोड़ था। इस प्रकार एक वर्ष में करीब 2.95 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच रिलायंस का यह योगदान देश की अर्थव्यवस्था में उसकी मजबूत भूमिका को दर्शाता है।
कंपनी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में उसका राष्ट्रीय कोष में कुल योगदान 15 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। वित्तीय वर्ष 26 में रिलायंस ने कुल 4,63,448 करोड़ की वैल्यू जोड़ी, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा सरकार के खाते में गया। कंपनी द्वारा बनायी गयी हर 100 की वैल्यू में से लगभग 47 सरकारी खजाने में पहुंचे।
सामाजिक दायित्वों के क्षेत्र में भी कंपनी ने अपना खर्च बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में रिलायंस ने सीएसआर गतिविधियों पर 2,248 करोड़ खर्च किये, जो पिछले वर्ष के 2,156 करोड़ की तुलना में 4.3 प्रतिशत अधिक है। कोविड महामारी के बाद से कंपनी का कुल सीएसआर खर्च 9,500 करोड़ से अधिक हो चुका है।
रिलायंस फाउंडेशन की सामाजिक पहलों से अब तक देशभर में 9.7 करोड़ से ज्यादा लोग लाभान्वित हुए हैं। फाउंडेशन ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, महिला सशक्तिकरण, पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में लगातार कार्य कर रहा है। कंपनी के अनुसार रिलायंस फाउंडेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम के तहत हर वर्ष 5,100 विद्यार्थियों को सहायता दी जा रही है। वहीं ग्रामीण परिवर्तन कार्यक्रम के जरिए किसानों की आय और उत्पादन में सुधार दर्ज किया गया है।
कंपनी ने कहा कि आने वाले वर्षों में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों को और विस्तार दिया जाएगा। वित्तीय वर्ष 26 के आंकड़े बताते हैं कि रिलायंस की कारोबारी वृद्धि का प्रभाव केवल उद्योग जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी राजस्व और सामाजिक विकास में भी उसकी अहम भूमिका है।
रिलायंस ग्रुप ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1 लाख से अधिक नयी भर्तियां की हैं। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर 4,19,911 हो गयी। कंपनी ने एआई, डेटा साइंस, आॅटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में नयी प्रतिभाओं को जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
रिलायंस ने कहा कि जामनगर में बन रहा धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स भविष्य में 2 लाख से ज्यादा ग्रीन जॉब्स पैदा करने की क्षमता रखता है। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कर्मचारियों पर 30,318 करोड़ खर्च किये, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक है।
लगातार छठे वर्ष कंपनी को ग्रेट प्लेस टू वर्क प्रमाणन मिला है। महिला भागीदारी में भी सुधार दर्ज किया गया है। नेतृत्व पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी 14.7 प्रतिशत और कमाई से जुड़े कार्यों में 30.6 प्रतिशत रही। जियो ने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए 11 भाषाओं में अक आधारित भर्ती प्लेटफॉर्म का उपयोग शुरू किया है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। आर्थिक उदारीकरण भारत के पारिवारिक स्वामित्व वाले व्यापारिक समूहों के लिए अनुकूल नहीं रहा है। वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में खुले बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थता ने तीखे आंतरिक झगड़ों को जन्म दिया, जिसके कारण प्रसिद्ध लाइसेंस राज के दिग्गज समूह बिखर गये। इनमें सिंघानिया, श्रीराम, मफतलाल कुछ प्रमुख नाम हैं।
यही हश्र बजाज समूह का भी हो सकता था, जिसने पिछले सप्ताह अपने 101वें वर्ष में प्रवेश किया। वर्ष 2002 और 2008 के बीच, तीसरी पीढ़ी के भाइयों के बीच सार्वजनिक कलह ने समूह के विभाजन और कमजोर होने का खतरा पैदा कर दिया था, ठीक उसी समय जब नए प्रतिस्पर्धी इसके मुख्य व्यवसायों के लिए खतरा बन रहे थे। लेकिन परिवार में आपसी विरोधियों की दूरदर्शिता का प्रमाण यह है कि अंतत: समझदारी (और जाहिर तौर पर गहरी पारिवारिक भावना) हावी हुई।
एक समझौते के तहत प्रमुख संपत्तियों को एक तरफ दिग्गज उत्तराधिकारी राहुल बजाज और उनके चचेरे भाइयों और दूसरी तरफ उनके छोटे भाई शिशिर और उनके बेटे कुशाग्र के बीच विभाजित किया गया और क्रॉस होल्डिंग्स को सुलझाने के लिए एक वित्तीय समझौता किया गया। राहुल बजाज गुट ने बजाज आॅटो और वित्त व्यवसाय को अपने पास रखा, जबकि उनके भाई ने उपभोक्ता वस्तुएं, चीनी व्यवसाय और रियल एस्टेट का कारोबार संभाला।
समूह के प्रमुख ब्रांडों का अपने-अपने क्षेत्रों में लगभग दबदबा बनाए रखना, इस विभाजित साम्राज्य की विरासत को संभालने वाली तीसरी और चौथी पीढ़ी की क्षमताओं का प्रमाण है। वर्ष 2025 के वार्षिक बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स हुरुन इंडिया मोस्ट वैल्यूएबल फैमिली बिजनेस रैंकिंग में बजाज समूह शीर्ष पांच में शामिल है, जो इसकी लगातार उच्च रैंकिंग है।
यह एक सराहनीय उपलब्धि है, क्योंकि वह रिलायंस (68 वर्ष), जिंदल (74 वर्ष) और एचसीएल (केवल 49 वर्ष) जैसे युवा समूहों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। शीर्ष पांच समूहों में, केवल एवी बिड़ला ही 169 वर्ष के साथ इससे पुराना है।
बजाज आॅटो प्रबंधकीय दक्षता और जोखिम लेने की क्षमता का एक अच्छा उदाहरण है जब राहुल बजाज द्वारा 1972 में पियाजियो के साथ अपना लाइसेंस समाप्त होने के बाद स्वदेशी चेतक स्कूटर लॉन्च करने का जोखिम उठाया गया। संरक्षित बाजार ने चेतक के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची सुनिश्चित की और उपभोक्ताओं से मिलने वाले अग्रिमों से जमा अधिशेष ने बजाज आॅटो को भारत की सबसे समृद्ध कंपनियों में से एक बना दिया।
राहुल बजाज के बेटे राजीव ने चेतक स्कूटर पर निर्भर रहने के बजाय, अपने पिता की असहमति के बावजूद इसे बंद करने का फैसला किया, जब उन्होंने देखा कि दोपहिया वाहनों का बाजार मोटरसाइकिलों की ओर बढ़ रहा है। यह जोखिम निश्चित रूप से सफल रहा (चेतक 2020 में ई-स्कूटर के रूप में वापस आया)।
बजाज फिनसर्व के अंतर्गत छोटे बेटे संजीव द्वारा संचालित बजाज फाइनैंस, भारत की सबसे बड़ी निजी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में उभरी है और 2022 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में इसकी केस स्टडी प्रकाशित हुई। बजाज हिंदुस्तान उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा चीनी और एथनॉल उत्पादक बना हुआ है।
प्रथम दृष्टया, बजाज समूह की प्रमुख कंपनियों की सापेक्ष स्थिरता और सफलता उन्हें भारतीय पारिवारिक व्यवसायों का आदर्श उदाहरण बनाती है। लेकिन बीते कल की मजबूती आने वाले कल की चुनौतियां बन सकती हैं। समूह का प्रबंधन सिद्धांत रूढ़िवादी बना हुआ है। समूह की कंपनियों का संचालन पेशेवरों द्वारा किया जाता है, लेकिन रणनीतिक निर्णय लेने का अधिकार परिवार के वंशजों के पास ही रहता है।
उदारीकरण से पहले के इसके मुख्य व्यवसाय सफल रहे हैं, लेकिन समूह इस दायरे से आगे नहीं बढ़ पाया है। निसान के साथ साझेदारी के माध्यम से कार बाजार में प्रवेश करना सफल नहीं रहा। ई-तिपहिया में इसका उद्यम सफल रहा है और इस सेगमेंट में इसका दबदबा है, लेकिन ई-दुपहिया बाजार में समूह को कम सफलता मिली है।
उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में, जहां बहुराष्ट्रीय ब्रांड प्रतिस्पर्धा करते हैं, बजाज इलेक्ट्रिकल्स की बाजार हिस्सेदारी नगण्य है। कहा जाता है कि कुछ ही व्यवसाय पांचवीं पीढ़ी से आगे टिक पाते हैं। इस प्रकार, बजाज की अगली पीढ़ी को समूह की अब तक की सबसे कठिन परीक्षा का सामना करना पड़ेगा।
एबीएन बिजनेस डेस्क। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गयी है। इस बार पेट्रोल की कीमत झारखंड में 90 पैसे और डीजल की कीमत में 87 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। नयी दर लागू होने के बाद रांची में पेट्रोल 101.71 रुपये प्रति लीटर और डीजल 96.68 रुपये प्रति लीटर हो गया है। हालांकि अलग-अलग पेट्रोल पंप कंपनियों में कुछ पैसों में अंतर देखा जा रहा है, लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
दरअसल, चार दिन पहले सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 3 रुपये और डीजल की कीमत में 3.14 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। उस समय रांची समेत पूरे झारखंड में पेट्रोल-डीजल की किल्लत शुरू हो गयी थी। कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिली थी और कई जगहों पर ईंधन खत्म होने की स्थिति बन गयी थी। करीब चार दिनों बाद हालात सामान्य हुए लेकिन अब फिर से कीमत बढ़ने से लोगों में नाराजगी है।
रांची के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर जब आम लोगों से बातचीत की गई तो उनके चेहरे पर झुंझलाहट साफ दिखायी दी। कई लोगों का कहना था कि लगातार बढ़ती कीमतों से आम आदमी की कमर टूट रही है लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। एक वाहन चालक ने कहा कि अब जो हो रहा है होने दीजिये, कुछ किया नहीं जा सकता। कम से कम पेट्रोल मिल तो रहा है, यही बड़ी बात है।
वहीं कुछ लोगों ने कहा कि महंगाई ने पहले ही घर का बजट बिगाड़ दिया है और अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से रोजमर्रा की जिंदगी और मुश्किल हो गयी है। खासकर नौकरीपेशा और रोजाना वाहन से सफर करने वाले लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि पिछली बार कीमत बढ़ने के बाद लोगों ने घबराहट में ज्यादा मात्रा में पेट्रोल-डीजल खरीदना शुरू कर दिया था, जिससे कई जगहों पर सप्लाई प्रभावित हुई थी। फिलहाल ईंधन की उपलब्धता सामान्य है लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों से ग्राहकों में असंतोष बना हुआ है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका प्रभाव परिवहन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लगातार बढ़ती कीमतों के बीच आम लोग अब राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा।
एबीएन बिजनेस डेस्क। बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार विभिन्न तरह के झटके झेल पाने में सक्षम हैं। श्री पांडेय ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में पैदा होने वाले संकट का असर अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष से तेल आपूर्ति शृंखला और कीमतें प्रभावित हुई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का जोखिम बढ़ा है। उन्होंने कहा, इस स्थिति का असर सभी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है और आगे चलकर इसके प्रभाव का प्रसार और परवर्ती प्रभाव भी देखने को मिलेंगे।
हालांकि, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख ने भारतीय बाजार की मजबूती पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह इस तरह के झटकों को समाहित कर लेता है और स्थिति सामान्य होने पर फिर से अपनी स्वाभाविक गति पकड़ लेता है। पांडेय ने यह भी स्वीकार किया कि सितंबर, 2024 के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) में कुछ निकासी देखी गयी है, लेकिन घरेलू निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।
उन्होंने कहा, वैश्विक स्तर पर बाजार आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए उतार-चढ़ाव की स्थिति होना स्वाभाविक है। पश्चिम एशिया में संघर्ष छिड़ने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल एवं गैस की आपूर्ति काफी हद तक बाधित हो गयी है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आपूर्ति पक्ष पर प्रतिकूल हालात पैदा होने की आशंका जतायी जा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने देश के ज्वेलरी कारोबार में हलचल बढ़ा दी है। हैदराबाद में रविवार को आयोजित एक रैली में पीएम मोदी ने नागरिकों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपनी रोजमर्रा की आदतों में बदलाव लाने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अगले एक साल तक शादी या अन्य समारोहों के लिए सोना खरीदने से बचें।
पीएम की इस अपील के बाद सर्राफा बाजार और ज्वेलरी उद्योग में चिंता बढ़ गयी है, क्योंकि भारत में शादियों के दौरान सोने की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। भारत में हर साल लगभग 40 से 50 लाख शादियां होती हैं और शादी के गहनों का कारोबार अरबों रुपए का माना जाता है। आमतौर पर एक शादी में 50 से 100 ग्राम तक सोने के आभूषण खरीदे जाते हैं।
यही वजह है कि देश में होने वाली कुल सोने की बिक्री का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा वेडिंग सीजन में होता है। उद्योग से जुड़े संगठनों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में केवल वेडिंग ज्वेलरी सेगमेंट में ही 2 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का कारोबार हो सकता है। ऐसे में पीएम मोदी की अपील से ज्वेलर्स को बिक्री में भारी गिरावट की आशंका सताने लगी है।
इसका असर शेयर बाजार में भी तुरंत दिखाई दिया। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गयी। टाइटन कंपनी, सेनको गोल्ड और अन्य गोल्ड स्टॉक्स में 10 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गयी। कारोबारियों का कहना है कि अगर लोग सोने की खरीद टालते हैं तो पूरे उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार की चिंता मुख्य रूप से बढ़ते आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर है। भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक सोना विदेशों से आयात करता है और इसका भुगतान डॉलर में किया जाता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच सरकार विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश कर रही है। हाल ही में देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार घटा है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। हर साल देश में 700 से 800 टन सोने की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन केवल 1 से 2 टन के आसपास है। लगातार बढ़ती कीमतों के बावजूद शादी के मौसम में सोने की मांग मजबूत बनी रहती है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि लोग पीएम मोदी की अपील को कितना गंभीरता से लेते हैं और इसका ज्वेलरी कारोबार पर कितना असर पड़ता है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी तथा वैश्विक अनिश्चितता के बीच बृहस्पतिवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में स्थानीय शेयर बाजार में मामूली गिरावट आयी। निवेशकों के सतर्क रुख के चलते सेंसेक्स 114 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी लगभग स्थिर रुख के साथ बंद हुआ। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स कारोबार के दौरान ऊपर-नीचे होने के बाद अंत में 114 अंक यानी 0.15 प्रतिशत टूटकर 77,844.52 अंक पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान एक समय यह 78,384.70 अंक के उच्चस्तर तक गया और 77,713.21 अंक के निचले स्तर तक आया। सेंसेक्स में 671.49 अंक का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वहीं 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 4.30 अंक यानी 0.02 प्रतिशत के मामूली नुकसान के साथ 24,326.65 अंक पर बंद हुआ।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध, संपत्ति प्रबंधन प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि भारतीय बाजार पूरे सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव में रहा। निफ्टी 24,326 अंक पर स्थिर रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी, कच्चे तेल के दाम के 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बने रहने, रुपये की कमजोरी तथा शांति वार्ता पर ईरान के रुख को लेकर असमंजस के बीच बाजार धारणा प्रभावित हुई।
सेंसेक्स के शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा, टाइटन, सन फार्मा और आईटीसी में गिरावट आयी। दूसरी ओर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा स्टील के शेयर लाभ में रहे। मझोली कंपनियों से संबंधित बीएसई मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 1.40 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि छोटी कंपनियों से जुड़ा स्मॉलकैप में 1.09 प्रतिशत की बढ़त रही।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शोध अजित मिश्रा ने कहा, बाजार में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, रुपये की स्थिरता, वैश्विक धारणा में सुधार और चुनिंदा शेयरों में लिवाली के चलते आशावाद का रुख कायम है। हालांकि, आगे चलकर भू राजनीतिक अनिश्चितता और संस्थागत निवेशकों का रुख बाजार को प्रभावित कर सकता है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.23 प्रतिशत के नुकसान के साथ 99 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
आॅनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा, भारतीय शेयर बाजार लगभग स्थिर रहे क्योंकि निवेशक अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। निफ्टी लगभग स्थिर रुख के साथ बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 5,834.90 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में 6 मई को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह में शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक अच्छी मजबूती के साथ खुले लेकिन कुछ ही घंटों ने बाजार ने अपनी ज्यादातर बढ़त गंवा दी। फिर, 2 बजे के बाद बाजार में जबरदस्त तेजी आई। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के जल्द डील की उम्मीद है। इस खबर से जहां मार्केट में रिकवरी आई वही क्रूड में बड़ी गिरावट दिखी।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 940.73 अंक यानी करीब 1.22 फीसदी चढ़कर 77,958.52 अंक पर आ गया। निफ्टी 298.15 अंक यानी 1.24 फीसदी चढ़कर अंक चढ़कर 24,330.95 के स्तर पर बंद हुआ। मंगलवार को अमेरिकी बाजार के प्रमुख सूचकांक अच्छी तेजी के साथ बंद हुए थे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। आज शेयर बाजार की शुरूआत लाल निशान पर हुई थी। सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में दिनभर तेज गिरावट रही। हालांकि कारोबार बंद होने से पहले मार्केट ने रिकवरी की।
सेंसेक्स 1151.22 अंक फिसल कर 76,345.14 पर आ गया, वहीं निफ्टी में 355.15 अंक की गिरावट आयी। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 582.86 अंक टूटकर 76,913.50 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 180.10 अंक गिरावट के साथ 23,997.55 के स्तर पर बंद हुआ।
मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया वीआइएक्स में उछाल ने मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत दिया तो निवेशक घबरा गये और ताबड़तोड़ शेयर बेचने लगे। इंडिया वीआइएक्स की बात करायी यह 5% से अधिक उछलकर 18 के पार चला गया।
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