टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के रातु रोड स्थित मधुकम इलाके में दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाये जाने से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जिनके घरों पर बुलडोजर चल रहा था। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के रातु रोड स्थित मधुकम इलाके में दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट द्वारा दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जिनके घरों पर बुलडोजर चल रहा था। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई।
इस संबंध में रौनक़ कुमार सरिता देवी एवं अन्य की ओर से हस्तक्षेप याचिका दायर कर दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस पूरे मामले में हेहल सीओ को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
टीम एबीएन, रांची। हाईकोर्ट ने रातु रोड स्थित मधुकम इलाके में दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट द्वारा दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाये जाने से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जिनके घरों पर बुलडोजर चल रहा था। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।
इस संबंध में रौनक़ कुमार, सरिता देवी एवं अन्य की ओर से हस्तक्षेप याचिका दायर कर दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस पूरे मामले में हेहल सीओ को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
टीम एबीएन, रांची। खादगढ़ा बस स्टैंड पर लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं में पुलिस ने एक संदिग्ध आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर लोअर बाजार थाने की पुलिस ने अर्जुन भोक्ता नामक आरोपी को पकड़ा, जिसके कब्जे से माचिस का डिब्बा और लाइटर बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में आरोपी पर जानबूझकर आग लगाने का शक है।
रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि 1 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे खादगढ़ा बस स्टैंड पर खड़ी छह बसों में अचानक आग लग गयी थी, जिसमें सभी बसें जलकर खाक हो गयी। इस घटना की जांच जारी थी, उसी दौरान 2 फरवरी को बस टर्मिनल के सामने खड़ी सीटी बस (जेएच 01 एएफ 6969) में फिर आग लग गयी। राहत की बात यह रही कि समय रहते आग बुझा ली गयी।
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल में एक संदिग्ध व्यक्ति का हाथ फुटेज में कैद हुआ। फुटेज में देखा गया कि बस में आग लगने से ठीक पहले वह व्यक्ति हाथ में कपड़ा लिये बस में घुसा और बाहर निकलते ही आग भड़क उठी। पुलिस ने आगे जांच की तो 1 फरवरी की घटना वाली पहली जलकर खाक हुई बस के पांच मिनट पहले भी यही व्यक्ति उसी बस के पास से गुजरता नजर आया।
इन सुरागों के आधार पर लोअर बाजार थाने में 3 फरवरी को कांड संख्या 31/2026 धारा 326(जी)/327(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। विशेष टीम ने छापेमारी कर आरोपी को उसके घर से दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी अर्जुन भोक्ता है, जो रांची के सिकिदरी का रहने वाला है। गिरफ्तार आरोपी के पास से एक माचिस का डिब्बा और एक लाइटर भी बरामद किया गया है।
रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि आरोपी को जिस समय पकड़ा गया वह अत्यधिक नशे में था या तो उसने शराब का नशा किया था या फिर डेंड्रॉइट का। सिटी एसपी के अनुसार, इस मामले में दर्जनों लोगों से पूछताछ की गयी है। लेकिन अंत में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएफ से जुड़े टैक्स नियमों को आसान और सरल बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। मंगलवार को जारी बयान में कहा गया कि ये बदलाव कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद होंगे, क्योंकि अब नियम एक जैसे और समझने में आसान हो जायेंगे।
पहले इनकम टैक्स के नियम और कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 में काफी फर्क था। खासकर प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट्स के लिए टैक्स छूट की पात्रता, निवेश के तरीके और एम्प्लॉयर के योगदान की सीमा अलग-अलग थी। इस वजह से कंपनियों और कर्मचारियों को काफी उलझन होती थी और कई बार अनावश्यक कानूनी झंझट भी बढ़ जाते थे।
बजट में अब नियम ये हैं कि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की स्केड्यूल क के तहत मान्यता पाने वाले प्रोविडेंट फंड्स को केवल तभी मान्यता मिलेगी जब उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट हासिल कर ली हो। धारा 17 के तहत कंपनियां मासिक ईपीएफ रिटर्न फाइल करने और कर्मचारियों के खातों को मेंटेन करने से छूट मांग सकती हैं। इसका मतलब है कि अब टैक्स छूट और कानूनी छूट एक ही आधार पर मिलेगी, जिससे दोहरी व्यवस्था खत्म हो जायेगी।
पहले इनकम टैक्स के नियमों में पीएफ फंड्स के निवेश का तरीका अलग था और सरकारी सिक्योरिटीज में 50% की सख्त सीमा लगी थी। अब ये सीमा हटा दी गई है। आगे निवेश के नियम पूरी तरह ईपीएफओ के फ्रेमवर्क और उससे जुड़े नियमों के हिसाब से होंगे। इससे पीएफ फंड्स को ज्यादा लचीलापन मिलेगा और वे बेहतर रिटर्न के लिए सही जगह निवेश कर सकेंगे।
अब एम्प्लॉयर का पीएफ में योगदान सालाना 7.5 लाख रुपये तक सीमित रहेगा। इस सीमा तक का योगदान टैक्स-फ्री होगा, लेकिन इससे ज्यादा होने पर अतिरिक्त राशि पर टैक्स लगेगा और उसे परक्विजिट माना जायेगा। पहले योगदान पर कुछ प्रतिशत वाली सीमाएं और एम्प्लॉयी-एम्प्लॉयर के बराबर योगदान की शर्तें थीं, जो अब हटा दी गई हैं।
ईपीएफओ ने कहा है कि बजट के इन बदलावों से पीएफ से जुड़े नियम अब पूरी तरह कानून के अनुसार हो गये हैं। इससे कर्मचारियों, कंपनियों और ट्रस्ट्स को राहत मिलेगी और झंझट कम होंगे। यह कदम रिटायरमेंट सेविंग्स को मजबूत और आसान बनाने के लिए बहुत अहम है।
टीम एबीएन, रांची। रांची की सड़कों पर मोडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न के जरिए लोगों को परेशान करने वालों पर रांची पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों से जब्त किये गये सैकड़ों मोडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न को प्रशासन ने रोड रोलर चलाकर नष्ट कर दिया।
बीते कुछ दिनों से रांची पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ट्रैफिक जागरूकता अभियान के तहत ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही थी, जिनमें प्रेशर हॉर्न और मोडिफाइड साइलेंसर लगाये गये थे। कार्रवाई के दौरान जब्त किये गये इन उपकरणों को शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से नष्ट किया गया, ताकि नियम तोड़ने वालों को कड़ा संदेश दिया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शौक और स्टाइल के नाम पर वाहन चालकों द्वारा ट्रैफिक नियमों की अनदेखी की जा रही थी, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
खासकर तेज और कर्कश आवाज वाले साइलेंसर और हॉर्न से शहर का माहौल प्रभावित हो रहा था। ग्रामीण एसपी प्रवीन पुष्कर ने बताया कि मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न लगाना मोटर वाहन अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि ऐसे उपकरणों से अत्यधिक डेसीबल की आवाज निकलती है, जो न केवल परेशान करने वाली होती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है।
पुष्कर ने लोगों से अपील की कि वे इस तरह के साइलेंसर और हॉर्न का इस्तेमाल न करें, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी। वहीं, रांची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने बताया कि हाल के दिनों में खासकर युवा वर्ग द्वारा प्रेशर हॉर्न और मोडिफाइड साइलेंसर का अधिक इस्तेमाल किया जा रहा था। यह न सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे सड़क पर चलने वाले आम लोगों को भी काफी दिक्कत होती है।
इसी को लेकर लगातार अभियान चलाया गया, जिसमें सैकड़ों साइलेंसर और हॉर्न जब्त किये गये। ट्रैफिक एसपी ने बताया कि आज डेमोंस्ट्रेशन के तौर पर इन सभी जब्त सामानों को नष्ट किया गया, ताकि यह साफ संदेश दिया जा सके कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।
टीम एबीएन, रांची। रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड पर स्थित कोयल नदी रेलवे पुल संख्या 115 में आयी तकनीकी खामी के बाद इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल के पिलर संख्या चार और पांच में दरार पाये जाने के बाद सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया।
मंगलवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ पुल का स्थलीय निरीक्षण किया। महाप्रबंधक विशेष निरीक्षण यान (स्पीक कोच) से लोहरदगा पहुंचे और कोयल नदी पुल पर करीब दो घंटे तक स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले पिलर संख्या पांच की मरम्मत को प्राथमिकता दी जायेगी। इसके बाद पिलर संख्या छह और सात को भी दुरुस्त किया जायेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार 15 फरवरी तक सॉइल टेस्टिंग का कार्य पूरा कर लिया जायेगा, ताकि मरम्मत कार्य में किसी तरह की तकनीकी कमी न रह जाये।
रेलवे का लक्ष्य है कि मार्च के अंतिम सप्ताह तक सीमित रूप में ट्रेनों का परिचालन फिर से शुरू कर दिया जाये, जबकि पुल की संपूर्ण मरम्मत और मजबूती का कार्य मई 2026 तक पूरा किया जायेगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा की है।
लोहरदगा स्टेशन से करीब सात किलोमीटर दूर इरगांव हॉल्ट तक मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन किया जायेगा। वहीं लोहरदगा से इरगांव तक यात्रियों के लिए बस सेवा उपलब्ध करायी जायेगी। इसके साथ ही लोहरदगा से टोरी के लिए कनेक्टिंग ट्रेन की व्यवस्था भी की जायेगी।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रांची से लोहरदगा के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन फिलहाल मार्च तक सस्पेंड रहेगा। अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मरम्मत कार्य के दौरान किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाया जायेगा।
पुल की मरम्मत के लिए तीन से चार तकनीकी टीमें 24 घंटे लगातार काम करेंगी। साथ ही भविष्य में कोयल नदी पर नये पुल के निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लातेहार। नालसा एवं झालसा के निर्देश पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार शेष नाथ सिंह के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, लातेहार ने नशा मुक्त भारत अभियान की शुरूआत सोमवार को प्रभात फेरी के साथ की।
प्रभात फेरी के दौरान जीवन को हां कहें-नशे को न कहें, नशा छोड़ो-जीवन जोड़ो, नशा मुक्त युवा-सशक्त भारत जैसे जागरूकता नारों के माध्यम से आमजन को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया। बैनर और तख्तियों के जरिए नशे के दुष्परिणामों तथा स्वस्थ जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार शेष नाथ सिंह ने कहा कि नशा समाज और राष्ट्र दोनों के लिए घातक है। इससे युवा पीढ़ी का भविष्य प्रभावित होता है। नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक कर नशे की लत से बाहर निकालना तथा एक स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त समाज का निर्माण करना है।
श्री सिंह ने कहा कि डालसा लातेहार लोगों को नषे के खिलाफ जागरूक एक बेहतर समाज का निर्माण कर नषा मुक्त झारखंड एवं नषा मुक्त भारत बनाने में अग्रीम भूमिका निभायेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करें। कार्यक्रम का समापन नशा न करने की शपथ के साथ किया गया।
मौके पर पीडीजे सह डालसा अध्यक्ष शेष नाथ सिंह, उपायुक्त सह डालसा उपाध्यक्ष उत्कर्ष गुप्ता, पुलिस अधीक्षक सह डालसा सदस्य कुमार गौरव, प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय सैयद सलीम फातमी, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीष प्रथम दिनेश कुमार मिश्रा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार दुबे, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय सुनिल दत्त द्विवेदी, सीजेएम विक्रम आनंद, एसीजेएम कुमारी जीव, सीनियर सिविल जज तृतीय सह न्यायिक दंडाधिकारी मीनाक्षी मिश्रा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव शिवम चौरसिया, अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी प्रणव कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सह प्रभारी न्यायाधीश उत्कर्ष जैन, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लाल अरविंद नाथ शाहदेव, बार के सचिव संजय कुमार, मुख्यालय डीएसपी संजीव कुमार मिश्रा के अलावा बार एसोसिएशन के सदस्य, पैनल अधिवक्ता, मध्यस्थकर्ता, लीगल ऐड डिफेंस कांसिल के अधिवक्ता, पारा लीगल वालंटियर्स, व्यवहार न्यायालय के कर्मचारी सहित जिला प्रसाशन के अधिकारी शामिल हुए। उक्त जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, लातेहार के सचिव ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नया साल 2026 कई अहम बदलावों के साथ शुरू होने जा रहा है। 1 जनवरी से टैक्स, बैंकिंग, ईपीएफओ, राशन कार्ड और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई नियमों में बदलाव देखने को मिल सकता है। ये बदलाव आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खर्चों पर सीधा असर डालेंगे।
अगर 31 दिसंबर 2025 तक पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं कराया गया, तो 1 जनवरी 2026 से पैन कार्ड निष्क्रिय हो सकता है। इसके बाद बैंकिंग, इनकम टैक्स रिटर्न, लोन, निवेश और बड़े लेनदेन में दिक्कत आ सकती है। साथ ही जुमार्ना भी देना पड़ सकता है।
नये साल में टैक्सपेयर्स के लिए राहत की उम्मीद है। सरकार नये इनकम टैक्स बिल के तहत टैक्स स्लैब और नियमों में बदलाव कर सकती है। इससे सैलरीड कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों और आम करदाताओं को फायदा मिलने की संभावना है।
1 जनवरी 2026 से बैंकिंग सेक्टर में भी नए नियम लागू हो सकते हैं। अब क्रेडिट स्कोर हर हफ्ते अपडेट होगा, जो पहले 15 दिन में होता था। इसके अलावा एसबीआई, पीएनबी और एचडीएफसी जैसे बैंकों ने लोन और एफडी की ब्याज दरों में बदलाव किये हैं, जिनका असर नये साल से दिखेगा।
नौकरीपेशा लोगों के लिए ईपीएफओ ने विड्रॉल नियमों को आसान कर दिया है। अब निकासी को तीन कैटेगरी में बांटा गया है : जरूरी जरूरतें, घर से जुड़ी जरूरतें और खास परिस्थितियां। इससे कर्मचारियों को यह समझना आसान होगा कि कब और कितना पैसा निकाला जा सकता है।
1 जनवरी के बाद राशन कार्ड से जुड़ी सुविधाएं पूरी तरह आनलाइन हो सकती हैं। नया राशन कार्ड बनवाना, नाम जोड़ना या हटाना और सुधार कराना अब घर बैठे किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 2026 खुशखबरी ला सकता है। उम्मीद है कि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू किया जा सकता है। शुरूआती अनुमानों के अनुसार, सैलरी और पेंशन में 20 से 35 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव है।
(नोट: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है। सभी बदलाव सरकार की अंतिम अधिसूचना और आधिकारिक ऐलान पर निर्भर करेंगे।)
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