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प्यार में बने संबंध बाद में दुष्कर्म नहीं माने जा सकते : सुप्रीम कोर्ट
Published / 2026-10-30 20:50:53
प्यार में बने संबंध बाद में दुष्कर्म नहीं माने जा सकते : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सहमति और धोखे पर कही बड़ी बात एक व्यक्ति को दुष्कर्म और धोखाधड़ी के आरोपों से बरी करते हुए यह टिप्पणी की एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने रिश्ता टूटने के बाद आपराधिक मामले दर्ज कराने के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए आज कहा कि मधुर संबंधों के दौरान बने यौन संबंध को बाद में सिर्फ इसलिए दुष्कर्म नहीं माना जा सकता कि संबंध खराब हो गये या टूट गये हैं। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि उन मामलों के बीच अंतर करना जरूरी है, जहां यौन संबंध बनाने की सहमति शुरू से ही कानूनी रूप से अमान्य होती है क्योंकि वह जानबूझकर धोखे और छल से हासिल की गयी होती है। साथ ही, जिन मामलों में कोई महिला रिश्ते के खत्म हो जाने के कारण, पूर्व में आपसी सहमति से किये गये कार्यों पर बाद में पछतावा महसूस करती है। पीठ ने केरलम के एक व्यक्ति को दुष्कर्म और धोखाधड़ी के आरोपों से बरी करते हुए यह टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में, एक मौजूदा रिश्ते के दौरान बने यौन संबंध को केवल इसलिए दुष्कर्म नहीं माना जा सकता कि बाद में वह रिश्ता खराब हो गया और अब टूट चुका है। बाद में इस तरह की चीजें अपने आप में दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इनके आधार पर आपसी सहमति से बनाये गये यौन संबंध को अपराध नहीं माना जा सकता, और न ही इस तरह से आपराधिक न्याय प्रणाली को आगे बढ़ाया जा सकता है कि आरोपी को अपनी स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा गंवानी पड़ जाये। न्यायालय ने कहा कि इस तरह का दृष्टिकोण पुरुष के निर्णय लेने की क्षमता को पूरी तरह खत्म कर देता है। ऐसा इसलिए होता है कि किसी समय आपसी सहमति से बने यौन संबंध के कारण, वह व्यक्ति भविष्य में दुष्कर्म का आरोप लगने के डर से पूरी तरह उसी रिश्ते में बंध कर रह जायेगा। ऐसी स्थिति में, क्या यह कहा जा सकता है कि पुरुष को रिश्ते से बाहर निकलने का कोई अधिकार नहीं है? क्या उसके इस फैसले को छल या धोखाधड़ी माना जा सकता है? बिल्कुल नहीं। पीठ ने कहा कि न्यायालय ने बार-बार एक चिंताजनक चलन देखा है, जिसमें असफल रिश्तों को आपराधिक मामलों में बदल दिया जाता है।न्यायालय ने आगाह करते हुए कहा कि दुष्कर्म का आरोप एक अत्यंत गंभीर अपराध है, इसलिए इसे केवल उन्हीं स्थितियों के लिए रखा जाना चाहिए जिनमें असल में यौन हिंसा हुई हो, जबरदस्ती की गयी हो या सहमति हासिल करने में छल किया गया हो। पीठ ने कहा कि जब आपसी सहमति से बने संबंध में खटास आने पर उसे दुष्कर्म के आरोप में बदल दिया जाता है, तो इससे कथित अपराध की गंभीरता कम हो जाती है, या यूं कहें कि अपराध का आरोप ही व्यर्थ हो जाता है। मामले के आरोपी संतोष कुमार एनपी ने केरल उच्च न्यायालय द्वारा उनकी आरोप मुक्त करने संबंधी याचिका खारिज किए जाने और उनके खिलाफ जारी कार्यवाही को रद्द करने की मांग संबंधी याचिका को अस्वीकार किये जाने के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने अपनी पहली शादी को छिपाकर उससे दूसरी शादी की, और धोखाधड़ी से की गई इस गैर-कानूनी शादी के आधार पर उसकी सहमति से उसके साथ यौन संबंध बनाये। वहीं, पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसे यह विश्वास दिलाकर कि उनकी शादी कानूनी रूप से वैध है, छल से उसके साथ यौन संबंध बनाये। यह भी आरोप है कि व्यक्ति ने अपनी पहली शादी के बरकरार रहने के दौरान ही उससे शादी की थी। महिला, जिसका अपने पहले पति से तलाक हो चुका है, ने आरोपी पर दुष्कर्म, धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया था। उसने दावा किया कि मैसूर में शादी करने के बाद, वे 1996 से 2003 तक साथ रहे।

धनबाद : अभिजीत हत्याकांड के तीन और आरोपी न्यायिक हिरासत में
Published / 2026-10-30 18:13:50
धनबाद : अभिजीत हत्याकांड के तीन और आरोपी न्यायिक हिरासत में

धनबाद पुलिस का एक्शन जारी, अभिजीत हत्याकांड के तीन और आरोपी न्यायिक हिरासत में अभिजीत हत्याकांड में धनबाद पुलिस की कार्रवाई तेज, तीन और आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गये धर्मवीर कुमार, अमित कुमार और शैलेन्द्र कुमार को सीजेएम कोर्ट में किया गया पेश; अब तक आठ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। झरिया के 24 वर्षीय अभिजीत सिंह हत्याकांड में धनबाद पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। शुक्रवार को पुलिस ने इस मामले में तीन और आरोपियों धर्मवीर कुमार (30), अमित कुमार (28) और शैलेन्द्र कुमार (26) को गिरफ्तार कर सीजेएम (उखट) न्यायालय में पेश किया। अदालत के आदेश के बाद तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पहले भी पांच आरोपी भेजे जा चुके हैं जेल इससे पहले पुलिस ने पहले दिन सूरज यादव और प्रशांत कुमार राउत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। इसके बाद दूसरे दिन शिवाकर, पंकज यादव उर्फ भालू और सुमित कुमार उर्फ सुकरू को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। शुक्रवार को तीन और आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। जन्मदिन की पार्टी के दौरान हुआ था विवाद गौरतलब है कि झरिया के राजबाड़ी रोड निवासी 24 वर्षीय अभिजीत सिंह की धनबाद के नवाडीह स्थित पाम इन होटल में जन्मदिन की पार्टी के दौरान हुए विवाद के बाद मौत हो गयी थी। परिजनों का आरोप है कि पार्टी में विवाद के दौरान अभिजीत के साथ मारपीट और जानलेवा हमला किया गया था। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और आरोपों की पुष्टि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी है। परिजनों को इंसाफ का इंतजारअभिजीत के पिता राजप्रकाश सिंह लगातार अपने बेटे को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। परिवार की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और इसमें शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाये। हत्याकांड में लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई के बीच अब जांच के निष्कर्ष और अदालत की आगे की कार्यवाही पर सबकी नजर है। न्यायिक हिरासत में भेजे गये आरोपियों को दोषी ठहराया जाना अभी बाकी है।

राज्य के सभी पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में हो : के रवि कुमार
Published / 2026-10-29 18:50:39
राज्य के सभी पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में हो : के रवि कुमार

टीम एबीएन, रांची। राज्य के प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए सीईओ के. रवि कुमार ने अहम निर्देश दिये। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड, के. रवि कुमार ने गुरुवार को राज्य के सभी प्रमंडलों के इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ईएलसी) के समन्वयकों एवं संबंधित पदाधिकारियों के साथ प्रमंडलवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। बैठक में विद्यालय स्तर पर मतदाता जागरूकता गतिविधियों को प्रभावी बनाने, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)- 2026 के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा युवा एवं अन्य पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए समन्वित प्रयासों पर चर्चा की गयी 5,535 ईएलसी गठित करने के लक्ष्य के विरुद्ध  4,461 ईएलसी गठित एवं एक्टिव मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि राज्य में 5,535 ईएलसी गठित करने के लक्ष्य के विरुद्ध  4,461 ईएलसी गठित एवं एक्टिव हैं, इनके कॉर्डिनेटर एवं जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी के बीच समन्वय स्थापित करते हुए सभी जिलों में मतदाताओं को जागरूक करने एवं मतदाता सूची में जोड़ने हेतु जागरूकता अभियान चलाए जा रहन है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक, जिसकी आयु 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूरी हो चुकी है और जो संबंधित मतदान केंद्र क्षेत्र का सामान्य निवासी है, उसका नाम नियमानुसार मतदाता सूची में शामिल होना सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र नागरिक पंजीकरण से वंचित न रहे। इसके लिए ईएलसी के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं और उनके परिवारों को मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया की सही जानकारी उपलब्ध करायी जाये। युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित हों उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक विद्यालय में मतदाता जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाए तथा एसआईआर अवधि के दौरान कम-से-कम प्रत्येक ईएलसी स्तर पर एक विशेष जागरूकता गतिविधि अवश्य संचालित की जाये। इन गतिविधियों का सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाये, ताकि अधिकाधिक लोगों तक मतदाता जागरूकता संबंधी संदेश पहुंच सकें और युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित हों। मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रेरित करने पर जोर के रवि कुमार ने ईसीआईएनईटी ऐप के माध्यम से पात्र युवा भारतीय नागरिकों को फॉर्म-6 एवं घोषणा पत्र भरकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईएलसी के पदाधिकारी एवं समन्वयक नागरिकों को आॅनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया समझायें तथा फॉर्म भरने में आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध करायें। साथ ही, एसआईआर एवं मतदाता सूची में नाम जोड़ने से संबंधित सही प्रक्रिया और पात्रता संबंधी प्रावधानों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचायी जाये, ताकि किसी प्रकार की भ्रामक सूचना या गलतफहमी की स्थिति उत्पन्न न हो। प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित उन्होंने मिस-इनफॉर्मेशन एवं फेक न्यूज के विरुद्ध तथ्यपरक जानकारी के प्रसार तथा मतदाता जागरूकता संबंधी संदेशों को सोशल मीडिया पर साझा करने की आवश्यकता भी बतायी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित की जा रही है और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी व्यक्ति का नाम इसमें शामिल नहीं किया जायेगा। बेहतर कार्य करने वाले ईएलसी होंगे सम्मानित  मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि 25 जनवरी को आयोजित राष्ट्रीय मतदाता दिवस के कार्यक्रमों में जिला स्तर पर मतदाता जागरूकता हेतु बेहतर कार्य करने वाले को जिला स्तरीय कार्यक्रम में एवं राज्य स्तर पर बेहतर कार्य करने वाले ईएलसी को राज्य स्तर के कार्यक्रम में सम्मानित किया जायेगा वहीं राज्य स्तर पर बेहतर कार्य करने वाले एछउ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर नई दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में राज्य से नॉमिनेशन के रूप में भेजा जायेगा।  बैठक में इन अधिकारियों की रही उपस्थिति बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज कुमार ठाकुर एवं अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सहित विभिन्न प्रमंडलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला परियोजना पदाधिकारी, सहायक जिला परियोजना पदाधिकारी, एछउ को-आॅर्डिनेटर एवं हेल्प डेस्क मैनेजर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

झारखंड : वर्षों से अनुपस्थित 631 डॉक्टर होंगे बर्खास्त
Published / 2026-10-27 17:34:48
झारखंड : वर्षों से अनुपस्थित 631 डॉक्टर होंगे बर्खास्त

कार्रवाई की तैयारी, सेवामुक्त करने की प्रक्रिया शुरूवर्ष 1990 से 2023 के बीच नियुक्त डॉक्टरों का मामलाकार्यस्थल पर योगदान नहीं देने और अनुपस्थित रहने वालों को किया जा रहा चिह्नित टीम एबीएन, रांची। झारखंड में वर्ष 1990 और उसके बाद के वर्षों में नियुक्त ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है, जिन्होंने नियुक्ति के बाद अपने कार्यस्थल पर योगदान नहीं दिया है या लंबे समय से अनुपस्थित हैं। विभागीय स्तर पर ऐसे 631 डॉक्टरों को चिह्नित किया गया है। विभाग इन मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार सेवामुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। विभागीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्षवार ऐसे डॉक्टरों की संख्या इस प्रकार है। वर्ष 1988 में नियुक्त 1 डॉक्टर, 1990 में नियुक्त 16 डॉक्टर, वर्ष 1997 में नियुक्त 2 डॉक्टर, वर्ष 2000 में नियुक्त 7 डॉक्टर, वर्ष 2009 में नियुक्त 308 डॉक्टर, वर्ष 2012 में नियुक्त 65 डॉक्टर, वर्ष 2013 में नियुक्त 38 डॉक्टर, वर्ष 2015 में नियुक्त 124 डॉक्टर, वर्ष 2020 में नियुक्त 37 डॉक्टर, वर्ष 2021 में नियुक्त 17 डॉक्टर तथा वर्ष 2023 में नियुक्त 16 डॉक्टर अपने निर्धारित कार्यस्थल पर नहीं पाये गये।ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ पूर्व में भी कार्रवाई की जा चुकी है। वर्ष 2025 में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से नियुक्त ऐसे 86 मेडिकल आॅफिसर और 57 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी गयी थी, जिन्होंने नियुक्ति के बाद योगदान नहीं दिया था। इस वर्ष भी 631 ऐसे डॉक्टरों को चिह्नित किया गया है, जिन्होंने नियुक्ति के बाद योगदान नहीं दिया है या अपने निर्धारित कार्यस्थल से अनुपस्थित हैं। स्वास्थ्य विभाग इन मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। विभागीय पहल के तहत रिक्त पदों पर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से नए डॉक्टरों की नियुक्ति करने की दिशा में भी कार्रवाई की जायेगी, ताकि सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को नियमित रूप से चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिले। नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं देना या बिना उचित कारण अनुपस्थित रहना गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी। जहां पद रिक्त होंगे, वहां नए डॉक्टरों की नियुक्ति की दिशा में भी कदम उठाये जायेंगे, ताकि मरीजों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। 

झारखंड हाईकोर्ट ने रिव्यू याचिका खारिज की
Published / 2026-10-24 09:32:22
झारखंड हाईकोर्ट ने रिव्यू याचिका खारिज की

नियुक्ति में कम अंक वालों को मौका मिलने का दावा साबित नहीं कर सके अभ्यर्थी, हाईकोर्ट ने रिव्यू याचिका खारिज की555 दिनों की देरी माफ करने का पर्याप्त कारण नहीं मिलासुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के करीब 16 महीने बाद दाखिल की थी समीक्षा याचिकाटीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी नागेंद्र नाथ परिहारी की समीक्षा याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने 555 दिनों की देरी माफ करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि देरी के लिए पर्याप्त कारण नहीं बताया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने का दावा भी याचिकाकर्ता दस्तावेजों के साथ साबित नहीं कर सके।अक्षेस के शपथ पत्र पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा- तत्काल दें नई जानकारीमामले में याचिकाकर्ता ने एकल पीठ के आठ जनवरी 2024 के आदेश के खिलाफ एलपीए संख्या 48/2024 दायर की थी। खंडपीठ ने 23 अप्रैल 2024 को अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की, जिसे 14 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया गया। इसके करीब 16 महीने बाद 17 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ता की ओर से देरी का कारण बताते हुए कहा गया कि कम अंक पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों को ईबीसी-I और बीसी-II श्रेणियों में नियुक्ति मिलने की जानकारी के बाद उन्हें दोबारा उम्मीद जगी। बीमारी और पूर्व अधिवक्ता से हलफनामे जुटाने में समय लगने का भी हवाला दिया गया।सांसद-विधायकों के खिलाफ मुकदमों को निपटाने के लिए झारखंड में पांच कोर्ट का गठनखंडपीठ ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति के दावे के समर्थन में न तो कोई दस्तावेज पेश किया गया और न ही यह बताया गया कि याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी कब मिली। बीमारी से संबंधित स्पष्टीकरण भी अस्पष्ट और सत्यापन योग्य नहीं पाया गया। सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से बताया गया कि पहले जिला स्तर पर चयन किया जाता था। अदालत ने चयन की उस पद्धति को निरस्त किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से अनुसूचित जिलों के अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को प्रभावित नहीं करने के लिए सीमित संरक्षण दिया था।संविदा पर बहाली के मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगा जवाबखंडपीठ ने कहा कि देरी माफी के आवेदन पर विचार करते समय मामले के गुण-दोष में विस्तार से जाना उचित नहीं है। हालांकि, उपलब्ध आदेशों के आधार पर याचिकाकर्ता का मजबूत प्रथमदृष्टया मामला भी स्पष्ट नहीं हुआ। अदालत ने देरी माफी का आवेदन खारिज कर दिया। इसके साथ ही समीक्षा याचिका भी निष्प्रभावी होने के कारण निष्पादित कर दी गई।

कतरास मेले में हुड़दंग करने वाले 16 युवक पकड़े गये
Published / 2026-10-23 15:30:23
कतरास मेले में हुड़दंग करने वाले 16 युवक पकड़े गये

धनबाद : कतरास थाना प्रभारी प्रवीण कुमार की अगुवाई में त्वरित कार्रवाई, मेले की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस मुस्तैदकतरास : कर्तव्यनिष्ठ थाना प्रभारी प्रवीण कुमार का सख्त रुख, कतरास मेले में हुड़दंग करने वाले 16 युवक पकड़े गएकतरास मेले में अशांति फैलाने वालों की खैर नहीं, प्रवीण कुमार के नेतृत्व में पुलिस की बड़ी कार्रवाईमेले की शांति से खिलवाड़ करने वालों पर कतरास पुलिस का शिकंजा, 16 युवकों को पकड़कर थाने लाई पुलिसएबीएन न्यूज नेटवर्क, कतरास (धनबाद)। मेला क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कतरास पुलिस पूरी तरह सतर्क है। इसी क्रम में थाना प्रभारी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हुड़दंग करने वाले 16 युवकों को पकड़कर थाने लाया। पुलिस की इस कार्रवाई को मेला क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखने और असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेला क्षेत्र में कुछ युवक आपस में लड़ाई-झगड़ा कर अशांति फैलाने और विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कतरास पुलिस ने तत्परता दिखाई और मौके पर कार्रवाई करते हुए सभी 16 युवकों को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया।प्रवीण कुमार की अगुवाई में पुलिस की सक्रियतामेला जैसे सार्वजनिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है। थाना प्रभारी प्रवीण कुमार की अगुवाई में कतरास पुलिस की सक्रियता इसी जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पुलिस का प्रयास है कि मेले में आने वाले लोगों को सुरक्षित वातावरण मिले और किसी भी तरह की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। पुलिस की तत्परता से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग, मारपीट और शांति भंग करने जैसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।BNSS की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाईपुलिस के अनुसार, पकड़े गए सभी 16 युवकों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की सुसंगत धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मेला क्षेत्र में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को रोकना है।शांति भंग करने वालों को पुलिस की स्पष्ट चेतावनीकतरास पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मेले में शांति व्यवस्था बिगाड़ने, लड़ाई-झगड़ा करने या आम लोगों की सुरक्षा को प्रभावित करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।थाना प्रभारी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में पुलिस की सतर्कता और कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली से मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों को बल मिला है। पुलिस प्रशासन का जोर इस बात पर है कि श्रद्धालु और आम नागरिक बिना किसी भय या परेशानी के मेले में शामिल हो सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों समेत सभी लोगों के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल को मौलिक अधिकार बताया
Published / 2026-10-17 21:55:21
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों समेत सभी लोगों के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल को मौलिक अधिकार बताया

सी-सीम से निपटने के लिए डेटाबेस बनाने का निर्देश एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों समेत हर व्यक्ति के लिए इंटरनेट तक पहुंच और उसके इस्तेमाल को मौलिक अधिकार घोषित करते हुए केंद्र सरकार को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (सी-सीम) की पहचान कर उसे हटाने के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने का निर्देश दिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सोशल मीडिया खातों के लिए चाइल्ड मोड शुरू करने का सुझाव भी दिया। इसके तहत माता-पिता की सहमति, मार्गदर्शन और निगरानी पर विशेष जोर देने की बात कही गई। अदालत ने कहा, हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत इंटरनेट तक पहुंच और उसके इस्तेमाल का अधिकार हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। हमारे बच्चों को भी, उनकी उम्र चाहे जो हो, वही अधिकार प्राप्त हैं। उन्हें इस अधिकार से पूरी तरह वंचित करना उतना ही अतार्किक होगा, जितना यह कहना कि एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों की अंतरात्मा ऐसी नहीं है, जिसकी रक्षा की जानी चाहिए, या उनके पास अभिव्यक्ति की ऐसी स्वतंत्रता नहीं है, जिसे व्यक्त करने का अवसर मिलना चाहिए। हमारे बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं। अदालत ने ये टिप्पणियां जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस (जेआरसीए) एवं अन्य बनाम एस. हरीश एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान कीं। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों का भारत का सबसे बड़ा नेटवर्क है। जेआरसी 300 से अधिक संगठनों के साथ मिलकर बाल यौन शोषण, चाइल्ड ट्रैफिकिंग और बाल विवाह के खिलाफ काम करता है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इंटरनेट बच्चों के लिए अभी सुरक्षित जगह नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियां हानिकारक सामग्री की पहचान कर उसे हटाने में विफल रहती हैं, तो इसकी सजा बच्चों को इंटरनेट से दूर रखकर नहीं दी जा सकती। ऐसा करना पीड़ित को ही समस्या मान लेने जैसा होगा। अदालत ने सी-सीम की पहचान करने और उसे हटाने के लिए राष्ट्रीय हैश एवं यूआरएल सूची डेटाबेस स्थापित करने का निर्देश दिया। उसने कहा कि डेटाबेस में किसी भी सामग्री को शामिल करने से पहले कई स्तरों पर उसकी पुष्टि की जानी चाहिए।अंतिम जांच कम से कम तीन प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा की जाए, जो स्वतंत्र रूप से यह तय करें कि संबंधित सामग्री सी-सीम की श्रेणी में आती है या नहीं। डेटाबेस में दर्ज प्रत्येक प्रविष्टि का इस्तेमाल डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियां अपनी वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री का मिलान करने और उससे मेल खाने वाली सामग्री को हटाने के लिए करेंगी। कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल कर डेटाबेस में दर्ज सामग्री से मेल खाने वाली अन्य सामग्री की पहचान करेंगी, उसका पता लगाएंगी और उसे हटायेंगी। यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म को डेटाबेस में दर्ज किसी प्रविष्टि से मेल खाने वाली सामग्री मिलती है, यानी ऐसी सी-सीम सामग्री जिसका स्रोत पहले से ज्ञात है, तो उसे बिना किसी अतिरिक्त पुष्टि की प्रतीक्षा किए तत्काल निष्क्रिय कर हटाना होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय समय-समय पर इन दिशा-निदेर्शों और मानक संचालन प्रक्रियाओं में संशोधन करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस उद्देश्य से दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करने के साथ-साथ कानून में जरूरी संशोधन करने का भी निर्देश दिया। सोशल मीडिया अकाउंट के लिए चाइल्ड मोड शुरू करने के सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके तहत बच्चों के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से निजी रखे जा सकते हैं। अनजान वयस्कों की ओर से संपर्क करने और संदेश भेजने पर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। इसके अलावा, बच्चों को दिखाई जाने वाली विज्ञापन सामग्री और अन्य कंटेंट पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है। ऐसे उपाय कम उम्र के बच्चों, विशेषकर किशोरावस्था से पहले के बच्चों, के लिए लागू किए जा सकते हैं। इसके लिए माता-पिता की सहमति की पुष्टि के उचित और उचित तरीके अपनाए जाने चाहिए। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों, राष्ट्रीय एवं राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों तथा अन्य संबंधित पक्षों को भी निर्देश दिया कि वे बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के तरीके सिखाने के लिए कदम उठायें। बच्चों को आॅनलाइन अपनी निजी जानकारी और निजता की सुरक्षा करना सिखाया जाये। साथ ही, उन्हें बहला-फुसलाकर शोषण के जाल में फंसाने, यौन शोषण के लिए ब्लैकमेल करने और इस तरह की अन्य शोषणकारी एवं दुर्व्यवहारपूर्ण गतिविधियों के संकेत पहचानने के बारे में जागरूक किया जाये। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का ने कहा कि सरकार के सहयोग से भारत अब बच्चों की आॅनलाइन सुरक्षा के लिए दुनिया के सबसे मजबूत ढांचों में से एक तैयार कर सकता है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप दिया है। इसमें सामग्री को तत्काल हटाना, दो घंटे के भीतर पुलिस को इसकी सूचना देना, समर्पित शिकायत अधिकारियों की नियुक्ति और शिकायत दर्ज कराने के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस की ओर से पेश अधिवक्ता रचना त्यागी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के अपने फैसले की बात को सबसे स्पष्ट शब्दों में दोहराया है। बच्चों की सुरक्षा के मामले में कोई भी प्लेटफॉर्म, चाहे वह कितना ही बड़ा या ताकतवर क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। अदालत ने साफ कर दिया है कि बाल यौन शोषण सामग्री को चुपचाप हटा देना ही पर्याप्त नहीं है। पॉक्सो कानून के तहत इसकी सूचना पुलिस को देना अनिवार्य है। कानूनी संरक्षण की आड़ में चुप्पी साधने की छूट नहीं मिल सकती। इस खबर से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

धनबाद : दुर्गा पूजा में 17 से 21 अक्टूबर तक इन रास्तों पर रहेगी रोक
Published / 2026-10-14 19:59:12
धनबाद : दुर्गा पूजा में 17 से 21 अक्टूबर तक इन रास्तों पर रहेगी रोक

दुर्गा पूजा पर ट्रैफिक का बड़ा बदलाव! निकलने से पहले जान लें एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। जिले में दुर्गा पूजा के दौरान इस बार ट्रैफिक व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किये गये हैं। 17 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक शहर के प्रमुख रास्तों पर वाहनों के परिचालन, नो एंट्री और वन-वे को लेकर विशेष निर्देश जारी किये गये हैं। सबसे जरूरी बात! दोपहर 3 बजे से सुबह 5 बजे तक आॅटो, ई-रिक्शा और छोटे सवारी वाहनों के परिचालन पर कई मार्गों में पाबंदियां रहेंगी। वहीं, यात्री बसों के लिए दोपहर 2 बजे से सुबह 5 बजे तक शहरी क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। बसों को निर्धारित वैकल्पिक रास्तों से चलना होगा। इन रास्तों पर खास ध्यान दें    सरायढेला थाना मोड़ से स्टील गेट की ओर नो एंट्री। कोलाकुसमा से स्टील गेट की ओर नो एंट्री। बरमसिया पुल से मनईटांड़ और झारखंड मैदान की ओर नो एंट्री। विनोद बिहारी चौक से बेकार बांध चौक/पॉलिटेक्निक कॉलेज की ओर जाना प्रतिबंधित। बेकार बांध (चंद्रशेखर आजाद चौक) से पॉलिटेक्निक कॉलेज की ओर जाना प्रतिबंधित। धनसार चौक से बैंक मोड़ की ओर जाना प्रतिबंधित रहेगा। कला संगम से मनईटांड़ और गोल बिल्डिंग की ओर नो एंट्री। टेलीफोन एक्सचेंज मोड़ से हावड़ा मोटर्स और हाजरा अस्पताल की ओर जाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध; यहां से वाहन बैंक मोड़ की ओर जा सकेंगे। तेतुलतल्ला, मनईटांड़ और पुराना बाजार पूजा पंडालों की ओर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। आटो और ई-रिक्शा के लिए रूट: राजगंज और बरवाअड्डा की ओर से मेमको मोड़, सिटी सेंटर, रेलवे स्टेशन और श्रमिक चौक होकर वापसी। निरसा, गोविंदपुर और बलियापुर की ओर से: गोल बिल्डिंग, मेमको मोड़, सिटी सेंटर, रेलवे स्टेशन और श्रमिक चौक होकर वापसी। कतरास, पुटकी और केंदुआडीह की ओर से: मटकुरिया चेकपोस्ट तक आने की अनुमति, फिर उसी मार्ग से वापसी। सिंदरी और झरिया की ओर से: धनसार चौक तक आने की अनुमति; धनसार चौक से बैंक मोड़ की ओर जाना प्रतिबंधित। भूली और विनोद बिहारी चौक की ओर से: बिरसा मुंडा पार्क, मेमको मोड़, सिटी सेंटर, रेलवे स्टेशन और श्रमिक चौक होकर वापसी। धनबाद से भूली जाने वाले वाहन: श्रमिक चौक से ओवरब्रिज के नीचे, वासेपुर होकर भूली जाएंगे। शहर में भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर 24 घंटे प्रतिबंध रहेगा। दुकानों में माल उतारने का समय सुबह 5 बजे से 11 बजे तक निर्धारित किया गया है।बाहर से धनबाद आने वालों के लिए भी जरूरी सूचना! रांची, बोकारो, जमशेदपुर और पुरुलिया की ओर से आने वाली यात्री बसों के लिए अलग-अलग रूट तय किये गये हैं। इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले अपना रास्ता जरूर जांच लें।दुर्गा पूजा में मां के दर्शन के लिए निकल रहे हैं तो जल्दबाजी न करें। प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और ट्रैफिक पुलिस के बताये रास्तों से ही जायें। इस खबर को धनबाद में रहने वाले अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें, ताकि कोई भी गलत रास्ते पर फंसकर परेशान न हो!

नामकुम की तत्कालीन सीओ शुभ्रा रानी पर चलेगी विभागीय कार्रवाई
Published / 2026-10-13 21:22:39
नामकुम की तत्कालीन सीओ शुभ्रा रानी पर चलेगी विभागीय कार्रवाई

अंचल अधिकारी पर गिरी गाज, करोड़ों के सरकारी जमीन घपला मामले में चलेगी विभागीय कार्रवाई  टीम एबीएन, रांची। राज्य सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी और नामकुम की तत्कालीन अंचल अधिकारी शुभ्रा रानी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलाने का आदेश दिया है। इसको लेकर कार्मिक विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। शुभ्रा रानी के ऊपर करोड़ों रूपए के जमीन के घपले का आरोप है। साथ ही उनपर वंशावली के सत्यापन की गलत रिर्पोट देने और सरकारी दिशा-निदेर्शों की सरेआम अनदेखी का भी आरोप है। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुनील कुमार को बनाया गया जांच अधिकारी नामकुम की तत्कालीन सीओ शुभ्रा रानी पर आरोप  है कि उन्होंने मौजा- हेथु (थाना नं- 298, खाता सं.-30, रकबा-3.64 एकड़) भूमि मामले में सरकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी की और किसी ठोस जांच-पड़ताल के बिना न केवल वंशावली का सत्यापन किया गया, बल्कि आला अधिकारियों को भूमि से संबंधित रिपोर्ट भी गलत भेज दी गयी। इस मामले में जब रांची डीसी ने जांच की तो आरोप सही पाया गया। जिसके बाद उनके खिलाफ मुख्यमंत्री के अनुमोदन से विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। मामले में सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी सुनील कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया है।

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