टीम एबीएन, रांची। 31 मई 2026 को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को ज्यादा उपयोगी बनाने के लिए झारखंड में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP) के तहत 26 मई से 31 मई तक राज्यभर में व्यापक जागरूकता और नियंत्रण अभियान चलाया जाएगा।
इस संबंध में NTCP के स्टेट नोडल अधिकारी ने राज्य के सभी सिविल सर्जन, जिला आयुष पदाधिकारियों और सभी जिला NTCP नोडल अधिकारियों के लिए निर्देश जारी किए हैं। निर्देश में कहा गया है कि 26 मई से 31 मई 2026 तक विशेष गतिविधियां आयोजित कर तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति आम लोगों को जागरूक करें।
जारी निर्देश में अभियान के दौरान COTPA 2003 और PECA के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध, तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर नियंत्रण और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अभियान के तहत विभिन्न विभागों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस और परिवहन विभाग सहित सामाजिक संगठनों को भी शामिल किया जाएगा। स्कूलों, कॉलेजों और समुदाय स्तर पर शपथ ग्रहण, रैली, क्विज, पोस्टर प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
विभाग की ओर से यह बताया गया है कि सभी शिक्षण संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में तंबाकू मुक्त परिसर सुनिश्चित करने के लिए साइन बोर्ड लगाए जाएंगे. साथ ही संबंधित अधिकारियों से घोषणा पत्र भरवाया जाएगा।
इसके अलावा साइकिल रैली, मानव श्रृंखला और नुक्कड़ नाटक जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं और आम जनता तक संदेश पहुंचाने की योजना है। जिलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करें और अभियान की रिपोर्ट समय पर राज्य मुख्यालय को भेजें।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि तंबाकू सेवन से कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए इस अभियान का उद्देश्य केवल नियम लागू करना ही नहीं, बल्कि लोगों के जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव भी लाना भी है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद, पलामू। पलामू पुलिस के नए कप्तान कपिल चौधरी व हुसैनाबाद में नवपदस्थापित एसडीपीओ सह आइपीएस दिव्यांश शुक्ला इन दिनों क्राइम को लेकर काफी सक्रिय हैं।
एक तरफ कई दिनों हुसैनाबाद में अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी व थाना प्रभारी चंदन कुमार के नेतृत्व अवैध रूप से गहरा ब्लैक शीशा वाली गाड़ी पर गाज गिरी तो दूसरी तरफ बुधवार को रात्रि में हुसैनाबाद के जेपी चौक रेल ओवरब्रिज के नीचे बीच सड़क पर थार जीप लगाकर मटर गश्ती करने वाले को धर दबोचा गया।
उसे थाना लाया गया जिससे क्षेत्र के लोगों में एक तरफ पुलिस के प्रति सकरात्मक पहल बताया जा रहा हैं और आम लोगो के बीच पुलिस की प्रति विश्वास और जग गयी हैं वहीं दूसरी तरफ ऐसे हीरोगिरी व रुतवा चमकाने वाले के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
इस सबन्ध में थाना प्रभारी चंदन कुमार ने बताया कि थार गाड़ी मोटिफाई किया हुआ है व चालक शराब के नशे था जिसे अग्रेत्तर कार्रवाई के लिए डीटीओ विभाग को भेज दिया गया हैं। आगे उन्होंने कहा कि सड़क पर अपनी शान व शौकत दिखाने व क्राइम एक्टिविटी के वाहन या अन्य चौक चौराहों पर रात्रि में मटरगश्ती करने वाले को खिलाफ एक बड़ा और कड़ा अभियान चलाया जाएगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को बंगाल विधानसभा का भंग कर दिया है। विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिला है। बहुमत के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव में वोट चोरी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।
इसके मद्देनजर 2026 के चुनाव प्रक्रिया के पूरा होने के बाद पश्चिम बंगाल के मौजूदा गवर्नर आरएन रवि ने एक बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा भंग कर दिये जाने के बाद ममता बनर्जी अब स्वाभाविक रूप से राज्य की मुख्यमंत्री नहीं रहीं।
भारत के संविधान के आर्टिकल 174 के क्लॉज (2) के सब-क्लॉज के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश दिया है। यह घोषणा बुधवार, 6 मई, 2026 को पब्लिश हुए एक स्पेशल गजट नोटिफिकेशन में की गई। सरकार के पार्लियामेंट्री अफेयर्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी इस निर्देश के अनुसार, मौजूदा विधानसभा 7 मई, 2026 से औपचारिक रूप से भंग हो जायेगी।
गवर्नर आरएन रवि के साइन किए हुए इस आॅर्डर को राज्य के चीफ सेक्रेटरी दुष्यंता नरियाला (कअर) ने जनहित में प्रकाशित किया। आम तौर पर चुनावों के बाद नई सरकार के आॅफिस संभालने से पहले पुरानी असेंबली को भंग करना एक संवैधानिक प्रैक्टिस है।
इस आॅर्डर से 17वीं विधानसभा का टर्म खत्म हो गया है और नए चुने हुए रिप्रेजेंटेटिव के साथ 18वीं लेजिस्लेटिव असेंबली के बनने का रास्ता साफ हो गया है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह और नई लेजिस्लेटिव असेंबली का पहला सेशन बुलाने का प्रोसेस शुरू हो जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। रांची पहाड़ी मंदिर जनसंपर्क समिति ने जानकारी दी है कि झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा जारी विवादित एवं कथित अवैध अधिसूचना के विरुद्ध में डब्ल्यू पी सी नं. 5123/2026 दायर की गयी है। उक्त याचिका वर्तमान में माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।
समिति की ओर से बताया गया कि न्यास बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना में रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति को भंग करने तथा नयी समिति गठन से संबंधित कार्रवाई की गयी है, जिसे समिति ने पूर्णत: एकतरफा, तथ्यहीन एवं विधि विरुद्ध बताया है। समिति का कहना है कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों एवं पूर्व में माननीय द्वारा पारित आदेशों के प्रतिकूल की गयी है।
समिति ने कहा कि डब्ल्यू पी सी नं. 5233/2023 में उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 24.09.2024 को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से पूर्व समिति को समुचित अवसर प्रदान करते हुए विधिसम्मत प्रक्रिया अपनायी जाये।
इसके बावजूद बिना निष्पक्ष सुनवाई एवं बिना समिति के प्रत्युत्तरों पर समुचित विचार किए विवादित अधिसूचना जारी कर दी गयी। समिति का यह भी कहना है कि उक्त अधिसूचना कोर्ट द्वारा पारित आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में भी आती है, क्योंकि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों की उपेक्षा करते हुए एकतरफा कार्रवाई की गयी है।
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिसूचना में लगाये गये आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। बोर्ड द्वारा यह कहा गया कि समिति ने नोटिसों एवं पत्रों का उत्तर नहीं दिया, जबकि वास्तविकता यह है कि समिति द्वारा समय-समय पर सभी नोटिसों का विधिवत उत्तर एवं आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किये गये थे। समिति का आरोप है कि बोर्ड ने समिति के जवाबों एवं अभिलेखों पर उचित विचार नहीं किया तथा पूर्व निर्धारित मानसिकता के साथ कार्रवाई की गयी।
उन्होंने कहा कि रांची पहाड़ी मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है तथा मंदिर के प्रशासन एवं प्रबंधन से संबंधित किसी भी निर्णय में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं विधिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। समिति ने यह भी कहा कि मंदिर समिति सदैव कानून एवं न्यायपालिका का सम्मान करती रही है और आगे भी न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्य करेगी।
समिति ने कहा कि न्यायालय में मामला विचाराधीन रहने के बावजूद यदि किसी प्रकार से जबरन प्रभार लेने अथवा प्रशासनिक हस्तक्षेप का प्रयास किया गया, तो समिति अपने अधिकारों एवं श्रद्धालुओं की भावनाओं की रक्षा हेतु सभी वैधानिक एवं लोकतांत्रिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होगी।
इसी विषय पर विस्तृत जानकारी देने हेतु द्वारा कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की गयी है, जिसमें समिति के पदाधिकारी एवं अधिकृत प्रतिनिधि मीडिया के समक्ष पूरे मामले, न्यायालय में दायर याचिका, न्यास बोर्ड की कार्रवाई तथा समिति के पक्ष को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करेंगे।
समिति ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन एवं आम श्रद्धालुओं से अपील की है कि मामले को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से निष्पक्ष रूप से तय होने दिया जाए तथा शांति एवं सौहार्द बनाए रखा जाये। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि माननीय में न्याय अवश्य मिलेगा। उक्त जानकारी रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति के जनसंपर्क विभाग के सौरभ चौधरी, राजेश गड़ोदिया और संदीप जैन ने दी।
टीम एबीएन, रांची। मध्यस्थता केंद्र, रांची में मध्यस्थता के माध्यम से वाद संख्या ओएम 574/2025 को अधिवक्ता मध्यस्थ निलम शेखर व दोनों पक्षों के अधिवक्ता अपराजिता मिश्रा तथा प्रकाश रंजन की सुझबूझ से दो बैठक में समझौता संपन्न हुआ। उक्त वाद में दोनों पति-पत्नी एक वर्ष से अलग-अलग रह रहे थे। इनकी एक पांच वर्षीय बेटी है, जो मां के साथ नानी के घर में रह रही थी।
पत्नी ने पति के विरूद्ध 498ए कंपलैन केस - 38911/2025 न्यायालय में दायर किया था तथा लड़का ने आरा के न्यायालय में डायबोर्स के लिए मुकदमा दायर किया था। परंतु मध्यस्थ नीलम शेखर की सूझबूझ तथा अथक प्रयास से मध्यस्थता के दौरान सारा वाद समाप्त करते हुए वैवाहिक जीवन पुनर्स्थापित हुआ।
ज्ञात हो कि उक्त वाद को मध्यस्थता हेतु मध्यस्थता केंद्र में मध्यस्थता के लिए भेजा गया था, जिसमें दो बैठक आयोजित की गयी, जिसमें काफी गहराई से बातचीत हुई, जिसके फलस्वरूप वादी-प्रतिवादी स्वेच्छा से राजी हुए कि एक साथ मिलजुल रहेंगे। आगे कलह नहीं करेंगे और अच्छी तरह से अपनी बेटी का भविष्य संवारेंगे। इस प्रकार एक घर बिखरने से बच गया।
उक्त वाद को सुलझाने में अधिवक्ता मध्यस्थ निलम शेखर व अधिवक्ता अपराजिता मिश्रा तथा प्रकाश रंजन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उक्त जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के सचिव ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, चतरा। जिले में पोस्टमार्टम के नाम पर परिजनों से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। भोज्या गांव में तालाब में डूबने से मां और दो मासूम बेटियों की मौत हो गयी थी। पोस्टमार्टम के दौरान सदर अस्पताल में कर्मचारी ने मृतकों के परिजनों से ढाई हजार नगद और ढाई हजार रुपये आॅनलाइन लेकर कुल पांच हजार रुपये लिए। मामले की शिकायत मिलते ही डीसी रवि आनंद ने तुरंत संज्ञान लिया और इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दे दिए। सिविल सर्जन सत्येंद्र सिंहा की प्रारंभिक जांच में अवैध वसूली की पुष्टि भी हो चुकी है।
पुलिस ने मामले में सख्त रूख अपनाते हुए जांच शुरू कर दी है। डीसी रवि आनंद ने कहा कि शव के पोस्टमार्टम के बदले पीड़ित परिवार से पैसे वसूलना अत्यंतर अमानवीय कृत्य है। इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी जायेगी। रिपोर्ट में दोष साबित होने पर आरोपी के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही मामले में संलिप्त अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भी पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जायेगी।
डीसी ने सिविल सर्जन सत्येंद्र सिंहा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है, जिसमें सदर अस्पताल के उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक को भी शामिल किया गया है। कमेटी को 24 घंटे के अंदर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिये गये हैं।
टीम एबीएन, रांची। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। गुरुवार को अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह के साथ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन झारखंड के प्रतिनिधिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें छोटे अस्पतालों को राहत देने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने 50 बेड तक के अस्पतालों, नर्सिंग होम और एकल क्लीनिक को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से छूट देने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि वर्तमान में अस्पतालों को 27 बिंदुओं पर अनुपालन करना पड़ता है, जिसमें पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और फायर विभाग से एनओसी, बिल्डिंग मैप की स्वीकृति और सिविल सर्जन से पंजीकरण जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि झारखंड के लिए अलग नियमावली तैयार की जायेगी। उसमें इस एक्ट से छूट देने पर विचार किया जायेगा। नियमों को आयुष्मान भारत- मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अनुरूप सरल बनाया जायेगा।
बैठक में एसोसिएशन ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत निजी अस्पतालों के दो माह से लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि भुगतान का कार्य प्रोसेस में है। प्रयास किया जा रहा है कि अगले 15 दिनों में भुगतान जारी कर दिये जायें।
प्रतिनिधिमंडल ने आटो कैंसिल केस के मामलों को पुनर्जीवित करने की मांग भी रखी। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर डीसी की अध्यक्षता वाली शिकायत निवारण समिति को सक्रिय किया जायेगा। ऐसी व्यवस्था की जायेगी कि यदि उपायुक्त बैठक में भाग नहीं ले पाएं तो वह अपने किसी प्रतिनिधि को नामित कर दें ताकि बैठक नियमित होती रहे और शिकायतों का समाधान होता रहे।
बैठक में नए आयुष्मान एचईएम पोर्टल 2.0 के तहत अस्पतालों को अप्रूवल में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया गया। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिल्डिंग मैप अप्रूवल की शर्त को लेकर चिंता जतायी गयी। इस पर अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुखिया या जिला पंचायत सदस्य से प्रमाणित मैप को मान्य किया जायेगा।
आईएमए प्रतिनिधिमंडल में डॉ विमलेश सिंह, डॉ अजय कुमार सिंह (राज्य समन्वयक), प्रदीप सिंह (सचिव), डॉ शंभू प्रसाद सिंह, डॉ अनुपम सिंह (वीमेंस विंग अध्यक्ष) और डॉ मृत्युंजय शामिल थे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। एनोस एक्का पर छोटा नागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम के उल्लंघन मामले में कथित भूमि अधिग्रहण मामले में जमानत दे दी गयी है। वहीं एनोस एक्का को सुनायी गयी सात साल कैद की सजा निलंबित कर दी।
जो भ्रष्टाचार मामले उइक कोर्ट द्वारा में सुनायी गयी थी। हालांकि हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मामले में एक्का से आदिवासियों की जमीन को उनके मूल स्वरूप में बहाल करने में सहयोग करने के लिए एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
शीर्ष अदालत झारखंड हाई कोर्ट दिसंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ एक्का की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि प्रथमदृष्टया सजा निलंबन का कोई मामला नहीं बनता है। इससे पहले रांची में सीबीआई अदालत ने 30 अगस्त 2025 को पूर्व मंत्री को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनायी थी।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि 2008 के एक मामले में एक्का के खिलाफ दो अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किये गये थे, जिनमें कहा गया था कि एक्का और एक अन्य पूर्व मंत्री ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की थी।
सीबीआई के अनुसार, एक्का और अन्य लोगों ने रांची जिले में आदिवासी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने के लिए फर्जी पते दिये थे। उन्होंने ऐसा करते हुए अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए सीएनटी अधिनियम के प्रावधानों को दरकिनार कर दिया था।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse