झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भेजा पत्र, मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता एवं अनुचित मूल्यवृद्धि पर रोक लगाने की मांग एबीएन सोशल डेस्क। जीवनरक्षक एवं आवश्यक दवाओं की बढ़ती कीमतों से आम जनता को राहत दिलाने तथा दवाओं के मूल्य निर्धारण की व्यवस्था को पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाने की मांग को लेकर झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा भारत सरकार को पत्र प्रेषित किया है। पत्र में दवाओं के उत्पादन मूल्य और खुदरा मूल्य के बीच भारी अंतर पर चिंता व्यक्त करते हुए कीमतों की तत्काल समीक्षा करने का आग्रह किया गया है। पत्र में कहा गया है कि महंगी दवाओं के कारण गरीब, मध्यमवर्गीय एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, किडनी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए नियमित दवाओं का खर्च बड़ी चुनौती बन गया है। अनेक परिवार अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खर्च करने और कर्ज लेने को विवश हो रहे हैं।सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक की मूलभूत आवश्यकता है। किसी भी व्यक्ति को आर्थिक अभाव के कारण उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए। दवा उद्योग की वास्तविक उत्पादन लागत, अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण एवं वितरण खर्च को ध्यान में रखते हुए उचित लाभ की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन अनुचित मूल्यवृद्धि का भार आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए। सम्मेलन की प्रमुख मांगें सम्मेलन ने केंद्र सरकार से जीवनरक्षक एवं आवश्यक दवाओं के उत्पादन मूल्य, आयात लागत, वितरण खर्च तथा अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की तत्काल समीक्षा करने, मूल्य निर्धारण की पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने तथा उत्पादन लागत एवं खुदरा मूल्य के बीच अनुचित अंतर पर प्रभावी नियंत्रण लगाने की मांग की है। इसके साथ ही गंभीर बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाओं की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा कर उचित मूल्य सीमा निर्धारित करने, गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं को प्रोत्साहित करने तथा जन औषधि केंद्रों को सशक्त बनाने का आग्रह किया गया है। निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई एवं समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की भी मांग की गई है। सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि दवा कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन बचाने का आवश्यक साधन है। सरकार को मरीजों एवं आम नागरिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दवाओं को सुलभ एवं किफायती बनाने के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
रिम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग की बड़ी उपलब्धि टीम एबीएन, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। धनबाद की सोनिया खातून (42) (न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस एवं ओलिगो डेंड्रोग्लियोमा ब्रेन ट्यूमर का एक प्रकार से पीड़ित) के ब्रेन ट्यूमर का सफल आॅपरेशन किया गया। मरीज को कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी थीं, जिसके कारण एनेस्थीसिया देना और आॅपरेशन की तैयारी करना काफी चुनौतीपूर्ण था। मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आॅपरेशन से पहले समुचित चिकित्सकीय मूल्यांकन के लिए विभिन्न विभागों से परामर्श एवं आवश्यक क्लीयरेंस प्राप्त किया गया। यह उपलब्धि सटीक सर्जिकल योजना, चिकित्सकीय दक्षता और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण है। न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ आनंद प्रकाश के नेतृत्व में न्यूरोसर्जरी टीम ने मस्तिष्क में लगभग एक इंच का चीरा लगाकर ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालने की सर्जरी की। इस आॅपरेशन में न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रकाश, डॉ. नारायण एवं डॉ. कुमार दीपक शामिल थे, जबकि एनेस्थीसिया टीम में डॉ. मुकेश, डॉ. राजेश, डॉ. वशिष्ठ, डॉ. क्षितिज एवं डॉ. अधिश्री ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। मरीज की जटिल चिकित्सकीय स्थिति के बावजूद इस चुनौतीपूर्ण आॅपरेशन को सफलतापूर्वक संपन्न करने में न्यूरोसर्जरी, एनेस्थीसिया तथा अन्य संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।फिलहाल मरीज डॉक्टरों की करीबी निगरानी में हैं। उम्मीद है कि स्वास्थ्य में सुधार के साथ वे शीघ्र ही अपनी सामान्य दैनिक गतिविधियां दोबारा शुरू कर सकेंगी। रिम्स रांची झारखंड के मरीजों को उन्नत एवं अत्याधुनिक न्यूरोसर्जिकल उपचार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
रिनपास के सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में वृद्धि, अब मिलेगा 80,000 तक मासिक मानदेय टीम एबीएन, रांची। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और डॉक्टरों का मनोबल बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य सरकार के संकल्प संख्या 244(09), दिनांक 27 अप्रैल 2026 के तहत सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों में जूनियर रेजिडेंट (एकेडमिक) डॉक्टरों के मासिक मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।वहीं, रिनपास, कांके, रांची में कार्यरत डीएनबी डॉक्टरों के मानदेय पुनरीक्षण के प्रस्ताव पर भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गयी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में उठाया गया यह कदम डॉक्टरों को सम्मानजनक मानदेय उपलब्ध कराने, चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को अब 70,000 से 80,000 तक मासिक मानदेय जूनियर रेजिडेंट (एकेडमिक) डॉक्टरों के मासिक मानदेय की संशोधित दरें प्रथम वर्ष : 54,500 से बढ़ाकर 70,000 प्रतिमाह द्वितीय वर्ष : 58,500 से बढ़ाकर 75,000 प्रतिमाह तृतीय वर्ष : 63,000 से बढ़ाकर 80,000 प्रतिमाह इस वृद्धि के तहत प्रथम वर्ष के डॉक्टरों को 15,500, द्वितीय वर्ष के डॉक्टरों को 16,500 और तृतीय वर्ष के डॉक्टरों को 17,000 प्रतिमाह अतिरिक्त मिलेंगे। इस निर्णय से डॉक्टरों को आर्थिक राहत मिलेगी, उनका मनोबल बढ़ेगा और चिकित्सा संस्थानों में बेहतर सेवाएं देने के लिए उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा। रिनपास, कांके के डीएनबी डॉक्टरों के मानदेय पुनरीक्षण की पहल रिनपास में कार्यरत डीएनबी छात्र-छात्राओं ने सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप मानदेय बढ़ाने की मांग की थी। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, ब्रॉड स्पेशियलिटी डीएनबी प्रशिक्षणार्थियों के लिए प्रथम वर्ष में 43,000, द्वितीय वर्ष में 45,000 और तृतीय वर्ष में 47,000 प्रतिमाह न्यूनतम मानदेय निर्धारित है। वहीं, पोस्ट-डिप्लोमा डीएनबी प्रशिक्षणार्थियों के लिए प्रथम वर्ष में 45,000 और द्वितीय वर्ष में 47,000 प्रतिमाह की दरें निर्धारित हैं। इन प्रावधानों के अनुरूप रिनपास में मानदेय पुनरीक्षण के प्रस्ताव पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई की गयी है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को उचित सम्मान एवं मानदेय उपलब्ध कराना तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाना है। रिनपास की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य रिनपास में मरीजों की जांच, उपचार, आपातकालीन सेवाओं और संस्थागत व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए डॉक्टरों की उपलब्धता, बेहतर कार्य-परिस्थितियों और गुणवत्तापूर्ण उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। डॉक्टर हमारे अंग, उनके मान-सम्मान में कोई कमी नहीं : डॉ इरफान अंसारी स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा, पैसे की चिंता नहीं, हमें काम चाहिए, हमें प्रयास चाहिए और हमें स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करना है। डॉक्टर हमारे अंग हैं। उनके मान-सम्मान में किसी तरह की कटौती नहीं की जायेगी। जो डॉक्टर दिन-रात मरीजों की सेवा करते हैं, उन्हें उचित सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना, अस्पतालों में आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना और डॉक्टरों के लिए बेहतर कार्य-परिस्थितियां तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। मानदेय में वृद्धि से चिकित्सा संस्थानों में प्रतिभाशाली डॉक्टरों को आकर्षित करने और उन्हें लंबे समय तक राज्य की सेवा के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। डॉ अंसारी ने कहा कि रिनपास जैसे संस्थानों में बड़ी संख्या में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि डॉक्टरों को बेहतर सुविधाएं मिले और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल मानदेय बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार करना है। आधुनिक चिकित्सा उपकरण, बेहतर अस्पताल, विशेषज्ञ डॉक्टर और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवस्था के माध्यम से स्वस्थ झारखंड का निर्माण किया जायेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, हमारा संकल्प है- डॉक्टरों को सम्मान, मरीजों को बेहतर इलाज और झारखंड की जनता को मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में लगातार काम करता रहेगा। इस फैसले से स्वास्थ्य व्यवस्था में कार्यरत डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा: अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ। इरफान अंसारी के निर्देश पर संबंधित फाइल को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य जूनियर डॉक्टर हों या सीनियर डॉक्टर, सभी का मनोबल बढ़ाना और उन्हें बेहतर कार्य-परिस्थितियां उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार पहले भी डॉक्टरों के वेतन एवं मानदेय में वृद्धि के निर्णय लेती रही है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से स्वास्थ्य व्यवस्था में कार्यरत डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ मरीजों की सेवा कर सकेंगे। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण में डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका है और राज्य सरकार उनके सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए प्रतिबद्ध है।
नवरात्रि में षट्चक्र ध्यान का विशेष महत्व, साधना से आत्मजागरण और मानसिक संतुलन की ओर बढ़ते कदम:- योगाचार्य महेश पालयोग परंपरा में वर्णित चक्रों का ध्यान एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन और आत्मचिंतन का माध्यम; विज्ञान भी ध्यान के अनेक मानसिक स्वास्थ्य लाभों को स्वीकारता हैएबीएन हेल्थ डेस्क। भारतीय संस्कृति में नवरात्रि केवल देवी उपासना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, साधना और आंतरिक शक्ति के जागरण का विशेष अवसर भी है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाली इस आध्यात्मिक परंपरा में उपवास, मंत्रजप, ध्यान और प्रार्थना के साथ योग साधना का विशेष महत्व है। योग की प्राचीन परंपरा में षट्चक्र ध्यान को चेतना के विकास, आत्मनिरीक्षण और मानसिक एकाग्रता से जोड़कर देखा जाता है। नियमित एवं विधिपूर्वक किया गया ध्यान व्यक्ति को तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन विकसित करने में सहायता कर सकता है।क्या है षट्चक्र ध्यान और इसका आध्यात्मिक महत्व?योग की विभिन्न परंपराओं में मानव शरीर में मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार सहित सात प्रमुख चक्रों का वर्णन मिलता है। सामान्य बोलचाल में सहस्रार को शामिल करते हुए इसे षट्चक्र साधना के साथ समझाया जाता है, हालांकि पारंपरिक वर्गीकरण में षट्चक्र और सहस्रार के बीच अंतर भी किया जाता है। ये चक्र सूक्ष्म शरीर और आध्यात्मिक चेतना से संबंधित अवधारणाएं हैं। इनका ध्यान साधक को अपने विचारों, भावनाओं, व्यवहार और आंतरिक अनुभवों को समझने का अवसर देता है। नवरात्रि में देवी के विभिन्न स्वरूपों की उपासना शक्ति, साहस, करुणा, ज्ञान और विवेक जैसे गुणों के विकास का संदेश देती है। इसी प्रकार चक्र ध्यान में साधक स्थिरता, आत्मविश्वास, प्रेम, अभिव्यक्ति और आत्मचिंतन जैसे गुणों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। इस दृष्टि से षट्चक्र ध्यान आध्यात्मिक साधना के साथ व्यक्तित्व विकास का भी माध्यम बन सकता है। योग परंपरा के अनुसार मूलाधार चक्र को स्थिरता और सुरक्षा की भावना से जोड़ा जाता है। इस केंद्र पर ध्यान करते समय साधक अपने श्वास, शरीर और वर्तमान क्षण के प्रति जागरूकता विकसित कर सकता है। इससे मन को वर्तमान में केंद्रित करने का अभ्यास मिलता है।स्वाधिष्ठान चक्र भावनाओं, सृजनात्मकता और जीवन के प्रति सहजता का प्रतीक माना जाता है। इस पर ध्यान करते समय व्यक्ति अपनी भावनाओं को पहचानने और उन्हें संतुलित ढंग से व्यक्त करने का अभ्यास कर सकता है। मणिपुर चक्र आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और संकल्प से संबंधित माना जाता है। इस पर केंद्रित ध्यान आत्मअनुशासन और लक्ष्य के प्रति जागरूकता विकसित करने में सहायक हो सकता है।अनाहत चक्र प्रेम, करुणा, क्षमा और सहानुभूति का प्रतीक है। इससे संबंधित ध्यान व्यक्ति को दूसरों के प्रति संवेदनशील बनने और संबंधों में सकारात्मकता विकसित करने की प्रेरणा दे सकता है। विशुद्ध चक्र को संवाद और अभिव्यक्ति से जोड़ा जाता है। इस पर ध्यान करते समय व्यक्ति अपनी बात स्पष्टता से रखने और दूसरों की बात ध्यानपूर्वक सुनने की आदत विकसित कर सकता है। आज्ञा चक्र को एकाग्रता, विवेक और आत्मनिरीक्षण का प्रतीक माना जाता है।ध्यान के दौरान किसी एक बिंदु, मंत्र या श्वास पर मन केंद्रित करने से ध्यान नियंत्रण का अभ्यास होता है। सहस्रार चक्र योग परंपरा में उच्च चेतना, आध्यात्मिक अनुभव और आत्मबोध से संबंधित है। इसकी साधना का उद्देश्य बाहरी आकर्षणों से हटकर स्वयं के भीतर शांति और व्यापक जीवनबोध का अनुभव करना माना जाता है। यह समझना आवश्यक है कि चक्रों से जुड़े ये गुण आध्यात्मिक एवं पारंपरिक व्याख्याएं हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने चक्रों को शरीर के प्रमाणित शारीरिक अंगों या अलग-अलग तंत्रों के प्रत्यक्ष नियंत्रक के रूप में स्थापित नहीं किया है। आधुनिक जीवन में अनियमित दिनचर्या, लंबे समय तक स्क्रीन का उपयोग, काम का दबाव, अपर्याप्त नींद और शारीरिक निष्क्रियता मानसिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में ध्यान और श्वास के प्रति जागरूकता व्यक्ति को अपने मानसिक एवं शारीरिक अनुभवों को समझने का अवसर देती है।वैज्ञानिक अध्ययनों में ध्यान आधारित कार्यक्रमों से कुछ लोगों में तनाव, चिंता और अवसाद के लक्षणों में कमी तथा भावनात्मक संतुलन में सुधार की संभावनाएं सामने आई हैं। धीमी और सहज श्वास के साथ किया गया ध्यान विश्राम की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति तनावपूर्ण परिस्थितियों में अपनी प्रतिक्रियाओं को पहचानने और उन पर संयम रखने का कौशल भी विकसित कर सकता है। हालांकि, इन संभावित लाभों को षट्चक्रों की किसी विशिष्ट शारीरिक प्रणाली पर सीधे प्रभाव का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, अनाहत चक्र का ध्यान हृदय रोग का उपचार नहीं है और मणिपुर चक्र का ध्यान पाचन संबंधी रोगों को ठीक करने का प्रमाणित विकल्प नहीं है। वैज्ञानिक दृष्टि से ध्यान के लाभों का आकलन अभ्यास की प्रकृति, नियमितता और व्यक्ति की परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। योग साधना का उद्देश्य केवल स्वयं तक सीमित रहना नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार और सामाजिक संबंधों में भी सकारात्मक परिवर्तन लाना है। जब व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं के प्रति जागरूक होता है, तो वह प्रतिक्रिया देने से पहले परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर सकता है। इससे पारिवारिक संवाद, आपसी सम्मान और मतभेदों को शांतिपूर्वक सुलझाने की क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए ध्यान का नियमित अभ्यास एकाग्रता, आत्मअनुशासन और भावनात्मक जागरूकता विकसित करने का अवसर प्रदान कर सकता है। परिवार, विद्यालय और सामुदायिक स्तर पर सरल ध्यान अभ्यास को अपनाने से सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है और ध्यान को व्यवहार संबंधी समस्याओं या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों के उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए। नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन प्रातः या सायंकाल शांत स्थान पर 10 से 15 मिनट का समय ध्यान के लिए निर्धारित किया जा सकता है। सुखासन या किसी अन्य आरामदायक स्थिति में बैठकर रीढ़ को सहज रूप से सीधा रखें। आंखें बंद करके कुछ मिनट अपनी स्वाभाविक श्वास पर ध्यान दें। इसके बाद मूलाधार से आज्ञा चक्र तक विभिन्न ध्यान केंद्रों पर क्रमशः ध्यान केंद्रित करें। प्रत्येक केंद्र के साथ उससे जुड़े सकारात्मक गुण, जैसे स्थिरता, भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास, करुणा, स्पष्ट अभिव्यक्ति और विवेक का चिंतन किया जा सकता है। साधक अपनी परंपरा के अनुसार मंत्रजप या मौन ध्यान का सहारा भी ले सकते हैं। ध्यान के दौरान श्वास को जबरन रोकने, अत्यधिक प्रयास करने या किसी विशेष आध्यात्मिक अनुभव की अपेक्षा रखने से बचना चाहिए। यदि ध्यान से बेचैनी या असहजता बढ़े, तो अभ्यास रोककर सामान्य श्वास के साथ विश्राम करना उचित है। योगाचार्य महेश पाल के अनुसार, "नवरात्रि आत्मशक्ति, संयम और साधना का पर्व है। षट्चक्र ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर के विचारों, भावनाओं और व्यवहार को समझने का प्रयास कर सकता है। योग का वास्तविक उद्देश्य केवल शारीरिक अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर, मन और व्यवहार में संतुलन स्थापित करना भी है। यदि हम नियमित योग, ध्यान, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सकारात्मक दिनचर्या को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, तो बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक साधना को अंधविश्वास के बजाय विवेक, अनुशासन और आत्मानुभव के साथ अपनाना चाहिए। योग की परंपराओं का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक तथ्यों को समझना भी आवश्यक है, ताकि समाज को योग के वास्तविक लाभों के प्रति जागरूक किया जा सके। नवरात्रि में षट्चक्र ध्यान आध्यात्मिक चिंतन, आत्मनिरीक्षण और सकारात्मक जीवन मूल्यों को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसके साथ नियमित योगाभ्यास, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर व्यक्ति अपने समग्र स्वास्थ्य की देखभाल कर सकता है। आस्था और विज्ञान के संतुलित समन्वय के साथ की गई साधना न केवल आत्मविकास की प्रेरणा दे सकती है, बल्कि परिवार और समाज में भी शांति, संवेदनशीलता तथा सकारात्मकता का वातावरण बनाने में योगदान दे सकती है।
10 नये विभाग खुलेंगे; आधुनिक तकनीक और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस होगा संस्थान : स्वास्थ्य मंत्री पीजी की सीटें 176 से बढ़ाकर 256 और सुपर स्पेशियलिटी की सीटें 11 से बढ़ाकर 150 करने का प्रस्ताव 106 नये नर्स पद, 12 हॉस्पिटल मैनेजर और 100 आयुष्मान मित्रों की नियुक्ति की पहल टीम एबीएन, रांची। झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में गुरुवार को रिम्स, रांची की 66वीं गवर्निंग बॉडी की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में रिम्स के व्यापक पुनर्गठन, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, नये विभागों की स्थापना, चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने, मरीजों की सुविधाओं में वृद्धि और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार सहित कुल 16 एजेंडों पर चर्चा की गयी। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट कहा कि रिम्स झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है। यहां आने वाला प्रत्येक मरीज बेहतर इलाज, सम्मान और संवेदनशील व्यवहार का हकदार है। हमारा लक्ष्य रिम्स को आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सकों और बेहतर आधारभूत सुविधाओं से लैस करना है, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी कम हो। बैठक के प्रमुख निर्णय 466 करोड़ से रिम्स का व्यापक विकास रिम्स परिसर, भवनों, छात्रावासों, आवासीय सुविधाओं और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास एवं नवीनीकरण के लिए लगभग ?466 करोड़ की योजना पर काम किया जायेगा। 10 नये विभागों की स्थापना रिम्स में मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एवं रूमेटोलॉजी, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, कार्डियक एनेस्थीसिया, न्यूरो एनेस्थीसिया, इमरजेंसी मेडिसिन, मेडिकल जेनेटिक्स, न्यूक्लियर मेडिसिन और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग स्थापित करने की पहल की गयी है। इन विभागों से गंभीर एवं जटिल बीमारियों के उपचार, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को मजबूती मिलेगी। मेडिकल शिक्षा का होगा विस्तार रिम्स में वर्तमान में MBBS की 250 सीटें हैं। ढॠ की सीटें 176 से बढ़ाकर 256 और सुपर स्पेशियलिटी की सीटें 11 से बढ़ाकर 150 करने के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया है। 200 से अधिक वेंटिलेटर और आधुनिक मशीनों पर जोर मंत्री ने गंभीर मरीजों और इमरजेंसी सेवाओं की जरूरतों को देखते हुए 200 से अधिक वेंटिलेटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई पर जोर दिया। साथ ही अल्ट्रासाउंड, इको और एक्स-रे जांच की सुविधाओं को बढ़ाने तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीक अपनाने का निर्देश दिया। पूर्व में उपलब्ध लगभग 240 करोड़ की राशि के उपयोग पर मांगा गया विवरण मंत्री ने रिम्स में पूर्व में उपलब्ध करायी गयी लगभग 240 करोड़ की राशि के उपयोग की स्थिति पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक या तकनीकी स्वीकृति में कोई बाधा है, तो उसे तत्काल दूर किया जाये। इमरजेंसी सेवाओं और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के लिए उपलब्ध संसाधनों का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित होना चाहिए, ताकि राशि लैप्स होने की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि काम में जहां भी परेशानी आ रही है, उसका स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराएं, ताकि आवश्यक स्वीकृति लेकर योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके। 106 नये नर्स पद और 12 हॉस्पिटल मैनेजरों की नियुक्ति रिम्स में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 106 नए नर्स पद सृजित करने और 12 हॉस्पिटल मैनेजर नियुक्त करने की पहल की जायेगी। इससे मरीजों की देखभाल, अस्पताल के दैनिक संचालन और प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा। 100 आयुष्मान मित्रों की नियुक्ति आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभुकों की सहायता के लिए 100 आयुष्मान मित्रों की नियुक्ति का निर्देश दिया गया। इसके लिए 15 दिनों के भीतर रिक्तियों का विज्ञापन जारी करने को कहा गया। बर्न वार्ड, लिफ्ट और मोक्ष वाहन की सुविधा मंत्री ने आधुनिक बर्न वार्ड विकसित करने, लिफ्ट व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करने और जरूरतमंद परिवारों के लिए मोक्ष वाहन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई करने का निर्देश दिया। सुरक्षा व्यवस्था में होगा बदलाव रिम्स परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चरणबद्ध तरीके से होमगार्ड जवानों की संख्या कम कर एसएपी के जवानों की तैनाती करने का निर्णय लिया गया। पहले चरण में 100 होमगार्ड जवानों को हटाने की प्रक्रिया अपनायी जायेगी। मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल परिसर में अनुशासन बनाये रखने के लिए पास व्यवस्था लागू करने तथा कर्मचारियों एवं श्रमिकों के लिए अलग-अलग पहचान पत्र जारी करने की व्यवस्था भी की जायेगी। फैकल्टी के पद बढ़ेंगे, नॉन-टीचिंग पदों का पुनर्गठन रिम्स में फैकल्टी के पदों को निर्धारित मानकों के अनुरूप 319 से बढ़ाकर 335 करने का निर्णय लिया गया। वहीं, नॉन-टीचिंग पदों का पुनर्गठन करते हुए स्वीकृत 1,962 पदों में से 100 पद कम कर कुल 1,862 पद रखने का प्रस्ताव है। विद्यार्थियों के लिए छात्रावास और बेहतर सुविधाएं पीजी एवं सीनियर रेजिडेंट विद्यार्थियों के लिए पीपीपी मॉडल पर छात्रावास निर्माण की योजना है। इसके लिए प्राक्कलन तैयार कर भारत सरकार को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जायेगी। पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए 10 स्थायी समितियां रिम्स के वित्तीय प्रबंधन, नियुक्ति, प्रोन्नति, शैक्षणिक गतिविधियों, खरीद प्रक्रिया, सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण को बेहतर बनाने के लिए स्थायी समितियों की संख्या पांच से बढ़ाकर 10 करने का निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा— रिम्स को स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत बैकअप बनाना है। मौके पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि रिम्स को झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक मजबूत बैकअप बनाना जरूरी है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रिम्स को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध हो और अन्य अस्पतालों पर दबाव कम करने में भी मदद मिले। उन्होंने कहा कि रिम्स की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें मिलती हैं। सुरक्षा व्यवस्था और होमगार्ड जवानों की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। इन विषयों पर गंभीरता से ध्यान देते हुए व्यवस्था में सुधार करना जरूरी है, ताकि अस्पताल में अनुशासन बना रहे और मरीजों तथा उनके परिजनों को किसी तरह की परेशानी न हो। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि रिम्स के पास बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए आवश्यक क्षमता, विशेषज्ञता और संसाधन उपलब्ध हैं। जरूरत इनका सही इस्तेमाल करने, कमियों को दूर करने और सभी व्यवस्थाओं को बेहतर समन्वय के साथ संचालित करने की है। उन्होंने कहा कि गवर्निंग बॉडी की बैठक में इसी उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। नये विभागों की स्थापना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार, नर्सिंग एवं अस्पताल प्रबंधन कर्मियों की उपलब्धता बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कदम रिम्स को नयी दिशा देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू कर रिम्स को ऐसा संस्थान बनाना है, जो न केवल झारखंड के मरीजों को बेहतर उपचार दे, बल्कि राज्य की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती प्रदान करे। जामताड़ा को मेडिकल कॉलेज की सौगात की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रिम्स की गवर्निंग बॉडी की बैठक से पहले जामताड़ा जिले में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए आशय पत्र (एलओआई) जारी किया गया। मौके पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, रिम्स निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा, अपर निदेशक वाघमारे प्रसाद कृष्ण तथा संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस पहल से जामताड़ा और आसपास के क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा तथा विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री का स्पष्ट संदेश—घोषणा नहीं, धरातल पर काम चाहिए मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि रिम्स में मरीजों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि लोगों का भरोसा संस्थान पर बढ़ रहा है। अब इस भरोसे को बेहतर सुविधाओं, आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उपचार के माध्यम से और मजबूत करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी निर्णयों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाये, लंबित योजनाओं को गति दी जाये और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। डॉ. इरफान अंसारी ने कहा, हमारा लक्ष्य स्पष्ट है— झारखंड के गरीब, जरूरतमंद और आम लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना। रिम्स में आधुनिक मशीनें हों, विशेषज्ञ डॉक्टर हों, पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ हो और मरीजों को सम्मान के साथ इलाज मिले। स्वास्थ्य सेवा में सुधार केवल घोषणा से नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने से होगा। हम रिम्स को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस कर नयी पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, रिम्स निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा, अपर निदेशक वाघमारे प्रसाद कृष्ण सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। झारखंड सरकार का संकल्प— बेहतर स्वास्थ्य सेवा, आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और हर मरीज को गुणवत्तापूर्ण उपचार।
काला बिल्ला लगाकर डॉक्टरों का आंदोलन आज भी जारी टीम एबीएन, रांची। राज्य भर में चिकित्सकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर डॉक्टरों का आंदोलन आज भी जारी रहा। डॉक्टरों ने आज भी काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन किया। साथ ही आज रिम्स के एमबीबीएस छात्रों के साथ वार्ता की। सभी ने छात्रों को बताया कि क्यों यह आंदोलन जरूरी है और उनकी मांगों से आने वाली पीढ़ी को क्या लाभ मिलेगा। आईएमए, जेडीए, एफआईएमए और सभी चिकित्सक संगठन के साथ स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया। डॉक्टर का कहना है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो मजबूरन 22 अक्टूबर को संपूर्ण कर बहिष्कार किया जायेगा, जिसमें सभी सरकारी और गैर सरकारी डॉक्टर शामिल होंगे। वहीं, शुक्रवार को एक बार फिर से सभी संगठन के साथ विभाग की बैठक होनी है। इसके बाद आगे की रूपरेखा तैयार होगी।
धनबाद : बाबा हॉस्पिटल में जुड़वा बच्चों की करायी गयी नॉर्मल डिलीवरीजहां सिजेरियन को माना जाता है आसान रास्ता, वहां बाबा हॉस्पिटल ने कराया जुड़वा बेटों का सामान्य प्रसवएबीएन न्यूज नेटवर्क, कतरास। कतरास स्थित बाबा हॉस्पिटल में 5 अक्टूबर 2026 को एक महिला का सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) कराया गया, जिसमें जुड़वा बेटों का सुरक्षित जन्म हुआ। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार जच्चा और दोनों नवजात पूरी तरह सुरक्षित हैं।बाबा हॉस्पिटल के संचालक सीताराम गोस्वामी ने कहा कि वर्तमान समय में जहां कई जगहों पर सिजेरियन डिलीवरी की प्रवृत्ति बढ़ रही है, वहीं बाबा हॉस्पिटल की पहचान सुरक्षित और सामान्य प्रसव को प्राथमिकता देने की रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का प्रयास रहता है कि चिकित्सकीय परिस्थितियां अनुकूल होने पर महिलाओं को सुरक्षित तरीके से सामान्य प्रसव की सुविधा उपलब्ध करायी जाये।उन्होंने कहा कि मां और नवजात की सुरक्षा अस्पताल की पहली प्राथमिकता है। बाबा हॉस्पिटल आगे भी इसी तरह सुरक्षित सामान्य प्रसव के माध्यम से समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत रहेगा।
फैकल्टी और स्टाफ का होगा पुनर्गठन टीम एबीएन, रांची। राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी की सीटें बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गयी है। सीटों में वृद्धि के अनुरूप फैकल्टी, डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के पदों का पुनर्गठन किया जायेगा। इसके लिए सभी मेडिकल कॉलेजों को वर्तमान मानव संसाधन और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। गुरुवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा की गयी। बैठक में विशेष सचिव डॉ। नेहा अरोड़ा, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, मेडिकल एजुकेशन निदेशक डॉ पी भट्टाचार्य सहित राजकीय मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य/अधीक्षक शामिल हुए। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के लिए सिविल वर्क के साथ पर्याप्त ह्यूमन रिसोर्स जरूरी है। इसलिए प्रत्येक संस्थान में डॉक्टर, फैकल्टी, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की वर्तमान स्थिति तथा भविष्य की आवश्यकता का विस्तृत आकलन किया जाये। उन्होंने अधिकतम यूजी और पीजी सीट बढ़ाने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने को कहा। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि फैकल्टी की कमी होने पर आवश्यकता के अनुसार संविदा पर प्रोफेसरों की नियुक्ति की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने और दूसरे राज्यों व शहरों से भी योग्य प्रोफेसरों को बुलाने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया। इसका पूरे देश में व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश उन्होंने दिया ताकि अन्य राज्यों से योग्य प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक की सेवाएं ली जा सकें। साथ हुआ वाक इन इंटरव्यू नियमित रूप से आयोजित करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों में अगले तीन वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। एसएनएमएमसीएच धनबाद की ओर से बताया गया कि वर्ष 2030 तक की योजना तैयार की गयी है, जिसमें यूजी की 250 और पीजी की 200 सीट बढ़ाने का प्रस्तावित लक्ष्य शामिल है। जिसके आधार पर सभी शैक्षणिक और गैस शैक्षणिक पदों को रिस्ट्रक्चर करने का निर्देश दिया गया। बैठक में दुमका, हजारीबाग, पलामू समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों की भी समीक्षा की गयी। अधिकारियों को यूजी में 200 और पीजी में 150 सीट तक बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने तथा इसके अनुरूप फैकल्टी, पैरामेडिकल स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था का आकलन करने को कहा गया। अपर मुख्य सचिव ने बोकारो और चाईबासा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की भी जानकारी ली। बताया गया कि दोनों मेडिकल कॉलेजों के भवन अगले वर्ष तक तैयार होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक फैकल्टी और अन्य संसाधन समय पर उपलब्ध हो जाते हैं तथा निर्धारित मानक पूरे होते हैं, तो अगले वर्ष से वहां पढ़ाई शुरू करने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है।
छोटी उम्र से रखें दांतों की सेहत का ख्याल : डॉ पूर्णिमा बच्चों में तेजी से बढ़ रही कैविटी की समस्या, चिप्स-चॉकलेट से लेकर रात में बोतल लेकर सोने की आदत बन रही कारण एबीएन हेल्थ डेस्क (जमशेदपुर)। बच्चों की मुस्कान जितनी खूबसूरत होती है, उतनी ही जरूरी है उनके दांतों की सही देखभाल। आज बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों और दांतों की सफाई में लापरवाही के कारण बच्चों में कैविटी समेत कई दंत समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर छोटे बच्चों में दूध के दांतों को लेकर अभिभावकों के बीच कई तरह की भ्रांतियां भी देखने को मिलती हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर एबीएन ने जमशेदपुर में साई जंबो टावर, भालूबासा में स्थित 32 स्माइल्स मल्टी स्पेशियालिटी लेजर डेंटल क्लीनिक की संस्थापक एवं वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. पूर्णिमा से विशेष बातचीत की। उन्होंने बच्चों में दांतों की आम समस्याओं, कैविटी के कारण, ब्रश करने की सही आदत और दूध के दांतों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। सवाल : आपके क्लिनिक में बच्चों में सबसे ज्यादा कौन सी समस्या देखने को मिलती है? डॉ. पूर्णिमा : बच्चों में सबसे ज्यादा दांतों में कीड़ा लगना यानी कैविटी की समस्या देखने को मिलती है। खासकर दो से छह वर्ष की उम्र के बच्चों के आगे के दांतों में काले धब्बे और सड़न आम है। इसके अलावा दांतों का टेढ़ा-मेढ़ा आना और दूध के दांतों का समय से पहले टूट जाना भी काफी सामान्य समस्या है।सवाल : क्या बच्चों में कैविटी के मामले बढ़ रहे हैं? डॉ. पूर्णिमा : हां, कैविटी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसमें बदली हुई जीवनशैली की भूमिका है। चिप्स, बिस्किट, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और पैकेट जूस का अधिक सेवन, रात में दूध की बोतल लेकर सोना और समय पर ब्रश नहीं करना इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। सवाल : क्या रोज ब्रश करने के बावजूद कैविटी हो सकती है? डॉ. पूर्णिमा : बिल्कुल। केवल ब्रश करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही तरीके से ब्रश करना भी जरूरी है। दिन में सिर्फ एक बार ब्रश करना, जल्दी-जल्दी ब्रश खत्म कर देना, मीठा खाने के बाद कुल्ला नहीं करना और अत्यधिक मीठा खाना भी कैविटी का कारण बन सकता है। बच्चों को सुबह और रात में करीब दो मिनट तक सही तरीके से ब्रश करवाना चाहिए।सवाल : माता-पिता की कौन सी लापरवाही बड़ी समस्या बन जाती है? डॉ. पूर्णिमा : सबसे बड़ी गलती यह सोचने की है कि दूध के दांत तो गिर ही जाएंगे, इसलिए उनका इलाज कराने की जरूरत नहीं है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को अकेले ब्रश करने के लिए छोड़ दिया जाता है। करीब आठ वर्ष तक बच्चों को माता-पिता की निगरानी में ब्रश करवाना चाहिए। इसके अलावा हर छह महीने में दांतों की जांच नहीं करवाना भी समस्या को बढ़ा सकता है। सवाल : बच्चों का दांतों के इलाज से डर कैसे कम किया जा सकता है? डॉ. पूर्णिमा : बच्चों को प्यार से समझाना सबसे जरूरी है। उन्हें यह कहकर कभी नहीं डराना चाहिए कि डॉक्टर सुई लगायेंगे या बहुत दर्द होगा। पहली बार बच्चे को केवल जांच और क्लिनिक के वातावरण से परिचित कराने के लिए लाना अच्छा रहता है। बच्चे को इलाज की प्रक्रिया समझाने और सहज माहौल देने से उसका डर कम किया जा सकता है। सवाल : दूध के दांत समय से पहले निकलने से क्या पक्के दांत प्रभावित होते हैं? डॉ. पूर्णिमा : दूध के दांत पक्के दांतों के लिए जगह बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि दूध का दांत समय से पहले निकल जाता है तो आसपास के दांत उस खाली जगह में खिसक सकते हैं। इससे बाद में पक्का दांत टेढ़ा-मेढ़ा निकलने की समस्या हो सकती है और कुछ मामलों में आगे चलकर ब्रेसेस की जरूरत पड़ सकती है। सवाल : बच्चों की डाइट और दांतों की सफाई में किसे अधिक महत्व देंगी? डॉ. पूर्णिमा : दोनों पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चों को चिपचिपी और अत्यधिक मीठी चीजें कम देनी चाहिए। फल, हरी सब्जियां, दूध, पनीर और दही जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ आहार में शामिल किए जा सकते हैं। सुबह और रात दो मिनट तक अच्छी तरह ब्रश करवाएं और विशेष रूप से रात का ब्रश कभी न छोड़ें। छोटी उम्र से अच्छी आदतें विकसित करना ही बच्चों के दांतों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने की कुंजी है।
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