टीम एबीएन, रांची। झारखंड के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी के लगातार प्रयास, विभागीय समन्वय और प्रभावी पहल के परिणामस्वरूप भारत सरकार ने राज्य के दो प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस एवं पोस्ट ग्रेजुएट सीटों में बड़े पैमाने पर वृद्धि को मंजूरी दे दी है।
यह निर्णय न केवल राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।
शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद में वर्तमान में 100 एमबीबीएस सीटें थीं, जिन्हें बढ़ाकर अब 250 कर दिया गया है। यानी कुल 150 नई सीटों की वृद्धि हुई है।
वहीं, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में भी सीटों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को स्वीकृति मिली है। इस पूरी योजना के तहत केंद्र सरकार ने एमबीबीएस सीट विस्तार के लिए 225 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें 135 करोड़ केंद्र सरकार की हिस्सेदारी होगी।
इसके साथ ही विभिन्न विभागों में पोस्ट ग्रेजुएट सीटों की भी मंजूरी दी गयी है, जिससे राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड लंबे समय से डॉक्टरों की कमी की समस्या से जूझ रहा था। आजादी के बाद वर्षों तक मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित विस्तार नहीं हो सका। पिछले लगभग 20 वर्षों में न तो पर्याप्त सीटें बढ़ायी गयी और न ही मेडिकल शिक्षा को उस स्तर तक विकसित किया गया, जिसकी राज्य को आवश्यकता थी।
उन्होंने कहा कि यदि मेहनत, ईमानदारी और संकल्प के साथ प्रयास किया जाये तो कोई भी असंभव कार्य संभव हो सकता है। झारखंड में एमबीबीएस सीटें काफी कम थीं और डॉक्टरों की भारी कमी थी। हमारा लक्ष्य था कि अधिक से अधिक बच्चे झारखंड से डॉक्टर बनें और अपने ही राज्य में रहकर लोगों की सेवा करें। आज वह सपना साकार हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सीटों में वृद्धि का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और पिछड़े इलाकों को मिलेगा। आने वाले वर्षों में राज्य में बड़ी संख्या में नये डॉक्टर तैयार होंगे, जो गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सीट बढ़ने की खबर नहीं है, बल्कि झारखंड के भविष्य को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक फैसला है। इससे गरीब, आदिवासी, दलित, पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को मेडिकल शिक्षा में अधिक अवसर मिलेगा।
डॉ. इरफान अंसारी ने इस उपलब्धि का श्रेय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, विशेष रूप से अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह एवं पूरी टीम को दिया। उन्होंने कहा कि लगातार मॉनिटरिंग, केंद्र सरकार से समन्वय और प्रभावी प्रस्तुति के कारण यह सफलता संभव हो सकी।
उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी टीम की मेहनत का परिणाम है। मैं स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देता हूं, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर इस ऐतिहासिक कार्य को सफल बनाया।
भारत सरकार की मंजूरी के बाद राज्यभर के मेडिकल छात्रों और युवाओं में खुशी की लहर है। मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में इसे झारखंड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। अब राज्य के अधिक छात्रों को मेडिकल शिक्षा के लिए बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी और झारखंड में ही बेहतर शिक्षा एवं प्रशिक्षण का अवसर उपलब्ध हो सकेगा।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी जल्द सीटें बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी वृद्धि की जायेगी।
उन्होंने कहा कि इससे एक ओर जहां झारखंड के छात्रों को चिकित्सा शिक्षा में अधिक अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर राज्य में डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी। अब इस प्रस्ताव को आगे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा।
एबीएन हेल्थ डेस्क। गर्मी मे योग शरीर की आंतरिक प्रणालियों को संतुलित करने वाली एक वैज्ञानिक पद्धति है। योग शरीर, श्वास और मन के बीच समन्वय स्थापित करता है।
वर्तमान समय में बढ़ती हुई गर्मी केवल मौसम का परिवर्तन नहीं रह गई है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि पृथ्वी का लगातार बढ़ता तापमान, हीट वेव की स्थिति, वातावरण में बढ़ती गर्म हवाएँ और बदलती जीवनशैली मानव शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही हैं। विशेष रूप से भारत जैसे देशों में जहाँ ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव अत्यधिक तीव्र होता है, वहाँ भीषण गर्मी बच्चों, युवाओं, श्रमिकों तथा वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है। गर्मी का प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, कार्यक्षमता, नींद, पाचन, हृदय तथा श्वसन प्रणाली को भी प्रभावित करता है। ऐसे समय में योग केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि शरीर और मन को प्रकृति के अनुरूप संतुलित रखने वाली एक वैज्ञानिक जीवनशैली के रूप में सामने आता है।
मानव शरीर सामान्य रूप से लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कार्य करता है। जब बाहरी वातावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब शरीर स्वयं को ठंडा रखने के लिए अनेक प्रक्रियाएँ शुरू करता है। शरीर में पसीना निकलना उसी प्राकृतिक प्रणाली का हिस्सा है। पसीने के माध्यम से शरीर अपनी अतिरिक्त गर्मी बाहर निकालने का प्रयास करता है, लेकिन लगातार अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी तथा आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम की कमी होने लगती है। यही स्थिति धीरे-धीरे कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सिर दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन तथा डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं को जन्म देती है। जब शरीर लंबे समय तक अत्यधिक तापमान को सहन नहीं कर पाता, तब हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। हीट स्ट्रोक की स्थिति में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और मस्तिष्क सहित शरीर के अनेक महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लगते हैं। कई बार यह स्थिति जीवन के लिए भी खतरनाक सिद्ध हो सकती है।
भीषण गर्मी का प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अत्यधिक तापमान के कारण मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव, गुस्सा, बेचैनी, ध्यान की कमी तथा नींद में व्यवधान जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि अत्यधिक गर्मी शरीर में Cortisol जैसे तनाव हार्मोन के स्तर को बढ़ा देती है। इसके अतिरिक्त गर्मी के कारण हृदय को शरीर को ठंडा बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हृदय गति बढ़ने लगती है और ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। बुजुर्गों और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों में यह स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में योग मानव शरीर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। योग केवल मांसपेशियों को खींचने या शरीर को लचीला बनाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर की आंतरिक प्रणालियों को संतुलित करने वाली एक वैज्ञानिक पद्धति है। योग शरीर, श्वास और मन के बीच समन्वय स्थापित करता है। जब व्यक्ति नियमित रूप से योग और प्राणायाम का अभ्यास करता है, तब शरीर की Nervous System विशेष रूप से Parasympathetic Nervous System अधिक सक्रिय होने लगता है। यही प्रणाली शरीर को शांत करने, हृदय गति को नियंत्रित रखने, मानसिक तनाव कम करने तथा शरीर के तापमान को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही कारण है कि भीषण गर्मी में योग शरीर को केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक शीतलता प्रदान करता है।
गर्मी के मौसम में विशेष रूप से चंद्रवेदी, शीतली और शीतकारी प्राणायाम अत्यंत लाभकारी माने गए हैं। योग विज्ञान में चंद्रवेदी प्राणायाम को शीतलता प्रदान करने वाला प्राणायाम माना जाता है। इसमें बाईं नासिका से श्वास ग्रहण की जाती है। योग के अनुसार बाईं नाड़ी अर्थात इड़ा नाड़ी का संबंध चंद्र ऊर्जा से माना गया है, जो मानसिक शांति, संतुलन और शीतलता प्रदान करती है।
आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो बाईं नासिका से नियंत्रित श्वसन Parasympathetic नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे शरीर की उत्तेजना कम होती है और हृदय गति नियंत्रित रहती है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और शरीर को भीतर से शीतल अनुभव होने लगता है। यह प्राणायाम विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें गर्मी के कारण बेचैनी, अनिद्रा, सिर भारी रहना या मानसिक तनाव महसूस होता है।
शीतली प्राणायाम को प्राकृतिक एयर कंडीशनर भी कहा जाता है। इसमें जीभ को नली के समान मोड़कर मुंह से श्वास ली जाती है। जब हवा जीभ की नमी से होकर शरीर में प्रवेश करती है, तब उसका तापमान अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है। यह ठंडी वायु शरीर के आंतरिक ताप को नियंत्रित करने में सहायता करती है।
वैज्ञानिक रूप से यह प्राणायाम शरीर की मेटाबोलिक एक्टिविटी को संतुलित करता है तथा नर्वस सिस्टम को शांत करता है। इससे शरीर में उत्पन्न अतिरिक्त गर्मी कम होती है और व्यक्ति को तुरंत शांति एवं ठंडक का अनुभव होता है। जिन लोगों को गर्मी के कारण अत्यधिक प्यास, शरीर में जलन, एसिडिटी या बेचैनी महसूस होती है, उनके लिए यह प्राणायाम विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
शीतकारी प्राणायाम भी गर्मी में अत्यंत प्रभावी माना गया है। इसमें दांतों के बीच से धीरे-धीरे श्वास ली जाती है। इस प्रक्रिया में भीतर प्रवेश करने वाली वायु शीतल प्रभाव उत्पन्न करती है। यह अभ्यास शरीर में लार ग्रंथियों को सक्रिय करता है, जिससे शरीर में Hydration Balance बेहतर बना रहता है। साथ ही यह मानसिक तनाव को कम कर मन को शांत करता है।
आधुनिक जीवनशैली में जहाँ लोग अत्यधिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और गर्म वातावरण में कार्य करते हैं, वहाँ ये प्राणायाम शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। गर्मी के मौसम में योगासन का चयन भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अत्यधिक कठिन और ऊर्जा खर्च करने वाले अभ्यासों की अपेक्षा ऐसे योगासन अधिक लाभकारी होते हैं जो शरीर को शांत और स्थिर रखें।
मकरासन, शशांकासन, शवासन, ताड़ासन, पश्चिमोत्तानासन और योगनिद्रा जैसे अभ्यास शरीर की ऊर्जा को संतुलित रखते हैं तथा नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं। विशेष रूप से शवासन और योगनिद्रा मानसिक तनाव को कम कर शरीर की आंतरिक थकान को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं। इसके विपरीत अत्यधिक तेज गति से किए जाने वाले सूर्य नमस्कार, अत्यधिक कपालभाति या भस्त्रिका जैसे अभ्यास गर्मी के मौसम में सीमित मात्रा में ही करने चाहिए, क्योंकि ये शरीर की ऊष्मा को बढ़ा सकते हैं।
भीषण गर्मी से बचने के लिए केवल योग ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवनशैली और आहार में भी संतुलित परिवर्तन आवश्यक है। गर्मी के मौसम में शरीर को हल्का, सुपाच्य और जलयुक्त भोजन की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, नारियल पानी, छाछ, बेल का शरबत और सत्तू जैसे प्राकृतिक पेय एवं फल शरीर में जल संतुलन बनाए रखने में सहायता करते हैं।
अत्यधिक तले हुए, मसालेदार और जंक फूड शरीर में गर्मी बढ़ाने का कार्य करते हैं, इसलिए इनका सेवन कम करना चाहिए। अधिक चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं। मिट्टी के घड़े का पानी पीना आज भी वैज्ञानिक दृष्टि से लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह पानी को प्राकृतिक रूप से संतुलित तापमान पर रखता है।
दैनिक दिनचर्या में भी कुछ आवश्यक परिवर्तन गर्मी से राहत प्रदान कर सकते हैं। सुबह जल्दी उठकर योग और प्राणायाम करना शरीर को पूरे दिन के लिए संतुलित बनाता है। दोपहर के समय अत्यधिक धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के सूती वस्त्र पहनना, पर्याप्त नींद लेना तथा समय-समय पर पानी पीते रहना शरीर को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। घरों में उचित वेंटिलेशन और प्राकृतिक हवा का प्रवाह भी आवश्यक है। सिर को ढककर बाहर निकलना तथा शरीर को सीधे गर्म हवाओं से बचाना हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करता है।
बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए गर्मी के प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। बच्चों में शरीर का ताप नियंत्रण तंत्र पूर्ण विकसित नहीं होता, इसलिए उनमें पानी की कमी जल्दी हो जाती है। उन्हें समय-समय पर पानी, फल और तरल पदार्थ देना आवश्यक है। युवा वर्ग जो लंबे समय तक धूप में कार्य करता है या अत्यधिक व्यायाम करता है, उन्हें शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
वहीं वरिष्ठ नागरिकों में शरीर की ताप सहन क्षमता कम हो जाती है, इसलिए उन्हें अधिक आराम, हल्का योग, नियमित जल सेवन और धूप से बचाव की आवश्यकता होती है। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान की समस्या से जूझ रही है, तब योग मानव जीवन को सुरक्षित रखने वाली एक महत्वपूर्ण जीवनशैली के रूप में उभर रहा है। योग केवल रोगों से बचने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की कला है।
चंद्रवेदी, शीतली और शीतकारी जैसे प्राणायाम शरीर को वैज्ञानिक रूप से शीतलता प्रदान करते हैं, मानसिक तनाव कम करते हैं तथा शरीर की आंतरिक प्रणालियों को संतुलित रखते हैं। यदि नियमित योग, संतुलित आहार, उचित दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाया जाए, तो भीषण गर्मी के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है और स्वस्थ, शांत तथा ऊर्जावान जीवन जिया जा सकता है। उक्त जानकारी योगाचार्य महेश पाल (MA & Phd in Yoga) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 13 मई 2026 को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के कार्यालय कक्ष में पैथोलॉजी जांच हेतु मशीन बनाने वाली Meril कंपनी का प्रेजेंटेशन आयोजित किया गया। बैठक में अपर मुख्य सचिव के साथ अवर सचिव धीरंजन शर्मा, मेरिल कंपनी के पदाधिकारी तथा C-DAC के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प्रेजेंटेशन के दौरान मेरिल कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि राज्य के अस्पतालों में पूर्व से अधिष्ठापित कंपनी की सेमी ऑटोमेटिक पैथोलॉजिकल मशीनों को बदलकर नई फुली ऑटोमेटिक मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इन मशीनों की विशेषता यह होगी कि एक साथ 50 सैंपलों की जांच की जा सकेगी। कंपनी की ओर से मशीनों पर 10 वर्षों तक मेंटेनेंस सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
नई मशीनों के माध्यम से यूरिन और ब्लड से संबंधित लगभग सभी पैथोलॉजिकल जांचें की जा सकेंगी। मशीन से प्राप्त जांच रिपोर्ट सीधे मरीज के मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी जा सकेगी। कंपनी द्वारा संबंधित मैनपावर को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ सॉफ्टवेयर संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी।
बैठक के दौरान कंपनी के द्वारा एक लाइव डेमो दिया गया इसके माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार मशीन काम करती है और कैसे तत्काल रिपोर्ट देती है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रथम चरण में इन मशीनों को राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों एवं जिला अस्पतालों में स्थापित किया जाए। इसके बाद दूसरे चरण में राज्य के सभी सीएचसी एवं पीएचसी स्तर तक इसका विस्तार किया जाएगा। उन्होंने 15 जून 2026 तक सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मशीनों की स्थापना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसी दिन इन मशीनों का औपचारिक लॉन्च भी किया जाएगा।
टीम एबीएन, नामकुम (रांची)। कर्मचारी राज्य बीमा निगम ( ईएसआईसी) मुख्यालय के निर्देशानुसार, श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक पहल को धरातल पर उतारा जा रहा है। इस योजना का औपचारिक शुभारंभ माननीय केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा 07 मई 2026 को नई दिल्ली से किया गया था।
इसी क्रम में झारखंड के दो प्रमुख केंद्रों ईएसआईसी मॉडल अस्पताल नामकुम (रांची) और ईएसआईसी अस्पताल आदित्यपुर (जमशेदपुर) में यह वर्ष भर चलने वाली स्वास्थ्य जांच प्रक्रिया पूरी गति से जारी रहेगी। जिसमे व्यापक स्वास्थ्य जांच और आधुनिक सुविधाएं रहेंगी। ईएसआईसी अस्पतालों में आयोजित इन शिविरों में श्रमिकों के लिए निम्नलिखित जांच नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं:
उद्योग जगत और नियोक्ता संगठनों का पूर्ण सहयोग मिल रहा है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित फेडरेशन चैंबर आॅफ कॉमर्स व नियोक्ताओ के प्रतिनिधि प्रमोद सारस्वत ने इस पहल के प्रति अत्यंत सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया।
उन्होंने आश्वस्त किया कि नियोक्ता संघ इस पूरी प्रक्रिया में ईएसआईसी का पूर्ण सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत इस स्वास्थ्य जांच अभियान का भरपूर लाभ उठायेगा और अधिक से अधिक श्रमिकों को जांच के लिए प्रोत्साहित करेगा ताकि कार्यबल स्वस्थ और सशक्त बना रहे।
बीमा आयुक्त (पूर्व एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र) श्री प्रणय सिन्हा ने ईएसआईसी मॉडल अस्पताल, नामकुम का निरीक्षण करते हुए श्रमिकों की संख्या बढ़ाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के विजन के अनुरूप, यह सेवा पूरे वर्ष निर्बाध रूप से उपलब्ध रहेगी।
इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशक शिवेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप कुमार, चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार शर्मा, और सहायक निदेशक अभिषेक कुमार सहित अन्य चिकित्सा कर्मी और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
ईएसआईसी प्रशासन सभी नियोक्ताओं से अपील करता है कि वे अपने श्रमिकों को इस नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच का लाभ दिलाने के लिए नजदीकी ईएसआईसी अस्पताल भेजें। उक्त जानकारी सहायक निर्देशक अभिषेक कुमार ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने तथा विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है।
इसी क्रम में आज स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के नोडल पदाधिकारी छवि रंजन की अध्यक्षता में उनके कार्यकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने विभाग का नोडल आॅफिसर छवि रंजन को बनाया है और अपर मुख्य सचिव के मार्गदर्शन में बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में झारखंड मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ साहिर पाल, झारखंड मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सह सचिव डॉ विमलेश कुमार सिंह तथा स्टेट आईएमए झारखंड के प्रतिनिधि डॉ शंभू प्रसाद उपस्थित थे। बैठक में झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल रूल 2023 के रूल नंबर 55 की विस्तार से समीक्षा की गयी। वर्तमान नियम के अनुसार झारखंड में चिकित्सा सेवा देने वाले सभी डॉक्टरों के लिए राज्य में निबंधन अनिवार्य है।
इसके तहत दूसरे राज्यों से आने वाले चिकित्सकों को भी, भले ही वे पहले से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग या किसी अन्य राज्य मेडिकल काउंसिल में निबंधित हों, झारखंड में अलग से निबंधन कराना पड़ता है। बिना निबंधन के वे राज्य में प्रैक्टिस नहीं कर सकते।
बैठक में इस नियम से उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि बाहर से आने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों को अतिरिक्त औपचारिकताओं के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिससे राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता भी प्रभावित होती है।
विमर्श के बाद इस बात पर सहमति बनी कि रूल नंबर 55 में आवश्यक संशोधन को लेकर राज्य सरकार को सुझाव भेजे जायेंगे। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य यह होगा कि दूसरे राज्यों से आने वाले योग्य एवं निबंधित डॉक्टरों को झारखंड में चिकित्सा सेवा देने में सुविधा मिल सके।
बैठक में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। यदि विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए व्यवस्था सरल होगी तो राज्य के मरीजों को भी सुपर स्पेशियलिटी और बेहतर उपचार का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया कि प्राप्त सुझावों पर सरकार स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी, ताकि चिकित्सकों के लिए प्रक्रिया सहज हो और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
टीम एबीएन, रांची । राज्य के निर्माणाधीन एवं निर्मित अस्पतालों की समग्र योजना जिसमें मरीज की सुविधा, अस्पतालों की महत्वपूर्ण इकाइयों यथा आईसीयू, सीसीयू, एचडीयू, ऑपरेशन थियेटर (ओटी), आईपीडी, कैथ लैब, डायग्नोस्टिक एवं रेडियोलॉजी सेंटर के उपयुक्त स्थल निर्धारण किया जाने हेतु विभागीय स्तर से रिम्स तथा अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों के विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है जिसकी बैठक आज श्री अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
समिति का मुख्य उद्देश्य निर्माणाधीन एवं निर्मित मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की योजनाओं की समग्र समीक्षा करना तथा भवन डिजाइन में आवश्यक संशोधन कर मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
समिति का दायित्व निर्माणाधीन परियोजनाओं के मौजूदा डिजाइन का गहन परीक्षण करना और जहां आवश्यकता हो, वहां संशोधन या पुनर्रचना के लिए स्पष्ट अनुशंसा करना है। इसके साथ ही एकेडमिक भवन, आवासीय परिसर और स्पोर्ट्स कांप्लेक्स जैसे आधारभूत संरचनाओं के समुचित विस्तार और स्थान निर्धारण पर भी समिति सुझाव देगी।
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि निर्माण एजेंसियां अपने विशेषज्ञ परामर्शदाताओं के साथ समिति के समक्ष विस्तृत डिजाइन, योजना और विभागीय व्यवस्थाओं का प्रस्तुतिकरण करें।
साथ ही भवन निर्माण विभाग और अन्य संबंधित स्टेकहोल्डर्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। सरकार की इस पहल से राज्य के अस्पतालों में सुविधाओं का स्तर सुधारने और मरीजों को अधिक सुगम, सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
इस समिति में रिम्स और अन्य संस्थानों के वरिष्ठ चिकित्सक एवं विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें कार्डियोलॉजी, क्रिटिकल केयर, मेडिसिन, सर्जरी, ऑन्कोलॉजी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।
इस उच्चस्तरीय समिति में रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. हेमंत नारायण एम, क्रिटिकल केयर विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार भट्टाचार्य, डॉक्टर प्रकाश कुमार बोथरा, डॉक्टर निशीथ एक्का, मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजीत कुमार डुंगडुंग तथा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार कमाल को सदस्य बनाया गया है।
इसके अलावा सदर अस्पताल, रांची के ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. गुंजेश कुमार सिंह, रिम्स के पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंशु जमैयार और रेडियोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनीश कुमार चौधरी भी समिति में शामिल हैं। साथ ही जेएसबीसीसीएल के जीएम स्तर के अधिकारी को भी समिति का सदस्य बनाया गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने आज लोअर चुटिया सामलौंग स्थित लोटा फैक्ट्री के सामने आयरन टेंपल जिम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में गोमिया के पूर्व विधायक लंबोदर महतो एवं रांची नगर निगम वाटर बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सुरेश साहु भी उपस्थित थे। इस अवसर पर सुदेश महतो ने कहा कि आज के समय में शारीरिक एवं मानसिक फिटनेस का होना जरूरी है और इसके लिए जिम बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जिम जैसे संस्थान युवाओं को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। श्री महतो ने जिम के संचालक अमृत कुमार की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होती है। इस अवसर पर सुदेश महतो, लम्बोदर महतो और सुरेश साहु ने जिम में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों का निरीक्षण एवं ट्रायल भी किया।
जिम के संचालक एवं हेड कोच अमृत कुमार ने बताया कि उन्हें फिटनेस के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे मुंबई के आई एफ एस आई इंस्टीट्यूट में प्रमाणित ट्रेनर हैं। उन्होंने कहा कि इस जिम का उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, फिटनेस और अनुशासन की ओर प्रेरित करना है।
इस अवसर पर वीरेंद्र कुमार सिंह, लक्ष्मीनारायण प्रसाद, ऋषिकेश महतो, प्रभुदयाल बड़ाईक, छात्रधारी महतो, अधिवक्ता मृत्युंजय प्रसाद, कृष्णा शर्मा, नितेश शर्मा, रंजन पंडित, राजू शर्मा,मौलेश्वर पंडित, अनिल कुमार, अभिषेक कुमार, सुनीता देवी, कौशल्या देवी, अनिमा कुमारी, राजेश कुमार, मनोज कुमार, एम आर महतो, राजीव रंजन, नीरज कुमार, धूमा पुरान समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग युवा एवं स्थानीय लोग उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज उनके कार्यालय कक्ष में मेरील कंपनी द्वारा लैब इनफॉरमेशन सिस्टम का प्रजेंटेशन दिया गया। यह सिस्टम राज्य के सभी स्तरों—मेडिकल कॉलेज से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक लागू किया जायेगा।
प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, इस सिस्टम को विभाग के मौजूदा हॉस्पिटल मैनेजमेंट इनफॉरमेशन सिस्टम, जिसे सी-डैक द्वारा संचालित किया जा रहा है, के साथ इंटीग्रेट किया जायेगा। इसके माध्यम से मरीजों को उनकी जांच रिपोर्ट सीधे मोबाइल पर उपलब्ध करायी जा सकेगी, जिससे समय की बचत होगी और सेवाएं अधिक पारदर्शी बनेंगी।
इस प्रणाली के लागू होने से विभाग को जांच संबंधी कार्यों की बेहतर मॉनिटरिंग करने में सुविधा मिलेगी। कितने मरीजों की जांच हुई, किस प्रकार की जांच की गयी और विभिन्न जांचों की संख्या जैसी जानकारियां रियल टाइम में उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही लैब में उपलब्ध रिएजेंट्स की अद्यतन स्थिति भी आसानी से देखी जा सकेगी, जिससे समय पर खरीद की प्रक्रिया सरल होगी और वेस्टेज पर नियंत्रण लगेगा।
बैठक में बताया गया कि यह सॉफ्टवेयर मेरील कंपनी द्वारा विभाग को निशुल्क उपलब्ध कराया जायेगा। इसे न केवल एचएमआईएस बल्कि ई-सुश्रुत प्रणाली से भी जोड़ा जायेगा। उल्लेखनीय है कि मेरील द्वारा पहले से ही सीएचसी और पीएचसी स्तर पर आॅटो एनालाइजर और सेमी-आॅटो एनालाइजर की आपूर्ति की जा चुकी है, जिन्हें भी इस सिस्टम से जोड़ा जायेगा।
साथ ही, अन्य कंपनियों की मशीनों को भी इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सकेगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव के साथ अपर सचिव विद्यानंद शर्मा, पंकज, डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं मेरील कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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