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Published / 2026-02-10 21:28:22
राज्य सूचीबद्धता समिति की बैठक में बड़े फैसले, एचईएम 2.0 अनुपालन पर सख्ती

तकनीकी त्रुटियों पर अस्पतालों के रिक्वेस्ट रद्द, अपग्रेडेशन पर रोक और आवश्यक दस्तावेजों के बिना मंजूरी नहीं 

टीम एबीएन, रांची। दिनांक 10 फरवरी 2026 को आहूत राज्य सूचीबद्धता समिति की बैठक में समिति के सभी सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बैठक की अध्यक्षता झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने की। बैठक में सूचीबद्ध निजी अस्पतालों से संबंधित विभिन्न मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। 

तकनीकी समस्या अथवा मानवीय भूल के कारण एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपडेट किये गये कुछ विद्ड्रॉल रिक्वेस्ट के संबंध में अस्पतालों के ईमेल एवं संबंधित जिला सिविल सर्जन की अनुशंसा के आधार पर चार अस्पतालों के रिक्वेस्ट को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। 

इनमें हजारीबाग का न्यू झारखंड नर्सिंग होम, पूर्वी सिंहभूम का टाटा मोटर्स हॉस्पिटल प्लांट, पलामू का श्री नारायण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल तथा पलामू का मय्यन बाबू अस्पताल शामिल हैं। 

बैठक में यह भी पाया गया कि कई सूचीबद्ध निजी अस्पतालों द्वारा एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपग्रेड रिक्वेस्ट के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की गाइडलाइन एवं दिशा-निदेर्शों के अनुरूप आवश्यक वैधानिक लाइसेंस एवं दस्तावेज अपलोड नहीं किये गये हैं। 

विशेष रूप से रांची म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, डीआरडीए अथवा बीडीओ द्वारा अनुमोदित बिल्डिंग प्लान से संबंधित दस्तावेजों की अनुपलब्धता सामने आयी। साथ ही, अस्पतालों द्वारा आउटसोर्स की गयी सुविधाओं जैसे फार्मेसी, ब्लड बैंक और रेडियोलॉजिकल सुविधाएं (एक्स-रे, सीटी स्कैन) के लिए स्टांप पेपर पर इकरारनामा तथा संबंधित वैधानिक लाइसेंस जैसे फामेर्सी लाइसेंस, ब्लड बैंक लाइसेंस एवं एईआरबी सर्टिफिकेट को एचईएम 2.0 पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। 

इन कमियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व में लिए गए निर्णयों के आधार पर तीन सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के अपग्रेडेशन रिक्वेस्ट के अनुमोदन पर रोक लगाने का फैसला किया गया। इसके अलावा, जिन अस्पतालों ने सीटीई, सीटीओ और फायर सेफ्टी एनओसी के लिए आवेदन किया है, उनकी सूची झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड एवं फायर सेफ्टी आफिस के नोडल अधिकारियों को भेजने का निर्णय भी लिया गया। 

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेशन के बिना किसी भी डॉक्टर या स्पेशलिस्ट को जोड़ने की अनुमति नहीं होगी। सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के लिए एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट होना अनिवार्य कर दिया गया है। 

इन निर्णयों से राज्य में आयुष्मान भारत-मुख्य मंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना एवं अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

Published / 2026-02-09 23:27:39
झारखंड : फाइलेरिया उन्मूलन में जुटा स्वास्थ्य विभाग

  • झारखंड : फाइलेरिया उन्मूलन में जुटा स्वास्थ्य विभाग

टीम एबीएन, रांची। रांची जिले में फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन के उद्देश्य से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए-26) अभियान का आयोजन 10 फरवरी से 25 फरवरी तक किया जाएगा। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ। प्रभात कुमार ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर अभियान की विस्तृत जानकारी दी और इसके महत्व पर प्रकाश डाला।

सिविल सर्जन ने बताया कि यह अभियान रांची जिले के कांके, सोनाहातू और तमाड़ प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत कुल 5,57,970 लक्षित जनसंख्या को फाइलेरिया रोधी दवाएं डीईसी और अल्बेंडाजोल का सेवन कराया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से कम आयु के बच्चों और अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी। अभियान के पहले दिन 10 फरवरी को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक भवनों में बूथ लगाकर लोगों को दवा खिलाई जाएगी। 

इसके बाद 11 फरवरी से 25 फरवरी तक स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर शेष लक्षित आबादी को दवा का सेवन कराएंगे। इसके लिए जिले में कुल 619 बूथ बनाए गए हैं, जहां 1238 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर तैनात किए गए हैं। अभियान की निगरानी के लिए 106 सुपरवाइजरों की भी व्यवस्था की गई है।

जन-जागरूकता और विभागीय सहयोग पर जोर

सिविल सर्जन ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है, ताकि शत-प्रतिशत लक्षित आबादी दवा का सेवन करे। इसके लिए विभिन्न विभागों से भी सहयोग लिया जा रहा है और लोगों को दवा सेवन के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा जरूरी
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक वेक्टर जनित बीमारी है, जो गंदे पानी में पनपने वाले संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन इससे शरीर में स्थायी विकृति और दिव्यांगता हो सकती है। इसलिए एमडीए अभियान के दौरान सभी पात्र व्यक्तियों के लिए दवा का सेवन करना आवश्यक है।

दवा सेवन को लेकर अपील और सावधानी
सिविल सर्जन ने बताया कि दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों को दवा अवश्य खिलाएं। इस अवसर पर मलेरिया पदाधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी भी मौजूद रहे।

Published / 2026-02-09 21:26:48
आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की विस्तृत समीक्षा

पोर्टेबिलिटी, पैकेज उपयोग, पुन: भर्ती और एआई आधारित निगरानी पर रहा फोकस 

टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नई दिल्ली के मुख्य वित्तीय पदाधिकारी गयासुद्दीन अहमद ने झारखंड सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी अध्यक्ष छवि रंजन, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा, वरिष्ठ परामर्शी सुनील प्रसाद सिंह, विश्वजीत प्रसाद, वैभव राय सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। 

बैठक में योजना की समग्र प्रगति पर चर्चा करते हुए कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने बताया कि झारखंड में लाखों परिवार इस योजना के अंतर्गत आच्छादित हैं और करोड़ों लाभुकों को माध्यमिक एवं तृतीयक स्तर की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी एवं निजी अस्पताल सूचीबद्ध हैं, जहां हजारों प्रकार के उपचार पैकेजों के माध्यम से गंभीर से गंभीर बीमारियों का नि:शुल्क इलाज संभव हो पाया है। समीक्षा के दौरान पोर्टेबिलिटी से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

इसमें यह सामने आया कि झारखंड के मरीज इलाज के लिए किन-किन अन्य राज्यों में अधिक जाते हैं, किन अस्पतालों में बाह्य-राज्य मरीजों का दबाव ज्यादा है और कौन-से उपचार पैकेजों में पोर्टेबिलिटी के मामले सर्वाधिक हैं। कार्यकारी निदेशक ने कहा कि इन आंकड़ों से राज्य में ही उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा तय करने में मदद मिलेगी। 

निजी अस्पतालों में रोगवार पैकेज उपयोग पर चर्चा के दौरान कार्यकारी निदेशक द्वारा जानकारी दी गई कि कुछ विशिष्ट बीमारियों में दावों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। वहीं सरकारी अस्पतालों में जिलावार पैकेज उपयोग की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह आकलन किया गया कि किन जिलों में उपचार सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को बाहर न जाना पड़े। 

बैठक में 30 दिनों के भीतर पुन: भर्ती से जुड़े मामलों का भी विस्तार से विश्लेषण किया गया। इसमें उन अस्पतालों और पैकेजों की पहचान की गई जहां री-एडमिशन के मामले अधिक सामने आये हैं। इस पर उपचार की गुणवत्ता, फॉलो-अप व्यवस्था और मानक उपचार प्रोटोकॉल के पालन को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया। 

इसके अलावा तकनीकी प्रणाली और डेटा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। टीएमएस और राज्य डेटा वेयरहाउस से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह रेखांकित किया गया कि पैकेज के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित विश्लेषण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यकारी निदेशक ने बताया कि  संदिग्ध दावे और बार-बार होने वाली अनियमितताओं की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार से 275 करोड़ रुपये तथा केंद्र सरकार से 178 करोड़ रुपये की राशि झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी को प्राप्त हो चुकी है, जिससे योजना के सुचारु संचालन और दावों के समयबद्ध भुगतान को मजबूती मिली है। 

समीक्षा बैठक के अंत में श्री गयासुद्दीन अहमद ने केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय को और मजबूत करने, आईटी सिस्टम को सुदृढ़ करने तथा निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को और पारदर्शी, प्रभावी एवं लाभुक-केंद्रित बनाया जा सकेगा।

Published / 2026-02-06 21:57:48
108 एंबुलेंस सेवा ओला मॉडल पर होगी संचालित, पूरी तरह फ्री रहेगी सुविधा

पीपीपी मोड पर पैथोलॉजीझ्ररेडियोलॉजी, पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति और अस्पतालों में मशीनझ्रउपकरण खरीद पर अहम बैठक 

टीम एबीएन, रांची। अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार की अध्यक्षता में आज उनके कार्यालय कक्ष में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गयी। 

बैठक में 108 एंबुलेंस परिचालन के लिए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, पीपीपी मोड पर पैथोलॉजी एवं रेडियोलॉजी सेवाएं लेने हेतु आरएफपी, पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति तथा जिलों द्वारा मशीन एवं उपकरण क्रय से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गयी। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, विभाग के उप सचिव श्री ध्रुव प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ओला मॉडल पर संचालित होगी 108 एंबुलेंस सेवा 

बैठक में सबसे पहले 108 एंबुलेंस संचालन को लेकर चर्चा की गयी। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि जल्द ही 108 एंबुलेंस सेवा ओला एवं अन्य निजी कंपनियों की तर्ज पर कार्य करेगी। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जिसे एंबुलेंस से जोड़ा जाएगा। सर्विस लेवल एग्रीमेंट तैयार किया जा रहा है, जिससे एजेंसी और कॉल सेंटर की प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सकेगी। 

उन्होंने कहा कि नयी एंबुलेंस में जीपीएस, एमडीटी डिवाइस सहित सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह सेवा पूरी तरह नि:शुल्क होगी और मरीज को किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। व्यवस्था ऐसी होगी कि कोई भी मरीज न केवल सरकारी बल्कि किसी भी अस्पताल जाने के लिए एंबुलेंस बुक कर सकेगा। इस सुविधा को पहले 10 वर्षों के लिए लागू किया जायेगा तथा ओला की तरह इसका मोबाइल ऐप भी विकसित किया जायेगा। 

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि ड्राइवरों की बायोमेट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था लागू होगी। समय से पहले पहुंचने पर एजेंसी को इंसेंटिव और देरी होने पर पेनल्टी का प्रावधान किया जाएगा। भविष्य में निजी एंबुलेंस को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा और उन्हें प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाएगा, जबकि सेवा आम जनता के लिए नि:शुल्क ही रहेगी। 

पीपीपी मोड पर पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी सेवाएं 

बैठक में पीपीपी मोड पर पैथोलॉजी एवं रेडियोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु आरएफपी पर भी चर्चा हुई। यह सुविधाएं जिला अस्पतालों और अनुमंडलीय अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाएंगी। आम जनता को सीजीएचएस दर पर सभी जांच सुविधाएं मिलेंगी, जिससे इलाज सस्ता और सुलभ होगा। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि एजेंसी को पहले 5 वर्षों के लिए और बेहतर प्रदर्शन की स्थिति में 3 वर्षों के लिए विस्तार दिया जाएगा। 

पैरामेडिकल स्टाफ की कमी होगी दूर 

इसके उपरांत टेक्निकल पैरामेडिकल स्टाफ की कमी पर चर्चा की गई। जिला से लेकर पंचायत स्तर के अस्पतालों में स्टाफ की कमी को देखते हुए आउटसोर्सिंग के माध्यम से पैरामेडिकल कर्मियों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया। इसके लिए आरएफपी पर विचार किया गया और जल्द ही राज्य में यह व्यवस्था लागू होने की संभावना है। 

अस्पतालों के लिए मशीनझ्रउपकरण खरीद 

बैठक के अंत में जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सीएससी, पीएचसी और एसएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मशीन एवं उपकरण क्रय पर चर्चा की गई। इसके लिए आवश्यक स्पेसिफिकेशन तय कर दिए गए हैं और शीघ्र ही खरीद प्रक्रिया एवं टेंडर जारी किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर मशीन या उपकरण की कमी न हो और स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से संचालित होती रहें। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आम जनता को समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं लगातार उपलब्ध करायी जाये।

Published / 2026-02-06 21:56:05
मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत 21 मरीजों को आर्थिक सहायता स्वीकृत

कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, ब्रेन इंजरी सहित गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को 5 से 10 लाख रुपये तक की मदद 

टीम एबीएन, रांची। राज्य सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के अंतर्गत गंभीर रोगों से पीड़ित जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत प्रदान की गयी है। झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कुल 24 मामलों पर विचार किया गया, जिनमें से 21 मरीजों को चिकित्सीय सहायता राशि स्वीकृत की गयी। 

स्वीकृत लाभार्थियों में धनवार (गिरिडीह) के इरशाद अंसारी, हुसैनाबाद (पलामू) की संगीता देवी, पाकुड़ की मेहरबानो खातून, गोमिया (बोकारो) के वैयुनंदन दुबे, बरवाडीह (लातेहार) की बेबी अनुष्का कुमारी, सरैयाहाट (दुमका) की सावित्री देवी, मेदिनीनगर (पलामू) के निवन ओझा, पत्थलगड़ा (चतरा) के सतीश कुमार सिन्हा, साहेबगंज सदर के मो. आसिफ आलम, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) के बेबी शिबम घोष, पथरगामा (गोड्डा) के बेबी मोनू कुमार महतो, धनबाद के नरेश शर्मा, मानगो, जमशेदपुर के सुमित कुमार तिवारी, कसमार (बोकारो) के चंद्रदीप नायक, बेरमो (बोकारो) के बेबी सूर्या कुमार यादव, निमडीह (सरायकेला-खरसावां) की रूपा सेन, डुमरी (गिरिडीह) के खिरोधर महतो, जमुआ (गिरिडीह) के प्रमोद कुमार यादव व महेंद्र प्रसाद यादव, डुमरी (गिरिडीह) के नरेश ठाकुर तथा चंद्रपुरा (बोकारो) के संदीप कुमार यादव शामिल हैं। 

इन सभी मरीजों को 5 लाख से 10 लाख रुपये तक की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। मरीजों का इलाज रांची, धनबाद, जमशेदपुर सहित राज्य के भीतर एवं वेल्लोर, वाराणसी जैसे राज्य से बाहर के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में कराया जा रहा है। वहीं डुमरिया (पूर्वी सिंहभूम) के शेख यूनुस, खूंटी की सरोजनी हस्सा और अमड़ापाड़ा (पाकुड़) की कोमल जायसवाल के मामलों में मरीजों की वर्तमान चिकित्सीय स्थिति का भौतिक सत्यापन कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। 

बैठक में यह भी स्पष्ट निर्देश दिया गया कि भविष्य में सभी आवेदनों के साथ मरीज की अद्यतन चिकित्सीय स्थिति, अस्पताल से प्राप्त अनुमान और सिविल सर्जन द्वारा सत्यापन अनिवार्य रूप से संलग्न किया जाए। राज्य सरकार के इस निर्णय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी और स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती प्राप्त होगी।

Published / 2026-02-05 17:44:46
फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 14 जिलों में जागरूकता रथ रवाना

स्वास्थ्य मंत्री और अपर मुख्य सचिव ने दवा खाकर किया अभियान का शुभारंभ 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में फाइलेरिया (हाथीपांव) उन्मूलन के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की गयी है। इसी क्रम में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के प्रचार-प्रसार हेतु राज्य के 14 जिलों के लिए जागरूकता रथ को रवाना किया गया। मौके पर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी तथा अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्वयं फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। 

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी श्री बिरेंद्र कुमार सिंह, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधि डॉ. अभिषेक एवं परिमल संस्था के पदाधिकारी, जिला परिषद अध्यक्ष, एएनएम, चिकित्सक, प्रखंड प्रमुख, मुखिया, सहिया तथा सेविकाएं-सहायिकाएं उपस्थित रहीं। 

जागरूकता रथ को रवाना करने के उपरांत फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर एक उन्मुखीकरण सह कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे सफल बनाने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक पूरे झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाना है। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा खिलायेंगे। 

उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे बिना किसी संकोच के दवा का सेवन करें। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में यह अभियान 14 जिलों में संचालित किया जा रहा है, जबकि 9 जिलों में पहले ही यह अभियान सफलतापूर्वक संपन्न किया जा चुका है। साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य के महत्वपूर्ण जिलों में शीघ्र ही मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। 

मौके पर अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग श्री अजय कुमार सिंह ने कहा कि फाइलेरिया एक पूर्णत: रोकथाम योग्य बीमारी है। समय पर और शत-प्रतिशत दवा सेवन से इस रोग को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में कार्य कर रही है। आमजन से अपील है कि स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा8 दी जा रही दवा का अवश्य सेवन करें और इस अभियान को सफल बनाएं, ताकि झारखंड को फाइलेरिया मुक्त राज्य बनाया जा सके। 

कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि फाइलेरिया एक अत्यंत गंभीर एवं खतरनाक बीमारी है, जिसमें हाथ-पैर हाथीपांव जैसे हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक बार बीमारी हो जाने के बाद इसका इलाज अत्यंत कठिन हो जाता है, इसलिए बचाव ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है। इसके लिए फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को छोड़कर सभी स्वस्थ व्यक्तियों को यह दवा अवश्य लेनी चाहिए। 

उन्होंने बीमारी के कारणों पर प्रकाश डालते हुए जल जमाव को रोकने, मच्छरदानी के उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही स्वयंसेवी संगठनों, जेएसएलपीएस, पीडीएस डीलरों, सहिया एवं अन्य सहयोगियों से शत-प्रतिशत दवा सेवन सुनिश्चित कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि जरा-सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। 

कार्यक्रम के अंत में राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी श्री बिरेंद्र कुमार सिंह ने जिलों से आए सभी पदाधिकारियों से अपील की कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करे। यदि कोई व्यक्ति दवा लेने से इंकार करता है, तो उसे प्रेरित कर समझाया जाए, ताकि इस जानलेवा बीमारी से आमजन को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

Published / 2026-01-31 23:07:55
योग से प्रशिक्षु पदाधिकारियों के समग्र स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव : डॉ मनीष रंजन

  • योग से प्रशिक्षु पदाधिकारियों के समग्र स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव : डॉ मनीष रंजन (महानिदेशक, श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान रांची)
  • योग व्यक्ति के जीवन स्तर को समृद्ध करता है :  संन्यासी मुक्तरथ (अध्यक्ष, सत्यानन्द योग मिशन, रांची) 

टीम एबीएन, रांची। झारखण्ड सिविल सेवा के कुल तीन सौ बयालीस (342) प्रशिक्षु पदाधिकारियों को संस्थागत प्रशिक्षण के साथ योगाभ्यास प्रशिक्षण को अनिवार्य रूप से दिया गया है। रांची स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में अभी चल रहे नवनियुक्त 342, प्रशिक्षु पदाधिकारियों को उनकी शारिरिक तंदुरूस्ती और मानसिक स्वास्थ्य के लिये पूरे प्रशिक्षण काल में पीटी के साथ योग का प्रशिक्षण दिया गया है।

स्वामी मुक्तरथ जी ने कहा कि अधिकारियों की संख्याबल को देखते हुए दो योग प्रशिक्षक को लगाया गया ताकि उन्हें योग का पूरा लाभ मिल सके। लगभग डेढ़ महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में अधिकारियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि योग से इस ठंढ के मौसम में हमलोगों को बहुत ज्यादा लाभ मिला, दिन भर स्फूर्ति बनी रहती थी और मन तरोताजा रहता था। इसे हमलोग अपने जीवनचर्या में शामिल करेंगे।

मुक्तरथ जी ने कहा कि महानिदेशक डॉ मनीष रंजन प्रशिक्षुओं को योग के लिये काफी प्रोत्साहित करते थे। ताकि पदाधिकारी अपने दिनभर के चलने वाले प्रशिक्षण काल में थकें नहीं और सजग रहते हुए विषयों को समझ पायें। प्रशिक्षण के समापन पर डॉ मनीष रंजन ने कहा कि अधिकारियों ने योग कक्षा की बहुत प्रशंसा किये हैं। इन्हें योग से काफी लाभ मिला है। निश्चित ही योग से समग्र स्वास्थ्य पर लाभ मिलता है। मुक्तरथ जी ने कहा कि यह प्रशिक्षण बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें राज्य के विभिन्न विभाग के महत्वपूर्ण पदों के लिये चयनित पदाधिकारी थे।

207 डिप्टी कलक्टर, पैंतीस डीएसपी, छप्पन  राज्य कर पदाधिकारी, दो कारा अधीक्षक, दस झारखण्ड शिक्षा सेवा, एक जिला समादेष्टा, आठ सहायक निबन्धक, चौदह श्रम अधीक्षक, छह प्रोबेशन पदाधिकारी, और तीन उत्पाद निरीक्षक की संख्या थी। सभी ने बहुत ही रुचिपूर्ण तरीके से योगासन, प्राणायाम, शिथिलीकरण, मुद्रा और ध्यान के प्रशिक्षण को प्राप्त किये। इनलोगों ने जीवन में योग को शामिल करने की महत्ता पर विश्वास प्रगट किये।

Published / 2026-01-28 20:47:12
बदलाव : नये बीमा वर्ष से सभी सूचीबद्ध अस्पतालों में सभी रोगों का होगा इलाज

राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना में बड़ा सुधार 

टीम एबीएन, रांची। राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अब लाभुकों को एक ही सूचीबद्ध अस्पताल में उपलब्ध सभी रोगों का इलाज मिल सकेगा। यह नयी व्यवस्था नये बीमा वर्ष से लागू होगी। इसके लिए झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी द्वारा नया टेंडर आमंत्रित किया गया है। इस संबंध में आज नामकुम स्थित निदेशालय भवन में प्री-बिड मीटिंग का आयोजन किया गया। 

बैठक की अध्यक्षता झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने की। बैठक के दौरान प्री-बिड में शामिल बीमा कंपनियों द्वारा उठाई गई सभी शंकाओं का समाधान किया गया। शंकाओं से संबंधित समाधान को तीन दिनों बाद वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जाएगा। 

कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने बताया कि यह योजना वर्ष 2025 में लागू हुई थी, लेकिन लाभुकों की यह शिकायत सामने आ रही थी कि एक ही अस्पताल में सभी रोगों का इलाज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए नयी व्यवस्था लायी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए बीमा वर्ष से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जायेंगी। 

उन्होंने बीडर्स से कहा कि ऐसे अस्पतालों का ही चयन किया जाए, जहां उपलब्ध सभी चिकित्सीय सेवाओं का लाभ लाभुकों को मिल सके। उनका कहना था कि योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी स्थिति में लाभुकों को परेशानी न हो और उन्हें प्रभावी, सुलभ एवं कैशलेस इलाज मिल सके। 

बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की अपर कार्यकारी निदेशक सीमा सिंह, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा तथा पदाधिकारी कुणाल भारती, अंशु कुमार सिंह और विवेक कुमार उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को पूरी योजना और बीड प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। 

जानकारी दी गयी कि राज्य से बाहर देशभर में 237 अस्पतालों को सूचीबद्धता के लिए चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही 12 लिस्टेड अस्पतालों को अनिवार्य रूप से सूचीबद्ध करना चयनित बीमा कंपनी के लिए आवश्यक होगा। इन अस्पतालों में वास्तविक दरों पर बीमा कंपनी द्वारा भुगतान किया जायेगा। 

इन 12 प्रमुख अस्पतालों में सीएमसी वेल्लोर, शंकर नेत्रालय, नारायण इंस्टीट्यूट आॅफ कार्डियक साइंसेज, एआईजी हैदराबाद, टाटा ग्रुप के सभी अस्पताल, आईएलबीएस नई दिल्ली, अपोलो हॉस्पिटल चेन्नई, मेदांता गुड़गांव, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, नारायण हेल्थ बेंगलुरु और बीएम बिरला अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा झारखंड के सभी बड़े अस्पतालों की सूची तैयार की गई है, जिन्हें बीमा कंपनी को सूचीबद्ध करना अनिवार्य होगा। 

इनमें सीजीएचएस अंतर्गत अनुबंधित अस्पताल (एनएबीएच मान्यता प्राप्त), सीजीएचएस अंतर्गत अनुबंधित लेकिन नॉन-एनएबीएच, एनएबीएच मान्यता प्राप्त तथा अन्य अस्पताल शामिल हैं। साथ ही राज्य से सटे अन्य राज्यों में स्थित कई दर्जन अस्पतालों को भी सूची में शामिल किया गया है, ताकि लाभुकों को इलाज में किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें सहज एवं कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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