गंगा का रौद्र रूप: एप्रोच रोड पर भारी कटावभागलपुर के तीन घाटों पर दो दिनों के लिए बाइक फेरी सेवा बंदएबीएन न्यूज नेटवर्क, भागलपुर (बिहार)। जिले में गंगा नदी के जलस्तर में पिछले तीन दिनों से हो रही अप्रत्याशित वृद्धि ने तटीय इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं।बढ़ते जलस्तर के कारण नवगछिया की ओर स्थित एप्रोच रोड पर तेजी से कटाव शुरू हो गया है, जिससे दोपहिया वाहनों के आवागमन में भारी कठिनाई और सुरक्षा का खतरा पैदा हो गया है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन तीन प्रमुख घाटों पर अगले दो दिनों के लिए बाइक से फेरी सेवा को पूरी तरह से बंद कर दिया है। प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, बियादा घाट, बाबूपुर घाट/डीपीएस घाट और नवगछिया के जानकी चौक घाट से संचालित होने वाली फेरी सेवा में मोटरसाइकिलों की लोडिंग दो दिनों तक स्थगित रहेगी।हालांकि, आम यात्रियों को राहत देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रियों के लिए फेरी सेवा पूर्ववत जारी रहेगी और वे सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए यात्रा कर सकते हैं। एप्रोच रोड पर हो रहे तेज कटाव को रोकने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए फ्लड कंट्रोल तथा जल संसाधन विभाग की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहे हैं ताकि आमजन को किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचाया जा सके। जिला प्रशासन ने आम जनता और यात्रियों से विशेष अपील की है कि वे वर्तमान परिस्थितियों और सुरक्षा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं।बाइक सवारों से अनुरोध किया गया है कि वे इन दो दिनों के दौरान अपने वाहनों के साथ उक्त घाटों पर न आएं, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या जाम की स्थिति से बचा जा सके।
गोपालपुर में गंगा और कोसी के जलस्तर में उतार-चढ़ावइस्माईलपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही नदीएबीएन न्यूज नेटवर्क, भागलपुर (बिहार)। जिले के गोपालपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में शनिवार को मिला-जुला असर देखा गया। जहां इस्माईलपुर-बिंदटोली और राघोपुर में गंगा तथा मदरौनी में कोसी का पानी थोड़ा ऊपर चढ़ा है, वहीं जेबी चोरहर में कोसी के जलस्तर में आंशिक गिरावट आई है। हालांकि, फ्लड फाइटिंग कार्य और सुरक्षा तटबंध पूरी तरह मजबूत व सुरक्षित बताए जा रहे हैं। इस्माईलपुर-बिंदटोली में स्पर संख्या सात पर शनिवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 32.25 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें बीते 12 घंटों के दौरान आठ सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। नदी यहाँ खतरे के लाल निशान (31.60 मीटर) से 65 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।वहीं राघोपुर में गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है और नदी का पानी काजीकौरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध के निचले हिस्से (टो) से सट चुका है। जबकि मदरौनी में कोसी नदी का जलस्तर आंशिक बढ़त के साथ खतरे के निशान (31.48 मीटर) के करीब पहुँच रहा है। जेबी चोरहर में कोसी नदी के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में चारों प्रमुख स्थलों पर नदियों का पानी सुरक्षा तटबंधों के निचले हिस्से को छू रहा है।जलस्तर के इस उतार-चढ़ाव के बीच बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की तकनीकी टीम और अभियंता दिन-रात स्परों व तटबंधों की सतत निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग ने सभी संवेदनशील बिंदुओं की सघन जाँच के बाद उन्हें पूरी तरह सुरक्षित करार दिया है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बालू की बोरियों का पर्याप्त स्टॉक तैयार रखा गया है।
उप मुख्यमंत्री ने सारण तटबंध पर सामुदायिक किचेन एवं स्वास्थ्य कैंप का किया निरीक्षणएबीएन न्यूज नेटवर्क, सारण (बिहार)।उपमुख्यमंत्री-सह-वाणिज्य-कर मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने आज बारवें पंचायत में सारण तटबंध के समीप संचालित सामुदायिक किचेन और स्वास्थ्य कैंप का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही स्वास्थ्य कैंप में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सीय सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता और सेवाओं की समीक्षा की।उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रभावित लोगों को निर्बाध रूप से गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक राहत सामग्री बिना किसी रुकावट के पहुंचाई जाए। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों में पूरी तत्परता बरतने की बात कही।
वैशाली का एक युटुबर गणेश लाजवाब यादव पर प्राथमिकी दर्जएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। थाना में नाई समाज की ओर से धनबाद जिला अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर के नेतृत्व में बिहार के ग्राम- डुमरा, थाना -पातेपुर, जिला वैशाली का एक युटुबर गणेश लाजवाब यादव, पिता- चंदेश्वर भगत के खिलाफ थे प्राथमिकी ( FIR) दर्ज करवाया गया। कारण यह है कि गणेश लाजवाब यादव ने नाई समाज के खिलाफ एक अश्लील गाना गया है। जो बहुत ही गलत है। जिला अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर ने कहा है, कि किसी भी कीमत पर उस गायक को हम लोग छोड़ने नहीं जा रहे हैं। उस गायक पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो, और उसका यूट्यूब चैनल को भी बंद कर दिया जाए। मौके पर दीनानाथ ठाकुर, प्रदीप ठाकुर, इंद्रदेव शर्मा, सीताराम ठाकुर, बिंदा ठाकुर, निजय शर्मा, दीपक कुमार शर्मा, अनिल शर्मा, जितेंद्र ठाकुर, टुनटुन ठाकुर, मंटू ठाकुर, गंगा शर्मा, महादेव ठाकुर, विनोद ठाकुर, संजय शर्मा, सुरेश शर्मा इत्यादि के साथ सैकड़ो नाई समाज के लोग मौजूद थे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमुई। आज सुबह 7 बजे लोग घटना स्थल पर पहुंचे। ये घटना जमुई के सोनाई गांव का है। ये जो घटना हुई है इसमें 7 लोग नहीं बल्कि 10-12 लोग हैं। और ये सब के सब बालू रेत माफिया है। ये लोग घटना वाली जगह पर पहाड़ी के पास एक झोपड़ी के पास बैठा रहता है और बालू की अवैध तस्करी करता है और उसी झोपड़ी में शराब और मुर्गा चलते रहता है। जो इस घटना में शामिल अपराधी है उनमे मुख्य अपराधी का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। इसमें खतरनाक खबर ये पता चला की ये लोग इतने दरिंदे हैं की 2 साल पहले इसी घटना स्थल की जगह पर सरस्वती पूजा हुआ था तब वहाँ बवाल हुआ था। तब पुलिस आई थी जिसमें महिला पुलिस भी आई थी। तब इन दरिंदों ने जो इस घटना में शामिल है वही दरिंदों ने महिला कांस्टेबल का वर्दी और अंग वस्त्र फाड़ दिया था। वो महिला कांस्टेबल बाद में यहां से ट्रांसफर ले ली। इन अपराधियों पर मुकदमा हुआ लेकिन जमानत पर तुरंत बाहर आ गये। उसके बाद इनका मन और ज्यादा बढ़ गया। ये सब अवैध रेत माफिया के बेटे हैं जो बाप के अवैध काम में साथ देते हैं। थाना से लेकर DM तक को इन अपराधियों का बाप पैसा पहुचाता है। यहां के नेताओं, कई सांसद विधायकों का अवैध बालू माफिया में हिस्सा है। ये उसी के सह पर इस तरह की बेखौफ गुंडागर्दी करते हैं। जो लड़के गिरफ्तार हुए हैं अभी वो सभी नाबालिग हैं, जो मुख्य दरिंदा जो मास्क लगा कर दरिंदगी किया है वो 28-30 साल का है और उसका पारिवारिक संबंध सत्ताधारी पार्टी के एक सांसद से माना गया है। इस घटना में 10-12 दरिंदे शामिल हैं। जिनमे कुछ स्म्राट चौधरी की जाति का है, कुछ पासवान जाति का है जिस जाति का स्थानीय सांसद है और कुछ साहु जाति से है और एक दो यादव भी बताए गए हैं। बाकी जिस नाबालिग लड़की के साथ ये घटना हुआ है वो जमुई शहर की रहने वाली है और ट्यूशन के बाद स्कूटी से अपने सहपाठी के साथ पहाड़ी की तरह घूमने और रील बनाने आयी थी।बाकी मेरा आदमी जो इस घटना को पता करने वहां गया उसके जाते ही पूरा गांव वाला देखने लगा। जिससे मिलने गया उसके पास कॉल आ गया को कौन आया है आपके पास। ये दरिंदे उस गांव के दबंग हैं। पूरा गांव दलित-महादलित का गांव है। जब नेम पता करने की कोशिश की तो लोगो ने बोलने से मना कर दिया और बोला की अगर उन्हें पता चला तो बाद के हम लोगो को मारेंगे। कुल मिला कर इस तरह का खौफ है उन दरिंदों का। इस घटना का उदभेदन इसलिए हुआ क्यूकी अपराधियों के ग्रुप का एक लड़का रील बनाने का शौकीन है, वो सभी नाबालिग बच्चे इन अपराधियों के साथ इसलिए रहते हैं ताकि जो वहां मुर्गा बनता है उसमें से खाने को कुछ दे दे। उन्ही में से एक रील बनाने वाले ने ये वीडियो का रील बना कर पोस्ट कर दिया और उसके बाद मामला पकड़ा गया। नहीं तो स्थानीय लोगो का कहना है की ये लोग महिलाओं के साथ बहुत कांड पहले किए हैं जिनका पता भी नहीं चला है। अब मैं पूरी घटना को उसी तरह रख दिया हूँ जो बीता है। धन्यवाद। खबर है कि एक अपराधी का एनकाउंटर हुआ है। बहुत बढ़िया किया गया। बाद बाकी मेरे मन में सवाल इतना है कि और भी जो अपराधी गिरफ्तार हुए हैं उसका नाम सरनेम के साथ क्यूं नहीं डाला गया है अबतक? नाबालिक वाला बहाना नहीं चलेगा। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं जहां पुलिस ने नाबालिक का फोटो डाला है छोटे मामले में भी। उखढ प्रोटेस्ट में तो बच्चों तक का फोटो डाल सार्वजनिक रूप से बिहार पुलिस द्वारा खोजा जा रहा था। सारे नाबालिक थे। लेकिन नाबालिक का छोड़ भी दें तो इस मामले में और भी अपराधी हैं जो बालिग हैं उनका नाम सरनेम के साथ क्यूं नहीं डाला गया ?
26 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष, 16 दिनों तक पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करेंगे लोगएबीएन न्यूज नेटवर्क, गया जी। भारतीय संस्कृति में माता-पिता और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। सनातन धार्मिक परंपरा में पितृपक्ष को इसी भाव को समर्पित विशेष अवधि माना गया है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी सहित अन्य पूर्वजों का स्मरण करते हुए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं।इस वर्ष पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के दौरान श्रद्धा और विधि-विधान से किए जाने वाले कर्मों का विशेष महत्व है। पुरोहितों के अनुसार जिन पूर्वजों के निधन की तिथि ज्ञात होती है, उनका श्राद्ध उसी तिथि को करने की परंपरा है। वहीं सर्वपितृ अमावस्या को उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारण से उनका श्राद्ध नहीं हो पाया हो। महाकाल मंदिर के पुरोहित गुरु साकेत के अनुसार धार्मिक ग्रंथों में श्राद्ध कर्म के माध्यम से पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की मान्यता बताई गई है। उन्होंने गरुड़ पुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक विश्वास के अनुसार श्राद्ध से संतुष्ट पितर आयु, संतान, यश, कीर्ति, बल, धन और धान्य की वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष का मूल उद्देश्य पूर्वजों का स्मरण और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना है।पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध के साथ दान-पुण्य की भी परंपरा रही है। कई परिवार पूर्वजों की स्मृति में ब्राह्मण भोज, अन्नदान, जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य उपयोगी सामग्री का वितरण करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इन अनुष्ठानों की विधि और परंपराओं में कुछ अंतर देखने को मिलता है। गुरु साकेत बताते हैं कि हिंदू धार्मिक परंपरा में पितृ दोष की भी मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार पूर्वजों के प्रति उचित कर्म नहीं किए जाने से परिवार के जीवन में बाधाएं आने की धारणा है। इसी कारण पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य कर पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा है। हालांकि पितृ दोष और उससे जुड़े प्रभाव धार्मिक मान्यताओं का विषय हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता। पितृपक्ष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ परिवार की नई पीढ़ी को पूर्वजों की स्मृतियों, उनके योगदान और पारिवारिक परंपराओं से जोड़ने का अवसर भी माना जाता है। श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता ही इस अवधि का प्रमुख भाव माना गया है।
डॉ अरविंद नाथ तिवारी एबीएन एडिटोरियल डेस्क। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सामने इन दिनों एक साथ कई राजनीतिक प्रश्न खड़े दिखाई दे रहे हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार और विधायक अनंत सिंह के बीच खुला टकराव, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लेकर उठती चर्चाएं और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे पर अलग-अलग स्वर—इन सबने जदयू की आंतरिक राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ये घटनाएं नेतृत्व, अनुशासन और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल पैदा कर रही हैं। पटना स्नातक सीट का विवाद फिलहाल सबसे प्रत्यक्ष राजनीतिक टकराव है। नीरज कुमार इस सीट से लगातार चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं। जदयू ने नीरज कुमार को फिर से प्रत्याशी बनाया है, जबकि अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से उनके खिलाफ अभियान चलाने और उन्हें हराने की बात कही है, खुले तौर पर अनंत सिंह ने एक निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है। यह महज दो नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं है। दोनों नेताओं की मोकामा क्षेत्र की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी इस विवाद को अतिरिक्त महत्व देती है। अनंत सिंह द्वारा नीरज कुमार पर लगाये गये पुराने आरोप और नीरज कुमार की ओर से अनंत सिंह के बयानों पर की गई टिप्पणियां राजनीतिक टकराव को और तीखा कर रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर आवश्यक है, इसलिए इन्हें राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पार्टी के भीतर अनुशासन का सवाल सार्वजनिक हो गया है। जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने पार्टी में आंतरिक मतभेद से इनकार करते हुए आंतरिक लोकतंत्र और बेहतर समन्वय की बात कह रहें हैं। दूसरी ओर, विवाद सार्वजनिक मंच पर जारी रहने से यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि पार्टी संगठन ऐसे मतभेदों को किस तरह सुलझाता है। इसी क्रम में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा को लेकर भी राजनीतिक चचार्एं चलती रही हैं। उनके बारे में लगाए जा रहे आरोपों में यह दावा शामिल है कि वे नीतीश कुमार के आसपास निर्णय प्रक्रिया को अत्यधिक नियंत्रित कर रहें हैं। संजय झा ने इसके जवाब में पार्टी के एकजुट होकर नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने की बात कही है। इसलिए यहां वास्तविक प्रश्न यह है कि पार्टी के भीतर संवाद और निर्णय प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। जदयू के लिए दूसरी परीक्षा गठबंधन की राजनीति से जुड़ी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 2029 से पहले एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कहे जाने के बाद जदयू ने इस विषय पर चर्चा की जरूरत बताई है। संजय झा ने अमित शाह से मिलने की बात कही, जबकि जदयू नेता श्याम रजक ने बिहार में यूसीसी लागू किए जाने का विरोध दोहराया।इससे यह स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर जदयू और भाजपा के बीच दृष्टिकोण को लेकर सार्वजनिक विमर्श मौजूद है। दरअसल, चुनौती यहां नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और जदयू के संगठनात्मक भविष्य की है। लंबे समय तक पार्टी की राजनीति का केंद्र नीतीश कुमार रहें हैं, अब पार्टी को यह साबित करना होगा कि नेतृत्व के इर्द-गिर्द बनी राजनीतिक संरचना को संगठनात्मक संस्थाओं, सामूहिक निर्णय और स्थानीय नेतृत्व के माध्यम से कितनी मजबूती दी जा सकती है। पटना स्नातक चुनाव इस लिहाज से केवल एक विधान परिषद सीट का चुनाव नहीं रह गया है। इसके परिणाम से जदयू के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान की दिशा पर चर्चा तेज हो सकती है, लेकिन चुनाव परिणाम को पार्टी के पूरे राजनीतिक भविष्य का अकेला पैमाना मानना भी सही नहीं होगा। चुनाव में स्थानीय समीकरण, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं के मुद्दे—सभी प्रभाव डालते हैं। जदयू के सामने इसलिए तीन स्तरों पर चुनौती है- संगठन के भीतर अनुशासन, नेतृत्व के बीच समन्वय और गठबंधन के भीतर अपनी राजनीतिक पहचान। यदि पार्टी इन तीनों स्तरों पर संवाद कायम रखती है तो मौजूदा मतभेद संगठनात्मक लोकतंत्र के दायरे में सुलझाये जा सकते हैं, यदि सार्वजनिक टकराव लगातार बढ़ता है और उसके समाधान के लिए प्रभावी राजनीतिक तंत्र दिखाई नहीं देता, तो उसका असर संगठन की एकजुटता पर पड़ सकता है। आज का यक्ष प्रश्न यह नहीं कि जदयू तत्काल दोफाड़ होगा या कौन नेता चुनाव जीतेगा। असली प्रश्न यह है कि बदलते राजनीतिक दौर में जदयू अपने मतभेदों को किस तरह संस्थागत संवाद में बदलता है। पटना स्नातक चुनाव एक तात्कालिक परीक्षा है, लेकिन जदयू के लिए असली परीक्षा उससे कहीं बड़ी—अपनी संगठनात्मक एकता, नेतृत्व की विश्वसनीयता और राजनीतिक पहचान को बनाये रखने की है। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना (बिहार)। जलालपुर इलाके में बन रहे एक पुल का कुछ हिस्सा ढह गया, इस घटना में लगभग 6 लोग घायल हुए हैं। घायलों के रेस्क्यू को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आयुष्मान कार्ड निर्माण में सुपौल बिहार में छठे स्थान पर, जिले में 11.31 लाख से अधिक व्यक्तिगत कार्ड बने एबीएन न्यूज नेटवर्क, सुपौल (बिहार)। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान कार्ड निर्माण अभियान में सुपौल जिले ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए पूरे बिहार में छठा स्थान हासिल किया है। जिले में आयुष्मान कार्ड निर्माण की उपलब्धि 50.59 प्रतिशत दर्ज की गयी है। जिले में आयुष्मान कार्ड निर्माण के लिए कुल 4 लाख 71 हजार 240 परिवारों को लक्ष्य में शामिल किया गया है। इनमें से अब तक 4 लाख 57 हजार 106 परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। वहीं व्यक्तिगत आयुष्मान कार्ड निर्माण का लक्ष्य 22 लाख 36 हजार 490 निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 11 लाख 31 हजार 384 व्यक्तिगत कार्ड बनाये जा चुके हैं। कार्ड निर्माण अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर भी पात्र लाभुकों को सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। विशेष शिविरों का आयोजन कर अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंच बनाने और उन्हें योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत आठ निजी अस्पताल और 10 सरकारी स्वास्थ्य संस्थान सूचीबद्ध हैं। पात्र लाभुक इन सूचीबद्ध अस्पतालों में योजना के प्रावधानों के अनुसार चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। आयुष्मान कार्ड का निर्माण स्कैन शेयर संचालक, आरोग्य मित्र, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, आशा कार्यकर्ता, साझा सेवा केंद्र संचालक, प्रिया तथा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में तैनात संचालकों के माध्यम से किया जा रहा है। जिले में आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाने का अभियान भी जारी है। अब तक जिले में 10 हजार 20 वय वंदना कार्ड बनाये जा चुके हैं। योजना के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक भारतीय नागरिक, उसकी आय या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, पात्र है। वहीं, सामान्य आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए पात्र परिवार का नाम राशन कार्ड के आंकड़ों में होना आवश्यक है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि जिले का कोई भी पात्र परिवार आयुष्मान भारत योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही कार्ड निर्माण कार्य को और तेज करने पर जोर दिया जा रहा है।
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