इचाक में पति की मौत से सदमे में आयी पत्नी की भी गयी जानटीम एबीएन, इचाक (हजारीबाग)। हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड स्थित चपरख गांव की कैंसर पीड़ित महिला मनीषा देवी ने अपने पति की मौत के पांच दिन बाद ही उसने भी दम तोड़ दिया। आर्थिक तंगी की वजह से अपनी बीमार पत्नी मृतक मनीषा का इलाज नहीं करा पाने के कारण एक अगस्त को उसके पति नंदकिशोर कुमार मेहता ने मानसिक तनाव में आकर हदारी स्कूल के समीप कुएं में डूबकर आत्महत्या कर लिया था। मृतक मनीषा देवी पिछले कई महीनों से कैंसर बीमारी से पीड़ित थी। पैसे के अभाव में समुचित इलाज नहीं हो पाया। मृतक मनीषा के तीन छोटे-छोटे बच्चे और एक बूढ़ी मां है। माता-पिता की मौत के बाद बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि उसका घर ही उजड़ गया है। दो बेटा और एक बेटी अभी नाबालिग है।
टीम एबीएन, रांची। सावन पुरुषोत्तम मास में विश्व हिन्दू परिषद सेवा विभाग झारखंड के तत्वधान मे विहिप सेवा विभाग के सदस्य कृष्ण कुमार गाड़ोदिया के आवास मे महारुद्राभिषेक समारोह का आयोजन हुआ। समारोह में उनके पुत्र हर्ष गाड़ोदिया पत्नी गायत्री अग्रवाल, पौत्र माणविक, पुत्रवधु आयुषी,भतीजे मोहित और सुनील, रामभगत जालान, मिनी शर्मा, मालती शर्मा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ विश्व हिन्दू परिषद सेवा विभाग झारखंड के प्रांतीय प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल, रांची विभाग सेवा प्रमुख राजेन्द्र प्रसाद सिंह मुंडा व महानगर अध्यक्ष कैलाश कुमार केशरी ने विधि विधान और सद्भावना के साथ भाग लिया।मौके पर भगवान शिव का भव्य अलौकिक श्रृंगार किया गया। विहिप सेवा विभाग के प्रदेश प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इस महा रुद्राभिषेक के प्रधान पुरोहित पं सूर्यकांत त्रिपाठी अपनी मंडली के साथ आये थे, जो वर्तमान में वृन्दावन निवासी विहिप झारखंड के पूर्व प्रदेश मंत्री श्याम नारायण दूबे के प्रधान शिष्य है। उन्होंने पूरे विधि विधान एवं शिव जी के मधुर भजनों के साथ महा रुद्राभिषेक कराया। पूरा परिसर भोले शंकर की जय कारे के साथ गुंजयमान हो गया। तत्पश्चात प्रसाद वितरण एवं महाआरती के साथ महा रुद्राभिषेक सम्पन्न हुआ। सोमवार को कृष्ण कुमार गाड़ोदिया सपत्नीक वृन्दावन धाम की तीर्थयात्रा पर प्रस्थान कर रहे हैं।
टीम एबीएन, रांची। डॉ मुजफ्फर हुसैन की दो शोधपरक पुस्तकों का लोकार्पण रविवार को प्रेस क्लब में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति डॉ अजित कुमार सिन्हा, विशिष्ट अतिथि खाद्य आपूर्ति आयोग की सदस्य शबनम परवीन, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ चौधरी और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार उदय चौहान ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजित कुमार सिन्हा ने कहा कि डॉ मुजफ्फर हुसैन की झारखंड के मुसलमान नामक पुस्तक एक ऐतिहासिक दस्तावेज है और इसका महत्व दस्तावेज के अनुसार बाइबल के समान है। ऐसी पुस्तक अब तक प्रकाशित नहीं हुई है। पुस्तक में जिन सामग्रियों का उपयोग किया गया है, अद्भुत है। इससे लोग काफी लाभान्वित होंगे। उन्होेंने कहा कि डॉक्युमेंटेशन के लिए लिखना बहुत जरूरी है। लिखित सामग्री आने वाली पीढी के लिए ज्ञानवर्द्धक और मार्गदर्शक सिद्ध होती है। दूसरी पुस्तक झारखंड की मुस्लिम विभूतियां भी दस्तावेज के अनुसार काफी उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि आज डॉक्यूमेंटेशन की बहुत जरूरत है। इसके लिए उन्होंने हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि खाद्य आपूर्ति आयोग की सदस्य शबनम परवीन, वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ चौधरी और उदयनाथ चौहान ने भी डॉ मुजफ्फर हुसैन के लेखनी की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों को पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र प्रदान कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ कोरनेलियुस मिंज और परवेज कुरैशी ने किया। मौके पर डॉ तनवीर आलम, इम्तियाज अली, राफिया नाज, बॉलीवुड एक्टर देवेश खान, अशोक गहलोत, आनंद जालान, नसीम अहमद, नौशाद आलम, अकीलुर रहमान, निहाल अहमद, साबीर हुसैन, संजय बोस, सुहैब आलम, निरंजन कुमार वर्मा, महफुज आलम, एमएस भारती, अमन अहमद, आदिल रसीद, आरिफ हुसैन समेत कई गणमान्य उपस्थित थे।पुस्तक परिचयदोनों पुस्तकें शोध पर आधारित और हार्डबोंड में हैं। प्रथम पुस्तक कुल 208 एवं द्वितीय पुस्तक कुल 184 पृष्ठ की है। दोनों पुस्तकों का प्रकाशन झारखंड झरोखा, रांची के द्वारा किया गया है। इनमें झारखंड के मुसलमान नामक पुस्तक का मूल्य 700 रुपये एवं झारखंड की मुस्लिम विभूतियां नामक पुस्तक का मूल्य 600 रुपये है। पुस्तक विश्लेषणात्मक एवं वर्णनात्मक प्रकृति का है। इसे लिखने में सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन पद्धति का सहारा लिया गया है। प्राथमिक एवं द्वितीय स्त्रोतों के साथ-साथ आवश्यकतानुसार डाटा का भी संकलन किया गया है। प्रथम पुस्तक झारखंड के मुसलमान में कुल 33 अध्याय हैं जिसमें झारखंड के भौगोलिक परिवेश के साथ प्रमुख आंदोलन और मुस्लिम उपजातियों का विस्तृत वर्णन है। वहीं, द्वितीय पुस्तक झारखंड की मुस्लिम विभूतियां में कुल 59 अध्याय हैं, जिसमें कुल 50 विभूतियों का वर्णन है। दोनों पुस्तकें मुस्लिम समाज एवं सरकार के साथ-साथ शोध विद्यार्थियों, प्रबुद्धजनों, राजनेताओं, समाजसेवियों एवं कानून के जानकारों के लिए काफी उपयोगी है। विशेषकर मुस्लिम उपजातियों एवं मुस्लिम विभूतियों की जानकारी उल्लेखनीय है। पुस्तकों में जिन तथ्यों को उजागर किया गया है, इससे पूर्व अब तक उन विषयों पर शोध सामने नहीं आ सका है।लेखक परिचयडॉ मुजफ्फर हुसैन युवा लेखक एवं इतिहासकार के रूप में स्थापित हैं और डोरंडा महाविद्यालय के इंटरमीडिएट संकाय के इतिहास विषय में अतिथि शिक्षक के रूप में वर्ष 2017 से कार्यरत हैं। उनका जन्म 8 जून 1982 ई को सामान्य परिवार में हुआ। पिता सेंट्रल कोलफिल्ड्स लिमिटेड में कार्यरत थे और मां गृहणी रही। उनकी प्रारंभिक और मैट्रिक तक की शिक्षा रामगढ़ जिले से हुई। इंटर और स्नातक की शिक्षा गोस्सनर कॉलेज रांची से पूरी की। इसके बाद दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ह्यूमन राईट्स भारतीय मानवाधिकार संस्थान नई दिल्ली से पूरा किया। स्नातकोत्तर की शिक्षा रांची कॉलेज राची से पूरी की। इसके बाद वह रांची विश्वविद्यालय रांची के मानवाधिकार विभाग में अध्यापन करने लगे। कुछ महीने वहां अध्यापन करने के बाद पत्रकारिता से जुड़ गये और भारतीय विद्या भवन मुंबई से स्थानीय हिंदी दैनिक प्रभात खबर के माध्यम से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन जर्नलिज्म की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद विभिन्न स्थानीय समाचार पत्रों में कार्य करते हुए लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक प्रभात मन्त्र से जुड़े हैं और वरीय उप संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस बीच उन्होंने अपनी एलएलबी, बीएड और पीएचडी की शिक्षा पूरी की और शोध पर कार्य करने लगे। अब तक उनकी शोध पर आधारित कुल छह किताबें प्रकाशित हुई हैं जो काफी चर्चित रही हैं। अपने शोध पर उन्होंने बांस की सर्वव्यापी खेती, महली जनजाति समेत ग्रामीणों के सर्वांगीण विकास, उनकी शिक्षा, कारोबार, कल्याणकारी योजना आदि पर भारत सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है। मुसलमानों में शिक्षा, संस्कार, अल्पसंख्यक संस्थान की भूमिका, राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन, मुस्लिम कल्याणकारी योजना, शैक्षणिक संस्थान, मुस्लिम उपजातियां, लुप्त मुस्लिम उपजातियां आदि पर उनके शोध उल्लेखनीय हैं। वर्तमान में उनकी दो पुस्तक झारखंड के मुसलमान और झारखंड की मुस्लिम विभूतियां चर्चा में है और लोग इसे पढ़ने को लेकर काफी उत्साहित हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में इनके आलेख प्रकाशित होते रहे हैं। वहीं, आकाशवाणी के रांची केंद्र से विभिन्न विषयों पर इनकी वार्ताएं समय-समय पर प्रसारित होती रही हैं। इन्हें कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भी पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है। इनमें इंटरनेशनल क्राइम फाइटर्स एंड अलाइज द्वारा दिया गया पुरस्कार, वैक पीपुल काउंसिल के अंतर्गत कार्यरत वैक बूक आफ रिकार्ड्स द्वारा प्रदान किया गया पुरस्कार एवं इंटरनेशनल स्कूल आफ आर्ट्स एंड डिजाइन ने दिया। शिक्षाविद् के रूप में सम्मान उल्लेखनीय है।वहीं, पिछले वर्ष 2022 में डॉ मुजफ्फर हुसैन को भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा डॉ अंबेडकर फेलोशिप नेशनल अवार्ड भी प्रदान किया गया है। गौरतलब हो कि इससे पूर्व डॉ हुसैन की कुल चार किताबें (1. महली जनजाति का राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन, 2. मुसलमानों का सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक जीवन, 3. मुस्लिम कल्याणकारी योजना एवं उनके शैक्षणिक संस्थान एवं 4. मुसलमानों में शिक्षा, संस्कार एवं अल्पसंख्यक संस्थान की भूमिका) प्रकाशित हैं और काफी प्रसिद्ध हैं।
कोडरमा डिस्ट्रिक्ट आर्टिस्ट एसोसिएशन का चुनाव सहर्ष संपन्नटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। झुमरी तिलैया के डॉक्टर गली स्थित केडीएए, कोडरमा डिस्ट्रिक्ट आर्टिस्ट एसोसिएशन के कार्यालय में सत्र 2023-24 हेतु आम चुनाव संपन्न हुआ। इस चुनाव सभा में कोडरमा ज़िले के सभी गायक, वादक, नर्तक, मंच संचालक एवं साउंड ऑपरेटर उपस्थित थे।बैठक में संरक्षक के रूप में लड्डू गोपाल राजगढ़िया, सुनील देबनाथ, धीरेन्द्र मिश्र, अर्चना धर, नंदकिशोर शर्मा, बी एम प्रसाद, सुशील द्विवेदी, प्रेम पाण्डेय, विजय सिंह, जवाहर वर्मा, दिलीप रॉय, बक्शी सिंजन प्रसाद, अशोक विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, चंद्राणी सरकार, विजय पाण्डेय, रणजीत कुमार सिंह, रवि दाहिमा, मुन्ना भदानी, अध्यक्ष गिरधारी सोमानी, उपाध्यक्ष, संजीत भारती, बबलू सिंह, सचिव नवीन पाण्डया, सह सचिव जूही दासगुप्ता, शशि राज, कोषाध्यक्ष विशाल कप्सिमे, मीडिया प्रभारी दीपक कुमार, अनूप कुमार बर्णवाल, न्यायिक सलाहकार सुशील द्विवेदी, विवेक सिंह, सुधांशु पाण्डेय, सुधीर पाण्डेय, सुमन सोनकर को बनाया गया है। जबकि कार्यकारिणी सदस्य के रूप में शशि चंदेल, धीरज पाण्डेय, बबलू पाण्डेय, असीम मुखर्जी, राजेश भदानी, राजा चौरसिया, आराधना सिंह, सुमन सोनकर सुधीर पाण्डेय, सूरज प्रताप, मनोज माथुर, सुरेश यादव, अभिषेक शर्मा, सोनाली बर्णवाल के नाम शामिल हैं। यह जानकारी सचिव नवीन पांड्या ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है।
ग्राम- कोइन्जारा, पंचायत- ढिड़ौली, जिला- गुमला में 341 पौधौं का रोपण सह वितरण कार्यक्रम का आयोजनटीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 06.08.2023 (रविवार) को श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रांची (औघड़ भगवान राम आश्रम, अघोर पथ, लेक रोड पश्चिम, रांची) ने सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान वर्ष - 2023 के तीसरे चरण का आयोजन ग्राम - कोइन्जारा, पंचायत - ढिड़ौली, जिला - गुमला में किया गया। कार्यक्रम में आम, अमरूद, मोहगनी, सागवान, आंवला, जामुन, बेल इत्यादि के 341 पौधों का रोपण एवं वितरण किया गया।कार्यक्रम की शुरुवात में स्थानीय ग्राम देवी में आरती-पूजन कर दीप दान किया गया। साथ ही मन्दिर परिसर की साफ-सफाई के लिए झाड़ू भी दिया गया। उसके उपरान्त ग्रामीण बंधुओं के बीच एक लघु गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें श्री सर्वेश्वरी समूह का संक्षिप्त परिचय देते हुए समूह द्वारा किये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में भी ग्रामीण बंधुओं को अवगत कराया गया।साथ ही वृक्षों के कमी से हो रहे दुष्परिणामों के बारे में अवगत करते हुए वृक्षों के बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। गोष्ठी के बाद ग्रामीण बंधुओं के बीच लगभग 341 पौधों का वितरण किया गया।ज्ञात हो कि श्री सर्वेश्वरी समूह एक विश्व स्तरीय सामाजिक एवं धार्मिक संस्था है जो अनेक जनकल्याण के कार्यक्रम लगातार करती रहती है। जनसेवा के लिए श्री सर्वेश्वरी समूह का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।सर्वेश्वरी वृक्षारोपण अभियान उन्ही जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में से एक है जिसे पूरे वर्षा ऋतु में चलाया जायेगा। इस वृहद वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से लोगों को वृक्ष लगाने एवं वृक्षों को बचाने के प्रति भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञात हो कि आज के कार्यक्रम के पूर्व ग्राम - गंगड़ा (जिला गुमला) एवं ग्राम - जुरकेला (जिला सिमडेगा) में भी समूह शाखा द्वारा लगभग 700 पौधों का रोपण एवं वितरण किया जा चुका है।कार्यक्रम के कुशल आयोजन में विभूति शंकर सहाय श्री कुन्ज बिहारी लाल का विशेष सहयोग प्राप्त हुए। कार्यक्रम में श्री सर्वेश्वरी समूह -शाखा रांची से राधेश्याम सिंह, अभय सहाय, नवीन कुमार, आनन्द सिंह, हेमन्त नाथ शाहदेव, डॉ उत्पल कुमार, अरुण सिंह, राधा मोहन मिश्रा, उदय नन्द पाण्डेय, शम्भू शरण षाड़ंगी, रमेश पाण्डेय, गंगाधर नाथ शाहदेव के साथ लगभग 50 श्रद्धालु-सदस्यगण शामिल हुए।
झारखंड आदिवासी महोत्सवटीम एबीएन, रांची। झारखंड आदिवासी महोत्सव 2023 का आयोजन 9 एवं 10 अगस्त बिरसा मुण्डा स्मृति उद्यान, रांची में होगा। इस महोत्सव में पारंपरिक आदिवासी आभूषणों और पलाश ब्रांड के उत्पादों के भी स्टॉल लगाये जायेंगे। जेएसएलपीएस, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्टॉल लगाकर सखी मण्डल की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों (पलाश ब्रांड एवं आदिवासी ब्रांड) की प्रदर्शनी एवं बिक्री की जायेगी।पलाश ब्रांड के तहत राज्य भर की ग्रामीण महिलाएं खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से अपनी आजीविका सुनिश्चित करती हैं। आदिवासी ब्रांड के तहत पारंपरिक आभूषणों का मूल्यवर्धन कर बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि आदिवासी पारंपरिक कला एवं संस्कृति लोगों तक पहुंच सके। आदिवासी महोत्सव में लोक पारंपरिक आदिवासी आभूषणों को देखकर खरीद पायेंगे।पलाश के स्टॉल में 30 से ज्यादा उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की जायेगी, जैसे-शुद्ध शहद, कोल्ड-प्रेस्ड सरसों का तेल, काला गेहूं का आटा, हल्दी, मिर्च पाउडर, रागी का आटा, रसायनमुक्त साबुन, कुकीज, आदि।महोत्सव में आजीविका दीदी कैफे का भी स्टॉल लगया जायेगा। जिसमें लोग झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों जैसे राइस डंबु, मडुवा डंबू, धुस्का घुघनी, मडुआ पकौड़ा, माढ़ जोर, दाल पीठा आदि का लुत्फ उठा सकेंगे।
दुमका और जमशेदपुर की पुलिस की संयुक्त कार्रवाईटीम एबीएन, रांची। बासुकीनाथ में गैंगस्टर सह कांवरिया अमरनाथ सिंह की गोली मारकर हत्या मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले में दो अपराधियों की गिरफ्तारी हुई है। दोनों विशाल और अजीत जमशेदपुर के गैंगस्टर राजा शर्मा गिरोह के सदस्य है। हत्या में प्रयोग किये गये पिस्टल को पुलिस ने बरामद किया है। इसके साथ तीन जिन्दा कारतूस भी मिले हैं।अबतक पांच आरोपी पुलिस के हत्थेकांवरिया अमरनाथ सिंह हत्याकांड मामले में पांच लोगों को पुलिस दबोच चुकी है। इस केस में जमशेदपुर और दुमका पुलिस दोनों की ओर से अनुसंधान और कार्रवाई जारी है।इसके पूर्व जमशेदपुर पुलिस ने एमजीएम थाना क्षेत्र से दीपक चौधरी उर्फ टेका और अभिषेक सिंह उर्फ बिट्टू सिंह को गिरफ्तार किया था। इधर, दुमका पुलिस की दबिश की वजह से आरोपी उत्तम महतो ने जमशेदपुर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। इन तीनों अपराधियों से पूछताछ के क्रम में विशाल सिंह और अजीत मंडल का नाम सामने आया था। इसके बाद दुमका पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया।क्या है हत्याकांड से जुड़ा पूरा मामलाजिले के जरमुंडी थाना क्षेत्र से महज 100 मीटर की दूरी पर बासुकीनाथ नंदी चौक के समीप 27 जुलाई की रात्रि बासुकीनाथ पूजा करने आये जमशेदपुर के गैंगस्टर सह कांवरिया अमरनाथ सिंह की गोली मारकर अपराधियों ने हत्या कर दी थी। बासुकीनाथ में अमरनाथ सिंह पर विशाल सिंह ने गोली चलायी थी। हत्या में प्रयुक्त पिस्टल को पुलिस ने बरामद किया है। इसके साथ ही तीन जिंदा कारतूस भी मिले हैं।
झारखंड के गिरिडीह में बस के नदी में गिरने से तीन की मौत, 24 घायलटीम एबीएन, रांची। गिरिडीह जिले में शनिवार रात एक बस के बेकाबू होकर नदी में गिर जाने से तीन लोगों की मौत हो गये और 24 अन्य घायल हो गये। पुलिस अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना रात करीब 8.40 बजे गिरिडीह डुमरी रोड पर हुई, जब रांची से गिरिडीह जाने के दौरान बस पुल से बराकर नदी में गिर गयी। अधिकारी ने बताया कि राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बस में कितने यात्री सवार थे, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक दीपक शर्मा ने कहा कि वह मौके पर हैं और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।गिरिडीह के सिविल सर्जन डॉ एसपी मिश्रा ने मीडिया को बताया कि अस्पताल लाये गये तीन लोगों को मृत घोषित किया गया है, जबकि 24 अन्य घायलों का इलाज चल रहा है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हादसे पर दुख जतायाइस बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस की टीम बचाव कार्य में लगी हुई है।सीएम सोरेन ने ट्वीट किया, दुखद समाचार मिला है कि रांची से गिरिडीह जा रही एक बस गिरिडीह में बराकर नदी में दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। जिला प्रशासन की ओर से बचाव कार्य किया जा रहा है।
चंद्रयान के लिए लॉन्चिंग पैड बनानेवाले एचईसी कर्मी खुद पैसे के लिए है मोहताजटीम एबीएन, रांची। एचईसी का उदघाटन दीपावली के दिन 15 नवंबर 1963 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। एचईसी अपने जीवन काल के 60 वर्षों में समय-समय पर अपनी उपयोगिता साबित करती रही है। मुख्य रूप से देश के औद्योगिकीकरण के क्षेत्र में एचईसी ने अपनी महती भूमिका निभाते हुए बोकारो, दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला और विशाखापत्तनम जैसे बड़े स्टील प्लांटों की स्थापना की। जिनकी भूमिका आज भी देश में स्टील उत्पादन में सर्वाधिक है।इसके अलावा इसरो के लिए तीन लॉन्चिंग पैड, इओटी क्रेन के अलावा अन्य उपकरण, पानी जहाज के उपकरण, सेना के लिए माउंटेन गन, बांग्लादेश युद्ध के समय में गन बैरल, टी-72 टैंक के लिए उपकरण, माइनिंग क्षेत्र की विभिन्न क्षमता के शॉवेल व ड्रैगलाइन का निर्माण किया है। दूसरी ओर वर्तमान में कंपनी के कर्मचारियों का 18 माह का वेतन बकाया हो गया। ऐसे में कर्मचारी बच्चों की फीस जमा नहीं कर पा रहे हैं। निजी स्कूलों से नाम कटा कर सरकारी स्कूलों में दाखिला कराने के लिए मजबूर हैं। कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। जेवर व जमीन बेच रहे हैं और कई बीमारियों से पीड़ित होते जा रहे हैं।
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