एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। एमएस धोनी ने रविवार को बड़ी खुशखबरी दी है। दरअसल, बीते दिन धोनी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ऐलान किया था कि वो रविवार दोपहर 2 बजे सभी के साथ एक खबर शेयर करने वाले हैं। उनके इस ऐलान के बाद से ही कयास लगाये जाने लगे थे कि वो शायद आईपीएल से भी संन्यास का ऐलान कर सकते हैं, मगर रविवार को तय समय पर उन्होंने देश के सामने आकर साफ कर दिया कि खबर उनके संन्यास को लेकर नहीं थी। दरअसल, ये खबर एक बिस्किट के लॉन्च को लेकर थी, जिसे उन्होंने भारत की 2011 वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक जीत से जोड़कर लॉन्च किया। धोनी ने एक बिस्किट को देश में फिर से लॉन्च किया। धोनी ने इसे वर्ल्ड कप से जोड़ा। पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि भारत ने 2011 में वर्ल्ड कप जीता था। उस समय ये बिस्किट भारत में लॉन्च हुआ था। अब एक बार फिर देश में यह बिस्किट लॉन्च हो रहा है और इस साल एक और कप है। ये कनेक्शन साफ हो गया। धोनी ने कहा कि चलो बिस्किट को फिर से लॉन्च करते हैं और 2011 को फिर से लाते हैं। हालांकि दिग्गज कप्तान के ऐलान के बाद कुछ फैंस नाराज भी हो गये। कुछ यूजर्स का कहना है कि धोनी ने उम्मीदों को मार दिया। फैंस का कहना है कि उन्हें लगा कि कुछ खास होगा। एक यूजर ने कहा कि आप करोड़ों लोगों के आइकन हैं, कुछ पैसों के लिए उनके इमोशंस से न खेलें। धोनी की कप्तानी ने भारत ने 2007 में पहला टी20 वर्ल्ड कप जीता। इसके बाद घर में 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया। 2013 में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी पर भी कब्जा किया था। रही बात उनके आईपीएल से संन्यास लेने की तो कुछ दिन पहले ही चेन्नई सुपर किंग्स के सीईओ काशी विश्वनाथन ने इसकी पुष्टि कर दी थी कि धोनी ही आईपीएल के अगले सीजन में टीम की अगुआई करेंगे।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। शार्दुल विहान, शपथ भारद्वाज और आर्य वंश त्यागी की भारतीय तिकड़ी ने यहां आयोजित शॉटगन विश्व चैंपियनशिप की ट्रैप टीम जूनियर पुरुष प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। भारतीय टीम ने शनिवार को स्वर्ण पदक मुकाबले में इटली को 6-4 से मात दी। भारतीय तिकड़ी ने फाइनल में पहुंचने के लिए अमरीका को शूटऑफ में 2-0 से हराया था जबकि इटली की टीम क्वालीफिकेशन राउंड में 206 पॉइंट के साथ पहले स्थान पर रही थी। स्वर्ण पदक मुकाबले में भी इमैनुअल एजी, गियरमाकर बारलेता और एडोआडर एंतोनिओली की टीम ने 4-0 की बढ़त हासिल कर ली थी, लेकिन भारतीय टीम ने अगले तीन मुकाबले 13-12, 15-14 और 14-12 से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उल्लेखनीय है कि पांच शॉट के एक राउंड में बेहतर स्कोर वाली टीम को दो अंक दिये गये। भारतीय टीम के नायक आर्य वंश रहे जिन्होंने मैच के दौरान 25 में 24 शॉट सही लगाये। इसके अलावा शार्दुल ने 22 और शपथ ने 21 बार सही निशाना लगाया। इसी बीच, सबीरा हारिस, प्रीति रजक और आद्या त्रिपाठी की भारतीय टीम ने 172 अंकों के साथ प्रतियोगिता में सातवां स्थान प्राप्त किया।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। 20 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन स्टार टेनिस प्लेयर रोजर फेडरर ने लंदन में अपने करियर का आखिरी मैच खेला। फेडरर ने अपने करियर का आखिरी मैच लंबे समय के प्रतिद्वंद्वी राफेल नडाल के साथ मिलकर खेला। लेकिन जैक सॉक और फ्रांसेस टियाफो ने उनके सपने पर पानी फेर यह मुकाबला जीत लिया। फेडरर और नडाल की जोड़ी को मैच मे 4-6, 7-6 (2), 11-9 से हार मिली। इसी के साथ रोजर फेडरर के शानदार टेनिस करियर का अंत हो गया। रोजर फेडरर के रिटायरमेंट में सभी के आंखें नम थी। फेडरर भी अपने अंतिम मैच में फूट-फूट कर रोते हुए दिखाई दिए। इस मैच के दौरान फेडरर को विदाई देने कई स्टार टेनिस प्लेयर भी मौजूद थे। 41 वर्षीय स्विेट्जरलैंड के स्टार टेनिस प्लेयर रोजर फेडरर ने हाल ही में संन्यास का ऐलान किया था। फैडरर ने पिछले हफ्ते रिटायरमैंट की योजनाओं संबंधी सोशल मीडिया पर एक लंबा नोट साझा किया था। उन्होंने कहा था कि 41 साल की उम्र में उन्हें लगता है कि इसे छोड़ने का समय आ गया है। वर्षों में टेनिस ने मुझे जो भी उपहार दिए हैं वह निस्संदेह वे लोग हैं जिनसे मैं रास्ते में मिला- मेरे दोस्त, मेरे प्रतियोगी और अधिकांश प्रशंसक जो खेल को इसकी विशेषता देते हैं। आज मैं आप सभी के साथ कुछ समाचार साझा करना चाहता हूं। लेवर कप का आगामी संस्करण मेरा अंतिम एटीपी टूर्नामेंट होगा। बता दें कि रोजर फेडरर पुरुष सिंगल्स में ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के मामले में तीसरे नंबर पर हैं। फेडरर ने 24 साल के टेनिस करियर में 20 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। सबसे ज्यादा पुरुष सिंगल्स ग्रैंड स्लैम जीतने के मामले में स्पैनिश खिलाड़ी 22 खिताब जीतकर पहले नंबर पर हैं तो वहीं सर्बिया के नोवाक जोकोविच 21 खिताब जीतकर दूसरे नंबर पर हैं।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज पेसर झूलन गोस्वामी का दो दशक लंबा क्रिकेट करियर अब खत्म होने जा रहा है। वो लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेल रही हैं। झूलन ने 2002 में 6 जनवरी को इंग्लैंड के खिलाफ ही अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज किया था और आखिरी मैच भी उसी टीम के खिलाफ खेल रही हैं। झूलन ने बंगाल के छोटे से गांव चकदा से टीम इंडिया तक का सफर तय किया। हालांकि, यह सफर आसान नहीं रहा। उन्हें कदम-कदम पर संघर्ष करना पड़ा। लेकिन, मन में क्रिकेटर बनने की ऐसी जिद थी कि सपना पूरा हो ही गया। झूलन गोस्वामी बंगाल के छोटे से गांव चकदा में ही पली बढ़ीं। घर में सब लड़के क्रिकेट खेलते थे, तो उनका काम गेंद उठाकर देना होता था। ऐसा करते-करते झूलन को भी इस खेल से लगाव हो गया। जब भाई दोपहर में सो जाते थे तो वो अकेले प्रैक्टिस करती थीं, तो इस तरह उनके क्रिकेट खेलने की शुरुआत हुई। हालांकि, गांव के लड़कों को मनाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह बात बताई थी। दरअसल, लड़कों की नजर में झूलन धीमी गेंदबाजी करती थीं। ऐसे में उन्होंने तेज गेंदबाज बनने की ठानी। लेकिन, गांव की लड़की के लिए ऐसा करना आसान नहीं था झूलन के गांव में क्रिकेट को लेकर कोई सुविधा नहीं था, तो उन्होंने ट्रेनिंग के लिए रोज चकदा से कोलकाता जाना शुरू कर दिया। वो सुबह जल्दी उठकर पहली लोकल ट्रेन पकड़कर गांव से कोलकाता आती थीं और नॉर्थ कोलकाता के श्रद्धानंद पार्क में प्रैक्टिस करती थीं। ट्रेनिंग के बाद फिर से ट्रेन लेकर गांव लौटती थी और स्कूल जाती थीं। झूलन ने सालों-साल यही किया। झूलन की कद-काठी देखकर कोच ने भी उन्हें तेज गेंदबाज बनने की सलाह दी। लेकिन, घरवाले झूलन के क्रिकेट खेलने से खुश नहीं थे और कुछ वक्त बाद उनकी ट्रेनिंग बंद हो गई। जब कोच को यह पता चला तो वो उनके गांव पहुंचे और परिवार को मनाया कि वो झूलन को क्रिकेट खेलने दें। काफी समझाइश के बाद परिवार मान गया और इस तरह उनके गांव से निकलकर प्रोफेशनल क्रिकेटर बनने की शुरुआत हुई। 1997 झूलन के जीवन का बड़ा साल साबित हुआ। उस साल ईडन गार्डेंस में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच महिला विश्व कप का फाइनल खेला गया था। 15 साल की झूलन तब बॉल गर्ल थीं। उनके लिए यह मैच जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ। उन्होंने इससे जुड़ा किस्सा बताया, मैंने यह फाइनल देखा था। उसी दिन यह सपना देखा था कि एक न एक दिन देश की तरफ से क्रिकेट खेलूंगी। इसके बाद से मैं खेल को लेकर और संजीदा हो गई और भारत की तरफ से खेलने के लिए और मेहनत करने लगी एक-एक कर झूलन सफलता की सीढ़ियां चढ़ती जा रही थीं। उन्हें 2007 में आईसीसी वुमेंस प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। उस साल किसी भारतीय पुरुष क्रिकेटर को आईसीसी का कोई व्यक्तिगत पुरस्कार नहीं मिला था। इसके बाद उन्हें भारतीय टीम का कप्तान भी बना दिया गया। भारतीय टीम की मौजूदा कप्तान हरमनप्रीत कौर ने झूलन की कप्तानी में ही डेब्यू किया था। उन्हें 2010 में अर्जुन अवॉर्ड और 2 साल बाद पद्मश्री भी मिला। वो 2017 और 2019 में आईसीसी की गेंदबाजों की रैंकिंग में नंबर-1 रही थीं।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर में खेले गए तीन मैचों की टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में रोहित शर्मा ने महज 20 गेंदों में 46 रनों की पारी खेली। अपनी पारी के दौरान रोहित शर्मा ने चार चौके और चार छक्के जड़ा। रोहित शर्मा अब तक 138 इंटरनेशनल टी20 मैचों में 176 छक्के लगा चुके हैं। रोहित शर्मा को मार्टिन गप्टिल से आगे निकलने के लिए सिर्फ एक छक्के की जरूरत थी। पहले ओवर में एक छक्का लगाने के साथ ही रोहित शर्मा टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में सबसे ज्यादा छक्का लगाने वाले बल्लेबाज बन गये। इसके बाद दूसरे नंबर पर मार्टिन गप्टिल का नाम हैं जिन्होंने 172 छक्के लगाये हैं। मैच जीतने के बाद रोहित शर्मा बेहद खुश नजर आये। उन्होंने लंबे समय बाद मैदान पर वापसी करने वाले जसप्रीत बुमराह की तारीफ की। इसके साथ ही रोहित शर्मा ने अक्षर पटेल को लेकर कहा कि वह एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं। पिछले दो मुकाबलों में अक्षर ने गेंद से खुद को साबित किया है। हम आने वाले समय में उन्हें बल्ले के साथ भी अपना योगदान टीम के लिए देते हुए देखना चाहेंगे। वहीं अक्षर पटेल ने अपनी बल्लेबाजी को लेकर कहा कि दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से उन्हें फिनिशर का रोल दिया गया था। अक्षर पटेल ने कहा कि जब मैंने दो तीन बार टीम को अंत के ओवरों में रन बनाकर दिए तो इससे टीम के साथ-साथ मुझे खुद पर भी भरोसा हुआ। भारतीय टीम के लिए भी अक्षर पटेल को कुछ इसी तरह की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके लिए वह नेट्स पर जमकर प्रैक्टिस कर रहे हैं।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। भारत के पूर्व कप्तान दिलीप तिर्की को शुक्रवार को निर्विरोध हॉकी इंडिया का नया अध्यक्ष चुन लिया गया। हॉकी इंडिया के चुनाव एक अक्टूबर को होने थे लेकिन नतीजे पहले ही घोषित कर दिये गये, क्योंकि किसी पद के लिए कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं था, जिससे महासंघ के संविधान के तहत निवर्तमान उम्मीदवार ही निर्विरोध चुने गये। उत्तर प्रदेश हॉकी संघ के प्रमुख राकेश कत्याल और हॉकी झारखंड के भोला नाथ सिंह के नाम वापस लेने के बाद टिर्की को अध्यक्ष चुना गया। भोला नाथ महासचिव चुने गये। अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ ने टिर्की और उनकी टीम के चुनाव को मंजूरी दे दी है। एफआईएच ने एक पत्र में लिखा कि जब किसी पद के लिए उम्मीदवार पद की संख्या से कम या बराबर हों तो माना जाता है कि उन्हें निर्विरोध चुना गया है। इसमें कहा गया, इसलिए हमें यह देखकर खुशी हो रही है कि हॉकी इंडिया का कार्यकारी बोर्ड चुन लिया गया है जिसकी जानकारी हॉकी इंडिया की वेबसाइट पर है और सभी पदों के लिए चुनाव निर्विरोध हुए। खेल की शीर्ष इकाई ने चुनाव सुचारू ढंग से कराने के लिए तीन सदस्यीय प्रशासकों की समिति के प्रयासों की भी सराहना की। समिति में जस्टिस अनिल आर दवे, एस वाइ कुरैशी और जफर इकबाल शामिल थे। इसने कहा, हमें खुशी है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी हो गई है और अब लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई इकाई है। हम दिलीप टिर्की, भोला नाथ सिंह और शेखर जे मनोहरन को बधाई देते हैं। टिर्की ने सीओए और एफआईएच को धन्यवाद देते हुए कहा, मैं सुनिश्चित करूंगा कि भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकूं। निर्विरोध चुने गये अन्य पदाधिकारियों में हॉकी जम्मू कश्मीर की आसिमा अली (उपाध्यक्ष), कर्नाटक के एसवीएस सुब्रमण्या गुप्ता (उपाध्यक्ष), तमिलनाडु हॉकी के शेखर जे मनोहरन (कोषाध्यक्ष), हॉकी राजस्थान की आरती सिंह (संयुक्त सचिव) और हॉकी हरियाणा के सुनील मलिक (संयुक्त सचिव) शामिल हैं। कार्यकारी बोर्ड के पांच सदस्यों में अरूण कुमार सारस्वत (हॉकी राजस्थान), असरिता लाकड़ा (हॉकी झारखंड), गुरप्रीत कौर (दिल्ली हॉकी), वी सुनील कुमार (केरल हॉकी) और तपन कुमार दास (असम हॉकी) शामिल हैं।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। इंडिया ए टीम ने चेन्नई के मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मुकाबले को सात विकेट से जीत लिया है। न्यूजीलैंड ए पहले खेलते हुए महज 167 रन ही बना सकी थी। जवाब में खेलने उतरी भारत ए ने 109 गेंदें शेष रहते मैच जीत लिया। ऋतुराज गायकवाड़ और रजत पाटीदार ने उपयोगी पारियां खेलीं लेकिन कप्तान संजू सैमसन ने तीन छक्के लगाकर दर्शकों को मनोरंजन किया और टीम को आसानी से जीत दिला दी। इससे पहले खेलने उतरी न्यूजीलैंड-ए टीम की शुरूआत बेहद खराब रही थी। भारतीय तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर और कुलदीप सेन ने शुरूआती 10 ओवर में ही न्यूजीलैंड ए के 5 विकेट चटका लिए थे। खासतौर पर सेन की गेंदबाज बकमाल रही। उन्होंने 10 गेंदों में 3 विकेट लेकर न्यूजीलैंड को उठने का मौका नहीं दिया। एक समय जब न्यूजीलैंड 74 रन पर 8 विकेट गंवा चुकी थी, तब उन्हें रिपन और जो वॉल्कर का सहारा मिला। दोनों टीम का स्कोर 163 तक ले गये। रिपन ने 104 गेंदों में 61 तो जो वॉल्कर ने 49 गेंदों में 36 रन बनाए। न्यूजीलैंड ए 167 रन पर ऑल आऊट हो गई। भारतीय तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर ने 8.2 ओवर में 32 रन देकर चार विकेट लिए जबकि सेन 30 गेंदों में तीन विकेट लेेने में सफल रहे। कुलदीप सेन आईपीएल में 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकने के कारण चर्चा में आए थे। इसके अलावा कुलदीप यादव ने भी 22रन देकर एक विकेट लिया। जवाब में खेलने उतरी इंडिया ए टीम की ओर से पृथ्वी शॉ और ऋतुराज गायकवाड़ ने तेजतर्रार शुरूआत की। पृथ्वी ने 17 तो ऋतुराज ने 41 रन बनाये। राहुल त्रिपाठी ने भी 40 गेंदों में 4 चौकों की मदद से 31 रन बनाये। कप्तान संजू सैमसन ने 32 गेंदों में एक चौके और तीन छक्कों की मदद से 29 रन बनाये। इसके अलावा रजत पाटीदार भी 41 गेंदों में सात चौकों की मदद से 45 रन बनाने में सफल रहे।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। भारत ने हरमनप्रीत कौर (143 नाबाद) के विशाल शतक के बाद रेणुका सिंह ठाकुर (57/4) की शानदार गेंदबाजी की बदौलत इंग्लैंड को दूसरे महिला वनडे में बुधवार को 88 रन से हराकर 23 साल बाद ब्रिटिश सरजमीन पर एकदिवसीय शृंखला जीती। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 333 रन बनाये, जिसके जवाब में इंग्लैंड 245 रन ही बना सकी। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की एकदिवसीय शृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल की और 1999 के बाद पहली बार इंग्लैंड में एकदिवसीय सीरीज जीती। हरमनप्रीत ने भारत के लिये कप्तानी पारी खेलते हुए 111 गेंदों पर 18 चौकों और चार छक्कों की बदौलत 143 रन बनाये। उनका साथ देते हुए हरलीन देओल ने भी 58 रन जोड़े। इंग्लैंड की ओर से डेनियल वायट ने 58 गेंदों पर छह चौकों के साथ 65 रन की जुझारू पारी खेली, लेकिन रेणुका की गेंद पर उनका विकेट गिरने के साथ ही इंग्लैंड की उम्मीदों पर पूर्ण विराम लग गया। रेणुका ने अपनी घातक गेंदबाजी की बदौलत 10 में 57 रन देकर चार विकेट चटकाये। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने के लिये बुलाये जाने पर भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा (08) एक बार फिर जल्दी पवेलियन लौट गयीं। स्मृति मंधाना ने अपनी शानदार फॉर्म को बरकरार रखते हुए 51 गेंदों पर 40 रन बनाये और यस्तिका भाटिया (26) के साथ दूसरे विकेट के लिये 54 रन की साझेदारी की। स्मृति और यस्तिका के आउट होने के बाद हरमनप्रीत ने मोर्चा संभाला और हरलीन के साथ चौथे विकेट के लिये 113 रन की विशाल साझेदारी की। हरलीन ने अपना पहला एकदिवसीय अर्द्धशतक जड़ते हुए 72 गेंदों पर पांच चौकों और दो छक्कों के साथ 58 रन बनाये। हरलीन के पवेलियन लौटने के बाद हरमनप्रीत ने पारी की रफ्तार बदली और अपना पांचवां एकदिवसीय शतक पूरा किया। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने अंतिम पांच ओवरों में 80 रन जोड़े और 50 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 333 रन बनाये। पूजा वस्त्राकर ने 18 (16) और दीप्ती शर्मा ने 15 (09) रन का योगदान दिया। इंग्लैंड की ओर से लौरेन बेल, केट क्रॉस, फ्रेया केंप, शारलोट डीन और सोफी एकलेस्टन ने एक-एक विकेट निकाला। केंप (10 ओवर, 82 रन) और बेल (10 ओवर, 79 रन) इंग्लैंड के लिये महंगी साबित हुईं। इंग्लैंड ने 334 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए आवश्यक रनगति बनाये रखी लेकिन लगातार विकेट भी गंवाये। सलामी बल्लेबाज टैमी बोमॉन्ट (06) रन चुराने के प्रयास में हरमनप्रीत के थ्रो का शिकार हो गयीं। रेणुका ने सोफिया डंकली को एक रन के स्कोर पर बोल्ड किया, जबकि एमा लैंब (15) को पगबाधा करके पवेलियन लौटाया। एलिस कैपसी अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सकीं और 36 गेंदों पर छह चौकों के साथ 39 रन बनाकर आउट हो गयीं। इंग्लैंड के 102 रन पर चार विकेट गिरने के बाद वायट और कप्तान एमी जोन्स ने 65 रन की बहुमूल्य साझेदारी की, लेकिन 30वें ओवर में वायट के आउट होते ही मैच इंग्लैंड की पकड़ से दूर हो गया। कुछ देर बाद जोन्स भी 39 (51) रन बनाकर आउट हो गयीं। आखिरी दो विकेटों के लिये 62 रन जोड़ने के बाद भी इंग्लैंड को 88 रन के विशाल अंतर से हार मिली। रेणुका के चार विकेटों के अलावा भारत के लिये दयालन हेमलता ने दो विकेट लिये, जबकि शफाली वर्मा और दीप्ती शर्मा को एक-एक विकेट हासिल हुआ।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन टी-20 मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जायेगा। शुक्रवार (23 फरवरी) को इस मैदान पर टीम इंडिया सीरीज को बराबर करने उतरेगी। उसे पहले मैच में चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय टीम अगर यह मैच नहीं जीतती है तो सीरीज गंवा देगी। इस मैदान पर भारत के रिकॉर्ड को देखें तो वह पिछले छह साल से यहां नहीं हारा है। टीम इंडिया नागपुर में पांचवीं बार टी20 मैच खेलने उतरेगी। वह पिछली बार यहां 10 नवंबर 2019 को बांग्लादेश के खिलाफ खेली थी। तब 30 रन से मैच को अपने नाम किया था। नागपुर में अब तक खेले गये चार मैचों में भारतीय टीम को दो में जीत मिली है। वहीं, दो मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा था। वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यहां पहली बार खेलेगी। नागपुर में 2016 में मिली थी पिछली हार : भारत को नागपुर में पिछली हार 15 मार्च 2016 को मिली थी। तब न्यूजीलैंड ने टी20 वर्ल्ड कप में सुपर-10 के मैच में 47 रन से हराया था। कीवी टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 126 रन बनाये थे। जवाब में भारतीय टीम 18.1 ओवर में 79 रनों पर ढेर हो गई थी। महेंद्र सिंह धोनी टीम के कप्तान थे। उस हार के बाद से भारत ने यहां एक भी मैच नहीं गंवाया है। नागपुर में टीम इंडिया का प्रदर्शन : 9 दिसंबर 2009 को श्रीलंका से 29 रन से हारे, 15 मार्च 2016 को न्यूजीलैंड से 47 रन से हारे, 29 जनवरी 2017 को इंग्लैंड से 5 रन से जीते, 10 नवंबर 2019 को बांग्लादेश से 30 रन से जीते। मोहाली में पहले टी20 में क्या हुआ : टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में छह विकेट गंवाकर 208 रन बनाए। हार्दिक पांड्या ने 30 गेंदों में 71 रन की नाबाद पारी खेली। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 19.2 ओवर में छह विकेट गंवाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। कैमरून ग्रीन ने 30 गेंदों में 61 रन और मैथ्यू वेड ने 21 गेंदों में 45 रन की नाबाद पारी खेली। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.