टीम एबीएन, पलामू/ रांची। पलामू जिले के नीलाम्बर पीताम्बरपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित जैप 8 पुलिस मुख्यालय में चल रहे आईआरबी 1,2,3,4,5 पुलिस फोर्स जगुआर में हवलदार पद का ट्रेनिंग ले रहा जवान अवनीश कुमार वर्मा बैच न.468 ने फांसी लगा आत्महत्या कर ली।इस मामले में कई जवानों का कहना है कि डीएसपी दीपक कुमार, ट्रेनर जयप्रमानंद सिंह, ट्रेनिंग मेजर कमलेश दुबे जवानों को लगातार प्रताड़ित करते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक सुबह में रूटीन के हिसाब से पीटी के लिए ग्राउन्ड में गये थे। तभी अचानक सूचना मिली कि मेस मैनेजर ने अपने बैरक में फांसी लगा ख़ुदकुशी कर ली है।इसकी सूचना पाकर सारे जवान जब घटनास्थल पहुंचे, तो आईआरबी 3 के हवलदार का ट्रेनिंग ले रहा जवान अवनीश झूलता हुआ मिला। घटना से आहत जवानों ने जमकर हंगामा किया। घटना की सूचना लेस्लीगंज थाना को दी गयी।सूचना मिलने पर लेस्लीगंज थाना प्रभारी गौतम कुमार राय मौके पर पहुंचे। जवान को फंदे से उतारा। उसके बाद आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ केंद्र लेस्लीगंज भेजा गया। जहां उन्हें प्राथमिक उपचार कर बेहतर ईलाज के लिए एमएमसीएच मेदिनीनगर भेज दिया। वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।घटना की सूचना पाकर पलामू पुलिस कप्तान सह जैप 8 कमांडेंट चंदन कुमार सिन्हा मौके पर पहुंचे। सभी जवानों को समझाया और मामले को शांत कराया। साथ ही विभागीय जांच कर उचित कार्रवाई की बात कही। आख़िर जवान ने फांसी क्यों लगाई? क्या कारण हुआ? इस बात की पुष्टि नहीं हो पायी है।जवानों से मिली जानकारी के मुताबिक मृतक जवान के घर में कोई घटना घटी थी। जिस कारण उक्त जवान छुट्टी का आवेदन डीएसपी दीपक कुमार ने दिया था। बार-बार आग्रह के बावजूद डीएसपी छुट्टी देने की जगह प्रताड़ित करते थे। सभी जवानों के साथ भी डीएसपी का यही व्यवहार है। छुट्टी नहीं मिलने से आहत और पदाधिकारियों की प्रताड़ना से आहत जवान ने खुदकुशी कर ली।
टीम एबीएन, रांची। अपने अधिकारों को लेकर अनुसूचित जाति के लोग झारखंड के सभी जिलों से धुर्वा के शहीद मैदान पहुंचने वाली थी लेकिन रांची पुलिस ने अलग-अलग जगहो पर उन्हें रोक कर रखा है। बता दें कि हजारों की संख्या में भीड़ एकत्रित होने वाली थी, जिसके बाद पुलिस को सूचना मिलते ही रिंग रोड सहित अन्य जगहों पर रोक कर रखा है। वहीं अखिल भारतीय अनुसूचित जाति महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरपी रंजन पुलिस के रवैये से नाराज होकर झारखंड के डीजीपी को फोन कर जानकारी दी और उनके लोगों को छोड़ने की बात कही। वहीं इस कार्यक्रम में आ रहे लोगों को पुलिस के रोकने और कार्यक्रम पर नहीं आने देने पर अखिल भारतीय अनुसूचित जाति के सचिव मुकेश नायक ने कहा कि दलील को ऐसे ही दबाया गया और आज ऐसे ही मुंह को दबाने के लिए हमारे लोगों को रास्ते पर ही रोक रखा है। इससे साफ पता चलता है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दलितों के प्रति का सोच रखता है, संविधानिक अधिकार पर रोक लगाया है जल्द जवाब दिया जायेगा। झारखंड विभाजन के पश्चात, झारखंड राज्य की अनुसूचित जातियां हाशिये पर आ गयी है। झारखंड में अनुसूचित जाति के लोगों को शासन-प्रशासन से दरकिनार किया जाता रहा है, जिसका परिणाम है कि वर्तमान समय में झारखंड सरकार के आयोग, बोर्ड एवं निगम में अनुसूचित जाति के लोगों को तरजीह नहीं दिया गया है। अत: सरकार के विभिन्न विभाग, आयोग, बोर्ड एवं निगम में अनुसूचित जाति के पद अब भी रिक्त पड़े हुए है, अनुसूचित जाति आयोग क्रियाशील नहीं है, आखिर अनुसूचित जाति के लोग गुहार लगाए तो कहां लगाये? झारखंड के सम्पूर्ण जनसंख्या का 15% (लगभग 60 लाख) अनुसूचित जाति के लोग असंतुष्ट, लाचार, विवश, एवं असहाय सा महसूस कर रहे है। उन्होंने मीडिया के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया है कि इस सम्मेलन में उल्लेखित हमारी समस्याओं को अपने मीडिया के मध्यम से सरकार एवं समाज तक पहुंचाने में हमारी मदद करें, ताकि झारखंड सहित पूरे देश में अनुसूचित जाति के लोगों को हक सम्मान व अधिकार मिल सके। कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों की एकता के अभाव में हम सामाजिक-आर्थिकराजनीतिक रूप से दिनों-दिन पिछड़ते जा रहे हैं, परिणामस्वरूप सरकारें द्वारा अनुसूचित जाति के लोगों को तरजीह नहीं दिया जाता है, ऐसा महसूस होता है कि हमसब सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गये हैं। अब हम और सहन नहीं करेंगे, अत: सभी अनुसूचित जाति के लोगों से विनम्र आग्रह है कि जाति समुदाय की राजनीति को पीछे छोड़कर एक मंच पर आना है ताकि सरकार को आंख दिखाकर अपने हक और अधिकार की मांग प्रभावी तरीके से करना है, तभी हमसबों के अधिकार और सम्मान सुरक्षित रह पायेगा। महासभा के माध्यम से सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगों को रखा जाना है : ट्राइव्स एडवाइजरी काउंसिल की तरह सीडुल्ड कास्ट एडवाइजरी काउंसिल सरकार बनाये। झारखंड सरकार द्वारा अनुसूचित जाति आयोग को अतिशीघ्र क्रियाशील किया जाये। झारखंड सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाये झारखंड सरकार में अनुसूचित जाति के विधायक को मंत्री बनाया जाये। विभिन्न विभागों, बोर्ड, निगम, कमेटी एवं आयोग में अनुसूचित जातियों की भागीदारी सुनिश्चित किया जाये। 2 अप्रैल 2018 को मूलनिवासियों द्वारा किये गये आंदोलन आधारित हुए मुकदमों को वापस लिया जाये। झारखंड सरकार द्वारा दिये जाने वाले ठेका - प्रथा में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जाये। अनुसूचित-जाति की जनसंख्या के अनुपात पर राज्य में आरक्षण की व्यवस्था (14%) को सुनिश्चित किया जाये। अनुसूचित जातियों के द्वारा सीएनटी फ्री जमीन की खरीददारी पर उसे सीएनटी में परिवर्तित न किया जाये। 1932 के तहत भूमिहीन व खतियानविहीन अनुसूचित जाति (झारखंड में लगभग 73% आबादी भूमिहीन अर्थात खतियान नहीं है), के लिए जाति प्रमाणपत्र एवं आवासीय प्रमाणपत्र बनाने संबंधी समस्याओं का समाधान एक साथ समुचित रूप से किया जाए। भूमिहीन अनुसूचित जाति के लोगों को घर बनाने हेतू पर्याप्त जमीन व 100% परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध करायें। अनुसूचित जाति के महिलाओं एवं लड़कियों के प्रति हो रहे भेदभाव, उत्पीड़न एवं बलात्कार के मामलों पर कड़ी कार्यवाई की जायें। साथ ही उत्पीड़न एवं बलात्कार के लंबित सभी मामलों पर अतिशीग्र कार्यवाई किया जाये। सरकारी एवं प्राइवेट कार्यालयों में अनुसूचित जाति के कर्मचारियों के साथ भेदभाव, उत्पीड़न एवं शोषण पर पूर्णत: रोक लगे। अनुसूचित जातियों के लिए बैंक लोन की व्यवस्था सुलभ हो। अनुसूचित जाति के लोगों का विकास उन्हीं के द्वारा बनाए गए सहकारी समितियों द्वारा किया जाये। सभी जिलों में अंबेडकर भवन के लिए जमीन एवं कोष की व्यवस्था अतिशीघ्र उपलब्ध कराया जाये। अनुसूचित जाति के मेघवी छात्र/छात्राओं को सरकारी अनुदान पर विदेश में उच्च शिक्षा दिलाने में प्राथमिकता दी जाए। राइट टू एजुकेशन के तहत सभी प्राइवेट विद्यालयों में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों का नामांकन सुनिश्चित किये जायें। जवाहर नवोदय विद्यालय एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न एवं शोषण पूर्णत: बंद हो। राज्य सरकार द्वारा संचालित (कल्याण विभाग) अनुसूचित जाति आवासीय विद्यालयों को सुदृढ़ किये जायें। अनुसूचित-जाति के विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक जिलों में आवसीय विद्यालय की व्यवस्था किया जाये। अनुसूचित जाति के विदार्थियों के लिए प्रत्येक जिलों में हॉस्टल का निर्माण हो। अनुसूचित जाति के युवाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाये। झारखंड में अनुसूचित-जाति के लोगों को 100% अनुदान पर ऋण व रोजगार हेतु उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाये। सफाई कर्मचारियों का वेतन निर्धारण एवं वेतन वृद्धि किया जाये, साथ ही उनके नौकरी को रेगुलर किया जाये। सड़क किनारे जूता बनाने वाले लोगों के लिए सरकार नि:शुल्क दुकान आवंटित करे। रांची, हजारीबाग, पलामू और गढ़वा में मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाये। अनुसूचित जाति के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर हथियार (बंदूक) का लाइसेंस निर्गत किया जाये।
वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण और महिला सुरक्षा पर दिया जोरटीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 14 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में बीआइटी लालपुर के एनएसएस के तत्वावधान में एक वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इसमें प्रथम वक्ता के रूप में निदेशक डॉ वंदना भट्टाचार्य ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की महत्व और उसकी जरूरत पर महिलाओं और छात्राओं को बतलाया कि आज महिला सशक्तिकरण की बात करें तो सबसे पहले अपने हक के लिए सबसे पहले खुद से ही लड़ना होगा। ताकि दुनिया से लड़ने के लिए अपने आप को तैयार कर सकें और खुद को मजबूत बना सकें। महिलाओं को सबसे पहले आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने आत्मविश्वास के बढ़ने से ही हम आत्मसम्मान हासिल कर सकते हैं। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत महिला और पुरूष की शक्ति और उसकी समानता पर हुई वाद विवाद प्रतियोगिता में बहुत ही बेहतरीन तरीके से महिला और पुरूष प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और इस दिवस की प्रासंगिकता पर अपनी बातों से दमदार भाषण दिया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ अभय रंजन श्रीवास्तव ने लैंगिक समानता पर अपनी बात रखते हुए प्रतिभागियों को उत्साहित किया। डॉ प्रदीप मुंडा ने महिलाओं पर आदिकाल से होने वाले मानसिक और शारिरिक प्रताड़ना पर बोलते हुए इस दिवस को और मजबूती प्रदान करने की बातें रखी। कार्यक्रम में डॉ महुवा, डॉ मिलि दत्ता, डॉ स्वाती मिंज, अनुपमा सहाय ने महिलाओं की आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनाने के अपने-अपने विचारों से छात्र-छात्राओं को उत्साहित करने और देश के लिए अपनी उपलब्धियों पर साथ चलने पर जोर दिया। डॉ उमेश कुमार, डॉ संदीप शाहदेव, डॉ प्रशांत सिंह, श्रीमती विजया लक्ष्मी, एलिस टोप्पो, मिनी दुबे, अनामिका कुमारी, सरिता तिग्गा, डॉ अनीश हैदर ने उपस्थित होकर प्रतिभागियों को उत्साह बढ़ाया। प्रतियोगिता में ऋषि, सिमरन, अर्चिता मोदी, स्नेहा सिंह, शालिनी पांडेय, दानिश राजा, विराज, अनुरिमा सहित भारी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राणा प्रताप मिश्रा ने दी।
मां मथुरासिनी की झांकी ने लोगों का मन मोहाटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। माहुरी वैश्य मंडल के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय मां मथुरासिनी महोत्सव का शुभारंभ मंगलवार को ध्वजारोहण व भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। गौरी शंकर मोहल्ला स्थित श्री माहुरी भवन में सर्वप्रथम समाज कि वयोवृद्ध महिला मनोरमा देवी ने ध्वजारोहण किया। इसके उपरांत भवन परिसर से आकर्षक शोभायात्रा निकाली गयी। शोभायात्रा की शुरुआत बतौर मुख्य अथिति गया से आये बिहार चेंबर आॅफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष प्रमोद भदानी व समाज के वरिष्ठ सदस्य यदुनंदन लोहानी ने संयुक्त रूप से पंच सेवक को ध्वज प्रदान कर व हरी झंडी दिखा कर किया। शोभायात्रा डॉक्टर गली, स्टेशन रोड, काली मंदिर, भदानी रोड, झंडा चौक, रांची पटना रोड होते हुए सामंतो काली मंदिर पहुंची। यहां पूजा अर्चना के उपरांत पुन: रांची पटना रोड होते हुए श्री माहुरी भवन पहुंच कर संपन्न हुआ। इसके पूर्व शोभायात्रा में शामिल समाज के सैकड़ों सदस्य अपने अपने हाथों में कुलदेवी मां का ध्वज लेकर चल रहे थे। शोभायात्रा में पंच सेवक के रूप में नवयुवक समिति के अध्यक्ष प्रतिक कुमार, सचिव साहिल भदानी, उपाध्यक्ष अंकित गुप्ता, कोषाध्यक्ष हिमांशु सेठ व पीयूष लोहानी समाज का ध्वज लेकर आगे आगे चल रहे थे। इनके पीछे एक सुसज्जित रथ पर मां मथुरासिनी की जीवंत झांकी सजी थी। नैंसी कपसीमे मां मथुरासिनी के रूप में सभी श्रद्धालुओं का मन मोह रही थी। तो, वहीं महिला समिति की सदस्य सुनीला कपसीमे, रश्मि एकघरा, सारिका कपसीमे, संध्या कपसीमे, संगीता ब्रहपुरिया, ज्योति कपसीमे, नीलम अठघरा, कविता आर्या, नेहा लोहानी व रीता कुटरियार मां के जीवंत रूप पर पुष्प वर्षा करते चल रही थी। वहीं इनके पीछे एक अन्य सुसज्जित रथ पर मां मथुरासिनी का भव्य दरबार सजा था, जो आकर्षण का केंद्र था। वहीं इनके पीछे भजन मंडली के साथ झूमते-गाते समाज की महिलाएं पुरुष व बच्चे चल रहे थे। कार्यक्रम के दौरान कुलदेवी सिद्धिदात्री मां मथुरासिनी के जयकारों से पूरा शहर गूंजायमान होता रहा। शोभायात्रा का संचालन मंडल संगठन मंत्री अरविंद कुमार एकघरा, दिलीप ब्रहपुरिया ने किया। मौके पर मंडल अध्यक्ष मुन्ना भदानी, सचिव संजय तर्वे, महामंडल उपाध्यक्ष रवि कपसीमे, मंडल संगठन मंत्री विशाल भदानी, दयानंद पवनचौदह, विजय वैश्यकियार, दिलीप अठघरा, संतोष कपसीमे, संतोष सेठ, सुनील भदानी, विकास वैश्यकियार, गौतम वैश्यकियार, विजय कपसीमे, उदय बड़गवे, नीरज अठघरा, राहुल कपसीमे, अमन कपसीमे, सोनू पहाड़ी, भानु प्रसाद, ज्योति पहाड़ी, सुरेश सेठ, राजन भदानी, सागर भदानी, रोबिनस एकघरा, केंद्रीय महिला समिति उपाध्यक्ष सुनीता सेठ, महिला समिति अध्यक्ष ललिता भदानी, सचिव सरोज पवनचौदह, कोषाध्यक्ष कुमकुम भदानी, प्रो राखी भदानी, पूर्णिमा सेठ, निशा कपसीमे, जुली वैश्यकियार, मनिला सेठ, कल्याणी भदानी, मिनी कपसीमे, शालिनी तर्वे, अर्चना गुप्ता, बालिका समिति अध्यक्ष अंकिता एकघरा, सचिव अंजलि अठघरा, स्मृति ब्राहपुरिया आदि शामिल थे। कुलदेवी मां की आराधना आज, होगा संगीतमय भजन मां मथुरासिनी महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को सुबह 08 बजे से पुजा अर्चना के साथ सवा 13 घंटे का अखंड ज्योत के साथ संगीतमय भजनों का कार्यक्रम का आयोजन होगा। जिसमें डांडिया, महाआरती का आयोजन महिलाएं करेंगी। इसी दिन नृत्य नाटिका का भी मंचन आकर्षण का केंद्र होगा। वहीं महोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार को समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान व विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिया जायेगा। इसके अलावा समाज के गोष्ठी में सामाज की गतिविधियों की रिपोर्ट समाज के पदाधिकारीगण करेंगे। इसी दिन संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किया जायेगा।
टीम एबीएन, लातेहार/ रांची। जिले में जंगली जानवर का आतंक चरम पर है। जंगली हाथी ने अब नेतरहाट के इलाके में भी आतंक मचाना आरंभ कर दिया है। इसी क्रम में नेतरहाट के बटुवाटोली में बीती रात जंगली हाथी ने हमला कर एक ग्रामीण को मार डाला। मृतक ग्रामीण का नाम रितु किसान है। हाथी ने इस दौरान कई ग्रामीणों के घर को भी ध्वस्त कर दिया है। घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बीते सोमवार की रात जब ग्रामीण अपने घरों में सोये हुए थे तो अचानक जंगली हाथी ने गांव में आकर आतंक मचाना शुरू कर दिया। हाथी ने सबसे पहले रितु किसान के घर को ध्वस्त कर दिया। हाथी को देखकर ग्रामीण भागने लगे, लेकिन तब तक हाथी ने रितु किसान को अपनी चपेट में ले लिया और उसे पटक-पटक कर मार डाला। इसके बाद गांव के अन्य ग्रामीण अपनी जान बचाकर वहां से भागे। हाथी ने इस दौरान कई ग्रामीणों के घर को भी ध्वस्त कर दिया। इतना ही नहीं, गांव के स्कूल को भी हाथी ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। ग्रामीणों के हल्ला मचाने और आग जलाने के बाद हाथी वहां से भागा। इस दौरान जंगली हाथी ने रितु किसान, खुदेश्वर किसान, विष्णु किसान के घर सहित सरकारी स्कूल को क्षति पहुंचायी है।
टीम एबीएन, धनबाद/ रांची। बीआइटी सिंदरी में छात्रों के बीच मारपीट की घटना घटी है। घटना को लेकर जूनियर छात्र डरे सहमे हुए हैं। बताया जा रहा है कि किसी बात को लेकर हुए विवाद में सीनियर और जूनियर छात्रों के बीच मारपीट हुई है। हालांकि, बीआईटी प्रबंधन घटना की जांच करा रहा है। मामले को लेकर अनुशासन समिति के द्वारा एक सीनियर छात्र के ऊपर कार्रवाई भी की गई है। आरोपी छात्र को संस्थान के छात्रावास से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। हालांकि मामले में पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। फिर भी पुलिस लगातार बीआईटी सिंदरी पर नजर रख रही है। पुलिस की गश्ती दल लगातार वहां पेट्रोलिंग कर रही है। बताया जा रहा है कि होली की छुट्टी के दिन से ही सेकंड ईयर और फर्स्ट ईयर के छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद चला आ रहा था। बीते शनिवार-रविवार को यह विवाद काफी बढ़ गया। जिसके बाद सेकेंड ईयर के छात्रों ने फर्स्ट ईयर के छात्रों के हॉस्टल में मारपीट की। इसके बाद हॉस्टल के अंदर तोड़फोड़ भी की गई। जिसके बाद संस्थान प्रबंधन ने पुलिस को बुलाया। पुलिस की गश्तीदल भी कैंपस के अंदर पहुंची। घटना के बाद से बीआइटी प्रबंधन लगातार कैंपस की मॉनिटरिंग कर रही है। मामला शांतिपूर्ण बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस की गश्तीदल लगातार कैंपस की निगरानी कर रही है। कहा जा रहा है कि 11 मार्च को सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा खत्म हुई थी। दूसरे ही दिन छात्रों के बीच विवाद हो गया था। रविवार की रात छात्रों ने हंगामा किया था। हंगामा के बाद छात्रों के हॉस्टल की तलाशी ली गयी। कुछ छात्रों के मुंह से शराब की दुर्गंध आ रही थी। पूरे मामले में विकास नाम के एक छात्र को हॉस्टल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। बीआइटी प्रबंधन ने हॉस्टल खाली करने के साथ ही उसे चेतावनी भी दी है कि फिर से घटना की पुनरावृत्ति हुई तो उसे संस्थान से बाहर निकाल दिया जायेगा।
टीम एबीएन, झुमरी तिलैया। ताराटांड़ निवासी तारा देवी की पहली पुण्य तिथि पर उनके परिजनों ने मंगलवार को रेलवे काली मंदिर के निकट गरीबों को भोजन कराया। इस बारे में उनके पौत्र हिमांशु आर्या ने बताया कि लगभग एक सौ से अधिक लोगों को पूड़ी, सब्जी और मिठाई खिलाया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से परिवारजनों को सुकून मिलता है। मौके पर उनके परिजनों में वेद प्रकाश आर्या, ज्ञानप्रकाश आर्या, संजय आर्या,सीमा आर्या, चंचला देवी, हिमांशु आर्या, संस्कार आर्या, नूतन आर्या, समीक्षा आर्या, हर्षित आर्या, वंश आर्या, अरूणा आर्या, चुन्नू आर्या, चंचला देवी समेत परिवार के अन्य लोग मौजूद थे। हिमांशु ने बताया कि प्रत्येक पुण्य तिथि पर गरीबों को भोजन कराया जायेगा।
टीम एबीएन, कोडरमा। दलित शोषण मुक्ति मंच (डीएसएमएम) के देशव्यापी आह्वान पर देश में दलित उत्पीड़न एवं संविधान पर हो रहे हमले के खिलाफ मंगलवार को मांग दिवस के तहत डीएसएमएम के जिलाध्यक्ष दिनेश रविदास के नेतृत्व में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। जिसके माध्यम से कहा गया कि वर्ष-2014 में जब से केन्द्र मे भाजपा की मोदी सरकार आई है तब से दलितों-पिछडों के उपर व्यापक हमले बढ़े हैं। ससमय सजा नहीं मिलने के कारण अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो गया है। मोदी सरकार नयी शिक्षा नीति लाकर दलितों, पिछडों एवं गरीबों को पढने से वंचित रखने का प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार सार्वजनिक संस्थाओं का निजीकरण कर दलितों, पिछडों एवं गरीबों का आरक्षण समाप्त कर रही है। 1980 में बने वन संरक्षण कानून में केंद्र सरकार ने संशोधन कर दिया है और अब वन भूमि का दोहन करने के लिए वन संरक्षण का जिम्मा पूंजीपतियों के हांथों में सौपने की साजिश की जा रही है। जिसे हम वापस लिया जाना चाहिए। 2006 में बने वन अधिकार अधिनियम भी ठीक से लागू नहीं हो रहा है, जिसके तरह वन भूमि पर वर्षों से बसे आदिवासी, दलित और अन्य गरीबों को जमीन पट्टा देना है। इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान से छेड़छाड़ कर आर एस एस द्वारा निर्मित मनुवादी संविधान को लागू करने की योजना बना रही है, जो देश के सभी समुदायों, वर्गों के भविष्य के लिए बुरा है। स्थानीय मांगों में कोडरमा एंव झुमरीतिलैया मे बाबा साहेब अम्बेडकर की पूर्व से लगी मूर्ति को बदलकर आदमकद प्रतिमा लगाने, सौन्दर्यीकरण करने, जमीन का आनलाईन रिकार्ड मे हुई गडबड़ी को शिविर लगाकर सुधार करने, बंदोवस्त भूमि पर दलितों को कब्जा दिलाया दिलाने, झुमरीतिलैया के बजरंग नगर एवं अंबेडकर नगर मे तीन पुश्त से बसे हुए दलितों को विकास के नाम पर उजाड़ने की तैयारी पर रोक लगाने, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के पीड़ित परिवारों को सरकार के द्वारा मिलने वाली सहायता राशि का भुगतान करने आदि मांगें शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में दलित शोषण मुक्ति मंच के जिलाध्यक्ष दिनेश रविदास, कोषाध्यक्ष राहुल कुमार, भीखारी तुरी, संतोष पासवान, संजय दास, टेकलाल दास, शिवपूजन पासवान, अर्जुन पासवान आदि शामिल थे।
करोड़ों लोगों का पैसा डकारने वाले सुब्रतो राय को मोदी सरकार दे रही संरक्षण : संजय पासवान टीम एबीएन, कोडरमा। सहारा समूह में जनता की बड़ी आबादी के भुक्तभोगी निवेशकों, एजेंटों व कर्मचारियों का अरबों-खरबों बकाया भुगतान की मांग व सहारा प्रमुख सुब्रत राय पर कार्रवाई की मांग को लेकर संयुक्त आल इंडिया जन आंदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा के बैनर तले सहारा समूह के एजेंटों व कर्मचारियों ने जिला समाहरणालय पर एकदिवसीय धरना सह भूख हड़ताल किया। धरना स्थल पर संघर्ष न्याय मोर्चा के जिलाध्यक्ष भागीरथ सिंह की अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन किया गया। संचालन जिला उपाध्यक्ष संतोष गोप ने किया। सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने सहारा कर्मियों के मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सहारा इंडिया की इस चिट फंड कंपनी का करीब 25 हजार करोड़ रुपए सेबी-सहारा खाते में फंसा है। लेकिन निवेशकों का पैसा न तो सेबी और न ही सहारा भुगतान कर रहा है। सहारा की योजनाओं में लाखों लोगों ने जमकर पैसा लगाया था, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अपनी रकम नहीं मिला। जिसके कारण उनके बच्चों की पढ़ाई रूक चुकी है। बेटियों की शादी नहीं कर पा रहे हैं। ठेला, खोमचा वाले से लेकर, छोटे दुकानदार, पान की गुमटी लगाने वाले, शब्जी बेचने वाले, टेम्पो चालक सहित लाखों रोज कमाने खाने वाले ने पैसा दोगुना तीगुना जमा होने के लालच में अपनी रोज की कमाई का एक हिस्सा एजेंटों के माध्यम से सहारा इंडिया में जमा किया था, लेकिन मैच्योरिटी पूरा होने के बावजूद निवेशकों को पैसा नहीं लौटाया जा रहा है। उनका जीवन भर की पूंजी फंस जाने से उनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई है। कई लोग महाजन की डर से बाजार में दुकान नहीं लगा रहे हैं, सुदखोर के चक्कर में फंस कर रोज की कमाई सूदखोरों की ही देना पड़ रहा है। भाजपानीत मोदी सरकार हमेशा इन बड़े पूंजीपतियों के पक्ष में खड़ा रही, यही कारण है कि नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या जैसे कारोबारी देश की एक दर्जन से ज्यादा बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेकर विदेश भाग गए। अडानी स्कैम पर सरकार चुप है। करोड़ों लोगों का पैसा डकारने वाले सुब्रत राय को भी मोदी सरकार संरक्षण दे रही है, जिसके कारण निवेशकों का पैसा वापस नहीं हो रहा है और सुब्रत राय ऐशो आराम की जिन्दगी जी रहा है। मोर्चा के जिलाध्यक्ष भागीरथ सिंह ने कहा कि वर्ष 1978 में मात्र दो हजार की पूंजी से दो लाख करोड़ रुपये का मालिक देश की 70 प्रतिशत गरीब जनता के पैसे से बन गया सुब्रत राय। देश में 12 लाख लोगों का रोजगार खत्म हो गया और सड़क पर आ गया। कोडरमा जिला में लगभग साढ़े तीन लाख लोगों का करीब 500 करोड़ रुपये फंसा है। एजेंट मार खा रहे हैं, आत्महत्या करने को मजबूर हैं, लेकिन हम जनता का पैसा वापस लाने के लिए बड़ी लड़ाई के लिए तैयार हैं। सभा को नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह, पूर्व मुखिया बसंती देवी, सुरेंद्र भारती आदि ने भी संबोधित किया। बाद में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मांगों से संबंधित ज्ञापन उपायुक्त आदित्य रंजन को सौंपा। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष भागीरथ सिहं, उपाध्यक्ष सचिंद्र शर्मा, संतोष गोप, मो अजीज, सुभाष सिहं, प्रभा देवी, अनुराधा देवी, चींता सिंह, पुनम देवी, संजय कुमार, सरिता सिन्हा, इंदु गुप्ता, कृष्णा वर्मा, मो रउफ अंसारी, संजय सिन्हा, तारकेश्वर राणा, प्रकाश यादव, सुरेश प्रसाद गुप्ता, आफताब आलम सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।
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