हमने जंगल और पहाड़ बचाया : सीएमटीम एबीएन, रांची। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन बिरसा मुंडा संग्रहालय कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि लंबे समय के बाद राज्य में आदिवासी महोत्सव का कार्यक्रम आयोजित हुआ है। पिछले वर्ष घनघोर बारिश के बीच हर्षोल्लास के साथ मनाया गया था, उसकी तुलना में आज का महोत्सव और भी भव्य और उत्साहवर्धक दिख रहा है। इस महोत्सव का अपना एक अलग मायना है, आज की परिस्थिति में ये दिवस और भी कई मायने में महत्वपूर्ण है। देश के विभिन्न राज्यों से और आदिवासी समुदाय के लोग अपने संस्कृति को प्रदर्शित तो करेंगे ही, कई समस्याओं पर चर्चा भी होगी। आदिवासी व्यंजन जो आज हमारी थाली से गायब हो रही, उसकी भी झलक यहां दिखेगी। देश के विभिन्न क्षेत्र में आदिवासी भाई प्रताड़ना झेल रहे हैं और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। मणिपुर में जो घटना घटी वो सबके सामने हैं, तो कहीं आदिवासी भाई पर पेशाब किया जा रहा है। देश भर के 13 करोड़ आदिवासी समाज के लोगों को एक होकर लड़ने की आवश्यकता है, जबकि हम आपस में बंटे हुए हैं। हमारी लड़ाई एक होनी चाहिए।13 करोड़ आदिवासी एक होकर लड़ने की आवश्यकताविस्थापित होने वालों में 80% आदिवासी समुदाय के लोग हैं। यहां के किसान दूसरे के घरों में बर्तन मांजने, ईंट भट्टों में काम करने को मजबूर है। विकास की चपेट में किसको नुकसान हुआ, इसका कभी जायजा लिया गया। मुख्य धारा के इतिहासकारों ने भी आदिवासी समुदाय के साथ बेईमानी किया और इनके इतिहास को चिन्हित नहीं किया। हमारे पूर्वजों को जगह नहीं दी गयी, हमारी कई भाषाएं लुप्त होने के कगार पर हैं। आज आदिवासी समाज को चुप करने का प्रयास हो रहा है।हमने जंगल और पहाड़ बचायाआदिवासी इतिहास का जिक्र 1800 से पहले का नहीं दिखता, हमें टुकड़ों में बांट कर देखने का प्रयास किया गया। इस देश में सभ्यता, संस्कृति को गढ़ने में आदिवासी समाज की फिर से व्याख्या किया जाये। आदिवासियों के लिए अपनी जमीन, सभ्यता मायने रखती है। हमने जंगल और पहाड़ बचाया है। हमें जंगल में रहने वाले गरीब के तौर पर ना देखा जाये। जब लड़ाई अस्तित्व और वजूद की हो, तो सामने आना ही पड़ता है। देश के दूसरे हिस्से के आदिवासी का भी प्यार मुझे मिलता है। इसलिए जय हिंद के नारे के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लें।इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन ने कहा कि झारखंड देश के गरीब राज्यों में से एक हैं और आदिवासी समाज हमेशा संघर्ष करता रहा है। शिक्षा से जीवन में बदलाव लाया जा सकता है।
झारखंड आदिवासी महोत्सव 2023 टीम एबीएन, रांची। राज्य की उपराजधानी दुमका में प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाला राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव की अपनी एक अलग पहचान है। मयूराक्षी नदी के तट पर आयोजित होने वाले इस मेले की शुरूआत 1890 ई. में हुई। बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान रांची में आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव 2023 में हिजला द्वार बनाया गया है, जो महोत्सव में आकर्षण का केंद्र है। हिजला मेला से संबंधित जानकारी भी यहां प्रदर्शित की गयी है। कार्यक्रम में आने वाले लोग हिजला द्वार के सामने अपनी तस्वीर भी ले रहे हैं और झारखंड आदिवासी महोत्सव 2023 की यादों को संजो कर रख रहे हैं।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के राजनीतिक मामलों की समिति ने बैठक कर कई प्रस्ताव पारित किये खड़गे पलामू, कोडरमा, राहुल रांची व धनबाद तथा प्रियंका गांधी चाईबासा और गोड्डा में करेंगी रैली टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत पार्टी ने वृहत योजना तैयार की है। लोकसभा चुनाव से पूर्व प्रदेश कांग्रेस अपने तीन केंद्रीय नेताओं की बड़ी रैली आयोजित करने जा रही है। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस के राजनीतिक मामलों की समिति ने बैठक कर कई प्रस्ताव पारित किए हैं। बैठक में चुनाव से पूर्व झारखंड में तीन बड़ी रैलियां आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इन रैलियों में कांग्रेस पार्टी के तीन केंद्रीय नेता मल्लिकार्जुन खड़गे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शिरकत करेंगे। पार्टी नेता राहुल गांधी की रैली रांची और धनबाद में आयोजित होगी। रांची में होने वाली रैली में लोहरदगा और खूंटी लोकसभा क्षेत्र भी शामिल होगा। साथ ही धनबाद की रैली में गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र भी शामिल होगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पलामू और कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में रैली करेंगे। पलामू में होने वाली रैली में चतरा लोकसभा क्षेत्र तथा कोडरमा में होने वाली रैली में हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र भी शामिल होगा। प्रियंका गांधी चाईबासा और गोड्डा में रैली करेंगी। चाईबासा लोकसभा क्षेत्र में होने वाली रैली में खूंटी और जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र तथा गोड्डा में होने वाली रैली में दुमका और राजमहल लोकसभा क्षेत्र शामिल रहेगा। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस के राजनीतिक मामलों की समिति ने लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए सभी 14 लोकसभा क्षेत्र में समन्वय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। बैठक में मंडल समितियां पंचायत समितियां और लगभग 30,000 बूथ समितियां के गठन का भी प्रस्ताव पास किया गया है। साथ ही कांग्रेस के सभी अग्रणी संगठनों के लिए भी कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस एनएसयूआई और सेवा दल को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय और वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों का मिलन समारोह आयोजित करना है। बैठक में झारखंड सरकार में शामिल कांग्रेस के मंत्रियों की भी जिम्मेवारी तय की गयी है। कांग्रेसी मंत्रियों को आम लोगों के साथ भारत जोड़ो यात्रा निकालेंगे एवं प्रखंडों में जनसुनवाई कार्यक्रम में शामिल होंगे। ये सारे प्रस्ताव अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी को भेज दिया गया है। केंद्रीय कमिटी का इन प्रस्तावों पर मुहर लगाने के साथ ही आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली जायेगी।
झारखंड आदिवासी महोत्सवटीम एबीएन, रांची। विश्व आदिवासी दिवस को भव्य बनाने में राज्य सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। राजधानी रांची में जगह-जगह बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनर लगाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर पारंपरिक वेशभूषा में 32 जनजातीय वाद्य यंत्रों के साथ रीझ रंग रसिका रैली निकाली जायेगी, जिसमें मांदर की थाप पर लोग थिरकते हुए नजर आयेंगे।महोत्सव के पहले दिन यानी आज (09 अगस्त) मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोपहर 1 बजे इसका उद्घाटन करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में इस दौरान राज्य समन्वय समिति के अध्यक्ष और सांसद शिबू सोरेन मौजूद रहेंगे। आगंतुक अतिथियों का स्वागत नगाड़ा समूह दल के 50 कलाकारों के द्वारा नगाड़ा की प्रस्तुति के साथ होगी। इसके अलावा पाइका नृत्य समूह के द्वारा भी मुख्य अतिथि और मुख्यमंत्री का स्वागत किया जायेगा। बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान में आयोजित होने वाले आदिवासी महोत्सव को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोपहर 2 बजे संबोधित करेंगे। उद्घाटन सत्र के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा। जिसमें झारखंड की स्वर कोकिला कहाने वाली मोनिका मुंडू अपनी जादुई आवाज से मंत्रमुग्ध करेंगी। मोनिका मुंडू नागपुरी संगीत की दुनिया में जाना पहचाना चेहरा हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश से आए समूह द्वारा कोम्मू कोया नृत्य प्रस्तुति, ओडिशा से आये परोजा नृत्य, गरासिया आदिवासी समुदाय द्वारा राजस्थानी वालार नृत्य, केरल के आदिवासी समुदाय द्वारा पालियन नृत्य, तपन पटनायक और उनके समूह द्वारा सरायकेला छऊ नृत्य, राजेश बड़ाईक द्वारा मांदर वादन, पद्मश्री मुकुंद लाल नायक द्वारा नागपुरी लोक नृत्य, इसके अलावा छत्तीसगढ़ से आए बस्तर बैंड की प्रस्तुति होगी। वहीं वर्षा लकड़ा द्वारा नागपुरी नृत्य की प्रस्तुति की जायेगी। दूसरे दिन भी बिखरेगी आदिवासी संस्कृति की छटा दूसरे दिन यानी 10 अगस्त को 11 बजे से महोत्सव की शुरुआत उरांव आदिवासी समुदाय का लोक नृत्य से होगी। जिसके बाद पाइका नृत्य, गोंड आदिवासी समुदाय का किहो नृत्य, कर्नाटक के आदिवासी समुदाय द्वारा दामिनी लोक नृत्य, लखन गुड़िया का मुंडारी गायन वादन, पद्मश्री मधु मंसूरी की गायन प्रस्तुति, रमेश्वर मिंज द्वारा बांसुरी वादन होगा। दोपहर 2 बजे अरुणाचल प्रदेश के निशि आदिवासी समुदाय द्वारा रेखम पड़ा नृत्य, असम के हाजोंग आदिवासी समुदाय आदिवासी द्वारा लेवा टाना नृत्य, असम के दिओरी आदिवासी समुदाय का बिहु नृत्य के अलावे झारखंड रंगारंग महोत्सव स्थानीय आदिवासी समुदाय द्वारा किया जायेगा। इसके अलावे गुजरात के अफ्रीकन आदिवासी समुदाय द्वारा सिद्धि धमाल नृत्य प्रस्तुत किया जायेगा। समापन समारोह को शाम 5 बजे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन संबोधित करेंगे, जिसमें सुश्री एंजेल मरीना तिर्की और आदिवासियत- एक जीवन शैली विषय पर आउटलुक इंडिया के संपादक के साथ परिचर्चा आयोजित की जायेगी। नंदलाल नायक की प्रस्तुति और ड्रोन, लेजर एवं फायर शो के माध्यम से झारखंड की सभ्यता और संस्कृति को दशार्ते हुए इस महोत्सव का समापन होगा।जनजातीय विषय पर होगा राष्ट्रीय सेमिनारइस महोत्सव में आदिवासी सभ्यता और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। समारोह के समापन में लेजर शो के तहत झारखंड के इतिहास और संस्कृति को दशार्या जायेगा। इसके अलावा इस मौके पर ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी टीआरआई के द्वारा सेमिनार, पैनल डिस्कशन, ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल पेंटिंग प्रदर्शनी के अलावे पैनल डिस्कशन में जनजातीय भाषा, चुनौती और उपयोगिता जैसे विषय पर विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे। जानकारी के मुताबिक इस मौके पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सेमिनार में जनजातीय भाषा, जनजातियों के इतिहास, जनजातीयों की आर्थिक स्थिति और जनजातियों के भविष्य और इतिहास को दर्शन कराती विषयों पर चर्चा होगी। जिसमें रामचंद्र उरांव, प्रतिमा एक्का, भूपेश कुमार, अलका अरोड़ा, संदेश कुमार, प्रभाकर तिर्की, पिनाकी घोष, डॉक्टर सत्यम, अरुणा तिर्की, कपिल टोप्पो, प्रवीण एक्का का व्याख्यान होगा। जनजातीय फिल्म महोत्सव में करीब एक दर्जन जनजातीय फिल्में प्रदर्शित की जायेगी। दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव में अरुणाचल प्रदेश, असम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान के जनजातीय समुदाय के कई कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत नागपुरी, छऊ, डोमकच, पाइका समेत अन्य नृत्य की प्रस्तुति होगी।
टीम एबीएन, रांची। स्कूल आफ मास कम्युनिकेशन, आरयू में 7-9अगस्त तक चले दलित साहित्य सिनेमा और मीडिया पर विमर्श दस्तावेज 09 अगस्त को मास कौम के सभागार में संपन्न हो गया। यह तीन-दिवसीय कांफ्रेंस मास कम्युनिकेशन आरयू और सुलभ इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। तीसरे दिन के प्रारंभ में राजस्थान व अन्य राज्यों से आयी सफाईकर्मियों ने अपने संघर्ष और संस्मरण सुनाये। लक्ष्मी ने बताया कि मैं जब मायके में थी तो कभी साफ सफाई वाले काम नहीं की, पर विवाह के बाद मुझे वो सब करना पड़ता था जो मेरे लिए असह्य था। मैं रोती थी, प्रेग्नेंसी के समय तो मैं किसी नरक से गुजरती थी। उसके बाद मैं पति के साथ सुलभ इंटरनेशनल के सेंटर पर गयी और सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर का काम सीखा और आज मैं गंदगी सफाई के काम से मुक्त होकर अपने पैरों पर खड़ी हूं। अनीता शर्मा ने भी अपने संघर्ष की कथा बतायी। इन्होंने कहा कि हमने भगवान को नहीं देखा, हमारे लिए भगवान तो बिंदेश्वर पाठक सर ही हैं। हम इनके लिए भारत रत्न की मांग करते हैं। इस आयोजन में ब्राह्मण बना दिया वीडियो गीत भी दिखायी गयी। निदेशक मास कम्युनिकेशन डॉ सिन्हा ने कहा कि मैंने गांधी अंबेडकर को नहीं देखा, पर मुझे फख्र है कि मैंने डॉ बिंदेश्वर पाठक को देखा। मैं सोचता हूं कि आखिर ये छुआछूत और दलितों की उपेक्षा कब तक चलेगा। इन्हें भारत रत्न देने की बात की जाती है, पर मैं तो कहता हूं कि डॉ पाठक तो भारत रत्न हैं ही। इनकी बदौलत 50 हजार लोग आजीविकारत हैं। छुआछूत मिट रही है। दलितों को रोजगार-सम्मान मिल रहा है। ये क्या भारत रत्न से कम है? हमें इस देश में हजारों डॉ बिंदेश्वर पाठक की आवश्यकता है। मौके पर रांची विश्वविद्यालय के फाइनांस अफसर डॉ केएएन शाहदेव ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने विस्तार से नागवंशी राजाओं और यहां के मुंडा समाज के बीच के दो हजार सालों के संबंधों को विस्तार से बताया। संतोष किड़ो ने भी अपने विचार रखे और मुंडाओं के पारंपरिक किस्सागोई पर प्रकाश डाला। कुंदन चौधरी ने भारतीय सिनेमा में आदिवासियों के किरदार पर अपने विचार रखे। वासवी किड़ो ने पारंपरिक जड़ी बूटियों पर आधारित चिकित्सा पद्धति होरोपैथी के बारे में बताया। साथ ही इसके संरक्षण की बात कही। हमें वेबसाइट और इंटरनेट की दुनिया से बाहर निकलना चाहिए। झारखंड और आदिवासियों की विस्तृत पारंपरिक जानकारियां इंटरनेट और वेबसाइट पर नहीं मिलेंगी। दस्तावेज कांफ्रेंस के तीसरे दिन सभी सहयोगियों, फोटोग्राफर, कार्यकर्ताओं को निदेशक मास कम्युनिकेशन, आरयू प्रो डॉ बीपी सिन्हा ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। बेल्जियम से लौ की छात्रा और इंटर्नशिप के लिए रांची आयी वेलेंसिया ग्रेसिया ने भी कोलंबिया में आदिवासियों के जमीन खेती और अस्तित्व के संघर्ष के बारे में बताया। उन्होंने प्रोजेक्टर पर स्लाईड शो के माध्यम से कोलंबो के आदिवासियों को वस्तुस्थिति और संघर्ष को दिखाया। ब्राजील की लुसिया रोड्रिग्स ने ब्राजील की आदिवासी और जनजातियों और उनके अस्तित्व संकट के बारे में बताया। राजाराम महतो ने झारखंडी गीत संगीत नृत्य के बारे में बताया। वहीं स्टेफी टेरेसा मुर्मू ने आदिवासियों में परंपराओं के मौखिक स्थानांतरण और उनकी जाति उपजाति की बात की। इस अवसर पर प्रो डॉ बीपी सिन्हा (बिनोद कुमार) की बनायी फिल्म आक्रांत दिखायी गयी। जिसे पद्मश्री डॉ बिदेश्वर पाठक ने बहुत सराहा। विमर्श के समापन से पहले मनमोहक छऊ नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। जिसे सभागार में डॉ बिंदेश्वर पाठक और दिल्ली से आयी टीम देख कर अभिभूत हो गयी। इसके साथ ही पारंपरिक मधुर नागपुरी गीतों की भी प्रस्तुति हुई। इस भव्य और सफल कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन मास कौम के उपनिदेशक डॉ विष्णु महतो ने किया। मौके पर सभागार में सैकड़ों छात्र, शिक्षक, कर्मी उपस्थित रहे।
रांगा में कुएं में गिरे बकरे को बचाने उतरे थे पिता-पुत्र एबीएन न्यूज नेटवर्क, साहिबगंज। जिले के रांगा थाना क्षेत्र अंतर्गत केंदुआ चौक में कुएं में गिरे बकरे (खस्सी) को निकालने उतरे पिता-पुत्र की दम घुटने से मौत हो गयी। हालांकि, बकरे की जान बच गयी। जानकारी के अनुसार केंदुआ चौक के इकबाल शेख (46) के आंगन में स्थित कुएं में बुधवार की दोपहर उसका बकरा गिर गया।बकरे को निकालने के लिए इकबाल ने अपने 19 वर्षीय पुत्र मुस्ताकिम शेख को नीचे उतारा। नीचे उतरने के बाद मुस्ताकिम दम घुटने की बात करते हुए अंदर में बेहोश हो गया। जिसके बाद इकबाल कमर में रस्सी बांधकर खुद नीचे उतरा और पुत्र मुस्ताकिम तथा बकरे को रस्सी से बांधकर ऊपर खड़े परिजनों को खींचने को कहा। परिजनों ने आस-पास के ग्रामीणों के सहयोग से रस्सी में बंधे मुस्ताकिम व बकरे को खींचकर बाहर निकाला एवं उसे इलाज के लिये कल्याण अस्पताल केंदुआ ले गये, जहां चिकित्सक ने युवक को मृत घोषित कर दिया। इधर, इकबाल को बाहर निकालने के लिये लोगों ने कुएं में रस्सी फेंका, लेकिन अंदर किसी प्रकार का कोई हरकत नहीं हुआ। इसके बाद कुछ युवक कमर में रस्सी बांधकर कुएं में उतरने का प्रयास करने लगे, लेकिन आधा अंदर जाते ही आक्सीजन की कमी होने का बात करते हुए वे लोग वापस बाहर आ गये। जिसके बाद परिजन शोर मचाने लगे तथा मामले की जानकारी प्रशासन को दी। मामले की जानकारी मिलते ही पतना बीडीओ सुमन कुमार सौरभ, रांगा थाना के एसआई उमेश महतो, एएसआई ननका उरांव मौके पर पहुंचे। करीब 2 घंटे बाद स्थानीय ग्रामीणों ने रस्सी के सहारे कुएं से इकबाल को बाहर निकाला। घटना के बाद परिजन शव को लेकर अपने पैतृक गांव बरहरवा थाना क्षेत्र के हस्तीपाड़ा चले गये। समाचार लिखे जाने तक परिजन पोस्टमार्टम के लिये तैयार नहीं हो रहे थे, जिसे प्रशासन द्वारा समझाया गया।
टीम एबीएन, हजारीबाग। सर्किट हाउस के सामने झारखंड राजकीय प्रयोगशाला में देर रात आग लगने से नुकसान होने की खबर है। बताया जा रहा है कि एक योजना के तहत कार्यालय परिसर में नियमित बिजली सप्लाई रखने को लेकर सोलर प्लेट लगाया गया। सोलर प्लांट लगाने के बाद इसे चालू किया गया और पहले दिन ही आग लग गयी है। दमकल की गाड़ी ने आग बुझाया है।
एक दर्जन से अधिक लोग बीमारटीम एबीएन, गिरिडीह। पीरटांड़ प्रखंड के हरलाडीह पंचायत के मंदनाडीह गांव में डायरिया का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। डायरिया से मंदनाडीह गांव के दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, एक दर्जन से अधिक लोग बीमार हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू मंदनाडीह गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मंदनाडीह पहुंची है। लगभग एक दर्जन बीमार लोगों को एंबुलेंस से हरलाडीह स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां सभी का इलाज शुरू कर दिया गया है। इस दौरान विधायक श्री सोनू ने बताया कि डायरिया पीड़ित लोगों का बेहतर इलाज शुरू कर दिया गया और स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कैंप कर रही है।
जंगली हाथियों के आतंक ने मचा रखा है कोहराम टीम एबीएन, गढ़वा। जिले में हाथियों का आतंक एक बार फिर शुरू हो गया है। कई इलाकों में जंगली हाथियों के झुंड ने घरों को, फसलों को और मानव जीवन को नुकसान पहुंचना शुरू कर दिया है। इसे लेकर वन विभाग ने एक विशेष रणनीति बनायी है, जिससे की हाथियों की गतिविधि पर नजर रखी जा सके और समय से पहले ग्रामीणों को सूचित किया जा सके। आपको बता दें कि झारखंड का गढ़वा जिला क्षेत्रफल के हिसाब से बड़ा जिला है। यहां के लोग जंगलों में भी वास करते हैं। फसलों को तबाह कर रहे हाथी गढ़वा में कभी तेंदुवा, तो कभी लकड़बग्घा तो कभी हाथियों के आतंक से ग्रामीण परेशान रहते हैं। पिछले एक सप्ताह से जंगली क्षेत्र में वास करने वाले ग्रामीण भय के माहौल में जी रहे हैं। यहां के लोगों को डर सता रहा है कि उनके घरों पर कभी भी जंगली जानवरों का हमला हो सकता है। पिछले कुछ दिनों से जिले के रंका, रमकंडा, भंडरिया में हाथियों के आतंक देखने को मिल रहा है। अब 21 हाथियों का एक बड़ा झुंड छत्तीसगढ़ के रास्ते कनहर नदी को पार कर धुरकी एरिया आ गया है। जंगली हाथियों के इस झुंड ने इंसानी बस्तियों पर हमला करना शुरू कर दिया है। हाथियों ने धुरकी के राज्यपाल नगर, परासपानी में किसानों की कई एकड़ में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। जिसके बाद ग्रामीणों ने अब मुआवजे की मांग की है। ग्रामीणों ने कहना है कि इस इलाके में पहले कभी हाथियों का झुंड नहीं आया था। अब आया है तो उन्होंने फसल को बर्बाद कर दिया है। लोग अपने घरों में दुबक गये हैं। शाम के बाद झुंड बनाकर ही किसी जरूरी काम के लिए बाहर निकल रहे हैं। येलो जोन और रेड जोन में बांटा इलाका वहीं, हाथियों के इस झुंड पर वन विभाग की पैनी नजर है। प्रोवेजनर डीएफओ के नेतृत्व में एक व्हाट्सप्प ग्रुप बनाया गया है और इस इलाके को येलो जोन और रेड जोन में बांटा गया है। जिससे की हाथियों पर नजर रखी जा सके। डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि हमारे इलाके में दो हाथियों का झुंड है जो परेशान कर रहा है, जिनका भी नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जायेगा।वहीं, पलामू जोन के सीएफ ने बताया कि हाथियों के बारे में शिकायत मिली है। कुछ इलाके में हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। भंडरिया इलाके में जो हाथी सड़क पर घूम रहा है उसे जंगल की और भगाया जा रहा है। वहीं, धुरकी तरफ से जो हाथी आया था वह पुन: छत्तीसगढ़ की और चला गया है। साथ ही हमारी टीम नुकसान का आंकलन कर रही है।
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