एबीएन सेंट्रल डेस्क। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है। ये मुठभेड़ उसूर ब्लॉक के तिम्मापुर से लगे पुतकेल जंगल में हुई है। CRPF 168 Bn बटालियन और नक्सलियों के बीच हुई इस मुठभेड़ में असिस्टेंट कमांडेंट शांति भूषण तिर्की के शहीद होने की खबर है। जबकि एक जवान जख्मी हुआ है। हमले में शहीद असिस्टेंट कमांडेंट शांति भूषण तिर्की झारखंड के रहने वाले बताये जा रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सीबीआई ने देश के सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि यह मुकदमा भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के एक संघ से कथित रूप से 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के संबंध में दर्ज किया गया। आठ नवंबर 2019 को शिकायत दर्ज : एजेंसी ने अग्रवाल के अलावा तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशकों - अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कथित रूप से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आधिकारिक दुरुपयोग जैसे अपराधों के लिए मुकदमा दर्ज किया। उन्होंने बताया कि इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा किया गया है। बैंकों के संघ ने सबसे पहले आठ नवंबर 2019 को शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर सीबीआई ने 12 मार्च 2020 को कुछ स्पष्टीकरण मांगा था। सबसे बड़ा बैंक धोखाधड़ी का मामला : बैंकों के संघ ने उस साल अगस्त में एक नई शिकायत दर्ज की और डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच करने के बाद सीबीआई ने इस पर कार्रवाई की। अधिकारी ने कहा कि कंपनी को एसबीआई के साथ ही 28 बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 2468.51 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि वर्ष 2012-17 के बीच आरोपियों ने कथित रूप से मिलीभगत की और अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसमें धन का दुरुपयोग और आपराधिक विश्वासघात शामिल है। यह सीबीआई द्वारा दर्ज सबसे बड़ा बैंक धोखाधड़ी का मामला है।
एबीएन डेस्क। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शनिवार को माओवादियों के टेरर फंडिंग मामले में बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा में कई स्थानों पर छापे मारे हैं। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईटीवी भारत को बताया कि छापेमारी स्थानीय पुलिस, बिहार एसटीएफ और सीआरपीएफ के साथ मिलकर की गई है। अधिकारी ने कहा कि चार राज्यों में करीब 26 स्थानों पर छापे मारे गए हैं. जिसमें 3 देशी पिस्तौल, एक .315 बोर राइफल और 59 राउंड गोलियां जब्त की गई हैं। ऑपरेशन के दौरान कई डिजिटल डिवाइस, नक्सल अपराध से जुड़े साहित्य, दस्तावेज और 4 किलो संदिग्ध नशीला पदार्थ भी जब्त किया गया है। एनआईए अधिकारी ने कहा कि बिहार के जहानाबाद में आठ, पटना ग्रामीण में दो, अरवल में एक जगह, नालंदा में एक जगह, गया में एक जगह, नवादा में एक जगह और औरंगाबाद में एक जगह तलाशी व छापेमारी की गई। वहीं झारखंड के कोडरमा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में भी एक साथ छापेमारी की गई है। यह मामला बिहार के मगध क्षेत्र में सीपीआई (माओवादी) कैडरों और ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) द्वारा संचालित आतंकी फंडिंग के नेटवर्क से संबंधित है। इस फंड का उपयोग हथियारों की खरीद के लिए और क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को पुनर्जीवित करने, मजबूत करने के प्रयास में जुटाया जा रहा है. विभिन्न जेलों में बंद नक्सलियों, जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और नए कैडर की भर्ती में भी इसके उपयोग की सूचना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि शिक्षा क्षेत्र में डॉ बी आर आम्बेडकर के योगदान और समर्पण को याद करने के लिए सात नवंबर को देश भर में विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ आम्बेडकर से जुड़ा हर कार्यक्रम सद्भावपूर्ण और समतावादी समाज के दृष्टिकोण को साकार करने के लिहाज से एक प्रेरणा है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में "भारतीय संविधान के जनक" के पैतृक गांव अंबाडावे में आम्बेडकर के अस्थि कलश की पूजा करने और भगवान बुद्ध को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद राष्ट्रपति लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, सात नवंबर को महाराष्ट्र के स्कूलों में विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है, यह उस दिन को याद करने के लिए है जब बाबासाहेब आम्बेडकर ने वर्ष 1900 में एक स्कूल में दाखिला लिया था। इस पहल को पूरे देश में दोहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंबाडावे गांव को "स्फूर्ति भूमि" (प्रेरणा की भूमि) के रूप में जाना जाता है, जो आम्बेडकर को एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है। राष्ट्रपति ने कहा कि स्फूर्ति भूमि के आदर्श के अनुसार बाबा साहेब द्वारा पोषित सद्भाव, करुणा और समानता के मूल्यों पर आधारित हर गांव में एक सामाजिक व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गांवों में छोटे उद्यमों को बढ़ावा देकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के सामूहिक प्रयास परिवर्तनकारी साबित होंगे और ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाएंगे। राष्ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई की दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डीआईसीसीआई) ने अंबाडावे को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई पहल की हैं। उन्होंने जून 2020 में "निसर्ग" चक्रवात से प्रभावित ग्रामीणों को राहत प्रदान करने के लिए डीआईसीसीआई की प्रशंसा की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान केरल में सामने आए जीका वायरस के बारे में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। केरल में फैले जीका वायरस की पहली रिपोर्ट ICMR-NIV, पुणे द्वारा जारी की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल केरल में मिले जीका वायरस के मामलों कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं मिली थी। पिछले एक महीने के अंदर भी कोई ट्रैवल हिस्ट्री सामने नहीं आई और परिवार के सदस्यों में भी इसके लक्षण नहीं थे। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि जीका वायरस का कम्यूनिटी स्प्रेड हुआ होगा। गर्भवती महिला में मिला था जीका वायरस : केरल में आठ जुलाई 2021 को जीका वायरस का पहला मामला सामने आया था। यहां 24 साल को गर्भवती महिला में इस वायरस की पुष्टि हुई थी। जांच के दौरान महिला में बुखार, सिरदर्द, शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण थे, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया गया था। ICMR ने जारी की चेतावनी : भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की ओर से जीका वायरस को लेकर चेतावनी जारी की गई है। आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में हुई स्टडी में सामने आया है कि जीका वायरस को रोकने के लिए कड़ी निगरानी की आवश्यकता है। दरअसल, केरल में फैले इस जीका वायरस के कम्यूनिटी स्प्रेड के संकेत मिले हैं। ऐसे में अध्ययन में सामने आया है कि देश के अन्य हिस्सों में जीका वायरस के कठिन मानवीय और कीट विज्ञानी निगरानी की आवश्यकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीका वायरस के मामले कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान सामने आए थे और इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ पड़ा था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा शनिवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ पर बरसे। उन्होंने आरोप लगाया कि धनखड़ राज्य में चयनित सरकार को सही से काम नहीं करने दे रहे हैं। झारखंड के हजारीबाग में एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पश्चिम बंगाल और केरल की तुलना नकारात्मक रूप में करने पर भी प्रतिक्रिया दी। सिन्हा ने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश कश्मीर, केरल और बंगाल बनता है तो यह उसके लिए सौभाग्य की बात होगी। ये राज्य सामाजिक और आर्थिक मानकों पर कहीं अधिक आगे हैं। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं उनमें से अधिकतर में विपक्ष मजबूत स्थिति में है। यशवंत सिन्हा ने आरोप लगाया कि जगदीप धनखड़ बंगाल सरकार के हर कदम में अवरोध उत्रन्न कर रहे हैं जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक और अस्वीकार्य है। अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे सिन्हा ने यह आरोप भी लगाया कि धनखड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के इशारों पर काम कर रहे हैं। सिन्हा ने धनखड़ पर विपक्षी नेता की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य सरकार के सामने बाधाएं खड़ी कर रहे हैं। उन्होंने केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे गैर भाजपा शासित राज्यों में राज्यपालों की भूमिका की भी आलोचना की। योगी आदित्यनाथ के बयान को लेकर सिन्हा ने कहा कि यह बयान निराशा में दिया गया है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने यह महसूस किया है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा इस समय कठिन हालात से गुजर रही है। सिन्हा ने दावा किया कि भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले चरण के मतदान में 58 में से 20 सीटों से अधिक पर जीत नहीं मिलेगी। पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में भगवा दल ने 58 सीटों पर जीत हासिल की थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद के बीच जहां राज्य भर में तनाव की स्थिति है, वहीं दक्षिण कन्नड़ जिले के कदबा तालुक के अंकथाडका के सरकारी प्राथमिक स्कूल की कक्षा के अंदर मुस्लिम समुदाय के कुछ छात्र कथित तौर पर नमाज अदा करते हुए एक वीडियो में देखे गए हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। खबरों के अनुसार यह वीडियो 4 फरवरी को शूट किया गया था और अब यह वायरल हो रहा है। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। वायरल वीडियो में कुछ युवा, कथित तौर पर स्कूल के छात्र नमाज पढ़ते हुए घुटने टेकते और अपना सिर जमीन पर झुकाते हुए देखे जा सकते हैं। स्थानीय लोगों ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत की है। कई शिकायतों के बाद अधिकारियों ने शुक्रवार को स्कूल का दौरा किया और मामले की जानकारी ली। इधर, स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि वीडियो की जानकारी मिलने के बाद सभी छात्रों को कक्षा के अंदर ऐसे धार्मिक गतिविधियों में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में खंड शिक्षक अधिकारी सी लोकेश ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि इस मामले में जांच करने को कहा गया है और संबंधित इस मामले में स्कूल का दौरा कर घटना पर एक रिपोर्ट जमा करेंगे। गौरतलब है कि कर्नाटक के उडुपी जिले के गवर्नमेंट गर्ल्स पीयू कॉलेज में कुछ मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में आने से मना करने के बाद इस विवाद ने तूल पकड़ा और यह पूरे राज्य में फैल गया। राज्य भर की मुस्लिम छात्राओं के साथ छात्र सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने लगे और इस हंगामे में राजनीतिक दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया देकर इसे देश भर में पहुंचा दिया। वहीं, कई छात्रों को हिजाब के विरोध में भगवा शॉल पहनकर सड़कों पर घूमते देखा गया। इस मामले में कोर्ट की शरण ली गई है। वहीं यह देखते हुए कि धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार उचित प्रतिबंधों के लिए अतिसंवेदनशील है, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ड्रेस कोड वाले शिक्षण संस्थान के सभी छात्रों को राज्य में अगले आदेश तक, कक्षा परिसर के भीतर किसी भी प्रकार के धार्मिक पोशाक पहनने से रोक दिया है, चाहे उनका धर्म या विश्वास कुछ भी हो। कोर्ट ने कहा है कि अंतहीन आंदोलन और शैक्षणिक संस्थानों को अनिश्चित काल के लिए बंद करना, ठीक बात नहीं है। हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में हिजाब पर प्रतिबंध के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव तो नहीं हैं लेकिन इस समय राज्य की सियासत में राजनीतिक पारा ऊपर चढ़ा हुआ है। सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कयास लगाए जा रहे हैं अभिषेक अपने पद से इस्तीफा भी दे सकते हैं। बढ़ती दरार को देख सीएम ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास पर वरिष्ठ नेताओं की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। पार्टी द्वारा यह बैठक मुख्यत: सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा वन मैन, वन पोस्ट की नीति को बढ़ावा देने के दबाव पर बढ़ते तनाव को दूर करने के लिए बुलाई गई। इससे पहले ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच चल रहा संघर्ष और तेज हो गया जब अभिषेक बनर्जी को सपोर्ट करने वालों ने वन मैन, वन पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया में एक कैंपने शुरू कर दिया। पार्टी के कई राजनीतिक लोग अभिषेक बनर्जी के इस कदम को ममता बनर्जी के खिलाफ शुरूआती विद्रोह के रूप में देखते हैं। हालांकि पार्टी की तरफ से इस बैठक को लेकर कहा गया है कि निकाय चुनाव की रणनीति को लेकर बैठक है। लेकिन टीएमसी के सूत्रों की मानें तो यह बैठक एक व्यक्ति एक पोस्ट को लेकर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के समर्थकों के बीच बढ़ते टकराव को देखते हुए की जा रही है। जानकारी के अनुसार अभिषेक बनर्जी चाहते हैं कि पार्टी एक व्यक्ति एक पद की नीति को लागू करे, जबकि वहीं सीएम ममता बनर्जी के समर्थक जो कि पार्टी के पुराने नेता हैं, वे इस नीति का विरोध कर रहे हैं। खुद ममता बनर्जी इस पूरे प्रकरण अभिषेक बनर्जी से सीधे बात नहीं कर रही हैं। इसके विरोध में अभिषेक बनर्जी के समर्थकों ने सोशल मीडिया में अभियान भी चला रहे हैं जिसे लेकर मु्ख्यमंत्री और पार्टी महासचिव के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इसी कलह को शांत करने के लिए ममता बनर्जी ने शनिवार को आपातकालीन बैठक बुलाई है।
एबीएन डेस्क। जाने-माने उद्योगपति एवं बजाज समूह के पूर्व अध्यक्ष राहुल बजाज का शनिवार को महाराष्ट्र के पुणे में निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। दस जून 1938 को कोलकाता में जन्मे राहुल बजाज ने 1965 में बजाज समूह की जिम्मेदारी संभाली थी और पिछले 50 सालों में अपने समूह को काफी ऊंचाईयों पर पहुंचाया था। भारत सरकार ने 2001 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। वह 2006 से 2010 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
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