18वें ब्रिक्स अकादमिक मंच में पांकी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ० कुशवाहा शशिभूषण मेहता जी की सुपुत्री डॉ सिमी मेहता ने वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व और संयुक्त राष्ट्र सुधार का प्रश्न प्रमुखता से उठाया लखनऊ का अकादमिक मंच 12-13 सितंबर को नयी दिल्ली में होने वाले 18वें इफकउर शिखर सम्मेलन की महत्वपूर्ण नीतिगत पूर्वपीठिका एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू/ लखनऊ। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत लखनऊ में आयोजित 18वें इफकउर अकादमिक मंच में इम्पैक्ट एंड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएमपीआरआई) की ओर से डॉ सिमी मेहता ने सहभागिता की। मंच के विभिन्न अकादमिक एवं नीतिगत सत्रों में उन्होंने वैश्विक दक्षिण की भूमिका, बहुपक्षीय व्यवस्था के पुनर्गठन तथा संयुक्त राष्ट्र में आवश्यक सुधारों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों को विमर्श के केंद्र में रखा। 23 से 25 अगस्त 2026 तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच का आयोजन आॅब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया। इसमें इफकउर के सदस्य एवं साझेदार देशों सहित विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति विशेषज्ञों और विचार संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। मंच का केंद्रीय विषय लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण रहा। यह अकादमिक मंच भारत की वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के व्यापक कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा। विशेष रूप से, इसे आगामी 18वें इफकउर शिखर सम्मेलन की बौद्धिक एवं नीतिगत पूर्वपीठिका के रूप में देखा जा सकता है। ब्रिक्स अकादमिक मंच विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विचार संस्थानों के स्तर पर ऐसे विमर्श को आगे बढ़ाता है, जिसके निष्कर्ष और सिफारिशें आगे उच्चस्तरीय अंतर-सरकारी विचार-विमर्श में योगदान कर सकती हैं। इस वर्ष लखनऊ में इफकउर थिंक टैंक परिषद की सिफारिशें भारत के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि को भी प्रस्तुत की गयी। भारत की अध्यक्षता के अंतर्गत 18वां इफकउर शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें ब्रिक्स के सदस्य एवं साझेदार देशों के नेता तथा आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। भारत की अध्यक्षता का केंद्रीय विषय भी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण है। इस दृष्टि से लखनऊ में हुआ अकादमिक विमर्श विशेष महत्व रखता है। यहां जिन विषयों और प्रश्नों पर विशेषज्ञ समुदाय ने विचार किया, वे अब नयी दिल्ली में राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों के उच्चस्तरीय विमर्श के व्यापक संदर्भ में प्रवेश कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुधार पर उठाया मूल प्रश्न विभिन्न सत्रों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करते हुए डॉ सिमी मेहता ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान संरचना और उसमें वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। उन्होंने इस व्यापक विमर्श की ओर ध्यान आकृष्ट किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात निर्मित वैश्विक संस्थागत व्यवस्था आज की दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं से किस सीमा तक मेल खाती है। एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य विकासशील क्षेत्रों की जनसंख्या, अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक प्रभाव में पिछले दशकों में व्यापक परिवर्तन आया है। इसके बावजूद वैश्विक निर्णय-निर्माण की प्रमुख संस्थाओं की संरचना अब भी बड़े पैमाने पर बीसवीं सदी के शक्ति-संतुलन को प्रतिबिंबित करती है। इसी संदर्भ में डॉ मेहता ने प्रश्न उठाया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो की व्यवस्था पर चर्चा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या केवल वीटो के अधिकार का प्रश्न ही पर्याप्त है? मूल प्रश्न इससे कहीं व्यापक है- क्या आज की वैश्विक व्यवस्था में उन देशों और समाजों की आवाज वास्तव में उतनी प्रभावशाली है, जितनी उनकी जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और वैश्विक योगदान के अनुपात में होनी चाहिए? ब्रिक्स अपनी सामूहिक आवाज को प्रभाव में कैसे बदले? डॉ मेहता के हस्तक्षेप का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र में सुधार की प्रक्रिया लंबी और जटिल है, तो ब्रिक्स जैसे मंच वैश्विक दक्षिण की सामूहिक आवाज को किस प्रकार अधिक प्रभावशाली बना सकते हैं? उन्होंने इस मूल प्रश्न को सामने रखा कि ब्रिक्स की शक्ति केवल उसके सदस्य देशों की संख्या, आर्थिक क्षमता या वैश्विक हिस्सेदारी में नहीं है। उसकी वास्तविक शक्ति इस बात में निहित होगी कि वह वैश्विक दक्षिण की साझा प्राथमिकताओं को एक स्पष्ट नीतिगत दृष्टिकोण में परिवर्तित कर सके और उस दृष्टिकोण को वैश्विक निर्णय-निर्माण के मंचों तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सके। अर्थात प्रश्न केवल यह नहीं है कि ब्रिक्स में कौन-कौन से देश शामिल हैं, बल्कि यह है कि ब्रिक्स की सामूहिक आवाज विश्व व्यवस्था को कितना प्रभावित कर सकती है। यही प्रश्न 12-13 सितंबर को नयी दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन के संदर्भ में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। शिखर सम्मेलन के व्यापक एजेंडे में वैश्विक शासन को सुदृढ़ करना और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाना भी महत्वपूर्ण विषय हैं। बीसवीं सदी की संस्थाओं से इक्कीसवीं सदी की दुनिया का संचालन नहीं हो सकता 18वें ब्रिक्स अकादमिक मंच में वैश्विक शासन के सुधार पर हुई चर्चा ने इस आवश्यकता को रेखांकित किया कि वर्तमान बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक समावेशी, प्रतिनिधित्वपूर्ण, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। मंच के आधिकारिक विमर्श में भी वैश्विक शासन में सुधार को प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया। डॉ मेहता का हस्तक्षेप इसी व्यापक प्रश्न पर केंद्रित रहा कि वर्तमान वैश्विक संस्थागत संरचनाएं क्या वास्तव में इक्कीसवीं सदी की बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके विचार-विमर्श का मूल आशय यह था कि संयुक्त राष्ट्र सुधार को केवल सुरक्षा परिषद में कुछ अतिरिक्त सीटों अथवा वीटो के पुनर्विन्यास तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यह वैश्विक प्रतिनिधित्व, समानता, वैधता और निर्णय-निर्माण में विकासशील देशों की सार्थक भागीदारी का व्यापक प्रश्न है। यदि विश्व की राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताएं बदल चुकी हैं, तो वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी उसी अनुरूप विकसित होनी चाहिए। अन्यथा इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों का समाधान बीसवीं सदी में निर्मित संस्थागत संरचनाओं के माध्यम से करने की विसंगति बनी रहेगी। ब्रिक्स : आवाज से आगे, प्रभाव की ओर अकादमिक मंच की चचार्ओं में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि इफकउर का दायरा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रह सकता। आर्थिक एवं जलवायु लचीलापन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सतत विकास, शिक्षा और कौशल के साथ-साथ वैश्विक शासन में सुधार भी इसके भविष्य के महत्वपूर्ण विषय हैं। समापन पर ब्रिक्स थिंक टैंक परिषद की सिफारिशें भारत के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि को प्रस्तुत की गयीं। इन सिफारिशों में आर्थिक एवं जलवायु लचीलेपन को सुदृढ़ करने, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को गहरा करने, सतत विकास को आगे बढ़ाने तथा अधिक समावेशी बहुपक्षीय व्यवस्था के निर्माण के लिए व्यावहारिक उपायों पर बल दिया गया। इस प्रकार लखनऊ का अकादमिक मंच केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं रहा, बल्कि भारत की इफकउर अध्यक्षता के अंतर्गत नीतिगत विचारों, विशेषज्ञ सिफारिशों और उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय विमर्श के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में सामने आया। वैश्विक दक्षिण की आवाज से वैश्विक दक्षिण की शक्ति तक 18वें ब्रिक्स अकादमिक मंच ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक दक्षिण अब केवल वैश्विक व्यवस्था का विषय नहीं है; वह वैश्विक व्यवस्था के पुनर्निर्माण का सक्रिय भागीदार है। डॉ सिमी मेहता ने आईएमपीआरआई का प्रतिनिधित्व करते हुए इस विचार को आगे बढ़ाया कि वैश्विक दक्षिण की आवाज को केवल घोषणाओं और वक्तव्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे नीतिगत प्रभाव, संस्थागत प्रतिनिधित्व और वैश्विक निर्णय-निर्माण की वास्तविक शक्ति में परिवर्तित करना होगा। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाला 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की वर्ष 2026 की अध्यक्षता के अंतर्गत आयोजित विभिन्न अकादमिक, कूटनीतिक और नीतिगत प्रयासों का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस परिप्रेक्ष्य में लखनऊ का 18वां इफकउर अकादमिक मंच उस व्यापक प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण बौद्धिक कड़ी के रूप में देखा जा सकता है, जिसने विशेषज्ञ समुदाय के विचारों और सिफारिशों को उच्चस्तरीय शिखर वार्ताओं से जोड़ने का कार्य किया। ब्रिक्स के आधिकारिक विवरण के अनुसार, लखनऊ का मंच शिखर सम्मेलन से पूर्व द्वितीय-पट्टी कूटनीति के महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्यरत रहा और इसमें 11 सदस्य एवं साझेदार देशों के 80 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए। डॉ. सिमी मेहता की सहभागिता ने इसी मूल प्रश्न को विमर्श के केंद्र में रखा- दुनिया इक्कीसवीं सदी में पहुंच चुकी है। अब वैश्विक शासन की संस्थाएँ इक्कीसवीं सदी की वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व कब करेंगी?
नई दिल्ली में सांसद इमरान मसूद ने लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनने पर दी बधाई एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा/ नयी दिल्ली। आज नई दिल्ली स्थित आवास पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सहारनपुर के लोकप्रिय सांसद इमरान मसूद ने लोहरदगा लोकसभा के सांसद एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी सुखदेव भगत से आत्मीय मुलाकात की। मौके पर सांसद इमरान मसूद ने सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ राज्य का प्रभारी बनाये जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने एक अनुभवी, जमीन से जुड़े और संगठन को समझने वाले नेता पर भरोसा जताया है। इमरान मसूद ने कहा कि सुखदेव भगत एक बेहद सुलझे हुए और संघर्षशील नेता हैं। झारखंड की राजनीति में इनका लंबा अनुभव रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी इनके कंधों पर देना कांग्रेस पार्टी का एक बेहतरीन निर्णय है। मुझे पूरा विश्वास है कि इनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में संगठन और मजबूत होगा और 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस फिर से बड़ी जीत दर्ज करेगी। सांसद सुखदेव भगत ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे बड़े भाई और साथी सांसद इमरान मसूद आज बधाई देने घर आये, इसके लिए मैं दिल से उनका आभार व्यक्त करता हूं। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी मेरे लिए चुनौती के साथ-साथ गर्व की बात भी है। छत्तीसगढ़ की जनता को कांग्रेस पर भरोसा है। मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करूं और कार्यकर्ताओं की आवाज को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाऊं। हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को और मजबूत करेंगे।
संत रामपाल जी महाराज से 6 जरूरतमंद परिवारों को मिला महीने भर का राशन, मदद जारी रहने का भरोसाकमल सिंह लोधाएबीएन सेंट्रल डेस्क, देवास। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा सेवा मुहिम ने देवास जिले के 6 अत्यंत गरीब, बेसहारा और असहाय परिवारों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है। इन परिवारों तक महीने भर का राशन और जरूरी सामान पहुंचाया गया है। सेवा का उद्देश्य केवल तत्काल मदद देना नहीं, बल्कि तब तक साथ निभाना है जब तक परिवार आत्मनिर्भर न हो जाएं।हताशा से उम्मीद तक का सफर▶ परिजनों ने बताया कि आर्थिक तंगी, बीमारी और घर चलाने की मुश्किलों ने जीवन कठिन बना दिया था। सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने के बाद भी जब कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने हताश होकर YouTube पर संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के वीडियो देखे और दिए नंबरों पर प्रार्थना लगाई।▶ प्रार्थना मिलते ही देवास जिले की संर्वे टीम ने सक्रियता दिखाई और महज 48 घंटे के भीतर गांव-गांव जाकर भौतिक सत्यापन किया। रिपोर्ट तैयार होते ही सभी 6 परिवारों को अन्नपूर्णा किट भेज दी गई।इन परिवारों को मिली सहायतातहसील कन्नौद गांव थुरिया मांगीलाल चौहान, ग्राम बावड़ी खेड़ा सुमन बाई तहसील सतवास ग्राम भयली अनीता बाई कनेल ,ग्राम लोहारदा संतोष चौहान ग्राम लोहार टप्पर बसु बाई तहसील खातेगांव कैलाश चौहान गांव अजनास सहित कुल 6 परिवारों को किट प्रदान की गई है।किट में क्या-क्या मिला ?आटा, चावल, चना दाल, उड़द दाल, सरसों तेल, चीनी, चाय पत्ती, दूथ पाउडर, गरम मसाला, नहाने का साबुन, कपड़ा धोने का साबुन और डिटर्जेंट पाउडर सहित एक परिवार के एक महीने की पूरी जरूरत का सामान।मानवता ही सबसे बड़ा धर्मसंत रामपाल जी महाराज का संदेश है -"जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा।" इसी सोच से अन्नपूर्णा सेवा लाखों जरूरतमंदों के जीवन में उजाला बन रही है। सिर्फ राशन नहीं, बल्कि मकान, बीमारों का इलाज और अनाथ बच्चों की शिक्षा व कपड़ों की व्यवस्था भी सेवा का उद्देश्य हर जरूरतमंद के साथ खड़ा होना।
पिपरई मंदिर घटना को लेकर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों में रोषएसपी और कलेक्टर से निष्पक्ष कार्रवाई की मांगकमल सिंह लोधाएबीएन सेंट्रल डेस्क, अशोकनगर। पिपरई तहसील स्थित बालाजी मंदिर में 5 सितंबर 2026 को हुई घटना को लेकर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।अनुयायियों ने कलेक्टर और एसपी को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि घटना के आरोपी नीलेश लोधी को सोशल मीडिया पर संत रामपाल जी महाराज का अनुयायी बताया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार यह दावा गलत है। ज्ञापन में कहा गया कि आरोपी लंबे समय से बालाजी मंदिर से जुड़ा हुआ था और मंदिर में रामायण पाठ भी करता था।अनुयायियों का कहना है कि आरोपी के परिवार के कुछ सदस्य संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी हैं, लेकिन इसी आधार पर आरोपी को भी उनका अनुयायी बताकर सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जा रहा है। इससे जिले के अनुयायियों में नाराजगी है।ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ अज्ञात लोगों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज और उनके अनुयायियों को घटना से जोड़कर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, कुछ लोगों द्वारा अनुयायियों के घर जाकर कथित रूप से धमकी दिए जाने की बात भी कही गई है।अनुयायियों ने जिला प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने तथा धमकी देने वालों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए अनुयायियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नैनीताल)। उच्च न्यायालय ने हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तिथि नियत की है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार की मातृ सदन ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे गंगा नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गयी कि गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगायी जाये ताकि गंगा नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके। अब खनन कुंभ क्षेत्र में भी किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि केंद्र सरकार ने गंगा नदी को बचाने के लिए एनएमसीजी बोर्ड गठित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा को साफ करना व उसके अस्तित्व को बचाये रखना है। एनएमसीजी द्वारा राज्य सरकार को बार-बार आदेश दिए गए कि यहां खनन कार्य नहीं किया जाये, उसके बाद भी राज्य सरकार की ओर से यहां पर खनन कार्य करवाया जा रहा है। पूर्व में भारत सरकार को निर्देश दिये थे कि गंगा को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाये जा रहे हैं, उसके बाद भी सरकार द्वारा गंगा के अस्तित्व को समाप्त किया जा रहा है। इसलिए गंगा में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगायी जाये।
कमल सिंह लोधा एबीएन सेंट्रल डेस्क (गुना)। कलेक्टर एवं महिला बाल विकास अधिकारी एवं परियोजना अधिकारी के निर्देशन मेंआज नया राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ किया गया। आंगनबाड़ी सानई में ग्राम वासियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ में पोषण माह का शुभारंभ किया गया। भारत सरकार एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण अंतर्गत पोषण विषय को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाता है। इस क्रम में इस वर्ष 9 सितंबर 2026 से नये राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया गया है। इस वर्ष की थीम है हमारी आंगनबाड़ी हमारी जिम्मेदारी निर्धारित की गयी। नवी राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण देखभाल प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास में संबंधित सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है तथा पोषण सेवाओं के प्रति सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदारी को बढ़ावा देना है।
बैतूल में उमड़ा आस्था का सैलाब: संत रामपाल जी महाराज के 76वें अवतरण दिवस पर अखंड पाठ का भव्य समापन एबीएन सेंट्रल डेस्क (जिला बैतूल)। उड़दन स्थित सतलोक आश्रम में बीते तीन दिन आस्था, सेवा और मानवता का अद्भुत संगम देखने को मिला। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के 76वें अवतरण दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय महासमागम का आज भव्य समापन हुआ। 6 से 8 सितंबर 2026 तक चले इस महासमागम में आध्यात्म का ऐसा रंग देखने को मिला कि बैतूल की धरती सतज्ञान के जयकारों से गूंज उठी। 6 सितंबर को संत गरीबदास जी महाराज की अमृतवाणी के अखंड पाठ से शुरू हुआ यह समागम, देखते ही देखते जनसैलाब में बदल गया। सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा, जैसे आस्था की अविरल धारा बह रही हो।हजारों श्रद्धालु सहपरिवार पहुंचे और पूरे तीन दिन आश्रम परिसर में भीड़ का तांता लगा रहा। संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में सेवादारों द्वारा की गयी पुख्ता व्यवस्था के चलते सभी को सुचारू रूप से सत्संग श्रवण, भंडारा और प्रदर्शनी का लाभ मिला। देशभर के आश्रमों की तर्ज पर बैतूल में भी हुए जनकल्याणकारी कार्य यह महासमागम सिर्फ सत्संग तक सीमित नहीं रहा। बीच के दिनों में यहां समाज सुधार की जीवंत तस्वीर देखने को मिली। रक्तदान शिविर में युवाओं ने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया, दहेजमुक्त आदर्श विवाहों ने समाज को नयी दिशा दी, तो विशाल भंडारे में हर धर्म, हर वर्ग ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण कर समानता का संदेश दिया। आध्यात्मिक प्रदर्शनी और देहदान जागरूकता ने लोगों को आत्मचिंतन पर मजबूर किया। गौरवपूर्ण क्षण: रक्तश्री सम्मान से सम्मानित हुआ आश्रम इसी कड़ी में आश्रम के लिए एक बेहद गौरवपूर्ण क्षण भी आया। मानवता की सेवा में किये जा रहे कार्यों के लिए बैतूल के माननीय कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. सौरभ एस. सोनवाने जी ने सतलोक आश्रम उड़दन, बैतूल को रक्तश्री सम्मान से सम्मानित किया। साथ ही कलेक्टर ने संत रामपाल जी महाराज जी के सान्निध्य में चल रही अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत जरूरतमंद एवं असहाय परिवारों के लिए किये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यों की दिल खोलकर सराहना भी की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने और उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के निरंतर प्रयासों का प्रोत्साहन है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। सूचना एवं प्रसारण और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि देश की पहली बुलेट ट्रेन का उद्घाटन 2027 में होगा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी रूप से निर्मित बुलेट ट्रेन का मई-जून 2027 में ट्रैक पर परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है और परीक्षण के बाद इसका उद्घाटन किया जायेगा। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन का उद्घाटन 2027 में तय है। पहले सूरत से बिलिमोरा के करीब 50 किलोमीटर के खंड को शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर सूरत से वापी तक करीब 100 किलोमीटर के पहले खंड को 2027 में खोलने की योजना है। इस खंड का निर्माण दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। मंत्री ने कहा कि भारत में निर्मित की जा रही बुलेट ट्रेन के एक कोच का निर्माण पिछले सप्ताह पूरा हो गया है। इसके बाद उस पर दबाव और जलवायु संबंधी परीक्षण किए जाएंगे तथा आंतरिक साज-सज्जा सहित अन्य काम पूरे किये जायेंगे। ट्रेन के परीक्षण के लिए अगले वर्ष मई-जून तक इसे ट्रैक पर लाने की योजना है। परीक्षण पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करेंगे। उल्लेखनीय है कि वैष्णव ने एक दिन पहले वडोदरा में भी कहा था कि देश की स्वदेशी बुलेट ट्रेन मई-जून 2027 में परीक्षण के लिए ट्रैक पर आ जायेगी और परीक्षण के बाद दो से चार महीने में इसका उद्घाटन किया जा सकता है। उन्होंने बताया था कि ट्रेन के पहले बॉडी फ्रेम का निर्माण पूरा हो चुका है और उसे परीक्षण के लिए भेजा गया है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस परियोजना पर काम गुजरात, महाराष्ट्र और केंद्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली में चल रहा है। प्रस्तावित बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केरल के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मुन्नार में कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक और अध्ययन दौरा चल रहा है। 7 से 9 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस तीन दिवसीय दौरे का आज दूसरा दिन समिति की बैठक की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वर्तमान सांसद अनुराग सिंह ठाकुर कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में लोहरदगा के सांसद एवं छत्तीसगढ़ के प्रभारी सुखदेव भगत ने समिति सदस्य के रूप में भाग लिया।बैठक में देश के अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें प्रमुख हैं - देश की ऊर्जा सुरक्षा- औद्योगिक विकास को मजबूत करना महत्वपूर्ण खनिजों की खोज पर्यावरण संरक्षण अवैध खनन पर रोक कोल गैसीफिकेशन स्कीम बैठक में सांसद सुखदेव भगत जी ने कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और खनिज संसाधनों के सही उपयोग के लिए नयी तकनीक और अवैध खनन पर सख्त अंकुश बेहद जरूरी है। इस समीक्षा बैठक में समिति सदस्यों के साथ-साथ कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और उसकी सहायक कंपनियों- एसईसीएल, ईसीएल, एलसीएल, डब्ल्यूसीएल के शीर्ष अधिकारी तथा कोयला, इस्पात एवं खान मंत्रालयों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी हिस्सा लिया।
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