एबीएन सेंट्रल डेस्क। नोएडा सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर आज दोपहर 2:30 बजे धराशायी हो जाएंगे। 32 मंजिला एपेक्स (100 मीटर) और 29 मंजिला सियान (97 मीटर) टावर में 3500 किलोग्राम विस्फोटक लगाकर गिराया जाएगा। 9 से 12 सेकेंड के अंदर ट्विन टावर जमींदोज हो जाएंगे। एहतियातन आसपास की सड़कों को दिनभर बंद रखा जाएगा। पूरे इलाके को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। नोएडा में सेक्टर 93ए के सुपरटेक ट्विन टावर्स को आज दोपहर 2:30 बजे ध्वस्त कर दिया जाएगा। राजेश एस, डीसीपी, सेंट्रल नोएडा ने बताया कि लगभग 560 पुलिस कर्मी, रिजर्व फोर्स के 100 लोग, 4 क्विक रिस्पांस टीम और एनडीआरएफ की टीम तैनात है। ट्रैफिक डायवर्जन प्वाइंट सक्रिय हैं। विस्फोट से ठीक पहले दोपहर करीब 2.15 बजे एक्सप्रेस-वे को बंद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ब्लास्ट के आधे घंटे बाद और धूल जमने के बाद इसे खोल दिया जाएगा। इंस्टेंट कमांड सेंटर में 7 सीसीटीवी कैमरे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अहमदाबाद के साबरमती तट पर खादी उत्सव को संबोधित कर अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे की शुरुआत की। खादी उत्सव भारत के स्वतंत्रता संग्राम में खादी के महत्व को दर्शाने के लिए केंद्र के आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित किया जा रहा एक अनूठा आयोजन है। कार्यक्रम में पहुंचे पीएम मोदी खुद भी थोड़े समय के लिए चरखे पर सूत कातते नजर आए। शनिवार शाम साबरमती तट पर आयोजित किये जा रहे इस उत्सव में गुजरात के विभिन्न जिलों की 7,500 महिला खादी कारीगरों ने एक ही समय पर चरखा चलाया. खादी उत्सव में चरखा चलाने को भावुक पल करार देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज मुझे बचपन की याद आ गई, मेरे घर में यह सारी चीजें रहती थीं। उन्होंने कहा, आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 7,500 बहनों- बेटियों ने एक साथ चरखे पर सूत कातकर नया इतिहास रच दिया है। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी कुछ पल चरखे पर सूत कातने का मिला। पीएम मोदी ने आगे कहा, इतिहास साक्षी है कि खादी का एक धागा आजादी के आंदोलन की ताकत बन गया, उसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया। खादी का वही धागा विकसित भारत के प्रण को पूरा करने का आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने का प्रेरणा-स्रोत बन सकता है। खादी उत्सव को लेकर महिला कारीगरों में काफी उत्साह दिखाई दिया। एक महिला कारीगर ने कहा, पीएम मोदी ने हमें यह काम दिया है। हम बहुत खुश हैं। हमें रोजी मिल रही है। उन्होंने हमें कमाने का जरिया दिया। उन्होंने कहा, हम मोदी जी से कहेंगे कि ऐसा उत्सव होते रहना चाहिए, ताकि लोगों को पता चले खादी क्या है, लोग इसे भूल न जाएं। डॉक्टर भी त्वचा की हिफाजत के लिए खादी पहनने की सलाह देते हैं। एक अन्य लाभार्थी ने कहा, खादी ऐसा कपड़ा है जिसे एक बार पहनने के बाद छोड़ने की इच्छा नहीं होती है। खादी पहले फैशन से बाहर हो गई थी, इस कार्यक्रम से इसे बढ़ावा मिलेगा। खादी उत्सव का कार्यक्रम महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर लाभान्वित करने के साथ-साथ लोगों के बीच खादी के उपयोग को प्रोत्साहित करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात के अहमदाबाद में ‘खादी उत्सव’ कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती नदी पर पैदल यात्रियों के लिए अटल पुल का उद्घाटन किया। अटल ब्रिज के उद्घाटन के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि अटल ब्रिज साबरमती नदी के दो किनारों को ही आपस में नहीं जोड़ रहा बल्कि ये डिजाइन और इनोवेशन में भी अभूतपूर्व है। इसकी डिजाइन में गुजरात के मशहूर पतंग महोत्सव का भी ध्यान रखा गया है। पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि खादी का एक-एक धागा, आजादी के आंदोलन की ताकत बन गया। उसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया। खादी का वही धागा, विकसित भारत के प्रण को पूरा करने का, आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने का प्रेरणा-स्रोत बन सकता है। इस उत्सव में पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने चरखा चला कर सूत भी काता। अहमदाबाद में पीएम मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान खादी को गांधी जी ने देश के स्वाभिमान का प्रतीक बनाया था। लेकिन आजादी के बाद उसी खादी को हीन भावना से देखा गया। ऐसी सोच के कारण खादी से जुड़े खादी और ग्रामीण उद्योग बर्बाद हो गए। आजादी के 75 साल पूरे होने पर 7,500 बहनों-बेटियों ने चरखे पर सूत कातकर इतिहास रच दिया। चरखा चरखा मुझे मेरे बचपन के दिनों में ले गया। दो दिवसीय दौरे पर गुजरात पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में खादी उत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उनके साथ सीएम भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लुधियाना में ‘स्क्रैप’ आधारित इस्पात संयंत्र की स्थापना करने के लिए टाटा समूह को भूमि आवंटन पत्र शुक्रवार को सौंपा। मान ने कहा, औद्योगिक क्षेत्र के मामले में हम पंजाब को अग्रणी बनाना चाहते हैं और टाटा समूह द्वारा राज्य में यह पहला निवेश इसी दिशा में बढ़ाया गया कदम है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक टाटा स्टील के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मान से उनके कार्यालय में मुलाकात की। मान ने कहा कि यह राज्य के इतिहास में अहम दिन है क्योंकि इस दिन इस वैश्विक कंपनी ने राज्य में पहला निवेश किया है। नरेंद्रन ने कहा कि बाजार और स्क्रैप देने वाले वाहन केंद्र से नजदीकी के कारण कंपनी की इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस के लिए पंजाब एक आदर्श जगह है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश सही समय पर न होने से चालू खरीफ सत्र में धान की बुवाई का रकबा 5.99 प्रतिशत घटकर 367.55 लाख हेक्टेयर रह गया है। कृषि मंत्रालय के शुक्रवार को जारी आंकड़ों में धान की बुवाई के रकबे में बड़ी गिरावट का जिक्र किया गया है। एक साल पहले की समान अवधि में 390.99 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई की गई थी। धान खरीफ सत्र की मुख्य फसल है। इसकी बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून आने के साथ ही शुरू हो जाती है और अक्टूबर से इस फसल की कटाई शुरू हो जाती है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस खरीफ सत्र में 26 अगस्त तक झारखंड में धान के रकबे में 10.51 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में 4.62 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 3.45 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 2.63 लाख हेक्टेयर, बिहार में 2.40 लाख हेक्टेयर और ओडिशा में 2.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की कम बुआई हुई है। इनके अलावा असम (0.49 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (0.46 लाख हेक्टेयर), हरियाणा (0.44 लाख हेक्टेयर), त्रिपुरा (0.22 लाख हेक्टेयर), नागालैंड (0.21 लाख हेक्टेयर), मेघालय (0.18 लाख हेक्टेयर) में भी धान का रकबा घटा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, देश में 24 अगस्त तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से नौ प्रतिशत अधिक हुई है। लेकिन देश के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में इसी दौरान बारिश 19 प्रतिशत कम हुई है। इसकी वजह से धान के रकबे पर असर पड़ा है। धान के अलावा खरीफ सत्र में 26 अगस्त तक कुल दलहन क्षेत्र भी 4.95 प्रतिशत गिरकर 127.71 लाख हेक्टेयर हो गया है। एक साल पहले की समान अवधि में दलहन फसलों का रकबा 134.37 लाख हेक्टेयर था। अरहर का रकबा 44.07 लाख हेक्टेयर है जो एक साल पहले की समान अवधि में 44.07 लाख हेक्टेयर था। इसी अवधि में उड़द का रकबा 36.15 लाख हेक्टेयर है जो एक साल पहले 37.91 लाख हेक्टेयर था। तिलहन फसलों की बुवाई के मामले में भी स्थिति पिछड़ती हुई नजर आ रही है। मौजूदा खरीफ सत्र में 26 अगस्त तक तिलहनों का रकबा 186.48 लाख हेक्टेयर था, जो एक साल पहले की अवधि में 188.62 लाख हेक्टेयर था। हालांकि मोटे अनाज के मामले में बुवाई एक साल पहले के 169.39 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक 176.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। नकदी फसलों के मामले में कपास का रकबा 124.55 लाख हेक्टेयर रहा और गन्ने का रकबा भी हल्की बढ़त के साथ 55.59 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि 26 अगस्त तक जूट का रकबा 6.94 लाख हेक्टेयर के साथ स्थिर रहा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय नौकरी बाजार पर मुद्रास्फीति का कोई असर नहीं पड़ा है और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में नियुक्ति गतिविधियों में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वैश्विक नौकरी ऑनलाइन मंच "इनडीड" की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रास्फीति की आशंका के बावजूद ज्यादातर नौकरी चाहने वालों की आजीविका खर्चों पर महंगाई का अधिक प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 में से छह नौकरी चाहने वालों का कहना है कि वे मंहगाई से ज्यादा प्रभावित नहीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि साक्षात्कार में 89 प्रतिशत नियोक्ताओं ने कहा कि मुद्रास्फीति का प्रभाव कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को काम पर रखने और भुगतान करने के तरीके को नहीं बदलेगा। इनडीड का पहली तिमाही के लिए नियुक्ति सूचकांक अप्रैल-जून, 2022 के दौरान 1,229 नियोक्ताओं और 1,508 कर्मचारियों के सर्वेक्षण के आधारित है। अप्रैल-जून में नियोक्ताओं की नियुक्ति गतिविधियों में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे पिछली तिमाही में नियुक्ति गतिविधियां 20 प्रतिशत बढ़ी थीं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के कटरा से 62 किमी दूर आज तड़के करीब 3ः28 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप की गहराई जमीन से 5 किमी नीचे थी। पिछले तीन दिनों में जम्मू कश्मीर में यह 7वीं बार है, जब भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। वहीं, महाराष्ट्र के कोल्हापुर से 171 किमी दूर आज तड़के करीब 2ः21 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, रिक्टर स्केल पर जिसकी तीव्रता 3.9 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मूताबिक भूकंप की गहराई जमीन से 10 किमी नीचे थी। गुरुवार को एनसीएस ने बताया था कि कोल्हापुर में सुबह 12ः05 बजे 3.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई जमीन से 5 किलोमीटर नीचे थी। इसके अलावा अफगानिस्तान के काबुल से 164 किमी दूर आज तड़के करीब 2ः55 बजे 4.3 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसकी गहराई जमीन से 80 किमी नीचे थी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, गुरुवार रात 11:04 बजे भी जम्मू-कश्मीर के कटरा में 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र 33.20 डिग्री उत्तर अक्षांश और 75.56 डिग्री पूर्व देशांतर में जमीन से 5 किमी की गहराई में था। जम्मू-कश्मीर में बीते 3 दिनों में महसूस किए गए भूकंप के 7 झटके : पहला भूकंप का झटका मंगलवार सुबह 2ः20 बजे कटरा, जम्मू-कश्मीर के पूर्व में महसूस किया गया, जिसकी गहराई जमीन से 10 किमी नीचे थी, इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.9 थी। 2.6 तीव्रता का दूसरा भूकंप जम्मू क्षेत्र के डोडा से 9.5 किमी उत्तर पूर्व में 3.21 बजे आया। 2.8 तीव्रता का तीसरा भूकंप जम्मू क्षेत्र के उधमपुर से 29 किलोमीटर पूर्व में मंगलवार तड़के 3.44 बजे आया। 2.9 तीव्रता का चौथा भूकंप उधमपुर से 26 किमी दक्षिण पूर्व में बुधवार सुबह 8.03 बजे आया। बुधवार रात और गुरुवार सुबह भी जम्मू-कश्मीर में भूकंप के 2 झटके महसूस किए गये। इसके बाद 7वां झटका शुक्रवार तड़के महसूस किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 80 में स्थित एक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई है। जानकारी के अनुसार यह आग बीती रात लगी ह एक टिन शेड के ऊपर लगी है। गौतम बुद्ध नगर के चीफ फायर अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि फैक्ट्री में टिन के ऊपर यह आग लगी है। आग को बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की एक दर्जन से अधिक गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं। टिन शेड के ऊपर से पानी फेंककर इसे बुझाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आग किस वजह से लगी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत को दो सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में लोकार्पण के बाद विधिवत रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जायेगा जिससे हिन्द महासागर में नौसेना की ताकत कई गुणा बढ जायेगी। नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल एस एन घोरमड़े ने गुरूवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि श्री मोदी दो सितम्बर को कोच्चि में इस विमानवाहक पोत को देश को समर्पित करेंगे जिससे यह विधिवत रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल हो जायेगा। इसके साथ ही नौसेना के पास दो विमानवाहक पोत हो जायेंगे। नौसेना के पास आई एन एस विक्रमादित्य विमानवाहक पोत पहले से ही है। नौसेना उप प्रमुख ने कहा कि विक्रांत को बनाने के बाद भारत 40 हजार टन से अधिक वजन वाले विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो जायेगा। उन्होंने कहा कि इस पोत को बनाने में इस्तेमाल किये गये उपकरण देश के 18 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में बने हैं जिससे इसके निर्माण में पूरे देश का योगदान झलकता है तथा यह देश की एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है और करीब 500 कंपनियों ने इसमें योगदान दिया है। इस पोत को बनाने में इस्तेमाल किया गया इस्पात देश में ही बना है और इसमें करीब 2500 किलोमीटर लंबी केबलिंग की गयी है जो देश में ही बनायी गयी है। उन्होंने कहा कि इस विमानवाहक पोत के नौसेना को मिलने से वह हिन्द महासागर में शांति और स्थिरता बनाये रखने की अपनी भूमिका को बखूबी निभा सकेगी। उन्होंने कहा कि साथ ही इससे नौसेना की ताकत भी कई गुणा बढ जायेगी। उन्होंने कहा कि दो सितम्बर को नौसेना के बेड़े में शामिल किये जाने के बाद इस पोत के पूरी क्षमता के साथ संचालन की प्रक्रिया शुरू की जायेगी और इसका अगले वर्ष के मध्य तक पूरी तरह संचालन शुरू हो जायेगा। उन्होंने कहा कि इस विमानवाहक पोत पर तैनात किये जाने वाले लड़ाकू विमानों का परीक्षण नवम्बर में शुरू किया जायेगा। विक्रांत को बनाने की शुरूआती प्रक्रिया फरवरी 2009 में शुरू की गयी थी। अगस्त 2013 में इसका जलावतरण किया गया जबकि बेसिन परीक्षण नवम्बर 2020 में शुरू हुए। गत जुलाई में समुद्री परीक्षण पूरे होने के बाद इसे नौसेना को सौंपा गया और अब दो सितम्बर को यह विधिवत रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल हो जायेगा। विक्रांत पर 1600 नौसैनिकों को तैनात करने की क्षमता है और इसमें 2300 कंपार्टमेंट हैं। इसकी लंबाई तथा चौड़ाई क्रमश 262 तथा 61 मीटर से अधिक है तथा यह 28 समुद्री मील प्रति घंटा की गति से चलने में सक्षम है। यह एक बार में 7500 समुद्री मील की दूरी तय कर सकता है।
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