एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत 2027 तक जापान और जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। वैश्विक रुझानों और देश द्वारा टेक्नोलॉजी और ऊर्जा के क्षेत्रों में किये गये प्रमुख निवेशों के आधार पर 2030 तक तीसरा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन सकता है। यह रिपोर्ट वैश्विक निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली की है। मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत पहले से ही दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, जिसने पिछले एक दशक में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की औसत वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत दर्ज की है। अब 1 अरब से अधिक लोगों के देश में स्थापित किये गये 3 मेगाट्रेंड- ग्लोबल ऑफशोरिंग, डिजिटलाइजेशन और एनर्जी ट्रांसमिशन- भारत को अभूतपूर्व आर्थिक विकास की तरफ ले जाने को तैयार हैं। मॉर्गन स्टेनली के मुख्य इक्विटी रणनीतिकार (भारत) रिधम देसाई ने कहा, हमारा मानना है कि भारत 2027 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है और इस दशक के अंत तक तीसरा सबसे बड़ा शेयर बाजार होगा। नतीजतन, भारत वैश्विक व्यवस्था में शक्ति प्राप्त कर रहा है और हमारी राय में ये खास परिवर्तन पीढ़ियों में एक बार होने वाले बदलाव निवेशकों और कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर है। रिपोर्ट कहती है कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद आज 3.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2031 तक 7.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है। वैश्विक निर्यात में इसका हिस्सा भी इसी अवधि में दोगुना हो सकता है, जबकि बीएसई 11 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि प्रदान कर सकता है, जो 10 ट्रिलियन डॉलर के बाजार पूंजीकरण तक पहुंच सकता है। मॉर्गन स्टेनली के मुख्य अर्थशास्त्री (एशिया) चेतन अह्या ने कहा, वर्तमान में विकास की कमी वाली दुनिया में भारत वैश्विक निवेशकों के रडार पर होना चाहिए। भारत दुनिया की केवल तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा। यह 2023 से $400 बिलियन से अधिक वार्षिक आर्थिक उत्पादन ग्रोथ कर सकता है, और यह 2028 के बाद बढ़कर $500 बिलियन से अधिक हो जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत को 15 दिसंबर तक फ्रांस से अपना 36वां और अंतिम राफेल लड़ाकू विमान मिल जाएगा। 2016 में 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के सौदे को लेकर यह आखिरी विमान की डिलीवरी होगी। वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने बताया कि आखिरी विमान 15 दिसंबर के आसपास भारत पहुंचेगा। विमान का इस्तेमाल भारतीय वायु सेना के राफेल बेड़े में भारत-विशिष्ट संवर्द्धन के विकास के लिए किया गया था। भारत ने 36 विमानों के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और उनमें से 35 पहले ही आ चुके हैं और पश्चिम बंगाल के अंबाला, हरियाणा और हाशिमारा में तैनात हैं। इस बीच भारतीय वायु सेना ने भी विमानों को उच्चतम मानकों पर अपग्रेड करना शुरू कर दिया है और सभी भारत-विशिष्ट संवर्द्धन से लैस हैं। राफेल 4.5 पीढ़ी का विमान है और इसने भारत को उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं के साथ लंबी दूरी की हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों के साथ भारतीय उप-घटक आसमान पर अपना वर्चस्व हासिल करने में मदद की है। फ्रांसीसी फर्म डसॉल्ट एविएशन भी विमान के रखरखाव में शामिल है। राफेल को चीन के साथ संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था और देश में आने के एक सप्ताह के भीतर लद्दाख पर काम करना शुरू कर दिया था। आइएएफ ने लंबी दूरी की उल्का हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ-साथ स्कैल्प से हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों को भी इसमें लगाया है। आइएएफ ने हम्मर मिसाइल को भी राफेल में जोड़ा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भगवान राम ने समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि लोगों को भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और उनके द्वारा प्रतिपादित मूल्यों पर आधारित समाज की स्थापना पर ध्यान देना चाहिए। भागवत ने बक्सर जिले के अहिरौली गांव में साधुओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, भगवान राम ने एक ऐसे समाज का मार्ग प्रशस्त किया जहां हर कोई निडर होकर रहने लगा। उन्होंने जीवन भर सामाजिक सद्भाव के मार्ग का अनुसरण किया। यह आयोजन श्री राम कर्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महाकुंभ नामक नौ दिवसीय धार्मिक सम्मेलन के तहत आयोजित किया गया है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि भगवान राम ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश को एकजुट किया। यह सच है कि उन्होंने समाज के हर वर्ग को जोड़ने का काम किया। हमें भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेकर सामाजिक एकता को बढ़ावा देना चाहिए। सोमवार से शुरू हुए नौ दिवसीय कार्यक्रम में भाजपा शासित राज्यों के कई राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और दो उपमुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नेपाल और मणिपुर में 6.3 तीव्रता वाले भूकंप के झटके देर रात 1 बजकर 57 मिनट पर महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र नेपाल में था। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप की गहराई जमीन से 10 किमी नीचे थी। देर रात आये इस भूकंप के बाद लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकलकर खड़े हो गए। दिल्ली के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल और उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर इस भूकंप के झटके महसूस किये गये। वहीं नेपाल के डोटी जिले में भूकंप के बाद एक घर गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई। कई इलाकों में तो एक के बाद एक तीन झटके महसूस किए गए। इसके बाद फिर 3:15 बजे फिर 3.6 की तीव्रता पर भूकंप महसूस किया गया। लखनऊ और दिल्ली में करीब 5.7 तीव्रता वाले भूकंप के झटके लगे। जानकारी के मुताबिक 6.3 तीव्रता वाले इस भूकंप का सबसे ज्यादा असर नेपाल में पड़ने की आशंका जताई जा रही है। नेपाल सेना को भूकंप प्रभावित इलाकों में तलाशी और बचाव अभियान के लिए भेजा गया है। नेपाल, भारत के अलावा चीन में भी भूकंप के झटके लोगों ने महसूस किए। इससे पहले भी लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.9 मापी गई थी। इसका केंद्र उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा पर जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। जानकारी के मुताबिक यह भूकंप 8 नवंबर को करीब रात 8:52 बजे आया था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में लगातार आर्थिक आंकड़ों को लेकर राजनीति हो रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत सारे लेख लिखे जा रहे हैं। देश और प्रदेशों के सार्वजनिक कर्ज में थोड़ा वृद्धि हुई है। यह वृद्धि बिल्कुल भी चिंंताजनक नहीं है। वर्ष 1951 में 24.62 लाख करोड़ रुपए का भारत पर सार्वजनिक कर्ज था। मार्च 2020 में 94.62265 लाख करोड़ रुपए भारत सरकार पर कुल देनदारी थी। इसमें मामूली वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार के कुल देनदारी जून 2020 तक 101.35600 लाख करोड़ रुपए हो गयी। वर्ष 1991 में भारत पर 85 बिलियन डॉलर का बाहरी कर्ज था जो वर्ष 2011 में बढ़कर 317 बिलियन डॉलर हो गया। मार्च 2020 में भारत पर लगभग 558 बिलियन डॉलर का विदेशी ऋण था। जून 2020 में देश पर बाहरी ऋण 3.9 बिलियन डॉलर घटकर 554 बिलियन डॉलर हो गया। भारत के लिए सुखद बात यह है कि भारत आंतरिक ऋण पर ज्यादा और बाहरी ऋण पर कम निर्भर करता है। भारत की इस नीति की वजह से कुल कर्ज का लगभग 20 प्रतिशत बाह्य कर्ज है और शेष 80 प्रतिशत आंतरिक कर्ज है। यही कारण है कि भारत की वित्तीय स्थिति कोरोना महामारी के बावजूद भी मजबूत है। देश के सभी राज्यों पर कर्ज का दबाव बढ़ रहा है। मार्च 2020 तक देश के सभी राज्यों पर कुल मिलाकर लगभग 40 लाख करोड रुपए का कर्ज था। मुझे लगता है कि मार्च 2021 तक सभी राज्यों पर 60 लाख करोड़ तक का कर्ज हो सकता है। हाल ही में केयर रेटिंग के आंकड़ों से यह पता चलता है कि देश के लगभग सभी राज्यों पर लाखों करोड़ रुपए का कर्ज है। उत्तर प्रदेश पर 6.02 लाख करोड़ रुपए, महाराष्ट्र 5.02 लाख करोड़ रुपए, पश्चिम बंगाल 4.37 लाख करोड़ रुपए, तमिलनाडु 4.04 लाख करोड़ रुपए, राजस्थान 3.43 लाख करोड़ रुपए, आंध्र प्रदेश 3.41 लाख करोड़ रुपए, गुजरात 3.26 लाख करोड़ रुपए, कर्नाटक 3.17 लाख करोड़ रुपए, केरल 2.66 लाख करोड़ रुपए, मध्य प्रदेश 2.34 लाख करोड़ रुपये, पंजाब 2.30 लाख करोड़ रुपये, तेलंगाना 1.68 लाख करोड़ रुपये और उड़ीसा पर 1.33 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। पंजाब राज्य में प्रति व्यक्ति देनदारी 82771 रुपये, हरियाणा 81287 रुपये, केरल 79771 रुपए, तमिलनाडु 56134 रुपये, गुजरात 53931 रुपये, कर्नाटक 51981 रुपये, पश्चिमी बंगाल 47881 रुपये, महाराष्ट्र 44734 रुपये, मध्य प्रदेश 32354 रुपए और उत्तर प्रदेश राज्य पर 30136 रुपये प्रति व्यक्ति देनदारी है। देश और सभी प्रदेशों पर कर्ज में मामूली वृद्धि हुई है। कर्ज लेना आवश्यक था। इससे अर्थव्यवस्था पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा बल्कि उत्पादकता बढ़ेगी। देश का विकास होगा। देश के लोगों को राहत मिलेगी। कोरोना महामारी को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ा। यह फैसला जनहित को ध्यान में रख कर लिया गया जो सर्वथा उचित है। इसकी प्रशंसा होनी चाहिए। भारत आंतरिक ऋणों पर सदैव ज्यादा निर्भर रहा है। बाहरी ऋणों पर भारत की निर्भरता कम रही है। किसी भी देश का सार्वजनिक ऋण जीडीपी के 77 प्रतिशत से अधिक होने पर ही चिंता का विषय होता है। अभी भारत की स्थिति बहुत बेहतर है क्योंकि भारत का कुल सार्वजनिक कर्ज जीडीपी के अनुपात में लगभग 71 प्रतिशत के बराबर है। वह भी तब जब देश में कोरोना जैसी भयानक महामारी है। मैं याद दिलाना चाहूंगा कि वर्ष 2003 में देश में सार्वजनिक ऋण जीडीपी के 84.2 प्रतिशत के बराबर था। कोरोना महामारी के बावजूद आज हम देश का सार्वजनिक ऋण जीडीपी के 71 प्रतिशत के ही बराबर है। हम बेहतर स्थिति में हैं। अगर हम विश्व के अन्य देशों पर नजर डालें तो पायेंगे कि जापान का सार्वजनिक ऋण जीडीपी के 240 प्रतिशत के बराबर है। अमेरिका का सार्वजनिक ऋण उसके जीडीपी के 107 प्रतिशत के बराबर का है। भारत आज बाहरी कर्ज के मामले में भी बहुत अच्छी स्थिति में है। भारत पर बाहरी कर्ज जीडीपी के 21 प्रतिशत के बराबर का है। फ्रांस का बाहरी कर्ज उसकी जीडीपी के 277 प्रतिशत, जर्मनी का 153 प्रतिशत और जापान पर बाहरी कर्ज जीडीपी के 94 प्रतिशत के बराबर का है। आर्थिक स्थिति और कर्ज को लेकर चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। देश की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। आर्थिक सुधार आंकड़ों में स्पष्टता से दिख रहा है। मैंने अपने पिछले कुछ लेखों में इसपर विस्तार से लिखा है। आने वाले कुछ महीनों में कोरोना की वैक्सीन आने के बाद देश की आर्थिक स्थिति में निरंतर और सुधार होगा। भारत एक आर्थिक महाशक्ति बनने की कगार पर है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भाजपा के सीनियर नेता और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य लालकृष्ण आडवाणी का आज जन्मदिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आडवाणी के आवास पर जाकर उन्हें जन्मदिन की बधाइयां दीं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पूर्व डिप्टी पीएम आडवाणी की जन्मदिन की बधाई देने उनके आवास पहुंचे। सिंह ने ट्वीट करके खुद इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आदरणीय आडवाणीजी के आवास पर जाकर उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। मैं भगवान से उनके अच्छे स्वास्थ्य और लम्बी आयु की कामना करता हूं। राजनाथ सिंह ने ट्वीट करके कहा, श्रद्धेय लाल कृष्ण आडवाणी जी को उनके जन्मदिवस पर ढेरों शुभकामनाएं। उनकी गिनती भारतीय राजनीति की कद्दावर हस्तियों में होती है। देश, समाज और दल की विकास यात्रा में उनका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु होने की कामना करता हूं। गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट करके सीनियर लीडर आडवाणी को बधाई दी। उन्होंने कहा, आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आडवाणी जी ने अपने सतत परिश्रम से एक ओर देशभर में संगठन को मजबूत किया तो वहीं दूसरी ओर सरकार में रहते हुए देश के विकास में अमूल्य योगदान दिया। ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य व सुदीर्घ जीवन की कामना करता हूं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुरु नानक जयंती के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा- गुरु नानक जी की शिक्षाएं हमेशा हमारा मार्गदर्शन करती रहें। राष्ट्रपति मुर्मू ने ट्वीट कर कहा- गुरू नानक देव जी के जन्म दिवस पर देश व विदेश में रह रहे सभी देशवासियों और सिख भाई-बहनों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने हमें समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा दी। हम उनकी शिक्षाओं को अपनाकर उनके बताए हुए रास्ते पर चलें और समाज कल्याण की भावना के साथ कार्य करें। राष्ट्रपति के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को प्रकाश पर्व की शुभकानाएं दीं। उन्होंने कहा, एक न्यायपूर्ण और करुणामय समाज के निर्माण के हमारे प्रयास में उनकी महान शिक्षाएं हमारा मार्गदर्शन करती रहें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एशिया के सबसे अमीर इंसान गौतम अदाणी अब टेलीकॉम सेक्टर में कदम रखने की तैयारी में है। अदाणी की कंपनी अदाणी डाटा नेटवर्क लिमिटेड (एडीएनएल) को दूरसंचार सेवाओं के लिए एकीकृत दूरसंचार लाइसेंस मिल गया है। आसान भाषा में कहा जाए तो लाइसेंस मिलने के बाद अब एडीएनएल देश में हर तरह की टेलीकॉम सर्विसेज दे सकती है। सोमवार को मिला लाइसेंस : मीडिया रिपोटर्स के अनुसार अदाणी समूह को सोमवार को एकीकृत दूरसंचार लाइसेंस प्रदान किया गया है। हाल ही में देश में हुई 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी में स्पेक्ट्रम खरीदने के बाद अदाणी समूह ने टेलीकॉम सेक्टर में कदम रखा था। स्पेक्ट्रम खरीदते समय कंपनी ने कहा था कि वह इस स्पेक्ट्रम का उपयोग समूह के भीतर की कारोबारी गतिविधियों के लिए करेगी। जिओ, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया को मिलेगी कड़ी टक्कर : एकीकृत दूरसंचार लाइसेंस प्राप्त करने के बाद अब एडीएनएल देश में सभी तरह की टेलीकॉम सर्विसेज उपलब्ध करा सकती है। कंपनी अपनी 5जी सेवाओं को भी विस्तार दे सकती है। हालांकि अभी तक अदाणी समूह की तरफ से इस संबंध में कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। मगर ऐसा माना जा रहा हैं कि एडीएनएल के इस सेक्टर में कदम रखने के बाद मौजूदा टेलीकॉम दिग्गजों जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलने वाली है। पहली बार अंबानी-अदाणी में सीधा मुकाबला : देश के दो सबसे बड़े उद्योगपतियों मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। अभी तक दोनों अलग-अलग सेक्टर में व्यापार करते थे और दोनों के बीच सीधे तौर पर कोई प्रतिस्पर्धा नहीं थी। एक तरफ मुकेश अंबानी का रिलायंस समूह तेल, रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स से लेकर टेलीकॉम और रिटेल सेक्टर में काम करता है। वहीं दूसरी तरफ अदाणी समूह पोर्ट, कोयला, ग्रीन एनर्जी, बिजली वितरण और एविएशन सेक्टर में काम करता है। लेकिन अब टेलीकॉम सेक्टर में दोनों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रिवॉल्यूशनरी गोअन्स पार्टी ने शनिवार को झारखंड सरकार के मूलनिवास से सबंधित प्रस्तावित विधेयक की तारीफ की है, जिसे इस हफ्ते विधानसभा में पेश किये जाने की तैयारी है। आरजीपी ने तटवर्ती राज्य के लिए भी इसी तरह के विधेयक की मांग की है। पूर्वी राज्य में 11 नवंबर को एक विधेयक पारित कराने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया जायेगा, जिसमें मूल निवास का निर्धारण करने के लिए वर्ष 1932 को आधार वर्ष तय किया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के मुताबिक स्थानीय नागरिक के रूप में लोगों की स्थिति का निर्धारण उस साल की खतौनी (भू-रिकॉर्ड) के आधार पर किया जायेगा। आरजीपी नेता मनोज परब ने कहा, झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता एवं राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बधाई। यह वाकई झारखंड के मूल निवासियों के लिए एक ऐतिहासक दिन है। हमने (आरजीपी पदाधिकारी) भी इस तरह का विधेयक गोवा के मूल निवासियों के लिए पेश किया, जिसे पर्सन ऑफ गोअन ओरिजिन (पोगो) विधेयक नाम दिया गया। आरजीपी ने मांग की कि ऐसे लोगों को, जो यहां जन्मे हैं या उनके परिवार के सदस्यों का जन्म यहां हुआ है, तो उन्हें गोवा मूल का व्यक्ति घोषित किया जाये। पोगो विधेयक को पिछले सत्र के दौरान गोवा विधानसभा में आरजीपी के विधायक वीरेश बोर्कर ने पेश किया था, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया था।
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