एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के मंत्री और टीएमसी नेता अखिल गिरि के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर दिये गये बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आज श्री मुंडा ने दिल्ली के 25 तुगलक रोड स्थित अपने आवास में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अखिल गिरि ने देश के राष्ट्रपति के ऊपर जिस तरीके से अभद्र टिप्पणी की है, वह निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। आश्चर्य की बात ये है कि पश्चिम बंगाल की सरकार, जहां स्वंय एक महिला मुख्यमंत्री है। और उसके मंत्रिमंडल के सदस्य खुलेआम देश के महिला जनजाति राष्ट्रपति के ऊपर इस प्रकार का अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं। इस मामले में ममता बनर्जी को स्वयं स्पष्टीकरण देना चाहिए। क्योंकि टीएमसी के मंत्री ने इस तरह का गलत बयान दिया है। यह बयान उन्होंने किसके कहने पर दिया है, यह बयान देश को अपमान करने वाला है। ऐसे मंत्री को ममता बनर्जी को अपने मंत्रिमंडल से तुरंत बर्खास्त करना चाहिए और इस तरह के बयानों के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। टीएमसी नेता के बयानों से स्पष्ट होता है कि यह टीएमसी के चरित्र में है। पश्चिम बंगाल की सरकार, देश के आदिवासियों और पश्चिम बंगाल के आदिवासियों का भी शोषण करती रही है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं, क्योंकि ये बयान अशांति फैलाने वाले हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में कोविड के मामलों में कमी आने के बावजूद इंडियन सार्स-कोव-2 जीनोमिक कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) सार्स कोव-2 की जीनोम सिक्वेंसिंग को लेकर सतर्क है। इस वायरस पर निगरानी रखने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग का विस्तार दक्षिण एशिया के अन्य देशों तक करने की योजना है। आईएनएसएसीओजी हर महीने 8000-9000 नमूनों का विश्लेषण कर रहा है। भारत में सार्वजनिक निगरानी नेटवर्क के जरिये रोजाना एसएआरआई के 1 से 1.5 लाख मरीजों के नमूने एकत्रित किये जा रहे हैं। इन नमूनों में 1 फीसदी मरीज कोविड-19 से ग्रस्त निकल रहे हैं। आईएनएसएसीओजी में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) में कोविड कार्य समूह के चेयरमैन एनके अरोड़ा ने कहना है कि देश में अभी कोरोना के नए मामले 2000 के स्तर से नीचे हैं। लेकिन भारत में सांस के संक्रमण सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (एसएआरआई) से प्रभावित 1 से 1.5 लाख मरीजों के नमूने एकत्रित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, हमने महामारी के दौरान नया सिस्टम आईएनएसएसीओजी विकसित किया और इसकी भूमिका कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। यह नेटवर्क विषाणु के विकास पर करीबी नजर रखता है और भविष्य की महामारी से निपटने के लिए संभावित इंतजामों की नींव रखता है। भारत की योजनाप से आईएनएसएसीओजी नेटवर्क का विस्तार दक्षिण एशिया के देशों तक करने और साझा प्रयासों के जरिये विषाणु पर कड़ी निगरानी रखने की है। उन्होंने कहा कि इसमें कई तरह से निगरानी की जा रही है। इसमें नाले (सीवेज), अस्पतालों में भर्ती कोविड 19 मरीजों और एसएआरआई नमूने लिए जा रहे हैं। हम अस्पतालों में भर्ती कोविड के मरीजों के नमूनों की जीनोम सैंपलिंग कर रहे हैं। हम सीवेज से भी नमूने ले रहे हैं। हम एसएआरआई के मरीजों के एकत्रित नमूनों से जीनोम सिक्वेंसिंग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हम कोविड-19 पीड़ित सभी मरीजों के नमूनों की जीनोम सैंपलिंग कर रहे हैं। भारत ने इस साल सीवेज से भी नमूने एकत्रित करना शुरू किया। इससे पर्यावरण पर निगरानी रखी जाती है। भारत ने पोलियो अभियान के दौरान भी ऐसा किया था। दुनिया में बहुत कम देशों के पास यह तकनीक व क्षमता है कि वे सीवेज के पानी में विषाणु के कणों का पता लगा पायें। इस प्रोटोकॉल ने वातावरण में विषाणु के संक्रमण पर निगरानी रखने का तरीका विकसित किया है। कोविड संक्रमित कई लोगों में इस बीमारी के लक्षण नहीं आ रहे हैं और हल्के बुखार जैसे लक्षण आ रहे हैं। इसलिए कई लोग आरटी-पीसीआर टेस्ट नहीं करवा रहे हैं। इससे आईएनएसएसीओजी के लिए नमूनों से जीनोम सिक्वेंसिंग में गिरावट आ रही है। लिहाजा ऐसे समय में पर्यावरण पर नजर रखना जरूरी हो गया है। इससे कोविड के सक्रिय स्वरूपों को पकड़ने में मदद मिलती है और संक्रमण के भौगोलिक रुझानों की जानकारी मिलती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। खमरिया थानान्तर्गत परियट नदी के नजदीक स्थित ग्राम मटामर में शुक्रवार की सुबह एक गौशाला में लोगों ने चार फुट के मगरमच्छ को घूमते देखा। आनन-फानन में पुलिस एवं प्राणी विशेषज्ञों से संपर्क कर उन्हें मौके पर बुलवाकर मगरमच्छ को पकड़कर सुरक्षित मगर सेंचुरी परियट नदी में छोड़ा। खमरिया थाना प्रभारी निरूपा पाण्डेय ने बताया कि ग्राम मटामर स्थित गौशाला में सुबह जब साफ-सफाई का काम चल रहा था, इसी दौरान गौशाला के संचालक नेतराम पटैल की नजर मगरमच्छ पर पड़ी। वो गौशाला में यहां से वहां शिकार के लिए घूम रहा था। मगरमच्छ को देखते ही आसपास अफरातफरी मच गई। मगरमच्छ बहुत बड़ा नहीं रहा, इसलिए लोग बहुत भयभीत तो नहीं रहे, लेकिन भयानक देखने वाले इस बेबी-मगरमच्छ को पकड़ना तो दूर उसके आस-पास फटकने तक से लोग घबरा रहे थे। लिहाजा इसकी सूचना प्राणी विशेषज्ञ धर्मेंद्र रजक को दी गई, जिन्होंने शंकरेंद्र नाथ, नेतराम बर्मन, बलिराम बर्मन के सहयोग से मगरमच्छ को पकड़ने में सफलता प्राप्त कर ली। घटना की जानकारी वन विभाग के आला अधिकारियों को भी दिये जाने की बात कही जा रही है। बाद में वन विभाग के अफसरों की सहमति से ही पकड़े गये मगरमच्छ को परियट नदी स्थित मगर सेंचुरी में छोड़ दिया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत 1 नवंबर को उन 50 देशों के समूह में शामिल हो गया जो डिजिटल मुद्रा की संभावनाएं तलाशने के अहम चरण में हैं यानी उन्होंने ऐसी मुद्रा की शुरूआत कर दी है, वहीं कुछ इसे तैयार की प्रक्रिया में हैं या ये देश प्रायोगिक परियोजनाएं शुरू करने के लिए तैयार हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकारी बॉन्ड में द्वितीयक बाजार कारोबार की थोक श्रेणी के लिए केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी), या ई-रुपया की पहली प्रायोगिक परियोजना शुरू की। पहले दिन 9 बैंक, सीबीडीसी का इस्तेमाल कर द्वितीयक बाजार में 275 करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीदारी करने और बेचने में शामिल थे। उस दिन कुल 20,865 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। वास्तव में कारोबार का एक छोटा सा हिस्सा ही डिजिटल मुद्रा के माध्यम से पूरा किया जा सका लेकिन यह बस एक शुरुआत थी। आरबीआई इसी महीने खुदरा ग्राहकों के लिए इस प्रायोगिक परीक्षण के साथ इसको आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक अमेरिकी थिंक टैंक, अटलांटिक काउंसिल के सीबीडीसी ट्रैकर के मुताबिक 95 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का प्रतिनिधित्व करने वाले कम से कम 105 देश इस वक्त सीबीडीसी की संभावनाएं तलाश रहे हैं। करीब दो-ढाई वर्ष पहले ही मई 2020 तक (जब दुनिया भर में कोविड महामारी का आतंक फैला था) महज 35 देश ही इस पर विचार कर रहे थे। जमैका ने हाल में सीबीडीसी-जैम-डीईएक्स लॉन्च किया है। इसके साथ, कम से कम 10 देशों ने पूरी तरह से एक डिजिटल मुद्रा की शुरुआत कर दी है और चीन की प्रायोगिक परियोजना का विस्तार 2023 में दिखने की उम्मीद है। चीन ने डिजिटल युआन मुद्रा की अपनी पहली प्रायोगिक परियोजना के सफल होने का दावा किया है। मई 2021 की शुरुआत में पूर्वी चीन में शांघाई के नजदीक के शहर सुजो में खरीदारी के त्योहार ‘डबल फाइव’ में करीब 181,000 ग्राहकों के डिजिटल वॉलेट में 55 युआन मुफ्त दिए गए थे। उस वक्त से ही यह प्रायोगिक परियोजना के दायरे को बढ़ा रही है खासतौर पर खुदरा भुगतान के लिए। जी-7 अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका और ब्रिटेन पिछड़ रहे हैं जबकि जी-20 देशों में से 19 देश सीबीडीसी के लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं। 19 देशों में से दक्षिण कोरिया, जापान और रूस सहित 16 देशों ने पिछले छह महीने में इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इस सूची में भारत भी शामिल है। भारत के केंद्रीय बैंक, आरबीआई की कम से कम दो आंतरिक समितियों ने सीबीडीसी पर काम किया है और हाल ही में एक अवधारणा नोट जारी किया गया है। भारत में सीबीडीसी का उपयोग खुदरा और थोक भुगतान दोनों के लिए किया जाएगा। थोक भुगतान के लिए सीबीडीसी का उपयोग आसान है क्योंकि सभी अंतरबैंक लेनदेन पहले से ही डिजिटल स्वरूप में हैं और नकदी का कोई इस्तेमाल नहीं है। जब कोई व्यक्ति विभिन्न तरह के सामान खरीदने के लिए सीबीडीसी का उपयोग करता है तब नकदी के पूरक बनने का मकसद हासिल कर लिया जाएगा। क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और वॉलेट की तरह, सीबीडीसी भुगतान प्रणाली का हिस्सा होगा जो वॉलेट के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान करने का एक और तरीका है। देश की वित्तीय प्रणाली में ऐसे कई वॉलेट काम कर रहे हैं। सीबीडीसी भी उनमें से ही एक होगा लेकिन इसमें कुछ अंतर होगा जैसे कि यह देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए जाएंगे और इसका वितरण और प्रबंधन वाणिज्यिक बैंकों द्वारा किया जाएगा। आरबीआई केंद्रीय स्तर पर नियंत्रित डेटाबेस का पालन कर सकती है क्योंकि डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी भारत की इतने बड़े पैमाने की आबादी के लिए ही पूरी तरह सक्षम नहीं हो सकती है जिसमें सहमति के आधार पर साझा और सिंक्रोनाइज किए गए डिजिटल डेटा का विभिन्न जगहों पर प्रसार किया जाता है ऐसे में सवाल यह है कि क्या सीबीडीसी नकदीरहित प्रणाली शुरू करेगा? फिलहाल, भविष्य में इसकी कोई संभावना नहीं दिखती है। वास्तव में, इस वक्त दुनिया का कोई भी देश नकदीरहित (कैशलेस) नहीं है। हालांकि बैंकनोट जारी करने वाला यूरोप का पहला देश स्वीडन आज दुनिया के प्रमुख नकदीरहित समाज के तौर पर जाना जाता है और इसके 98 फीसदी से अधिक नागरिकों के पास डेबिट/ क्रेडिट कार्ड है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि 2024 तक इसकी अर्थव्यवस्था से नकदी पूरी तरह खत्म की जा सकती है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक नॉर्वे के 98 प्रतिशत से अधिक नागरिकों के पास डेबिट/ क्रेडिट कार्ड है और यह स्वीडन को यूरोप के पहले नकदीरहित देश बनने के लिए कड़ी टक्कर दे सकता है। हॉलैंड की 91 प्रतिशत आबादी ने डिजिटल भुगतान और डेबिट कार्ड को अपनाया है। फिनलैंड वर्ष 2030 तक पूरी नकदीरहित देश बन सकता है क्योंकि इसकी आबादी लगभग 55 लाख है। यह कार्ड के उपयोग के मामले में आयरलैंड से ठीक पीछे है। इसके अलावा चीन, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, आॅस्ट्रेलिया, नीदरलैंड और कनाडा भी नकदीरहित अर्थव्यवस्था बनने की राह पर हैं। दुनिया के सबसे बड़े ई-कॉमर्स बाजार चीन की तुलना में दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था ज्यादा नकदीरहित है हालांकि यह बेहद छोटा देश हैं। नकदीरहित अर्थव्यवस्था का एक फायदा यह है कि केंद्रीय बैंकों की नोट छापने, इसका वितरण करने और गंदे नोटों की सफाई की लागत में कमी आयेगी। आखिर यह इतना अहम क्यों है? आइए इस बात पर गौर करते हैं कि आरबीआई नोटों की छपाई पर कितने पैसे खर्च करती है। भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण लिमिटेड से सूचना के अधिकार के माध्यम से मिले आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 में 10 रुपये के 1,000 रुपये के नोटों का बिक्री मूल्य 960 रुपये था जिससे 10 रुपये के एक नोट की लागत 96 पैसे हो गई। वहीं 20 रुपये के एक नोट की लागत सिर्फ 1 पैसा कम यानी 95 पैसे थी। 50 रुपये के एक नोट की लागत 1.13 रुपये थी जबकि 100 रुपये के नोट की लागत 1.77 रुपये, 200 रुपये के नोट की लागत 2.37 रुपये और 500 रुपये के नोट की लागत 2.29 रुपये है। वित्त वर्ष 2021 की तुलना में वित्त वर्ष 2022 में, 50 रुपये के नोट की कीमत में 23 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई (यह 92 पैसे से बढ़कर 1.13 रुपये हो गई), जबकि 20 रुपये के नोट की कीमत सिर्फ 1 पैसा थी। इस दौरान 500 रुपये के नोटों की छपाई लागत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। कुल मिलाकर, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2022 में नोटों की छपाई के लिए 4,984.8 करोड़ रुपये खर्च किए जो वित्त वर्ष 2021 ( 4,012.09 करोड़ रुपये) की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है हालांकि इस दौरान नोटों की आपूर्ति कम थी। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2017 (नोटबंदी का वर्ष) में नये नोट छापने के लिए 7,965 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जो पिछले वर्ष के 3,421 करोड़ रुपये की तुलना में 133 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल तक आरबीआई अकाउंटिंग के उद्देश्यों के लिए जुलाई-जून वित्तीय वर्ष के मुताबिक काम पर अमल कर रहा था। जिन कारकों ने आरबीआई को सीबीडीसी को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है, उनमें से एक क्रिप्टोकरेंसी को लेकर इसे गहरा एतराज है। इसके पीछे भी कई कारण बताए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, उन्हें स्लॉट में बांटा नहीं जा सकता है क्योंकि वे न तो एक सामान हैं, न कोई मुद्रा और न ही भुगतान प्रणाली का हिस्सा हैं। चूंकि वे केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी नहीं किए जाते हैं इसलिए ऐसी मुद्राओं को समर्थन नहीं दिया गया है। इसके अलावा, चूंकि लेनदेन अनाम तरीके से होता है इसलिए क्रिप्टोकरेंसी को सार्वजनिक जांच के दायरे में नहीं लाया जा सकता है। इसके केवाईसी मानदंडों के गंभीर असर होंगे और यह धनशोधन और आतंकी अभियानों की फंडिंग के जोखिमों से भरा है। आरबीआई क्रिप्टोकरेंसी को एक परिसंपत्ति के रूप में वगीर्कृत करने से इनकार करता है क्योंकि इसमें भविष्य में नकदी प्रवाह की गुंजाइश नहीं है और अटकलों के कारण इसके मूल्य में हमेशा उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसमें उपभोक्ता सुरक्षा का भी पहलू नहीं है। सीबीडीसी बाहर से देश में भेजी हुई रकम की लागत भी कम करेगा क्योंकि सीमा पार लेन-देन सस्ता हो जायेगा। विश्व बैंक के एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2021 में सबसे ज्यादा बाहर से भेजी हुई रकम मिली थी। जून 2022 तक, 9 सीमा-पार थोक सीबीडीसी प्रायोगिक परियोजनाएं और तीन खुदरा लेनदेन से जुड़ी परियोजनाएं थीं। रॉयटर्स की एक हाल के रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे बड़े सीबीडीसी प्रायोगिक परीक्षण की जब बात होती है तब चीन के डिजिटल युआन की बात जरूर शामिल होती है। 15 अगस्त और 23 सितंबर के बीच छह सप्ताह के एक प्रायोगिक परीक्षण एमब्रिज पर अमल किया गया और यह एक ऐसी परियोजना है जिसके तहत चीन, हांगकांग, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी डिजिटल मुद्राओं में सीमा पार भुगतान किया जाता है। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, सीबीडीसी के वैश्वीकरण के प्रयास केंद्र में होते हैं। लेकिन अटलांटिक काउंसिल ने चेतावनी दी है कि वित्तीय प्रणाली को निकट भविष्य में विभिन्न समूहों और देशों के बीच इसके संचालन में समस्या का सामना करना पड़ सकता है और विभिन्न सीबीडीसी मॉडल के प्रसार से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक की जरूरत पड़ेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर एक बार फिर खालिस्तान आंदोलन को जिंदा कर पंजाब से लेकर जम्मू तक को सुलगाने की तैयारी की जा रही है और वहां एक नया भिंडरावाला पैदा करने की कोशिश की जा रही है। इस बाबत तिहाड़ जेल में बैठे आतंकी नेता जगतार सिंह हवारा के निर्देश पर एक बैठक भी आयोजित की गयी। इन सूचनाओं के बाद खुफिया एजेंसियोंं के कान खड़े हो गये हैं और विवादास्पद संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ समेत कुछ संगठनों और उसके मुखिया को जांच के घेरे में लाया गया है। इसके साथ ही वारिस पंजाब दे के मुखिया अमृतपाल के सोर्स आफ फाइनेंस की जांच के आदेश भी दिये गये हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पंजाब में बनाये गये आंतकी अपराधी गठजोड़ को अपनी सफलता मान रही है और अब वह पंजाब और जम्मू को दहलाने के लिए एक बार फिर खालिस्तान का भूत जिंदा करना चाहती है। इसके तहत उसने अपने संपर्क में रहने वाले सिख आंतकी नेताओं को निर्देश दिए हैं कि खालिस्तान मुद्दे को एक बार जिंदा किया जा सकता है। पंजाब से जम्मू तक आंतकी अपराधी गठजोड़ को एक नया सहयोगी दिया जा सकता है। भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिली इस सूचना के बाद तमाम सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इस बाबत जानकारी एकत्र करने को कहा गया है। चंडीगढ़ में हुई बैठक में खालिस्तान पर हुई चर्चा : खुफिया एजेंसियों की कुछ दिनों पहले हुई बैठक में इस बाबत जुटाई गई जानकारी में अनेक सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक तिहाड जेल में बंद कुख्यात आतंकवादी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंतसिंह के हत्यारे जगतार सिंह हवारा के निर्देश पर चंडीगढ़ में एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में अनेक कट्टरवादी सिख संगठनों ने भाग लिया। इस बैठक में लगभग 100 लोग मौजूद थे और इस में हवारा कमेटी, वारिस पंजाब दे और अकाल यूथ के नेता भी शामिल थे। खुफिया रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा गया है कि इस बैठक में पंजाब सरकार की आलोचना करते हुए खालिस्तान के मुद्दे पर चर्चा हुई। कट्टरपंथी सिख संगठन को लेकर हो रही है जांच : खुफिया दस्तावेजों के मुताबिक इस मामले में कट्टरपंथी सिख संगठन वारिस पंजाब दे के नए मुखिया अमृतपाल सिंह ने दमदमी टकसाल अमृतसर के एक पूर्व नेता से मुलाकात की थी। यह नेता जम्मू का रहने वाला बताया जाता है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक यह मुलाकात अकाली दल अमृतसर के मुखिया सांसद सिमरनजीत सिह मान के यहां हुई थी। इस बैठक के दौरान अमृतपाल ने जम्मू में रहने वाले इस नेता से जानना चाहा कि वहां के युवा सिखों की मानसिकता क्या है। उसने अपनी योजना बताते हुए कहा कि वह जम्मू में अपनी जैसी मानसिकता वाले ऐसे युवा सिखों से मुलाकात करना चाहता है जो अपनी जान सिख पंथ के लिए दे सकें। हिंदूवादी नेता की हत्या के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसी कर रहीं जांच : दस्तावेजों के मुताबिक वारिस पंजाब दे का यह नया मुखिया रोजाना चार से पांच प्रोग्राम में भाग लेता है जहां वह अपने कट्टरपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए अन्य संगठनों की आलोचना करता है। अमृतपाल के अनेक ऐसे वीडियो भी सामने आए है जिसमें वह खुद को पंजाब के एक पूर्व विवादस्पद नेता की तरह पेश करता है और इस वीडियो में यह भी साफ तौर पर आया है कि उसके साथ अनेक हथियारबंद लोग मौजूद रहते है जो उसके भाषण के दौरान अपने हथियारों का प्रदर्शन करते नजर आते हैं। अमृतपाल को पिछले दिनों शिवसेना नेता की हत्या के मामले में भी कुछ देर तक नजरबंद किया गया था क्योंकि कथित तौर पर उसका नाम इस हत्या से जोड़ा जा रहा था और आरोप लगाया जा रहा था कि शिवसेना नेता की जिस आरोपी ने हत्या की, उसने अमृतपाल से मुलाकात की थी और अमृत चखा था। पंजाब पुलिस ने इस बाबत अपने अधिकारिक बयान में कहा कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। साजिश को लेकर तमाम विवादास्पद संगठनों की जांच शुरू : खुफिया दस्तावेजों के मुताबिक पंजाब को खालिस्तान के नाम पर फिर से सुलगाने की कोशिशों को देखते हुए तमाम विवादास्पद संगठनों की जांच करने को कहा गया है। इनमें जहां दमदमी टकसाल से जुडेÞ लोगों और उनकी गतिविधियों पर पैनी निगाह रखने को कहा गया है। वहीं, वारिस पंजाब दे के मुखिया अमृतपाल के सोर्स आफ फाइनेंस की जांच समेत उसके सहयोगियों की बाबत भी जांच करने को कहा गया है। बताया जाता है कि अमृतपाल इसके पहले दुबई में ट्रक ड्राइवर के पेशे में था और वह दीप सिद्दू के संगठन से जुड़ा हुआ था। पहले वह कभी कभार दो चार लाइनें लिख देता था लेकिन अचानक वह दुबई से भारत आया और उसे वारिस पंजाब दे का मुखिया बना दिया गया। ऐसे में खुफिया एजेंसियां जानना चाहती हैं कि युवा वर्ग का आइकॉन बनने के लिए उसके पास पैसा कहां से आ रहा है। कौन लोग उसकी फंडिग कर रहे हैं और उसका असली मकसद क्या है? फिलहाल खुफिया एजेंसियों की पूरी कोशिश है कि खालिस्तान के नाम पर पंजाब- जम्मू को सुलगाने का मकसद कामयाब ना हो सके और इसके लिए हर संभव कार्रवाई की जा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले हफ्ते इंडोनेशिया के बाली में होने वाले वैश्विक नेताओं के जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। राष्ट्रपति पुतिन की जगह रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जी20 शिखर सम्मेलन में रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यूक्रेन के खिलाफ जंग का ऐलान करने के बाद ये पहला मौका है, जब दुनिया की 90 प्रतिशत जीडीपी का नेतृत्व करने वाले जी20 देशों का शिखर सम्मेलन हो रहा है और उसमें राष्ट्रपति पुतिन शामिल नहीं होंगे। इंडोनेशिया में रूसी दूतावास की अधिकारी यूलिया टॉम्स्काया ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले हफ्ते इंडोनेशिया के बाली में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में नहीं जायेंगे। मैं इसकी पुष्टि कर सकती हूं कि एफएम सर्गेई लावरोव जी 20 में रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इससे पहले इंडोनेशियाई सरकार के एक अधिकारी ने पहले रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया था कि विदेश मंत्रीलावरोव, राष्ट्रपति पुतिन का प्रतिनिधित्व करेंगे और रूसी राष्ट्रपति शिखर सम्मेलन की एक बैठक में वर्चुअली शामिल होंगे। वहीं, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इस सप्ताह की शुरुआत में फाइनेंशियल टाइम्स को बताया था कि उन्हें मजदूत आभास है, कि रूसी नेता इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए नहीं आयेंगे। पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जी20 के 16 सदस्यों ने पूर्वी यूक्रेन के चार क्षेत्रों को रूस में मिलाने के मास्को के प्रयास की निंदा करते हुए रूसी कदम के खिलाफ लाये गये प्रस्ताव का समर्थन किया था। जी20 के सदस्य चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने मतदान में भाग नहीं लिया था, जबकि यूरोपीय संघ का संयुक्त राष्ट्र निकाय में प्रतिनिधित्व नहीं है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की को भी इस शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है और उन्होंने पहले कहा था, कि अगर पुतिन को इसमें शामिल किया जाता है, तो वह इसमें शामिल नहीं होंगे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन उन विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो जी20 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने वाले हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नेपाल और दिल्ली के बाद अब अरुणाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किये गये हैं। आंध्र प्रदेश के वेस्ट के सियांग जिले में 5.7 की तीव्रता का भूकंप आया है। यह जानकारी राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने दी है। भूकंप का केंद्र अरुणाचल प्रदेश है और गहराई 10 किमी है। भूकंप सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर आया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में कोविड-19 के 1,016 नये मामले आने से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,46,63,968 हो गयी है। वहीं उपचाराधीन मरीजों की संख्या कम होकर 13,187 रह गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक के अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में संक्रमण से दो और राजस्थान में एक मरीज की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 5,30,514 हो गयी है। आंकड़ों के अनुसार, उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.03 प्रतिशत है जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने वाले लोगों की दर 98.78 प्रतिशत हो गयी है। बीते 24 घंटे में कोविड-19 का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 372 की कमी दर्ज की गयी है। इस बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,41,20,267 हो गयी है जबकि मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। देशव्यापी कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक 219.76 करोड़ खुराकें दी जा चुकी है। गौरतलब है कि भारत में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गए थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 25 जनवरी को संक्रमण के कुल मामले चार करोड़ के पार हो गये थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऐसा बताया जा रहा है कि बदलाव करने के बाद वेरिफाइड ट्विटर हैंडर के नीचे ऑफिशियल दिखा दिखाई दे रहा था। हालांकि अभी तक कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इसे लॉन्च नहीं किया है। कंपनी या खुद एलन मस्क ने इस टैग के बारे में कोई जानकारी शेयर की है। वेरिफाइड अकाउंट के लिए हुआ बदलाव : ट्विटर द्वारा हाल में वेरिफाइड अकाउंट के लिए घोषित बदलावों का ऐलान किया गया था। कंपनी का कहना था कि प्रमुख मीडिया संगठनों और सरकारों सहित चुनिंदा सत्यापित अकाउंट के लिए ऑफिशियल लेबल दिया गया है। ट्विटर की अधिकारी एस्थर क्रॉफर्ड ने कहा था कि बहुत से लोगों ने पूछा है कि वह ब्लू चेकमार्क वाले ट्विटर ब्लू ग्राहकों (सब्सक्राइबर्स) और ऑफिशियली सत्यापित अकाउंट के बीच अंतर कैसे करेंगे। यही कारण है कि हम कुछ अकाउंट्स के लिए ऑफिशियल लेबल पेश कर रहे हैं।
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