एबीएन सेंट्रल डेस्क। स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के दूसरे पोते सात्यकी सावरकर ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जो पत्र दिखाए हैं, वह असली हैं लेकिन उन्हें माफीनामा नहीं कहा जा सकता। राहुल जो कहते हैं कि वीर सावरकर ने अंग्रेजों से पेंशन ली थी, यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर अंग्रेजों के कोई कर्मचारी नहीं थे कि सेवा से रिटायर होने के बाद उनको पेंशन मिलेगी। मूल समस्या यह है कि राहुल गांधी पेंशन और निर्वाह भत्ता में अंतर ही नहीं समझ सके। मीडियाकर्मियों से रूबरू सात्यकी सावरकर ने राहुल गांधी की ओर से वीर सावरकर पर लगाये गये आरोपों का तथ्यात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो पत्र राहुल गांधी ने मीडिया को दिखाएं हैं, वे सही हैं और वे सभी आवेदन पत्र हैं। जब वीर सावरकर अंडमान गए तब उन्हें कोई सुविधा नहीं दी गई थी। उन्हें एक कोठरी में बंद कर दिया गया था। वीर सावरकर ने उस समय अंग्रेज सरकार को आवेदन दिया कि उन्हें एक राजनीतिक कैदी के समान सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने समय-समय पर आवेदन किया। बाद में उन्होंने रिहाई के लिए आवेदन किया। वीर सावरकर ने यह सब सभी कैदियों के लिए किया था, चाहे वो गदर आंदोलन के हों या बंगाल आंदोलन से। वीर सावरकर को अंग्रेजों से पेंशन मिलने के राहुल गांधी के आरोप पर सात्यकी सावरकर ने कहा कि राहुल गांधी को पता होना चाहिए कि वीर सावरकर अंग्रेजों के नौकर अथवा कर्मचारी नहीं थे कि उन्हें अंग्रेज पेंशन देते। पेंशन आम तौर पर नौकर अथवा कर्मचारी को दी जाती है। राहुल गांछी को पेंशन और निर्वाह भत्ते के बीच का अंतर नहीं पता। पेंशन का मतलब सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाला वेतन है। सावरकर को भरण-पोषण भत्ता मिल रहा था। इसका मतलब निर्वाह भत्ता है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर के पास बैरिस्टर की डिग्री नहीं थी। उन्हें रत्नागिरी छोड़ने की अनुमति नहीं थी। ऐसी स्थिति में जीवित रहने के लिए व्यक्ति को क्या करना चाहिए? ऐसे कैदी की जिम्मेदारी सरकार की होती है। ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1928 में पारित अधिनियम के तहत 1929 में सावरकर के लिए 60 रुपये प्रति माह निर्वाह भत्ता शुरू किया था। इसे पेंशन नहीं कहा जा सकता। सात्यकी सावरकर ने कहा कि राहुल गांधी के बयान सिर्फ राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के इस तरह के बयान से दुख तो है लेकिन दूसरी तरफ उन्हें इस बात की खुशी है कि इससे बहुत से लोगों को वीर सावरकर के बारे में जानने की उत्कंठा जगेगी और वे सभी वीर सावरकर के विचारों को और आगे ले जाने का प्रयास करेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जबलपुर के मेखला रिसोर्ट के शिल्पा झारिया हत्याकांड मामले के आरोपी अभिजीत पाटीदार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। युवती की बेरहमी से हत्या करने वाला सनकी आशिक 12 दिन बाद पुलिस की पकड़ में आया है। मामले का पूरा खुलासा अब से कुछ देर बाद जबलपुर पुलिस करने वाली है। तिलवारा के घाना स्थित मेखला रिसोर्ट में युवती की हत्या करने वाले आरोपित अभिजीत पाटीदार को पुलिस ने शनिवार को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है। जबलपुर पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। देश के कई शहरों में जबलपुर पुलिस की टीमें आरोपी की खोजबीन में भेजी गई थी। पुलिस के अनुसार आरोपित महाराष्ट्र के नासिक का रहने वाला है और उसका असली नाम हेमंत भदाड़े है। आरोपित के खिलाफ पहले से ही महाराष्ट्र सहित कई जगहों पर 20 से ज्यादा अपराध दर्ज हैं। जबलपुर में भी धोखाधड़ी की घटना अगस्त में की थी। यहां के व्यापारी के साथ साढ़े आठ लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। आरोपित एक ठिकाने पर 12 घंटे से ज्यादा नहीं रुकता था। हर तरह का अपराध किया। चोरी, लूट हत्या समेत कई तरह के अपराध में शामिल रहा। मेखला रिसोर्ट में भी उसने फर्जी आईडी के जरिये होटल में कमरा बुक किया था। पुलिस ने बताया, आरोपित की पहचान फिंगर प्रिंट के जरिये की गई। गौरतलब है कि 8 नवंबर की दोपहर को रिसोर्ट के रूम नंबर पांच में शिल्पा झारिया का शव रजाई में लिपटा हुआ मिला था। मृतका 6 नवंबर को अभिजीत पाटीदार के साथ ठहरने के लिए पहुंची थी। 7 नवंबर की शाम अभिजीत पाटीदार रिसोर्ट से चला गया था। शिल्पा रूम में ही ठहरी हुई थी। 8 नवंबर की दोपहर युवती शिल्पा की कमरे में रक्तरंजित लाश मिली थी। इसके बाद आरोपी अभिजीत पाटीदार ने उसी के इंस्टाग्राम एकाउंट से 2 वीडियो भी वायरल किये थे, जिनमें उसने ने मृतका को धोखेबाज बताते हुए खुद को सही साबित करने की कोशिश की थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजों की सेना के खिलाफ भीषण लड़ाई लड़ने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को शनिवार को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके साहस एवं राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।मोदी ने ट्वीट किया, रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं। हमारे देश के लिए उनके साहस और महत्वपूर्ण योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। वह औपनिवेशिक शासन के अपने दृढ़ विरोध के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मोदी ने लक्ष्मीबाई की जयंती मनाने के लिए पिछले साल इसी दिन किए झांसी के अपने दौरे की तस्वीरें भी साझा कीं।लक्ष्मीबाई औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारत के 1857 स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण शख्सियत हैं जिन्होंने झांसी पर कब्जा करने का प्रयास कर रही ब्रिटिश सेना से बहादुरी से लड़ते हुए अपने प्राण का बलिदान कर दिया था।
कटक के बारबाटी स्टेडियम समेत राज्य के 5 म्युनिसिपल कारपोरेशन में हॉकी विश्वकप उत्सव मनाया जायेगा100 नये बस सेवा के साथ राउरकेला में मो बस सेवा का शुभारंभ किया जायेगानियमित विमान सेवा के साथ राउरकेला स्थित हवाई अड्डे को चालू किया जायेगाएबीएन सेंट्रल डेस्क। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में शुक्रवार शाम को राज्य मंत्री परिषद की बैठक में आगामी विश्वकप हॉकी प्रतियोगिता की तैयारियों के बारे में समीक्षा की गई। पुरुष विश्वकप हॉकी प्रतियोगिता-2023 भुवनेश्वर व राउरकेला से 13 से 29 जनवरी तक खेला जायेगा। इस प्रतियोगिता में 16 देशों की टीमें भाग लेंगी। भुवनेश्वर में 24 मैच खेले जायेंगे, जबकि राउरकेला में 20 मैच खेले जायेंगे।बैठक में राज्य के मुख्य सचिव सुरेश चंद्र महापात्र ने मंत्री परिषद के सदस्यों को विश्वकप आयोजन को लेकर हो रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए भुवनेश्वर स्थित कलिंग हॉकी स्टेडियम पूर्ण रूप से तैयार है, जबकि राउरकेला स्थित बिरसा मुंडा स्टेडियम का कार्य नवंबर माह तक समाप्त होगा। दोनों स्टेडियमों में एस्ट्रो टर्फ व फ्लड लाइट का काम पूरा हो चुका है। भाग लेने वाली टीमें व मैच ऑफिसियल्स के लिए 225 रूम के निर्माण का काम चल रहा है और यह काम नवंबर माह के अंत तक समाप्त होगा।कटक के बारबाटी स्टेडियम समेत पांच म्युनिसिपल कारपोरेशन में हाकी विश्वकप के दौरान उत्सव मनाया जायेगा। ओडिशा के अधिकांश जिले समेत पूरे देश में हॉकी विश्वकप की ट्राफी का प्रदर्शन यात्रा निकाली जायेगी। जिले स्तर पर खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विकास के लिए विभिन्न प्रकार के उत्सवों का आयोजन होगा।इस प्रतियोगिता का आयोजन होने वाले दो शहर भुवनेश्वर व राउरकेला का सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। सभी विभाग आपसी समन्वय से यह कार्य कर रहे हैं। राउरकेला हवाई अड्डे से नियमित सेवा प्रारभ होगी। इसके साथ खिलाड़ी व मैच ऑफिसियल के यातायात के लिए चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था की जा रही है। इस अवसर पर राउरकेला शहर में सौ बसों के साथ मो बस सेवा का शुभारभ होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जिले के बोधघाट पुलिस को सूचना मिली कि किसी महिला के द्वारा कुम्हारपारा जगदलपुर में अवैध गांजा विक्रय किया जा रहा है। सूचना पर थाना बोधघाट पुलिस की टीम कुम्हारपारा में दबिश देकर कमला विमल उर्फ काचखायी को गिरफ्तार कर तलाशी लेने पर उसके पास प्लास्टिक बोरी में अवैध रूप से रखे सात किलो 500 ग्राम गांजा के साथ नगद रुपये 780 बरामद किया गया। आरोपित के विरुद्ध धारा 20 (ख) एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर कार्रवाई के उपरांत शुक्रवार को जेल दाखिल किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय किसान यूनियन ने 24 नवंबर को रेलवे ट्रैक जाम करने का कार्यक्रम बदलकर चंडीगढ़-दिल्ली मुख्य मार्ग पर जाम लगाने का ऐलान किया है।भारतीय किसान यूनियन चढूनी के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने गुरुवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि 24 नवंबर को अंबाला में रेलवे ट्रैक जाम करने की चेतावनी के बाद केंद्र सरकार व रेलवे पुलिस ने किसान आंदोलन के दौरान हुए 24 सितंबर 2020 के बाद के सभी मुकदमे वापस लेने का आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके बाद भारतीय किसान यूनियन चढूनी की कोर कमेटी ने फैसला लिया है कि अब 24 तारीख के पूर्व घोषित प्रोग्राम के अनुसार रेलवे ट्रैक नहीं रोका जायेगा।उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ हरियाणा सरकार ने अभी तक अपने वादे अनुसार सभी केस वापस नहीं लिए हैं। आंदोलन के दौरान हरियाणा में बने बहुत से मुकदमे अभी तक अदालतों में लंबित हैं। सरकार द्वारा ज्यादातर केसों को रद्द करने की सिफारिश किए जाने के बावजूद भारी संख्या में केस अदालतों में विचाराधीन हैं। जिस कारण से बहुत से लोगों के असलहा लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और पासपोर्ट नहीं बनाए जा रहे हैं। कई केस ऐसे हैं जिनको वापस लेने की प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई है।चढूनी ने बताया कि करीब 32 से अधिक मुकदमे आंदोलन के पहले के ऐसे हैं जो आंदोलन के समझौते के दौरान वादा करने के बावजूद भी वापस नहीं हुए हैं। चढूनी ने गृहमंत्री विज के बयान को खारिज करते हुए कहा कि सरकार केस वापस न लेकर उनको अनट्रेस दिखा रही है। कानूनन अनट्रेस केस को कभी भी खोला जा सकता है। बहुत से केस नामजद हैं। ऐसे में नामजद केस को अनट्रेस नहीं किया जा सकता, इसलिए किसान यूनियन की सरकार से मांग है कि सभी केसों को वापस लेने की करवाई की जाये।चढूनी ने चेतावनी दी है कि अगर 24 तारीख तक हरियाणा सरकार किसानों से किए वादे अनुसार उक्त सभी केसों का निपटारा नहीं करती तो 24 नवंबर को जिला अंबाला मोहड़ा अनाज मंडी के सामने जहां से पिछले साल दिल्ली कूच के लिए बैरिकेड तोड़ने की शुरुआत की थी, वहां पर जीटी रोड को जाम कर दिया जायेगा। अगर 24 तारीख तक सभी मामलों का निपटारा कर दिया जाता है तो किसान अपना आंदोलन नहीं करेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के मप्र में आने से पहले ही यहां की राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। यात्रा के आने से पहले प्रदेश की राजनीति का पारा गर्मा गया है। यात्रा को लेकर सत्ता पक्ष भाजपा और विपक्षी कांग्रेस एक दूसरे के खिलाफ आक्रामक हो गए हैं और जमकर बयानबाजी कर रहे हैं। वहीं अब कांग्रेस ने भाजपा के बयानों पर पलटवार करते हुए झूठे बयान देने का आरोप लगाया है। कांग्रेस मीडिया विभाग की तरफ से बयान जारी कर भाजपा पर हमला बोला है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने गुरुवार को कहा है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की सफलता से भारतीय जनता पार्टी बुरी तरह बौखला गई है। मध्यप्रदेश में यात्रा से पहले ही पूरी भारतीय जनता पार्टी और शिवराज सिंह चौहान सरकार यात्रा से ध्यान भटकाने के लिए झूठे बयान जारी कर रही है। मिश्रा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के मानसिक पतन की यह अवस्था हो गई है कि कमलनाथ जी के जन्मदिन के आयोजनों तक को विवाद पर लाने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने सभी मर्यादा तोड़ते हुए यहां तक बयान दे दिया मंदिर काटा गया है। राजनीतिक स्वार्थ के लिए भगवान के विषय में रहता निंदनीय झूठ बोलना बहुत शर्म की बात है। सभी को यह विदित होना चाहिए कि वहां केक काटा गया था और थमार्कोल से बनी मंदिर की प्रतिकृति अलग से रखी हुई थी। इसलिए मुख्यमंत्री का मंदिर काटने का बयान न सिर्फ हिंदू धर्म का अपमान है बल्कि झूठ फैलाने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इसी तरह ही एक अन्य बयान में मुख्यमंत्री ने खाद की जमाखोरी करने वाले और किसानों का उत्पीड़न करने वाले जमाखोरों का पक्ष लिया है। यह बताता है कि खुद को किसान का बेटा कहने वाले मुख्यमंत्री किसान विरोधी हो चुके हैं। मिश्रा ने कहा कि पूर्व सीएम कमलनाथ ने पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से यह आग्रह किया कि वे संविधान और कानून के मुताबिक कार्य करें तो इस बार का मुख्यमंत्री और फैलाने में लग गए हैं। क्या मुख्यमंत्री यह कहना चाहते हैं कि अधिकारियों को संविधान के खिलाफ काम करना चाहिए। केके मिश्रा ने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग यह स्पष्ट करना चाहता है भारतीय जनता पार्टी जिस तरह से झूठ प्रचार कर रही है वह राजनीति का स्तर गिराने वाला है। 100 बार झूठ बोलने से वह सच नहीं बन जाता। राहुल गांधी की यात्रा मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक असर छोड़ेगी और भाजपा का झूठ ध्वस्त हो जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भाजपा ने अपनी इस पहली सूची में 38 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सरकार में मंत्री रहे छह नेताओं को भी टिकट नहीं मिला है। इस सूची में हार्दिक पटेल सहित कम से कम 30 पाटीदार नेताओं को टिकट दिया गया है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते 9 नेताओं को भी भाजपा ने टिकट दिया है। इसी सप्ताह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए दो विधायकों को भी टिकट मिल गया है। गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से 160 के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। गुरुवार को जारी उम्मीदवारों की इस सूची में कई नाम चौंकाने वाले हैं। इन 160 उम्मीदवारों में पार्टी ने बाहर से आए अच्छे खासे नामों को शामिल किया है। पार्टी ने कांग्रेस पार्टी में बगावत कर कमल का साथ थामने वाले नेताओं को निराश नहीं किया है। युवा चेहरे हार्दिक पटेल सहित कांग्रेस के 17 बागियों को टिकट थमाया गया है। भाजपा ने अपनी इस पहली सूची में 38 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सरकार में मंत्री रहे छह नेताओं को भी टिकट नहीं मिला है। इस सूची में हार्दिक पटेल सहित कम से कम 30 पाटीदार नेताओं को टिकट दिया गया है। इसमें सबसे मजेदार बात है कांग्रेस से आए नेताओं को प्राथमिकता। पार्टी ने बीते पांच साल के भीतर हाथ का साथ छोड़कर आए 17 नेताओं को टिकट थमाया है। इनमें से नौ ऐसे नेता हैं जो 2017 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। कांग्रेस में प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष रहे हार्दिक पटेल ने पिछले दिनों भाजपा का दामन थाम लिया था। वह अब अपना पहला चुनाव विरामगम से लड़ रहे हैं। इसके अलावा पाटीदार समुदाय के ही रमेश तिलारा दक्षिणी राजकोट से चुनाव लड़ेंगे। यहां एक मजेदार बात है। रमेश तिलारा श्री खोदालधाम ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं और इसी ट्रस्ट के प्रमुख हैं नरेश पटेल। नरेश पटेल का नाम पिछले दिनों गुजरात की राजनीति में खूब छाया हुआ था। वह एक चर्चित उद्योगपति हैं। उन्हें सभी दलों ने अपने खेमे में लाने की कोशिश की थी। वैसे इसी ट्रस्ट के सूरत के संयोजक धार्मिक मालवीय सूरत से ही आप के टिकट पर मैदान में हैं। हार्दिक के अलावा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए जवाहर चावड़ा को मावादार से टिकट दिया गया है। भाजपा ने पूर्व सीएम विजय रूपाणी की राजकोट वेस्ट सीट से डॉ। दर्शिता शाह को उतारा है। वहीं नितिन पटेल की मेहसाणा सीट से मुकेश द्वारका दास को मैदान में उतारा गया है। 2017 में कांग्रेस से भाजपा में आए अमूल डेयरी के चेयरमैन रामसिंह परमार के बेटे योगेंद्र को थसरा से टिकट दिया गया है। इसी साल मई महीने में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले विधायक अश्विनी कोटवाल को खेदब्रह्मा एसटी सीट से टिकट मिला है। कुछ ही दिन पहले कांग्रेस से भाजपा में आए जाने माने आदिवासी नेता राजेंद्रसिंह रखावा को उनके पिता की सीट से मैदान में उतारा गया है। इसी तरह बुधवार को कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले अहीर समुदाय के नेता भगवान बराड़ को तलाला से मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस से भाजपा में आकर टिकट पाने वालों की सूची में हर्शद रिबाडिया, मनिलाल वाघेला और बलवंत सिंह राजपूत के भी नाम हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने अवैध मतांतरण पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय की चिंता से सहमति व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से अवैध मतान्तरण को रोकने के लिए शीघ्र ही केंद्रीय कानून बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न घटनाओं और इस विषय पर गठित आयोगों का यही निष्कर्ष है कि अवैध मतांतरण धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर इसे नहीं रोका गया तो देश के लिए खतरनाक स्थिति निर्माण हो जायेगी। डॉ जैन ने कहा कि माननीय न्यायपालिका ने पहले भी कई मामलों में अवैध मतांतरण पर केंद्रीय कानून बनाने की आवश्यकता पर बल दिया था। बार-बार यह स्पष्ट हो गया है कि जबरन, धोखे से व लालच से किया गया मतांतरण अवैध है परंतु स्पष्ट कानून के अभाव में षड्यंत्रकारियों को सजा नहीं मिल पाती थी।विश्व हिंदू परिषद व भारत के संतों-महापुरुषों का हमेशा से ही यह मत रहा है कि अवैध मतांतरण को रोकना चाहिए। इसके लिए कई महापुरुषों और संगठनों ने निरंतर संघर्ष किए हैं और बलिदान भी दिये हैं। मिशनरियों से जनजातियों की रक्षा के लिए भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष और बलिदान अविस्मरणीय है। सिक्ख गुरुओं, स्वामी श्रद्धानंद, स्वामी लक्ष्मणानन्द आदि कई महापुरुषों ने मतांतरण को रोकने के लिए ही अपने बलिदान दिये थे। विहिप ने इस विषय पर कई बार प्रस्ताव भी पारित किये हैं।उन्होंने कहा कि पिछले दिनों के कई उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि अवैध मतांतरण के कारण राष्ट्र का अस्तित्व और सुरक्षा खतरे में पड़ी है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश का तो निर्माण ही मतांतरण के कारण हुआ था। कश्मीर, पूर्वोत्तर, बंगाल और केरल के कई जिलों में हिंदुओं की दुर्दशा के पीछे भी अवैध मतांतरण ही दोषी है। श्रद्धा, निकिता जैसी सैकड़ों लड़कियों की वीभत्स और बर्बर हत्या के पीछे भी मूल कारण मतांतरण ही है। इस काम के लिए विदेशी शक्तियों के समर्थन से भारत में कई राष्ट्रविरोधी शक्तियां सक्रिय हैं। कई बार तो मासूम व विकलांग बच्चों का भी मतांतरण करने वाले माफिया पकड़े गये हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इन मासूम बच्चों को मानव बम के रूप में प्रयोग करने की आशंका भी व्यक्त की है। अवैध मतांतरण केवल राष्ट्रीय सुरक्षा ही नहीं सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरा निर्माण करता है। स्वतंत्रता के बाद अवैध मतांतरण पर बनाये गये सभी आयोगों का यह स्पष्ट अभिमत है कि इसे रोकने के लिए केंद्रीय कानून अवश्य बनाना चाहिए।डॉ जैन ने कहा कि इस समय भारत के 8 राज्यों में अवैध मतांतरण को रोकने के लिए कानून की व्यवस्था की गई है। परंतु यह समस्या राष्ट्रव्यापी है जिसके पीछे अंतराष्ट्रीय षडयंत्रकारी शक्तियां सक्रियता से काम कर रही हैं। इनके द्वारा भेजी जा रही अकूत धनराशि के कई बार प्रमाण भी मिले हैं। पूर्वोत्तर व पूर्वी राज्यों में मिशनरी और देशभर में पीएफआई की गतिविधियों से यह स्पष्ट हो गया है कि मतांतरण के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा भी खतरे में पड़ती रही है। इसके बाबजूद वोट बैंक की राजनीति के चलते कुछ राजनीतिक दल इसका विरोध करते हैं जबकि पहले वही राजनीतिक दल अपने शासित राज्यों में यह कानून लेकर आए थे। इससे स्पष्ट होता है की ये राजनीतिक दल अपने निहित स्वार्थ के कारण अपने शासन वाले राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून नहीं लाने वाले। आज के समय में अवैध मतांतरण की समस्या एक भीषण रूप धारण कर चुकी है। अवैध मतांतरण के इस भीषण स्वरूप को देखकर यह स्पष्ट होता है कि केवल कुछ राज्यों में कानून बनाने से इस राष्ट्र विरोधी और समाज विरोधी षडयंत्र को नही रोका जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि यह आज के समय की आवश्यकता है कि केंद्रीय कानून अविलंब लाना चाहिए जिससे भारत को अवैध मतांतरण की समस्या से मुक्ति दिलाई जा सके।
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