एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत की अग्रणी कम्युनिकेशन्स सर्विस प्रोवाइडर भारती एयरटेल (एयरटेल), ने आज घोषणा की कि ओडिशा सरकार और टाटा पावर के बीच एक संयुक्त उद्यम टीपी वेस्टर्न ओडिशा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडब्ल्यूओडीएल) ने उसे सेलुलर आईओटी (इंटरनेट आॅफ थिंग) समाधान प्रदान करने के लिए चुना है। इस अनुबंध के हिस्से के रूप में, एयरटेल 200,000 स्मार्ट मीटर्स के लिए आईओटी समाधान प्रदान करेगा, जिनमें से 70,000 पहले चरण में वितरित किए जायेंगे।एयरटेल आईओटी प्लेटफॉर्म का प्रोपराइटरी सॉल्यूशन एयरटेल आईओटी हब, बेहद उच्च विश्वसनीयता और टेल्को-ग्रेड सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्नत एनालिटिक्स के साथ इन स्मार्ट मीटरों की ट्रैकिंग व निगरानी करने में सहायता कर कनेक्टिविटी आवश्यकता को पूरा करेगा। स्मार्ट मीटरिंग भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेलुलर आईओटी उपयोगों में से एक है, जिसमें कई विद्युत वितरण कंपनियां राजस्व की हानि को रोकने के लिए निवेश की योजना बना रही हैं।एयरटेल के आईओटी बिजनेस पोर्टफोलियो में सबसे तेजी से बढ़ते सर्विस सेक्टर्स में से एक स्मार्ट मीटरिंग है। कंपनी, पंजाब, मेघालय, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों के साथ कई उपयोगिताओं के साथ काम कर रही है। एडवांस मीटरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) पहल के रूप में, भारत सरकार की अगले पांच वर्षों के भीतर 300 मिलियन पारंपरिक मीटर को स्मार्ट मीटर से बदलने के लिए एक बड़ी महत्वाकांक्षी योजना है। अपनी विशिष्ट क्षमताओं के साथ, एयरटेल आईओटी का लक्ष्य सरकार के इस दृष्टिकोण को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। स्मार्ट मीटर जैसे नवाचार बिजली क्षेत्र के डिजिटीकरण के रूप में प्रचलन में आ जायेंगे, जिससे इस क्षेत्र में पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल उपायों को लागू करने में भारत सरकार के प्रयासों से मदद मिलेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में बीती आधी रात को भूकंप के हल्के झटके महससू हुए। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने की वजह से कहीं से भी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप का केंद्र चंबा जिला की चुराह तहसील के धारम्कन में जमीन की सतह से पांच किलोमीटर नीचे दर्ज किया गया।मौसम विज्ञान केंद्र शिमला से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात्रि 12 बजकर 38 मिनट पर आए भूकंप की तीव्रता रियेक्टर स्केल पर 3.4 रही। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि यह कम तीव्रता का भूकंप था और इससे जिले व आसपास के क्षेत्रों में कोई नुकसान नहीं हुआ है।बता दें कि चंबा जिला में इससे पहले भी कई मर्तबा भूकंप के झटके लग चुके हैं। पहाड़ी राज्य हिमाचल भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील जोन चार व पांच में आता है। वर्ष 1905 में चंबा और कांगड़ा जिलों में आये भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी और करीब 10 हजार लोग मारे गये थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 275 नये मामले सामने आये, जिसके बाद उपचाराधीन मरीजों की संख्या कम होकर 4,672 पर पहुंच गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अद्यतन किये गये आंकड़ों में इसकी जानकारी दी गयी है। इसमें कहा गया है कि देश भर में कोविड के कुल मामलों की संख्या 4.46 करोड़ हो गयी है।शुक्रवार की सुबह आठ बजे अद्यतन किये गये आंकड़ों में कहा गया है कि पिछले 24 घंटों में छत्तीसगढ़ से एक संक्रमित की मौत और केरल द्वारा आंकड़ों के पुनर्मिलान के दौरान एक और मौत की महामारी से पुष्टि करने के बाद इससे मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर 5,30,624 हो गयी है।मंत्रालय के अनुसार देश में अब संक्रमितों की तुलना में उपचाराधीन मरीजों की दर 0.01 फीसदी है जबकि देशभर में संक्रमण मुक्त होने की दर बढ़ कर 98.80 हो गयी है। आंकड़ों में कहा गया है कि पिछले 24 घंटे में उपराचाधीन मरीजों की संख्या में 95 की कमी दर्ज की गयी है। इसमें कहा गया है कि संक्रमण मुक्त होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,41,37,617 हो गयी है, जबकि मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। मंत्रालय के वेबसाइट के अनुसार कोरोना वायरस रोधी टीकों की 219.93 करोड़ खुराक अब तक दी जा चुकी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कोरोना महामारी के बाद खसरे का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। बीएमसी के स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार गुरुवार को महानगर में खसरे के 23 नये मामले सामने आये हैं। हालांकि, इस महामारी से आज एक भी मृत्यु दर्ज नहीं की गयी है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को मुंबई के अस्पतालों में 45 नये खसरे के मरीज भर्ती हुए और सर्वेक्षण के दौरान लगभग 83 संदिग्ध खसरे के मामले पाये गये। 24 नागरिक वार्डों में 37 खसरे का प्रकोप हुआ है। बीएमसी ने कहा कि बुखार के सभी मामलों में विटामिन-ए की दो खुराक दी जाती हैं। दूसरी खुराक 24 घंटे के बाद दी जाती है। बता दें कि मुंबई में खसरे से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है।
लैंसेट रिपोर्ट का दावा : भारत में इलाज में भी लैंगिक भेदभाव, क्योंकि लड़कों की जांच ज्यादाएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में कैंसर जैसी घातक बीमारी की जांच में भी लैंगिक भेदभाव हो रहा है, यह दावा नई लैंसेट आॅन्कोलॉजी रिपोर्ट में किया गया है। इसके अनुसार लड़कों में कैंसर के ज्यादा मामले मिल रहे हैं क्योंकि उनकी जांच लड़कियों से ज्यादा हो रही है। अध्ययन में साल 2005 से 2019 तक 0 से 19 वर्ष उम्र के बच्चों में प्रमुख अस्पतालों व जनगणना आधारित कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) में मिले कैंसर के मामलों का विश्लेषण किया गया।रिपोर्ट में दिल्ली एम्स व चेन्नई के कैंसर इंस्टीट्यूट के अध्ययनकर्ताओं ने कैंसर रोगियों के लैंगिक अनुपात व अन्य तथ्यों की गणना की। एम्स दिल्ली के मेडिकल आॅन्कोलॉजी विभाग के प्रो. समीर बख्शी ने बताया कि पीबीसीआर में दर्ज कैंसर के 11,000 मरीजों में लड़कों की संख्या अधिक मिली। अस्पतालों में इलाज ले रहे 22 हजार कैंसर रोगियों में भी लड़के ज्यादा थे।यह दिखाता है कि कैंसर के लक्षण मिलने पर जांच के लिए लड़कियों को कम लाया जा रहा है। खासतौर से उत्तर भारत में, जहां समाज ज्यादा पितृसत्तात्मक है। रिपोर्ट के अनुसार हमें कैंसर की जांच व इलाज में लैंगिक भेदभाव हो रहा है, यह मानना होगा। इसे दूर करने के लिए लोगों को बताना होगा कि समय रहते कैंसर का पता चलने पर रोग का बेहतर इलाज होता है। इलाज का खर्च भी घटाना होगा। लड़कियों के इलाज के लिए विशेष योजनाएं लाई जा सकती हैं। उन्हें निशुल्क इलाज मिले, तो भेदभाव घटाने में मदद मिल सकती है।ग्रामीण इलाकों में कम जांच उत्तर भारत में कैंसर का इलाज करा रही लड़कियों की संख्या दक्षिण भारत के मुकाबले कम।ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों में शहरों के मुकाबले लैंगिक भेदभाव ज्यादा।अस्पताल 100 किमी से ज्यादा दूर है, तब भी इलाज लेने वाली लड़कियों की संख्या घट जाती है।इलाज प्राइवेट व महंगे संस्थानों से करवाना हो, तब भी लड़कियों की संख्या कम हो जाती है।इलाज में खत्म होता है भेद प्रो बख्शी के अनुसार कैंसर का पता चलने के बाद यह लैंगिक भेदभाव मिट जाता है। यह बताता है कि भेदभाव केवल सामाजिक वजहों से है, चिकित्सा संस्थानों या नीतिगत वजहों से नहीं।
लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर होगा प्रदर्शन देश के कोने कोने से दिल्ली आयेंगे लाखों किसान टीम एबीएन, रांची। देश में खाद्यान्न की सुरक्षा के साथ किसानों की सुरक्षा भी अति आवश्यक है। किसानों ने भरपूर उत्पादन कर देश की खाद्यान सुरक्षा सुनिश्चित की है। किंतु अभी तक किसान की हालत जस की तस है। उक्त विचार भारतीय किसान संघ के द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में रखते भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि भारतीय किसान संघ का नारा रहा है कि देश के हम भंडार भरेंगे लेकिन कीमत पूरी लेंगे। आज देश खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बन चुका है, हम विदेशों में खाद्यान्न निर्यात कर रहे हैं। लेकिन किसान जो फसल उगाता है, कड़ी मेहनत के बावजूद उसको अपनी उपज का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य अभी तक नहीं मिल रहा है। इसलिए किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ 19 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान गर्जना रैली आयोजित कर रहा है। देशभर में भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता सभी प्रांतों में ग्राम संपर्क, धरना, सभा पदयात्रा जैसे कार्यक्रमों से जनजागरण को करते हुए दिनांक 19 दिसंबर 2022 को दिल्ली में लाखों की संख्या में किसान गर्जना रैली में शामिल होंगे। प्रमुख मागें : लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिया जाये। कृषि आदानों पर जीएसटी समाप्त किया जाये। किसान सम्मान निधि की राशि में पर्याप्त बढ़ोतरी की जाये। जीएम.सरसों को अनुमति न दी जाए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नक्सलियों के लिए दैनिक सामग्री पहुंचाना, अवैध वसूली करना, बैनर पोस्टर लगाकर क्षेत्र में दहशत फैलाना और मोबाइल टॉवर में आगजनी की घटना में शामिल आरोपित सुरेश कुमार साहू को कोयलीबेड़ा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। नक्सली संगठन के साथ मिलकर आरोपित घटना को लगातार अंजाम भी दे रहा था। आरोपित को बुधवार को न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल किया गया है।पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कोयलीबेड़ा पुलिस व डीआरजी बल ने 28 नवंबर को मरकानार जंगल के पास एक व्यक्ति को देखकर संदेहास्पद स्थिति में घेराबंदी कर पकड़ा। पूछताछ में उसने अपना नाम सुरेश कुमार साहू पिता स्व बाबूलाल साहू उम्र 34 वर्ष निवासी चिलपरस थाना कोयलीबेड़ा का रहने वाला बताया। जिसकी तलाश लेने पर उसके पास से नक्सली सामान बरामद किया गया। क्षेत्र में चलने वाले प्रत्येक ट्रेक्टर से सालाना छह हजार रुपये की दर से अवैध वसूली कर बड़े लीडर को देने का कार्य करता है। आज न्यायालय में पेशकर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिजली मंत्रालय ने बयान में कहा कि बिजली (विलम्ब भुगतान अधिभार एवं संबद्ध मामले) नियम, 2022 के क्रियान्वयन के साथ डिस्कॉम के आपूर्तिकर्ताओं (बिजली उत्पादक, पारेषण कंपनियों और व्यापारियों) के बकाया में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। बयान में कहा गया है कि डिस्कॉम पर कुल बकाया तीन जून, 2022 को 1,37,949 करोड़ रुपये था। चार मासिक किस्तों (ईएमआई) के समय पर भुगतान से यह 24,680 करोड़ रुपये घटकर 1,13,269 करोड़ रुपये रह गया है। पांच राज्यों ने 24,680 करोड़ रुपये की ईएमआई के भुगतान के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और आरईसी लि. से 16,812 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है जबकि आठ अन्य राज्यों ने इसके लिए अपनी खुद व्यवस्था की है।वितरण कंपनियां भी अपने मौजूदा बकाया का समय पर भुगतान कर रही हैं, जिसने वे नियमन के तहत नहीं आयें। वितरण कंपनियों ने पिछले पांच माह में मौजूदा बकाया के करीब 1,68,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अभी सिर्फ एक कंपनी जेबीवीएनएल ने मौजूदा बकाया का भुगतान नहीं करने की वजह से नियमन के तहत आयी है।बयान के अनुसार अबतक जो परिणाम आये हैं, उसको देखते हुए यह उम्मीद है कि विलम्ब भुगतान अधिभार नियम के कड़ाई से क्रियान्वयन से बिजली क्षेत्र को वित्तीय रूप से व्यवहारिक बनाने में मदद मिलेगी। इससे 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये निवेशक निवेश के लिये आकर्षित होंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के कृषि विभाग ने राज्य में खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गेहूं की दो अधिक उपज देने वाली किस्में डीबीडब्ल्यू 222 और डीबीडब्ल्यू 187 पेश की हैं। अधिक उपज देने वाली गेहूं की किस्में डीबीडब्ल्यू 222 और डीबीडब्ल्यू 187, मौजूदा किस्मों के 35-37 प्रति क्विंटल की तुलना में 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज देती हैं। हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग के संबंधित मामले के विशेषज्ञ राजीव मिन्हास ने कहा कि इन दो किस्मों के लगभग 23,000 क्विंटल बीज 50 प्रतिशत सब्सिडी पर किसानों को दिये गये हैं। मिन्हास ने कहा कि डीबीडब्ल्यू 222 (करण नरेंद्र) में उच्च जंग प्रतिरोध और सहनशीलता है और बुवाई के समय अनुकूलन के अलावा बेहतर कृषि संबंधी विशेषताएं हैं, जबकि डीबीडब्ल्यू 187 (करण वंदना) प्रोटीन और आयरन से भरपूर है। कृषि निदेशक बी आर ताखी ने कहा कि कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और सिरमौर जिलों की निचली पहाड़ियों में नई किस्मों को समय पर (15 अक्टूबर से 15 नवंबर) बोया गया है क्योंकि बारिश ने मिट्टी में आवश्यक नमी पैदा की और वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी गेहूं की समय पर बुआई का मार्ग प्रशस्त किया।प्रदेश में 3.30 लाख हेक्टेयर में गेहूं का उत्पादन हो रहा है और उत्पादन का लक्ष्य 6.17 लाख टन का है। गेहूं, धान, मक्का, जौ और तिलहन मुख्य खाद्यान्न हैं। खाद्यान्नों के अलावा आलू, सब्जियां और अदरक राज्य की मुख्य व्यावसायिक फसलें हैं और सब्जियों के तहत 82,000 हेक्टेयर क्षेत्र, आलू के तहत 15.10 हजार हेक्टेयर और अदरक (हरा) के तहत तीन हजार हेक्टेयर का खेत रकबा प्रस्तावित है।कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि किसान अधिक लाभ प्राप्ति और सब्जियों की अधिक उपज और विदेशी किस्मों को उगाने के लिए वाणिज्यिक फसलों में विविधता ला रहे हैं। सेब उत्पादन के लिए जाना जाने वाला हिमाचल अब एक सब्जी के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। वर्ष 2022-23 में सब्जी, आलू एवं अदरक (हरा) का उत्पादन लक्ष्य क्रमश: 1,759 हजार टन, 195 हजार टन एवं 34 हजार टन निर्धारित किया गया है। राज्य में सब्जियों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है और इसका उत्पादन पहले ही राज्य में खाद्यान्न उत्पादन को पार कर चुका है।
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