पीएम मोदी ने "सदैव अटल" पहुंचकर अटल बिहारी वाजपेयी को दी श्रद्धांजलिएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री "भारत रत्न" अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि भारत के लिए उनका योगदान अमिट है। पीएम मोदी ने "सदैव अटल" पहुंचकर अटल बिहारी वाजपेयी को दी श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के तमाम नेताओं ने भी "सदैव अटल" पहुंचकर अटल बिहारी वाजपेयी को दी श्रद्धांजलि दी। वहीं पीएम मोदी ने ट्वीट किया, अटल जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि...। भारत के लिए उनका योगदान अमिट है। उनका नेतृत्व और दृष्टिकोण लाखों लोगों को प्रेरित करता है। साल 1924 में आज ही के दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था। वह भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में एक थे। वह तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। उनका पहला कार्यकाल 1996 में मात्र 13 दिनों का था। इसके बाद, वह 1998 में फिर प्रधानमंत्री बने और 13 महीने तक इस पद को संभाला। वर्ष 1999 में वह तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया।
बलराम पाण्डेयएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय नौसेना के लिए पिछले कुछ सप्ताह काफी गतिविधियों वाले रहे हैं। नौसेना ने कुछ दिन पहले ही 7,400 टन वजन वाले आईएनएस मोरमुगाओ को अपने बेड़े में शामिल किया है। तीन महीने पहले प्रधानमंत्री ने 45,000 टन वजन वाले देश में ही निर्मित विमान वाहक युद्धपोत को भी नौसेना के बेड़े में शामिल किया था। नौसेना दूसरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएन अरिघात को भी अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि इसे शामिल करने की आधिकारिक तिथि गुप्त रखी गई है। इस बीच, 5वीं स्कॉर्पीन पनडुब्बी आईएनएस वागिर नौसेना को सौंप दी गयी है। अगले साल फ्रिगेट की नयी श्रेणी के साथ इसे सेवा में शामिल किया जायेगा।यह पहली बार है जब नौसेना को इतने कम समय में इतने छोटे-बड़े जहाज एवं पनडुब्बियां मिले हैं। वर्ष 2021 भी नौसेना के लिए काफी हलचल भरा रहा था जब उसके बेड़े में 2 स्कॉर्पीन पनडुब्बियां और एक डिस्ट्रॉयर शामिल किए गए थे। इन गतिविधियों से तो यही लग रहा है कि नौसेना के बेड़े का विस्तार करने की प्रक्रिया अब जोर पकड़ रही है और कुछ मायनों में यह सही भी है। हालांकि हमें दीर्घ अवधि के स्वरूप पर भी विचार करना चाहिए। वर्ष 2021 और 2022 की तुलना में 2019 और 2020 में नौसेना के बेड़े में केवल एक पनडुब्बी और और एक कॉर्वेट शामिल किये गये थे। वर्ष 2018 में बेड़े के विस्तार में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई थी। अगर 2011 से रुझान की बात करें तो सालाना औसतन दो बड़े युद्धपोत नौसेना के बेड़े में शामिल किये जा रहे हैं।एक दशक पहले की तुलना में प्रगति जरूर हुई है मगर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रत्येक युद्धपोत के निर्माण में काफी अधिक समय लग जाता है। एक डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट या कॉर्वेट के निर्माण में सात से नौ वर्षों का समय लग रहा है। चीन की तुलना में भारत में इनके निर्माण में दोगुना समय लग जाता है। हालत यह है कि सेवा में शामिल किए जाने के समय लंबी दूरी तक मार कर सकने वाली एयर-डिफेंस मिसाइल, तारपीडो, ऐंटी-सबमरीन हेलीकॉप्टर और विमानवाहक पोत के विमान तक तैनात नहीं हो पाते हैं। सोवियत संघ से खरीदे गए विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के साथ यही हुआ जो 2013 में नौसेना में शामिल हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के किसी भी विमानवाहक पोत पर पिछले दो वर्षों में एक भी विमान नहीं उतरा है। हालांकि इन तमाम खामियों के बावजूद यह कहा जा सकता है कि भारत धीरे-धीरे अपनी नौसेना को धार दे रहा है। आने वाले समय में नौसेना में 6,600 टन के सात फ्रिगेट शामिल किए जायेंगे।अब नई निर्माण तकनीक के जरिेये युद्धपोतों के निर्माण में दो साल कम लगेंगे। मझगांव डॉक्स डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट का निर्माण करने वाली प्रमुख कंपनी है, मगर गार्डन रीच शिपबिल्डर्स ऐंड इंजीनियर्स, कोचीन शिपयार्ड और गोवा शिपयार्ड सभी बड़े और उच्च तकनीक वाले युद्धपोत बनाने में सक्षम हैं। इसी तरह विशाखापत्तनम में परमाणु पनडुब्बी निर्माण परिसर है। लार्सन ऐंड टुब्रो ने भी चेन्नई के निकट शिप डिजाइन एवं यार्ड सुविधा विकसित की है। हालांकि तब भी युद्धपोत एवं सेना के लिए साजो-सामान बनाने में भारत चीन से मुकाबला करने की स्थिति में नहीं दिख रहा है। चीन ने कुछ महीनों पहले तीसरा विमानवाहक युद्धपोत अपनी नौसेना के बेड़े में शामिल किया था। इस युद्धपोत का आकार भारत के दोनों युद्धपोतों के संयुक्त आकार से भी बड़ा है। इसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिसकी मदद से कम समय अंतराल पर लड़ाकू विमान अधिक ईंधन और घातक हथियारों के साथ उड़ान भर पायेंगे।काफी कम समय में सक्षम कई डिस्ट्रॉयर बनाने के बाद चीन समुद्र में खतरनाक ड्रोन और मानव रहित युद्धपोतों के साथ युद्ध की तैयारी में जुट गया है। ये ड्रोन और मानव रहित युद्धपोत सामान्य युद्धपोतों के साथ मिलकर हमले करने की भी खासियत रखते हैं। चीन हिंद महासागर में नौसैनिक अड्डे के साथ कई सुविधाएं तैयार कर रहा है। भारत की नौसेना को जल्द ही हिंद महासागर में चीन से कड़ी चुनौती मिलने वाली है। भारत का रक्षा बजट सीमित है, इसलिए युद्धपोतों आदि के निर्माण के लिए बहुत ऑर्डर नहीं आ पा रहे हैं। हालांकि छोटे युद्धपोतों के लिए जरूर कई ऑर्डर मिले हैं।भारत की नौसेना में पनडुब्बियों के बेड़े का आकार छोटा है और इनमें ज्यादातर जहाज 1980 के दशक के हैं। मझगांव डॉक्स छठी और अंतिम स्कॉर्पीन पनडुब्बी तैयार कर रही है और इसके बाद उसके पास फिलहाल कोई ऑर्डर नहीं है। अन्य छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए ऑर्डर में देरी हो रही है क्योंकि संभावित बोलीदाताओं को इनसे जुड़ीं शर्तें स्वीकार नहीं हैं। इस बीच, रक्षा मंत्री ने हाल में यह कहकर सबको चौंका दिया कि भारत ने तीसरे विमान वाहक युद्धपोत का निर्माण शुरू कर दिया है। हालांकि इसके लिए कब ऑर्डर दिया गया इसे लेकर अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। भारी प्रतिस्पर्द्धा के कारण मलेशिया, ब्राजील और फिलिपींस से आने वाले ऑर्डर पर भी ग्रहण लग गया। इस तरह, भारत की नौसेना के सामने इस वक्त कई चुनौतियां हैं। सीमित बजट, ऑर्डर देने में देरी और इसके बाद धीमी गति से निर्माण, आपूर्ति में देरी और चीन से मिल रही चुनौती भारतीय नौसेना की परेशानी बढ़ा रहे हैं। इन विषयों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने देशवासियों को दी क्रिसमस की बधाईएबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को क्रिसमस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को बधाई दी और कहा कि यह त्योहार हमें एकदूसरे के प्रति दया और प्रेम की भावना रखने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रपति ने एक संदेश में कहा कि क्रिसमस का यह पावन त्योहार सम्पूर्ण मानव जाति के लिए शांति और भाईचारे का प्रतीक है।मुर्मू ने कहा कि इस दिन हम प्रभु यीशु मसीह के करुणा और बलिदान के संदेश को याद करते हैं। यह त्योहार हमें एकदूसरे के प्रति दया और प्रेम की भावना रखने की प्रेरणा देता है। आइये हम प्रभु यीशु मसीह के पवित्र आदर्शों व शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं सभी देशवासियों, विशेषकर ईसाई भाइयों और बहनों को क्रिसमस के त्योहार की हार्दिक बधाई देती हूं।
अब एक साल और मिलेगा 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को बैठक के बाद कई अहम फैसले किए। इसमें सैन्य बलों के लिए वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) और गरीबों के लिए फ्री राशन शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक बैठक में सैन्य बलों के लिए ओआरओपी में संशोधन कर दिया गया है। इसी के साथ सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 81.3 करोड़ गरीबों को एक साल तक मुफ्त राशन देने का फैसला किया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने बताया कि 1.7.2014 के बाद हुए सेवानिवृत्त हुए सुरक्षा कर्मियों को मिलाकर ओआरओपी के लाभार्थियों की संख्या 25,13,002 पर पहुंच गई है। 1.4.2014 से पहले यह संख्या 20,60,220 थी। इससे सरकार पर अतिरिक्त भार 8,450 करोड़ रुपए का पड़ेगा। जिन रक्षा कार्मिकों ने 1.7.2014 के बाद अपनी इच्छा से सेवानिवृत्त लिया है उन्हें यह लाभ नहीं मिलेगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 81.3 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज का वितरण एक साल तक करने का फैसला किया। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों को मुफ्त राशन देने पर करीब दो लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी, इसका बोझ केंद्र सरकार उठाएगी। केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री गोयल ने बताया कि सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट के तहत चावल तीन रुपये प्रति किलो, गेंहू दो रुपये प्रति किलो और मोटा अनाज एक रुपये प्रति किलो की दर से देती है। सरकार ने फैसला लिया है कि दिसंबर 2023 तक यह पूरी तरह से मुफ्त में मिलेगा। इससे 81.35 करोड़ लोगों को फायदा होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले पांच वर्षों में घरेलू एयरलाइनों से जुड़ी कुल 2,613 घटनाएं हुई हैं। इनमें इंडिगो शीर्ष पर रही है। उड्डयन राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।इस समय देश में 12 एयरलाइन कंपनियां इस कारोबार में हैं। इंडिगो में 2018 से 2022 तक के पांच वर्षों में 885 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 215 घटनाएं इसी साल की हैं। बता दें कि इंडिगो 270 विमानों के साथ भारतीय बाजार में सबसे बड़ी ऑपरेटर है। कांग्रेस के लोकसभा सदस्य एंटो एंटोनी ने नागर विमानन मंत्रालय से पूछा था कि क्या पुराने विमानों का इस्तेमाल तकनीकी खराबी का मुख्य कारण है, तो जनरल वीके सिंह ने कहा, तकनीकी खराबी का एकमात्र कारण पुराना विमान नहीं है। उन्होंने कहा, विमान को उड़ने योग्य माना जाता है, बशर्ते रखरखाव निर्माता द्वारा निर्धारित तय कार्यक्रम के अनुसार हो। सिंह ने कहा कि स्पाइसजेट दूसरी एयरलाइन है, जिसने पिछले पांच वर्षों में 691 तकनीकी गड़बड़ियों की जानकारी दी है। विस्तारा ने इसी दौरान ऐसी 444 घटनाओं की जानकारी दी है। टाटा के मालिकाना हक वाली एअर इंडिया ने 2018 से 2022 के दौरान 361 तकनीकी गड़बड़ियों की सूचना दी, जबकि एयर एशिया के साथ 79 और एलायंस एयर के साथ 13 घटनाएं हुईं थीं।
विवाद के बाद मौके पर तैनात की गई पुलिस फोर्सएबीएन सेंट्रल डेस्क। खुले में नमाज को लेकर विवाद एक बार फिर से गहरा गया। नमाज पढ़ रहे लोगों का विरोध करने हिंदु संगठनों के लोग पहुंच गए। विवाद बढ़ता देखकर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। जिस स्थान पर शुक्रवार को नमाज पढ़ी जा रही थी, उस स्थान की अनुमति नहीं है।यहां सेक्टर-69 स्थित सेक्टर-69 में खुले में नमाज पढ़ी जा रही थी। नमाज पढ़ने से रोकने के लिए हिंदू संगठनों के लोग पहुंचे और नमाज बंद कराने के प्रयास किए। इसी तरफ दोनों गुटों में विवाद हो गया। दोनों गुटों के बीच विवाद के देखते हुए पुलिस ने नमाज पढ़े जाने के अनुमति पत्र मांगा। नमाज पढ़ने वाला गुट पत्र नहीं दिखा सका। ऐसे में विवाद और पुलिस की मौजूदगी के चलते स्थल पर नमाज नहीं पढ़ी जा सकी। बताया जा रहा है कि जिले के बाहर के लोग भी इस स्थल पर नमाज पढ़ रहे थे, जिसे लेकर विवाद हुआ था। जिले में 6 जगहों पर ही पढ़ी जा सकती है।उल्लेखनीय है कि गुरुग्राम में खुले में नमाज को लेकर अक्सर विवाद खड़ा हो जाता है। पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से इसका हल निकालने के खूब प्रयास हुए हैं। फिर भी खुले में नमाज पर विवाद हो रहे हैं। गुरुग्राम में 30 स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति थी। विवादों के बाद यह घटकर 6 स्थान रह गयी।
महामना मालवीयजी के जन्मदिन पर विशेषश्रीमद्भागवत कथा के बड़े श्रोता थे महामना, सात दिनों तक रुकी थी मालवीयजी की बारातएबीएन सेंट्रल डेस्क। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की बारात प्रयागराज से मीरजापुर बैलगाड़ी से झूमते हुए आयी थी। प्रयागराज से बारात को सात दिन आने और सात दिन जाने में लगे थे। 1878 में नगर के बसनही बाजार स्थित इमली महादेव मोहल्ला उस पल का साक्षी रहा, जब पंडित मदन मोहन मालवीय यहां की बेटी कुंदन देवी संग वैवाहिक बंधन में बंधे थे। वे जीवन भर उनकी छाया बनी रहीं और हर पथ पर उनका साथ दिया। पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे कर्मयोगी की ससुराल मीरजापुर में होने से जनपदवासियों को गर्व है।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद जन्मस्थली और वाराणसी उनकी कर्मस्थली रही है, लेकिन मीरजापुर भी महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के सानिध्य से दूर नहीं रहा। महामना की ससुराल नगर के बसनही बाजार स्थित बड़ी माता मंदिर के इमली महादेव पर है। मालवीय जी की शादी 1878 ई में नंदराम की इकलौती बेटी कुंदन देवी के साथ हुई थी।प्रयागराज से चली बारात सात दिन बाद मीरजापुर पहुंची थी। विवाह के बाद सात दिनों तक बड़हार रहा। पूरी बारात सात दिनों तक आवभगत का लुत्फ उठाती रही और वैवाहिक रीतियां चलती रहीं। उस समय एक दिन, दो दिन, तीन दिन, सात दिनों का बड़हार का चलन था। दूर से आने वाले बाराती कुछ दिन रुककर ही वापस जाते।इतिहासकार बताते हैं कि बैलगाड़ी से बारात आयी थी और तब 90 किलोमीटर की दूरी तय करने में सात दिन लगे थे। इसके बाद बारात जब वापस गयी तब भी पूरे सात दिन लगे। इस तरह से पंडित मालवीय की शादी की रस्में 21 दिनों में पूरी हुईं। सास-ससुर के निधन के बाद उनकी ससुराल में कोई नहीं है। ससुराल होने के चलते महामना का आना-जाना मीरजापुर में होता था। इमली महादेव स्थित लगभग 20 बाई 50 फीट का यह मकान आज भी मीरजापुर के लोगों को इतराने और महामना से जुड़े रहने का मौका देता है। भारत रत्न मिलने पर मना था जश्न : 24 दिसंबर 2014 को भारत सरकार ने पंडित महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने की घोषणा की जिसके बाद बसनही बाजार के इमली महादेव मोहल्ले में जश्न मनाया गया।मंडलायुक्त मनोज कुमार ने ली थी महामना के ससुराल की सुध : महामना के ससुराल के मकान की सुध 1998 में मंडलायुक्त मनोज कुमार ने ली थी। उन्होंने मकान पर शिलापट्ट लगवाया था। जिस पर लिखवाया कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी का विवाह स्थल पंडित नंदरामजी के इस मकान नंबर 559 मोहल्ला इमली महादेव में 1878 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी की बारात इलाहाबाद से आई और इसी घर में उनका शुभ विवाह पंडित नंदराम की सुपुत्री कुंदन देवी के साथ 1878 ई. को संपन्न हुआ।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यही तो हमारा संस्कार, हमारी संस्कृति, परंपरा रही है कि समाज का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहने पाए। उसे इस प्रकार समझा जा सकता है कि पूर्वकाल में जब तकनीक का विकास नहीं हुआ था, उस समय राजा-महाराजाओ या बादशाहों का देश पर शासन होता था तो प्राय: रात में भेष बदलकर अपने राज्य में वे घूमते थे कि कहीं कोई भूखा तो नहीं सो रहा है, भूख से कोई बच्चा रो तो नहीं रहा है? और यदि कोई भूखा सो रहा है या कोई बच्चा भूख से रो रहा है, तो उसकी समस्या या परेशानी का संज्ञान लेकर उसका निदान भी किया जाता था। देश में ऐसे कई परिवार हैं, जिनके पास न तो घर है और न ही खाने के लिए राशन। ये जहां कुछ मिलने की उम्मीद होती है वहीं पहुंच जाते हैं। भारत में कोई व्यक्ति यदि रात में भूखा सोता है तो माना जा सकता है कि देश का सौभाग्य सो गया,लेकिन जब भूख से तड़पकर असमय कोई काल का ग्रास बन जाता है, तो कहा जा सकता है कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी हम अपने दुर्भाग्य से पीछा नहीं छुड़ा पाये हैं। यही तो हुआ कोरोना काल में, जब हजारों भूखे मजदूर सैकड़ों मील अपने बाल-बच्चों को कंधे और गोदी पर टांगकर या फिर अपने बैग को बच्चों के लिए ट्राली के रूप में इस्तेमाल करके पलायन करने के लिए मजबूर हो गए थे। गांधी-बुद्ध ने यातना सहकर ही किया था दर्द का अनुभव पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि युगोस्लाविया के एक प्रोफेसर ने (जो सारी दुनिया में शरणार्थियों की समस्या पर शोध कर रहे थे) उनके एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि हमारे देश में महात्मा गांधी को भी गरीबी के दर्द का अनुभव तब हुआ, जब दक्षिण अफ्रीका में उन्हें तरह-तरह की यातनाएं भुगतनी पड़ीं। उसी यातना से प्रेरणा लेकर वे गरीबों की जिंदगी से सीधे जुड़ गये। महात्मा बुद्ध को असली ज्ञान तब हुआ, जब उन्हें सुजाता की खीर खाने के लिए मजबूर होना पड़ा। भूख की पीड़ा को समझे बिना कोई भूख मिटा नहीं सकता। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी भूखा न सोने पाये पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, हर्ष मंदर और जगदीप छोकर की ओर से वकील प्रशांत भूषण बहस कर रहे थे। उस पर जस्टिस एमआर शाह व हिमा कोहली ने केंद्र सरकार से कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी को भूखा नहीं सोना चाहिए। झारखंड में भुखमरी : बोकारो के कर्मा शंकरडीह निवासी भुक्खल घासी की मार्च 2020 और बेटी-बेटा की सितंबर में तथा दुमका के महुआडानर गांव के कालेश्वर सोरेन की नवंबर 2018 में कथित तौर पर भूख से मौत हो गयी। पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत खाद्यान्न अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। न्यायालय कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों की कठिनाइयों से संबंधित जनहित मामले पर सुनवाई कर रहा था। उपनिषद की एक पौराणिक कथा के अनुसार एक ब्रह्मचारी किसी ऋषि के पास गया। उसने कहा कि गुरुवर मुझे ब्रह्मज्ञान दें। गुरु ने उसे ध्यान लगाने के लिए कहा। जब पर्याप्त समय हो गया तो उसने न केवल आंखें खोल दीं बल्कि उठकर खड़ा भी हो गया। गुरुदेव ने कठोर स्वर में कहा कि बैठ जाओ, पर वह बैठा नहीं और गुरु की अवज्ञा करते हुए उच्च स्वर में चिल्लाकर बोला- मैं बैठ नहीं सकता। भूख से मेरे प्राण निकल रहे हैं। मुझे अन्न चाहिए। गुरुदेव ने मुस्कुराकर कहा, तो पहला पाठ सीखो कि अन्न ही ब्रह्म है और अन्न के बिना कुछ नहीं हो सकता। इसी प्रकार तैत्तरियोपनिषद में कहा गया है कि अन्न ब्रह्म है, क्योंकि अन्न से ही सारे प्राणी उत्पन्न होते हैं, उत्पन्न होकर अन्न से ही जीवित रहते हैं, अंत में संसार से प्रयाण करते हुए फिर अन्न में प्रविष्ट हो जाते हैं। वर्ष 1947 में जब देश आजाद हुआ तो हर तीन में से दो व्यक्ति गरीब थे वर्ष 1867-68 में सबसे पहले दादा भाई नौरोजी ने गरीबी खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया था। सुभाष चंद्र बोस ने भी वर्ष 1938 में इसकी पहल की थी। वर्ष 1947 में जब देश आजाद हुआ तो हर तीन में से दो व्यक्ति गरीब थे। आज कहा जाता है कि हर तीन में से एक व्यक्ति गरीब है। फिर आजादी के बाद ह्यगरीबी हटाओ, देश बचाओ का नारा वर्ष 1974 के आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी ने दिया था। बाद में उनके बेटे राजीव गांधी ने भी इस नारे का उपयोग किया। इस नारे का प्रयोग पांचवीं पंचवर्षीय योजना में भी किया गया था। आज भी भूख से मौत के मामले सामने आते रहते हैं और सरकारें इन मामलों को गंभीरता से लेने के बजाय खुद को बचाने के लिए लीपा-पोती में लग जाती हैं। यह बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। भोजन मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। इस मुद्दे को सबसे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकलिन रूजवेल्ट ने अपने एक व्याख्यान में उठाया था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे को अपने हाथ में ले लिया और वर्ष 1948 में आर्टिकल-25 के तहत भोजन के अधिकार के रूप में इसे मंजूर किया। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सरकार के दावे पर उठाये सवाल यह सुखद बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने अब जनहित के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछना शुरू कर दिया है। उसी के तहत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या के साथ ताजा रिपोर्ट दें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही है। केंद्र सरकार ने कोरोना काल में लोगों तक अनाज पहुंचाया है। हमें यह भी देखना होगा कि यह व्यवस्था जारी रहे। प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि पिछले कुछ वर्षों में लोगों की प्रतिव्यक्ति आय बढ़ी है, जबकि भारत वैश्विक भुखमरी सूचकांक में तेजी से नीचे आया है। बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स की 2022 की रिपोर्ट में भारत की स्थिति को बेहद खराब बताया गया है। 121 देशों की रैंकिंग में भारत 107वें नंबर पर है। भारत से बेहतर स्थिति में तो हमारे पड़ोसी देश- पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका हैं। ग्लोबल हंगर एसोसिएशन का उद्देश्य विश्व के क्षेत्रीय और देश के स्तर पर भूख को ट्रैक करना है। इसके स्कोर चार घटकों की संभावनाओं के मूल्यों पर आधारित होते हैं। अब देखने की बात यह होगी इस जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को आखिरकार क्या आदेश दिया जाता है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं ।)
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के अग्रणी टेलेकम्युनिकेशन्स सर्विस प्रोवाइडर भारती एयरटेल और एशिया में सबसे प्रतिष्ठित एकीकृत स्वास्थ्य सेवा संगठन, अपोलो हॉस्पिटल्स ने आज 5जी और एआई द्वारा संचालित होने वाले भारत के पहले कोलोनोस्कोपी परीक्षण को पूरा करने की घोषणा की। इस परीक्षण में कोलन कैंसर का अधिक तेजी से और सटीक रूप से पता चला, जिसका श्रेय एयरटेल की 5जी तकनीक पर एआई के परीक्षण के उपयोग को जाता है, जिसमें बेहद लो लेटेंसी और हाई प्रोसेसिंग पॉवर होती है। इन परीक्षणों पर एक साथ काम करने के लिए हेल्थनेट ग्लोबल, एडब्लूएस और अवेशा कंपनियां भी शामिल थीं। एआई-निर्देशित कोलोनोस्कोपी के कारण, इमेज प्रोसेसिंग वास्तविक समय में और बिना किसी देरी के हुई, तब भी जबकि डॉक्टर ने कोलन के माध्यम से स्कोप को उपयुक्त कॉलोनिक क्षेत्र के ऊपर उपरिशायी करने के लिए स्थानांतरित किया। इस तकनीक के आने से, डॉक्टरों के पास अब आंखों की अतिरिक्त जोड़ी है और पूर्वंगकों का पता लगाने की दर में वृद्धि हुई है, जिससे जीवन को बचाया जा सकेगा और रोगी की बेहतर देखभाल होगी।
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