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मणिपुर : स्कूल बस पलटने से 15 छात्रों की मौत, कई गंभीर
Published / 2022-12-22 08:49:37
मणिपुर : स्कूल बस पलटने से 15 छात्रों की मौत, कई गंभीर

हादसे पर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने जताया दुखघटनास्थल पर एसडीआरएफ और मेडिकल टीम पहुंचीएबीएन सेंट्रल डेस्क। मणिपुर के नोनी जिले में टूर पर जा रही एक स्कूल बस पलट गई। हादसे में कम से कम 15 छात्रों की मौत हो गई। कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ऐसे में मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है। बस में 36 छात्र और टीचर्स भी मौजूद थे।स्टडी टूर पर जाते वक्त बस ओल्ड कछार रोड पर फिसल गई। मृतकों में 5 छात्राएं हैं। घटना सुबह 11.30 बजे की है। हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में दो बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने का दावा किया जा रहा है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बस थम्बलनू हायर सेकेंडरी स्कूल, यारिपोक की थीं। ये खौपूम की ओर टूर पर जा रही थी। 22 छात्रों को इम्फाल के मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे पर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने दुख जताया है। उन्होंने बताया कि घटना स्थल पर एसडीआरएफ और मेडिकल टीम को भेजा गया है।

भारत पहुंचा चीन में कहर ढाने वाले कोरोना वैरिएंट, जानें कहां
Published / 2022-12-22 08:43:55
भारत पहुंचा चीन में कहर ढाने वाले कोरोना वैरिएंट, जानें कहां

एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात के वडोदरा में कोरोना के बीएफ.7 वेरिएंट का मामला सामने आया है। अब तक गुजरात से दो मामले सामने आये हैं जबकि ओडिशा से एक मामला सामने आया है। अमेरिका की 61 वर्षीय महिला में बीएफ.7 वेरिएंट पाया गया। कोरोना का वेरिएंट मिलने के बाद महिला घर में ही आइसोलेट थी। फाइजर का टीका लगवाने के बावजूद महिला बीएफ.7 वेरिएंट से संक्रमित हुई। यह महिला 11 नवंबर को अमेरिका से वडोदरा आयी थी। महिला के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए गांधीनगर भेजे गये थे।कोरोना के कई वेरिएंट्स अब तक आ चुके हैं। ओमीक्रोन इनमें सबसे प्रमुख रहा है। ओमीक्रोन के भी कई सबवेरिएंट्स आये हैं। इसी का एक सबवेरिएंट है बीएफ.7 जिसे बीए.5.2.1.7 के रूप में जाना जाता है। यह ओमीक्रोन वेरिएंट बीए.5 का एक सबवेरिएंट हैं। चीन में कोरोना के मामलों के फिर से बढ़ने के पीछे यही वेरिएंट बताया जा रहा है। चीन के अलावा भी यह वेरिएंट अमेरिका, यूके और बेल्जियम, जर्मनी, सहित दुनिया भर के कई अन्य देशों में पाया गया है।तेजी से फैलता है बीएफ.7बीएफ.7 अन्य वेरिएंट्स की तुलना में तेजी से फैलता है और ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है हालांकि यह ज्यादा खरतनाक नहीं है, लेकिन चिंता की बात यह है कि यह कोरोना वायरस के टीके लगवा चुके लोगों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।बीएफ.7 के लक्षण : बीएफ.7 के लक्षण ओमीक्रोन के पिछले सभी वेरिएंट्स की तरह हैं। इसके लक्षण हैं :बुखारखांसीगले में खराशनाक बहनाथकानउल्टी और दस्त जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण

साल 2023 भारतीय इक्विटी के लिए रहेगा सपाट
Published / 2022-12-22 08:37:22
साल 2023 भारतीय इक्विटी के लिए रहेगा सपाट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोटक सिक्योरिटीज ने अगले साल के लिए निफ्टी का आधारभूत लक्ष्य 18,717 तय किया है। ब्रोकरेज ने कहा कि कई तरह के वैश्विक अवरोधों और बढ़ा हुआ मूल्यांकन अगले साल बढ़त को सीमित कर सकता है।कोटक सिक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष और शोध प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा कि अल्पावधि में बाजार महंगे हो गए हैं और इस स्तर पर अहम रिटर्न की उम्मीद लगाना मुश्किल है। गिरावट सीमित रह सकती है लेकिन बढ़त की भी सीमा है। हम सपाट वर्ष की उम्मीद कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि निवेशकों के लिए सिर्फ इक्विटी से कमाई करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें अन्य परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करना होगा। लेकिन गिरावट में खरीदारी के मौके होंगे और निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा ​के निवेश नजरिये को ध्यान में रखते हुए खरीदारी करनी चाहिए।ब्रोकरेज ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी को देखें तो भारतीय इक्विटी बाजारों ने खासी सुदृढ़ता का प्रदर्शन किया है। कोटक सिक्योरिटीज ने कहा कि कोविड, वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अवरोध के कारण उच्च महंगाई, रूस-यूक्रेन युद्ध‍ के कारण भूराजनैतिक तनाव और ब्याज दरों में तीव्र बढ़ोतरी के रूप में भारतीय इक्विटी ने पिछले दो वर्षों में लगातार चार झटकों का सामना किया है।अन्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था इन झटकों को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से झेलने में सक्षम रही। और यह काम रियल एस्टेट, वाहन व बैंकिंग समेत कई क्षेत्रों में साइक्लिकल तेजी की अगुआई में हुई। विनिर्माण को लेकर चीन के विनिर्माण के सकारात्मक प्रभाव, उत्पादन से जुड़ाव वाला प्रोत्साहन कार्यक्रम और पूंजीगत खर्च में सुधार ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता में योगदान किया है।कोटक सिक्योरिटीज के सीईओ जयदीप हंसराज ने कहा कि अगर निवेश निकासी पर नजर डालें तो यह साल आश्चर्यजनक रूप से अच्छा रहा है। 3 लाख करोड़ रुपये वाली अर्थव्यवस्था को देखते हुए मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भारत उभरने वाला बाजार नहीं रहेगा बल्कि यह विकसित अर्थव्यवस्था के चरण में होगा। मुझे इसकी पूरी उम्मीद है। हालांकि ब्रोकरेज ने कहा कि वैश्विक कारकों और मौद्रिक सख्ती का बहुत ज्यादा असर नहीं रहने के कारण गिरावट का जोखिम बढ़ रहा है।ब्रोकरेज ने कहा कि हम वित्त वर्ष 23 व वित्त वर्ष 24 के लिए जीडीपी में वास्तविक बढ़ोतरी का अनुमान 6.8 फीसदी व 6 फीसदी जता रहे हैं और इसके साथ गिरावट का भी जोखिम है। भारी-भरकम देसी निवेश से भारतीय इक्विटी को विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच खुद को खड़ा रखने में मदद मिली।एसआईपी के जरिये भारतीय बाजारों में निवेश मई के बाद से बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये के पार निकल गया है। वित्त वर्ष 7 महीने के पिछले सात महीने का औसत 12,300 करोड़ रुपये रहा है। वित्त वर्ष 22 में औसत मासिक निवेश करीब 10,000 करोड़ रुपये रहा था। ब्रोकरेज ने कहा कि एसआईपी के जरिए इक्विटी बाजारों में टुकड़ों मे किया जाने वाला निवेश अनिश्चितता के दौर से निपटने का समाधान है।एसआईपी के जरिये मजबूत निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे के बारे में बताता है। हालांकि ब्रोकरेज ने सावधि जमाओं की ब्याज दरों में इजाफे के बीच देसी निवेश की निरंतरता पर चिंता जताई है। चौहान ने कहा कि इस साल निवेशकों के पास शेयर बाजारों में निवेश के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। लेकिन अगले साल एफडी की बढ़ती ब्याज दरें कुछ निवेश आकर्षित कर सकता है। ­

देश में कोरोना की स्थिति पर स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया कर रहे बैठक
Published / 2022-12-21 13:47:16
देश में कोरोना की स्थिति पर स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया कर रहे बैठक

अन्य देशों की हालत देख उठाये जायेंगे जरूरी कदमएबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ भारती पवार ने बताया कि बैठक में देश के प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को जीनोम सीक्वेंसिंग को लेकर गाइड लाइन जारी की गई थी। एक बार फिर सिर उठा रही कोरोना महामारी को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं। इसमें चीन व अन्य देशों में कोरोना की स्थिति को देखते हुए ऐहतियाती उपायों पर मंथन किया जा रहा है।केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ भारती पवार ने बताया कि बैठक में देश के प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को जीनोम सीक्वेंसिंग को लेकर गाइड लाइन जारी की गई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस बैठक में नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल, कोविड-19 वर्किंग ग्रुप एनटीएजीआई के प्रमुख डॉ एनके अरोड़ा, डीजी-आईसीएमआर डॉ राजीव बहल, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  डॉ राजेश गोखले और डीजीएचएस स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय डॉ अतुल गोयल शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ के सीएम ने सतनामी समाज के युवाओं का किया अपमान : भाजपा
Published / 2022-12-20 22:57:52
छत्तीसगढ़ के सीएम ने सतनामी समाज के युवाओं का किया अपमान : भाजपा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भाजपा नेता नवीन मार्कण्डेय ने मंगलवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि मुंगेली जिले के लालपुर में गुरु बाबा घासीदास जी के जयंती कार्यक्रम में सतनामी समाज के युवाओं के विरोध प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया को घोर आपत्तिजनक टिप्पणी बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से सतनामी समाज के युवाओं को इशारों इशारों में कुत्ता कहकर बाबा गुरु घासीदास जी और सतनामी समाज का घोर अपमान किया है।चार साल की विफलताओं और वादाखिलाफी से आक्रोशित युवा जब मुख्यमंत्री से सवाल करते हैं, उनकी कुनीतियों का विरोध करते हैं तो वे बौखला जाते हैं। आपा खोकर अपशब्द कहते हैं। ओछी टिप्पणी करते हैं। अब तो हद हो गई कि गुरु बाबा जी के धार्मिक आयोजन में भूपेश बघेल ने सतनामी समाज के युवाओं की तुलना कुत्ते से कर दी। बघेल बौरा गए हैं। विक्षिप्त जैसा व्यवहार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पद की गरिमा को तार -तार कर दिया है।मुख्यमंत्री ने अपनी कुंठा निकालते हुए उस महान संत का अपमान किया है, जिन्होंने सभी मनुष्यों के एक समान होने का संदेश मानवता को दिया है। भूपेश बघेल ने सतनामी समाज को गाली दी है। सत्ता के अहंकार का ऐसा दुर्लभ उदाहरण कहीं नहीं मिलेगा। भूपेश बघेल अविश्वसनीयता के प्रतीक हैं जो कि मुख्यमंत्री पद पर बैठा कोई व्यक्ति इस तरह असभ्य, अभद्र और अमर्यादित हो सकता है।प्रदेश भाजपा नेता नवीन मार्कण्डेय ने कहा कि लोरमी के लालपुर में बाबा गुरु घासीदास जयंती कार्यक्रम में भूपेश बघेल को सतनामी समाज के युवकों के विरोध का सामना क्यों करना पड़ा, उन्हें यह समझना चाहिए था और युवाओं की शिकायत का समाधान करना चाहिए था क्योंकि वे मुख्यमंत्री हैं। जब मुख्यमंत्री सभा को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान सतनामी समाज के युवकों ने बैनर-पोस्टर लहराकर आरक्षण मामले पर विरोध कर मुख्यमंत्री वापस जाओ के नारे लगाये तो इसके लिए ये युवा नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति वर्ग के साथ विश्वासघात करने वाले भूपेश बघेल जिम्मेदार हैं।इस पर भी मुख्यमंत्री ने पद की मर्यादा को तिलांजलि देते हुए यह तक कह दिया कि शाम होते कौन भौंकते हैं, उनसे हम डरने वाले नहीं। कांग्रेस बताये कि वह सतनामी समाज को क्या मानती है, बाबा गुरु घासीदास जी का परिवार या वह जो कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बता रहे हैं।प्रदेश भाजपा नेता नवीन मार्कण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सभा में अपने हक की बात करने गए युवाओं के प्रति इतना द्वेष मुख्यमंत्री की कुंठित मानसिकता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। गुरु घासीदास जी की जयंती के अवसर पर, जिनका संदेश सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारा है, उस सतनामी समाज के युवाओं को भौंकने वाला कह कर मुख्यमंत्री ने पूरे अनुसूचित जाति समाज का सरेआम अपमान किया है। भारतीय जनता पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कृत्य माफी योग्य नहीं है। भाजपा कड़ा विरोध करेगी।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब तक समाज से माफी नहीं मांगते तब तक भाजपा भूपेश बघेल का पुतला दहन, एससी - एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर, धरना-प्रदर्शन ज्ञापन आंदोलन करती रहेगी। जिसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में आज 20 दिसम्बर को पुतला दहन, 22 दिसंबर को थानों में एफआईआर तथा 29 या 30 दिसम्बर को 1 दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर राज्यपाल महोदया को ज्ञापन दिया जायेगा।पत्रकार वार्ता में रायपुर शहर जिलाध्यक्ष जयंती पटेल, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी अनुराग अग्रवाल, अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दयावंत धर बांधे व वेदराम जांगड़े मौजूद रहे।

फार्मा कंपनियों का उद्देश्य कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाना : रामदेव
Published / 2022-12-20 22:54:08
फार्मा कंपनियों का उद्देश्य कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाना : रामदेव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पतंजलि अनुसंधान संस्थान के तत्वावधान में आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के अंतर को पाटने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण रखते हुए एक मंच पर चर्चा विषय पर संचालित सम्मेलन के दूसरे दिन स्वामी रामदेव ने कहा कि आज औद्योगिकरण बहुत गलत दिशा में जा रहा है। वर्तमान में सबसे ज्यादा पैसा फार्मा कंपनियों के पास है।स्वामी रामदेव ने कहा कि दुर्भाग्य से पूरी दुनिया में मेडिकेशन का सोर्स फार्मा कम्पनियों के पास ही है और उनका उद्देश्य कम से कम निवेश के साथ ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाना है। जिस तरह मेडिकल व फार्मा इण्डस्ट्री काम कर रही है, उस पर पूरी दुनिया को विचार करना होगा। मनुष्य को स्वयं विवेकी बनना होगा, जिम्मेदार बनना होगा। उन्होंने कहा कि कि एलोपैथी डॉक्टर्स दवा निर्माण नहीं कर सकता किन्तु आयुर्वेद में चिकित्सक लगभग 1000 औषधियां बनाने में सक्षम है। यह आयुर्वेद की आत्मनिर्भरता है।आचार्य बालकृष्ण ने आॅनलाइन माध्यम से कहा कि यदि हम अपनी संस्कृति, परंपरा और अपनी परंपरागत विद्या को आधुनिक विज्ञान सम्मत स्थापित कर पाते हैं तो देश ही नहीं पूरी दुनिया उसको स्वीकार करने के लिए बाध्य होगी। स्वामी रामदेव के नेतृत्व में आयुर्वेद का जो वैभव है आप सब के सहयोग के विश्वव्यापी बनेगा।पतंजलि अनुसंधान संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि हमने गिलोय, तुलसी, अष्टवर्ग पादप, अश्वगंधा पर आधुनिक पैरामीटर्स के आधार पर अनुसंधान कर तथ्यों के साथ उनके चमत्कारी प्रभावों को दुनिया के सामने रखा है। पतंजलि वह पहला संस्थान है जिसने आयुर्वेद को एविडेंस बेस्ड मेडिसिन का दर्जा दिलाने की ओर ठोस कदम बढ़ाया है।कार्यक्रम में एआइएमएस भोपाल व एआइएमएस जम्मू के प्रो. वाईके गुप्ता ने कहा कि आयुर्वेद बहुत प्राचीन है। यह ऐसा विज्ञान है जिसको हमने भुला दिया था। एलोपैथी का सिस्टम बहुत नया है लेकिन उसकी भी अपनी खूबियां हैं। डिजनरेटिव बीमारियों की बात करें तो उसमें आयुर्वेद का पलड़ा भारी है, लेकिन इमरजेंसी की बात करें तो एलोपैथिक की भी हमें जरूरत पड़ती है। तो हमें यह प्रयास करना चाहिए कि एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों को मिलाकर एकीकृत चिकित्सा पद्धति बनाई जाये। सम्मेलन में एनआईएमएस विश्वविद्यालय, जयपुर के डायरेक्टर सर्जिकल डिसिप्लिंस प्रोफेसर अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि हमें वैज्ञानिक तथ्यों से परिचित होकर आयुर्वेद व एलोपैथ के सम्मिश्रण से एकीकृत चिकित्सा या समग्र चिकित्सा को बढ़ावा देना होगा।महर्षि मार्कण्डेश्वर इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस एण्ड रिसर्च, मुलाना के प्रोफेसर एण्ड फामार्कोलॉजी हैड प्रो प्रेम खोसला ने कहा कि समय व काल की कसौटी पर परखी पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियां दुष्परिणाम रहित हैं। एआइआइएमएस, भोपाल के डीन रिसर्च तथा माइक्रोबायोलॉजी के विभागप्रमुख प्रो देबासीस बिस्वास ने द आयुवेर्दा विंडो इन द हाऊस आॅफ मेडिसिन विषय पर तथा पतंजलि अनुसंधान संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ स्वाति हलदर ने एविडेंस बेस्ड आयुर्वेदिक सॉल्यूशन्स फॉर इन्फैक्शियस डिजीज विषय पर चर्चा की। बीएचयू, बनारस के रस शास्त्र व भैषज्ञ कल्पना विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ रोहित शर्मा ने बॉयोलॉजिकल प्लासिबल एंड एविडेंस बेस्ड इनसाइट्स आॅन आयुर्वेदिक फार्मास्यूटिकल्स तथा पतंजलि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ कुनाल भट्टाचार्य ने एक्सप्लोरिंग ट्रेडिशनल आयुर्वेदा मेडिसिन फ्राम नैनोमेडिसिन प्रोस्पेक्टिव विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पतंजलि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ ऋषभदेव, डीजीएम आॅपरेशन प्रदीप नैन, डॉ निखिल मिश्रा, डॉ सीमा गुजराल, डॉ ज्योतिष श्रीवास्तव, देवेन्द्र कुमावत, संदीप सिन्हा तथा डॉ कुणाल भट्टाचार्य का विशेष सहयोग रहा।

आईआईटी मंडी के फैकल्टी ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर नेटवर्क से जुड़ने वाले आठ ग्रुप लीडरों में शामिल
Published / 2022-12-20 22:51:13
आईआईटी मंडी के फैकल्टी ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर नेटवर्क से जुड़ने वाले आठ ग्रुप लीडरों में शामिल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के फैकल्टी डॉ बस्कर बक्थावाचलू ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर नेटवर्क के नये सदस्य चुने गये हैं। एक्सीलेंस इन लाइफ साइंसेज ईएमबीओ ने आठ नए सदस्यों का ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर नेटवर्क में स्वागत किया है। चिली, भारत, सिंगापुर और ताइवान में लैब तैयार कर चुके समूह के युवा ग्रुप लीडर जनवरी 2023 से आर्थिक सहायता और विभिन्न प्रशिक्षण और नेटवर्किंग की सुविधाएं प्राप्त करेंगे। ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर अवार्ड जीवन विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत युवा ग्रुप लीडरों के लिए बहुत प्रतिष्ठित सम्मान है।डॉ बस्कर बक्थावाचलू आईआईटी मंडी के स्कूल आॅफ बायो साइंसेज एवं बायो इंजीनियरिंग के फैकल्टी हैं। उनका ग्रुप न्यूरो डीजेनरेटिव बीमारियों के सेलुलर मैकेनिज्म को समझने में लगा है। ग्रुप की विशेष अभिरुचि यह जानने में है कि आरएनए-बाइंडिंग प्रोटीन में जेनेटि कम्युटेशन से किस तरह मस्तिष्क में विषैला प्रोटीन जमा होने लगता है जिसके चलते न्यूरोनल मृत्यु होती है जो एमियो ट्रॉफिक लैटरलस्क्लेरोसिस एएलएस जैसी कई न्यूरो डीजेनेरेटिव रोगों में देखी गई है।डॉ बस्कर बक्थावाचलू का लैब ऐसे मैकेनिज्म को समझने के लिए बतौर मॉडल ड्रोसोफिला और इंड्युस्डप्लुरिपोटेंट स्टेम सेल (आईपीएससी) का उपयोग करता है और न्यूरो डीजेनरेशन रोकने या टालने के लक्ष्य से संभावित दवाओं का पता लगाता है। ईएमबीओ से प्राप्त पुरस्कार के बारे में डॉ बस्कर बक्थावाचलू, आईआईटी मंडी ने कहा कि यह पुरस्कार हमारे परिश्रम का सम्मान है। ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर नेटवर्क में शामिल होने से नेटवर्किंग के कई द्वार खुलते हैं। खासकर मेरे छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे जो अब पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों से संपर्क कर पायेंगे। चार वर्षों के दौरान नये ग्लोबल इनवेस्टिगेटर अपने नेटवर्क और रिसर्च पोर्टफोलियो बनाने और विस्तार करने में आर्थिक सहायता प्राप्त करेंगे। इस राशि से वे नई पद्यतियां और टेक्निक जानने या फिर प्रयोग करने के लिए अपने कार्य क्षेत्र और इसके बाहर भी अन्य संस्थान जाकर सहयोग करार कर पायेंगे। उन्हें वैज्ञानिक बैठकों में भाग लेने या आयोजित करने और ईएमबीओ लीडरशिप और प्रबंधन प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध होगी। इस प्रोग्राम का उद्देश्य यूरोपीय वैज्ञानिकों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना ही नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना भी है और इस तरह यूरोप के बाहर भी ईएमबीओ समुदायों को बढ़ावा दिया जायेगा।इधर, फियोनावाट, निदेशक, ईएमबीओने कहा, कि हम चुने गये नये सदस्यों को ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर बनने की बधाई देते हैं और हमें विश्वास है कि वे इस प्रोग्राम से बहुत कुछ सीखेंगे और अपनी दिलचस्पी के काम में प्रगति करेंगे। नये ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टि गेटर एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा होंगे। जिसमें 700 से अधिक वर्तमान और पूर्व ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर, इंस्टालेशनग्रांटीज और यंग इंवेस्टिगेटर शामिल हैं। नेटवर्क की शुरुआत 2019 में की गई थी और इस साल सफल आवेदकों का यह ग्रुप ग्लोबल इन्वेस्टिगेटरों का चौथा समूह है। इस बार कुल 43 आवेदनों के साथ 2022 की सफलता दर 19 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद प्रवेश के लिए आवेदन की समय सीमा पहली जून 2023 है।

कामगारों की उपलब्धता से ज्याद अहम होगी गुणवत्ता
Published / 2022-12-20 17:53:54
कामगारों की उपलब्धता से ज्याद अहम होगी गुणवत्ता

नीलकंठ मिश्रएबीएन सेंट्रल डेस्क। हम श्रमिकों की आपूर्ति और बचत को लेकर एशिया की वृद्ध होती आबादी के प्रभाव का आकलन करने की परियोजना पर काम कर रहे हैं। इस परियोजना के पहले निष्कर्ष की चर्चा हमने पिछले महीने की थी। इसका सार यही था कि एशिया की दस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (ए-10: चीन, भारत, इंडोनेशिया, जापान, फिलिपींस, वियतनाम, थाइलैंड, कोरिया, मलेशिया और ताइवान) में जनसांख्यिकीय परिवर्तन की गति आर्थिक संक्रमण से कहीं तेज है। यहां हम शोध के दूसरे निष्कर्ष की चर्चा करेंगे, जो कार्यबल की क्षमताओं से जुड़ा है। इसका सार यही निकलता है कि कार्यबल की क्षमताएं और काबिलियत उसकी संख्या या उपलब्धता पर भारी पड़ने वाली हैं।कम से कम अगले एक दशक तो यही रुझान दिखने के आसार हैं।  ए-10 देश, जो विनिर्मित वस्तुओं के वैश्विक व्यापार में वर्चस्व रखते हैं, उनकी संख्या 2010 तक वृद्धिशील वैश्विक कामगारों की आधी थी, लेकिन जल्द ही उनकी कामकाजी आबादी बूढ़ी होती दिखेगी। वहीं वैश्विक आबादी तो अभी भी निरंतर बढ़ने पर है, लेकिन जिन देशों में युवाओं की आबादी बढ़ रही है, उनमें राजनीतिक रूप से स्थिरता कम होने के साथ ही आर्थिक मोर्चे पर उनका जुड़ाव भी नहीं है। इन देशों के रुझान भी विविधता लिए हुए हैं। जहां भारत, इंडोनेशिया और फिलिपींस में कामगारों की संख्या में सालाना 0.9 से 1.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है, लेकिन चीन, जापान, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया में यह सालाना 0.2 से एक प्रतिशत के संकुचन का शिकार हो सकती है। इसके अतिरिक्त, एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में श्रम बल भागीदारी अनुपात तो ऊंचा रहा है, लेकिन वह भी अब अवसान की ओर है, जिसमें निकट भविष्य में और गिरावट के आसार हैं। इस गिरावट का एक बड़ा पहलू यही है कि लोग शिक्षा प्राप्त करने में अधिक वर्ष लगा रहे हैं, लेकिन यह कामगार उपलब्धता को घटा देता है। इसके अतिरिक्त, हमारे ट्रेडमार्क-मालिकाना सर्वे के निष्कर्ष भी इस परिकल्पना को पुष्ट करते हैं कि उत्तर एशियाई देशों में जैसे-जैसे आय बढ़ती है, वैसे-वैसे औद्योगिक नौकरियों में काम करने की युवाओं की इच्छा भी घटती जाती है। अर्थव्यवस्थाओं के अधिक समृद्ध होने के कारण सेवाओं की बढ़ती मांग भी औद्योगिक कामगारों की उपलब्धता को प्रभावित करती है। हालांकि, इससे पहले कि हम इन देशों में औद्योगिक कामगारों की किल्लत को लेकर चिंतित हों, यह ध्यान रखना महत्त्वपूर्ण है कि ए-10 देशों की 28 प्रतिशत कामकाजी आबादी अभी भी कृषि में लगी हुई है। कृषि कामगारों को औद्योगिक काम के लिए कौशल प्रदान करना यकीनन चुनौतीपूर्ण है, फिर भी औद्योगिक कामकाज की ओर सुस्त संक्रमण के बावजूद, कृषि में लगे लोग बढ़ती उम्र के कारण उससे बाहर हो रहे हैं और नई पीढ़ी कृषि के बजाय औद्योगिक या सेवा क्षेत्र की ओर उन्मुख हो रही है, जिनकी तादाद काफी बड़ी है। कृषि में श्रम उत्पादकता पांच प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है, जो कामगारों में गिरावट की भरपाई कर रही है। असल में दो कारक खासे महत्त्वपूर्ण हैं। एक कामगारों की गुणवत्ता और दूसरा कार्यस्थल की गुणवत्ता। जिन अभिभावकों के कम बच्चे होते हैं, उनके पास बच्चों के विकास में निवेश करने के लिए अधिक समय और संसाधन होते हैं। इससे न केवल उनकी शिक्षा का औसत स्तर, बल्कि उनका शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है। एशिया के सभी देशों में कम वजन वाले बच्चों की संख्या सार्थक रूप से कम हुई है। बेहतर बाल पोषण भले ही सरकारी हस्तक्षेपों पर निर्भर करता है, लेकिन इसमें अभिभावकों द्वारा ध्यान रखा जाना भी मायने रखता है। भारत, इंडोनेशिया और फिलिपींस जैसी अर्थव्यवस्थाओं में जहां कुपोषण के मामले अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं, वहां यह एक अहम नीतिगत चुनौती है। वर्ष 1966 में जन्मे और 1990 में जन्मे बच्चों की लंबाई में सुधार 1990 में कायम टोटल फर्टिलिटी रेट या टीएफआर के साथ विपरीत रूप से सहसंबद्ध है और यह दोनों लैंगिक स्तर पर है। इस अवधि में दक्षिण कोरिया और चीन में वयस्कों की औसत लंबाई में तीन सेंटीमीटर से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सभी क्षेत्रों में स्कूल की पढ़ाई की अवधि के औसत वर्ष बढ़े हैं, जिनमें तीन से पांच वर्षों की बढ़ोतरी हुई है और इस मोर्चे पर इंडोनेशिया और वियतनाम में सबसे अधिक सुधार हुआ है। एक बार पुन: यह सरकारी प्रयासों के साथ-साथ अभिभावकों की क्षमता और दृढ़ता से संभव होता दिखता है, क्योंकि उनके बच्चे कम हैं, जिनकी शिक्षा पर वे अधिक निवेश को तत्पर हैं। वर्ष 2018 में चीन के आंकड़ों से इसे समझा जा सकता है, जहां 25 से 30 वर्ष की आयु के 27 प्रतिशत लोग स्नातक थे, जबकि 45 से 54 वर्ष आयु वर्ग में स्नातकों का आंकड़ा 7 प्रतिशत ही था। बेहतर शिक्षा कामगारों को अधिक प्रभावी मशीनों के उपयोग में सक्षम बनाती है, जिससे श्रम उत्पादकता में वृद्धि होती है। हाल में एक शोध पत्र में इसका उल्लेख भी हुआ है, जिसमें अमेरिका में पिछले पांच दशकों के दौरान मशीन से जुड़े कामगारों की शैक्षणिक अर्हताओं का अध्ययन किया गया है। अधिक शिक्षित लोगों का कामकाजी जीवन भी लंबा चलता है, क्योंकि शारीरिक क्षमताओं की तुलना में मानसिक क्षमताएं कहीं ज्यादा टिकाऊ होती हैं। हालांकि, औद्योगिक श्रम की उपलब्धता के दृष्टिकोण से एक अहम पहलू यह भी है कि अधिक शिक्षित लोग फैक्टरियों में काम करने के कम इच्छुक होते हैं। अमेरिका में कृषि, उत्पादन और निर्माण कार्य में स्नातकों की सक्रियता 10 प्रतिशत से कम है, जबकि कुल कामकाजी आबादी में उनकी भागीदारी 37 प्रतिशत और सेवा कार्यबल में 43 प्रतिशत है। कार्यस्थलों की गुणवत्ता में सुधार के लिए भी भारी संभावनाएं विद्यमान हैं। जापान, कोरिया और ताइवान को अपवाद छोड़कर ए-10 अर्थव्यवस्थाओं के कार्यबल में भारी अनौपचारिकता है। अनौपचारिक कामगारों की उत्पादकता सीमित होती है। इसका कारण उनमें कौशल की कमी के साथ-साथ उन उपक्रमों का आकार (अनौपचारिक उपक्रमों का आकार अमूमन छोटा होता है) भी होता है, जिनमें वे काम करते हैं, क्योंकि वे कौशल-निर्माण में निवेश और व्यापक आर्थिक दायरे से जुड़ी संभावनाओं को भुनाने में कम सक्षम होते हैं। डिजिटलीकरण और सुधारों ने इन अर्थव्यवस्थाओं में राज्य की क्षमताओं को जैसे-जैसे बढ़ाया है, वैसे-वैसे उपक्रमों के आकार में वृद्धि के साथ ही औपचारीकरण भी तेज हुआ है, जिससे श्रम उत्पादकता में भी सुधार होना चाहिए। कुल मिलाकर मानव पूंजी में सुधार जनसांख्यिकीय स्तर पर कुछ नुकसान की भरपाई कर सकता है। औसतन लोग कम बच्चे पैदा करेंगे, लेकिन अधिक संभावना है कि वे सशक्त एवं अधिक सक्षम कामगार के रूप में ढलेंगे। वहीं, बुढ़ाते हुए समाजों में रोबोटीकरण का तेज रुझान भी दिख रहा है। इन सभी कारकों के चलते ए-10 अर्थव्यवस्थाओं में औद्योगिक उत्पादन सालाना 3 से 4 प्रतिशत की वृद्धि कर रहा है और इस गति ने पिछले एक दशक के दौरान सार्थक रूप से तेजी पकड़ी है। इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबलिंग, परिधान और खिलौना निर्माण जैसे कुछ उद्योगों में आटोमेशन यानी स्वचालन अभी भी खासा मुश्किल है। इसके प्रबल आसार दिखते हैं कि ये उद्योग बुढ़ाती अर्थव्यवस्थाओं से युवा अर्थव्यवस्थाओं की ओर उन्मुख होंगे, यह देखते हुए कि वे इस बदलाव को भुनाने के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ ही वैश्विक आपूर्ति श्रंखला से स्वयं को एकीकृत करेंगे। हमने वृद्धि के सर्वसम्मत अनुमान और वस्तुओं एवं सेवाओं में अंतर करते हुए कुछ तार्किक आकलनों के आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए वस्तुओं की मांग-आपूर्ति का एक प्रतिरूप प्रस्तुत किया है। हमने पाया कि भारत, इंडोनेशिया और फिलिपींस जैसी युवा अर्थव्यवस्थाओं में औद्योगिक श्रम आपूर्ति अधिशेष स्थिति में बनी रहेगी, जो अपनी आबादी को सफलतापूर्वक काम में लगाएंगे और चीन की उत्पादकता वृद्धि में भी बहुत ज्यादा कमी नहीं आने वाली। ऐसे में जोखिम उस खंडित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए अधिक है, जहां न केवल उत्पादकता वृद्धि मंद पड़ी है, बल्कि कामगारों की उपलब्धता भी कम है। भारत जैसे युवा देशों के लिए दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में यही मुख्य सबक होगा कि वे मानव पूंजी में सुधार, बच्चों में आरंभिक स्तर पर पोषण सुनिश्चित करने, शैक्षणिक स्तर सुधारने और आर्थिक औपचारीकरण की प्रक्रिया को गति देने पर ध्यान केंद्रित करें। चूंकि जन्म दर तेजी से घट रही है, तो जो बच्चे आज पैदा हो रहे हैं, वे तब वयस्क कामगार के रूप में तैयार होंगे, जब कामकाजी आबादी संकुचित हो रही होगी। ऐसे में उन्हें उन अवसरों को बेहतर तरीके से भुनाने में सक्षम बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। (लेखक क्रेडिट सुइस में एपैक स्ट्रैटजी के सह-प्रमुख हैं)

भारत में कोरोना तोड़ रहा दम, पर दुनिया के कई देशों में कर रहा बेदम
Published / 2022-12-20 11:49:00
भारत में कोरोना तोड़ रहा दम, पर दुनिया के कई देशों में कर रहा बेदम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना फिर से कहर बनकर टूट रहा है। नवंबर की शुरुआत से वैश्विक स्तर पर कोरोना के मामलों में एकाएक उछाल आया है। अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं और मृतकों की संख्या फिर से रिकॉर्ड तोड़ रही है। वहीं, दूसरी तरफ भारत में कोरोना के मामलों में गिरावट जारी है।रविवार को खत्म हुए सप्ताह में, देश में कोरोना के कारण सिर्फ 12 मौतें दर्ज की गयी हैं। वहीं, पिछले तीन दिनों से एक भी मौत का मामला सामने नहीं आया है। मार्च 2020 के बाद दैनिक मृत्यु के मामले में यह सबसे कम है। वहीं, बीते सप्ताह में कोरोना के 1103 नये मामले दर्ज किये गये हैं। यह पहले लॉकडाउन 23-29 मार्च, 2020 के बाद से सबसे कम है। उस सप्ताह, 736 नए मामलों का पता चला था, जिसके बाद अगले सप्ताह यह आंकड़ा बढ़कर 3,154 पहुंच गया था। आंकड़ों के मुताबिक,  बीता हुआ सप्ताह (दिसंबर, 12-18) में पिछले सात दिनों में कोरोना के मामलों में 19% की गिरावट देखी गई है। देश में कोरोना के नए मामलों में बीते पांच महीनों से गिरावट जारी है। साप्ताहिक लिहाज से देखें तो गिरावट 18-24 जुलाई के बाद से शुरू हुई। तब देश में 1.36 लाख नये मामले दर्ज किये गये थे। उसके बाद से सभी सप्ताह में मामलों में गिरावट दर्ज की जाती रही। मार्च, 2020 (16 से 22 मार्च) के बाद से बीते सप्ताह हुईं 12 मौतें भी सबसे कम थीं। एशिया, यूरोप सहित कई देशों में कोरोना के मामले में भारी उछाल देखा गया है। दो नवंबर को वैश्विक मामले 3.3 लाख थे। इसके बाद से यह लगातार बढ़ रहे हैं। 18 दिसंबर को यह आंकड़ा 55 प्रतिशत बढ़कर 5.1 लाख पहुंच गया।जापान में कोरोना से बुरा हाल जापान में कोरोना के मामलों में सबसे अधिक उछाल देखा गया है। बीते सात दिनों में यहां एक मिलियन से भी ज्यादा मामले दर्ज किये गये हैं। यह पिछले सप्ताह से 23% की उछाल है। इस सप्ताह देश में 1,600 से अधिक मौतें हुई हैं, जो करीब 19 प्रतिशत का उछाल है। वहीं, दक्षिण कोरिया ने पिछले सप्ताह 450,000 से अधिक ताजा मामले दर्ज किये गये थे, जो बीते सप्ताह से 9% ज्यादा हैं। इसके अलावा ब्राजील, जर्मनी में भी मामले बढ़ रहे हैं। हांगकांग और ताइवान जैसे देशों में एक लाख नये मामलों की सूचना मिली है।

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