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चलती ट्रेन में आखिर क्यों मची अफरातफरी, चार की मौत
Published / 2023-07-31 11:16:14
चलती ट्रेन में आखिर क्यों मची अफरातफरी, चार की मौत

जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन में अंधाधुंध फायरिंग, एएसआई समेत 4 लोगों की मौत, आरोपी कांस्टेबल गिरफ्तारएबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र के पालघर में दौड़ती हुई जयपुर-मुंबई एक्सप्रेस ट्रेन में ताबड़तोड़ फायरिंग हो गयी है। फायरिंग में 4 लोगों की मौत की खबर है। मरने वाले चार लोगों में एक एएसआई और 3 यात्री शामिल है। वहीं, घटना को लेकर एक अधिकारी ने बताया कि कांस्टेबल ने अपने स्वचालित हथियार से गोलियां चलाकर जयपुर-मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस में सवार आरपीएफ के एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) के साथ तीन अन्य यात्रियों की हत्या कर दी है। घटना सोमवार को सुबह करीब पांच बजे के आसपास की है। फायरिंग पालघर और मुंबई के बीच दहिसर में हुई है। वहीं, फायरिंग के बाद गोली चलाने वाला पुलिस सिपाही ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था। हालांकि उसे मीरा रोड के पास से पकड़ लिया गया है। बताया जा रहा है कि कांस्टेबल मानसिक तनाव से ग्रस्त था। इधर, घटना को लेकर पश्चिमी रेलवे की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि पालघर स्टेशन पार करने के बाद एक आरपीएफ कांस्टेबल ने चलती जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन के अंदर गोलीबारी शुरू कर दी।उसने एक आरपीएफ एएसआई और तीन अन्य यात्रियों को गोली लगी, जिससे उनकी मौत हो गयी। वहीं, फायरिंग के बाद बाद दहिसर स्टेशन के पास  कांस्टेबल ट्रेन से बाहर कूद गया। आरोपी सिपाही को हथियार समेत हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी कांस्टेबल चेतन कुमार चौधरी ने अपने एस्कॉर्ट ड्यूटी प्रभारी एएसआई टीका राम मीणा को चलती ट्रेन में गोली मार दी। इसके बाद आरोपी कांस्टेबल एक अन्य बोगी में गया और उसने तीन यात्रियों को गोली मार दी।

जम्मू सीमा पर घुसपैठिया ढेर
Published / 2023-07-31 11:08:20
जम्मू सीमा पर घुसपैठिया ढेर

घुसपैठ की कोशिश नाकामएबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू कश्मीर के अरनिया सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सतर्क जवानों ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया और एक घुसपैठिए को मार गिराया।बीएसएफ प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि बीएसएफ जवानों ने अरनिया क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार 30-31 जुलाई की मध्य रात्रि में एक संदिग्ध गतिविधि देखी और एक घुसपैठिये को बाड़ की ओर आते देखा।उन्होंने कहा कि सतर्क सैनिकों ने एक घुसपैठिए को ढेर कर दिया और घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। इससे पहले एक जून को सांबा सेक्टर में बीएसएफ जवानों ने एक घुसपैठिये को मार गिराया था।

यूपी, बिहार और आंध्र से होती है सबसे ज्यादा बच्चों की ट्रैफिकिंग
Published / 2023-07-30 21:29:06
यूपी, बिहार और आंध्र से होती है सबसे ज्यादा बच्चों की ट्रैफिकिंग

देश की राजधानी दिल्ली ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों का है सबसे बड़ा ठिकाना गेम्स 24 गुणा 7 और कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन द्वारा तैयार रिपोर्ट द चाइल्ड ट्रैफिकिंग इन इंडिया बताती है कि 80 प्रतिशत छुड़ाये गये बच्चे 13 से 18 साल की उम्र के हैंपिछले एक दशक में सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सजगता और सक्रियता से ट्रैफिकिंग के मामले दर्ज होने की संख्या में इजाफा हुआ है लेकिन इस बाबत जनता को जागरूक करने की चुनौती बरकरार हैबच्चों की ट्रैफिकिंग की समस्या से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत एक समग्र एंटी-ट्रैफिकिंग कानून की हैएबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश वे राज्य हैं जहां 2016 से 2022 के बीच सबसे ज्यादा बच्चों की ट्रैफिकिंग हुई है, जबकि महामारी के बाद दिल्ली में बच्चों की ट्रैफिकिंग में 68 फीसद की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार जयपुर ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों को लाए जाने का सबसे बड़ा अड्डा है, जबकि इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चार जिलों का नंबर है। यह जानकारी देश में बच्चों की ट्रैफिकिंग पर जारी एक रिपोर्ट में सामने आयी है। इस रिपोर्ट को गेम्स24७7 और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित संगठन कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन (केएससीएफ) ने संयुक्त रूप से जारी किया। यह रिपोर्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग इन इंडिया : इनसाइट्स फ्राम सिचुएशनल डाटा एनालिसिस एंड द नीड फॉर टेक-ड्रिवेन इंटरवेंशन स्ट्रेटजी 30 जुलाई को विश्व मानव दुव्यार्पार निषेध दिवस के मौके पर जारी की गई। गेम्स 24 गुणा 7 ने देश में 2016 से 2022 के बीच 21 राज्यों और 262 जिलों में केएससीएफ और इसके सहयोगी संगठनों द्वारा जुटाये गये आंकड़ों का विश्लेषण कर इस रिपोर्ट को तैयार किया है। इस समग्र रिपोर्ट को तैयार करने और तमाम आंकड़े जुटाने के पीछे मकसद ट्रैफिकिंग के मौजूदा रुझानों और तरीकों के बारे में एक स्पष्ट तस्वीर पेश करने का था ताकि इसके आलोक में सरकारें और कानून प्रवर्तन एजेंसियां ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी रणनीतियां बना सकें। बाल मजदूरी के शिकार बच्चों की हालत पर प्रकाश डालते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे ज्यादातर दुकानों, ढाबों और उद्योगों में काम करते हैं लेकिन सौंदर्य प्रसाधन एक ऐसा उद्योग है जिसमें पांच से आठ साल तक के बहुच छोटे उम्र के बच्चों से भी काम लिया जाता है। चौंकाने वाले ये आंकड़े बताते हैं कि छुड़ाए गए 80 प्रतिशत बच्चों की उम्र 13 से 18 वर्ष के बीच थी। साथ ही 13 प्रतिशत बच्चे नौ से बारह साल के बीच थे जबकि पांच प्रतिशत बच्चे नौ साल से भी छोटे थे। केएससीएफ और इसके सहयोगी संगठनों के प्रयासों और हस्तक्षेप से 2016 से 2022 के बीच 18 साल से कम उम्र के 13,549 बच्चों को बाल श्रम और ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया।   इससे भी कहीं ज्यादा रिपोर्ट में बाल मजदूरों का इस्तेमाल कर रहे उद्योगों का वीभत्स चेहरा भी सामने आया है। इसके अनुसार बाल मजदूरों का सबसे बड़ा हिस्सा होटलों और ढाबों में बचपन गंवा रहा है जहां 15.6 फीसद बच्चे काम कर रहे हैं। इसके बाद आटोमोबाइल व ट्रांसपोर्ट उद्योग में 13 फीसद और  कपड़ा व खुदरा दुकानों में 11.18 फीसद बच्चे काम कर रहे हैं।  रिपोर्ट में इस आशंका की भी पुष्टि हुई है कि महामारी के पश्चात देश के हर राज्य में बच्चों की ट्रैफिकिंग में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश की है। यहां कोरोना से पूर्व 2016 से 2019 के बीच सालाना औसतन 267 बच्चों की ट्रैफिकिंग होती थी जो महामारी के बाद 2021-22 में 1214 तक पहुंच गई। महामारी के बाद कर्नाटक में बच्चों की ट्रैफिकिंग के मामले सीधे 18 गुना बढ़ गए। यहां महामारी से पूर्व छह के मुकाबले महामारी के बाद ट्रैफिकिंग के 110 मामले सामने आये। देश में बच्चों की ट्रैफिकिंग के मामलों में लगातार इजाफा होने पर केएससीएफ के प्रबंध निदेशक रीयर एडमिरल, एवीएसएम (सेवानिवृत्त) राहुल कुमार श्रावत ने कहा, हालांकि यह बड़ी संख्या खासी चिंता का विषय है लेकिन इस तथ्य को झुठलाया नहीं जा सकता कि पिछले एक दशक में भारत ने जिस तरह से बच्चों की ट्रैफिकिंग से निपटने की दिशा में कदम उठाए हैं।उससे इस समस्या पर काबू पाने की उम्मीद जगी है। केंद्र, राज्य सरकारों और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ)  जैसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की फौरी और त्वरित कार्रवाइयों से बाल दुव्यार्पार में संलिप्त तत्वों की धरपकड़ में मदद मिली है। साथ ही इससे बच्चों की ट्रैफिकिंग के खिलाफ जागरूकता के प्रसार में भी मदद मिली है।जिससे बहुत से बच्चों को ट्रैफिकिंग का शिकार होने से बचाया जा सका है और इसकी वजह से दर्ज मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गयी है। लेकिन समस्या की व्यापकता को देखते हुए इसके समाधान के लिए एक कड़े और समग्र एंटी ट्रैफिकिंग कानून की आवश्यकता है। हमारी मांग है कि संसद इसी सत्र में इस कानून को पास करे। हम समय नहीं गंवा सकते क्योंकि हमारे बच्चे खतरे में हैं। ट्रैफिकिंग की समस्या पर काबू पाने के लिए तकनीक आधारित हस्तक्षेप की फौरी जरूरत पर जोर देते हुए गेम्स24 गुणा 7 के सह संस्थापक और सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी त्रिविक्रम थंपी ने कहा, साल के शुरू में हमने वादा किया था कि केएससीएफ के साथ हमारा समझौता वित्तीय सहयोग से परे जाते हुए कुछ ठोस काम करेगा। टेक्नोलॉजी लीडर के तौर पर बाजार में गेम्स24 गुणा 7 की विशेष हैसियत और डाटा साइंस और एनालिटिक्स में विशिष्ट क्षमताओं का फायदा उठाते हुए हम बच्चों के उत्थान के लिए टिकाऊ समाधान पेश करेंगे। इस वचनबद्धता के मद्देनजर हमारी इस समग्र और शोधपूर्ण रिपोर्ट का लक्ष्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जरूरी सूचनाओं और तकनीकों से लैस करके बच्चों की ट्रैफिकिंग की समस्या के हल के लिए लक्षित समाधान पेश करना और इसके लिए जरूरी उपकरण मुहैया कराना है।यह रिपोर्ट न केवल भविष्य में सहयोग के नए रास्तों का खाका तैयार करती है बल्कि एक ऐसे भविष्य की कल्पना करती है जहां तकनीक उदात्त मानवीय मूल्यों की प्राप्ति का वाहक बनती है- और यह है हर बच्चे के लिए एक बेहतर भविष्य का वादा जिससे अंतत: हम एक सुरक्षित कल का निर्माण कर सकेंगे। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।

मणिपुर हिंसा के लिए केंद्र सरकार जिम्मेवार : विपक्ष
Published / 2023-07-30 21:21:59
मणिपुर हिंसा के लिए केंद्र सरकार जिम्मेवार : विपक्ष

विपक्षी गठबंधन इंडिया ने साधा केंद्र पर निशाना एबीएन सेंट्रल डेस्क। विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ने मणिपुर के हालात के प्रति घोर उदासीनता दिखाने और चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रविवार को आलोचना की और कहा कि सरकारी तंत्र पूर्वोत्तर राज्य में करीब तीन महीनों से चल रहे जातीय संघर्ष पर काबू पाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) के 21 सांसदों ने मणिपुर में शांति तथा सौहार्द लाने के लिए प्रभावित लोगों के तत्काल पुनर्वास की मांग करते हुए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये और इसे राज्यपाल अनसुइया उइके को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों में लगातार गोलीबारी और मकानों में आगजनी की खबरों से इसमें कोई शक नहीं रह गया है कि सरकारी तंत्र पिछले तकरीबन तीन महीने के लिए स्थिति पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। विपक्षी दलों के सांसदों ने कहा कि पिछले तीन महीने से लगातार इंटरनेट पाबंदी निराधार अफवाहों को बल दे रही है जिससे समुदायों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने ज्ञापन में कहा, प्रधानमंत्री की चुप्पी मणिपुर में हिंसा के प्रति उनकी घोर उदासीनता दिखाती है। विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि समुदायों में गुस्सा तथा अलगाव की भावना है तथा इसे बिना किसी विलंब के निपटाया जाना चाहिए।

2024 में 400 का आंकड़ा पार करेगी भाजपा : मुंजपारा महेंद्रभाई
Published / 2023-07-30 21:19:29
2024 में 400 का आंकड़ा पार करेगी भाजपा : मुंजपारा महेंद्रभाई

विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव फेल, केंद्रीय राज्य मंत्री ने विपक्ष पर किया कटाक्ष टीम एबीएन, रांची। विपक्ष द्वारा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पूरे देश में राजनीतिक चर्चा बनी हुई है। लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाये जा रहे इस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री मुंजपारा महेंद्रभाई ने कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा लाया जा रहा अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह से फेल है। केंद्रीय राज्य मंत्री मुंजपारा महेंद्रभाई अपने झारखंड दौरे को लेकर रविवार को रांची पहुंचे। रांची में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता देश के साथ-साथ पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रही है। इसीलिए वो सभी घबराए हुए हैं और परेशान नजर आ रहे हैं। वो पीएम मोदी को सत्ता से हटाने के एजेंडे पर एक ही काम कर रहे हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री मुंजपारा महेंद्रभाई ने कहा कि विपक्ष द्वारा लाया जा रहा अविश्वास प्रस्ताव का कोई आधार नहीं है। पूरे देश को पता है कि लोकसभा में एनडीए के सांसदों की कितनी संख्या है और विपक्ष की क्षमता कितनी है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव का कोई महत्व नहीं है। इसीलिए विपक्ष के इस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर एनडीए बेफिक्र है। वहीं मुंजपारा महेंद्रभाई ने विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए 404 सीट से ज्यादा लायेगी और विपक्ष को करारा जवाब दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं और सत्ता पर बैठी सरकार मौन है। ऐसे में सरकार की चुप्पी को तोड़ने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाना जरूरी है।

भाजपा की केंद्रीय टीम में फिर से रघुवर
Published / 2023-07-30 00:17:19
भाजपा की केंद्रीय टीम में फिर से रघुवर

जेपी नड्डा ने किया अपनी टीम का ऐलान, वसुंधरा राजे, रमन सिंह समेत इन 38 नेताओं को मिली जगहएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने शनिवार को अपनी राष्ट्रीय टीम में फेरबदल करते हुए उत्तर प्रदेश के एक पसमांदा मुसलमान को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तेलंगाना इकाई के पूर्व अध्यक्ष बंडी संजय कुमार को राष्ट्रीय महासचिव बनाया है। भाजपा ने कर्नाटक के नेता सी टी रवि और असम से लोकसभा सांसद दिलीप सैकिया को महासचिव पद से हटा दिया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व कुलपति तारिक मंसूर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) हैं।सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उन्हें नई टीम में शामिल करने के फैसले को पसमांदा मुसलमानों के लिए पार्टी की पहल का हिस्सा माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश से ही पार्टी के सांसद राधामोहन अग्रवाल को महासचिव बनाया गया है। नयी सूची में ज्यादातर पदाधिकारियों को उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव के पद पर बरकरार रखा गया है। सूची में 13 उपाध्यक्ष, 9 महासचिव, संगठन महामंत्री बी एल संतोष और 13 सचिव शामिल हैं। बिहार से लोकसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह को पार्टी उपाध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए के एंटनी के बेटे अनिल एंटनी को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।सूची इस प्रकार है :राष्ट्रीय उपाध्यक्ष :- डॉ रमन सिंह, वसुंधरा राजे, रघुबर दास, सौदान सिंह, बैजयंत पांडा, सरोज पाण्डेय, रेखा वर्मा, डी के अरुणा, एम चौबा एओ, अब्दुल्ला कुट्टी, लक्ष्मीकांत बाजपेई, लता उसेंडी और तारिक मंसूर। राष्ट्रीय महासचिव : सर्वश्री अरुण सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, दुष्यंत कुमार गौतम, तरुण चुघ, विनोद तावड़े, सुनील बंसल, संजय बंडी और राधामोहन अग्रवाल। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री : श्री बी एल संतोष राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री : शिवप्रकाश (केंद्र : लखनऊ) राष्ट्रीय सचिव: विजया राहटकर, सत्या कुमार, अरविंद मेनन, सुश्री पंकजा मुंडे, डॉ नरेन्द्र सिंह रैना, डॉ अल्का गुर्जर, अनुपम हाजरा, ओम प्रकाश ध्रुवे, ऋतुराज सिन्हा, आशा लकड़ा, कामाख्या प्रसाद तासा, सुरेन्द्र सिंह नागर और अनिल एंटनी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष : राजेश अग्रवाल।

2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने पर फोकस : वित्त मंत्री
Published / 2023-07-30 00:05:18
2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने पर फोकस : वित्त मंत्री

भारत को 2047 तक विकसित बनाने के लिए बुनियादी ढांचे, निवेश, नवाचार पर देना होगा जोर :  निर्मला सीतारमणएबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सरकार चार पहलुओं पर ध्यान दे रही है। ये पहलू बुनियादी ढांचा, निवेश, नवाचार और समावेशन हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए जरूरी संसाधन हैं।उन्होंने कहा कि निवेशकों के हित में सरकार के कई सुधारों के साथ ही भारत में एक बड़ी युवा आबादी है और अर्थव्यवस्था की जरूरत के अनुसार उन्हें कुशल बनाने का लाभ मिलेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के लक्ष्य के साथ चार अलग-अलग पहलुओं पर जोर दिया गया है।हम बुनियादी ढांचे (पहला) पर बहुत अधिक जोर दे रहे हैं। पिछले तीन से पांच वर्षों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सार्वजनिक खर्च में काफी वृद्धि हुई है और 2023-24 में यह आंकड़ा 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जायेगा। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के साथ ही निवेश (दूसरा) पर भी जोर दिया जा रहा है।ऐसे में सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों को भी महत्व दिया गया है। सीतारमण ने सीआईआई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, हम सार्वजनिक निवेश और निजी निवेश दोनों की तलाश कर रहे हैं। इसके लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि तीसरी प्राथमिकता नवाचार की है। सरकार ने जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को कम करने के साथ ही अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों को निजी उद्यमियों के लिए खोला है। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि इन सभी प्राथमिकताओं के साथ ही समावेशन की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि हम जो कुछ भी कर रहे हैं, उसका लाभ भारत के हर वर्ग को मिले।

विफल होता दिख रहा है इंडिया गठबंधन का प्रयोग
Published / 2023-07-30 00:01:06
विफल होता दिख रहा है इंडिया गठबंधन का प्रयोग

2024 में तीसरी बार हो सकती है मोदी सरकार की वापसीअंकित सिंहएबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र की भाजपानीत मोदी सरकार को पटखनी देने की विपक्ष की तमाम कोशिशें विफल नजर आ रही हैं। आगामी चुनावी वर्ष में तीसरी बार मोदी सरकार आने की प्रबल संभावना बन रही है। यह हम नहीं आंकड़े कह रहे हैं। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां की 80 सीटों में से भाजपा गठबंधन के पास 73 सीटें जाते हुए दिखाई दे रही है जबकि चार सीटें समाजवादी पार्टी, दो कांग्रेस और एक आरएलडी के खाते में जा सकती है।उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ 73 सीटें जीत रही है। 2014 में भी उत्तर प्रदेश में भाजपा गठबंधन को 73 सीटें मिली थी। 2024 चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। 2024 में आम आम चुनाव होने हैं। आम चुनाव को लेकर राजनीतिक मंच लगातार तैयार हो रहे हैं। माना जा रहा है कि 2024 में दो गठबंधनों के बीच महामुकाबला होगा। एक ओर नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए होगी तो दूसरी और विपक्षी एकता मंच जिससे इंडिया का नाम दिया गया है।इन सब के बीच एक ओपिनियन पोल में 2024 को लेकर बड़ा दावा किया गया है। ओपिनियन पोल में साफ तौर पर कहा गया है कि 2024 में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए स्पष्ट बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाएगी। इसका मतलब साफ है कि 2024 में नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन सकते हैं। एनडीए 2024 में 318 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। वहीं, विपक्षी एकता मंच जिसे इंडिया कहा जा रहा है उसके खाते में 175 और अन्य के खाते में 50 सीटें जा सकती हैं।2024 में भी भाजपा अपने दम पर सरकार बना सकती है। उसके खाते में 290 सीटें जायेंगी। हालांकि 2019 की तुलना में यह 13 सीटें कम हैं। कांग्रेस की सीटों में इजाफा हो रहा है। कांग्रेस 66 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है जबकि आम आदमी पार्टी को 10 और तृणमूल कांग्रेस के 29 सांसद हो सकते हैं।  उत्तर प्रदेशसबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां की 80 सीटों में से भाजपा गठबंधन के पास 73 सीटें जाते हुए दिखाई दे रही है जबकि चार सीटें समाजवादी पार्टी, दो कांग्रेस और एक आरएलडी के खाते में जा सकती है। उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ 73 सीटें जीत रही है। 2014 में भी उत्तर प्रदेश में भाजपा गठबंधन को 73 सीटें मिली थी।उत्तराखंडउत्तराखंड में बीजेपी लगातार तीसरी बार सभी 5 सीटें जीत सकती है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को 47% वोट मिलने की संभावना है, एलडीएफ को 2024 में 41% वोट मिलने की उम्मीद है। बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए 11% वोटों के साथ तीसरे स्थान पर है। सीटों की बात करें तो एलडीएफ को 6 और यूडीएफ को 14 मिल सकती है।ओडिशाइंडिया टीवी-सीएनएक्स ओपिनियन पोल में ओडिशा में नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी) को 45% वोट मिलने की संभावना है, 2024 में बीजेपी को 41% वोट मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस 11% वोटों के साथ तीसरे स्थान पर है। सर्वेक्षण में 2024 में ओडिशा में बीजेडी के लिए 13 लोकसभा सीटों की भविष्यवाणी की गई है, बीजेपी को फिर से 8 सीटें मिल सकती हैं।  पश्चिम बंगाल  सर्वे के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2024 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी की सीट हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ मजबूत होकर उभरने की संभावना है, जबकि पिछली बार कड़ी टक्कर देने वाली भाजपा को कई सीटें खोने का अनुमान है।ओपिनियन पोल में 2024 में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को 29 लोकसभा सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि बीजेपी को 12 सीटें मिल सकती हैं। वाम मोर्चे के शून्य दोहराए जाने से कांग्रेस के 1 सीट जीतने की संभावना है। 2019 में भाजपा यहां 18 सीटों पर जीत हासिल की थी।  महाराष्ट्रपिछले आम चुनावों के बाद से महाराष्ट्र में राजनीतिक विभाजन 2024 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में एनडीए की सीटों पर प्रभाव छोड़ने की संभावना है, हालांकि, भगवा पार्टी को इतना नुकसान नहीं होगा कि उसे सबसे अधिक सीटें जीतने से रोका जा सके। 2019 में शिवसेना (बिना गुटबाजी के) के साथ अविभाजित चुनाव लड़ने वाले एनडीए ने 48 में से 41 सीटें हासिल की थीं, हालांकि, 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को अगले साल सीटों का बड़ा नुकसान होने की संभावना है।ओपिनियन पोल के अनुसार, बीजेपी को 3 सीटों का नुकसान झेलते हुए 20 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली उसकी सहयोगी पार्टी शिव सेना को केवल 2 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला उसका प्रतिद्वंद्वी गुट 2024 में 11 सीटें जीत सकती है। भविष्यवाणी से पता चलता है कि शिवसेना के वफादार मतदाता पार्टी में विभाजन से प्रभावित नहीं हुए हैं और अगले साल के चुनावों में एकनाथ शिंदे के मुकाबले उद्धव ठाकरे का समर्थन करने की संभावना है। 2019 में 4 सीटें जीतने वाली एनसीपी (अविभाजित) अगले साल 6 सीटें जीतने की संभावना है। हालाँकि, 6 में से, अजीत पवार गुट को केवल 2 सीटें जीतने की संभावना है, जबकि शरद पवार पक्ष 4 सीटें जीत सकता है।कर्नाटकअगर कर्नाटक में आज लोकसभा चुनाव 2024 होते हैं तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 20 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस 7 सीटें जीत सकती है और जेडीएस (जनता दल सेक्युलर) को सिर्फ 1 सीट मिल सकती है। बीजेपी को 47 फीसदी वोट, कांग्रेस को 40 फीसदी वोट और जेडीएस को सिर्फ 9 फीसदी वोट मिलने की संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाले राज्य में कांग्रेस केवल 7 सीटें ही जुटा सकी।गुजरातलोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए और विपक्ष के गठबंधन इंडिया के बीच घमासान के बीच काफी उतार-चढ़ाव होने की उम्मीद है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य गुजरात वोट प्रतिशत में अहम भूमिका निभाकेगा और इंडिया टीवी द्वारा कराए गए ओपिनियन पोल के मुताबिक, बीजेपी इस राज्य की सभी 26 लोकसभा सीटों पर कब्जा करने जा रही है। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 56 प्रतिशत वोटों के साथ गोवा में सबसे पुरानी पार्टी और अअढ को पछाड़ने की भी उम्मीद है।बाकी राज्यों का हालराजस्थान में कुल 25 में से 21 लोक सभा सीटों पर एनडीए की जीत हो सकती है, जबकि बाकी चार सीटें कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के खाते में जा सकती है। मध्य प्रदेश में कुल 29 सीटों में से एनडीए को 24 पर जीत हासिल हो सकती है, जबकि बाकी पांच सीटें विपक्षी गठबंधन के खाते में जा सकती है।तमिलनाडु में कुल 39 सीटों में से डीएमके के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 30 लोक सभा सीटें मिल सकती है, जबकि बाकी 9 सीटें एनडीए के खाते में जा सकती है। बिहार में कुल 40 सीटों में से एनडीए को 24 सीटों पर जीत हासिल हो सकती है, जबकि बाकी 16 सीटें विपक्षी गठबंधन के पास जा सकती है। राजद और जदयू को 7-7 सीटें मिल सकती हैं। आंध्र प्रदेश में सभी की सभी 25 लोक सभा सीटें वहां की सत्तारूढ दल रफ कांग्रेस को मिल सकती है, और दोनों राष्ट्रीय गठबंधनों को एक भी सीट नहीं मिल सकती है।तेलंगाना में कुल 17 लोक सभा सीटों में से नौ सीटें वहां की सत्तारूढ पार्टी भारत राष्ट्र समिति को मिल सकती है, जबकि एनडीए को छह, और विपक्षी गठबंधन को केवल दो सीटें मिल सकती है। दिल्ली में अगर आम आदमी पार्टी का कांग्रेस के साथ सीटों को लेकर समझौता हुआ, तो कुल सात लोकसभा सीटों में से बीजेपी को पांच सीटें मिल सकती है, जबकि बाकी दो सीटें इंडिया गठबंधन को मिल सकती है। इसी तरह पंजाब में अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट समझौता हुआ, तो यह गठबंधन सभी की सभी 13 लोक सभा सीटें जीत सकती है, और एनडीए को एक भी सीट नहीं मिल सकती है।हरियाणा में कुल 10 में से आठ सीटें एनडीए को मिल सकती है, जबकि विपक्षी गठबंधन को बाकी दो सीटें मिल सकती है। झारखंड में कुल 14 सीटों में से एनडीए को 13 सीटों पर जीत हासिल हो सकती है, जबकि विपक्षी गठबंधन को सिर्फ एक सीट मिल सकती है।छत्तीसगढ में कुल 11 लोक सभा सीटों में से एनडीए सात पर जीत हासिल कर सकती है, जबकि बाकी चार सीटें इंडिया गठबंधन को मिल सकती है। जम्मू कश्मीर और लद्दाख की कुल 6 लोकसभा सीटों में से  एनडीए को तीन, विपक्षी इंडिया गठबंधन को दो, और अन्य को एक सीट मिल सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों में, असम की कुल 14 में से 12 सीटें एनडीए को मिल सकती है, जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन और अकवऊऋ को एक-एक सीट मिल सकती है। मणिपुर में दोनों सीटें विपक्षी इंडिया गठबंधन को मिल सकती है। लेकिन बाकी छह पूर्वोत्तर राज्यों में एनडीए सभी नौ सीटें जीत सकती हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने शुरू की 100 माइक्रोसाइट परियोजना
Published / 2023-07-28 17:37:42
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने शुरू की 100 माइक्रोसाइट परियोजना

एबीएन सेंट्रल डेस्क। डिजिटल स्वास्थ्य अपनाने को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 100 माइक्रोसाइट परियोजना शुरू की है।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां बताया कि एक माइक्रोसाइट, उन छोटी और मध्यम स्तर के क्लीनिक, नर्सिंग होम, 10 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल, प्रयोगशाला फार्मेसी और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का एक ऐसा समूह होगा जो आयुष्मान भारत से जुड़े हैं और रोगियों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। ये माइक्रोसाइट्स पूरे देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्थापित की जायेंगी।

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