लोकसभा चुनाव 2024 के लिए यूपी में भाजपा का स्पेशल दांवउत्तर प्रदेश में राजनीतिक जानकार इसे लोकसभा चुनाव-2024 से पहले अन्य पिछड़ी जाति और अनुसूचित जाति के मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा के गेम प्लान का हिस्सा बता रहे हैंएबीएन सेंट्रल डेस्क। भाजपा ने 24 जुलाई को एक भव्य कार्यक्रम के आयोजन में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में अपने वोट आधार का विस्तार करने के लिए विपक्षी दलों के 18 बड़े नेताओं के नामों की घोषणा की। लोकसभा में 80 सांसद भेजने वाले उत्तर प्रदेश को लेकर भाजपा की स्पेशल रणनीति से बाकी सब चौंक गये। देश और उत्तर प्रदेश में सत्तारुढ़ भगवा पार्टी में बड़े पैमाने पर विपक्षी दिग्गजों के शामिल होने से राजनीतिक जानकारों की भौंहें तन गयी हैं।लोकसभा चुनाव- 2024 से पहले यूपी में बीजेपी के गेम प्लान का स्पेशल हिस्साराजनीति में हर कदम के पीछे कोई बड़ा कारण से होता है। राजनीति के विश्लेषकों ने इसे लोकसभा चुनाव-2024 से पहले अन्य पिछड़ी जाति (डइउ) और अनुसूचित जाति (रउ) के मतदाताओं को लुभाने के लिए बीजेपी के गेम प्लान का हिस्सा बताया है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में ये दोनों सामाजिक वर्ग वोट बैंक का सबसे बड़ा ब्लॉक हैं। यह रुझान 17 जुलाई को शुरू हुआ जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पार्टी के भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होने के फैसले की घोषणा की थी।अमित शाह से मुलाकात के बाद ओमप्रकाश राजभर ने लिया बड़ा फैसलाकेंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार अमित शाह से नई दिल्ली में ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात के एक दिन बाद यह घटनाक्रम सामने आया था। राजभर ने कुछ महीने पहले ही समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ लिया था। सपा के साथ उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव-2022 लड़ा और छह सीटें जीतने में कामयाब रहे थे। राजभर खुद गाजीपुर जिले की जहूराबाद विधानसभा सीट से जीते थे। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सहयोगियों को महत्व नहीं देने का आरोप लगाया था।इसके तुरंत बाद, यूपी के पूर्व विधायक दारा सिंह चौहान ने पाला बदल लिया और समाजवादी पार्टी से भाजपा में शामिल हो गए। कुछ ही दिनों में, भाजपा ने फिर से हमला किया और विभिन्न राजनीतिक दलों से लगभग 18 बड़े नेताओं को शामिल करने की घोषणा की। इनमें उत्तर प्रदेश के अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी सपा से 11, बहुजन समाज पार्टी (इरढ) से पांच, कांग्रेस से एक और राष्ट्रीय लोक दल से एक दिग्गज शामिल है। विपक्षी दलों से भाजपा में आए इन स्पेशल 18 में दो पूर्व सांसद और दो पूर्व मंत्री शामिल हैं।पीएम मोदी के खिलाफ सपा प्रत्याशी रही शालिनी यादव भी भाजपा मेंसबसे खास बात यह है कि साल 2019 के आम चुनाव में वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाली शालिनी यादव भी भाजपा में शामिल हो गईं। अपने पहले संसदीय चुनाव में शालिनी यादव ने लोकसभा चुनाव-2019 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से चुनाव लड़ा था और 4.75 लाख से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हार गई थीं। वह 2019 में ही समाजवादी पार्टी में शामिल हुई थीं।राजभर के आने से भाजपा को गैर-यादव ओबीसी पर पकड़ मजबूत करने में मददयूपी के राजनीतिक विश्लेषकों ने इस राजनीतिक बदलावों को भाजपा के अपने ओबीसी और एससी वोट आधार को बढ़ाने की योजना के रूप में चिह्नित किया है। खासकर पूर्वी यूपी में वोट बैंक का यह समूह चुनावों में अक्सर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। लखनऊ के भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के एचओडी शशिकांत पांडे ने कहा, चूंकि ओमप्रकाश राजभर पाला बदलने वाले पहले व्यक्ति थे, इसलिए राजभर से ही शुरू करते हैं। पूर्वी यूपी के जिलों में ओबीसी और एससी की आबादी का एक बड़ा हिस्सा होने के कारण राजभर समुदाय अक्सर लगभग दो दर्जन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए निर्णायक कारक की भूमिका निभाता है। राजभर के शामिल होने से भाजपा को गैर-यादव ओबीसी पर अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी।भाजपा में नये शामिल होने वालों की सूची में छह ओबीसी और तीन एससी नेताशशिकांत पांडे ने कहा कि भाजपा में नये शामिल होने वालों की सूची में छह ओबीसी नेता और तीन एससी नेता शामिल हैं। सत्यपाल यादव, सुनीता यादव, साहब सिंह सैनी, राजपाल सैनी और सुषमा पटेल ओबीसी वर्ग से हैं जबकि अंशुल वर्मा, जगदीश सोनकर और गुलाब सरोज अनुसूचित जाति वर्ग से हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नेताओं की संक्षिप्त प्रोफाइल पर एक नजर डालते हैं।राजपाल सैनीओबीसी में राजपाल सैनी ने अपना करियर बीएसपी से शुरू किया, 2002 में विधायक चुने गये और 2010 में राज्यसभा भेजे गये। हालांकि, बाद में राजपाल सैनी राष्ट्रीय लोक दल में शामिल हो गए और सामाजिक न्याय मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में तैनात हुए।साहब सिंह सैनीसाहब सिंह सैनी दो बार सपा विधायक और अखिलेश यादव सरकार में पूर्व मंत्री थे। वह बीजेपी में शामिल हो गए और यूपी के सहारनपुर में सक्रिय राजनीति में लौटने से पहले 2022 में उत्तराखंड में राष्ट्रीय क्रांतिकारी मोर्चा का गठन किया।सुषमा पटेलसुषमा पटेल ने अपना करियर बीएसपी से शुरू किया और 2017 में जौनपुर जिले की मुंगरा बादशाहपुर सीट से विधायक चुनी गईं। 2022 में वह एसपी में शामिल हो गईं थी।जगदीश सोनकरइस बीच, जगदीश सोनकर को 2022 के यूपी चुनाव के लिए सपा ने टिकट देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उनके वफादारों ने विरोध प्रदर्शन किया और इस्तीफा दे दिया। इससे पहले उन्होंने 2002 और 2007 में दो बार शाहगंज विधानसभा सीट जीती थी और बाद में 2012 और 2017 में मछलीशहर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की।अंशुल वर्मा2019 तक भाजपा सदस्य रहे अंशुल वर्मा भाजपा के लखनऊ कार्यालय में तैनात एक सुरक्षा गार्ड को अपना इस्तीफा सौंपने के लिए सुर्खियों में आए थे। उस वर्ष आम चुनाव से पहले भाजपा द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद वह सपा में शामिल हो गए। वर्मा ने 2014 में भाजपा के लिए हरदोई सीट से लोकसभा चुनाव जीता था।
सच्चाई की जीत होती ही है, मुझे क्या करना है मेरे दिमाग में है... एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट से सजा में राहत मिलने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि आज नहीं तो कल सच्चाई की जीत होती ही है। मुझे क्या करना है मेरे दिमाग में है। राहुल ने जनता के प्यार के लिए भी शुक्रिया अदा किया। वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सत्य और साहस की जीत हुई है। राहुल गांधी ने गजब का साहस दिखाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जल्द ही संसद में लौंटेंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरनेम मामले पर सुनवाई करते हुए राहुल गांधी की सजा पर रोक लगा दी है। इसके बाद उनकी सांसदी की बहाली का रास्ता साफ हो गया है और जल्द संसद सदस्यता बहाल की जा सकती है। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरनेम वाली टिप्पणी से जुड़े मानहानि के मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद शुक्रवार को कहा कि चाहे कुछ भी हो जाये, वह भारत की अवधारणा (आइडिया ऑफ इंडिया) की रक्षा करने का अपना कर्तव्य निभाते रहेंगे। उन्होंने ट्वीट किया- चाहे कुछ भी जाये, मेरा कर्तव्य वही रहेगा। भारत की अवधारणा की रक्षा करना। सुप्रीम कोर्ट ने मोदी उपनाम को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी के संबंध में 2019 में दायर आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाते हुए शुक्रवार को उनकी लोकसभा की सदस्यता बहाल करने का रास्ता साफ कर दिया। शीर्ष अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने मोदी उपनाम से जुड़े मानहानि के मामले में कांग्रेस नेता की दोषसिद्धि पर रोक लगाने के अनुरोध वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी। गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने 13 अप्रैल 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी सभा में मोदी उपनाम के संबंध में की गई कथित विवादित टिप्पणी को लेकर राहुल के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था। राहुल गांधी मानहानि के मामले में राहत मिलने के बाद शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थन में जमकर नारेबाजी की और जश्न मनाया। राहुल गांधी के कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड पहुंचने पर उनके साथ उनकी बहन औेर पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे। कार्यकर्ताओं ने ढोल बजाकर और झंडे लहराकर जश्न मनाया।
मणिपुर में फिर क्यों भड़क गयी हिंसा, फोर्स से सीधे टकरायी जनताएबीएन सेंट्रल डेस्क। मणिपुर में एक बार फिर माहौल तनावपूर्ण हुआ है और गुरुवार को चुराचांदपुर में 35 लोगों के शव को सामूहिक रूप से दफ्न करने की कोशिश के बीच हिंसा भड़क गयी। चुराचांदपुर और विष्णुपुर के बॉर्डर पर बीते दिन सुरक्षाबलों और लोगों के बीच हिंसा हुई, इस दौरान पत्थरबाजी हुई और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गये। आखिर यह क्यों हुआ और हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या दखल दिया, समझिये…मणिपुर के संगठन इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने कुकी-जोमी समुदाय के कुल 35 शवों को एक साथ दफनाने की बात की थी। इस संगठन ने चुराचांदपुर जिले के एस बोलजांग गांव के एक मैदान में शव दफनाने की बात कही गयी थी, लेकिन पुलिस की ओर से ऐसा न करने की अपील की गयी थी। गुरुवार सुबह से लोगों का इस मैदान में जाने का सिलसिला शुरू हुआ और हालात बिगड़ना भी शुरू हो गये। फोर्स ने लोगों को इस इलाके की ओर आने से रोका था, जिसके बाद भीड़ ने बड़ी संख्या में विरोध किया और पत्थरबाजी की। बाद में सुरक्षाबलों ने हवाई फायरिंग की और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गये। इस नए बवाल ने राज्य में फिर से माहौल को गर्म कर दिया है।केंद्र सरकार ने दिया आश्वासन35 शव को दफनाने की खबर ने जब माहौल गर्म किया, तब मणिपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल दिया। हाईकोर्ट ने प्रस्तावित अंत्येष्टि स्थल पर यथास्थिति बनाने के निर्देश दिये थे। सिर्फ हाईकोर्ट ही नहीं बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी हालात को काबू करने की कोशिश की।गृह मंत्रालय की अपील के बाद ग्रुप ने सात दिन के लिए अंत्येष्टि के कार्यक्रम को आगे बढ़ा दिया। केंद्र ने आश्वासन दिया है कि 35 शवों को दफनाने की मांग पर जल्द ही फैसला लिया जायेगा। संगठन ने जब कुकी-जोमी समुदाय के 35 शवों को दफनाने की बात कही थी, तभी इसको लेकर चेतावनी दी गयी थी कि ऐसा होने से हिंसा भड़क सकती है। जब गुरुवार को यहां लोगों का पहुंचना शुरू हुआ, तभी पत्थरबाजी और पुलिस से हथियार लूट लिये गये थे। गौरतलब है कि मणिपुर में पिछले करीब तीन महीने से हिंसा हो रही है। मैतई और कुकी समुदाय के बीच जारी जातीय संघर्ष ने 3 मई को हिंसा का रूप ले लिया। 3 मई को एक मार्च निकला, जिसके बाद हिंसा शुरू हो गयी थी और अबतक इस हिंसा में 160 से अधिक लोगों की मौत हो गयी। मणिपुर के मसले पर सड़क से लेकर संसद और कोर्ट तक बहस चल रही है।
उत्तराखंड और अंडमान-निकोबार में महसूस किये गये भूकंप के झटके एबीएन सेंट्रल डेस्क। इन दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में कई बार भूकंप के झटके महसूस किये गये। गुरुवार को एक बार फिर उत्तराखंड से लेकर अंडमान निकोबार तक जमीन कांपने लगी। दरअसल, गुरुवार सुबह एक बार फिर अंडमान-निकोबार में भूकंप के झटके महसूस किये गये। इसके अलावा उत्तराखंड में भी आज सुबह धरती कांपी। बुधवार को भी अंडमान निकोबार में भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गये थे। गुरुवार को अंडमान-निकोबार में सुबह 4.17 बजे भूकंप के झटके महसूस किये गये। जिसकी तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 4.3 मापी गयी। हालांकि, अभी तक इस भूकंप से किसी भी तरह के जान या माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। एक दिन पहले भी अंडमान में आया था भूकंप बता दें कि हाल के दिन में अंडमान निकोबार द्वीप समूह में कई बार भूकंप के झटके महसूस किये गये हैं। कल यानी बुधवार 2 अगस्त की सुबह लगभग 5:40 बजे यहां भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। तब राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया था कि इन भूकंप के झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.0 थी। इस भूकंप से भी किसी प्रकार के जान या नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आयी थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उससे पहले बीते शनिवार की रात को भी अंडमान निकोबार द्वीप समूह में भूकंप के झटके महसूस किये गये थे। तब भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल तक 5.8 मापी गयी थी। उत्तराखंड में भी महसूस किये गये भूकंप के झटके इसके अलावा गुरुवार को उत्तराखंड में भी भूकंप के झटके महसूस किये गये। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में गुरुवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिससे लोग सहम गए और घरों से बाहर निकल आए। इस भूकंप की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 2.2 मापी गयी। बताया गया कि इस भूकंप का केंद्र नेपाल था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के लिए वित्त और विश्व बाजारों तथा आपूर्ति शृंखला तक पहुंच बनाने के आह्वान करते हुए बुधवार को कहा कि जब जब महिलाएं समृद्ध होती हैं, तो दुनिया समृद्ध होती है। मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में महिला सशक्तिकरण पर जी-20 मंत्रिस्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए एक स्तरीय मंच बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जहां उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाएं आदर्श बन जायें। उन्होंने कहा कि उन बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए जो बाजारों, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं और किफायती वित्त तक उनकी पहुंच को रोकती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के देखभाल और घरेलू काम के बोझ को एक ही समय में उचित रूप से समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के तहत, महिला सशक्तिकरण पर एक नया कार्य समूह स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कह कि जब महिलाएं समृद्ध होती हैं, तो दुनिया समृद्ध होती है। उनका आर्थिक सशक्तिकरण विकास को बढ़ावा देता है और शिक्षा तक उनकी पहुंच वैश्विक प्रगति को गति देती है। उन्होंने कहा कि उनका नेतृत्व समावेशिता को बढ़ावा देता है और उनकी आवाज सकारात्मक बदलाव को प्रेरित करती है। प्रधानमंत्री ने ग्रामीण कृषि परिवारों की रीढ़ और छोटे व्यापारियों तथा दुकानदारों के रूप में महिलाओं की भूमिकाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के नवीन समाधानों की कुंजी महिलाओं के पास है। मोदी ने भारत में महिला उद्यमियों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि महिला उद्यमी वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं।उन्होंने कहा कि दशकों पहले, 1959 में मुंबई में सात गुजराती महिलाएं एक ऐतिहासिक सहकारी आंदोलन - श्री महिला गृह उद्योग बनाने के लिए एक साथ आयीं, जिसने लाखों महिलाओं और उनके परिवारों के जीवन को बदल दिया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चिली के दक्षिणी हिस्से में वायु सेना का एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके कारण चिली वायु सेना के पांच सदस्यों की मौत हो गयी।वायु सेना ने मंगलवार को बताया कि यह दुर्घटना की सोमवार रात घटित हुई। वायु सेना ने एक बयान में कहा- दक्षिणी चिली के लॉस लागोस क्षेत्र में सोमवार रात एक बेल 412 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान दो पायलटों, दो एयर क्रू सदस्यों और एक बचाव पैराट्रूपर सहित पांच सदस्यीय चालक दल के साथ रात्रि उड़ान प्रशिक्षण मिशन का संचालन कर रहा था। सभी चालक दल की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गयी। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। बयान में कहा गया है कि चिली वायु सेना दुर्घटना में मारे गये लोगों के परिवारों को सहायता और सहायता प्रदान कर रही है।चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारित एक संदेश में वायुसैनिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया और चैंबर ऑफ डेप्युटीज ने मंगलवार को अपने सत्र की शुरुआत में एक मिनट का मौन रखा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र में ठाणे जिले के शाहपुर के पास मंगलवार सुबह एक गर्डर लॉन्चिंग मशीन गिरने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गयी और तीन अन्य घायल हो गये। यह घटना मंगलवार तड़के शाहपुर तहसील के सरलांबे गांव के पास हुई। हादसे के समय एक पुल के लिए गर्डर लॉन्चिंग का काम चल रहा था। जानकारी के मुताबिक मशीन का इस्तेमाल 701 किलोमीटटर लंबे एक्सप्रेस-वे फेज तीन के निर्माणाधीन पुल के लिए किया जा रहा था।आशंका है कि अन्य छह मजदूर और इंजीनियर मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। इसमें वे लोग शामिल नहीं हैं, जिन्हें चोटें आयी हैं और जिनका शाहपुर के एक स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की दो टीमें राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा- अब तक 16 शव निकाले जा चुके हैं और तीन लोग घायल हुए हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने न्यूनतम वेतन सीमा और राष्ट्रीय मजदूरी दर का निर्धारण करने के लिए तकनीकी इनपुट और सिफारिशें देने के लिए एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया है। समूह का कार्यकाल सूचना जारी होने से तीन साल का होगा। इंस्टीट्यूट आफ इकोनॉमिक ग्रोथ के निदेशक प्रोफेसर अजीत मिश्र की अध्यक्षता वाले इस समूह के अन्य सदस्यों में आईआईएम कोलकाता के प्रोफेसर तारिक चक्रवर्ती, एनसीएईआर की वरिष्ठ फैलो डॉ अनुश्री सिन्हा, संयुक्त सचिव श्रीमति विभा भल्ला और वीवीजीएनएलआई के महानिदेशक डॉ एच श्रीनिवास शामिल हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में श्रम एवं रोजगार मामलों के वरिष्ठ सलाहकार डीपीएस नेगी इस समूह के सदस्य सचिव होंगे। यह विशेषज्ञ समूह भारत सरकार को न्यूनतम वेतन और राष्ट्रीय मजदूरी दर के निर्धारण के संबंध में अपनी सिफारिशें देगा। मजदूरी दर तय करने के लिए समूह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संबंध में जारी सबसे अच्छी व्यवस्थाओं पर विचार करेगा। मजदूरी दर को तय करने के लिए वैज्ञानिक मानदंड और प्रक्रिया तय करेगा।
पेट्रोल-डीजल का मुनाफा लोगों में बांटे सरकार : कांग्रेस एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार सस्ती दर पर पेट्रोल और डीजल का आयात कर देश में उसे महंगे दाम पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रही है और इस कमाई का फायदा देश की जनता को मिले इसलिए कीमत कम से कम 35 प्रतिशत तक की कम की जानी चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश रविवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल पर निर्दयी तरीके से मुनाफाखोरी कर रही है और पिछले एक साल में कच्चा तेल 35 प्रतिशत तक सस्ता हुआ है लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं घटाए गए। उन्होंने कहा- देशवासी महंगाई और बेरोजगारी की मार झेलते हुए आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार देशवासियों की खून-पसीने की कमाई लूटने में लगी है। कच्चे तेल की कीमत कम होने के बावजूद उसका लाभ देशवासियों को देने की बजाए सरकार पेट्रोल और डीजल पर निर्दयी तरीके से टैक्स लगाकर सस्ते में ईंधन को महंगे में बेचकर मुनाफाखोरी कर रही है। सरकार ने पेट्रोल व डीजल में न केवल स्वयं भयानक मुनाफाखोरी की है, बल्कि मित्र पूंजीपतियों के भी वारे न्यारे करवाये हैं। टैक्स बढाने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई और गरीबों, मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों की जेब पर डाका डाला गया है। बीते एक साल में कच्चा तेल 35 प्रतिशत सस्ता हो चुका है, मगर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं घटाए गए हैं। कांग्रेस नेता ने कहा सरकारी और प्राइवेट तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल बेचने पर 10 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा का मुनाफा हो रहा है। इसके बावजूदजनता को राहत नहीं दी जा रही है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार देश की तीन सरकारी तेल कंपनियों आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को मौजूदा वित्त वर्ष मे एक लाख करोड़ रुपये के करीब आपरेटिंग प्रॉफिट होने का अनुमान है जो बीते वर्ष के 33 हजार करोड़ रुपए से तीन गुना है। पहली तिमाही में भी उनके रिफाइनिंग मार्जिन में इजाफे का अनुमान है। यदि सरकारी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं तो प्राइवेट कंपनियों को भी यह भारी लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा- इस सरकार के कार्यकाल में औसतन कच्चे तेल की कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल से कम रही है। पिछले तीन महीने से भी लगातार 70-80 डॉलर के बीच में रही लेकिन जनता के लिए पेट्रोल, डीजल के दाम कम नहीं किए जा रहे हैं। देश के अधिकतर हिस्सों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा और डीजल 90 रुपये के ऊपर हैं। सरकार ने देश को महंगाई में झोंक रखा है। सब्जी, फल, मसाले समेत अन्य चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। सरकार जनता को कोई राहत देने की बजाय मुनाफाखोरी कर रही है। श्री रमेश ने कहा केंद्र सरकार यदि देश में बढ़ रही महंगाई से राहत देना चाहे तो पेट्रोल और डीजल के टैक्स बंद कर पेट्रोल और डीजल के मूल्यों को 25-30 रुपये प्रति लीटर कम कर सकती है। सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के मूल्यों में आयी कमी के अनुरूप पेट्रोल- डीजल के मूल्यों को 35 प्रतिशत कम करनी चाहिए, ताकि देश की जनता को कमर तोड़ महंगाई से कुछ राहत मिल सके।
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