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प्रधानमंत्री ई बस सेवा को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी
Published / 2023-08-17 00:09:47
प्रधानमंत्री ई बस सेवा को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रदूषण रहित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए 57 हजार 613 करोड़ रूपये की प्रधानमंत्री ई बस सेवा को मंजूरी दे दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी।उन्होंने कहा कि इस हरित परिवहन सेवा के लिए मंजूर 57 हजार 613 करोड़ रूपये की कुल राशि में से 20 हजार करोड़ रूपये की राशि केन्द्र सरकार तथा शेष राशि राज्य सरकार वहन करेंगी। उन्होंने कहा कि इस सेवा के लिए 169 शहरों में से पहले 100 शहरों को चुना जायेगा और इनमें इलेक्ट्रिक बसें चलायी जायेंगी।  श्री ठाकुर ने कहा कि निजी-सार्वजनिक भागीदारी पर आधारित इस योजना के तहत बसों के संचालन के लिए प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जायेगा। यह राशि प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर तय की जायेगी। उन्होंने कहा कि इससे सार्वजनिक परिवहन प्रणाली प्रदूषण रहित बनेगी।

2047 में फहरायेंगे विकसित भारत का तिरंगा : मोदी
Published / 2023-08-15 19:45:55
2047 में फहरायेंगे विकसित भारत का तिरंगा : मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों खासकर युवाओं का आज आह्वान किया कि भारत को 2047 में विकसित भारत के निर्माण के लिए शुचिता, पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के सिद्धांतों पर काम करें और कहा कि वह भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टीकरण की बुराइयों को दूर करने के लिए जुटे रहेंगे। श्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी नीति साफ है और नीयत पर कोई सवालिया निशान नहीं है। सच्चाई को स्वीकार करके उसके समाधान के लिए बढ़ना होगा। मैं आज आपसे मदद और आशीर्वाद मांगने आया हूं कि देश की समस्याओं को आज गंभीरता से लेना हेै।वर्ष 2047 में जब देश आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा तब दुनिया में भारत का ध्वज विकसित भारत का तिरंगा फहरायेंगे। हमारे संकल्प में रत्ती भर भी कमी नहीं आयेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए शुचिता पारदर्शिता निष्पक्षता पहली जरूरत है। हम उसे जितना खाद पानी दे सकें। यह हमारा सामूहिक दायित्व है। 75 साल के इतिहास में भारत का सामर्थ्य कम नहीं हुआ। जो देश सोने की चिड़िया था, वह 2047 में देश की आज़ादी के शताब्दी वर्ष में फिर से उसी वैभव से खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में 30 साल से कम आयु के सबसे अधिक लोग भारत में हैं। उन्होंने कहा कि वह भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टीकरण की बुराई से लड़ते रहेंगे। भ्रष्टाचार से लड़ने का मेरी प्रतिबद्धता है। परिवारवाद ने देश के लोगों के अवसर छीने हैं और तुष्टीकरण ने राष्ट्रीय चरित्र को दाग लगा दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास में एक कालखंड की एक छोटी सी घटना ने देश पर दीर्घकालिक प्रभाव डाला और देश ने एक हजार साल की गुलामी झेली और आज हम ऐसे संक्रमण काल में खड़े हैं जहां हमारे कार्य आने वाले 1000 वर्ष तक भारत के भविष्य की दिशा निर्धारित करेंगे। उन्होंने कहा, हम जो भी करेंगे, जो भी कदम उठायेंगे, जो फैसला लेंगे, वो अगले एक हजार साल तक अपनी दिशा निर्धारित करने वाला है, भारत के भाग्य को लिखने वाला है। प्रधानमंत्री ने अपने करीब डेढ़ घंटे के भाषण में अपनी सरकार के नौ साल के कामकाज का उल्लेख किया और कहा कि देश आज हमारी माताओं-बहनों के सामर्थ्य से आगे बढ़ा है। आज देश प्रगति की राह पर चल पड़ा है तो हमारे किसान भाई-बहनों का पुरुषार्थ है, यह उनका ही परिश्रम है कि देश आज कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।प्रधानमंत्री ने मणिपुर को लेकर देश की चिंताओं को भी रखा और कहा कि मणिपुर बड़ी समस्या से जूझ रहा है। उन्होंने मणिपुर के लोगों को आश्वस्त किया कि इस नाजुक घड़ी में समूचा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा मणिपुर में शांति बहाली के सभी प्रयास किये जा रहे हैं और इन प्रयासों से वहां शांति लौट रही है तथा उन्हें विश्वास है कि रास्ता जरूर निकलेगा और वहां जल्द शांति बहाली होगी।प्रधानमंत्री ने महंगाई की समस्या पर भी बोले और कहा कि युद्ध के कारण पूरा विश्व महंगाई से परेशान है। हम भी महंगाई से कम पीड़ित हैं। लेकिन वह इसे भी दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अपने भाषण में अगले लोकसभा चुनाव में जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि वह अगले वर्ष भी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे।

पीएमकेएसके भारत के कृषि क्षेत्र को बदल सकता है : डॉ मनसुख मंडाविया
Published / 2023-08-13 22:14:43
पीएमकेएसके भारत के कृषि क्षेत्र को बदल सकता है : डॉ मनसुख मंडाविया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार, देश की लगभग 65% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और 47% आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। कृषि एक समयबद्ध गतिविधि है जिसमें उत्पादन और उत्पादकता को अधिकतम करने के लिए सही समय पर सही कृषि-इनपुट की आवश्यकता होती है। कृषि-इनपुट कृषि के आवश्यक तत्व हैं और एक कुशल वितरण प्रणाली कृषि आय की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में, इनपुट सेवाओं का नेटवर्क बिखरा हुआ है और साइलो में बीज, उर्वरक, कीटनाशकों और उपकरणों के लिए अलग-अलग डीलर नेटवर्क काम कर रहे हैं। इसके अलावा, मिट्टी, बीज, उर्वरक की जांच की सुविधाएं और विभिन्न योजनाओं की जानकारी अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से असंबद्ध और टुकड़ों में किसानों तक पहुंचती है। यह व्यवस्था एक समुचित निर्णय लेने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समग्र जानकारी प्रदान करने में विफल रहता है। जिसका समाधान सरकार द्वारा समर्थित एक छत के नीचे किसानों को समग्र सुविधाएं प्रदान करने में निहित है, जिस पर किसान भरोसा कर सकें और उसका पालन कर सकें। अतीत में, निजी क्षेत्र ने किसानों के इनपुट और सेवाओं के लिए ऐसे ही  केंद्रों के मॉडल को दोहराने की कोशिश की है, लेकिन काफी हद तक असफल रहा। इस प्रकार, मौजूदा उर्वरक खुदरा दुकानों को वन-स्टॉप शॉप समाधान, प्रधान मंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) में बदलने का विचार किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्थायी और दीर्घकालिक समाधान के रूप में सामने आया है। इस कार्यक्रम ने देश के कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरुआत की है। किसानों को सशक्त बनाने और कृषि विकास को बढ़ावा देने की दृष्टि से, इस पहल का उद्देश्य कृषि इनपुट, सूचना और सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाना, किसानों के जीवन का उत्थान करना और देश की प्रगति में योगदान देना है। पीएमकेएस की पहल के तहत, लगभग 280,000 सक्रिय खुदरा उर्वरक दुकानें किसानों के लिए व्यापक वन-स्टॉप शॉप में चरणबद्ध रूपांतरण के दौर से गुजर रही हैं। इसके मूल में, पीएमकेएसके किसानों को परेशानी मुक्त तरीके से उर्वरक, बीज और कीटनाशक, ड्रोन सेवाओं और कीटनाशकों सहित छोटी कृषि मशीनरी सहित कृषि-इनपुट की एक विविध श्रृंखला की पेशकश केंद्रित है। एक महत्वपूर्ण पहलू मिट्टी और बीज परीक्षण सुविधाओं का प्रावधान भी है। किसानों को उनकी विशिष्ट मिट्टी और फसल की स्थितियों के बारे में ज्ञान प्रदान करके, ये सुविधाएं उचित निर्णय लेने, अनुकूलित संसाधन उपयोग और उच्च पैदावार को सक्षम बनाती हैं। यह सटीक कृषि और संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, पीएमकेएसके एक ज्ञान केंद्र के रूप में काम करते हैं, जो फसलों और सरकारी कल्याण योजनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी का प्रसार करते हैं।सूचना अंतर को पाटते हुए, ये केंद्र किसानों को सही विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाते हैं, जिससे उनकी दक्षता और आय में वृद्धि होती है। इसका उद्देश्य लाखों किसानों के जीवन को सरल बनाना है। हाल के घटनाक्रम इसकी सफलता को दशार्ते हैं। 27 जुलाई को राजस्थान के सीकर में आयोजित पीएम-किसान सम्मेलन जैसे एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने 125,000 पीएमकेएसके राष्ट्र को समर्पित किए। देश भर के लगभग 20 मिलियन किसानों की व्यापक भागीदारी इस पहल पर अंतिम उपयोगकतार्ओं तक पहुंच की सकारात्मक मुहर दिखाती है। सफलता का अंदाजा विभिन्न हितधारकों के बीच एकता और गर्व की भावना से भी लगाया जा सकता है। एक हालिया सर्वेक्षण से पता चला है कि केंद्रों पर आने वाले किसानों की संख्या में पहले से ही 15-20% की वृद्धि हुई है और यह पाया गया है कि वे पीएमकेएसके के माहौल और उपलब्ध इनपुट से खुश हैं। इन पीएमकेएसके के माध्यम से नैनो यूरिया की बिक्री भी 6 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उर्वरक कंपनियों द्वारा समर्थित ड्रोन उद्यमी उर्वरकों और रसायनों के छिड़काव को बेहतर तरीके से बढ़ावा देने के लिए धीरे-धीरे किसानों को पीएमकेएसके के साथ जोड़ पा रहा है। राज्यों, केवीके और डीलरों के बीच बढ़ते संबंधों के परिणामस्वरूप ज्ञान और सेवाओं का सफल प्रसार हुआ है। पीएमकेएस की पहल किसानों को सशक्त बनाने और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करने में गेम चेंजर साबित हो रही है। कृषि इनपुट्स और नॉलेज तक पहुंच को सरल बनाकर, आधुनिक प्रौद्योगिकियों के साथ किसानों को सशक्त बनाकर और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देकर, पीएमकेएसके कृषक समुदाय के लिए समृद्धि के एक नए युग की शुरूआत कर रहे हैं। अटूट सरकारी समर्थन और हितधारकों के सामूहिक प्रयासों से, पीएमकेएसके सकारात्मक बदलाव लाना जारी रखेंगे, देश की कृषि रीढ़ को मजबूत करेंगे और एक संपन्न और आत्मनिर्भर कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देंगे। डॉ मनसुख मंडाविया केंद्रीय रसायन और उर्वरक, और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हैं। व्यक्त किये गये विचार व्यक्तिगत हैं।

महिलाओं, आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता संग्राम के योगदान को दर्शाने वाली कलाकृतियां बढ़ायेंगी नये संसद भवन की खुबसूरती
Published / 2023-08-13 19:34:21
महिलाओं, आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता संग्राम के योगदान को दर्शाने वाली कलाकृतियां बढ़ायेंगी नये संसद भवन की खुबसूरती

हाल ही में विदेशों से वापस लायी गयी लगभग 14 मूर्तियों को संसद परिसर में विशिष्ट बिंदुओं पर रखा जायेगानये संसद परिसर में रखी जाएंगी 14 मूर्तियां विदेश से वापस लायी गयी एबीएन सेंट्रल डेस्क। नये संसद भवन में जल्द ही महिलाओं, आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता संग्राम के योगदान को दर्शाने वाली कलाकृतियां होंगी। संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ये कलाकृतियां नयी संसद भवन की सजावट के दूसरे चरण का हिस्सा बनने जा रही हैं, जो जल्द ही शुरू होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई को नये संसद भवन का उद्घाटन किया।अधिकारियों ने कहा- दूसरा चरण एक बड़ी महत्वाकांक्षी अवधारणा है। हम प्रागैतिहासिक काल से शुरू हुए स्वतंत्रता संग्राम और देश की 75 पथ-प्रदर्शक महिलाओं को दिखायेंगे। एक दीवार उन आदिवासी नेताओं को समर्पित होगी जिन्होंने देश के लिए महान काम किया है। तब हमारे पास भारत की समृद्ध परंपराओं, प्रकृति, ज्ञान और खेल को प्रदर्शित करने वाली एक दीवार होगी। एक बार चल रहा पहला चरण पूरा हो जाने के बाद, दूसरा दौर शुरू होगा। अवधारणाएं तैयार हैं, और कलाकारों का चयन कर लिया गया है। नये संसद भवन में स्थापित करने के लिए विदेश से 14 मूर्तियां वापस लायी गयी रिपोर्ट में आगे सुझाव दिया गया है कि हाल ही में विदेशों से वापस लायी गयी लगभग 14 मूर्तियों को संसद परिसर में विशिष्ट बिंदुओं पर रखा जायेगा। सजावट का चल रहा पहला चरण अधिक सामान्य है। यह अगले कुछ महीनों में पूरा हो जायेगा और अगला चरण तीन से चार महीनों के भीतर शुरू हो जायेगा। इमारत में स्थापित की जाने वाली कलाकृति पर अधिकारियों ने कहा कि पुरानी इमारत के विपरीत, जहां पेंटिंग और मूर्तियां बेतरतीब ढंग से रखी गयी थीं। नयी इमारत में प्रत्येक खंड के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनायी गयी थी। उन्होंने कहा- पुराने परिसर में कलाकृतियों की कभी योजना नहीं बनयी गयी थी। खाली जगह पर पेंटिंग बनाने के लिए कलाकारों को आमंत्रित किया गया। कोई विषयगत एकता नहीं थी। सब कुछ बेमेल था। यहां (नई इमारत) हर चीज की योजना बनायी गयी है। हमने देश से तस्करी कर लाई गई 14 चोरी की मूर्तियों को जोड़ने का फैसला किया है। इन पुरावशेषों को वापस लाया गया। योजना के अनुसार, दीर्घाओं में से एक में एक डिजिटल दीवार होगी जिसमें लोकसभा की स्थापना के बाद से संसद सदस्यों के बारे में विवरण दिखाया जायेगा। 17वीं लोकसभा का कार्यकाल अगले साल मई के आसपास पूरा हो जायेगा। कार्यालय ब्लॉक के रूप में काम करने के लिए पुरानी इमारत इसके अलावा, ऐसा लगता है कि सरकार तय कर रही है कि पुरानी इमारत का क्या किया जाये। अधिकारियों के बयान के अनुसार, पुरानी इमारत एक आफिस ब्लॉक के रूप में काम करेगी। यह आम जनता के लिए खुला रहेगा। इसके अलावा, संस्कृति मंत्रालय पुरानी इमारत को प्रधानमंत्री संग्रहालय के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है, जिससे पर्यटकों को एकीकृत देखने का अनुभव मिलेगा। अधिकारियों ने कहा- मंत्रालय आम जनता के लिए खुलने के बाद प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुराने संसद भवन के लिए एक ही टिकट शुरू करने की योजना बना रहा है। नया संसद भवन नये संसद भवन का उद्घाटन 28 मई, 2023 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। पवित्र सेनगोल को अध्यक्ष की कुर्सी के बगल में लोकसभा भवन में रखा गया था। माउंटबेटन द्वारा सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में सेनगोल को भारत के प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू को प्रस्तुत किया गया था।उसके बाद अज्ञात कारणों से इसे प्रयागराज के आनंद भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। पीएम मोदी को इसकी जानकारी होने के बाद सेनगोल का पता लगाने और उसे संसद में वापस लाने के लिए एक टीम का गठन किया गया।

फोन कॉल से परेशान हो गया दिल्ली महिला आयोग
Published / 2023-08-13 17:04:40
फोन कॉल से परेशान हो गया दिल्ली महिला आयोग

एक साल में छह लाख से अधिक कॉल मिले एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली महिला आयोग को पिछले एक साल में महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर 6.30 लाख से अधिक कॉल मिले और अन्य राज्यों से भी 11 हजार से अधिक मामले प्राप्त हुए। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2022 से जून 2023 तक उसके 181 महिला हेल्पलाइन नंबर पर 6,30,288 मामले आये, जिसके जरिये 92,004 मामले दर्ज किये गये। पड़ोसियों के साथ संघर्ष के 9,516 मामले, बलात्कार और यौन उत्पीड़न के 5,895 , पॉस्को के 3,647, अपहरण के 4229 और साइबर अपराध के 3,558 मामलों के साथ घरेलू हिंसा के सर्वाधिक 38,342 मामले शामिल हैं।

जानें मेरी माटी मेरा देश अभियान का उद्देश्य, क्यों शुरू हुआ यह कार्यक्रम
Published / 2023-08-12 11:51:08
जानें मेरी माटी मेरा देश अभियान का उद्देश्य, क्यों शुरू हुआ यह कार्यक्रम

टीम एबीएन, रांची। 9 अगस्त से मेरी माटी मेरा देश अभियान शुरू हो गया है, जो 30 अगस्त तक चलेगा। इस अभियान की घोषणा पीएम मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के दौरान की थी। 30 जुलाई को प्रसारित हुए मन की बात कार्यक्रम के 103वें प्रसारण में पीएम मोदी ने कहा था कि इस अभियान के दौरान वीरों को याद करने के लिए देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। ये अभियान 9 अगस्त से 30 अगस्त के बीच चलाया जायेगा। बता दें कि इस साल 15 अगस्त को देश की आजादी के 77 साल पूरे हो जायेंगे। इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मेरी माटी मेरा देश कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पिछले साल केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हर घर तिरंगा अभियान चलाया था। जिसमें देशभर में हर घर की छत पर तिरंगा नजर आया था। वहीं इस साल देशवासी मेरी माटी मेरा देश अभियान के साथ आजादी का महत्सव मनायेंगे। इसलिए ये जानना जरूरी है कि आखिर मेरी माटी मेरा देश प्रोग्राम है क्या और इसका उद्देश्य क्या है।क्या है मेरी माटी मेरा देश अभियानपीएम मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात के 103वें संस्करण के दौरान मेरी माटी मेरा देश अभियान के बारे में जानकारी दी थी। इस अभियान का उद्देश्य भारत के वीर सपूतों को आजादी के मौके पर याद करना है। इस दौरान देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कराया जायेगा। उनकी स्मृति में अमृत सरोवरों के निकट ग्राम पंचायतों में शिलाफलकम स्थापित किये जायेंगे।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि अमृत महोत्सव की गूंज और 15 अगस्त करीब आने के बीच, देश में एक और महान अभियान शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा था कि हमारे वीर पुरुषों और महिलाओं के सम्मान में मेरी माटी मेरा देश अभियान शुरू किया जायेगा।कब तक चलेगा मेरी माटी मेरा देश अभियानबता दें कि मेरी माटी मेरा देश अभियान 9 अगस्त को शुरू हो रहा है, जिसके तहत 15 अगस्त, 2023 यानी स्वतंत्रता दिवस तक निर्धारित कार्यक्रमों का आयोजिन किया जायेगा। इसके बाद इस कार्यक्रम को 16 अगस्त से ब्लॉक, नगर पालिका/निगम और राज्य स्तर पर आयोजित कराया जायेगा। इस कार्यक्रम का समापन समारोह कर्तव्य पथ, नयी दिल्ली 30 अगस्त को किया जायेगा। जिसमें कई गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।क्या है इस अभियान का उद्देश्य?मेरी माटी मेरा देश अभियान का उद्देश्य उन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों और वीरों का सम्मान करना है, जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन बलिदान किया सूचना एवं प्रसारण और दूरसंचार विभाग के सचिव अपूर्व चंद्रा के मुताबिक, मेरी माटी मेरा देश आजादी का अमृत महोत्सव का समापन कार्यक्रम होगा, जिसके तहत भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है। अपूर्व चंद्रा के मुताबिक, पिछले साल आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान, हर घर तिरंगा बेहद सफल रहा था और इस साल आजादी का अमृत महोत्सव के तहत एक और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम मेरी माटी मेरा देश की शुरुआत हो रही है।

लिम्फैटिक फाइलेरिया की दवा देने का दूसरा चरण शुरू
Published / 2023-08-11 18:21:51
लिम्फैटिक फाइलेरिया की दवा देने का दूसरा चरण शुरू

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने वर्ष 2027 तक लिम्फैटिक फाइलेरिया को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध व्यक्त करते हुए कहा कि जनभागीदारी और संपूर्ण सरकार तथा संपूर्ण समाज दृष्टिकोण से देश से इस बीमारी को खत्म करने में सक्षम बना जायेगा।श्री मांडविया ने बृहस्पतिवार को यहां देश में दवा देने (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, एमडीए) की वार्षिक पहल के दूसरे चरण का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत, मिशन मोड, बहु-सहभागी, बहु-क्षेत्र वाले अभियान से वैश्विक लक्ष्य से तीन साल पहले वर्ष 2027 तक लिम्फैटिक फाइलेरिया को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार तथा प्रो एसपी सिंह बघेल उपस्थिति रहे। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रिजेश पाठक, ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री निरंजन पुजारी, असम के स्वास्थ्य मंत्री केशव महंत और झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता वर्चुअल रूप से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

पीएम मोदी का विपक्ष पर वार : भारत एक सुर में कह रहा- भ्रष्टाचार, वंशवाद, तुष्टिकरण भारत छोड़ो...
Published / 2023-08-09 20:52:30
पीएम मोदी का विपक्ष पर वार : भारत एक सुर में कह रहा- भ्रष्टाचार, वंशवाद, तुष्टिकरण भारत छोड़ो...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को बुधवार को श्रद्धांजलि अर्पित की और महात्मा गांधी द्वारा शुरू किये गये इस आंदोलन को याद करते हुए कहा कि भारत अब भ्रष्टाचार, वंशवाद और तुष्टिकरण के खिलाफ एक स्वर में बोल रहा है। मोदी ने विपक्ष पर परोक्ष रूप से ऐसे समय में निशाना साधा है जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बुधवार को इसी तर्ज पर देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।  भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले महान लोगों को श्रद्धांजलि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई और इस आंदोलन ने अंग्रेजों से आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभायी। आंदोलन शुरू होने के पांच वर्ष बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ था। मोदी ने ट्वीट किया- भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले महान लोगों को श्रद्धांजलि। गांधी जी के नेतृत्व में, इस आंदोलन ने भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त करने में एक प्रमुख भूमिका निभायी।उन्होंने कहा, आज भारत एक स्वर में कह रहा है: भ्रष्टाचार भारत छोड़ो। वंशवाद भारत छोड़ो। तुष्टिकरण भारत छोड़ो। मोदी ने विपक्षी दलों पर भ्रष्टाचार, वंशवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करने का बार-बार आरोप लगाया है। पिछले दिनों एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत के दिन को ऐतिहासिक करार दिया था और कहा था कि इसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा पैदा की। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से भारत छोड़ो आंदोलन की तर्ज पर भ्रष्टाचार-भारत छोड़ो, वंशवाद-भारत छोड़ो, तुष्टिकरण-भारत छोड़ो अभियान चलाने का आह्वान किया था।

महंगाई में आटा गीला के लिए रहें तैयार
Published / 2023-08-09 18:49:35
महंगाई में आटा गीला के लिए रहें तैयार

दाल-चावल के बाद आटे की महंगाई करेगी परेशान! छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंचे गेहूं के दाम एबीएन सेंट्रल डेस्क। सीमित आपूर्ति और त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में गेहूं की कीमत छह माह के उच्च स्तर पर पहुंच गयी है। सरकार ने हाल में संकेत दिया था कि गेहूं की बढ़ती कीमत थामने के लिए आयात शुल्क खत्म किया जा सकता है। गेहूं की कीमत बढ़ने से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है। देश में सालाना 10.8 करोड़ टन गेहूं की खपत होती है। दिल्ली के एक कारोबारी ने कहा कि गेहूं पैदा करने वाले सभी राज्यों में आपूर्ति करीब-करीब रुक गयी है। आटा मिलों को भी बाजार से आपूर्ति मिलने में दिक्कत हो रही है।इंदौर में गेहूं के दाम मंगलवार को 1.5 फीसदी चढ़कर 25,446 रुपये प्रति टन पहुंच गये, जो 10 फरवरी के बाद सर्वाधिक है। चार माह में गेहूं के दाम 18 फीसदी बढ़ चुके हैं। मुंबई के एक डीलर ने कहा कि त्योहारी मौसम में आपूर्ति बनाये रखने के लिए सरकार को गोदामों से खुले बाजार में भंडार भेजना चाहिए। एक अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक सरकार के पास 2.83 करोड़ टन का स्टॉक था, जो पिछले साल के 2.66 करोड़ टन के मुकाबले अधिक है। डीलर ने कहा कि कीमतों में कमी लाने के लिए आयात जरूरी है। सरकार आयात के बिना सप्लाई नहीं बढ़ा सकती है। पिछले हफ्ते ही सरकार ने गेहूं के इंपोर्ट पर लगने वाले 40 फीसदी ड्यूटी को खत्म करने के संकेत दिये थे। जानकारों का मानना है कि कीमतों में कमी के लिए इंपोर्ट बेहद जरूरी है। दरअसल, इस वर्ष शानदार गेहूं के उत्पादन के बावजूद सरकार ने चुनावों के देखते हुए एक्सपोर्ट पर लगी रोक को नहीं हटाया।

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