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तेज धूप और पछुआ हवा प्रभावित कर रहा तापमान
Published / 2026-04-18 18:58:21
तेज धूप और पछुआ हवा प्रभावित कर रहा तापमान

भीषण गर्मी और लू का सेहत पर पड़ रहा है असर! अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या, डॉक्टर ने दी यह सलाह टीम एबीएन, रांची। रांची सहित राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तेज धूप और पछुआ हवा के प्रभाव से तापमान बढ़ा है। इस तपिश भरी गर्मी की वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार होने लगे हैं। रांची के सदर अस्पताल और रिम्स के ओपीडी में सामान्य दिनों की अपेक्षा डेढ़ गुणा मरीजों की संख्या बढ़ी है। रांची सदर अस्पताल के मेडिसीन विभाग के डॉक्टर लक्ष्मीकांत साय ने बताया कि ज्यादातर लोग तेज गर्मी और धूप की वजह से बीमार पड़ कर अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉ लक्ष्मीकांत साय ने कहा कि जो मरीज पहुंच रहे हैं, उसमें से ज्यादा लोग बुखार, शरीर में दर्द, सुस्ती, डायरिया जैसी शिकायत के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी को लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतने और खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। गर्मी की वजह से बढ़ गयी है आइसक्रीम की बिक्री अल्बर्ट एक्का चौक पर वर्षों से गोला चुस्की बेच रहे सचिन कहते हैं कि कुछ दिनों से गर्मी बढ़ने के साथ ही उनकी बिक्री बढ़ गयी है। उन्होंने बताया कि हर आइसक्रीम बेचने वाला चाहता है कि ऐसे ही उसकी बिक्री बनीं रहे। लू लगने के क्या हैं लक्षण शरीर में पानी की कमी, उल्टी, तेज बुखार, कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर आना, डायरिया, हृदयाघात, मस्तिष्काघात, कार्डियोवास्कुलर जटिलताएं जैसे लक्षण के साथ परेशानी बढ़ सकती है। वहीं, इस मौसम में त्वचा पर रैशेज सहित अन्य समस्याएं होने का भी खतरा बढ़ जाता है। लू से बचाव और लू लगने की स्थिति में क्या करें लू यानी हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए बेहद जरूरी है कि अपने शरीर को हाइड्रेट रखें यानी शरीर में पानी और मिनरल की कमी न होने दें। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी ज्यादा पानी पीना, समय-समय पर स्वस्थ रहने के बाद भी ओआरएस का घोल ले सकते हैं। दोपहर 12 बजे से शाम के 03 बजे तक घर से बाहर न निकलें। अगर बेहद जरूरी काम हो तो पूरे शरीर को ढंककर ही बाहर निकले ताकि गर्म हवा से सीधे शरीर का एक्सपोजर न हो। लू लगे व्यक्ति को छांव में लिटा दें, ठंडे गीले कपड़े से शरीर को बार बार पोंछे या ठंडे पानी से लू लगे व्यक्ति को नहलायें। अगर इसके बाद भी अगर व्यक्ति की सेहत में सुधार न दिखें तो बिना समय गंवाये अपने नजदीकी अस्पताल ले जायें। गर्मी के दिनों में शरीर को हाइड्रेट करके रखना बेहद जरूरी है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा तरल खाद्य पदार्थो को अपने आहार में शामिल करें। नमक पानी का घोल (ओआरएस), छाछ, नींबू पानी, कच्चा आम का शर्बत, लस्सी, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी का उपयोग करें। तला-भुना, ज्यादा मसालेदार, बासी भोजन से परहेज करें। कोल्ड ड्रिंक से भी दूरी बनाएं, क्योंकि यह गर्मी के दिनों में थोड़ी और क्षणिक राहत तो देता है लेकिन स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है।

झारखंड : जमशेदपुर में बना राज्य का सबसे बड़ा पार्क, घूमने में लगेंगे दो दिन
Published / 2026-04-13 21:08:21
झारखंड : जमशेदपुर में बना राज्य का सबसे बड़ा पार्क, घूमने में लगेंगे दो दिन

झारखंड में सबसे बड़ा पार्क बनकर हुआ तैयार, पूरा पार्क घूमने में लगेंगे 2 दिन टीम एबीएन, रांची। जमशेदपुर के चाकुलिया में झारखंड का सबसे बड़ा पार्क बनकर तैयार हो गया है। इस पार्क को वन विभाग ने 23 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है, जो 75 एकड़ में फैला हुआ है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जल्द ही चाकुलिया के इकोलॉजिकल डायवर्सिटी पार्क का उद्घाटन करेंगे। इस पार्क में बच्चों के साथ बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधा दी गयी है और पूरे पार्क में झारखंड की संस्कृति देखने को मिलेगी। यह पार्क सैलानियों के बीच आकर्षण का केंद्र होगा।  पार्क में बनाये गये हैं कॉटेज झारखंड उड़ीसा बंगाल के बॉर्डर पर चाकुलिया में बना यह पार्क सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि झारखंड की संस्कृति के साथ-साथ यहां सैलानियों के लिए रहने के लिए भी व्यवस्था की गयी है। पार्क कॉटेज बनाये गये हैं, जहां सैलानी आकर अपने पूरे परिवार के साथ रूक कर पार्क का आनंद ले सकेंगे। जमशेदपुर वन प्रमंडल के वन पदाधिकारी सभा आलम अंसारी ने कहा कि पार्क को घूमने में 2 दिन का समय लगेगा, इस पार्क में बच्चों के लिए अलग से क्षेत्र बनाया गया है। वहीं बुजुर्गों के लिए भी योग वॉकिंग स्टेप भी लगाया गया है। साथ ही अगर सैलानी दूर दराजे से आते हैं तो उनके रहने के लिए कॉटेज का भी निर्माण किया गया है। पार्क में चलेंगे ई रिक्शा पूरे पार्क में घूमने के लिए ई रिक्शा भी रखा गया है। ताकि इतने बड़े पार्क में सैलानी ई रिक्शा से भी घूम सकते हैं। वन अधिकारी ने बताया कि झारखंड की कला संस्कृति को भी लोग जान सकेंगे, समझ सकेंगे। उसके लिए भी एक अलग से क्षेत्र तैयार किया गया है।

17 को 40 डिग्री पार कर जायेगा पारा
Published / 2026-04-13 18:21:36
17 को 40 डिग्री पार कर जायेगा पारा

17 अप्रैल को हीट वेव का अलर्ट, 40 डिग्री पहुंचेगा पारा टीम एबीएन, रांची। झारखंड में आने वाले दिनों में गर्मी का असर तेजी से बढ़ने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार, अगले पांच दिनों में राज्य के अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके साथ ही कई हिस्सों में लू चलने की चेतावनी भी जारी की गयी है। मौसम विभाग ने 17 अप्रैल के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। उत्तर-पूर्वी और उससे सटे मध्य भागों को छोड़कर राज्य के कई इलाकों में हीट वेव यानी लू चलने की प्रबल संभावना है। इस दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है। पिछले 24 घंटों के मौसम की बात करें तो पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहा। सबसे अधिक तापमान डाल्टनगंज में 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जमशेदपुर में तापमान 39.0 डिग्री और सरायकेला में 39.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान गुमला में 16.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, 17 अप्रैल तक रांची में पारा बढ़कर 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं जमशेदपुर और डाल्टनगंज में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने के आसार हैं। गर्मी के बीच कुछ इलाकों में हल्की राहत मिलने की संभावना भी जतायी गयी है। मौसम विभाग के अनुसार 17 अप्रैल को साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा और दुमका समेत उत्तर-पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। बाकी क्षेत्रों में आंशिक बादल छाए रहने और मेघ गर्जन की संभावना है। वहीं 18 अप्रैल को दक्षिण झारखंड के कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि तापमान में बढ़ोतरी और लू की स्थिति को देखते हुए दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर निकलना जरूरी हो तो पर्याप्त पानी पीते रहें और खुद को हाइड्रेटेड रखें। विभाग के अनुसार, 20 अप्रैल तक राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा और आसमान मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है।

गुमला का जीवनदायी तालाब खतरे में!
Published / 2026-04-08 21:18:38
गुमला का जीवनदायी तालाब खतरे में!

ठेकेदार के खिलाफ ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन का एलान एबीएन न्यूज नेटवर्क, गुमला। जिले के सिसई प्रखंड की भुरसो पंचायत में लघु सिंचाई योजना के तहत चल रहे सार्वजनिक तालाब के सुंदरीकरण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे तालाब की संरचना, आसपास के घरों और सिसई-लोहरदगा मुख्य पथ की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इस संबंध में उन्होंने जिला प्रशासन को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार यह तालाब भुरसो सहित आसपास के टोला-मुहल्लों के लिए जीवनरेखा है। पूजा-पाठ, पशु-पक्षियों की आवश्यकताओं और खेतों की सिंचाई के लिए लोग इसी तालाब पर निर्भर हैं। ग्राम प्रधान दिनेश उरांव और अन्य ग्रामीणों का दावा है कि लगभग 5,000 एकड़ भूमि की सिंचाई इस तालाब के पानी से होती है। आरोप है कि निर्माण के दौरान कहीं अत्यधिक खुदाई की गई है, तो कहीं मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर छोड़ दिए गए हैं। संकरी जगह पर गार्डवाल निर्माण से बरसात में पानी के तेज बहाव का खतरा बढ़ सकता है, जिससे आसपास के घर और मुख्य सड़क नुकसान का सामना कर सकते हैं। तालाब से निकली मिट्टी को साप्ताहिक हाट, खेल मैदान और सरना स्थल के पास डंप करने से भी ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि समतलीकरण की मांग करने पर ठेकेदार ने साफ इनकार कर दिया। आपत्ति जताने पर दुर्व्यवहार और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। इस मुद्दे पर ग्रामसभा बुलाई गई, जिसमें ठेकेदार को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। ग्रामीणों ने कहा कि शिकायत के बावजूद अब तक कोई जांच शुरू नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्य में सुधार और जांच नहीं हुई, तो वे प्रखंड मुख्यालय का घेराव करने और मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

गढ़वा : आंधी-बारिश से गांवों में भारी नुकसान
Published / 2026-04-06 20:20:07
गढ़वा : आंधी-बारिश से गांवों में भारी नुकसान

झारखंड में बारिश ने मचाई तबाही! तेज आंधी-बारिश और वज्रपात से आधा दर्जन घर टूटे, मवेशियों की मौत; लोग परेशान एबीएन न्यूज नेटवर्क, गढ़वा। जिले के रमकंडा इलाके में रविवार की रात तेज आंधी और बारिश के साथ वज्रपात हुआ। इस दौरान कई गांवों में नुकसान हुआ और लोग परेशान रहे। रात अंधेरे में गुजारने को मजबूर हुए लोग चेटे गांव में करीब आधा दर्जन खपरैल वाले घर टूट गए और कई पेड़ गिर गए। बिजली के तार टूटने से बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई। पटसर के टोला पत्थलगढ़वा में वज्रपात के कारण उपेंद्र भुइयां के दो भैंसों की मौत हो गई, जिससे परिवार को आर्थिक नुकसान हुआ। वहीं, कुरुमदारी गांव में तेज हवा के कारण बिजली का खंभा गिर गया, जिससे पूरे गांव की बिजली गुल हो गयी और लोग रात अंधेरे में गुजारने को मजबूर हुए। मुनि भुइयां, शंभू बैठा, प्रताप रजक और सुरेश भुईयां के घरों को भी आंशिक नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ितों को मुआवजा देने और बिजली की व्यवस्था जल्द बहाल करने की मांग की। विधायक प्रतिनिधि ज्ञानरंजन पांडेय ने कहा कि घटना की जानकारी मिल गयी है और पीड़ितों को हर संभव मदद दी जायेगी।

झारखंड : 600 से अधिक कैमरे लगाकर बाघों की गिनती की तैयारी
Published / 2026-03-30 21:30:23
झारखंड : 600 से अधिक कैमरे लगाकर बाघों की गिनती की तैयारी

झारखंड में बाघों की गिनती के लिए 600 से अधिक कैमरों का इस्तेमाल, कई हिस्सों में लगाया गया है कैमरा टीम एबीएन, रांची। झारखंड में टाइगर ऐस्टीमेशन का कार्य चल रहा है। बाघों की गिनती के लिए पलामू टाइगर रिजर्व को नोडल बनाया गया है। पूरे देश में पलामू टाइगर रिजर्व बाघों की गिनती में सबसे आगे है। 15 दिसंबर से झारखंड में बाघों की गिनती शुरू हुई है। दिसंबर से अप्रैल महीने तक बाघों की गिनती पूरी करने का लक्ष्य है, उसके लिए चार अलग-अलग चरण निर्धारित किये गये हैं। बाघों की गिनती के लिए कैमरा ट्रैप का कार्य किया जा रहा है। बाघों की गिनती के लिए पूरे झारखंड में 600 से अधिक हाई रिजोल्यूशन वाले कैमरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व और हजारीबाग के इलाके में कैमरा ट्रैप का कार्य पूरा हो गया है। पलामू टाइगर रिजर्व के कैमरे के डाटा को कंपाइल कर लिया गया है, जबकि हजारीबाग के इलाके में लगे कैमरों के डाटा को इकट्ठा किया जा रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व से बाहर गढ़वा और लातेहार के साथ साथ चतरा के इलाके में ट्रैप लगाया जा रहा है। पहली बार पूरे झारखंड में बाघों की गिनती हो रही है। इससे पहले सिर्फ पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में बाघों की गिनती होती थी। बाघों की गिनती के लिए झारखंड को छह अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। जबकि बाघ के अलग-अलग कॉरिडोर चिन्हित किया गया है। बाघ की मूवमेंट का रिकॉर्ड पलामू टाइगर रिजर्व से गुमला, लोहरदगा और खूंटी होते हुए पश्चिम बंगाल की सीमा और पलामू टाइगर रिजर्व से निकलकर चतरा होते हुए हजारीबाग तक जाने के सबूत मिले हैं। इसी रूट पर अधिकतर कैमरा को लगाया गया है और उसके डाटा को खंगाला जा रहा है। दिसंबर महीने में बाघों की गिनती शुरू हुई है। गिनती के दौरान वन्य जीव से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारी निकलकर सामने आयी है। तेंदुआ के मूवमेंट की जानकारी पाकुड़ और गोड्डा जैसे जिलों में मिली है। जबकि पलामू टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में तेंदुआ के मौजूद होने की जानकारी निकलकर सामने आई है। गिनती के दौरान हनी बैजर, भेड़िया, हाथी, हायना के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। सभी के डाटा को एक जगह इकट्ठा किया गया है। डाटा को वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया को भेजी गयी।

झारखंड : जल्द बदल सकता है राज्य का मौसम!
Published / 2026-03-30 21:24:14
झारखंड : जल्द बदल सकता है राज्य का मौसम!

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में आने वाले दिनों में मौसम बदलने वाला है। मौसम विभाग ने राज्य के कई इलाकों में बारिश, तेज हवा और गरज-तूफान की संभावना जतायी है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गयी है। 31 मार्च को पूरे राज्य में आंधी-तूफान का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में अगले कुछ दिनों तक मौसम खराब रह सकता है। कई जगहों पर आंशिक बादल छाये रहेंगे और गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। साथ ही 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। रविवार को राज्य के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में तेज हवा, गरज और वज्रपात का खतरा बताया गया है। 31 मार्च को उत्तर-पश्चिमी हिस्से को छोड़कर लगभग पूरे राज्य में आंधी-तूफान और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। 31 मार्च को गरज के साथ बारिश 2 अप्रैल को दक्षिणी और आसपास के मध्य इलाकों में भी तेज हवा और बिजली गिरने की संभावना है। हालांकि 30 मार्च, 1 अप्रैल और 4 अप्रैल को कोई खास चेतावनी नहीं दी गयी है। राजधानी रांची में भी मौसम का असर दिखेगा। 30 मार्च को आसमान में बादल रहेंगे लेकिन मौसम सूखा रहेगा। 31 मार्च को गरज के साथ बारिश हो सकती है। 1 अप्रैल को मौसम साफ रहेगा, जबकि 2 अप्रैल को फिर से बादल और गरज-तूफान बन सकते हैं। तापमान में भी बदलाव देखने को मिलेगा। 

प्रकृति संरक्षण के सशक्त संदेश के साथ ऑल इंडिया स्प्रिंग आर्ट कैंप प्रकृति 2026 का भव्य समापन
Published / 2026-03-22 18:58:32
प्रकृति संरक्षण के सशक्त संदेश के साथ ऑल इंडिया स्प्रिंग आर्ट कैंप प्रकृति 2026 का भव्य समापन

जल है तो कल है, वन हैं तो जीवन है, और प्रकृति है तो सृष्टि है। इस प्रकृति संरक्षण के सशक्त संदेश के साथ हुआ ऑल इंडिया स्प्रिंग आर्ट कैंप प्रकृति 2026 का भव्य समापनटीम एबीएन, रांची। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग,रांची द्वारा आयोजित तीन दिवसीय (20-22 मार्च) अखिल भारतीय स्प्रिंग आर्ट कैंप-2026 का आज दिनांक 22 मार्च को प्रकृति 2026 थीम के साथ गरिमामय एवं भव्य समापन हुआ। विशेष बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण आयोजन का अंतिम दिवस, अर्थात विश्व जल दिवस के अवसर पर संपन्न हुआ, जिसने पूरे आयोजन को प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ जल संवर्द्धन और जल संरक्षण के गहरे संदेश से जोड़ दिया।यह तीन दिवसीय कला महोत्सव केवल चित्रों का आयोजन नहीं था, बल्कि यह प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदना, जिम्मेदारी और जनजागरण का एक सशक्त अभियान बनकर सामने आया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित एवं प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपने कैनवास पर वनों की हरियाली, नदियों की लय, पक्षियों का सौंदर्य, वन्यजीवों की गरिमा, पृथ्वी की पीड़ा और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को अत्यंत जीवंत, भावपूर्ण और प्रभावशाली रूप में उकेरा।समापन समारोह में कला और प्रकृति के इस अद्भुत संगम को और अधिक आकर्षक बनाया सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे सरायकेला के कलाकारों ने छऊ नृत्य पेश किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। लोक-संस्कृति, संगीत और मंचीय प्रस्तुतियों ने यह संदेश सशक्त रूप से दिया कि भारतीय संस्कृति और प्रकृति का संबंध केवल परंपरा का विषय नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का आधार है।सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह में एक ऐसा भावनात्मक और सौंदर्यपूर्ण वातावरण निर्मित किया, जहाँ रंग, राग और प्रकृति एक साथ संवाद करते दिखाई दिए। समारोह में उपस्थित गणमान्य अतिथियों, वरिष्ठ अधिकारियों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं कला प्रेमियों की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को अत्यंत गरिमामय बना दिया।इस अवसर पर शिविर में भाग लेने वाले सभी कलाकारों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कलाकारों का सम्मान करते हुए यह रेखांकित किया गया कि उनकी कृतियाँ केवल सृजन नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने वाली सशक्त दृश्य भाषा हैं।इसके बाद पीसीसीएफ हॉफ, झारखण्ड श्री संजीव कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब कलाकार का हृदय प्रकृति के लिए धड़कता है, तब कैनवास पर केवल चित्र नहीं उभरते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतना, करुणा और संरक्षण का संदेश आकार लेता है।उन्होंने यह भी कहा कि विश्व जल दिवस के अवसर पर इस कला शिविर का समापन अत्यंत अर्थपूर्ण है, क्योंकि जल ही जीवन का मूल है, वन ही संतुलन का आधार हैं और प्रकृति ही मानव सभ्यता की सबसे बड़ी संरक्षक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जल बचेगा, तो कल बचेगा, यदि वन बचेंगे, तो जीवन बचेगा और यदि प्रकृति बचेगी, तो मानवता बचेगी।

अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर सबने लिया संकल्प- प्रकृति बचेगी, तभी संस्कृति बचेगी
Published / 2026-03-21 20:56:36
अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर सबने लिया संकल्प- प्रकृति बचेगी, तभी संस्कृति बचेगी

टीम एबीएन, रांची। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम आॅल इंडिया स्प्रिंग आर्ट कैंप 2026 में आज दिनांक 21 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मनाया गया। आज कला शिविर में प्रकृति, वन एवं वन्यजीव संरक्षण के संदेश को ओरमांझी कस्तूरबा गांधी विद्यालय से आयी छात्राओं के बीच साझा किया गया। कार्यक्रम का आगाज प्रकृति को ध्यान में रखते हुए संगीत से किया गया। इसके पश्चात श्रीकांत वर्मा, डीएफओ, पब्लिसिटी एंड एक्सटेंशन डिवीजन, रांची द्वारा सभागार मेंं मौजूद सभी अधिकारीगण और छात्राओं का स्वागत किया और उन्होंने कहा कि आज का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायक और संदेशपूर्ण है, क्योंकि यह दिन केवल पेड़ों और जंगलों का उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह दिन हमें प्रकृति, पर्यावरण और जीवन के बीच के गहरे संबंध को समझने और उसे संरक्षित करने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। वन केवल हरियाली नहीं है... वन केवल लकड़ी, फल या औषधि का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन हमारे जीवन का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि प्रकृति हमारी सबसे बड़ी शिक्षक है। पेड़ हमें निस्वार्थ देना सिखाते हैं, नदियां हमें निरंतर बहना सिखाती हैं, और वन हमें सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाली बचायेंगे, वन्यजीवों को सुरक्षित रखेंगे, और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर एवं संतुलित पर्यावरण का निर्माण करेंगे। इसके बाद पर्यावरण के थीम पर छोटे बच्चों के बीच फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में आदिवासी दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए और प्रकृति 2026 को ध्यान में रखते हुए अधिकारयों ने पौधरोपण किया।

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