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प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ वन्यजीव सप्ताह 2026 का भव्य समापन
Published / 2026-10-07 21:22:05
प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ वन्यजीव सप्ताह 2026 का भव्य समापन

टीम एबीएन, रांची। वन्यजीव सप्ताह 2026 प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के संकल्प के साथ भव्य समापन समारोह संपन्न हुआ। वन्यजीवों एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा वन्यजीव सप्ताह 2026 जिसे 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक मनाया गया। जिसका दिनांक 7 अक्टूबर, 2026 को समापन समारोह पलाश हॉल, डोरंडा में आयोजित किया गया। सप्ताह भर चले विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।समापन समारोह की शुरुआत बच्चों द्वारा मनमोहक स्वागत गीत प्रस्तुत कर किया गया जिसने पूरे वातावरण को जीवंत कर दिया। सभागार में मौजूद अथितिगण एवं अन्य द्वारा बच्चों की मधुर प्रस्तुति की सराहना की गयी। इसके पश्चात बच्चों द्वारा वन्यजीवों एवं प्रकृति के संरक्षण पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता, प्राकृतिक आवासों के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी का प्रभावशाली संदेश दिया।  इसके बाद आरसीसीएफ एवं सीसीएफ वाइल्डलाइफ श्री एस. आर. नटेश-आईएफएस ने सभागार में उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए उन्होंने वन्यजीव सप्ताह के आयोजन को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।  कार्यक्रम में धरित्री कला केंद्र के छोटे बच्चों द्वारा आकर्षक नृत्य प्रस्तुति किया गया।  जिसे दर्शकों की खूब सराहना मिली।  बच्चों के नृत्य ने समारोह में उत्साह एवं उमंग का माहौल बना दिया। इसके बाद समापन समारोह के इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड आॅफ  फारेस्ट  फोर्स संजीव कुमार ने कहा कि वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य केवल एक सप्ताह तक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं था, बल्कि समाज में वन्यजीवों और प्रकृति के संरक्षण के प्रति स्थायी जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों द्वारा प्रस्तुत गीत, नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम यह दशार्ते हैं कि प्रकृति संरक्षण की भावना बचपन से ही विकसित की जानी चाहिए। आज के बच्चे ही कल के प्रकृति प्रहरी बनेंगे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आयोजन से जुड़े लोगों को बधाई देते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए जनभागीदारी को निरंतर मजबूत करने की आवश्यकता है और झारखंड की समृद्ध जैव-विविधता, वन और वन्यजीव हमारी अमूल्य प्राकृतिक विरासत हैं। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है और सामूहिक प्रयासों से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद सभी प्रतिभागियों एवं सभागार में उपस्थित सभी को संबोधित करते हुए  पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ एवं मुख्य वाइल्डलाइफ वार्डन रवि रंजन (आईएफएस) ने कहा कि प्रकृति हमारी विरासत है, वन्यजीव उसका अभिन्न हिस्सा हैं— प्रकृति बचेगी, वन्यजीव बचेंगे—तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा हमें मिलकर इसकी रक्षा करनी होगी। आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपनी प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध और संतुलित पर्यावरण छोड़ेंगे। इसके बाद वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे भाषण, एमसीक्यू, चित्रकला, ड्राइंग सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में बच्चों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, उनमे से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं विजेताओं को पुरस्कार एवं मेडल  देकर सम्मानित किया गया।

रांची : गेतलसूद में रिफॉर्म उत्सव के तहत किसान गोष्ठी सह जागरूकता अभियान
Published / 2026-10-07 21:01:49
रांची : गेतलसूद में रिफॉर्म उत्सव के तहत किसान गोष्ठी सह जागरूकता अभियान

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 6 अक्टूबर 2026 को इफको रांची के द्वारा रिफॉर्म उत्सव के तहत कृषक गोष्ठी का आयोजन अनगड़ा प्रखंड के गेतलसूद ग्राम में किया गया।  कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के तौर में झारखंड राज्य के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ शशिभूषण समदर्शी ने भाग लिया। इफको झारखंड के कृषि अनुभाग से संबित पात्रा। इफको रांची के कनीय क्षेत्र प्रबंधक सुशील कुमार, एसएफए कुलदीप कुमार के अलावा 60 स्थानीय कृषक बंधुओं ने भाग लिया। असंतुलित रसायनों के उपयोग से मिट्टी एवं पर्यावरण में हो रहे दुष्प्रभावों एवं उससे मानव शरीर में हो थी विकृतियों के बारे में विस्तार से बात किया गया। डॉ शशिभूषण समदर्शी ने किसानों एवं बिक्री केंद्र प्रभारियों को विकृत कृषि पद्धतियों से मिट्टी में जलवायु में हो रही क्षति के बारे में बताते हुए कहा कि असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग एवं कार्बनिक उर्वरकों के उपयोग की कमी के वजह से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ 0.5% से भी निचले स्तर में पहुंच गए हैं जिससे मिट्टी में उपयोगी सुक्ष्म जीव कम होते जा रहे हैं एवं किछुआ की भी खेत से खत्म होते जा रहे हैं। वर्तमान परिवेश में ये बहुत महत्वपूर्ण है कि किसान बंधु धान की पराली को न जलायें एवं इफको द्वारा बनाये जाने वाले बायोडकंपोजर का उपयोग करके, पराली से कंपोस्ट बनायें और मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ायें, जिससे मिट्टी को उर्वरक क्षमता बढ़ सके। उन्होंने मिट्टी को बचाने के लिए रासायनिक उर्वरकों की मात्रा को आधा करके नैनो उर्वरकों की उपयोग पर जोर दिया।उसकी संपूर्ण विधि को बताते हुए उन्होंने पौधों में आवश्यक विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका को क्रमवार तरीके से समझाया और बताया कि पारंपरिक यूरिया की उपयोग दक्षता केवल 30-35% तथा पारंपरिक डीएपी की उपयोग दक्षता मात्र 15-20% होती है। इसके असंतुलित उपयोग से फसलों में कई प्रकार के पोषण विकार उत्पन्न होते हैं। श्री पात्रा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पारंपरिक यूरिया एवं डीएपी की मात्रा को आधा करके नैनो उर्वरकों का उपयोग करने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके अंतर्गत 5-10 मिली नैनो डीएपी प्रति किलो बीज से बीज शोधन या 5 मिली नैनो डीएपी प्रति लीटर पानी से जड़ शोधन करने की सलाह दी गयी। साथ ही नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी को 4 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर धान में पहला छिड़काव 25-30 दिन तथा दूसरा छिड़काव 45-50 दिन पर करने से अच्छी उपज प्राप्त होने की जानकारी दी गयी। सुशील कुमार ने किसानों को विभिन्न फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा उन्होंने धान में लगने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके लक्षण और समाधान पर विस्तृत चर्चा की तथा इफको के अन्य उत्पादों जैसे नैनो जिंक, सागरिका, तरल कंसोर्टिया, जिंक सल्फेट मोनो और कैल्शियम नाइट्रेट की जानकारी भी दी। नैनो जिंक के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसका डोज 1 मिली प्रति लीटर पानी है। इसके प्रयोग से धान में खैरा रोग नहीं होता, अधिक कल्ले निकलते हैं, पत्तियां चौड़ी होती हैं तथा दानों का भराव अच्छा होता है, जिससे उपज में वृद्धि होती है। कंसोर्टिया के संबंध में उन्होंने बताया कि इसका उपयोग बीज उपचार, जड़ उपचार और मृदा उपचार के रूप में किया जा सकता है। यह जैविक खेती के लिए उपयुक्त है, जिससे रासायनिक खाद की खपत 15-20% तक कम होती है तथा उपज 10-20% तक बढ़ती है। साथ ही यह मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या को बढ़ाता है और खेती की लागत को कम करता है।

वन्यजीव संरक्षण के संदेश के साथ वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने निकाला भव्य वॉकाथॉन
Published / 2026-10-04 19:20:56
वन्यजीव संरक्षण के संदेश के साथ वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने निकाला भव्य वॉकाथॉन

वन्यजीव संरक्षण के संदेश के साथ वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने निकाला भव्य वॉकाथॉनटीम एबीएन, रांची। दिनांक - 4 अक्टूबर 2026 को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता एवं जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा वन्यजीव सप्ताह, 2026 के तहत आज भव्य वॉकाथॉन का आयोजन किया गया। वॉकाथॉन में लगभग 2,500 से 3,000 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लेकर वन्यजीव एवं प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। वॉकाथॉन का शुभारंभ वन भवन, रांची में गुब्बारों को उड़ाकर और हस्ताक्षर अभियान के साथ हुआ। इसमें विद्यार्थियों, युवाओं, विभागीय पदाधिकारियों एवं कर्मियों, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा प्रकृति प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए  प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ़ फोर्स संजीव कुमार (आईएफएस) ने कहा कि वन्यजीव हमारे जंगलों , हमारी प्रकृति के संतुलन और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के एक महत्वपूर्ण आधार हैं। वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि वन्यजीव संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। वॉकाथॉन जैसे आयोजनों के माध्यम से लोगों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों को प्रकृति एवं वन्यजीवों के संरक्षण से जोड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे वन्यजीवों, वनों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें और पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।इसके बाद सभी प्रतिभागियों को पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ एवं मुख्य वाइल्डलाइफ वार्डन श्री रवि रंजन (आईएफएस) ने संबोधित करते हुए कहा कि झारखण्ड  की समृद्ध वन संपदा और जैव-विविधता हमारी अमूल्य प्राकृतिक विरासत है। प्रकृति, वन और वन्यजीव एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। इनके संरक्षण के लिए जागरूकता के साथ सामूहिक प्रयास भी जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकार अथवा वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। वॉकाथॉन का उद्देश्य इसी सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना और वन्यजीव संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।सभी गणमान्य अधिकारीयों के सन्देश के उपरांत वॉकाथॉन प्रतिभागियों के वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने के लिए निर्धारित मार्ग वन भवन से पदयात्रा प्रारंभ किया। जहाँ सभी प्रतिभागी वन भवन से होकर अरगोड़ा, बिरसा चौक और  हिनू  होते हुए निर्धारित मार्ग से वापस वन भवन पहुंचे । पूरे मार्ग में प्रतिभागियों ने वन्यजीव संरक्षण, जैव-विविधता एवं प्रकृति के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

झारखंड : अगले तीन दिन बदला रहेगा मौसम का मिजाज
Published / 2026-09-22 21:52:08
झारखंड : अगले तीन दिन बदला रहेगा मौसम का मिजाज

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अगले तीन दिनों तक मौसम का मिजाज बिगड़ा रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 23 से 25 सितंबर के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है। इस दौरान कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।प्रभावित जिलों में रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं। मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान कुछ स्थानों पर 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। 24 सितंबर: 5 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना 24 सितंबर को मौसम का असर और बढ़ सकता है। रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जतायी गयी है। इन इलाकों में बारिश के साथ वज्रपात और तेज हवाओं को लेकर भी विशेष सतर्कता की जरूरत है। खासकर दक्षिणी झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम और सिमडेगा में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूवार्नुमान में सामने अयी है। 25 सितंबर: पलामू प्रमंडल में बारिश का असर 25 सितंबर को मौसम का प्रभाव राज्य के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में देखने को मिल सकता है। पलामू, चतरा और लातेहार में भारी बारिश के साथ गरज और वज्रपात की संभावना है। इसके अलावा राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में भी गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। 26 सितंबर तक भी बनी रहेगी बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूवार्नुमान के अनुसार 26 सितंबर को भी झारखंड के कई हिस्सों में गरज, वज्रपात और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना भी बनी हुई है। लोगों से सावधानी बरतने की अपील तेज हवा और वज्रपात की आशंका को देखते हुए लोगों को बारिश के दौरान खुले मैदान, पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर संरचनाओं के पास जाने से बचने की सलाह दी जाती है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है।

झारखंड : 27 तक कई जिलों में बारिश-वज्रपात का अलर्ट
Published / 2026-09-22 18:07:15
झारखंड : 27 तक कई जिलों में बारिश-वज्रपात का अलर्ट

27 सितंबर तक बदलेगा मौसम, कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी टीम एबीएन, रांची। भारत के पूर्व-मध्य और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण झारखंड में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग ने राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में 27 सितंबर तक गरज के साथ भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। बीते 24 घंटे में राजधानी में बारिश ट्रेस रही। आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश या मेघ गर्जन होने की संभावना बनी हुई है। 23 सितंबर को इन जिलों में भारी बारिश मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 23 सितंबर को राज्य के दक्षिणी और मध्य भागों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। इसमें रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, रामगढ़, बोकारो और धनबाद जिले शामिल हैं। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में भी बारिश का प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान कुछ स्थानों पर मेघ गर्जन, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। 24 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने 24 सितंबर को दक्षिणी झारखंड के सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम के साथ उनसे सटे मध्य झारखंड के रांची, गुमला और खूंटी में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जतायी है। राज्य के कुछ हिस्सों में गरज के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। इसके बाद 25 और 26 सितंबर को भी अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश और मेघगर्जन की संभावना है।

रांची : सखुआ महोत्सव के दौरान नामकुम तेतरी टोली में पौधरोपण
Published / 2026-09-15 21:56:20
रांची : सखुआ महोत्सव के दौरान नामकुम तेतरी टोली में पौधरोपण

टीम एबीएन, रांची। नामकुम स्थित तेतरी टोली छठ घाट में सखुआ महोत्सव के अंतर्गत आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में सम्मिलित होकर पौधरोपण किया। प्रकृति के संरक्षण और हरियाली के विस्तार के लिए पौधरोपण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। आइए, हम सभी मिलकर रांची को और अधिक हरा-भरा एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने का संकल्प लें।  इस अवसर पर उप महापौर नीरज कुमार, मंडल अध्यक्ष अशोक गोप, क्षत्रधारी महतो, गौतम देब, पिंकी, रिंकू सहित अन्य गणमान्यजन एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

झारखंड : मानसून का असर बरकरार, 17 तक बारिश के आसार
Published / 2026-09-12 22:05:30
झारखंड : मानसून का असर बरकरार, 17 तक बारिश के आसार

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मानसून का असर अभी भी बना हुआ है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में शनिवार सुबह से बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने 17 सितंबर तक राज्य के किसी भी जिले के लिए विशेष चेतावनी जारी नहीं की है। हालांकि, इस दौरान कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघ गर्जन की संभावना जताई गई है।  मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में आसमान में बादल छाये रहेंगे। कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। रांची में भी दिनभर बादल छाए रहने और एक-दो बार हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। राजधानी का अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। मौसम केंद्र के मुताबिक, अगले तीन दिनों के दौरान राज्य के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे बारिश के बीच उमस और गर्मी का असर बढ़ने की संभावना है।  13 सितंबर को भी राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघ गर्जन की संभावना है। रांची में अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। वहीं, 14 और 15 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। रांची में इन दोनों दिनों में भी बादल छाए रहने की संभावना है। राजधानी का अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

तारा कोल ब्लॉक को लेकर केंद्र पर बरसे कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत
Published / 2026-09-11 19:51:33
तारा कोल ब्लॉक को लेकर केंद्र पर बरसे कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत

तारा कोल ब्लॉक को लेकर केंद्र पर बरसे कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत, बोले10 लाख पेड़ काटकर और एलीफैंट कॉरिडोर उजाड़कर कौन सा विकास होगा?हसदेव-अरण्य की नीलामी छत्तीसगढ़ के साथ धोखाएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। छत्तीसगढ़ के प्रभारी एवं लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने हसदेव-अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को छत्तीसगढ़ के साथ धोखा बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने आदिवासी समाज, ग्राम सभाओं और पर्यावरण की चिंताओं को दरकिनार कर हसदेव के जंगलों को उद्योगपतियों के हवाले करने का रास्ता खोल दिया है। सांसद सुखदेव भगत ने कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश के एक्स पर जारी बयान को साझा करते हुए कहा कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी मोदानी मॉडल का एक और उदाहरण है। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा हाल में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी की गई है और इसकी विजेता कंपनी सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड बताई गई है, जो मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की सहायक कंपनी है। मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी है। भगत ने कहा कि इस फैसले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव क्षेत्र में कोई नया कोल ब्लॉक नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद 16 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि हसदेव में नई खदान की आवश्यकता नहीं है। इतना ही नहीं, 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉकों को डीनोटिफाई कर दिया था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद तारा कोल ब्लॉक की नीलामी किया जाना केंद्र सरकार की नीति और उसके पुराने फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सुखदेव भगत ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 4,000 एकड़ से अधिक घना जंगल है। कांग्रेस के अनुसार, खनन के लिए 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का खतरा है। इससे लेमरू एलीफेंट रिजर्व और हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका है। सांसद ने कहा कि हसदेव-अरण्य छत्तीसगढ़ की आत्मा है। भाजपा सरकार ने विधानसभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव और आदिवासी समाज के करीब 15 वर्षों के संघर्ष को कुचलकर अपने चहेते उद्योगपति के लिए जंगल का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने सवाल किया कि 10 लाख पेड़ काटकर और एलीफेंट रिजर्व को बर्बाद करके आखिर कौन सा विकास किया जाएगा? जंगल उजाड़ना विकास नहीं, बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सुखदेव भगत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हसदेव-अरण्य के आदिवासी भाई-बहनों, ग्राम सभाओं और पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई लड़ रहे लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है।उन्होंने कहा कि हसदेव के जंगलों और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस हर स्तर पर आवाज बुलंद करेगी।

झारखंड : फिर बदला मौसम का मिजाज, बारिश के आसार
Published / 2026-09-07 20:47:31
झारखंड : फिर बदला मौसम का मिजाज, बारिश के आसार

झारखंड में फिर बदला मौसम का मिजाज, रांची समेत कई जिलों में 10 सितंबर तक बारिश के आसार टीम एबीएन, रांची। 7 सितंबर को भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार आज राज्य के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान वज्रपात के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मौसम विभाग पूवार्नुमान के अनुसार झारखंड में 10 सितंबर तक बारिश की संभावना बनी हुई है। कल 8 सितंबर को भी झारखंड के कई हिस्सों में बादल छाये रहने और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जतायी गयी है। वहीं 9 सितंबर को भारी बारिश की आशंका है। इसके अलावा 10 सितंबर को भी विभिन्न जिलों में हल्की बारिश हो सकती है।

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