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17 किमी की श्री श्याम ध्वजा निशान पदयात्रा दो को
Published / 2025-02-06 21:27:02
17 किमी की श्री श्याम ध्वजा निशान पदयात्रा दो को

टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति के तत्वाधान में 2 मार्च 2025 दिन- रविवार को रांची नगर में राजस्थान के खाटू श्रीश्याम जी के परंपरा के अनुसार ही श्री श्याम ध्वजा निशान पदयात्रा का आयोजन होने जा रहा है। श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा रांची के नेवरी (विकास विद्यालय) से शुरू होकर श्री खाटू श्री श्याम मंदिर हरमू रोड में ध्वजा समर्पण के साथ समाप्त होगी।खाटू धाम में यह परंपरा है कि श्याम भक्त बाबा श्याम को ध्वजा निशान यात्रा रिंगस से 17 किलोमीटर की पदयात्रा कर बाबा श्री श्याम को समर्पित करते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त श्री श्याम प्रभु की निशान को अपनी मन की बात कहता है और उसे सच्चे विश्वास से श्री श्याम प्रभु को अर्पित करता है तो बाबा उन भक्तों की सारी मुरादे पूरी करते हैं।इसी परंपरा के अनुसार रांची में विगत 3 वर्षों से श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति द्वारा यह आयोजन हो रहा है तथा 2 मार्च को श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा के सफल आयोजन हेतु अति शीघ्र एक बैठक किया जायेगा। उक्त जानकारी श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति, रांची के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

अब पेंसिल बीन की खेती कर आमदनी बढ़ायेंगे किसान
Published / 2025-02-04 21:04:18
अब पेंसिल बीन की खेती कर आमदनी बढ़ायेंगे किसान

पसंद ने किसानों को बांटे पेंसिल बीन का बीज, किया खेती के लिए प्रोत्साहित  टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के पसंद फाउंडेशन ने आईसीए, पलांडू के सहयोग से 3 जिला के 40 किसानों को पेंसिल बीन के बीज बांटे और उन्हें इस खेती से होने वाले लाभ भी बताये। खूंटी के कर्रा प्रखंड, सिमडेगा के कोलेबिरा प्रखंड तथा गुमला के सिसई प्रखंड के कुल 40 किसान इसकी खेती करेंगे।दिये गये पेंसिल बीन की खेती इस वर्ष इन तीनों जिलों में भारतीय कृषि विकास योजना अन्तर्गत पेंसिल बीन की स्वर्ण सिद्धि किस्म के 20 किग्रा बीज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर), पलांडू के सहयोग से प्रदान किया गया है। आने वाले समय में मौसम के अनुसार विभिन्न प्रकार के दलहनी सब्जी के बीज एवं अन्य सहयोग किसानों को दिये जायेंगे। संस्था के कीर्तिमान नाथ के साथ आइसीएआर पलांडू के विवेक कुमार व वेद प्रकाश ने किसानों को बताया कि पेंसिल बीन की खेती से उनकी आय बढ़ेगी तथा इसके उपभोग से उन्हें पोषण संबंधी लाभ मिलेगा। इस परियोजना के अन्तर्गत दलहनी किस्म के उन्नत बीज प्राप्त कर संबंधित लाभान्वित किसान अति उत्साहित हैं।

गायत्री परिवार ने सोल्लास किये कई धार्मिक अनुष्ठान
Published / 2025-02-03 20:34:32
गायत्री परिवार ने सोल्लास किये कई धार्मिक अनुष्ठान

एबीएन सोशल डेस्क। पूज्य गुरुदेवश्री का आत्मबोध- जन्मदिवस, सरस्वती पूजन, महायज्ञ एवं निःशुल्क विभिन्न संस्कार त्रिदिवसीय सोल्लास संपन्न हुए। दिव्य चेतना के साथ आत्म चेतना मिलन में अपनी योग्यता और क्षमता बढ़ानी चाहिए तथा अच्छा हो युग धर्म को पहचाना जाय... जय नारायण प्रसाद ने बताया। आगे आज का युग धर्म समयदान है, विषय पर गायत्री साधक जेएनपी ने अपने उद्बोधन में गायत्री महायज्ञ अनुष्ठान कार्यक्रम में बताया।इस अवसर पर दो दिन 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ हुआ और श्रद्धावान लभते ज्ञानम्,भावनाशील वर्ग को युगांतरीय चेतना के साथ संबद्ध किया जाए। विचार क्रांति अभियान अपने समय का सशक्त महाक्रांति कहना चाहिए, हमने आँगन नहीं बुहारा, कैसे आएंगे भगवान, मन का मैल नहीं धोया तो कैसे आएंगे भगवान जैसे प्रज्ञागीत गायन परिव्राजक प्रमोद कुमार द्वारा किया गया।इस अवसर पर गायत्री का शब्दार्थ और महामंत्र के भावार्थ पर प्रकाश डालकर,गायत्री परिवार, प्रज्ञा परिवार देवपरिवार, प्रज्ञा मंडल, महिला मंडल का प्रतिनिधित्व प्रगति, स्वाध्याय मंडल, दीया ग्रुप, बाल संस्कारशाला संचालन, रांची जिला अंतर्गत ज्योति कलश रथ-दर्शन भ्रमण यात्रा, ज्ञान रथ संचालन, मासिक पत्रिका-अखंड ज्योति, युग निर्माण योजना, प्रज्ञा अभियान पाक्षिक के पाठक,नये ग्राहक सदस्य निर्माण,अगले दिनों रांची राजधानी शक्तिपीठ में प्रशिक्षण सत्र आदि अनेक  विषयों पर वरिष्ठ साधक-शिष्यों द्वारा चर्चाएं हुईं।वसंतोत्सव में सरस्वती पूजन वैदिक विधान से विस्तार पूर्वक गुरु-ईश वंदना, ध्यान नमन वंदन, स्वस्तिवाचन, रक्षा विधान, भजन-कीर्तन रांची गायत्री परिवार युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा, अलकापुरी, बस स्टैंड गायत्री प्रज्ञापीठ, टाटीसिलवे युग चेतना केन्द्र और चरणपीठों में वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य गायत्री परिवार एवं शान्तिकुञ्ज के संस्थापक पूज्य गुरुदेवश्री का आत्मबोध जन्मदिवस,सरस्वती पूजन नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं विभिन्न संस्कार, गायत्री दीपयज्ञ व विभिन्न संस्कारोत्सव सोल्लास व श्रद्धापूर्वक सैकड़ो साधक-शिष्यों द्वारा मनाया गया। इस दौरान रांची मुख्य शक्तिपीठ में प्रथम दिन 12 घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान, दूसरे व तीसरे दिन 9-9 कुंडीय का यज्ञीय अनुष्ठान विधान हुए। इस अवसर पर दो दिन यज्ञीय अनुष्ठान में पुंसवन संस्कार (गर्भस्थ शिशुदेव का पूजन), नामकरण, विद्यारम्भ, गायत्री महामंत्र दीक्षा संस्कार, मुण्डन संस्कार, जन्म दिवसोत्सव, विवाह दिवस संस्कारोत्सव पर यज्ञीय दिव्य महामंत्रों की आहुतियां प्रदान कर वसुधैव कुटुंबकम् के उज्जवल भविष्य हेतु सर्वे भवन्तु सुखिनः भाव से वंदना प्रार्थना सहित कार्यक्रम सोल्लास व श्रद्धापूर्वक संपन्न हुए।कार्यक्रम में अन्य साधक-शिष्यों व सदसयों में रणवीर कुमार, जीतेन्द्र कुमार,राजेन्द्र कुमार, नरेन्द्र गुप्ता, एसके मिश्रा, सुनी वेदिया, नन्दू कुमार,कुणाल कुमार अग्रवाल,उत्सव कुमार, अभिषेक कुमार, राजू कुमार जैसे अनेकानेक सदस्यों ने समयदान सहयोग देकर आयोजन और भंडारे को सफल सुफल बनाया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह झारखण्ड प्रदेश प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।

बसंत पंचमी पर श्री राधा-कृष्ण सेवा धाम मंदिर में हुआ अन्नपूर्णा महाप्रसाद का आयोजन
Published / 2025-02-02 18:36:06
बसंत पंचमी पर श्री राधा-कृष्ण सेवा धाम मंदिर में हुआ अन्नपूर्णा महाप्रसाद का आयोजन

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग में श्रीकृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम में आज बसंत पंचमी सरस्वती पूजा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन किया गया है। अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद संस्था की सदस्या विद्या देवी अग्रवाल एवं उनके परिवार के सौजन्य से किया गया। महाप्रसाद में 101 किलोग्राम की केसरिया खीर का भोग भगवान श्री राज श्याम जी को विधिवत भोग पुजारी अरविंद पांडे ने लगाया। मंदिर परिसर में उपस्थित 4 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद भोग का वितरण किया गया। तत्पश्चात भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के सदस्यों ने अपने मनमोहक सुमधुर भजनों से श्रोताओं को खूब झुमाया तथा पूरा वातावरण को बसंतमय एवं भक्तिमय बना दिया। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि संस्था द्वारा श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम श्री राधा कृष्ण मंदिर परिसर में आज 192वें अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन था। आज सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भगवान श्री राधा कृष्ण मंदिर मे लगभग 10 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये। मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष निर्मल जालान, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज कुमार चौधरी, विजय अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, शिव भगवान अग्रवाल, विशाल जालान, पवन पोद्दार, पूरणमल सर्राफ, सज्जन पाड़िया, संजय सर्राफ, विशाल जालान, चिरंजी लाल खंडेलवाल, मोहित चौधरी, श्रद्धा चौधरी, कविता चौधरी, डॉ रचिता चौधरी, विधा देवी अग्रवाल, शोभा जालान, सुनीता अग्रवाल, चंद्रदीप साहु, हरीश कुमार, परमेश्वर साहु, धीरज कुमार गुप्ता, महेश वर्मा, नीरज भट्ट, सहित बड़ी संख्या में ट्रस्ट के सदस्यगण उपस्थित थे।

विहिप ने की गतिविधियों की समीक्षा और आगामी योजनाओं पर चर्चा
Published / 2025-02-01 18:51:49
विहिप ने की गतिविधियों की समीक्षा और आगामी योजनाओं पर चर्चा

टीम एबीएन, रांची। दिनांक 31 जनवरी 2025 विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत टोली की बैठक प्रांत कार्यालय, किशोरगंज, रांची में चंद्रकांत रायपत की अध्यक्षता में  संपन्न हुई। बैठक में श्री राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ, धर्म रक्षा निधि समर्पण, रामायण ज्ञान परीक्षा, सेवा कार्य, संस्कार केंद्र, संस्कारशाला, मठ मंदिरों एवं अर्चक पुरोहित संपर्क एवं सत्संग सहित परिषद द्वारा चलायी जा रही अन्य गतिविधियों की समीक्षा एवं आगामी योजनाओं पर चर्चा की गयी।बैठक में उपस्थित झारखंड-बिहार क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद पांडे उपस्थित थे। उन्होंने झारखंड में चल रहे कार्यों की सराहना की तथा इसे और अच्छा करने के लिए सभी स्तर के कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया। क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने विभाग स्तर के कार्यकर्ताओं से निरंतर प्रवास करने का आग्रह किया। प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह ने बताया विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक 6 से 10 फरवरी तक प्रयागराज में होगी। साथ ही सभी आयामों की अलग-अलग बैठकें भी तय तिथियों में कुंभ के दौरान आयोजित की गयी है, जिसमें झारखंड से सभी अपेक्षित कार्यकर्ता भाग लेंगे। प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने बताया आगामी कार्यक्रमों को लेकर 1 से 3 फरवरी तक सभी जिलों में जिला बैठकें तथा 7 से 9 फरवरी तक प्रखंड बैठकों का आयोजन किया जायेगा। बैठक में प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत सह मंत्री मनोज पोद्दार, प्रांत सेवा सह प्रमुख अशोक अग्रवाल, प्रांत मंदिर अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख देवेंद्र गुप्ता, सह प्रमुख मनोज पांडेय, सामाजिक समरसता प्रमुख किशुन झा, विभाग मंत्री अनूप यादव, विभाग सहमंत्री अरुण सिंह, महेंद्र प्रसाद, केशवचंद्र साय, राजेश दुबे, दीपक ठाकुर, दीपक मंडल, रामप्रताप सिंह, विजय यादव, जगदीश मंडल, कौलेश्वर टुडू, मिथिलेश महतो, देवीलाल मुर्मू सहित विभाग एवं जिला के सभी संगठन मंत्री उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने दी।

सरस्वती पूजा का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण : संजय सर्राफ
Published / 2025-01-31 20:56:12
सरस्वती पूजा का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सरस्वती पूजा व बसंत पंचमी हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनायी जाती है। इस वर्ष में माघ पंचमी तिथि 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट से शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 3 फरवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस साल सरस्वती पूजा रविवार 2 फरवरी को मनाई जायेगी। वहीं बहुत से लोग उदयातिथि के आधार पर इसे 3 फरवरी को भी मनायेंगे। इस प्रकार इस वर्ष सरस्वती पूजा 2 दिन मनायी जा रही है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती का एक नाम श्री भी है, इसलिए इस दिन को श्री पंचमी भी कहते हैं। तथा विशेष रूप से विद्या की देवी, सरस्वती की पूजा के रूप में मनाया जाता है। बसंत पंचमी का दिन बसंत ऋतु के आगमन का संकेत भी है, जो शीतकाल के बाद खुशहाली और नूतनता का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन को खासतौर पर ज्ञान, कला, संगीत, और विज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा के लिए समर्पित किया जाता है। सरस्वती देवी को विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में यह विश्वास है कि उनकी पूजा से जीवन में ज्ञान और सदबुद्धि का वास होता है। विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और संगीतज्ञों के लिए यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वे अपनी पुस्तकों, लेखन सामग्रियों और संगीत वाद्ययंत्रों की पूजा करते हैं ताकि देवी की कृपा से उन्हें सफलता और उन्नति प्राप्त हो। बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पूजा स्थल को स्वच्छ किया जाता है। फिर सरस्वती देवी की प्रतिमा या चित्र को पीले वस्त्र पहनाये जाते हैं, क्योंकि पीला रंग बसंत ऋतु का प्रतीक है।पूजा में देवी को फूल, मिष्ठान, फल और खासकर पीले रंग के फूल अर्पित किए जाते हैं। साथ ही, देवी के हाथ में वीणा और पंखा भी अर्पित किए जाते हैं, जो उनके प्रतीक माने जाते हैं। पूजा के दौरान विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है, जिनसे व्यक्ति को ज्ञान, समृद्धि और बुद्धि की प्राप्ति होती है। बसंत पंचमी का त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा भी है।इस दिन को नए मौसम, फसलों की अच्छी पैदावार और जीवन में नूतनता का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर संगीत, नृत्य और कवि सम्मेलनों का आयोजन भी किया जाता है, जिससे यह दिन सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव बन जाता है। इस प्रकार बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह दिन ज्ञान की देवी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में नयी शुरुआत करने का एक अनमोल अवसर होता है।

मौनी अमावस्या पर अतिशुभ संयोग; जानें क्या करें, क्या नहीं..
Published / 2025-01-28 21:13:30
मौनी अमावस्या पर अतिशुभ संयोग; जानें क्या करें, क्या नहीं..

एबीएन सोशल डेस्क। मौनी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गये पाप धुल जाते हैं। मां गंगा की कृपा भी भक्तों पर बरसती है। कुंडली में शामिल अशुभ ग्रहों से मुक्ति मिलती है।  इस बार माघी अमावस्या पर कई शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं कौन से हैं ये शुभ योग और इस दौरान क्या करना चाहिए क्या नहीं।  वैदिक पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की अंतिम तिथि को  मौनी अमावस्या है। इसे माघी या मौनी अमावस्या भी कहते हैं। इस बार माघी अमावस्या 29 जनवरी को है। सनातन धर्म में मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने की परंपरा है। इस शुभ अवसर पर भक्त गंगा तट पर स्नान करते हैं, ध्यान करते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं।  धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गये पाप धुल जाते हैं। मां गंगा की कृपा भी भक्तों पर बरसती है। कुंडली में शामिल अशुभ ग्रहों से मुक्ति मिलती है। इस बार माघी अमावस्या पर कई शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं कौन से हैं ये शुभ योग और इस दौरान क्या करना चाहिए क्या नहीं।  शिववास योग मौनी अमावस्या पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। शिववास का संयोग मौनी अमावस्या यानी 29 जनवरी को सायं 06: 05 मिनट तक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव कैलाश पर मां गौरी के साथ विराजमान रहेंगे। सिद्धि योग माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या पर सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है। सिद्धि योग का संयोग रात 09 बजकर 22 मिनट तक है। ज्योतिष शास्त्र में सिद्धि योग को शुभ मानते हैं। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। इसके अलावा मौनी अमावस्या पर श्रवण एवं उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।शुभ मुहूर्तमाघ अमावस्या तिथि आरंभ : 28 जनवरी, सायंकाल 07:35 मिनट से  माघ अमावस्या तिथि समाप्त: 29 जनवरी, सायंकाल 06: 05 मिनट पर  उदयातिथि के अनुसार 29 जनवरी को माघी या मौनी अमावस्या मानी जाएगी। मौनी अमावस्या के दिन स्नान-ध्यान कर भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। साथ ही पूजा के बाद दान-पुण्य कर सकते हैं। मौनी अमावस्या के दिन क्या करें मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान जरूर करें।  मौनी अमावस्या पर भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी और मां गंगा की पूजा करें।  मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत या उपवास जरूर रखें  मौनी अमावस्या के दिन शाम में तुलसी के पास घी का दीया जलायें।  मौनी अमावस्या के दिन अन्न, धन, वस्त्र आदि का दान जरूर करें।  मौनी अमावस्या के दिन सूर्य देव को जल अर्घ्य जरूर दें।  मौनी अमावस्या पर ॐ पितृ देवतायै नम: मंत्र का 11 बार जाप करें।  मौनी अमावस्या के दिन क्या न करेंमौनी अमावस्या के दिन तामसिक चीजों से दूर रहें।  मांस-मदिरा या प्याज-लहसुन नहीं खायें।  मौनी अमावस्या के दिन किसी से वाद-विवाद नहीं करें।  मौनी अमावस्या के दिन सुबह देर तक न सोएं।  मौनी अमावस्या के दिन किसी से झूठ नहीं बोलें।  मौनी अमावस्या के दिन बाल या नाखून न काटें।  मौनी अमावस्या के दिन तुलसी पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

अद्भुत अलौकिक और अवर्णणीय है महाकुंभ का नजारा
Published / 2025-01-28 21:08:44
अद्भुत अलौकिक और अवर्णणीय है महाकुंभ का नजारा

महाकुंभ से लौटकर मुरलीधर टीम एबीएन, रांची। अद्भुत अलौकिक, अवर्णणीय, अविस्मरणीय, आस्था का महाकुंभ 2025। ईश्वरीय आस्था और आमजनों की उसमें आस्था का प्रबल प्रवाह। सनातन के ब्रह्मामांडीय ज्ञान का प्रतिबिंब। प्रकृति के सम्मान का प्रबल उद्घोष महाकुंभ। मातृरूप में मां गंगा की गोद में समर्पित यमुना का नाम रूप का गंगा में अपने को विलीन करने का संकेत। संदेश सनातन के उच्च आदर्शों का, जिसमें सन्निहित मापदंडों को सहज बुद्धि और दुबुर्द्धि से समझना असंभव। जीव का शिव से संगम। प्रबल आर्त से सनातन का उद्घोष। विश्व नहीं ब्रह्मांड के कल्याण की अवधारणा। नाश और निर्माण का संगम महाकुंभ तीर्थराज प्रयाग 2025 का चिंतन, मनन और आशीर्वाद देने वाले सभी जनों को सनातन गौरव का अहसास पाने का महाकुंभ। तन से न पायें तो मन से अवश्य जायें। दरश, परस अंजन अरू पाना। जय महाकुंभ जय सत्य सनातन। मौनी अमावस्या की शुभकामना। 29 जनवरी 2025

मौनी अमावस्या 29 जनवरी को
Published / 2025-01-28 18:26:55
मौनी अमावस्या 29 जनवरी को

प्रयागराज महाकुंभ का स्नान समाज में धार्मिक सौहार्द और एकता का प्रतीक : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मौनी अमावस्या का पर्व हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व रखता है। यह माघ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस साल मौनी अमावस्या 29 जनवरी यानी बुधवार को है। इस दिन मौन व्रत रहकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि कर पूरे दिन मौन रहकर उपवास करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ अमावस्या के दिन संगट तट और गंगा पर देवी-देवताओं का वास होता है। इस समय प्रयागराज में महाकुंभ भी चल रहा है। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में अमृत स्नान भी होगा। महाकुंभ के अमृत स्नान के समय में गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद ही शुभ रहता है। जो व्यक्ति इस समय गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।महाकुंभ के दौरान अमृत स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। जो आत्म- निर्माण, साधना और मानसिक शांति का प्रतीक है। इस दिन विशेष रूप से मौन व्रत रखने की परंपरा है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की आंतरिक शांति और संतुलन की ओर अग्रसर होता है। वहीं, प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला इस दिन और भी विशेष बन जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान करने के लिए जुटते हैं। प्रयागराज जिसे त्रिवेणी संगम के नाम से भी जाना जाता है, यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का मिलन होता है। यह स्थान हिंदू धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां हर 12 वर्षों में महाकुंभ मेला आयोजित होता है। इस दिन लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान कर अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने का विश्वास रखते हैं। खासकर मौनी अमावस्या के दिन कुंभ मेला अधिक श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में महाकुंभ स्नान का महत्व अत्यधिक है। माना जाता है कि इस दिन गंगा-यमुनाजी में स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन विशेष रूप से मौन रहकर साधना, ध्यान और पूजा करने का महत्व भी है। श्रद्धालु इस दिन मौन रहकर आत्म-निरीक्षण करते हैं और अपनी मानसिक शांति के लिए ध्यान करते हैं। यह दिन आत्मा की शुद्धि का होता है, जहां व्यक्ति अपने भीतर की आवाज को सुनकर ईश्वर से जुड़ने की कोशिश करता है।महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में स्नान, पूजन और तर्पण के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठान भी बड़े धूमधाम से होते हैं। यह पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगम भी है, जहां देश-विदेश से लाखों लोग एकत्रित होते हैं। यहां साधु-संतों, योगियों और भक्तों की अनूठी साधना देखने को मिलती है, जो पूरी दुनिया को शांति और प्रेम का संदेश देती है। प्रयागराज में महाकुंभ स्नान का आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक पुण्य अवसर है, बल्कि यह समाज में धार्मिक सौहार्द और एकता का प्रतीक भी बनता है। इस दिन विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। वहीं, समाज के प्रत्येक वर्ग के लोग इस अवसर का लाभ उठाते हुए जीवन की वास्तविकता को समझने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार, मौनी अमावस्या और महाकुंभ का संगम न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में सामूहिक शांति, सद्भाव और समृद्धि का संदेश भी देता है। यह दिन हमें आत्म-निर्माण और आत्म-शुद्धि की ओर प्रेरित करता है, जिससे हम अपनी आत्मा को शुद्ध कर जीवन में सुख-शांति प्राप्त कर सकें।

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