एबीएन सोशल डेस्क। बाल अधिकारों के सवाल को देश की मुख्य धारा की मीडिया में जोरदारी से स्थापित करने वाली मीडिया और संचार एजेंसी इंडिया फॉर चिल्ड्रेन को प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा में भारतीय युवा संसद के अवसर पर केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव ने इंडिया फॉर चिल्ड्रेन को शांति श्रेणी के तहत यह पुरस्कार प्रदान किया। ये पुरस्कार शांति, पर्यावरण और सेवा श्रेणियों में दिए जाते हैं जिनका चयन विशेषज्ञों की समिति करती है। एमिटी यूनिवर्सिटी के सहयोग से सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एसआरआरओ) ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था।सामाजिक बदलाव और बच्चों के मुद्दों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पुरस्कार विजेताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने स्वामी विवेकानंद को उद्घृत करते हुए कहा उठो! जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। उन्होंने कहा, स्वामीजी के ये शब्द आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि ये युवाओं में आत्मनिर्भरता, अनुशासन और सामूहिक विकास की भावना जगाते हैं, जो हमारे देश का भविष्य हैं।बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली देश की एकमात्र मीडिया एजेंसी इंडिया फॉर चिल्ड्रेन के निदेशक अनिल पांडेय ने पुरस्कार के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, यह सम्मान संगठन के प्रयासों व इसकी विश्वसनीयता की पुष्टि करने के साथ ही देश के हरेक बच्चे के अधिकारों की रक्षा के लिए हमारे प्रयासों को जारी रखने की हमारी ज़िम्मेदारी को और भी बढ़ा देता है। बाल अधिकारों के मुद्दों को मुख्यधारा के मीडिया में सबसे आगे लाने का हमारा मिशन अब तक सफलता भरा रहा है। हमने एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित किया है जहां डिजिटल, प्रिंट और सोशल मीडिया मंचों पर बाल संरक्षण एक प्राथमिकता बन गया है। उन्होंने कहा, हमारे प्रयासों के ठोस परिणाम सामने आए हैं। आज मीडिया की धारणा में उल्लेखनीय बदलाव आया है जिससे भारत में बच्चों के मुद्दों के अब ज्यादा स्थान मिलने लगा है। हमें विश्वास है कि हमारे प्रयासों से बच्चों के खिलाफ अपराध - विशेष रूप से बाल विवाह, बाल यौन शोषण, बाल मजदूरी और बच्चों की ट्रैफिकिंग की रोकथाम के प्रयासों में मदद मिलेगी।साल 2017 में स्थापित इंडिया फॉर चिल्ड्रेन, देश भर में 250 से अधिक गैरसरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ साझेदारी में बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। इंडिया फॉर चिल्ड्रेन प्रिंट, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया मंचों पर बच्चों के मुद्दों को उजागर करने के अलावा मीडिया मीट और मीडिया कार्यशालाओं का आयोजन करने के साथ ही बाल विवाह, बच्चों की ट्रैफिकिंग, यौन शोषण और बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता के प्रसार के लिए फिल्में और वीडियो भी बनाता है। अकेले 2024 में, इंडिया फॉर चिल्ड्रेन ने इन मुद्दों पर 10,000 से अधिक मीडिया कवरेज हासिल की है जिनमें से बहुत सी खबरें अखबारों के फ्रंट पेज और टीवी चैनलों के प्राइम टाइम पर थी। ऑनलाइन पहुंच लाखों लोगों तक रही।सम्मान समारोह में एमिटी लॉ स्कूल के अध्यक्ष डॉ डी के बंद्योपाध्याय, एडिशनल डायरेक्टर डॉ शेफाली रायजादा, समाज सुधारक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विशालानंद, सामाजिक बदलाव के वाहक आध्यात्मिक गुरु प्रदीप भैयाजी और आयोजन समिति के संयोजक प्रमोद कुमार और प्रसिद्ध टीवी पत्रकार दिनेश गौतम भी उपस्थित थे। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची ने ग्राम - खत्री खटंगा, प्रखंड - करांजी, ब्लॉक - बेड़ो, जिला - रांची में नि:शुल्क चिकित्सा एवं दवा वितरण शिविर का आयोजन टीम एबीएन, रांची। रविवार को श्री सर्वेश्वरी समूह - शाखा रांची ने बेड़ो ब्लॉक के खत्री खटंगा गांव में नि:शुल्क चिकित्सा एवं दवा वितरण शिविर लगाया, जिसमें 350 रोगियों को नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श के साथ दवा वितरण किया गया। शिविर का शुभारंभ विधिवत आरती-पूजन के साथ किया गया। इसके बाद शिविर की शुरुआत की गयी, जिसमें एलोपैथिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सीय सुविधा प्रदान की गयी। शिविर में ब्लड शुगर जांच की भी व्यवस्था की गयी थी। साथ ही जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल वितरण भी किया गया। शिविर में डॉ एसएन सिन्हा, डॉ रंजन नारायण, डॉ रोहित सिंह, डॉ शंकर रंजन, डॉ उत्पल, डॉ शांभवी, डॉ कृष्णा मुरारी सिंह, डॉ राजीव रंजन ने सेवा प्रदान किया। शिविर के सफल आयोजन में खत्री खटंगा, करांजी से कुणाल टंडन, विशाल टंडन एवं रघु खन्ना ने विशेष सहयोग प्रदान किया। श्री सर्वेश्वरी समूह- शाखा रांची की ओर से राधेश्याम सिंह, आनंद सिंह, आशुतोष कुमार, हेमंत नाथ शाहदेव, रमेश पांडेय, अनिरुद्ध नाथ शाहदेव, गंगाधर नाथ शाहदेव, शुभम कुमार, जय शंकर सिंह, दक्ष कुमार, पवन कुमार, सौरभ राज, गिरेन्द्र नाथ शाहदेव, प्रताप आदित्य नाथ शाहदेव, रविन्द्र उरांव, निर्भय कुमार पाल, रुद्रदीप नाथ शाहदेव, अमन साहु, अनिकेत नाथ शाहदेव, आदि नाथ शाहदेव, नीतीश सिंह, अनामी नाथ शाहदेव, अनिमेष नाथ शाहदेव से लगभग 25 सदस्यगण शामिल हुए।
जानिये महत्व और शाही स्नान के शुभ मुहूर्तएबीएन सोशल डेस्क। महाकुंभ मेला 2025 कल, 13 जनवरी से प्रयागराज में शुरू हो रहा है। यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे विशेष महत्व दिया जाता है। कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है और यह भारत के चार प्रमुख शहरों हरिद्वार, नासिक, प्रयागराज और उज्जैन में मनाया जाता है। माना जाता है कि इन पवित्र स्थानों के संगम में स्नान और पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है।कुंभ मेला का धार्मिक महत्वकुंभ मेला समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच 12 वर्षों तक युद्ध चला था। इस युद्ध के दौरान अमृत की कुछ बूंदें कुछ स्थानों पर गिरीं और वहीं पर कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। कुंभ मेला को हर बार 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता है, और इसे महाकुंभ के नाम से जाना जाता है। महाकुंभ में स्नान करने को शाही स्नान कहा जाता है।महाकुंभ 2025 में बन रहा ये शुभ संयोगमहाकुंभ 2025 खास माना जा रहा है क्योंकि 144 साल बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जो समुद्र मंथन के दौरान बनें विशेष ग्रहों की स्थिति से मेल खाता है। इस दिन सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति ग्रहों की शुभ स्थिति बन रही है, जो समुद्र मंथन के दौरान भी बनी थी। इसके साथ ही, महाकुंभ में रवि योग का भी निर्माण होगा, जो 13 जनवरी को सुबह 7:15 बजे से शुरू होकर 10:38 बजे तक रहेगा। इस दिन भद्रावास योग भी बनेगा, जो भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास माना जाता है।महाकुंभ का पहला शाही स्नान और शुभ मुहूर्तमहाकुंभ का पहला शाही स्नान कल, 13 जनवरी को पूर्णिमा के शुभ अवसर पर होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, 13 जनवरी को सुबह 5:03 बजे पूर्णिमा तिथि की शुरूआत होगी, जो 14 जनवरी को रात 3:56 बजे समाप्त होगी।
यह पर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर, कृषि और सामाजिक एकता का है प्रतीक : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट व विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मकर संक्रांति हर वर्ष 14 जनवरी को मनायी जाती है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है, जो एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी जाती है। मकर संक्रांति भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य सूर्य देव की पूजा और सकारात्मकता का आह्वान करना है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान सूर्य बारह राशियों के भ्रमण के दौरान जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार को सकरांत, लोहड़ी, टहरी, पोंगल आदि नामों से जानते हैं। इस दिन स्नान व दान का भी विशेष महत्व माना गया है। मकर राशि में सूर्य के प्रवेश करते ही सूर्यदेव उतरायण हो जाते हैं और देवताओं के दिन और दैत्यों के लिए रात शुरू होती है। खरमास खत्म होने के साथ ही माघ माह भी शुरू हो जाता है। इसी के साथ मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। सूर्य देव को मकर संक्रांति के दिन अर्घ्य के दौरान जल, लाल पुष्प, फूल, वस्त्र, गेंहू, अक्षत, सुपारी आदि अर्पित की जाती है। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का विशेष महत्व होता है। इस पावन दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व ही शुद्ध जल से स्नान करें। स्नान के पश्चात गायत्री मंत्र का जाप, सूर्य की आराधना और अपने इष्ट और गुरु मंत्र का जाप करें। कहा जाता है कि इस दिन जो भी मंत्र जाप, यज्ञ और दान किया जाता है। उसका शुभ प्रभाव 10 गुना होता है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश एक विशेष खगोलीय घटना है, जिसके बाद दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। इसे उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि सूर्य उत्तर की ओर यात्रा करता है। यह समय दिन में अधिक रोशनी और ऊर्जा का प्रवेश होने का संकेत देता है, जिससे जीवन में उन्नति और सफलता का संचार होता है। इसी कारण, मकर संक्रांति का पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मकर संक्रांति को कृषि से भी गहरा संबंध है। यह समय फसलों की कटाई और नूतन फसलों की शुरूआत का होता है। किसानों के लिए यह समय खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है, क्योंकि वे अपनी मेहनत का फल प्राप्त करते हैं। इस दिन लोग सूर्य देव की पूजा करते हैं, तिल और गुड़ का सेवन करते हैं,और एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजते हैं।भारत के विभिन्न हिस्सों में मकर संक्रांति अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। उत्तर भारत में इसे पतंगबाजी के रूप में मनाया जाता है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र में इसे उत्तरायण के रूप में मनाते हैं। पंजाब में इस दिन को लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है,दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है, जो फसल की कटाई का प्रतीक है और वहां विशेष भोज बनते हैं।मकर संक्रांति का महत्व केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। इस दिन लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं और सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं। यह पर्व जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि की कामना करता है, जिससे हर व्यक्ति का जीवन और समाज प्रगति की ओर अग्रसर होता है।मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर, कृषि, और समाजिक एकता का प्रतीक है, जो हमें जीवन में खुशियां और ऊर्जा देने का काम करता है।
लोहड़ी का पर्व भगवान सूर्य और अग्नि को किया गया है समर्पित : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि लोहड़ी भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले 13 जनवरी को मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व मुख्य रूप से फसल कटाई के मौसम और सर्दियों के समाप्ति की खुशी में मनाया जाता है। यह पर्व किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उनकी मेहनत के अच्छे परिणामों की शुरुआत का प्रतीक है। लोहड़ी का त्योहार रिवाजों और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। लोहड़ी का त्योहार भगवान सूर्य और अग्नि को समर्पित किया गया है इस दिन लोग एकत्रित होकर आग जलाते हैं और उस अग्नि के चारों ओर घूमते हुए गुड़, तिल, मूँगफली और रेवड़ी जैसी सामग्री चढ़ाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान लोग पारंपरिक गीत गाते हैं। सभी लोग ढोल नगाड़े बजाकर नाचते है और खुशियाँ मनाते हैं। लोहड़ी की आग को शुभ और शुद्ध माना जाता है, जो बुराई को नष्ट कर देती है और अच्छे भविष्य की कामना करती है। इस दिन पतंगो को उड़ाने की भी प्रथा है लोहड़ी का संबंध कृषि और विशेष रूप से गेहूं की फसल से है। इस दिन को फसल के पकने की खुशी में मनाया जाता है। किसानों के लिए यह समय विशेष होता है, क्योंकि यह उनकी सालभर की मेहनत का फल मिलने का समय होता है। इसके अलावा, यह पर्व सर्दियों के समाप्त होने और गर्मियों के आगमन की प्रतीक भी है, क्योंकि लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति के आसपास आता है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। लोहड़ी की एक और विशेषता है कि यह पर्व परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं और मिठाईयां बांटते हैं। इसके अलावा, इस दिन नई नवेली दुल्हनें और नवजात बच्चों का स्वागत भी किया जाता है। उनके लिए यह दिन विशेष होता है, जिसमें उन्हें आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी जाती हैं। इस प्रकार, लोहड़ी केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक उत्सव भी है, जो हमें हमारे पारंपरिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जोड़ता है। यह पर्व एकता, समृद्धि और खुशियों का प्रतीक है और भारतीय समाज में अपने अद्वितीय स्थान के कारण हमेशा याद रहेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (कुंभ नगर)। पवित्र त्रिवेणी के तट पर आयोजित हो रहे महाकुंभ को दिव्य-भव्य बनाने की तैयारी की जा रही है। आयोजन को लेकर देश-विदेश के लोगों में उत्साह और जिज्ञासा है। हर कोई खुद को इस पल का साक्षी बनाना चाहता है। इन सबके बीच आस्था के इस महाकुंभ की जो सबसे अहम कड़ी है वह है यहां आने वाले कल्पवासी। प्रति वर्ष की तरह इस बार भी माघ महीने में कल्पवासियों की आस्था से यह महाकुम्भ दिव्य होने वाला है। पौष पूर्णिमा से शुरू होने वाले कल्पवास में अभी से कल्पवासियों का आना शुरू हो गया है,इसकी तैयारियां हो रहीं है। रायबरेली से आये दिनेश पांडे कई वर्षों से कल्पवास कर रहे हैं, दिनेश पांडे का कहना है कि उन सबके लिए कल्पवास अलौकिक अनुभव देने वाला होता है।अम्बुज व रविकांत कहते हैं कड़ाके की ठंड और सुविधाओं का टोटा इसमें कोई मायने नहीं रखता है। कहते हैं कि इन बार की व्यवस्था वाकई दिव्य है, सभी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो रहीं है। अपने टेंट की व्यवस्था बनाने में जुटे कल्पवासियों का कहना है कि भीड़ होने के चलते वह लोग कल्पवास शुरू होने के छह दिन पहले ही आ गये हैं। हालांकि इन सबके बीच महंगाई कल्पवासियों को जरूर परेशान जरूर कर रही है,लेकिन आस्था के आगे इन्हें महंगाई की कोई चिंता नहीं है। प्रतापगढ़ से आये उमाकांत, रामलखन मिश्र का कहना है कि सामान्य कुटिया का रेट सात हजार पहुंच गया है। गोल वाला टेंट पहले सात-आठ हजार में मिल जाता था, अब 15 हजार का है। उल्लेखनीय है कि कल्पवासियों के टेंट की व्यवस्था मेला प्रशासन नहीं करता। टेंट कुछ संस्थाएं बनाती हैं, जिन्हें मेला प्रशासन मामूली दर पर जमीन उपलब्ध कराता है। यहीं पर संस्थाएं अपने कल्पवासियों के शिविर लगवाती हैं। प्रयागराज के ओमप्रकाश के अनुसार टेंट से लेकर जरूरत की सारी सुविधाओं के दाम 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा दिये गये हैं। मगर, उनका उत्साह कम नहीं पड़ा है। कल्पवासी तीर्थ पुरोहितों के ही शिविरों में प्रवास करते हैं। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष शिव शर्मा कहते हैं जो टेंट ढाई हजार में मिलते थे, वह चार हजार रुपये के मिल रहे हैं। इसी कारण शिविर महंगे हो गए हैं। जानिये क्या है कल्पवास संगम की रेती पर माघ के पूरे महीने निवास कर पुण्य फल प्राप्त करने की साधना को ही कल्पवास कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कल्पवास की न्यूनतम अवधि एक रात्रि हो सकती है। तीन रात्रि, तीन महीना, छह महीना, छह वर्ष, 12 वर्ष या जीवनभर भी कल्पवास किया जा सकता है। मान्यता है कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश होने के साथ एक मास के कल्पवास से इच्छित फल की प्राप्ति होती है। जन्म जन्मांतर के बंधनों से भी मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार, एक कल्पवास का फल उतना ही है, जितना सौ साल तक बिना अन्न ग्रहण किये तपस्या करने का। महाकुंभ में लाखों साधु-संतों के साथ आम लोग भी कल्पवास करते हैं। कल्पवास पौष पूर्णिमा स्नान के साथ 13 जनवरी से शुरू होकर एक माह बाद माघी पूर्णिमा तक चलेगा। कल्पवास की दिनचर्या बेहद कठिन होती है इसमें श्रद्धालु एक बार भोजन करते हैं और तीन बार स्नान। सुबह गंगा स्नान कर पूजा-अर्चना से दिनचर्या शुरू होती है। शास्त्रों के अनुसार, कल्पवासी को दिन में तीन बार (भोर में, दोपहर और शाम) गंगा स्नान करना चाहिए। एक बार भोजन और एक बार फलाहार लेना चाहिए। खाने-पीने में अरहर की दाल, लहसुन और प्याज जैसी चीजें वर्जित हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। गौ माता को राष्ट्र माता के पद पर प्रतिष्ठित करवाने हेतु गो क्रांति अग्रदूत परम पूज्य गोपाल मणि जी महाराज का रांची एयरपोर्ट पर आज 6 बजे आगमन हुआ। गोपाल मणि जी आज देहरादून से भाया दिल्ली होकर रांची ऐयरपोर्ट पहुंचे गो भक्तों एवम धर्म प्रेमियों के द्वारा अंग वस्त्र, पुष्पगुच्छ सहित माला पहनाकर उनका अभिनंदन और भव्य स्वागत किया गया।रांची एयरपोर्ट से महाराज श्री चतरा के लिए प्रस्थान किये, जहां चतरा गौशाला के सानिध्य में महाराज श्री कल 9 जनवरी से 13 जनवरी 2025 तक प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से सायं 6 बजे तक धेनु मानस गो कथा का रसपान चतरा निवासियों को कराएंगे। महाराज श्री दृढ़ संकल्पित है कि गौ माता को राष्ट्र माता के जल्द से जल्द सुशोभित किया जाये।महाराज श्री ने पूरे भारतवर्ष में इस हेतु कई बार आंदोलन भी किया और रेलिया भी निकाली है। अभिनंदन स्वागत में एयरपोर्ट पर किशन गोयल, मनोज बजाज, प्रमोद सारस्वत, प्रमोद कुमार पांडेय, गंगाधर शास्त्री, जितेंद पाठक, आलोक रंजन, रोहित कुमार चौरसिया, प्रशांत कुमार बैद्य, पिंटू कुमार सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
टीम एबीएन, रांची। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का प्रथम वर्ष भारतीय काल गणना के अनुसार मनाया जायेगा। प्राण प्रतिष्ठा पौष शुक्ल द्वादशी (22 जनवरी 2024) को की गयी थी। वर्ष 2025 के जनवरी मास में पौष शुक्ल द्वादशी 11 जनवरी को है। इसे प्रतिष्ठा द्वादशी कहा जायेगा, इस अवसर पर चार स्थानों पर तीन दिवसीय आयोजन होंगे। मंदिर परिसर के यज्ञ मंडप में होने वाले आयोजन शुक्ल यजुर्वेद मध्यंदनी शाखा के 40 अध्यायों के 1975 मंत्रों से अग्नि देवता को आहुति दी जायेगी, 11 वैदिक मंत्रोच्चार करेंगे होम का यह कार्य प्रात: काल 8 से 11 बजे तक और अपराह्न 2 से सायं 5 बजे तक होगा। श्रीराम मंत्र का जप यज्ञ भी इसी कालखंड में दो सत्रों में होगा, 6 लाख मंत्र जप किया जायेगा। इसके अतिरिक्त राम रक्षा स्त्रोत, हनुमान चालीसा, पुरुष सूक्त, श्री सूक्त, आदित्य हृदय स्तोत्र, अथर्वशीर्ष आदि के पारायण भी होंगे मंदिर के भूतल पर कार्यक्रम दक्षिणी दिशा के प्रार्थना मंडप में नित्य अपराह्न 3 से 5 बजे तक भगवान को राग सेवा प्रस्तुत की जायेगी। मंदिर की कोली में नित्य सायं काल 6 से 9 बजे तक रामलला के सम्मुख बधाई गान प्रस्तुत होंगे। यात्री सुविधा केंद्र के प्रथम तल पर तीन दिवसीय संगीतमय मानस पाठ होंगे अंगद टीला के मैदान पर नित्य ———अपराह्न 2 से 3:30 बजे तक राम कथा और अपराह्न 3:30 से 5:00 बजे तक मानस पर प्रवचन होंगे नित्य सायंकाल 5:30 से 7:30 बजे तक अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे 11 जनवरी को प्रात: काल से भगवान के भोजन प्रसाद का वितरण प्रारंभ होगा। अंगद टीला के समस्त कार्यक्रमों में सम्पूर्ण समाज सादर आमंत्रित है।, सुरक्षा सम्बन्धी कोई बाधा / रोक टोक नहीं होगी। उक्त जानकारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय ने दी।
श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम मंदिर में भगवान राधा- कृष्ण का हजारों श्रद्धालुओं ने किया दर्शन चार दिवसीय श्रीमद् भागवत कृष्ण कथा का हुआ समापन टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम मंदिर मे श्रीमद् भागवत कृष्ण कथा के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा कृष्ण का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। चार दिवसीय श्रीमद्भागवत कृष्ण कथा के अंतिम दिन कथा के यजमान सुनीता अग्रवाल राजू अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, विजय अग्रवाल, पूनम अग्रवाल, नवल अग्रवाल, सपरिवार एवं संस्था के सदस्यों ने बड़े ही प्रेम से श्रीमद् भागवत का पूजन तथा स्वामी श्री सदानंद महाराज को माल्यार्पण चंदन- वंदन कर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं भक्तों के साथ श्रीमद् भागवत की आरती की कथा की अमृत वर्षा स्वामी सदानंद जी महाराज के मुखारविंद से भक्तों ने श्रवण किया।आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन दिन व्यास पीठ पर आसीन संत श्री सदानंद महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि मन वाणी समस्त इंद्रियों के द्वारा जो जो भी करें वह सब परम पुरुष भगवान को समर्पित करते हुए करें। यही भागवत धर्म है। साधना भक्ति के द्वारा प्रेम भक्ति प्राप्त होती है और वह भगवान के पारायण होकर माया को अनायास ही पार हो जाता है। विषयी पुरुष को वन में भी कामादि शत्रु सताते हैं जितेन्द्रिय का घर में ही पांच इंद्रियों का निग्रह करना तप है। जिसके हृदय में वैराग्य जागृति हो उसके लिए घर ही तपोवन है। समस्त उपनिषदों का सार है ब्रह्म और आत्मा का एकत्वरूप अद्वितीय सदवस्तु। वही श्रीमद्भागवत का प्रतिपाद्य विषय है। इसके निर्माण का प्रायोजन है एक मात्र कैवल्य मोक्ष है। जो लोग विषय चिंतन में लगे रहते हैं उनकी इंद्रिय विषयों में फंस जाती है।मन को भी उन्हीं की ओर खींच लेती है जैसे जलाशय के तिर पर उगे कुशादी जल खींचते उसी प्रकार इंद्रियां शक्ति मन बुद्धि विचार शक्ति को हर लेता है। जो लोग भगवान की लीलाओं को श्रद्धा के साथ नित्य श्रवण करते हैं उनके हृदय में थोड़े ही समय में भगवान प्रकट हो जाते हैं। कथा के दौरान कलाकारों द्वारा के प्रसंग पर जीवित अद्भुत झांकियां प्रस्तुत की। संत महात्माओं की अमृत कथा, बीतक कथा तथा सुमधुर सुंदर भजनों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। तथा सभी भक्त भक्ति में भाव- विभोर होकर खूब झूमे। तथा महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ श्रीमद् भागवत कृष्ण कथा का समापन हुआ। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के द्वारा स्वामी सदानंद जी महाराज, देश-विदेश से आए सभी संत महात्माओं एवं सभी भजन- गायकों, संगीतकारों का सम्मान किया गया। सभी श्रोता प्रेम से भागवत भगवान को प्रणाम कर महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया अंत में उन्होंने कहा कि इस प्रकार सुखदेव जी के मुखारविंद से राजा परीक्षित ने श्रीमद्भागवत कथा सुनी उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ । तत्पश्चात कथा के यजमान तथा उनके परिवार एव संस्था के सदस्यों ने व्यास पूजा कर पुर्णाहूति की। परम पूज्य गुरुवर ने बताया कि श्री कृष्ण प्रणामी लगातार 37 वर्षों से सेवा प्रकल्प का कार्य करती आ रही है जिसके अंतर्गत पोलियो ग्रस्त रोगियों का उपचार अनाथ लड़कियों का विवाह, लालन - पालन तथा शिक्षा की सेवा, गौ सेवा की जाती है। गुरु जी श्री सदानंद जी महाराज शाम को हवाई मार्ग द्वारा दिल्ली के लिए प्रस्थान किये। संस्था के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल एवं सचिव मनोज चौधरी ने श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम मंदिर के उद्घाटन में पधारे सभी संत- महात्माओं, राज्य के गण्यमान्य लोगों, संस्था के सदस्यों, श्रद्धालुओं, एवं चार दिवसीय श्रीमद्भागवत के आयोजन में पूर्ण रुप से सहयोग करने के प्रति आभार व्यक्त किया। तथा उन्होंने उन सबों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने झारखंड राज्य का सबसे बड़े राधा- कृष्ण के मंदिर का निर्माण करने मे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ण सहयोग किया।ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने सभी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया बंधुओं के प्रति भी सफल आयोजन में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम मे मुख्य रूप साध्वी मीणा महाराज, साध्वी पूर्णा महाराज, ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष निर्मल जालान, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी, नवल अग्रवाल, सज्जन पाड़िया, विजय अग्रवाल, ओम सरावगी, निर्मल छावनिका, विष्णु सोनी, मनीष जालान, विशाल जालान, नंदू चौधरी, पूरणमल सराफ, सुरेश चौधरी, सुरेश भगत, शिव भगवान अग्रवाल, सुनील पोद्दार, चिरंजी लाल खंडेलवाल, विनय कुमार, पवन तिवारी, रवि कुमार, श्रवण कुमार, प्रेमचंद श्रीवास्तव, अशोक लाठ, अनिल अग्रवाल, मनीष सोनी, अजय खेतान, मोहनलाल खंडेलवाल, वेंकट गाड़ोदिया, नितिन मोदी, संजय सर्राफ, जयप्रकाश मित्तल,गोविंद अग्रवाल, शिव पोद्दार, सुरेश अग्रवाल,विधा देवी अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, शोभा अग्रवाल, विमला जालान, पुनम अग्रवाल, ललिता पोद्दार, चंदा देवी अग्रवाल, सुमन चौधरी, सीमा अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, वंदना अग्रवाल, श्वेता अग्रवाल, सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
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