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Published / 2026-07-20 20:36:52
राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस, तिरंगे के सम्मान, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक : संजय सर्राफ

  • राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस, तिरंगे के सम्मान, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक : संजय सर्राफ

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस प्रत्येक वर्ष 22 जुलाई को मनाया जाता है। 

इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को औपचारिक रूप से अपनाया था। स्वतंत्रता प्राप्ति से लगभग तीन सप्ताह पहले लिये गये इस ऐतिहासिक निर्णय ने देश को एक ऐसी पहचान प्रदान की, जो आज भी राष्ट्रीय गौरव, एकता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तीन समान क्षैतिज पट्टियों से बना है। 

सबसे ऊपर केसरिया रंग साहस, त्याग और बलिदान का संदेश देता है। बीच में सफेद रंग सत्य, शांति और पारदर्शिता का प्रतीक है, जबकि सबसे नीचे हरा रंग समृद्धि, विकास और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है। ध्वज के मध्य सफेद पट्टी पर गहरे नीले रंग का 24 तीलियों वाला अशोक चक्र अंकित है, जो सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के धर्मचक्र से प्रेरित है। 

यह न्याय, धर्म, सतत प्रगति और कर्मशील जीवन का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस का उद्देश्य देशवासियों में तिरंगे के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूकता का भाव विकसित करना है। यह दिवस हमें उन स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की भी याद दिलाता है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। 

तिरंगा केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, संघर्षों और आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक है। इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी एवं निजी संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत, निबंध, चित्रकला, भाषण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। 

इन आयोजनों के माध्यम से नयी पीढ़ी को राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास, उसकी गरिमा और सम्मान की परंपरा से परिचित कराया जाता है। साथ ही नागरिकों को भारतीय ध्वज संहिता का पालन करते हुए तिरंगे के सम्मान और उसके उचित उपयोग के प्रति भी प्रेरित किया जाता है। आज के समय में, जब भारत विश्व मंच पर नयी ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है, राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है। 

यह दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। तिरंगे की शान बनाये रखना प्रत्येक भारतीय का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है।  22 जुलाई के इस प्रेरणादायी अवसर पर हम सभी राष्ट्र की अखंडता, एकता और समृद्धि के लिए समर्पित रहने तथा तिरंगे के सम्मान को सदैव सर्वोपरि रखने का संकल्प लें।

Published / 2026-07-20 20:31:51
रांची में ज्ञेय और नियोग सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश

  • रांची में ज्ञेय और नियोग सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश
  • झारखंड की राजधानी रांची में पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी एवं नियोग सागर जी महाराज संघ का मंगल प्रवेश 

एबीएन सोशल डेस्क। रांची झारखंड की राजधानी रांची आज आध्यात्मिक उल्लास और धर्ममय वातावरण से सराबोर हो उठी, जब परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी महाराज ससंघ का नगर में भव्य एवं मंगल प्रवेश हुआ। आचार्यश्री के आगमन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विनयपूर्वक अगवानी कर जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। 

प्रात: 6 बजे महावीर भवन बरियातू से विहार कर 8 बजे वासुपूज्य जिनालय में मंगल प्रवेश के बाद बाईसवें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री नेमीनाथ भगवान का निर्वाण दिवस मनाया गया तत्पश्चात जैन मन्दिर अपर बाजार में 8.30 बजे मंगल प्रवेश हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के दर्शन कर एवं पादप्रक्षालन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। नगर में धर्म, संयम और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया।

इस अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने अपने मंगल संदेश में कहा कि मनुष्य का वास्तविक उत्थान आत्मचिंतन, संयम, सदाचार और करुणा से ही संभव है। उन्होंने सभी से जीवन में अहिंसा, सत्य, क्षमा और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। आचार्यश्री ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार और आचरण को श्रेष्ठ बनाना ही सच्ची साधना है।

रांची के जैन समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि आचार्यश्री के सान्निध्य में आगामी दिनों चतुर्मास रांची में होना है। चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, प्रवचन, स्वाध्याय एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न होंगे, जिनमें समाज के साथ-साथ सभी धर्मप्रेमी नागरिकों को सहभागी बनने का अवसर मिलेगा।

मंगल प्रवेश में जैन समाज के पदाधिकारी, महिला मंडल, युवाओ तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आचार्यश्री के सान्निध्य को रांची के लिए सौभाग्य बताते हुए उनके मंगलमय प्रवास से धर्म एवं संस्कारों के व्यापक प्रसार की कामना की। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

Published / 2026-07-20 16:55:10
शिशु का नामकरण संस्कारोत्सव गायत्री यज्ञीय विधान से संपन्न

  • शिशु के अंतःकरण में (प्रारंभिक जीवन से ही) मानवीय आदर्शों के प्रति निष्ठा भाव जगाना चाहिए : प्रमोद कुमार
  • शिशु का नामकरण संस्कारोत्सव गायत्री यज्ञीय विधान से संपन्न हुआ

टीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार गुदड़ी बाजार के मणिलाल साहु परिवार के बेटे बहु विशाल साहु एवं जस्सी राज की नवजात शिशु का अन्नप्राशन संस्कारोत्सव बहुत ही आनन्दमय  उल्लासमय मंगलमय गायत्री यज्ञीय अनुष्ठान  विधान के दिव्य वातावरण में विस्तार से एवीन प्लाजा  में मनाया गया। 

इस कार्यक्रम आयोजन में गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ व गुरुईश वंदना, पूजा साधन सामग्री शुद्धिकरण, षटकर्म, संकल्प, कलश पूजन, दीप पूजन, देवावाहन, नमन-वंदन व षोडशोपचार पूजन व स्वस्ति वाचन पाठ रक्षा विधान सहित नामकरण का संस्कारोत्सव विधान कराया गया। 

नामकरण संस्कार प्रकरण में माता पिता और शिशु के साथ साथ इस शुभ कार्यक्रम में शामिल सभी आगन्तुक परिजनों को भी वैदिक मंत्राभिषेक विधान किए गए। यज्ञीय पुरोहित प्रमोद कुमार ने बताया कि शिशु के अंतःकरण में प्रारंभिक जीवन से ही मानवीय आदर्शों के प्रति निष्ठा भाव जगाना चाहिए।कहा कि जीवात्मा शिशु रूप में ईश्वर प्रदत्त एक मानवीय उपहार स्वरूप है, उसे जीवन का कर्तव्य व उत्तरदायित्व निर्वाह का बोध भी भविष्य में होना चाहिए। 

माता पिता अभिभावक  शिशु के जीवन में दोष दुर्गुण से बचाये रखने और उसके  स्वभाव में  सुसंस्कार, सद्गुण ग्रहण आदि समय समय पर  बताते समझाते रहना चाहिए। इस विधान में पवित्रता से शुभ पात्र में लिखित, संस्कारित, संयोजित ढके हुए नामपट को हटाकर नाम वरेण्य की घोषणा की गयी और  भाव किया गया कि  घोषित नाम व्यक्तित्व का प्रतीक बन कर सबका गौरव बढ़ाने वाला हो। 

आगे मंत्र पाठ कर सबने दोहराया कि  शुद्धोऽसि, बुद्धोऽसि, शिशु चिरजीवी हो, कर्तव्यनिष्ठ हो, धर्मशील हो, ओजस्वी तेजस्वी हो, प्रगतिशील हो, 21 वी सदी उज्जवल भविष्य हो, सबके उद्घोषणा बाद शेष यज्ञीय विधान कर्मकाण्ड सहित विशेष मंत्र आहुति प्रदान किए गए।

अंत में यज्ञीय आचार्य, अभिभावक, साधक, आगन्तुक गणों ने  शिशु के ऊपर अक्षत, गंगाजल व पुष्प की वर्षा  से स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्जवल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ कर आशीर्वाद दिए। फिर प्रसाद वितरण कर समापन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के मणिलाल साहु और जय नारायण प्रसाद ने दी। 

Published / 2026-07-19 20:09:32
रांची : गुरु पूर्णिमा महोत्सव में गूंजे भक्ति और सेवा के स्वर

स्वामी सदानंद महाराज ने दिया मानव सेवा का संदेश 

एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के संस्थापक परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज के पावन सान्निध्य में रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरु पूजन,सत्संग, भजन- कीर्तन तथा आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया। महोत्सव का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ गुरु पूजन से हुआ। 

इसके पश्चात भव्य सत्संग एवं संगीतमय भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु गुरु भक्ति एवं भगवान श्री राधा-कृष्ण की आराधना में भाव-विभोर दिखाई दिए।अपने प्रेरणादायी आध्यात्मिक प्रवचन में परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाले पथ-प्रदर्शक होते हैं। गुरु के सान्निध्य में ही मनुष्य आत्मिक उन्नति, संस्कार और सेवा के वास्तविक मार्ग को प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा संचालित देश के विभिन्न सेवा धामो में निराश्रितजनों की सेवा, गौ सेवा तथा मानव सेवा निरंतर की जा रही है। 

मानव सेवा और गौ सेवा से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं है। समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति यदि सेवा कार्यों में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे तो अनेक जरूरतमंदों के जीवन में आशा का प्रकाश फैलाया जा सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना के साथ ट्रस्ट की विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। 

महोत्सव के दौरान श्री राधा रानी एवं भगवान श्रीकृष्ण का अलौकिक एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया। ठाकुरजी को नवीन एवं आकर्षक वस्त्रों के साथ सुंदर आभूषणों से सुसज्जित किया गया, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सायंकाल 101 दीपों से भव्य महाआरती संपन्न हुई, जिससे पूरा मंदिर परिसर दिव्य आलोक से प्रकाशित हो उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। 

उक्त जानकारी देते हुए ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि मौके पर डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, निर्मल छावनिका, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, शिव भगवान अग्रवाल, संजय सर्राफ, मधुसूदन जाजोदिया, सुरेश अग्रवाल, पंकज पोद्दार, नंदकिशोर चौधरी, नवल अग्रवाल, विशाल जालान, मनीष साहू,प्रभास गोयल, विष्णु सोनी, अरविंद पांडे, ज्ञान प्रकाश शर्मा, विद्या देवी अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर गुरु के बताए सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक जीवन के आदर्शों का पालन करने का संकल्प लिया।

Published / 2026-07-18 21:42:58
श्री जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा पर आरएसएस ने किया सेवा कार्य

  • श्री जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा पर आरएसएस ने किया सेवा कार्य

टीम एबीएन, रांची। भगवान श्रीजगन्नाथ की पावन रथ यात्रा पर आज रांची स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर के स्वयंसेवकों ने सेवाकार्य किया।

प्रात: 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक 200 से अधिक स्वयंसेवक मंदिर के गर्भगृह से भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा के विग्रहों को विधिवत नीचे लाने, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं के सुचारु आवागमन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संचालन में पूर्ण समर्पण, अनुशासन एवं सेवाभाव के साथ निरंतर सक्रिय रहे।

इस सेवाकार्य में राष्ट्र सेविका समिति, रांची महानगर की 15 बहनों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभायी तथा विभिन्न व्यवस्थाओं के संचालन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में सेवा, संगठन और सामाजिक समरसता की भावना से निरंतर सेवाकार्य किये जाते हैं। 

भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा के अवसर पर किया गया यह सेवाकार्य भी समाज के प्रति उत्तरदायित्व, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की उसी परंपरा का सशक्त उदाहरण है। उक्त जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर के महानगर सह प्रचार प्रमुख शिवेंदु सागर ने दी।

Published / 2026-07-17 18:01:35
गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होंगे डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज, 19 को रांची आगमन

  • गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होंगे डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज, 19 जुलाई को रांची आगमन

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के संस्थापक परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज का रांची आगमन 19 जुलाई को होगा। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने संयुक्त रूप से बताया कि गुरुजी रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव में सहभागिता करेंगे। 

उन्होंने बताया कि 19 जुलाई को अपराह्न 2.30 बजे से शाम 5 बजे तक डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज के सान्निध्य में भव्य सत्संग, भजन-कीर्तन एवं आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान गुरुजी अपने प्रेरणादायी आशीर्वचनों से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करेंगे। 

कार्यक्रम में पारंपरिक विधि-विधान से गुरु पूजन भी संपन्न होगा तथा उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से गुरु पूर्णिमा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर गुरुजी के दर्शन, सत्संग एवं आशीर्वचन का लाभ लेने तथा कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।

Published / 2026-07-15 19:55:09
अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस न्याय, मानवाधिकार और वैश्विक शांति का देता है सशक्त संदेश : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस प्रतिवर्ष 17 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर में न्याय, मानवाधिकार, कानून के शासन तथा मानवता के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। 

यह दिन वर्ष 1998 में रोम संविधि को अपनाये जाने की स्मृति में मनाया जाता है। इसी ऐतिहासिक संधि के आधार पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिसने युद्ध अपराध, नरसंहार,मानवता के विरुद्ध अपराध तथा आक्रमण जैसे जघन्य अपराधों के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का वैश्विक तंत्र विकसित किया।

 अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस का मूल उद्देश्य यह संदेश देना है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। यह दिवस विश्व समुदाय को न्याय, समानता, मानव गरिमा और उत्तरदायित्व के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है। 

साथ ही यह पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा तथा दोषियों को निष्पक्ष न्याय दिलाने की आवश्यकता पर बल देता है। इस दिवस का महत्व इसलिए भी अत्यधिक है क्योंकि आज विश्व के अनेक हिस्सों में युद्ध, हिंसा, आतंकवाद, जातीय संघर्ष और मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। 

ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था वैश्विक शांति और मानवता की रक्षा का महत्वपूर्ण आधार बनती है। न्याय व्यवस्था न केवल अपराधियों को दंडित करती है, बल्कि पीड़ितों के विश्वास को भी मजबूत करती है और भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने का प्रयास करती है। अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस की प्रमुख विशेषता यह है कि यह किसी एक देश तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के हित से जुड़ा हुआ दिवस है। 

इस अवसर पर विभिन्न देशों में संगोष्ठियों, परिचर्चाओं, विधिक जागरूकता कार्यक्रमों, मानवाधिकार अभियानों तथा शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। न्यायविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक संगठन और युवा वर्ग कानून के शासन तथा मानवाधिकारों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करते हैं। आज के समय में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन का आधार बन चुका है। 

प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह कानून का सम्मान करे, मानवाधिकारों की रक्षा करे तथा न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाये। अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि न्याय, समानता, सत्य और मानव गरिमा ही एक शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समृद्ध विश्व की सबसे मजबूत नींव हैं। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश और उद्देश्य है। 

Published / 2026-07-14 20:26:45
भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा पर श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और महाप्रसाद का आयोजन

टीम एबीएन, रांची। भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के पावन अवसर पर 16 जुलाई दिन गुरुवार को श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में विशेष पूजा- अनुष्ठान एवं भक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। 

ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी का नयनाभिराम, अलौकिक एवं भव्य श्रृंगार किया जाएगा। 

मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, विशेष पूजा-अर्चना तथा सामूहिक आरती के माध्यम से भक्त भगवान की आराधना करेंगे। उन्होंने बताया कि भगवान को केसरिया खीर एवं ताजे फलों का महाभोग अर्पित किया जायेगा। पूजा-अर्चना के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जायेगा। 

ट्रस्ट ने इस पावन अवसर पर रांची एवं आसपास के सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार मंदिर पहुंचकर भगवान के दिव्य दर्शन, भजन-कीर्तन, आरती एवं महाप्रसाद का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश प्रदान करेगा।

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