परीक्षित जन्म और शुकदेव जी के पावन प्रसंग से भक्तिमय हुआ अग्रसेन भवन टीम एबीएन, रांची। सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता कथा अमृत महोत्सव के द्वितीय दिवस का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में हुआ। जगन्नाथ धाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास महाराज दिनेश जी भारद्वाज ने व्यास पीठ से श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन। कथा का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। कथावाचक दिनेश जी भारद्वाज ने भगवान श्रीहरि का स्मरण करते हुए श्रीमद्भागवत के माहात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने शुकदेव जी के जन्म एवं पूजन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शुकदेव जी जन्म से ही वैराग्य एवं ज्ञान के स्वरूप थे। उनका जीवन संसार में रहते हुए भी परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण और आत्मज्ञान का संदेश देता है। इस प्रसंग का कथा स्थल पर सजीव चित्रण किया गया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इसके बाद राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा व्यास ने बताया कि परीक्षित भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे और उनका जन्म स्वयं भगवान की कृपा से सुरक्षित हुआ। महाभारत युद्ध के पश्चात जब अभिमन्यु-पुत्र परीक्षित के जीवन पर संकट आया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा कर धर्म की परंपरा को आगे बढ़ाया। परीक्षित का चरित्र हमें विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान पर विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। कथा में आगे राजा परीक्षित द्वारा जीवन, मृत्यु, धर्म और परमात्मा से संबंधित किये गये जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों का वर्णन किया गया। इन प्रश्नों के उत्तर देने के लिए शुकदेव जी का आगमन हुआ और यहीं से श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य ज्ञान की धारा प्रवाहित हुई। कथावाचक ने कहा कि मनुष्य के जीवन में जिज्ञासा ही ज्ञान का प्रथम द्वार है और जब जिज्ञासा भगवान की ओर मुड़ती है, तब जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ में आता है।कथा के दौरान प्रस्तुत सुमधुर भजनों से पूरा कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूमते और भगवान के जयकारे लगाते नजर आये। कथा स्थल को आकर्षक पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया था। अंत में श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में भाग लिया तथा प्रसाद का वितरण किया गया। मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के तृतीय दिवस सृष्टि का विस्तार, कपिल व्याख्यान, सती-शिव चरित्र एवं ध्रुव जी के चरित्र से जुड़े प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जाएगा। मौके पर दयानंद सर्राफ, सीताराम सर्राफ, श्रीगोपाल सर्राफ, ओम सर्राफ, गिरधारी सर्राफ, पवन सर्राफ, भगवान सर्राफ, रामस्वरूप सर्राफ, प्रदीप सर्राफ, निर्मल काबरा, निर्मल मानपुरिया, अनुप सर्राफ, विनोद महलका, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, सरवन सिंघानिया, आनंद अग्रवाल, गौरीशंकर अग्रवाल, रविकांत सुल्तानिया,संजय सर्राफ, दिलीप सर्राफ, विजय सर्राफ, संदीप सर्राफ, मोनू सर्राफ, विक्रांत सर्राफ, विकास अग्रवाल, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
श्री साधुमार्गी जैन संघ रांची द्वारा पर्यूषण महापर्व के छठे दिन का गरिमामय आयोजन टीम एबीएन, रांची। श्री साधुमार्गी जैन संघ रांची के तत्वावधान में पर्यूषण महापर्व का छठा दिन पूरी श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत समता शाखा की सामूहिक आराधना से हुई, जिसमें नवकार मंत्र, चार शरण, श्री सिद्ध स्तुति, आचार्य श्री नानेश की चिंतन मणियां, बारह भावना, श्री राम गुरु चालीसा और संघ समर्पणा गीत का सामूहिक गान किया गया। धर्म और संस्कार पर विशेष संदेश कार्यक्रम के दौरान स्वाध्यायी श्रीमती ज्योति जी ओस्तवाल ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन करते हुए अर्जुन माली और सुदर्शन श्रावक के जीवन चरित्र को भगवान महावीर के संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को ज्ञानशालाओं में भेजकर धर्म का ज्ञान अवश्य दिलायें, क्योंकि संस्कार ही सबसे बड़ी पूंजी है। गर्भकाल से ही बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण होना चाहिए, जैसा कि अभिमन्यु ने गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदने का ज्ञान प्राप्त किया था। आज के समय में हमारे पास हर सुविधा है, परंतु बुजुर्गों के पास बैठने और बच्चों को संस्कार देने का समय कम पड़ रहा है। समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते हुए वक्ता ने कहा कि जिस प्रकार लक्ष्मण जी ने सीता माता की रक्षा के लिए लक्ष्मण रेखा खींची थी, वैसे ही हमें भी जीवन में अनुशासन की लक्ष्मण रेखा खींचनी चाहिए, जिससे सही और गलत की पहचान बनी रहे।लैम्प और उसके कांच का उदाहरण देते हुए अनुशासन के महत्व को समझाया गया। पर्युषण पर्व के इस अवसर पर जैन समाज के कई श्रावक-श्राविकाएं तपस्या में लीन हैं। विशाल दासानी और पायल कोठारी की तपस्या निरंतर गतिमान है, तथा कई अन्य श्रद्धालु तेले और बेले की उपासना कर रहे हैं। 16 सितंबर को रक्तदान शिविर लगाया जायेगा तेरापंथ युवक परिषद के द्वारा दिगंबर जैन भवन में 16 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे तक एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया जायेगा। जिसमें अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया गया। आज के इस धार्मिक अनुष्ठान में राजेश पिंचा, राजेश बछावत, भास्कर पिंचा, हुक्मी चंद चौरड़िया, अमर चंद बेंगाणी, उत्तम बोहरा, पुष्पा सुराना, केसर देवी पिंचा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी।
टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित एम.आर. एस.श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में डॉ• संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के सानिध्य में 283 वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मंदिर में श्री राधा रानी जी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार आकर्षक आभूषणों एवं मनोहारी पुष्पों से किया गया, दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ महाप्रसाद का भोग लगाया गया। इसके पश्चात महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, लीची जूस एवं आलू चिप्स का पैकेट का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग 2 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन संध्या कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायकों द्वारा सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे तथा पूरा मंदिर परिसर राधे-कृष्ण एवं श्याम के जयकारों से कृष्णमय एवं भक्तिमय हो गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती का आयोजन किया गया, ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा लगभग 3 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान के दर्शन किये। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है, कार्यक्रम को सफल बनाने में डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, सुरेश अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, सुरेश भगत, पवन पोद्दार, संजय सर्राफ सहित अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव का हुआ शुभारंभ एबीएन सोशल डेस्क। सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव का भव्य एवं भक्तिमय शुभारंभ हुआ। आयोजन के प्रथम दिवस श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा के शुभारंभ से पूर्व प्रात: 10 बजे लक्ष्मी नारायण मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गयी। कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाएं एवं पुरुष राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ यात्रा में भाग लिया। कलश यात्रा में जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर शामिल हुए। श्रद्धालुओं के जयघोष, भजन एवं मंगलगीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कलश यात्रा के कथा स्थल पर पहुंचने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया।कथा के प्रथम दिवस व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज ने श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य तथा शुकदेव-परीक्षित मिलन के अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को भक्ति, ज्ञान, संस्कार, सदाचार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। इसके श्रवण से मनुष्य के अंतर्मन में सकारात्मक विचारों का संचार होता है तथा जीवन को नई दिशा मिलती है। शुकदेव जी और राजा परीक्षित के मिलन के प्रसंग का व्यास जी ने अत्यंत प्रभावशाली एवं सजीव चित्रण प्रस्तुत किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। व्यास जी के ओजस्वी प्रवचन के साथ प्रस्तुत किए गए सुमधुर भजनों ने कथा परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से कथा का श्रवण किया। कथा के समापन पर सामूहिक आरती की गयी तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के द्वितीय दिवस मंगलाचरण, शुकदेव जी के जन्म एवं पूजन तथा राजा परीक्षित के जन्म से जुड़े भक्तिमय एवं प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज द्वारा किया जायेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया। मौके पर दयानंद सर्राफ, सीताराम सर्राफ, श्री गोपाल सर्राफ, ओम सर्राफ, गिरधारी सर्राफ, पवन सर्राफ, भगवान सर्राफ, प्रदीप सर्राफ, संजय सर्राफ, दिलीप सर्राफ, संदीप सर्राफ, विक्की सर्राफ, विक्रांत सर्राफ, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, राजेंद्र अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। कथा स्थल पर पूरे दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।
टीम एबीएन, रांची। आज पर्युषण पर्व के पांचवे दिन पूजा, प्रवचन, धर्म आराधना एवं भक्ति हुई! मंदिर मे मुंबई से पधारे साधर्मी बंधु श्री धैर्य पियूष भाई एवं तीर्थ धर्मवीर शाह जी के द्वारा धर्म आराधना करवायी जा रही है, जिसमे भक्तगण काफी उत्सुकता पूर्वक लाभ लें रहे हैं। पर्युषण पर्व के आज पांचवें दिवस में डोरंडा जैन मंदिर के प्रांगण में स्नात्र पूजा बहुत ही आनंद के साथ संपन्न हुई, ततपश्चात कल्प सूत्र का वांचन किया गया। जिसमें भगवान महावीर के जन्म का वांचन किया गया। उनके जन्म के समय उनकी त्रिशला माता ने चौदह स्वपन देखे थे, जिसका विस्तार पूर्वक विवेचन किया गया। बताया गया कि देवो ने बताया था कि तुम्हारा पुत्र सूर्य की तरह तेजस्वी और चंद्रमा के समान शांत पुत्र होगा, सभी सपनो के बारे में विवेचन किया गया। जैन मंदिर के प्रांगण में चौदह सपनों का चढ़ावा हुआ, पालनाजी का भी चढ़ावा हुआ, आज के कार्यक्रम मे काफी संख्या मे समाज के सदस्य उपस्थित हुए।सुरेश जी बोथरा के आज 6 उपवास की तपस्या साता पूर्वक चल रही है। आज के कार्यक्रम में उपस्थित लोगों में संपतलाल रामपुरिया, अनिल कोठारी, प्रकाश पारख, प्रमोद बोथरा, संजय नाहटा, प्रेमलता नाहटा, कुसुम पारख, उषा सेठिया, आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रमोद बोथरा ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा। लोहरदगा भंडरा के झिको चट्टी में स्थित गणिनाथ मंदिर प्रांगण में शनिवार को मध्यदेशीय वैश्य समाज के तत्वावधान में 27 वां बाबा गणिनाथ पूजा महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। इसमें भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अद्भुत संगम देखा गया। सुबह की शुरुआत बाबा गणिनाथ की विशेष पूजा-अर्चना और आरती से हुई। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। महोत्सव के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। इन कार्यक्रमों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि लोगों को अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ा। सबसे खास बात यह रही कि इसमें युवा पीढ़ी की भागीदारी भी काफी उत्साहजनक थी। जिससे यह संदेश गया कि समाज अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। समाज की एकजुटता का प्रतीक इस महोत्सव में सभी जगहों से भी मध्यदेशीय वैश्य समाज के सदस्यों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में रामकिशोर साहू, दिलीप साहू, रामजी प्रसाद, सुरेश साहू, महेंद्र प्रसाद, शंकर प्रसाद गुप्ता जैसे गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। यह आयोजन समाज के लोगों को एक साथ लाने और उनमें एकजुटता की भावना को मजबूत करने का एक बेहतरीन मंच साबित हुआ। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे से मिलकर सामाजिक और व्यावसायिक मुद्दों पर चर्चा की, जिससे आपसी भाईचारा और सहयोग बढ़ा। आयोजन समिति के सदस्यों ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। जिनके सहयोग से यह महोत्सव सफल हो पाया। कहा कि यह महोत्सव हर साल और भी भव्य रूप से आयोजित किया जायेगा। ताकि बाबा गणिनाथ की महिमा और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। यह महोत्सव भविष्य में भी इसी तरह से समाज को एक सूत्र में बांधता रहेगा। कार्यक्रम के डांस प्रतियोगिता में दीक्षा कुमारी चट्टी, दीप सीखा सेमरा, मिसु कुमारी चट्टी, शायरी में रिया कुमारी प्रयागो, घड़ा फोड़ में रीमा कुमारी और रामाशीष गुप्ता, चेयर रेस में गोपाल कुमार, दीपक कुमार, नेहा गुप्ता सहित सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
एबीएन सोशल डेस्क। पर्युषण महापर्व के पंचम दिवस को अहिंसा दिवस के रूप में मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वाध्यायी पुष्पा जी ओस्तवाल एवं ज्योति जी ओस्तवाल जी का प्रवचन हुआ। स्वाध्यायी पुष्पा जी ओस्तवाल ने आज अहिंसा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में होने वाली छोटी-छोटी हिंसा से बचने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर धर्म में अहिंसा को परम धर्म बताया गया है और अहिंसा केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। स्वाध्यायी जी ने अर्जुन माली की प्रेरक कथा सुनाते हुए कहा कि अन्याय करना गलत है, लेकिन अन्याय को सहते रहना भी उचित नहीं है। भगवान महावीर ने अर्जुन माली का उद्धार कर उसे हिंसा और कू्ररता से मुक्ति का मार्ग दिखाया। इसी प्रकार चंडकौशिक सर्प के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान महावीर की करुणा और अहिंसा की भावना से हिंसक जीव के भीतर भी परिवर्तन संभव हुआ। उन्होंने कहा, धर्म कोई वॉशिंग पाउडर नहीं है कि पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें। धर्म तो जीवन बीमा है—जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी। धर्म को केवल सुनने या मानने के बजाय उसे अपने आचरण में उतारना आवश्यक है। कार्यक्रम में सुदर्शन श्रावक की कथा के माध्यम से दृढ़ श्रद्धा, संयम और धर्मनिष्ठा का संदेश दिया गया। भगवान महावीर द्वारा बताए गए आगार और अनागार धर्म की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गृहस्थ श्रावकों के लिए आगार धर्म के माध्यम से दैनिक जीवन में संयम एवं अहिंसा का पालन करने की प्रेरणा मिलती है, जबकि साधु-साध्वियों के लिए अनागार धर्म पूर्ण त्याग और संयम का मार्ग है। राजा श्रेणिक और रानी चेलना के प्रसंग के माध्यम से भी कर्म और श्रद्धा के महत्व को समझाया गया। उन्होंने कहा कि अहिंसा का वास्तविक अर्थ केवल किसी जीव को कष्ट न देना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी के प्रति हिंसक भाव न रखना है। पर्युषण पर्व आत्मचिंतन कर जीवन को अधिक संयमित, करुणामय और अहिंसक बनाने की प्रेरणा देता है। पर्युषण महापर्व के दौरान अनेक तपस्याएं भी गतिमान हैं। विशाल दसानी, खुशबू दसानी, पूजा बोहरा एवं पायल कोठारी,ममता पिंचा, सहित अन्य तपस्वी तप-साधना में रत हैं। उपस्थित श्रावक- श्राविकाओं ने सभी तपस्वियों के तप की अनुमोदना करते हुए उनके आत्मकल्याण की मंगलकामना की। कल दिनांक 13/09/26 को जप दिवस के अवसर पर 24 घंटे का अखंड नवकार मंत्र जाप पर श्री साधुमार्गी जैन संघ द्वारा अगले दिन दिनांक 14/09/26 को सुबह 6 बजे तक आयोजन किया जा रहा हैं। इस अवसर पर राजेश पींचा, अशोक सुराणा, कोमल गेलड़ा, प्रकाश नहाटा, जय पींचा, सुमन बच्छावत एवं करुणा चोरड़िया सहित अनेक गणमान्यजन सदस्य एवं 100-150 के लगभग संख्या मे श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी।
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव 12 सितंबर से, तैयारीयां पूरीटीम एबीएन, रांची। सराफ परिवार के तत्वावधान में भक्ति, ज्ञान और प्रेम के दिव्य संगम सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव का भव्य आयोजन आगामी 12 सितंबर से 18 सितंबर तक महाराजा अग्रसेन भवन रांची में किया गया है।कथा में जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास श्री दिनेश जी भारद्वाज श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान कराएंगे। उक्त जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा का आयोजन प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से संध्या 6 बजे तक होगा। आयोजन को लेकर सराफ परिवार द्वारा व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई है। सातों दिनों में श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों, भगवान के अवतारों, भक्त चरित्रों तथा श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा।प्रथम दिवस 12 सितंबर शनिवार को प्रातः 10 बजे लक्ष्मी नारायण मंदिर से कलश यात्रा निकाली जाएगी। तथा इसी दिन श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य एवं शुकदेव परीक्षित मिलन का प्रसंग होगा। सर्राफ परिवार ने बताया कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा, सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। कथा श्रवण से मनुष्य को आत्मिक शांति प्राप्त होती है तथा परिवार और समाज में संस्कार एवं सद्भाव की भावना मजबूत होती है।उन्होंने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सातों दिनों कथा में सपरिवार उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य ज्ञान, भक्ति और प्रेम का लाभ उठाने करने का आग्रह किया।
आज चौथे दिन उपासना दिवस पर आत्मदर्शनशुद्ध भावना और कर्मों की निर्जरा का संदेशटीम एबीएन, रांची। दिगम्बर जैन भवन मे पर्यूषण महापर्व के अवसर पर नित्य धर्म आराधना जारी है छत्तीसगढ़ से पधारें साधर्मी स्वाध्यायी पुष्पा जी ओस्तवाल एवं ज्योति जी ओस्तवाल के द्वारा प्रतिदिन धर्म लाभ दिया जा रहा हैं।इसी क्रम मे पुष्पा जी ओस्तवाल ने आज "उपासना दिवस" के अवसर पर धर्म, आत्मसाधना, शुद्ध भावना एवं कर्मों की निर्जरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैसी हमारी भावना होती है, वैसी ही हमारी अवस्था बनती है और वैसा ही हमारा अगला भाव निर्धारित होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन में दूसरों के प्रति सद्भाव, मैत्री और शुद्ध भावना रखनी चाहिए। स्वाध्यायी जी ने कहा कि किसी व्यक्ति के प्रति गलत भाव रखना स्वयं को ही गलत दिशा में ले जाता है। हमें जीवन में प्रदर्शन, प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा की भावना से बचना चाहिए। प्रदर्शन की प्रवृत्ति व्यक्ति को बाहरी दुनिया में उलझाती है, जबकि धर्म हमें प्रदर्शन से आत्मदर्शन की ओर ले जाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान इस बात पर नहीं होना चाहिए कि लोग हमारे कार्यों की कितनी प्रशंसा करेंगे या उससे हमारी प्रतिष्ठा कितनी बढ़ेगी, बल्कि इस पर होना चाहिए कि उस कर्म से हमारी आत्मा कितनी निर्मल हो रही है।भगवती सूत्र में भगवान महावीर के प्रश्नों के उत्तरस्वाध्यायी जी ने श्री भगवती सूत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जैन आगम साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्रों में से एक है। इसमें भगवान महावीर ने अपने शिष्यों द्वारा पूछे गए असंख्य प्रश्नों का समाधान एवं उत्तर दिया है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आगमों का अध्ययन और श्रवण केवल ज्ञान प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने के लिए होना चाहिए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। नाम और यश के लिए कभी कोई धार्मिक अथवा सामाजिक कार्य नहीं करना चाहिए। किसी को दान देते समय भी यह इच्छा नहीं होनी चाहिए कि हमारा नाम हो, हमारी प्रशंसा हो या लोग हमें दानी के रूप में जानें। सच्ची भावना से किया गया कार्य ही आत्मकल्याण का माध्यम बनता है।तपस्या एवं भजनममता पींचा, विशाल दस्सानी, खुशबू दस्सानी एवं पूजा बोहरा का आज चार उपवास, पायल कोठारी एवं नाहर बेगानी का तीन उपवास गतिमान है! आज सरिता दस्सानी एवं छोटेलाल जी चोरड़िया का तीन दिवसीय उपवास पूर्ण हुआ। छोटेलाल चोरड़िया एवं मोहनलाल पींचा द्वारा आठ दिवसीय मौन व्रत धारण किया हुआ है।प्रवचन के पश्चात ओसवाल संघ के मंत्री विमल जी दस्सानी ने गीत के माध्यम से आत्मचिंतन, साधना और आत्मकल्याण का संदेश दिया गया एवं घेवरचंद नाहटा ने अपने विचार व्यक्त किये साथ ही तपस्वियों के लिए मंगलभाव व्यक्त किया। वहीं श्री प्रकाश चंद जी नाहटा ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को अधिक से अधिक तपस्या करने और आत्मसाधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।16 सितंबर को लगेगा रक्तदान शिविरकार्यक्रम के दौरान तेरापंथ युवक परिषद की ओर से सामाजिक सेवा के अंतर्गत आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि 16 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक दिगंबर जैन भवन के ग्राउंड फ्लोर पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान कर इस सेवा कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया गया।आज के कार्यक्रम मे श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, कार्यक्रम का संचालन राजेश पींचा ने किया, इस अवसर पर ललित पींचा, मोहन लाल नाहटा, लाल चंद बोथरा, भास्कर पींचा, राकेश सुराणा, बसंत दस्सानी, प्रदीप चोरड़िया सहित अनेक गणमान्यजन सदस्य एवं 100-150 के लगभग संख्या मे श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी।
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