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शरद पूर्णिमा के दूसरे दिन श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में खीर प्रसाद ग्रहण करने उमड़े श्रद्धालु
Published / 2026-10-26 17:36:40
शरद पूर्णिमा के दूसरे दिन श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में खीर प्रसाद ग्रहण करने उमड़े श्रद्धालु

शरद पूर्णिमा के दूसरे दिन श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में खीर प्रसाद ग्रहण करने उमड़े श्रद्धालुमहर्षि वाल्मीकि एवं संत मीराबाई जयंती पर विशेष पूजा-अर्चना, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का हुआ पाठटीम एबीएन, रांची। परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम मंदिर में शरद पूर्णिमा के दूसरे दिन सोमवार को श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस अवसर पर श्री राधा-कृष्ण को विधिवत खीर का भोग अर्पित किया गया। खीर को रात्रि में चंद्रमा की चांदनी में रखा गया था। प्रातःकाल पुजारी पंडित अरविंद पांडेय ने मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान को खीर का भोग लगाया। इसके पश्चात बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच खीर प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर श्री राधा रानी राज श्यामा जी का आकर्षक जड़ित आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया गया।देवी-देवताओं के मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं संत मीराबाई जयंती के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई, तथा भगवान को विशेष भोग अर्पित किया गया। इस दौरान पुजारी पंडित अरविंद पांडेय ने सुमधुर भजनों के साथ सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का पाठ किया।भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से पाठ का श्रवण किया और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्व एवं संत-महात्माओं की जयंती हमें भक्ति, आध्यात्मिकता, सदाचार और मानव सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। ऐसे आयोजन समाज में धार्मिक चेतना जागृत करने के साथ आपसी सद्भाव एवं सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं। इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया,अरविंद अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी, पूरणमल सर्राफ,  सुनील पोद्दार, संजय सर्राफ, मनीष सोनी, पवन कुमार पोद्दार, ज्ञान चन्द शर्मा, विद्या देवी अग्रवाल, दीपिका मोतिका, आशा सिंह, आशा मिश्रा, नंद रानी पाठक, संतोष देवी अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, मानवी सिन्हा, मुस्कान वर्मा सहित ट्रस्ट के अन्य सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

मीराबाई जयंती कृष्ण भक्ति, प्रेम और समर्पण की अमर साधिका
Published / 2026-10-25 21:29:07
मीराबाई जयंती कृष्ण भक्ति, प्रेम और समर्पण की अमर साधिका

भक्ति की शक्ति और आध्यात्मिक चेतना की प्रतीक थीं संत मीराबाई : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मीराबाई जयंती प्रतिवर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा अर्थात् शरद पूर्णिमा के अवसर पर परंपरागत रूप से मनायी जाती है। इस वर्ष मीराबाई जयंती 26 अक्टूबर दिन सोमवार को मनाई जायेगी। मीराबाई की जन्मतिथि का कोई प्रमाणित ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध नहीं है, लेकिन भारतीय जनमानस में शरद पूर्णिमा को उनकी जयंती के रूप में मनाने की परंपरा प्रचलित है। यह दिवस भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति, अटूट आस्था और आध्यात्मिक साधना का स्मरण कराता है। राजघराने में जन्म, कृष्णभक्ति में समर्पित जीवन संत मीराबाई का जन्म लगभग 1498 ईस्वी में राजस्थान के मेड़ता क्षेत्र के कुड़की गांव में एक राजपूत परिवार में हुआ माना जाता है। बचपन से ही उनका मन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रमा रहता था। लोक प्रचलित कथा के अनुसार, बाल्यावस्था में श्रीकृष्ण की प्रतिमा के प्रति उनका विशेष लगाव उत्पन्न हुआ, जो आगे चलकर उनकी जीवन-साधना का आधार बन गया। मीराबाई का विवाह मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से हुआ था। राजसी वैभव और पारिवारिक मर्यादाओं के बीच रहते हुए भी उनकी कृष्ण भक्ति निरंतर प्रगाढ़ होती गयी। उन्होंने सांसारिक बंधनों और सामाजिक विरोध की परवाह किये बिना स्वयं को श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। उनके जीवन से जुड़ी अनेक घटनाएं भक्तिपरक लोककथाओं में वर्णित हैं, जो उनकी अटूट आस्था और निर्भीकता को दर्शाती हैं। मीराबाई हिंदी भक्ति साहित्य की महान संत-कवयित्री थीं। उनके पदों में प्रेम, विरह, समर्पण और ईश्वर के प्रति अनन्य निष्ठा का अनुपम चित्रण मिलता है। मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई जैसी प्रसिद्ध पंक्ति उनकी एकनिष्ठ कृष्णभक्ति का सशक्त परिचायक है। उनके भजन आज भी मंदिरों, सत्संगों और धार्मिक आयोजनों में श्रद्धापूर्वक गाए जाते हैं।मीराबाई जयंती का उद्देश्य उनके आध्यात्मिक आदर्शों, भक्ति भावना और जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। इस अवसर पर मंदिरों में भजन-कीर्तन, सत्संग, प्रवचन तथा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु उनके पदों का गायन कर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। मीराबाई का जीवन संदेश देता है कि सच्ची भक्ति के लिए धन, वैभव और सामाजिक प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि निर्मल हृदय, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण आवश्यक है। उनका व्यक्तित्व नारी आत्मसम्मान, स्वतंत्र आध्यात्मिक चेतना और दृढ़ संकल्प का भी प्रेरणास्रोत है। इस प्रकार, मीराबाई जयंती केवल एक संत-कवयित्री की स्मृति का दिवस नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, त्याग और मानवीय संवेदनाओं को आत्मसात करने का पावन अवसर है।

धनबाद : झरिया श्री सत्यनारायण मंदिर में धूमधाम से मनी शरद पूर्णिमा
Published / 2026-10-25 17:50:55
धनबाद : झरिया श्री सत्यनारायण मंदिर में धूमधाम से मनी शरद पूर्णिमा

एबीएन न्यूज नेटवर्क, झरिया (धनबाद)। झरिया 25 अक्टूबर श्री सत्यनारायण मंदिर स्टेशन रोड झरिया में आज शरद पूर्णिमा को ध्यान में रख कर चंद्रमा के प्रति श्लोक  दधी शंखम तुषारंभम क्षीरो दारुण संभवम। नमामि शशिनम सोमम शंभु मुकुट भूषणम।। अर्थात जो दही शंख और बर्फ की तरह धवल यानि सफेद रंग के है और समुद्र मंथन से निकले हैं वैसे चंद्रमा को हम नमस्कार करते हैं जो शंकर भगवान के मस्तक पर मुकुट के रूप में विराजमान है। इस अवसर पर शरद पूर्णिमा के महत्व को समझाया गया। आज के दिन रात्रि में 12 बजे चंद्र की सीधी किरण के नीचे जब खीर रखी जाती है तो उसमें अमृत की वर्षा होती है।इस खीर को खाने से श्वास दमा की बीमारी में आराम होता है। अनेक स्थानों पर दूध में  चूड़ा और मिश्री को मिला कर चंद्रमा की किरण उस पर पड़े वैसे रख कर सेवन किया जाता है। आज के दिन चंद्रमा की रोशनी में लोग सुई में धागा पिरोने की प्रतियोगिता रखते है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। कई स्थानों पर एक पात्र में रुई बिछा कर उस पर ढेला मिश्री रख कर रात में चंद्रमा की रोशनी के नीचे रखा जाता है और दूसरे दिन उसे एक कांच की बोतल या बर्तन में भर कर रख दिया जाता है और यदि किसी को बुखार इत्यादि आता है तो इस मिश्री को चूसने से बुखार स्वत: उतर जाता है। इत्यादि बताया गया। इसके अलावा संस्कृत में अंताक्षरी पहाड़ा संस्कृत संभाषण वार्तालाप गीत इत्यादि का अभ्यास कराया गया। संस्कृत में प्रशिक्षण देने का कार्य हरीश कुमार जोशी अधिवक्ता ने किया एवं प्रसाद वितरण होमेश जोशी द्वारा किया गया। वैद्य सुखलाल ने पर्यावरण संबंधी जानकारी दी एवं भागा में बीज और औषधियुक्त पौधे लगाने वाले छात्रों को सम्मानित करने हेतु आमंत्रित किया। इस अवसर पर चेल्सी गोयल, इशिका कुमारी, त्रिशा कुमारी, अनाया तिवारी, आराध्या वर्मा, दिव्या कुमारी, कुमकुम कुमारी, सुहानी कुमारी, दीपिका कुमारी, अनन्या कुमारी, पूर्वी कुमारी, शिवांश, अनमोल कुमार, सूरज ठक्कर, सुमित कुमार, सत्या गुप्ता, श्लोक कुमार, लवयांश कुमार, आर्यन कुमार, केशव कुमार, इशांत सिंह, अनय, आनंद तिवारी, दिव्यांश कुमार, अर्णव कुमार, देवम कुमार, युगवीर साव, अनिरुद्ध शौर्या, विष्णु कुमार, महेश पांडेय इत्यादि उपस्थित थे।

श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव कल
Published / 2026-10-24 20:01:03
श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव कल

101 किलो केसरिया खीर का होगा वितरण एबीएन सोशल डेस्क। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर 25 अक्टूबर रविवार को एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट की ओर से पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जायेगा। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि महोत्सव के दौरान श्री राधा रानी राज श्यामा जी का आकर्षक एवं जड़ित आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया जायेगा। इसके पश्चात विधिवत पूजन-अर्चन, भजन-कीर्तन एवं सामूहिक महाआरती का आयोजन होगा। महोत्सव के अंतर्गत ट्रस्ट की अन्नपूर्णा सेवा के माध्यम से रविवार को श्रद्धालुओं एवं भक्तों के बीच 101 किलो केसरिया खीर का प्रसाद वितरित किया जायेगा।उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर के प्रसाद को चंद्रमा की शीतल चांदनी में रखा जायेगा। इसके पश्चात सोमवार, 26 अक्टूबर को प्रात:काल भगवान को खीर का भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जायेगा। शरद पूर्णिमा को धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि इस रात्रि में चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ अमृतमयी किरणें बिखेरता है। महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक आस्था, भक्ति एवं सेवा की भावना को प्रोत्साहित करना तथा श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है।

बोकारो : एमआईसीयू में भर्ती युवक के लिए मदद की गुहार
Published / 2026-10-24 20:00:17
बोकारो : एमआईसीयू में भर्ती युवक के लिए मदद की गुहार

एबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो। बालीडीह बोकारो क्षेत्र के एक युवक का गंभीर सड़क हादसे में घायल होने की खबर है। युवक अभी एमआईसीयू में भर्ती है और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर बताई जा रही है। परिजनों ने लोगों से इलाज के लिए छोटी-छोटी मदद की गुहार लगायी है। आपकी छोटी सी मदद किसी की जिंदगी बचा सकती है। परिवार ने मदद के लिए संपर्क नंबर और बैंक विवरण साझा किया है। मदद करने से पहले कृपया एक बार परिवार से फोन पर बात करके पूरी जानकारी की पुष्टि जरूर कर लें।

लावारिस अवस्था में मिले असहाय व्यक्ति को मिला अपना घर आश्रम का सहारा
Published / 2026-10-24 19:59:21
लावारिस अवस्था में मिले असहाय व्यक्ति को मिला अपना घर आश्रम का सहारा

बिरसा मुंडा बस स्टैंड से रेस्क्यू कर कराया गया उपचार, आश्रम में निराश्रितों की संख्या 47 हुई टीम एबीएन, रांची। परमहंस डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में संचालित एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, रांची के अंतर्गत श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम, पुंदाग में मंदबुद्धि, दिव्यांग, असहाय एवं निराश्रित लोगों की नि:शुल्क सेवा जनवरी 2024 से निरंतर की जा रही है। इसी सेवा अभियान के क्रम में शुक्रवार को एक असहाय व्यक्ति को रेस्क्यू कर सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) में आश्रय दिया गया। आश्रम के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि आश्रम की सेवा टीम को सूचना मिली कि बिरसा मुंडा बस स्टैंड टर्मिनल बस पड़ाव के नजदीक एक असहाय व्यक्ति लावारिस अवस्था में भटक रहा है। वह अत्यंत अस्वच्छ अवस्था में था तथा अपने संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी देने की स्थिति में नहीं था। सूचना मिलते ही आश्रम की टीम ने तत्परता दिखाते हुए उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर आश्रम पहुंचाया। रेस्क्यू अभियान में आश्रम के सेवा साथी मुकुंद यादव, आशीष कुमार एवं सूरज प्रमाणिक शामिल रहे। आश्रम लाने के बाद व्यक्ति की अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराई गयी। पूछताछ के दौरान उसके नाम, पते एवं परिवार के संबंध में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। उसकी स्मरणशक्ति भी काफी कमजोर पायी गयी। आश्रम समिति ने उसकी देखभाल एवं पहचान के लिए उसका नाम बृज मोहन रखा है। आश्रम के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि आश्रम की टीम को सूचना मिलने पर समय-समय पर विभिन्न स्थानों से असहाय एवं निराश्रित लोगों को रेस्क्यू कर आश्रम में लाया जाता है।पिछले एक माह में ही तीन निराश्रितों को अलग-अलग स्थानों से लाकर आश्रम में आश्रय दिया गया है। इस नए व्यक्ति के आने के साथ आश्रम में रहने वाले निराश्रितों की संख्या बढ़कर 47 हो गई है। उन्होंने कहा कि गुरुजी सदानंद जी महाराज के सहयोग एवं प्रेरणा से आश्रम में रहने वाले सभी निराश्रितों को परिवार जैसा वातावरण देने का प्रयास किया जाता है। उनके भोजन, चिकित्सा, स्वच्छता, सुरक्षा एवं दैनिक आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। मानव सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। समाज के लोगों से भी अपील की गयी कि कहीं कोई असहाय अथवा निराश्रित व्यक्ति दिखाई दे तो इसकी सूचना आश्रम को दें, ताकि उसे समय पर सुरक्षित आश्रय और आवश्यक सेवा उपलब्ध करायी जा सके।

रांची : श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित
Published / 2026-10-23 19:58:13
रांची : श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित

श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पितटीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मण्डल, रांची द्वारा अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में आज दिनांक 23 अक्टूबर 2026 को खाटू नरेश श्याम बाबा को द्वादशी के पावन अवसर पर संध्या 6:30 बजे  से रात्रि 9 बजे तक श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया गया। आज के भोग के मुख्य यजमान श्रीमती सावित्री देवी काबरा के परिवार के ओर से किशन काबरा व अन्य ने  परिवार श्याम बाबा को खीर चूरमा का भोग अर्पित किये। सर्वप्रथम मण्डल के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश बागला, मंत्री धीरज बंका एवं उपस्थित काबरा परिवार के सदस्यगण ने गणेश पूजन कर मन्दिर में विराजे वीर बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी पूजन कर विभिन्न प्रकार के फल एवं मिष्ठान अर्पित कर श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमे का भोग अर्पित किया । इस अवसर पर पूरा मन्दिर परिसर हारे के सहारे की जय लखदातार की जय जयकारों के गूंज उठा।द्वादशी के दिन श्री श्याम प्रभु का प्रिय भोग खीर चूरमा को लेने भक्तगण कतारबद्ध होकर प्राप्त कर रहे थे साथ ही श्री श्याम मण्डल के कार्यकर्ता आए हुए भक्तजनों को शुद्ध पिय जल का वितरण कर रहे थे तथा उनके चरण पादुका को रखने की उत्तम व्यवस्था बना हुआ था। आज के खीर चूरमा का भोग श्री श्याम मन्दिर में ही निर्मित किया गया तथा 800 से ज्यादा भक्तजनों प्रसाद प्राप्त किया।आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विकाश पढ़िया, प्रदीप अग्रवाल, अंशुल अग्रवाल, प्रमोद बगड़िया, अरुण धानुका, नितेश लाखोटिया, लल्लू सारस्वत का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मण्डल श्री श्याम मन्दिर, अग्रसेन मार्ग रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी। 

शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को
Published / 2026-10-23 15:13:27
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को

शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर कोचंद्रमा की सोलह कलाओं, मां लक्ष्मी की आराधना और श्रीकृष्ण की महारास का पावन पर्व : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय सनातन संस्कृति में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। वर्षा ऋतु की विदाई और शरद ऋतु के आगमन के बीच आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति की सुंदरता, चंद्रमा की शीतल चांदनी, भक्ति और समृद्धि का प्रतीक है। इस वर्ष शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर दिन रविवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होकर 26 अक्टूबर को प्रातः 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस रात आकाश में चमकने वाला पूर्ण चंद्रमा शीतलता, शांति, पवित्रता और सकारात्मकता का संदेश देता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी अमृत के समान गुणकारी होती है। इसी विश्वास के कारण इस दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है तथा उसकी चांदनी में खीर रखने की परंपरा प्रचलित है। श्रद्धालु खीर को चंद्रमा के प्रकाश में रखकर अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला से भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी मनोरम रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। चंद्रमा की उज्ज्वल चांदनी में संपन्न यह दिव्य लीला प्रेम, समर्पण और भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक मानी जाती है। श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से प्रत्येक गोपी को यह अनुभूति कराई कि वे उनके साथ ही नृत्य कर रहे हैं। यह प्रसंग जीवात्मा और परमात्मा के मिलन तथा अनन्य प्रेम का आध्यात्मिक संदेश देता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस रात्रि देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। कोजागरी शब्द का भाव है-कौन जाग रहा है इसी विश्वास के कारण श्रद्धालु रात्रि में दीप प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं तथा सुख-समृद्धि, धन-धान्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी तथा चंद्रदेव की पूजा करते हैं। संध्या के समय दीप प्रज्वलित कर आरती की जाती है। घरों और मंदिरों में भजन-कीर्तन तथा धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। चावल और दूध से बनी खीर तैयार कर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। बाद में इसे भगवान को अर्पित कर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। यह परंपरा श्रद्धा, पवित्रता और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम एवं एकता का प्रतीक है। शरद पूर्णिमा का मूल संदेश जीवन में पवित्रता, संयम, भक्ति, प्रेम और सद्भाव को अपनाना है। यह पर्व हमें प्रकृति के सौंदर्य का सम्मान करने, ईश्वर के प्रति आस्था रखने तथा परिवार और समाज में सुख-शांति बनाए रखने की प्रेरणा देता है। मां लक्ष्मी की आराधना परिश्रम, सदाचार और संतोष के महत्व का स्मरण कराती है, जबकि श्रीकृष्ण की महारास लीला प्रेम और समर्पण का संदेश देती है।इस प्रकार शरद पूर्णिमा केवल चंद्रमा की अनुपम छटा निहारने का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना, धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपराओं का अनुपम उत्सव है। यह पावन अवसर जन-जन के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार करने की प्रेरणा देता है।

पापांकुशा एकादशी पर झूम उठा श्री श्याम मंदिर रांची
Published / 2026-10-22 20:31:52
पापांकुशा एकादशी पर झूम उठा श्री श्याम मंदिर रांची

टीम एबीएन, रांची। अपना बनाया है तो अपना बनाये रखना, हुई गलतियां जो मुझसे उसे भुलाये रखना... जैसे भजनों की लय पर भक्तगण भाव विभोर हो गये। अवसर था अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में 22 अक्टूबर 2026 पापांकुशा एकादशी उत्सव अत्यंत भक्तिभाव व श्रद्धा के साथ मनाया गया।एकादशी का उल्लास लिए भक्तगण प्रात: काल से ही श्री श्याम प्रभु के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। प्रात:काल में श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर विभिन्न प्रकार के फूलों जैसे लाल गुलाब, रजनीगंधा, गेंदा व तुलसी दल से मनभावन श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर में विराजमान शिव परिवार एवम बजरंगबली का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया।  रात्रि 9 बजे श्री श्याम देव के जयकारों के बीच ज्योत प्रज्ज्वलित कर भक्तगण कतारब्रध होकर ज्योत में आहुति प्रदान कर मंगलमय जीवन की कामना कर रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों द्वारा संगीतमय संकीर्तन प्रारंभ कर भजनों की अमृतवर्षा की गयी।  श्याम नाम मुख से बोल भाई काम आवेगो, अलबेली इनकी सरकार रटेजा श्याम प्यारे, श्याम तेरा साथ हमको दो जहां से प्यारा है, हम तुम्हारे थे प्रभु जी तुम हमारे हो... इत्यादि भजनों की लय पर देर रात तक भक्तगण श्री श्याम प्रभु को रिझाते रहे। इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा का भोग अर्पित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।  आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश सारस्वत, ओम जोशी, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, विवेक ढांढनीयां, विकास पाडिया, ज्ञानप्रकाश बगला, प्रियांश पोद्दार, अजय साबू, नितेश केजरीवाल, जीतेश अग्रवाल एवं मनोज ढांढनीयां का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ, रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (98353 31112) ने दी।

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