सैकड़ों अकीदतमंदों ने की शिरकत हल्का-ए-जिक्र, तिलावत-ए-कुरआन और मनकबतख्वानी से नूरानी हुआ माहौल, नियाज-ए-खास और तबरुर्कात किये गये तकसीम टीम एबीएन, रांची। खानकाह-ए-मजहरिया मुनअमिया, फिरदौस नगर, मणिटोला, डोरंडा में जुमेरात को हुजूर गौसुल सकलैन, कुतुबुल आफताब, कुतबे रब्बानी, महबूबे सुब्हानी हजरत सैयदना शेख अब्दुल कादिर जिलानी रहमतुल्लाह अलैह की नजर की मजलिस का अकीदत और एहतराम के साथ आयोजन किया गया। खानकाह के अराकीन की ओर से आयोजित इस मजलिस की सरपरस्ती सज्जादानशीन हजरत अल्लामा व मौलाना अल्हाज सैयद शाह अलकमा शिब्ली कादरी अबुल ओलाई ने की। मजलिस में रांची शहर के विभिन्न मोहल्लों से सैकड़ों आशिकान-ए-औलिया और अकीदतमंद शामिल हुए। इस दौरान तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक, हल्का-ए-जिक्र, नातख्वानी और मनकबतख्वानी का सिलसिला जारी रहा। जिक्र-ए-इलाही और बुजुर्गाने दीन की शान में पेश की गयी मनकबतों से पूरी खानकाह का माहौल रूहानी और नूरानी हो उठा।अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा के साथ मजलिस में शिरकत कर अपनी अकीदत का इजहार किया। मजलिस के दौरान नियाज-ए-खास और तबरुर्काते गौसिया अकीदतमंदों के बीच तकसीम किए गए। अंत में सलातो-सलाम पेश किया गया और मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे, खुशहाली तथा इंसानियत की सलामती के लिए दुआ-ए-खैर की गयी। इसके साथ ही मजलिस का समापन हुआ। मौके पर मौलाना सैयद शाह अबू राफे तिबरानी, सैयद अबू कहाफा हेजाजी कादरी, सैयद जैन कादरी, सैयद जिदान कादरी, मोहम्मद कमरू, मोहम्मद सिब्तैन असदकी, मोहम्मद फुरकान असदकी, मोहम्मद कमरुज्जमा कादरी, मोहम्मद रियाज, मोहम्मद शब्बीर, मोहम्मद आलम, मोहम्मद अदनान समेत सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे।
उपासना साधना का प्रयोजन समझने और ईश्वरीय सिद्धांत/सूत्रों का समर्थन व सहयोग करने की अपील की : यज्ञ पुरोहित एबीएन सोशल डेस्क। जप, तप, व्रत की पांच तत्व उपासना साधना आराधना समयदान और अंशदान पर प्रकाश डालकर नौ दिवसीय नवरात्र जप-अनुष्ठान की महापूर्णाहुति रांची जिलांतर्गत हर एक शक्तिपीठ इकाई में साधक-शिष्य भाई-बहनों ने हर्षोल्लास व जयघोष सहित की। नौ दिवसीय नवरात्र महापर्व काल में विधिवत जपतपव्रत से संकल्पित होकर अपने अनुष्ठान की महापूर्णाहुति नवमी, दशमी तिथि को गायत्री उपासक साधक लघु अनुष्ठान संकल्प के अनुसार जपतपव्रत पूरा कर शक्तिपीठ सेक्टर टू में 9 कुण्डीय महायज्ञ 13 पाली में हुई। रांची जिलांतर्गत सभी इकाई में विधिवत दैवी सत्ता एवं समस्त दैवी शक्तियों का आवाहन नमन वंदन व पूजन-अर्चन, षोडशोपचार व स्वस्तिवाचन पाठ कर विधिवत किये। उसके बाद द्वितीय भाग में यज्ञाग्नि स्थापन, स्तवन, अग्नि प्रदीपनम, समिधाधानम, जल प्रसेचनम, आज्याहुति, गायत्री महामंत्र की आहुति सहित सहायक कई मंत्रों की विशिष्ट आहुति, स्वीष्टकृतहोम, देव- दक्षिणा पूर्णाहुति, वसोधारा, नीराजन आरती, पूर्ण आरती, घृतावघ्राणम, भस्म धारणम, क्षमा प्रार्थना, साष्टांग- नमस्कारम, शुभ कामना, वह हास हमें दो मां, सारा जग मुसकाए गीत वंदन सहित पुष्पांजलि, शान्ति अभिसिंचनम, सूर्यार्घ्यदानम, प्रदक्षिणाम, यज्ञ महिमा का गायन, दैवी शक्ति के साक्ष्य में त्यागने योग्य एक बुराई त्याग करने, अपनाने योग्य एक अच्छाई ग्रहण करने का संकल्प लेकर यज्ञीय विधान विस्तार से करके, विसर्जन व जयघोष विधान किये गये। इसके साथ बुढ़मू प्रखंड समन्वय समिति के प्रतिनिधि श्रद्धेय भाई वसन्त साहु ने 18 को मंडली टीम द्वारा अखंड भजन-कीर्तन गायन वादन किये गये और 19 को सुबह गायत्री यज्ञ कराया। उनके यहां इस कार्यक्रम में झारखंड प्रांत जोन सह समन्वयक, जिला समन्वयक व ओरमांझी प्रखंड के प्रतिनिधि मंडलीय सदस्य ने अपना बहुमूल्य समय देकर कर्मकांड में शामिल होकर उस प्रखंड का समाचार विवरण तथा 5/9 कुंडीय महायज्ञ की तैयारी का आश्वासन लेकर नशा उन्मूलन अभियान की स्टीकर, दफ्ती बैनर, बाजा सिस्टम, माइक सेट आदि प्रदान किये गये। सभी को दशहरा महापर्व की बधाई व स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्जवल भविष्य की मंगलमय कामना की गयी। उक्त जानकारी रांची गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।
दशहरा पर्व पर मन्हो में पारंपरिक जतरा का आयोजन, सांसद सुखदेव भगत होंगे मुख्य अतिथिदशहरा पर्व के पावन अवसर पर सदर प्रखंड के मन्हो ग्राम में पारंपरिक जतरा का भव्य आयोजन किया गया है।कार्यक्रम के *मुख्य अतिथि लोहरदगा सांसद सह छत्तीसगढ़ राज्य के कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत है। आयोजन समिति ने बताया कि इस पारंपरिक जतरा में क्षेत्र के कई खोड़हा दलों की पारंपरिक प्रस्तुति होगी। मुख्य अतिथि माननीय सांसद सुखदेव भगत जी सभी खोड़हा दलों के साथ सामूहिक नृत्य में भाग लेकर उनका हौसला अफजाई करेंगे।समिति ने बताया कि इस जतरा के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को संरक्षित और बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। समिति ने क्षेत्र के सभी ग्रामीणों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पारंपरिक जतरा को सफल बनाने की अपील की है।
लोहरदगा : महानवमी के शुभ अवसर पर दुर्गाबाड़ी मंदिर में धीरज प्रसाद साहू ने मां दुर्गा का लिया आशीर्वाद, भव्य भंडारे में हुए शामिलएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने लोहरदगा स्थित दुर्गाबाड़ी मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर वे मंदिर परिसर में आयोजित भव्य भंडारे में भी शामिल हुए। मंदिर समिति की ओर से पूर्व सांसद का स्वागत मां की चुनरी ओढ़ाकर किया गया।शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर दुर्गाबाड़ी मंदिर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों के बीच पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर रहा। भव्य भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और मां दुर्गा से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। इस दौरान धीरज प्रसाद साहू ने मां दुर्गा के चरणों में शीश झुकाकर क्षेत्र की खुशहाली और लोगों के सुखमय जीवन की कामना की।मंदिर समिति के सदस्यों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और धार्मिक आयोजन में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि नवरात्र का पर्व आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का प्रतीक है। मां दुर्गा की आराधना हमें सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने मां दुर्गा से सभी लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनाए रखने की कामना की।कार्यक्रम में देवाशीष कार, सोमनाथ दत्ता, निमाई दास, निश्चय वर्मा, अमित वर्मा, रंजीत मुखर्जी सहित कई लोग मौजूद थे। सभी ने धार्मिक आयोजन में भाग लिया और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
विहिप दुर्गावाहिनी ने किया शस्त्र पूजन, नारी शक्ति के सम्मान पर जोरविश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल ने किया शस्त्र पूजन, धर्म और संस्कृति की रक्षा का लिया संकल्पटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की दुर्गावाहिनी एवं मातृशक्ति बजरंग दल की ओर से दुर्गाष्टमी के अवसर पर रांची महानगर अंतर्गत माधव नगर के श्री शिव मंदिर महावीर मंदिर न्यास समिति प्रांगण में शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी की एवं मुख्य अतिथि के रूप में श्री राम वानर सेना की अध्यक्षता संजू मिश्रा जी उपस्थित थी । कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया तथा धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का संकल्प लिया।शस्त्र पूजन का आयोजन शक्ति, साहस, नारी सम्मान और सनातनी एकता का दिया संदेशसंजू मिश्रा ने नारी शक्ति और महिलाओं की भूमिका पर कहा कि नारी शक्ति का स्वरूप है। आज महिलाएं शिक्षा, नौकरी समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रही हैं। महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं और लगातार आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने नारी शक्ति के सम्मान और समाज के विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।पूजन और आरती के साथ कार्यक्रम संपन्नकार्यक्रम का शुभारंभ विहिप की पद्धति के अनुसार हुआ। इसके बाद विधि-विधान से शस्त्र पूजन और कन्या पूजन किया गया। अंत में मां दुर्गा की आरती के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कैलाश केसरी, महानगर अध्यक्ष एवं संचालन माधव नगर मंत्री आशुतोष मिश्रा ने किया।कार्यक्रम में उपस्थित महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी ने बताया की कि शस्त्र पूजन का कार्यक्रम प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि के प्रतिपदा से लेकर विजयादशमी तक आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। इसके माध्यम से कार्यकर्ता अपनी परंपराओं के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए धर्म और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेते हैं।कार्यक्रम में प्रांत सहविद्यार्थी प्रमुख अमर प्रसाद, महानगर से मुकेश गिरी , हरे कृष्णा पांडे, आशुतोष मिश्रा, संजू मिश्रा, सुकृत सुक्रिता मिश्रा, अंजली मिश्रा, अवनी मिश्रा, अंबिका मिश्रा, अभिजीत मन्ना, विनीत सिन्हा,अमित पांडे, रंजीत भगत, कमल, गणपत कुमार, दीपक, शुभम, कृष, अंश सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
विश्व हिंदू परिषद, रांची महानगर की दुर्गा वाहिनी ने किया शस्त्र पूजन कार्यक्रममुख में शास्त्र एवं हाथों में शस्त्र धारण कर हीं स्वयं के साथ-साथ समाज रहेगा सबल एवं सुरक्षित : डॉ बिरेन्द्र साहुटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद की महिला विभाग दुर्गा वाहिनी एवं मातृशक्ति के संयुक्त तत्वाधान में आज कांटाटोली स्थित नया टोली में दुर्गाष्टमी कार्यक्रम का आयोजन आज अपराह्न 4 बजे किया गया। कार्यक्रम में दुर्गा वाहिनी के बहनों के द्वारा विधिपूर्वक शस्त्र पूजन किया गया।इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कहा मां दुर्गा शक्ति के प्रतीक हैं। मानव जीवन को हर क्षेत्र में तथा हर किसी काम में शक्ति की आवश्यकता होती है। शक्ति विहीन समाज का कोई अस्तित्व नहीं बच जाता है। हमें अपने आराध्य देवों से सीख लेनी चाहिए कि मुख में शास्त्र एवं हाथों में शास्त्र धारण कर हम स्वयं के साथ-साथ समाज को सबल एवं सुरक्षित रख सकते हैं।उन्होंने कहा घर की माताएं शक्ति स्वरूपा होती हैं। घर के संस्कारों से हीं समाज सही दिशा पर चलता है। घर में आधुनिकता के नाम पर अपने पुरातन संस्कार को भूलना नहीं चाहिए। मातृशक्ति के रेनू अग्रवाल ने कही दुर्गा वाहिनी की स्थापना महाष्टमी की तिथि को ही की गई थी। स्थापना का मुख्य उद्देश्य समाज के आधी आबादी को सामाजिक दायरों पर आगे लाकर एक सशक्त तथा पुरातन संस्कारयुक्त समाज का दृढ़ीकारण करना है।कार्यक्रम में रांची महानगर के उपाध्यक्ष गोपाल पारीक, सहमंत्री राजेश अग्रवाल, मंदिर अर्चक पुरोहित सहप्रमुख संजय ठाकुर, माधव नगर मंत्री रंजय वर्मा, कैलाश पारीक , सरिता देवी, मीना देवी, परदा देवी, किरण देवी, सरोज देवी, कनक कुमारी, शानवी कुमारी, खुशी कुमारी, ज्योति कुमारी, राधा देवी, चारों देवी,बबिता देवी, खुशबू देवी सहित दुर्गा वाहिनी व मातृशक्ति के बहने उपस्थित थी। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, रांची महानगर के सहमंत्री राजेश अग्रवाल (98357 10764) ने दी।
दशहरा सत्य, धर्म और सदाचार की विजय का महापर्व : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में दशहरा अथवा विजयादशमी का पर्व विशेष महत्त्व रखता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। इस वर्ष विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा। यह पर्व शारदीय नवरात्र के समापन के साथ देशभर में श्रद्धा, उत्साह और उल्लास से मनाया जाता है। रामायण के अनुसार लंकापति रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था। माता सीता को रावण के बंधन से मुक्त कराने के लिए भगवान श्रीराम ने वानरराज सुग्रीव, हनुमानजी और वानर सेना के सहयोग से लंका पर चढ़ाई की। युद्ध में भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया और माता सीता को मुक्त कराया। इसी विजय की स्मृति में दशहरा मनाया जाता है।इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में रामलीला का मंचन होता है तथा रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। यह परंपरा मनुष्य को अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और अन्य बुराइयों का त्याग करने की प्रेरणा देती है। दशहरा पर्व का संबंध मां दुर्गा की विजय से भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महिषासुर नामक शक्तिशाली असुर के अत्याचारों से देवता और समस्त संसार त्रस्त थे। तब देवताओं की शक्तियों से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। देवी ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका संहार कर संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया। इसी कारण विजयादशमी को शक्ति, साहस और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत के अनेक क्षेत्रों में यह पर्व दुर्गापूजा के समापन और मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ मनाया जाता हैविजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर शस्त्र पूजन, वाहन पूजन तथा औजारों की पूजा करने की परंपरा है। किसान अपनी कृषि सामग्री, व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों और कारीगर अपने उपकरणों का पूजन करते हैं। शमी वृक्ष की पूजा भी इस दिन का एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। मान्यता है कि विजयादशमी पर नए कार्यों का शुभारंभ करना मंगलकारी होता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का अवसर भी है।रावण के दस सिर मनुष्य के भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष और अन्य दुर्गुणों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, सत्य और आदर्श आचरण का संदेश देता है। यह पर्व समाज में प्रेम, सद्भाव, एकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।दशहरा हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों की अंततः विजय होती है। इस पावन अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि अपने भीतर की बुराइयों का त्याग कर समाज में सदाचार, मानवता और सकारात्मकता का प्रसार करेंगे। यही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता और जीवन का सच्चा संदेश है।
सात दिवसीय भागवत कथा का हुआ समापन, राधे-कृष्ण के भजनों पर झूमे श्रद्धालुकथा वाचक श्रवण कृष्ण महाराज को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थाना प्रभारी ने अंगवस्त्र देखकर किया सम्मानितएबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद। हुसैनाबाद के महावीर जी भवन में नवाह्न पारायण यज्ञ समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन भक्तिमय माहौल में हुआ। कथा वाचक श्रवण कृष्ण महाराज ने सात दिनों तक श्रद्धालुओं को भागवत कथा का श्रवण कराया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके संदेशों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। श्रवण कृष्ण महाराज ने कथा के माध्यम से कहा भागवत कथा सुनने या इसके सिद्धांतों को अपनाने से काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार का नाश होता है और मन निर्मल होता है। भागवत सिखाता है कि जीवन का सच्चा लक्ष्य संसार की चिंताओं में उलझना नहीं, बल्कि भगवान के प्रति सच्चा प्रेम और समर्पण रखना है। यह संकटों और कठिनाइयों में भी धैर्य न खोने तथा भगवान पर भरोसा रखते हुए अपना कर्तव्य करने की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान राधे-कृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु और श्रोता जमकर झूमे। पूरे कार्यक्रम के दौरान महावीर जी भवन परिसर के साथ-साथ पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा में शामिल होकर धर्म का लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर हुसैनाबाद थाना प्रभारी चंदन कुमार ने कथा वाचक पूज्य श्रवण कृष्ण महाराज जी को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने धार्मिक आयोजनों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम में भागवत कथा आयोजन समिति एवं दुर्गा पूजा समिति के सदस्य सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन का समापन भक्तिमय वातावरण में हुआ। इस कार्यक्रम में समिति के उदय कुमार सोनी, श्रवण कुमार अग्रवाल, अनिमेष अग्रवाल, राजकुमार कश्यप, अमित कुमार गुप्ता और पप्पू सोनी, कृष्ण मुरारी अग्रवाल,राजेंद्र पाल, अमित कश्यप, अंकित कुमार, राजेश सिंह, प्रदीप कुमार कांस्कार, जितेंद्र कुमार रावत, सन्नी कुमार,किशन कुमार, रवि कुमार चंदेल, गोपाल सोनी, अक्षय सिंह एवं राजकुमार जायसवाल, रोहित कुमार चंदेल, अर्जुन पटेल, सन्नी ठाकुर एवं मनीष शर्मा, प्रमोद कुमार समेत सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
एबीएन सोशल डेस्क (रांची)। गायत्री परिवार शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा शक्तिपीठ सेक्टर टू में चल रहे नौदिवसीय नवरात्र मंत्र जप अनुष्ठान, यज्ञीय अनुष्ठान विधान में आज चार कुण्डीय हवन यज्ञ हुआ। इस दौरान उपस्थित नवरात्र उपासक साधकों को शान्तिकुञ्ज के मार्गदर्शन में अच्छे विचार व अच्छे संस्कार के लिए प्रज्ञा प्रशिक्षण पाठशाला पर उद्बोधन किये गये। यज्ञीय विधान दौरान कुछ साधक परिवार जनों के पुंसवन गर्भस्थ (शिशुदेव पूजन) संस्कार एवं जन्मदिवस संस्कार हुआ। दैनिक पूजा विधि, सामान्य व विशिष्ट अनुष्ठान प्रकरण में गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ, गुरु-ईश ध्यान वंदना, सरस्वती, व्यास वन्दना, पूजन सामग्री शुद्धिकरणम, षटकर्म, मंगलाचरणम् पवित्रीकरणम, आचमनम् शिखावनदनम, प्राणायाम, न्यासकरणम, पृथ्वी पूजनम, चन्दनधारणम संकल्प - धारणम, यज्ञोपवीतधारणम जीर्णोपवीतविसर्जनम, रक्षासूत्रम, कलश पूजनम एवं प्रार्थना, दीप पूजनम पश्चात देवावाहनम, षोडशोपचार पूजनम स्वस्तिवाचन पाठ, रक्षा विधान पर क्यों एवं कैसे के प्रथम चरण का पूजन- अर्चन पर आज चर्चा हुई। नवरात्र महापर्व गायत्री साधना व यज्ञीय अनुष्ठान पर इसके नियम संयम और मंगलमय जीवन यापन की विशिष्ट तथ्यों पर ध्यान आकर्षित कर परम वंदनीया माताजी के लिखित व निर्दिष्ट गायत्री उपासना के प्रतिफल के कुछ बिंदुओं पर यज्ञ पुरोहित ने बताया कि दैवी शक्ति उपासना, पूजा तथा परमात्मा की उपासना साधना में निरन्तरता, नियमितता, तत्परता, त्याज्य व ग्राह्य विषयों पर ध्यान, शुद्ध आहार-विहार, विचार संयम, सत्संकल्प का पाठ अनुपालन, स्वाध्याय, चिन्तन मनन नैतिक चारित्रिक व्यवहार और उच्चस्तरीय आध्यात्मिक साधनाओं पर विचार विकास आदि संबन्धित लाभकारी व प्रभावकारी सूत्रों, बिंदुओं पर प्रकाश डालकर हवन-यज्ञ व संस्कार विधान विधिवत किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।
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