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छप्पन सेट में भव्य कलश शोभायात्रा के साथ शारदीय नवरात्र शुरू, माँ दुर्गा के जयकारों से गूंजा डोरंडा
Published / 2026-10-11 21:43:19
छप्पन सेट में भव्य कलश शोभायात्रा के साथ शारदीय नवरात्र शुरू, माँ दुर्गा के जयकारों से गूंजा डोरंडा

छप्पन सेट में भव्य कलश शोभायात्रा के साथ शारदीय नवरात्र शुरू, माँ दुर्गा के जयकारों से गूंजा डोरंडाबटन तालाब से पवित्र जल लेकर लौटीं महिलाएँ, छप्पन सेट दुर्गा मंडप में विधि-विधान से हुई कलश स्थापनाधार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है कलश शोभायात्रा : आलोक कुमार दूबेछप्पन सेट सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने निकाली भव्य कलश यात्रा, माँ शैलपुत्री की आराधना के साथ नवरात्र शुरूभक्ति, उल्लास और जयकारों के बीच छप्पन सेट में कलश स्थापना, सुख-शांति और समृद्धि की कामनाछप्पन सेट में भव्य कलश शोभायात्रा के साथ शारदीय नवरात्र शुरू, माँ दुर्गा के जयकारों से गूंजा डोरंडाबटन तालाब से पवित्र जल लेकर लौटीं महिलाएँ, विधि-विधान से हुई कलश स्थापना; सुख-शांति और समृद्धि की कामनाटीम एबीएन, रांची। हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति, छप्पन सेट, डोरंडा की ओर से कलश स्थापना के पावन अवसर पर रविवार को भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। छप्पन सेट स्थित दुर्गा मंडप से निकली शोभायात्रा गोरखा चौक, अंबेडकर चौक और विवेकानंद चौक होते हुए बटन तालाब पहुँची। वहाँ महिलाओं ने विधि-विधान से पवित्र जल भरा और कलश को अपने माथे पर धारण कर भजन-कीर्तन, जयकारों और भक्तिमय उत्साह के बीच वापस प्रस्थान किया।शोभायात्रा राजेंद्र चौक और गोरखा चौक होते हुए पुनः छप्पन सेट स्थित दुर्गा मंडप पहुँची, जहाँ विधि-विधान के साथ कलश स्थापित किया गया। इसके साथ ही माँ दुर्गा का आह्वान करते हुए पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।इस अवसर पर समिति के मुख्य संरक्षक एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कलश स्थापना के पावन अवसर पर पवित्र जल लेकर निकाली जाने वाली शोभायात्रा धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। कलश में पवित्र जल स्थापित कर माँ दुर्गा का आह्वान किया जाता है तथा उनसे सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की जाती है।उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे, सेवा और सद्भाव में भी उसका वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए माँ दुर्गा से प्रार्थना की कि वे सभी के जीवन से दुःख, संकट और निराशा दूर करें तथा झारखंड सहित पूरे देश में सुख-समृद्धि और सामाजिक सद्भाव बनाए रखें। श्री दूबे ने कहा कि माँ दुर्गा की आराधना के साथ जलस्रोतों की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प भी लेना चाहिए।समिति के संरक्षक कपिलदेव सिंह ने कहा कि कलश स्थापना हमारी प्राचीन धार्मिक परंपरा, श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण अंग है। कलश शोभायात्रा के माध्यम से समाज के लोग एक साथ जुड़ते हैं और सामूहिक रूप से माँ दुर्गा की आराधना करते हैं। ऐसे धार्मिक आयोजन हमारी नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ आपसी सहयोग, सद्भाव और एकता की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से नवरात्र के दौरान श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ पूजा में भाग लेने तथा समाज में प्रेम और भाईचारा बनाए रखने की अपील की।समिति के अध्यक्ष गौतम दूबे (गोपी) ने कहा कि कलश देवी-शक्ति के आह्वान और मंगलमय शुरुआत का प्रतीक है। नवरात्र में कलश स्थापना के साथ माँ दुर्गा की आराधना प्रारंभ होती है। श्रद्धालुओं का एक साथ भजन-कीर्तन, जयकारों और पूजा-अर्चना के साथ पवित्र जल लाना धार्मिक उत्साह, सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकता को दर्शाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को नवरात्र की शुभकामनाएँ देते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।समिति के मीडिया प्रभारी मेहुल दूबे ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जा रही है। पूजा मंडप में प्रतिदिन सुबह और शाम आरती होगी। पंडित उदय शंकर मिश्रा के मार्गदर्शन में यजमान मनीष कुमार दूबे श्रद्धालुओं की ओर से विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराएँगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से पूजा और आरती में शामिल होने की अपील की।कलश शोभायात्रा एवं कलश स्थापना के अवसर पर समिति के मुख्य संरक्षक आलोक कुमार दूबे, संरक्षक कपिलदेव सिंह, अध्यक्ष गौतम दूबे (गोपी), शोभा सिंह, रितेश सिंह, मनोज सिंह, शशिकांत, महेंद्र प्रसाद, मेहुल दूबे, गोपाल तिवारी, दिलीप पांडे, कमलेश झा, शीला देवी, कुसुम देवी, सर्वेश कुमार, रंजू पांडे, गुड़िया सिंह, प्रियंका देवी, रूबी सिंह, मोना कुमारी, दीपा कुमारी, पूजा कुमारी, अश्विनी कुमार, विजय गुप्ता, दीपक ठाकुर, रोहित कुमार और अमोल कुमार सहित समिति के अनेक सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित थे। कलश शोभायात्रा में डोरंडा क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और धार्मिक उत्साह के साथ अपनी सहभागिता निभाई। इस अवसर पर निर्णय लिया गया कि रांची महानगर दुर्गा पूजा समिति के नेतृत्व में डोरंडा क्षेत्र के सभी पूजा पंडाल आपसी समन्वय के साथ पूजा का संचालन करेंगे तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करेंगे।

गोष्ठी उपरान्त 3 दिवसीय प्रचार कार्यक्रम संपन्न और नवरात्र गायत्री साधना अनुष्ठान शुभारंभ
Published / 2026-10-11 18:32:02
गोष्ठी उपरान्त 3 दिवसीय प्रचार कार्यक्रम संपन्न और नवरात्र गायत्री साधना अनुष्ठान शुभारंभ

गोष्ठी उपरान्त 3 दिवसीय प्रचार कार्यक्रम संपन्न और नवरात्र गायत्री साधना अनुष्ठान शुभारंभनवरात्र मुहुर्त में उपवास एवं साधना का विशिष्ट महत्व है : जेएनपीएबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार रांची  जिलांतर्गत स्थानीय शहर व प्रखंड स्तरीय इकाइयों में  शरद कालीन नवरात्र में दिव्य अखंड ज्योति व कलश पूजन सहित नवरात्र महापर्व में गायत्री महामंत्र साधना का जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण शुभारंभ हो गया है। इसके पूर्व  गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा जिला समन्वय समिति समन्वयक के सानिध्य में ली गई पूर्व बैठक निर्णयानुसार इटकी प्रखंड समन्वयक के सानिध्य में भा सं ज्ञा प संपन्न होने के उपरान्त इटकी प्रखंड के 3 पंचायत ग्राम में विचार क्रांति अभियान अंतर्गत गृहे गृहे  उपासना, ग्रामे ग्रामे यज्ञ योजना अंतर्गत 3 दिवसीय कैम्प में करीब 200 घरों में गायत्री युग निर्माण, अखंड ज्योति मासिक पत्रिका, गायत्री देवस्थापन चित्र, चालीसा,नशाखोरी, व्यसन कहर बर्बादी से मुक्ति की व्यसन मुक्त स्वर्णिम भारत बुकलेट, सद्विचार के सद्वाक्य स्टीकर सहित परामर्श व अनुमति अनुसार दीवारों में करीब 100  सद्वाक्य लेखन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान जिला समन्वयक ने शान्तिकुञ्ज का संदेश विचार व उद्देश्य पर प्रकाश डालकर जेएपी बताये कि नवरात्र में उपवास एवं साधना का विशिष्ट महत्व है।नवरात्र काल अनुष्ठान साधना का दिव्यतम एवं श्रेष्ठतम मुहुर्त है।धूर्वा बसस्टैंड स्थित प्रज्ञापीठ मंदिर परिसर में 8 अक्टूबर को पूज्यवर श्रीगुरुदेव के अवतरण दिवस पर अखंड दीप पूजन एवं उनको पुष्पांजलि अर्पित कर हुई समीक्षात्मक विचार गोष्ठी अनुसार  स्थानीय व नगरी प्रखंड में भी गायत्री महामंत्र जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण साधना, मुहल्ले मुहल्ले गायत्री दीपयज्ञ, संस्कार विधान आदि पर विचार विमर्श हुए और सकारात्मक निर्णय लेते हुए  वरिष्ठ-साधक समूह सहित सभी उपस्थित साधक-शिष्य भाई-बहन ने सकारात्मक विचार कर बताए कि शान्तिकुञ्ज मुख्यालय के सृजन संकल्प अभियान के 34 बिन्दु पर कार्य योजना बड़ा आकार लेगी। मुख्य ट्रस्टी प्रज्ञापीठ वरिष्ठ सदस्य गण ने निर्णय लिया कि गृहे गृहे गायत्री उपासना, यज्ञ , संस्कार विधान अभियान चलाया जाएगा। इटकी प्रखंड में प्रचार प्रसार व देव स्थापना कार्यक्रम में  वहां की महिला मंडल व समन्वय समिति के रीता देवी की टीम, अंकित कुमार,  सरोज कुमार,पंचम परिवार, नन्दकिशोर महतो, विजय कुमार, दुर्गा प्रसाद साहु, दिनेश कुमार शेठी ,डाक्टर दीपक कुमार, जेएनपी सदस्यों ने उल्लास, उत्साह पूर्वक व संतोषजनक  सहयोग किये।आज सभी गायत्री पीठों के साथ शक्तिपीठ सेक्टर टू में शरद नवरात्र की गायत्री महा मंत्र जप-अनुष्ठान संकल्प लेकर 5 कुण्डीय महायज्ञ सहित कई संस्कार भी संपन्न किए गए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के डाक्टर दीपक कुमार, जय नारायण प्रसाद, विजय कुमार ने दी। 

मोबाइल में सिमटती जिंदगी, अकेले होते बुजुर्ग और दिखावे की दौड़...
Published / 2026-10-11 17:57:02
मोबाइल में सिमटती जिंदगी, अकेले होते बुजुर्ग और दिखावे की दौड़...

मोबाइल में सिमटती जिंदगी, अकेले होते बुजुर्ग और दिखावे की दौड़... आई ओपनर ने समाज को दिखाया आईनाअग्रसेन जयंती पर अनूठी पहल से उठे रिश्तों, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक विसंगतियों से जुड़े सवाल, अभिनय व मार्मिक संवादों ने झकझोरापरियोजना निर्देशिका सीए वंदना अग्रवाल एवं काजल गुप्ता के संयोजन में सजी वैचारिक प्रस्तुतियांनिर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता और सामाजिक सरोकारों को सराहाएबीएन न्यूज नेटवर्क, झुमरी तिलैया। समाज की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि समस्याएं हमारी आंखों के सामने होती हैं, लेकिन उन्हें समस्या मानने और उनका समाधान खोजने की पहल कम ही लोग करते हैं। मोबाइल की स्क्रीन पर बढ़ती नजदीकियों के बीच अपनों से दूर होते रिश्ते, घरों में खामोशी से अकेलापन झेलते बुजुर्ग, दूसरों को खुश रखने के लिए खुद को भूलते लोग और दिखावे की होड़ में आर्थिक संतुलन खोते परिवार। इन सभी सवालों को जब मंच पर जीवंत किया गया, तो यह महज मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर बन गया। श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘आई ओपनर’ मंच ने समाज को उसकी ही तस्वीर दिखाते हुए यह संदेश दिया कि बदलाव की शुरुआत भाषणों से नहीं, बल्कि विचारों को व्यवहार में उतारने से होती है।परियोजना निर्देशिका सीए वंदना अग्रवाल एवं काजल गुप्ता के संयोजन में आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम में पारंपरिक भाषण प्रतियोगिता से हटकर सामाजिक समस्याओं को अभिनय, लघु नाटिका, डिजिटल दृश्य और प्रभावशाली संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों ने समाज की ज्वलंत समस्याओं को सामने रखने के साथ उनके व्यावहारिक समाधान भी सुझाए। कार्यक्रम की खासियत यह रही कि हर प्रस्तुति ने किसी न किसी सामाजिक विसंगति पर सवाल उठाया और दर्शकों को अपने व्यवहार तथा जीवनशैली पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।मोबाइल की दुनिया से लेकर बुजुर्गों के अकेलेपन तक, हर प्रस्तुति ने छोड़ी छापसीए रूही संघई एवं प्रगति चौधरी ने आधुनिक जीवन में मोबाइल की बढ़ती दखलंदाजी और अपनों के बीच घटते संवाद को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने इस सवाल को प्रमुखता से उठाया कि तकनीक के माध्यम से पूरी दुनिया से जुड़े रहने के बावजूद हम अपने ही परिवार से दूर क्यों होते जा रहे हैं। उमंग सिंघानिया एवं समूह ने जीवन की आपाधापी के बीच जीवन जीने के वास्तविक अर्थ और उसकी सार्थकता को रेखांकित किया। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि सफलता की दौड़ में केवल मंजिल तक पहुंचना ही महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि जीवन के छोटे-छोटे पलों को जीना और रिश्तों को समय देना भी उतना ही जरूरी है।मीना हिसारिया ने आधुनिक परिवारों में बुजुर्गों की उपेक्षा और उनके अकेलेपन के दर्द को मार्मिक तरीके से सामने रखा। प्रस्तुति ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया कि जिन माता-पिता ने अपना पूरा जीवन बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा दिया, उनके जीवन की संध्या सम्मान, स्नेह और साथ के बजाय अकेलेपन में क्यों बीतनी चाहिए।रिश्तों में मर्यादा, फिजूलखर्ची और खुद को भूल जाने की प्रवृत्ति पर उठे सवालअलका गुप्ता ने जीवन में एक हार से थकने के बजाए इसे जीवन की कुँजी बनाने की सलाह देते हुए, जरूरत पड़ने पर  ना को स्वीकार करने की अहमियत बताई। उन्होंने इस विषय के माध्यम से समझाया की ना भी उतना ही जरूरी है, जितना की हाँ। राशि बंसल एवं समूह ने नई पीढ़ी को अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार खर्च करने और फिजूलखर्ची से बचने का संदेश दिया। ‘चादर देखकर पैर फैलाने’ की सीख के माध्यम से प्रस्तुति ने दिखावे की संस्कृति के बीच आर्थिक समझदारी और भविष्य की जरूरतों के लिए बचत के महत्व को उजागर किया। कृतिका मोदी एवं प्रीति जगनानी ने अब और समझदार नहीं बनना विषय के माध्यम से हर परिस्थिति में समझौता करते रहने और दूसरों की अपेक्षाएं पूरी करने के लिए अपनी भावनाओं को दबाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। उनकी प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि समझदारी का अर्थ हमेशा चुप रहना या हर बात सहन करना नहीं है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करना और आत्मसम्मान के लिए खड़ा होना भी उतना ही आवश्यक है।गलतफहमियों को दूर करने और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेशशैलजा केडिया एवं समूह ने गलतफहमियों के कारण बिखरते पारिवारिक रिश्तों को बचाने के उपाय प्रस्तुत किए। संवादहीनता, अधूरी जानकारी और एक-दूसरे की बात समझने में हुई चूक किस तरह मजबूत रिश्तों में दरार पैदा कर सकती है, इसे प्रस्तुति के माध्यम से सामने रखा गया। साथ ही आपसी बातचीत, विश्वास और धैर्य को रिश्तों की मजबूती का आधार बताया गया।रजनी खेतान ने विचारों की शक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि व्यक्ति की सोच उसके व्यवहार, निर्णय और जीवन की दिशा को प्रभावित करती है। सकारात्मक विचार न केवल स्वयं के जीवन में बदलाव ला सकते हैं, बल्कि परिवार और समाज में भी बेहतर वातावरण तैयार कर सकते हैं।निर्णायक मंडल ने सराहा, समाज को सकारात्मक दिशा देने वाली पहल बतायाकार्यक्रम में निर्णायक मंडल की भूमिका शिक्षाविद अजय अग्रवाल एवं सीए प्रदीप हिसारिया ने निभाई। प्रतिभागियों की रचनात्मकता, संवाद शैली, सामाजिक प्रभाव और प्रस्तुत विषयों के समाधान पर आधारित इस आयोजन की देर शाम तक सराहना होती रही।अग्रवाल समाज के अध्यक्ष कैलाश चौधरी एवं सचिव संजीव खेतान ने कहा कि इस तरह के नवाचारी कार्यक्रम समाज को नई और सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सामाजिक समस्याओं को केवल शब्दों में उठाने के बजाय उन्हें प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना और उनके समाधान पर विचार करना समय की आवश्यकता है। वहीं जयंती संयोजक मनोज पिलानिया, अंकित चौधरी, सह संयोजका नेहा हिसारिया, सारिका लड्ढा ने परियोजना निर्देशिकाओं के अभिनव विचार और कुशल आयोजन प्रबंधन की सराहना की।गणमान्य लोगों ने की पहल की प्रशंसाकार्यक्रम में महेश दारूका, संजय अग्रवाल, प्रदीप केडिया, मधुसूदन दारूका, जगदीश संघई, श्याम सुंदर सिंघानिया, प्रदीप बंसल, मनोज केडिया, दीपक सिंघानिया, अरविंद चौधरी, मुन्ना सुलतानिया, सुरेंद्र गुप्ता, राजू केडिया, गोपी किशन अग्रवाल, मीरा खाटुवाला, मंजू संघई, सीमा सरावगी सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के विभिन्न वर्गों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। आई ओपनर की सार्थकता इसी में रही कि मंच पर उठे सवाल सभागार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने हर व्यक्ति को अपने घर, अपने रिश्तों और अपने व्यवहार की ओर देखने का अवसर दिया। संदेश स्पष्ट था- समाज बदलने के लिए सबसे पहले अपनी सोच बदलनी होगी और बदलाव की शुरुआत किसी दूसरे से नहीं, स्वयं से करनी होगी।

महाराजा अग्रसेन जयंती पर अग्रसेन भवन में हुआ विधि-विधान से पूजन और हवन
Published / 2026-10-11 17:52:41
महाराजा अग्रसेन जयंती पर अग्रसेन भवन में हुआ विधि-विधान से पूजन और हवन

महाराजा अग्रसेन जयंती पर अग्रसेन भवन में हुआ विधि-विधान से पूजन और हवनवैदिक मंत्रोच्चार के बीच दी गई आहुतियां, समाज की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामनाएबीएन न्यूज नेटवर्क, झुमरी तिलैया। समाजवाद के प्रणेता और अग्रवाल समाज के कुल प्रवर्तक महाराजा अग्रसेन की जयंती के पावन अवसर पर स्थानीय श्री अग्रसेन भवन में विधि-विधान के साथ भव्य पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन किया गया। इस दौरान अग्रवाल समाज के महिला-पुरुषों और युवाओं ने भाग लेकर महाराजा अग्रसेन के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में नजर आया।कार्यक्रम की शुरुआत महाराजा अग्रसेन की तस्वीर पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद पंडित रमाकांत मिश्रा के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन संपन्न हुआ। समाज के गणमान्य लोगों के अलावा मंजू -किशन संघई ने यजमान के रूप में हवन में आहुतियां अर्पित कीं तथा देश, समाज और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरणहवन की पूर्णाहुति के बाद महाराजा अग्रसेन की आरती उतारी गई। इस दौरान ‘महाराजा अग्रसेन की जय’ के जयकारों से अग्रसेन भवन गूंज उठा। पूजा-अर्चना में शामिल श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन को लेकर समाज के लोगों में खासा उत्साह देखा गया।महाराजा अग्रसेन के आदर्शों पर चलने का आह्वानइस अवसर पर समाज के अध्यक्ष कैलाश चौधरी व सचिव संजीव खेतान ने कहा कि महाराजा अग्रसेन ने एक रुपया, एक ईंट के सिद्धांत के माध्यम से समाज में सहयोग, समानता और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया था। उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। उनका जीवन हमें जरूरतमंदों की सहायता करने, आपसी भाईचारा बनाए रखने और सभी को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से महाराजा अग्रसेन के सिद्धांतों को आत्मसात कर समाज सेवा में आगे आने का आह्वान किया।समाज की ओर से जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सम्मान समारोह के आयोजन की भी तैयारी की गई है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से महाराजा अग्रसेन के विचारों, आदर्शों और सामाजिक योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।कार्यक्रम में मनोज पिलानिया, अंकित चौधरी, श्यामसुंदर सिघानिया, महेश दारुका, राम लाल फतेसरिया, पवन चौधरी, आयुष पोद्दार, संजय खेमानी, विपुल चौधरी, संजय नरेडी, विनोद पिलानिया, संतोष लड्ढा सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे। यह जानकारी मीडिया संयोजक अरविन्द चौधरी ने दी।

महालया : पितृपक्ष के अंतिम दिन गंगा घाटों पर उमड़ी भारी भीड़
Published / 2026-10-10 22:24:20
महालया : पितृपक्ष के अंतिम दिन गंगा घाटों पर उमड़ी भारी भीड़

महालया : पितृपक्ष के अंतिम दिन गंगा घाटों पर उमड़ी भारी भीड़ एबीएन सोशल डेस्क। तर्पण को लेकर आज अंतिम दिन शहर के मुक्तेश्वर गंगा घाट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। आज अमावस्या के दिन पितृपक्ष का समापन हो रहा है। कल रविवार को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा का पूजा प्रारंभ हो जाएगी। तर्पण को लेकर आज अंतिम दिन शहर के मुक्तेश्वर गंगा घाट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।अंतिम दिन महिलाएं भी अपने माता-पिता व पितरों को तर्पण करती नजर आयी। हालांकि पुरूषों की भीड़ अधिक देखी गई। बताते चलें वैसे लोग जिन्हें तिथि याद नहीं होती या जिन्हें समय नहीं मिल पाता, ऐसे सभी लोग पितृपक्ष के अंतिम दिन तर्पण करते हैं।यही वजह है कि हर साल पितृपक्ष के अंतिम दिन घाटों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। पुरोहितों की देख-रेख में तर्पण किया जा रहा है। पुरोहित भी पूरे विधि-विधान के साथ तर्पण करा रहे है। ऐसा माना जाता है कि तर्पण करने से पितरों को संतुष्टि मिलती है और आशीर्वाद का असर सीधा कुल पर पड़ता है। 

शक्ति की आराधना का महापर्व है शारदीय नवरात्रि
Published / 2026-10-10 22:00:51
शक्ति की आराधना का महापर्व है शारदीय नवरात्रि

शक्ति की आराधना का महापर्व है शारदीय नवरात्रियह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय की विजय का देता है संदेश : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की सनातन संस्कृति में नवरात्रि का पर्व आस्था, भक्ति, शक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। मां दुर्गा की आराधना को समर्पित यह पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ रविवार 11 अक्टूबर से होगा और 19 अक्टूबर तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। 20 अक्टूबर को विजयादशमी अर्थात दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्रि के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है नौ रातें। यह पर्व शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब महिषासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से देवता और समस्त संसार त्रस्त हो गए, तब देवताओं की सामूहिक शक्ति से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। मां दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। इसी विजय की स्मृति में नवरात्रि मनाई जाती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देता है। नवरात्रि का संबंध भगवान श्रीराम की विजय गाथा से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा की आराधना की थी। विजयादशमी के दिन रावण पर उनकी विजय को धर्म की अधर्म पर जीत के रूप में मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री, द्वितीय दिन मां ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिन मां चंद्रघंटा, चतुर्थ दिन मां कूष्मांडा, पंचम दिन मां स्कंदमाता, षष्ठम दिन मां कात्यायनी, सप्तम दिन मां कालरात्रि, अष्टम दिन मां महागौरी और नवम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना होती है।मां के प्रत्येक स्वरूप का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्त्व है। मां शैलपुत्री दृढ़ता, ब्रह्मचारिणी तपस्या, चंद्रघंटा साहस, कूष्मांडा सृजन शक्ति, स्कंदमाता वात्सल्य, कात्यायनी पराक्रम, कालरात्रि निर्भयता, महागौरी पवित्रता और सिद्धिदात्री सिद्धि एवं पूर्णता की प्रतीक मानी जाती हैं। इन स्वरूपों की आराधना से भक्तों को आत्मबल, सकारात्मकता और सदाचार की प्रेरणा मिलती है।नवरात्रि के प्रथम दिन घरों और मंदिरों में विधि-विधान से घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है। इसके साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली देवी आराधना का आरंभ होता है। भक्त प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं, पूजा स्थल को सजाते हैं और मां दुर्गा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प, फल, नैवेद्य तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। अनेक श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा तथा देवी मंत्रों का पाठ करते हैं।नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्त्व है।इन दिनों अनेक परिवारों में कन्या पूजन किया जाता है। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है तथा भोजन कराकर दक्षिणा और उपहार दिए जाते हैं। यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान और समाज में बालिकाओं के महत्त्व को रेखांकित करती है।नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का भी उत्सव है। गुजरात में गरबा और डांडिया, पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा तथा देश के विभिन्न भागों में देवी जागरण, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है तथा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।इस पर्व का उद्देश्य मनुष्य के भीतर निहित नकारात्मक विचारों, अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य बुराइयों पर विजय प्राप्त करना भी है। मां दुर्गा की उपासना हमें साहस, संयम, करुणा, आत्मविश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। शारदीय नवरात्रि हमें स्मरण कराती है कि शक्ति का वास्तविक स्वरूप केवल बाहुबल में नहीं, बल्कि सत्य, सदाचार, धैर्य और आत्मविश्वास में निहित है। मां दुर्गा की आराधना के माध्यम से समाज में नारी सम्मान, सेवा, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।नवरात्रि का यह पावन पर्व प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर की बुराइयों को त्यागकर अच्छाइयों को अपनाने तथा समाज और राष्ट्र के कल्याण में योगदान देने की प्रेरणा देता है। मां दुर्गा से यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास हो तथा समस्त संसार में प्रेम, सद्भाव और मंगल का प्रकाश फैले।

कतरास ब्राह्मण समाज ने सिधाबाद में किया शिक्षा प्रतिभा सम्मान समारोह
Published / 2026-10-10 21:55:22
कतरास ब्राह्मण समाज ने सिधाबाद में किया शिक्षा प्रतिभा सम्मान समारोह

कतरास ब्राह्मण समाज ने सिधाबाद में किया शिक्षा प्रतिभा सम्मान समारोहएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। जय परशुराम! अपने आर्ष परिषद कतरास ब्राह्मण समाज द्वारा आज समाज कार्यालय सिधाबाद में आयोजित शिक्षा प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम में उपस्थित हो कार्यक्रम का संचालन किया। मौके पर कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने इस वर्ष मैट्रिक इंटर के प्रथम श्रेणी प्राप्त विद्यार्थियों सहित नेट नीट में सफल अभ्यर्थियों को मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर हमारे समाज के पूर्व अध्यक्ष व टाटा स्टील बिहार के सेवानिवृत्त यांत्रिक अभियंता अधीर चंद्र दुबे, समाज के सलाहकार शंभुनाथ तिवारी, समाज के वर्तमान अध्यक्ष प्रमोद दूबे, राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से इस वर्ष सम्मानित शिक्षिका मुनमुन भट्टाचार्य, धनबाद जिले में इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान प्राप्त शिक्षक ब्रजकिशोर चौबे, पत्रकारिता शिक्षा के प्रबंधक प्रमोद कुमार झा, दैनिक भास्कर धनबाद के समाचार संपादक अनिरुद्ध ओझा, दंत चिकित्सक ध्रुव कुमार तिवारी, समाज के आदरणीय सचिव राजेश कुमार पांडे सहित दर्जनों गणमान्य उपस्थित थे। 

नवरात्र के संधि बेला का आगमन...
Published / 2026-10-10 12:51:50
नवरात्र के संधि बेला का आगमन...

नवरात्र के संधि बेला का आगमन... त्रिवेणी दासकल से अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवरात्र का संधि-बेला (संध्या काल) का शुभारंभ हो रहा है। ग्रीष्म ऋतु का विदाई हो रहा है और शरद ऋतु का आगमन हो रहा है और यह जो मध्यकाल है वह सनातन आध्यात्मिक उपासना, साधना एवं आराधना के लिए अत्यंत उपयुक्त एवं प्रभावकारी परिणाम देने वाला काल है। प्रतिदिन के त्रिकाल संध्या अध्यात्म विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण तो है ही, परंतु यह 9 दोनों का काल अत्यंत महत्वपूर्ण है।इन 9 दिनों में संपूर्ण व्यक्तित्व का परिमार्जन एवं परिशोधन किया जाता है। शक्ति की विभिन्न स्वरूपों के अधिष्ठात्री देवियों (फिजिक्स साइंस के अनुसार शक्ति के 8 स्वरूप होते हैं और आपस में इंटरचेंजेबल भी होते हैं) से सानिध्य तथा संपर्क साधते हुए उनकी शक्ति रुपी आशीर्वाद एवं वरदान प्राप्त किया जाता है।मुनि श्रेष्ठ महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग ..यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का अवलंबन करते हुए 9 दिनों का संकल्प-अनुष्ठान किया जाता है। दशहरा का दिन हवन करते हुए अनुष्ठान पूर्ण किया जाता है और उत्सव, त्यौहार, पर्व एवं समारोह मनाते हुए एक दूसरे का अभिवादन तथा शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हुए आनंद में विभोर हुआ जाता है। नवरात्रि में ब्रह्मांड के प्रकृति में सूक्ष्म एवं अदृश्य स्वरूप में विद्यमान शक्ति (शक्ति अदृश्य होती है) का अनुदान हर किसी को प्राप्त करना चाहिए जिसके आधार पर जीवन में विशेष पुरुषार्थ किया जा सके। 

अग्रवाल सभा रांची धूमधाम से मनाएगी महाराजा अग्रसेन जयंती
Published / 2026-10-09 23:37:49
अग्रवाल सभा रांची धूमधाम से मनाएगी महाराजा अग्रसेन जयंती

अग्रवाल सभा रांची धूमधाम से मनाएगी महाराजा अग्रसेन जयंती10 अक्टूबर को निकलेगी भव्य शोभा यात्रा, 11 अक्टूबर को होंगे विविध कार्यक्रमटीम एबीएन, रांची। अग्रवाल सभा रांची की ओर से 11 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। जिसमें भव्य शोभायात्रा, पूजा-अर्चना, माल्यार्पण, सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। जयंती समारोह के उपलक्ष्य में 10 अक्टूबर को अपराह्न 3 बजे महाराजा अग्रसेन भवन से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों एवं क्षेत्रों का भ्रमण करेगी। इसमें महाराजा अग्रसेन की आकर्षक झांकियां शामिल होंगी। समाज के पुरुष एवं महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सम्मिलित होकर शोभायात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। इस आयोजन के माध्यम से महाराजा अग्रसेन के आदर्शों, सामाजिक समरसता, सेवा, सहयोग और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। 11 अक्टूबर दिन रविवार को जयंती के दिन प्रातः 6 बजे महाराजा अग्रसेन चौक पर महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके पश्चात अपराह्न 3 बजे महाराजा अग्रसेन भवन में सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।अग्रवाल सभा ने समाज के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाजबंधुओं से सभी कार्यक्रमों में सपरिवार शामिल होकर समारोह को सफल बनाने की अपील की है।इस कार्यक्रम की जानकारी मीडिया प्रभारी रीना सुरेखा ने दी। 

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