सावन पुत्रदा एकादशी पर भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम, 280वां अन्नपूर्णा महाप्रसाद संपन्नमेरे बांके बिहारी लाल, तू इतना प्यारा है...एबीएन सोशल डेस्क। सावन पुत्रदा एकादशी के पावन अवसर पर रांची के पुंदाग स्थित एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में 280वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद, श्री राधा रानी जी का दिव्य-अलौकिक श्रृंगार एवं भव्य भजन संध्या का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सेवा, साधना और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलाकार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर में विराजमान श्री राधा रानी जी के दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार से हुआ। इस अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। मंदिर के पुजारी अरविंद पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कर भगवान श्री राधा-कृष्ण को महाप्रसाद अर्पित किया। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का वितरण शुरू हुआ।ट्रस्ट की ओर से आयोजित अन्नपूर्णा सेवा में तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, मैंगो जूस एवं आलू चिप्स के पैकेट वितरित किए गए। महाप्रसाद ग्रहण करते हुए श्रद्धालुओं ने सेवा कार्य की सराहना की और इसे भगवान की कृपा का प्रसाद बताया। सेवा के दौरान पूरे मंदिर परिसर में श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।कार्यक्रम को भक्ति संगीत से और भी भावपूर्ण बनाते हुए ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी ने सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी। राधे-राधे बोल, श्याम नाम रस घोल, मेरे बांके बिहारी लाल, तू इतना प्यारा है तथा श्री राधे गोविंद भज ले जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। भजनों की मधुर धुनों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया।इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने सावन पुत्रदा एकादशी के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन परंपरा में एकादशी व्रत आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का पर्व है। सावन पुत्रदा एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजन करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति एवं पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा, तथा 6 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कार्यक्रम में- डूंगरमल अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, सुरेश चौधरी, विष्णु सोनी, संजय सर्राफ, मनीष सोनी, सुरेश भगत, पवन पोद्दार, ज्ञान प्रकाश शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
रांची प्रेस क्लब में सावन महोत्सव पर खूब जमा रंगगौरी रानी बनीं सावन क्वीन, कृष्णा पांडे प्रथम रनर अपटीम एबीएन, रांची। रांची प्रेस क्लब में रविवार को वूमेन वेलफेयर कमेटी और प्रेस क्लब के सौजन्य से सावन महोत्सव का आयोजन उल्लास और उमंग के साथ किया गया। महिला पत्रकारों और क्लब सदस्यों के परिवार की महिलाओं के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में सावन की पारंपरिक संस्कृति के साथ हरे परिधानों में सजी महिलाओं ने रैंप वाक, मेहंदी, हाउजी, नृत्य और कई मनोरंजक प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। गौरी रानी सावन क्वीन चुनी गईं। कृष्णा पांडे प्रथम रनर अप और नेहा शर्मा द्वितीय रनर अप रहीं। कार्यक्रम में रांची की मेयर रौशनी खलखो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने महिलाओं के साथ सावन महोत्सव की खुशियां साझा कीं और आयोजन की सराहना की। महोत्सव का सबसे आकर्षक आयोजन सावन क्वीन प्रतियोगिता रही। प्रतिभागियों ने सावन की थीम पर अपनी प्रस्तुति, आत्मविश्वास और पारंपरिक परिधान के साथ निर्णायकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम में मेहंदी प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें रितिका शाहदेव ने प्रथम, अरण्या ने द्वितीय और पल्लवी ने तृतीय स्थान हासिल किया। इसके अलावा बेस्ट हेयर स्टाइल, बेस्ट आउटफिट, बेस्ट लुक, बेस्ट चूड़ी और बेस्ट बिंदी जैसी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। सावन क्वीन की प्रथम रनर अप कृष्णा पांडे ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। शर्मिष्ठा मजुमदार, रेखा पाठक, करबी दत्ता और ऊषा पाठक ने निर्णायक की भूमिका निभाई। आयोजन की संयोजक क्लब की मैनेजिंग कमेटी मेंबर प्रतिमा कुमारी थीं। महोत्सव में विभिन्न ओपन गेम्स और हाउजी ने भी लोगों का खूब मनोरंजन किया। आकर्षक झूले का आनंद महिलाओं और बच्चों ने लिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के लिए डांस प्रतियोगिता भी कराई गई। सभी प्रतियोगिताओं के विजेताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
चार और पांच सितंबर को श्री कृष्णमय होगी रांची : संजय सेठनमो दही हांडी प्रतियोगिता का उदघाटन झारखंड के राज्यपाल करेंगेवहीं मुख्य अतिथि के रूप में संध्या कुरेचा उपस्थित रहेंगीमुंबई की सतीश कृष्णमूर्ति एंड पार्टी देगी कार्यक्रम के प्रस्तुतिवृंदावन की राजेश शर्मा एंड टीम द्वारा श्री कृष्णा के रास झांकियो का होगा मंचनदो दिवसीय नमो दही हांडी प्रतियोगिता का होगा भव्य और विशाल आयोजनश्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची के सानिध्य में श्री कृष्ण जन्माष्टमी दो दिवसीय महोत्सव 4 व 5 सितंबर को विजेताओं के बीच नगद व शील्ड पुरस्कार दिया जायेगाटीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति,रांची के सानिध्य में अलबर्ट एक्का चौक, मेन रोड में 4 व 5 सितंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। वर्तमान में श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची के संरक्षक व रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ,सी पी सिंह व अजय मारू वही समिति के अध्यक्ष मुकेश काबरा है।आज की प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए समिति के संरक्षक व रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ विधायक सी पी सिंह, अजय मारू व अध्यक्ष मुकेश काबरा ने बताया कि 4 व 5 सितंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति, रांची की ओर से अलबर्ट एक्का चौक ,मेन रोड मै श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। समिति के द्वारा 16 वर्षों से यह उत्सव हम मनाते आ रहे हैं।प्रथम दिवस 4 सितंबर को संध्या 3 बजे श्री कृष्ण के बाल रूप की झांकी यानि बाल गोपाल सजाओ प्रतियोगिता व झांकी प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है। जिसमें 10 वर्ष तक के श्री कृष्ण के विभिन्न रूपों के साथ बच्चे ,बच्चियां इस प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे। वही दुतीय दिवस 5 सितंबर को संध्या 3 बजे से नमो दही- हांडी फोड़ प्रतियोगिता सह- भजन संध्या सहित नृत्य नाटिका का भव्य व विशाल आयोजन रखा गया है।नमो दही हांडी प्रतियोगिता में पुरुष गोविंदा टीम व महिला गोविंदा टीम भाग ले सकेंगे। जिसका रजिस्ट्रेशन समिति में गोबिंदाओ की टीम को करवाना अनिवार्य होगा। संरक्षक संजय सेठ ने बताया प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय व सांत्वना पुरस्कार भी दिया जायेगा। नमो दही हांडी प्रतियोगिता में कुछ नियम व शर्ते भी है। जिसके तहत बाल गोपाल प्रतियोगिता एवं दही हाडी फोड़ प्रतियोगिता का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।रजिस्ट्रेशन के लिए मेन रोड स्थित केडिया साइकिल में राजेंद्र केडिया एवं स्टेशन रोड, पटेल चौक पतंजलि के बाबा रामदेव के सेंटर में सतीष सिन्हा से प्रतियोगिता के फार्म प्राप्त किए जा सकते हैं। सतीश सिन्हा के मोबाइल नम्बर 9431101328 है। जिस पर संपर्क किया जा सकता है। संरक्षक सह रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा वंदेमातरम का 150 वर्ष पूर्ण होने पर वंदेमातरम की थीम पर आयोजन स्थल को सजाया जाएगा। श्री सेठ ने बताया झारखंड के माननीय राज्यपाल नमो दही हांडी प्रतियोगिता का उद्घाटन करेंगे एवम मुख्य अतिथि के रूप में श्री मति संध्या कुरेचा उपस्थित रहेगी ।पूर्वी भारत की झलकियो के साथ ही नमो दही हांडी प्रतियोगिता इस बार रांची में आकर्षण का केंद्र बनेगी जिसे उत्साह और उमंग के साथ हम मनाएंगे।संरक्षक अजय मारू और मुकेश काबरा ने बताया की मुंबई की सतीश कृष्ण मूर्ति एंड पार्टी के द्वारा श्री कृष्ण जन्मोत्सव के कार्यक्रम में प्रस्तुति दी जाएगी। वही वृंदावन से पधारे राजेश शर्मा एंड टीम के द्वारा श्री कृष्ण के रासलीला के नाट्य प्रस्तुति के संग भजनों का आप आनंद उठा सकेंगे। धनबाद के पिंटू शर्मा द्वारा भजनों की गंगा के अमृत वर्षा का आनंद आप उठा सकेंगे।संरक्षक संजय सेठ, सी पी सिंह, अजय मारू व अध्यक्ष मुंकेश काबरा ने कहा कि अगली बैठक में समिति के अन्य पदों व कार्यो के लिए सदस्यो के नाम के संग समिति का बृहत् विस्तार किया जायेगा। आयोजन को सफल बनाने में काफी संख्या में सदस्य लगे हुए हैं जो नियमित कार्यक्रम को सजाने में अपना समय दे रहे हैं।आज की प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से संरक्षक संजय सेठ, सी पी सिंह व अजय मारू, महापौर रोशनी खलको, उप महापौर नीरज कुमार, अध्यक्ष मुकेश काबरा, कुणाल आजमानी,राम बांगड़, रविंद्र मोदी, ऐश्वर्य सेठ , रमेन्द्र कुमार,नीरज चौधरी, श्रीमती नीलम चौधरी प्रमोद सारस्वत, संजय पोद्दार,सतीश सिन्हा ,पूनम आनंद, कमलजीत सिंह शंटी, संतोष सेठ, रामाशंकर बगड़िया ,अमित चौधरी,ललन श्रीवास्तव, विपिन वर्मा, रतन अग्रवाल ,संजीव साहू हरविंदर सिंह बेदी, अशोक पुरोहित, शंकर दुबे, ललित ओझा,बिपिन वर्मा, राजू रजक, बबलू चौधरी, संजय सिंह लल्लू,जुगल दरगड, भीष्म सिंह, जवाहर तनेजा ,गौतम देव ,देवेश अजमानी, मनीष लोधा, राहुल सिंह, राहुल सिंह चंकी ,वीरेंद्र प्रसाद, प्रदीप कुमार ,नीतू सिंह, श्रीमती कुमुद झा, संजना शर्मा,अमन प्रकाश, विपिन वर्मा, विजय ओझा ,गुड्डू सिंह ,किशन साबु, नरेंद्र लखोटिया,मनोज कल्याणी, प्रकाश काबरा, ओम प्रकाश शर्मा, सोनू भारद्वाज, सहित काफी संख्या में लोग लगे हुए है । उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी प्रमोद सारस्वत और संजय पोद्दार ने दी।
सामाजिक संस्था समर्पण एक नेक पहल को जनकल्याण कार्यों के लिए किया गया सम्मानितएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। धनबाद रेलवे ऑडिटोरियम में रोटी बैंक यूथ क्लब के नवम स्थापना दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था “समर्पण एक नेक पहल” द्वारा किए जा रहे जनकल्याण एवं सामाजिक सेवा कार्यों के लिए संस्था के संस्थापक सह केंद्रीय अध्यक्ष दीपेश चौहान को सम्मानित किया गया।रोटी बैंक यूथ क्लब के संस्थापक रवि शेखर ने दीपेश चौहान को मोमेंटो एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने “समर्पण एक नेक पहल” द्वारा रक्तदान, जरूरतमंदों की सहायता एवं अन्य जनकल्याणकारी कार्यों के माध्यम से समाज में किए जा रहे योगदान की सराहना की।सम्मान प्राप्त करने के बाद दीपेश चौहान ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए नहीं, बल्कि “समर्पण एक नेक पहल” से जुड़े सभी समर्पित सदस्यों और सहयोगियों के लिए है, जिनके निरंतर सहयोग एवं सेवा भावना से संस्था समाज के जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान सामाजिक कार्यों के प्रति जिम्मेदारी और उत्साह को और मजबूत करते हैं।श्री चौहान ने रोटी बैंक यूथ क्लब के संस्थापक रवि शेखर को उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। उन्होंने कहा कि समाजसेवा के क्षेत्र में रवि शेखर एवं रोटी बैंक यूथ क्लब का योगदान प्रेरणादायक है और ऐसे प्रयास समाज में मानवता एवं सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सेवा, मानवता और जनकल्याण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले लोगों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में “समर्पण एक नेक पहल” के सक्रिय सदस्य सोनू कुमार, धीरज सिंह, शिवम चौधरी, उदय प्रताप सिंह, रवि सिंह, पिंकी गुप्ता, संगीत सिंह सहित अन्य सदस्य एवं गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य मे एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के द्वारा संचालित विगत 32 माह से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आश्रम में रह रहे 47 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा मे समर्पित सेवादारों को प्रतिदिन तीनों समय विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन बनवाकर भोजन खिलाया जा रहा है। सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 3 जुलाई से 22 अगस्त तक 50 दिनों में 10500 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादारों को भोजन कराया गया। उन्होंने बताया कि आश्रम के रसोई घर में पूरी स्वच्छता एवं सात्विकता के साथ विभिन्न प्रकार के पौष्टिक व्यंजन तैयार किये जाते हैं तथा प्रत्येक निराश्रित प्रभुजन को सम्मान पूर्वक, स्नेह और आत्मीयता के साथ भोजन कराया जाता है। इस सेवा में कई लोगों ने सहयोग देते हुए स्वयं भोजन सेवा का दायित्व निभाया। इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे निराश्रितों, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के समान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इस आश्रम में सत्यनारायण पोद्दार चैरिटेबल ट्रस्ट, बाबूलाल प्रेमसंस ग्रुप का पूर्ण सहयोग निरंतर मिलता है। उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। जरूरतमंदों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची अराधना है।अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में चैरिटेबल ट्रस्ट के निदेशक पंकज पोद्दार, कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, अंजनी अग्रवाल, विष्णु सोनी, सुरेश चौधरी, अरविंद अग्रवाल, सुरेश भगत, पवन पोद्दार सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इस वर्ष सावन पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त दिन रविवार को मनाई जाएगी। यह श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी है और भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। पुत्रदा का अर्थ है-संतान प्रदान करने वाली। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत संतान की कामना,संतान के सुख-स्वास्थ्य, दीर्घायु और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। हालांकि आधुनिक संदर्भ में इस पर्व का संदेश केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि संतान के उज्ज्वल भविष्य, अच्छे संस्कार, सुख-शांति और परिवार के मंगल की प्रार्थना से भी जुड़ा है। वर्ष में दो एकादशियां पुत्रदा एकादशी के नाम से जानी जाती हैं- एक पौष शुक्ल पक्ष में और दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष में सावन पुत्रदा एकादशी की कथा महिष्मती नगरी के राजा महाजित से जुड़ी है। राजा अत्यंत धर्मपरायण और प्रजावत्सल था, लेकिन संतानहीन होने के कारण दुखी रहता था। एक दिन उसके मंत्री और प्रजा ऋषि-मुनियों के पास पहुंचे और राजा की समस्या का समाधान पूछा। महर्षि लोमश ने ध्यान करके बताया कि पूर्व जन्म में राजा से अनजाने में एक ऐसा कर्म हुआ था, जिसके कारण उसे इस जन्म में संतान सुख से वंचित रहना पड़ा। महर्षि ने राजा को श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत करने तथा भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने की सलाह दी। राजा ने श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत किया। कथा के अनुसार व्रत के पुण्य प्रभाव से उसे संतान सुख प्राप्त हुआ और उसके घर एक तेजस्वी पुत्र का जन्म हुआ। इसी कारण इस एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा गया। एकादशी के दिन प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसीदल, फल, पंचामृत और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, जलाहार अथवा फलाहार व्रत रखते हैं। दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भजन-कीर्तन और कथा-श्रवण किया जाता है। रात्रि जागरण और हरिनाम संकीर्तन का भी विशेष महत्व माना गया है। अगले दिन द्वादशी में उचित समय पर पारण कर दान-पुण्य और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा है। सावन पुत्रदा एकादशी मनुष्य को संयम, श्रद्धा, सदाचार, सेवा और करुणा का संदेश देती है।इसकी कथा यह भी सिखाती है कि प्रत्येक जीव के प्रति दया और संवेदना रखनी चाहिए तथा अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए। भगवान विष्णु की आराधना के साथ परिवार के सुख, संतान के उज्ज्वल भविष्य और समाज में सद्भाव की कामना इस पर्व को विशेष बनाती है।इस प्रकार सावन पुत्रदा एकादशी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं बल्कि परिवार, संस्कार, सेवा और आध्यात्मिक अनुशासन का पर्व है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, संतान के कल्याण और जीवन में सद्बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।
टीम एबीएन, रांची। रांची माहेश्वरी महिला समिति एवं माहेश्वरी युवा संगठन के संयुक्त तत्वावधान में भक्ति, संगीत और सामूहिक सहभागिता से सजा विशेष कार्यक्रम रास एंड रिदम- भजन जैमिंग सेशन का आयोजन 22 अगस्त दिन शनिवार को डंगराटोली स्थित स्वर्णभूमि वेंकट, रांची में किया जायेगा। आयोजन को लेकर माहेश्वरी समाज के लोगों में विशेष उत्साह है। आयोजकों का उद्देश्य भजन, संगीत और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से श्रद्धालुओं एवं संगीत प्रेमियों को आध्यात्मिक आनंद के साथ सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराना है। कार्यक्रम में भक्ति संगीत को आधुनिक एवं सामूहिक जैमिंग के अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें प्रतिभागी भजनों के साथ जुड़कर गायन, संगीत और ताल के माध्यम से भक्ति का आनंद ले सकेंगे। आयोजन में लाइव म्यूजिक की विशेष प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र होगी। भक्ति और संगीत के इस अनूठे संगम के माध्यम से लोगों को तनावमुक्त वातावरण में आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करने का प्रयास किया जायेगा। कार्यक्रम की खास प्रस्तुति नेपाल के प्रसिद्ध लोकल जैमर्स नेपाल बैंड द्वारा दी जायेगी। यह बैंड अपने लाइव म्यूजिक और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियों के लिए जाना जाता है। बैंड की प्रस्तुति कार्यक्रम में ऊर्जा, उमंग और भक्ति का विशेष रंग भरने के साथ श्रोताओं के लिए यादगार अनुभव बनने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट चेयरमैन गौरव काबरा ने कहा कि रास एंड रिदम केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति, संगीत और एकजुटता को साथ लाने का प्रयास है। पूरी टीम के सामूहिक सहयोग से इसे एक यादगार भक्ति संध्या बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयोजन के माध्यम से समाज के लोगों को एक साथ जुड़ने, संगीत का आनंद लेने और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करने का अवसर मिलेगा। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। माहेश्वरी महिला समिति एवं माहेश्वरी युवा संगठन की पूरी टीम आयोजन को सफल, व्यवस्थित और यादगार बनाने में जुटी हुई है। रास एंड रिदम को लेकर भक्ति, संगीत और सामाजिक एकजुटता का अनूठा वातावरण देखने को मिलेगा। उक्त जानकारी गौरव काबरा ने दी।
टीम एबीएन, रांची। आर्ट आफ गिविंग, झारखंड यूनिट ने आर्ट आॅफ गिविंग रत्न सम्मान समारोह 2026 का आयोजन 23 अगस्त 2026 को प्रात: 11 बजे पलाश मीटिंग हॉल, डोरंडा, रांची में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो डॉ अच्युता सामंत होंगे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में सुबोधकांत सहाय उपस्थित रहेंगे। इस गरिमामयी समारोह में झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में अपने उत्कृष्ट कार्य, उल्लेखनीय योगदान, समर्पण एवं सामाजिक सरोकारों के माध्यम से समाज और राज्य को गौरवान्वित करने वाले लगभग 20 नामचीन एवं विशिष्ट व्यक्तित्वों को उनके-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए आर्ट आॅफ गिविंग रत्न सम्मान से सम्मानित किया जायेगा। सम्मानित होने वाले व्यक्तित्वों में शिक्षा, खेल, खेल प्रशासन, सामाजिक सेवा, चिकित्सा, कला-संस्कृति, पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोग शामिल हैं। इन सभी ने अपने कार्यों एवं उपलब्धियों से समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अवसर पर अपराह्न एक बजे एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रो. डॉ. अच्युत सामंत, संस्थापक द्वारा संबोधित किया जाएगा। वे आर्ट आॅफ गिविंग के उद्देश्य, इसकी गतिविधियों तथा झारखंड में संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों के संबंध में मीडिया को जानकारी देंगे। आर्ट आफ गिविंग का मूल उद्देश्य सेवा, समर्पण और सहयोग की भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य के तहत झारखंड यूनिट द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित कर उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से सराहा जा रहा है। कार्यक्रम के अनुसार मुख्य कार्यक्रम 23 अगस्त को दिन के 11 बजे और एक बजे आयोजकों द्वारा मीडिया को संबोधित किया जाएगा। कार्यक्रम पलाश मीटिंग हॉल, डोरंडा, रांची में संपन्न होगा। उक्त जानकारी आर्ट आॅफ गिविंग, झारखंड यूनिट के महासचिव शेखर बोस ने दी।
रामभक्ति और लोकभाषा के अमर साधक थे गोस्वामी तुलसीदासआज भी जन-जन के जीवन में जीवंत है रामचरितमानस : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संत परंपरा और हिंदी साहित्य के महान स्तंभ गोस्वामी तुलसीदास की जयंती प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। गोस्वामी तुलसीदास केवल महान कवि ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त, संत और समाज को सदाचार, मर्यादा, सेवा तथा भक्ति का मार्ग दिखाने वाले युगद्रष्टा थे। उनका सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ रामचरितमानस है, जिसके माध्यम से उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, त्याग, सत्य, करुणा, कर्तव्य और मर्यादा को सरल लोकभाषा में जन-जन तक पहुंचाया। तुलसीदास ने रामचरितमानस के अतिरिक्त विनय पत्रिका, गीतावली, दोहावली, कवितावली सहित अनेक महत्वपूर्ण रचनाएं कीं और उन्हें रामभक्ति की प्रमुख परंपरा के कवियों में माना जाता है। उनके जन्मस्थान और जन्म-वर्ष को लेकर विद्वानों में मतभेद मिलते हैं। राजापुर उत्तर प्रदेश को प्रमुख रूप से उनका जन्मस्थान माना जाता है।तुलसीदास जी के जीवन से जुड़ी प्रसिद्ध कथा के अनुसार उनका सांसारिक जीवन पत्नी रत्नावली के प्रति अत्यधिक अनुराग से जुड़ा था। रत्नावली के प्रेरक वचनों ने उनके भीतर वैराग्य और श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति की भावना को जागृत किया। इसके बाद उनका संपूर्ण जीवन रामनाम, साधना और लोककल्याण को समर्पित हो गया। तुलसीदास जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंनेआध्यात्मिक ज्ञान और रामकथा को ऐसी भाषा में प्रस्तुत किया,जिसे सामान्य जन सहजता से समझ सके। अवधी भाषा में रचित रामचरितमानस ने रामकथा को घर-घर पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। यही कारण है कि यह ग्रंथ आज भी धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, लोकभाषा और नैतिक जीवन-मूल्यों की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है।तुलसीदास जयंती के अवसर पर मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ, रामनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ, पूजा-अर्चना तथा धार्मिक प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।अनेक स्थानों पर तुलसीदास जी की रचनाओं और उनके जीवन-दर्शन पर विचार गोष्ठियां भी होती हैं। तुलसीदास जयंती का उद्देश्य केवल एक महान संत-कवि की जयंती मनाना नहीं, बल्कि उनके द्वारा बताए गए सत्य, धर्म, मर्यादा, करुणा, सेवा, त्याग और भक्ति के आदर्शों को जीवन में उतारना है। श्रीराम के चरित्र के माध्यम से तुलसीदास जी ने समाज को यह संदेश दिया कि शक्ति का उपयोग लोककल्याण के लिए, ज्ञान का उपयोग सदाचार के लिए और जीवन का उपयोग मानव सेवा के लिए होना चाहिए।आज के आधुनिक और बदलते सामाजिक परिवेश में तुलसीदास जी का साहित्य और अधिक प्रासंगिक दिखाई देता है। परिवार में प्रेम और संस्कार, समाज में सद्भाव, व्यक्ति के जीवन में संयम तथा कर्तव्य के प्रति निष्ठा जैसे मूल्यों की आवश्यकता आज भी उतनी ही है।इस प्रकार तुलसीदास जयंती भारतीय संस्कृति, भक्ति साहित्य और लोकमंगल की उस महान परंपरा का स्मरण पर्व है, जिसने रामकथा को जन-जन तक पहुंचाकर भारतीय समाज के नैतिक और आध्यात्मिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया। गोस्वामी तुलसीदास की वाणी आज भी यही प्रेरणा देती है कि भक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि सदाचार, सेवा, सत्य और मानवता के मार्ग पर चलने का नाम है।
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