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लोहरदगा : भंडरा के भिठा गांव में माता आदि शक्ति भवानी के लिए होती है अदृश्य भगवान की पूजा
Published / 2026-10-17 14:15:33
लोहरदगा : भंडरा के भिठा गांव में माता आदि शक्ति भवानी के लिए होती है अदृश्य भगवान की पूजा

लोहरदगा : भंडरा के भिठा गांव में माता आदि शक्ति भवानी के लिए होती है अदृश्य भगवान की पूजाएबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा, लोहरदगा। लोहरदगा जिले के भंडरा प्रखंड अन्तर्गत भिठा गांव में माता आदि शक्ति भवानी का एक ऐसा मंदिर है, जहां अदृश्य भगवान की पूजा की जाती है। मंदिर में भगवान नजर नहीं आते और न ही किसी ने इन्हें देखने की प्रयास की है। इस प्राचीन मंदिर का यह परंपरा करीब चार सौ साल पुरानी है। इसके पीछे की मान्यताएं भी किसी को ज्ञात नहीं है।गांव के इस मंदिर में परंपरागत शाहदेव परिवार के सदस्य ही पूजा अर्चना करते हैं। लेकिन भगवान को देखने या छूने का अधिकार किसी को नहीं है। बताया जाता है कि भगवान की दस भुजी मूर्तियां एक मंजूषा में बंद है। यह मंजूषा एक बक्से में बंद है। जिसे कपड़ों की गठरी में रखा गया है।परिवार के बुजुर्ग बताते हैं कि पूर्वजों द्वारा आंखों में पट्टी बांध कर प्रत्येक दशहरा भगवान को स्नान कराया जाता है। करीब चार सौ साल पहले इस मंदिर की स्थापना लाल भीम नाथ शाहदेव ने की थी। इनके वंशज लाल नवीन किशोर नाथ शाहदेव के पश्चात वर्तमान में लाल राजकिशोर नाथ शाहदेव मंदिर के पुजारी हैं। लाल नवीन किशोर ने बताया कि परिवार के मुखिया द्वारा ही आंखों में पट्टी बांध कर दुर्गा पूजा के समय भगवती का स्नान कराया जाता है और इसी स्थिति में पूजा की जाती है। पूर्वजों द्वारा छोड़े गये दस्तावेज में ही मंदिर में दस भुजी माता भवानी की मूर्ति होने की बात कही गई है। लेकिन किसी ने इसे खुली आंखों से नहीं देखा है। साल में एक बार नवरात्रि के समय जब विशेष पूजा अर्चना की जाती है। उस वक्त छूने से माता भवानी मूर्ति के दस भुजी होने की अनुभूति होती है। परंपरा को अबतक सभी निभाते आ रहे हैं। भगवान को स्नान कराने का यह परंपरा 1952 तक जारी था। शाहदेव परिवार के वंशज लाल मनीन्द्र नाथ शाहदेव द्वारा 1952 में अंतिम बार भगवान को स्नान कराया गया था। तब मंदिर में सप्तमी से नवमी तक पूजा होता था। 1952 के बाद सिर्फ नवमी के दिन दशहरा का पूजा होता है। परंपरा के अनुसार उस दिन महिष बलि भी दी जाती है। इस मंदिर की मान्यताएं भी काफी प्राचीन हैं। लोगों ने बताया कि मंदिर में अभी भी लोगों की मान्यताएं पूरी होती है।

प्राचीन और गौरवशाली परंपरा निभा रहा दुर्गा पूजा महादेव मंडा मुरहू
Published / 2026-10-16 20:56:12
प्राचीन और गौरवशाली परंपरा निभा रहा दुर्गा पूजा महादेव मंडा मुरहू

एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। दुर्गोत्सव की पावन बयार जिले भर में बह रही है। मां दुर्गा की पूजा-अर्चना को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। पूजा पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त माता रानी के दरबार में माथा टेककर सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। मुरहू में महादेव मंडा, मेन रोड, कुंजला, कोड़ाकेल, गनालोया, पांडू आदि कई जगहों पर पूजा होती है, परंतु महादेव मंडा मुरहू का दुर्गा पूजा ऐतिहासिक- सांस्कृतिक और गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है। मंदिर पर अंकित और पूर्व पुजारी स्वर्गीय पंडित सच्चिदानंद मिश्र के सान्निध्य से प्राप्त जानकारी के अनुसार समाजसेवी डॉ धर्मेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि अंग्रेजी काल से ही विषम परिस्थितियों के वावजूद सन् 1858  से यहां पूजा-आराधना पारंपरिक विधि-विधान के साथ करायी जा रही है। पंडित दिनेश झा मुख्य पुजारी पूजा करा रहे हैं। समिति के अध्यक्ष कुंदन गुप्ता की सक्रियता सामाजिक कार्यों में शुरू से ही है, लेकिन इस बार सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनाए जाने पर भक्ति चरम पर पहुंच गयी है। महामंत्री बलवीर प्रसाद और कोषाध्यक्ष मिथिलेश ठाकुर माता की पूजा कार्यक्रम को बखूबी संभाल रहे हैं। पूर्व अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया कि हर वर्ष की भांति सप्तमी अष्टमी और नवमी को शाम से मंदिर परिसर में फिल्में दिखायी जायेंगी। सामाजिक कार्यकर्ता विक्की गुप्ता, रणजीत गुप्ता, कृष्णा प्रसाद, रंजीत गुप्ता डल्लू, सुरेश प्रसाद, रामहरि साव, दीपक कुमार गुप्ता, सीताराम प्रसाद, दीपक सेन, सुरेश प्रसाद अकेला, सुबोध मुखिया, रोशन कुमार, मुरली गुप्ता, संतोष प्रसाद, बसंत ठाकुर अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। मेन रोड दुर्गा पूजा के अध्यक्ष रामा साव, दिलीप कुमार सहित ग्रामीण पूरे श्रद्धाभाव से पूजा में शामिल होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में निराश्रितों को कराया गया भोजन
Published / 2026-10-16 17:39:56
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में निराश्रितों को कराया गया भोजन

जरूरतमंदों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सान्निध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के द्वारा संचालित विगत 34 माह से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम रांची पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) में रह रहे 46 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा मे समर्पित सेवादारों को प्रतिदिन तीनों समय विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन बनवाकर भोजन खिलाया जा रहा है। सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 23 सितंबर से 16 अक्टूबर तक 24 दिनों में लगभग 5300 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादारों को भोजन कराया गया। उन्होंने बताया कि आश्रम के रसोई घर में पूरी स्वच्छता एवं सात्विकता के साथ विभिन्न प्रकार के पौष्टिक व्यंजन तैयार किया जाते हैं। प्रत्येक निराश्रित प्रभुजन को सम्मान पूर्वक, स्नेह और आत्मीयता के साथ भोजन कराया जाता है। इस सेवा में कई लोगों ने सहयोग देते हुए स्वयं भोजन सेवा का दायित्व निभाया, इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे  निराश्रितो, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के समान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इस आश्रम में सत्यनारायण पोद्दार चैरिटेबल ट्रस्ट, बाबूलाल प्रेमसंस ग्रुप का पूर्ण सहयोग निरंतर मिलता है। उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। जरूरतमंदों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची अराधना है। अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में चैरिटेबल ट्रस्ट के निदेशक पंकज पोद्दार, कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, मनीष साहू, संजय सर्राफ,विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, अंजनी अग्रवाल, विष्णु सोनी, सुरेश चौधरी, अरविंद अग्रवाल, सुरेश भगत, पवन पोद्दार सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में डांडिया-गरबा की धूम
Published / 2026-10-15 20:41:12
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में डांडिया-गरबा की धूम

शारदीय नवरात्र में भक्ति गीतों पर जमकर झूमीं महिलाएं टीम एबीएन, रांची। नवरात्रि के पावन अवसर पर एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं नृत्य श्री डांस स्टूडियो के संयुक्त तत्वावधान में रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में संगीतमय डांडिया एवं गरबा नृत्य कार्यक्रम किया गया। मौके पर पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय संगीत, पारंपरिक नृत्य और उत्साह के रंगों से सराबोर हो उठा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं एवं पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने डांडिया और गरबा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। डांस मास्टर श्रीराम सोनी एवं नृत्य श्री डांस स्टूडियो की निर्देशिका पिंकी सिंह के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने पारंपरिक नृत्य की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। रंग-बिरंगे परिधानों, डांडिया की खनक और गरबा की मनमोहक लय ने पूरे वातावरण को उत्सव मय बना दिया। डीजे पर बजते गरबा गीतों और नवरात्रि के लोकप्रिय संगीतमय गीतों की धुन पर महिलाएं एवं अन्य प्रतिभागी देर तक झूमते नजर आये। संगीत की लय पर डांडिया की ताल मिलाते प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। भजन, भक्तिमय संगीत और आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों ने धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति एवं लोक परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। श्री राधा-कृष्ण की मनमोहक सजावट के साथ श्री राधारानी को आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित किया गया। मंदिर की दिव्य छटा और भक्तिमय वातावरण ने आयोजन की सुंदरता को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं ने भक्ति, संगीत और नृत्य के इस अनूठे संगम का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, विजय अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, अरविंद अग्रवाल, दीपेश निराला, पवन पोद्दार, प्रवीण राजगढ़िया, राजेश कयाल, पुजारी अरविंद पांडे,ज्ञान शर्मा, संजय गोयल, शारदा पोद्दार ललित पोद्दार रेखा पोद्दार, सुनीता अग्रवाल, सीमा अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, सरोज पोद्दार, सहित सैकड़ों महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

भारतीय संस्कृति का प्रमुख आधार गायत्री मंत्र पर चर्चा
Published / 2026-10-14 20:12:03
भारतीय संस्कृति का प्रमुख आधार गायत्री मंत्र पर चर्चा

एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में  आज यज्ञीय अनुष्ठान विधान समय गायत्री परिवार साधकों के बीच पूज्यवर श्रीगुरुदेव के लिखित गायत्री महाविज्ञान पुस्तक युग साहित्य पर चर्चा हुई। तदनुसार गायत्री महामंत्र की उपासना,साधना महिमा- महात्म्य, अनुष्ठान, प्रभाव, स्तुति,आराधना, व्याहृति, विशेषताएं, इसका अवतार (जयन्ती विवरण), ऋषियों, महामानवों की उपास्य व वर्णित व गायी गयी महिमा, आध्यात्मिक उपचार आदि  वर्णन के सार संक्षेप में चर्चा की गयी। गायत्री मंत्र को भारतीय संस्कृति का सबसे श्रेष्ठ मंत्र माना गया है। इसकी श्रेष्ठता, महानता का परिचय इसी बात से मिल जाता है कि यह संसार का सबसे प्राचीन उपासना मंत्र है, जब भारतीय संस्कृति ही विश्व संस्कृति थी। गायत्री मंत्र के बारे में सामान्य जनों से लेकर प्रबुद्ध स्तर तक के लोगों में गहन जिज्ञासा का भाव पाया जाता है। पूज्य गुरुदेव ने जो स्वरूप बताया है,उस का संक्षिप्त रूप से यज्ञ पुरोहित ने बताया  कि गायत्री मंत्र का स्वरूप एक प्रणव और तीन व्याहृति सहित है- ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात। इसमें निहित मूल गायत्री के 3 चरण, 9 शब्द, 24 अक्षर हैं। मूल गायत्री मंत्र तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात इतना ही है। इसी को त्रिपदा (तीन पद वाली) गायत्री की संज्ञा दी गई है। गायत्री मंत्र के ये तीन चरण-1 तत्सवितुर्वरेण्य, 2। भर्गो देवस्य धीमहि, 3। धियो यो न: प्रचोदयात के रूप में हैं। इन्हीं तीन चरणों के अंतर्गत 9 शब्द एवं 24 अक्षर समाये हुए हैं। गायत्री उपासना साधना इसी समग्र मंत्र से की जाती है। गायत्री महाविज्ञान के माध्यम से परम पूज्य गुरुदेव ने इसके अर्थ भावार्थ बताकर अपने तपोबल व संकल्प बल से सबके लिए दीक्षा लेकर सर्व जनहिताय सरल सहज सुबोधगम्य बनाया है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार रांची के जय नारायण प्रसाद ने दी। 

आत्म विकास के लिए नवरात्र साधना अनुष्ठान स्वर्णिम अवसर है : यज्ञ पुरोहित
Published / 2026-10-13 19:09:55
आत्म विकास के लिए नवरात्र साधना अनुष्ठान स्वर्णिम अवसर है : यज्ञ पुरोहित

एबीएन सोशल डेस्क (रांची)। गायत्री परिवार शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा यज्ञीय अनुष्ठान विधान में दो कुंडीय यज्ञ आज किया गया। इस दौरान उपस्थित नवरात्र उपासक साधकों को नवरात्र महापर्व गायत्री साधना व यज्ञीय अनुष्ठान पर इसके नियम संयम और मंगलमय जीवन यापन की विशिष्ट तथ्यों पर ध्यान आकर्षित कर बताया कि वर्ष में दो बार आने वाला यह नवरात्र पर्व साधना आत्मिक शुद्धि का विशेष अवसर माना गया है। शारदीय नवरात्र एवं वसन्त नवरात्र दोनों ही काल उपासना,साधना के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं। इन दिनों में तन मन, विचार, व्यवहार, भावनाओं को बहुत शुद्ध, पवित्र, नियमित, सादगी,  सात्विक, संयमित और संतुलित करने का प्रबल प्रयास व पुरुषार्थ करना होता है। इससे शारीरिक, मानसिक व आत्मिक ऊर्जा बल वृद्धि होती है  इसमें 9 दिनों की तपश्चर्या अनुष्ठान से सूक्ष्म दिव्य अनुदानों की कृपा, वर्षा साधक पर होती है। इसमें साधक का व्यक्तित्व परिष्कृत होता है। इससे पाप-ताप, अभिशाप, दुख कष्ट का क्षरण, निवारण होता है, तृप्ति तुष्टि और शान्ति प्राप्त होती है। इसमें अनुष्ठान काल में कुछ अनिवार्य व विशिष्ट नियम संयम और आहार-विहार, मानसिक, शारीरिक रूप से परिष्कृत वातावरण का अनुसरण करना होता है।  परम पूज्य गुरुदेवश्री के अनुसार इस अवधि में आध्यात्मिक सत्संग, स्वाध्याय, दैनिक हवन-यज्ञ आयोजन क्रम जीवनचर्या को सार्थक बनाते हैं। फिर पावन बना दो हे देव सविता की स्तुति साथ एक पाली का अग्निहोत्र किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार रांची के जय नारायण प्रसाद ने दी।

बड़ा विशाल है अध्यात्म विज्ञान का क्षेत्र : जेएनपी
Published / 2026-10-12 20:35:34
बड़ा विशाल है अध्यात्म विज्ञान का क्षेत्र : जेएनपी

हवन-यज्ञ के दौरान संस्कार, गायत्री की दैनिक उपासना एवं नवरात्र में लघु अनुष्ठान साधना की महत्ता पर चर्चा हुई एबीएन सोशल डेस्क, रांची। गायत्री शक्तिपीठ धुर्वा सेक्टर टू में शारदीय नवरात्र साधना अनुष्ठान महापर्व में आज दूसरे दिन दो कुण्डीय यज्ञ व दो संस्कार कराये गये। एक नामकरण और दूसरा अन्नप्राशन संस्कार वरण किये गये। यज्ञीय विधान दौरान गायत्री की दैनिक उपासना एवं नवरात्र काल में लघु साधना अनुष्ठान पर चर्चा की गयी।कर्मकांड मध्य संस्कार प्रकरण संबंधित एक प्रज्ञागीत पुरोहित प्रमोद कुमार ने सुनाया। मौके पर बताया गया कि परमात्म सत्ता के अवतरण, गायत्री महामंत्र की साधना, यज्ञीय अनुष्ठान की महत्ता व आवश्यकता, सदुपयोगिता,  गुरुवर श्रीपूज्यवर वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा घोषित 21 सदी उज्जवल भविष्य, नारी सदी, युगनिर्माण योजना, विचार क्रांति अभियान विस्तार पर संक्षिप्त प्रकाश डाला गया। गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार की वाणी, लेखनी व  योजना में चर्चा कर जेएनपी ने बताया  कि अध्यात्म विज्ञान का क्षेत्र बड़ा विशाल है। इस क्षेत्र में गायत्री महामंत्र की महत्ता महिमा सर्वोपरि और सर्व हितकारी है। इस महामंत्र की उपासना सर्वश्रेष्ठ है। नवरात्र में इसकी विशिष्ट उपासना साधना अनुष्ठान एक स्वर्णिम अवसर  है। यज्ञीय विधान में यज्ञ की उष्मा का मनुष्य के अंत:करण पर, भूमि व मानवीय हृदय-अंतराल के सुसंस्कारों पर प्रभाव पर प्रकाश डालकर दो संस्कार नामकरण व अन्नप्राशन विधान किये गये। शिशु में  शिष्टता, शालीनता, स्फूर्ति,  तेजस्विता, कर्तव्यनिष्ठा  धर्मशील प्रगतिशीलता, सुपात्रता, अन्न के पूर्व संस्कार निवारण और सात्विक सुसंस्कारों की स्थापना पर प्रकाश डालकर संकल्प कराकर यज्ञीय विधान से कर्मकाण्ड कराया गया। यज्ञीय विधान के अंत में सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्जवल भविष्य की मंगलमय वंदना कर शान्ति-पाठ की गयी। उक्त जानकारी गायत्री परिवार, रांची के प्रमोद कुमार और जय नारायण प्रसाद ने दी।

अनिकेत सर्राफ को नंदकुमार मोदी खेलकूद पुरस्कार
Published / 2026-10-12 17:55:02
अनिकेत सर्राफ को नंदकुमार मोदी खेलकूद पुरस्कार

सृष्टि सर्राफ को प्रतिभा प्रोत्साहन सम्मान मिला टीम एबीएन, रांची। महाराजा अग्रसेन भवन रांची में अग्रवाल सभा की ओर से आयोजित श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव सह 50वें वार्षिकोत्सव समारोह में खेल एवं शिक्षा के क्षेत्र में तथा अन्य उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता संजय सर्राफ के पुत्र अनिकेत सर्राफ को बैडमिंटन में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित नंदकुमार मोदी खेलकूद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं, उनकी पुत्री सृष्टि सर्राफ को एमबीए की परीक्षा में विशिष्ट शैक्षणिक उपलब्धि के लिए प्रतिभा प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया। अनिकेत सर्राफ को खेल प्रतियोगिता में विशिष्ट उपलब्धि के लिए मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने डीएवी बैडमिंटन नेशनल स्पोर्ट्स चैंपियनशिप की अंडर-17 प्रतियोगिता में झारखंड एवं जोनल लेवल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन दिल्ली में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप प्रतियोगिता के लिए हुआ है। इसी समारोह में सृष्टि सर्राफ को एमबीए की परीक्षा में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रतिभा प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी ओर से यह सम्मान उनके पिता संजय सर्राफ ने ग्रहण किया। दोनों बच्चों की उपलब्धियों ने खेल एवं शिक्षा के क्षेत्र में परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के महत्व को रेखांकित किया। समारोह में चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक सोमानी, रांची की महापौर रोशनी खलखो, उपमहापौर नीरज कुमार, मुकेश मित्तल, अग्रवाल सभा के अध्यक्ष मनोज चौधरी, मंत्री निर्मल बुधिया, सज्जन पाड़िया, पवन पोद्दार, ललित पोद्दार, विनोद जैन, प्रमोद अग्रवाल, सहित अग्रवाल सभा के पूर्व अध्यक्षगण, सदस्यगण एवं नगर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। समारोह के माध्यम से प्रतिभाशाली युवाओं को प्रोत्साहित करने और समाज में शिक्षा, खेल तथा सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

समाजसेवी सत्संगी योगेन्द्र पोद्दार का निधन, शोक की लहर
Published / 2026-10-11 21:51:48
समाजसेवी सत्संगी योगेन्द्र पोद्दार का निधन, शोक की लहर

समाजसेवी सत्संगी योगेन्द्र पोद्दार का निधन, शोक की लहरटीम एबीएन, रांची । महर्षि मेंही आश्रम चुटिया रांची - खूंटी -मुरहू के संरक्षक महान समाजसेवी सत्संगी योगेन्द्र पोद्दार का निधन रविवार की शाम हो गया। उनके निधन से रांची -खूंटी -मुरहू के सत्संगी परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई। भागलपुर आश्रम के संतों सहित सभी ने अपूरणीय क्षति बताया, तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किया।भागलपुर आश्रम के स्वामी डॉ निर्मलानंद जी महाराज, स्वामी लक्ष्मण जी महाराज, स्वामी श्याम बाबा, स्वामी बालकृष्ण बाबा, अध्यक्ष राजकुमार, समाजसेवी डॉ धर्मेंद्र नाथ तिवारी, अजय कुमार जायसवाल,संजय सत्संगी, धर्म वीर, सूरजमल प्रसाद,सुबोध मुखिया, रामहरि साव,सूरजलाल, संतोष गुप्ता, हेमंत भगत, सुरेश पंडित, जगन्नाथ साव सहित अन्य सत्संगियों ने गहरी संवेदना व्यक्त किया है।

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