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15 अक्टूबर को रांची क्लब में सजेगी डांडिया की भव्य शाम
Published / 2026-10-09 21:52:58
15 अक्टूबर को रांची क्लब में सजेगी डांडिया की भव्य शाम

मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा का रंगीलो रास 3.0 को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस15 अक्टूबर को रांची क्लब में सजेगी डांडिया की भव्य शामप्रसिद्ध बैंड क्लासिको नैना रहेगा मुख्य आकर्षणटीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा द्वारा भव्य डांडिया महोत्सव रंगीलो रास 3.0 के आयोजन को लेकर आज होटल रामाडा, रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता के माध्यम से कार्यक्रम की रूपरेखा, विशेष आकर्षण, तैयारियों एवं आयोजन से जुड़ी जानकारी साझा की गयी।शाखा सचिव युवा मुकेश शर्मा ने कहा कि रंगीलो रास केवल एक डांडिया नाइट नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, परंपरा, उत्साह और सामूहिक सहभागिता का उत्सव है। इस आयोजन के माध्यम से शहरवासियों को एक ऐसा मंच प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है, जहां परिवार, युवा एवं समाज के सभी वर्ग एक साथ मिलकर उत्सव का आनंद उठा सकें।शाखा अध्यक्ष युवा विकास अग्रवाल ने कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा इस वर्ष रंगीलो रास 3.0 को और भी भव्य एवं यादगार स्वरूप में आयोजित करने जा रही है। यह कार्यक्रम 15 अक्टूबर 2026 को रांची क्लब, रांची में आयोजित होगा। आयोजन को लेकर सदस्यों एवं आयोजन समिति द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि शहरवासियों को मनोरंजन, संगीत, नृत्य और उत्सव का एक शानदार अनुभव प्राप्त हो सके।अध्यक्ष विकास अग्रवाल ने कहा कि मारवाड़ी युवा मंच का उद्देश्य सामाजिक दायित्वों के साथ-साथ युवाओं की प्रतिभा, उत्साह और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी प्रोत्साहित करना है। रंगीलो रास 3.0 इसी सोच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें परंपरा और आधुनिक मनोरंजन का सुंदर संगम देखने को मिलेगा।कार्यक्रम के प्रोजेक्ट चेयरपर्सन युवा विकास अग्रवाल ने आयोजन की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि इस वर्ष का आयोजन संगीत, डांडिया, आकर्षक व्यवस्थाओं एवं उत्साहपूर्ण माहौल के साथ एक भव्य अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रसिद्ध बैंड क्लासिको नैना की प्रस्तुति की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संगीत और डांडिया के संगम के साथ यह शाम उपस्थित लोगों के लिए यादगार बनने जा रही है।प्रोजेक्ट चेयरपर्सन युवा अमित जांगिड़ एवं युवा उमंग सुल्तानिया ने बताया कि आयोजन को सफल बनाने के लिए मंच के सदस्य एवं आयोजन समिति पूरी लगन और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम को आकर्षक एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने शहरवासियों, युवाओं एवं परिवारों से इस भव्य आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने और रंगीलो रास 3.0 को सफल बनाने की अपील की।मौके पर निवर्तमान अध्यक्ष युवा नीरज अग्रवाल एवं उपाध्यक्ष युवा निकुंज पोद्दार ने भी कार्यक्रम के संबंध में अपनी जानकारी एवं विचार साझा किये। उन्होंने आयोजन की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए सभी सदस्यों से एकजुट होकर कार्यक्रम को सफल बनाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया।प्रेस वार्ता के दौरान आयोजकों ने बताया कि रंगीलो रास 3.0 के माध्यम से रांचीवासियों को डांडिया एवं संगीत से सजी एक यादगार शाम देने का प्रयास किया जा रहा है। मंच की अपेक्षा है कि इस आयोजन में शहर के युवाओं एवं परिवारों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिलेगी।प्रेस वार्ता में निवर्तमान अध्यक्ष युवा नीरज अग्रवाल, उपाध्यक्ष युवा निकुंज पोद्दार, युवा श्रेय जालान, युवा सौरभ अग्रवाल, युवा अनुज अग्रवाल, युवा प्रवीण अग्रवाल, युवा उज्ज्वल मुरारका एवं युवा रौनक मोदी सहित मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा के अनेक सदस्य उपस्थित थे। सभी सदस्यों ने रंगीलो रास 3.0 के आयोजन को सफल बनाने के प्रति अपना उत्साह व्यक्त किया तथा कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं सफल आयोजन के लिए पूर्ण सहयोग देने का संकल्प लिया।मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा ने सभी शहरवासियों से अपील की कि वे इस भव्य डांडिया महोत्सव का हिस्सा बनें और भारतीय संस्कृति, संगीत एवं सामूहिक उत्सव की भावना को और मजबूत करें। उक्त जानकारी मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा के प्रवक्ता अमित शर्मा ने दी।कार्यक्रम का विवरणआयोजक: मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखाकार्यक्रम: रंगीलो रास 3.0 : ग्रैंड डांडिया नाइटदिनांक: 15 अक्टूबर 2026, गुरुवारस्थान: रांची क्लब, रांचीमुख्य आकर्षण: प्रसिद्ध बैंड क्लासिको नैना

महाराजा अग्रसेन जयंती 11 अक्टूबर को
Published / 2026-10-08 17:37:13
महाराजा अग्रसेन जयंती 11 अक्टूबर को

महाराजा अग्रसेन जयंती 11 अक्टूबर कोमहाराजा अग्रसेन समानता,सेवा और लोककल्याण के महान युगपुरुष : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महाराजा अग्रसेन जयंती अग्रवाल समाज के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, अर्थात शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मनाया जाता है। इस वर्ष महाराजा अग्रसेन जी की जयंती 11 अक्टूबर दिन रविवार को मनाई जाएगी। यह दिन महाराजा अग्रसेन के जन्मोत्सव के साथ-साथ उनके आदर्शों, सिद्धांतों और लोक कल्याणकारी विचारों को स्मरण करने का अवसर है।महाराजा अग्रसेन भारतीय परंपरा में एक आदर्श राजा, समाज-सुधारक, दानवीर और प्रजावत्सल शासक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनके जीवन से जुड़ी अनेक कथाएं एवं परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं। मान्यता है कि उन्होंने अग्रोहा को अपनी राजधानी बनाकर ऐसी शासन व्यवस्था विकसित की, जिसमें प्रजा के सुख, सम्मान, स्वावलंबन और समानता को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। अग्रोहा को आज भी अग्रवाल समाज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल के रूप में देखा जाता है।महाराजा अग्रसेन के आदर्शों में सबसे अधिक चर्चित एक ईंट और एक रुपया की परंपरा है। मान्यता के अनुसार अग्रोहा में जब कोई नया परिवार आकर बसता था, तो नगर का प्रत्येक परिवार उसे एक ईंट और एक रुपया देता था। ईंट से वह अपना घर बनाता और रुपये से व्यवसाय प्रारंभ करता। इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य नवागंतुक को सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भर बनाना था। यह विचार आज भी सामाजिक सहयोग, आर्थिक स्वावलंबन और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण माना जाता है। महाराजा अग्रसेन की शासन व्यवस्था में सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की भावना प्रमुख थी। उनसे जुड़ी परंपराओं में अग्रोहा को 18 जनपदों में विभाजित करने और 18 गोत्रों की परंपरा विकसित होने का उल्लेख मिलता है। यही कारण है कि अग्रवाल समाज में महाराजा अग्रसेन को सामाजिक संगठन और एकता का आधार स्तंभ माना जाता है।उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने समृद्धि को केवल व्यक्तिगत धन-संचय का साधन नहीं माना, बल्कि उसे समाज के कल्याण से जोड़ा। सेवा, सहयोग, परिश्रम, व्यापार में नैतिकता, जरूरतमंदों की सहायता, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता उनके आदर्शों के मूल तत्व माने जाते हैं। वर्तमान समय में जब समाज आर्थिक विषमता, बेरोजगारी और सामाजिक दूरी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब महाराजा अग्रसेन का सहयोग से स्वावलंबन का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।अग्रसेन जयंती पर देशभर में शोभायात्रा, पूजा-अर्चना, हवन, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विचार गोष्ठियां, चिकित्सा शिविर, रक्तदान, जरूरतमंदों को सहायता तथा समाजसेवा के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य केवल जयंती मनाना नहीं, बल्कि महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना है।आज आवश्यकता है कि हम महाराजा अग्रसेन के जीवन-संदेश को केवल उत्सव और समारोह तक सीमित न रखें। उनके बताए मार्ग पर चलते हुए समाज में सहयोग, सद्भाव, समानता, सेवा और स्वावलंबन की भावना को मजबूत करें। यही महाराजा अग्रसेन के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और उनकी जयंती मनाने की सार्थकता होगी।

सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को
Published / 2026-10-07 20:12:11
सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को

ज्ञात-अज्ञात पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का महापर्व : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि पितृपक्ष अपने समापन की ओर है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष को अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण, तर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना गया है। पितृपक्ष की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या कहलाती है। इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनायी जायेगी। अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात्रि से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर की रात्रि तक रहेगी। सर्वपितृ अमावस्या को पितृ विसर्जनी अमावस्या, महालय अमावस्या और सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन विशेष रूप से उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का अवसर है, जिनकी मृत्यु तिथि अथवा श्राद्ध की निर्धारित तिथि ज्ञात नहीं है। यदि किसी कारणवश पितृपक्ष की किसी तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका हो, तो सर्वपितृ अमावस्या को सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त जल, तिल, पिंड, अन्न आदि अर्पित किये जाते हैं। सर्वपितृ अमावस्या को पितरों की विदाई का दिन माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर पूर्वजों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। तर्पण के माध्यम से जल अर्पित करना और पिंडदान के माध्यम से अन्न का अर्पण करना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।इस दिन प्रात: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पितरों का स्मरण करना चाहिए। परिवार की परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध कर्म, तर्पण एवं पिंडदान किया जाता है। ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान, गौ सेवा तथा अन्य सेवा कार्य भी श्रद्धा के साथ किए जाते हैं। अनेक परिवार इस अवसर पर कौआ, गाय और अन्य जीवों को भोजन कराकर भी पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं। सर्वपितृ अमावस्या का उद्देश्य केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नयी पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और पूर्वजों के योगदान से जोड़ने का अवसर भी है। हमारे जीवन, परिवार और संस्कारों को आकार देने वाले पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करना भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा रही है। यह पर्व हमें श्रद्धा, सेवा, दान, कृतज्ञता और पारिवारिक संस्कारों का संदेश देता है। सर्वपितृ अमावस्या वास्तव में उन सभी पूर्वजों को स्मरण करने का दिन है, जिनके नाम और तिथियां समय के साथ विस्मृत हो गई हों। इसलिए यह तिथि पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के साथ-साथ परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। पितृपक्ष का यह अंतिम दिन हमें यह संदेश देता है कि अपने पूर्वजों को स्मरण करना केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और विरासत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना भी है।

बाल संरक्षण के क्षेत्र में सर्टिफिकेट कोर्स और शोध के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर और सी-लैब ने मिलाया हाथ
Published / 2026-10-07 20:07:52
बाल संरक्षण के क्षेत्र में सर्टिफिकेट कोर्स और शोध के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर और सी-लैब ने मिलाया हाथ

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर (एनएलयूजे) और इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन (आईसीपी) के सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) ने बाल संरक्षण के क्षेत्र में शोध, सर्टिफिकेट कोर्स और क्षमता निर्माण से जुड़ी पहल करने के लिए हाथ मिलाया है। इस सहयोग के दायरे में डिजिटल सुरक्षा, बाल अधिकार और मानवाधिकार समेत बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषय शामिल हैं। 21वीं सदी में कानून, तकनीक और समाज के बीच बढ़ती परस्पर निर्भरता को देखते हुए तथा बाल सुरक्षा और मानवाधिकार के क्षेत्र में मजबूत ज्ञान आधार, बेहतर अंतरविषयक शिक्षा एवं शोध और क्षमता निर्माण की आवश्यकता को समझते हुए, एनएलयू जोधपुर और सी-लैब ने इन क्षेत्रों में शोध, ज्ञान के विकास और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक संस्थागत सहयोग ढांचा तैयार करने पर सहमति जतायी है। इस समझौते के तहत सहयोग के पांच प्रमुख क्षेत्र तय किये गये हैं। पहला, अकादमिक और पेशेवर सर्टिफिकेट कोर्स तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना। दूसरा, शोध अध्ययन, प्रकाशन, ज्ञान संसाधन और अकादमिक या नीतिगत दृष्टि से उपयोगी अन्य सामग्री तैयार करना। तीसरा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, कानूनी पेशेवरों, शिक्षकों और नागरिक समाज संगठनों जैसे विभिन्न हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान पर काम करना। चौथा, छात्रों की भागीदारी और उन्हें व्यावहारिक अनुभव के जरिए सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है, जिसमें इंटर्नशिप, फील्ड आधारित लर्निंग और आउटरीच गतिविधियां शामिल हैं। पांचवां, सेमिनार, कार्यशालाएं, सम्मेलन, व्याख्यान और ज्ञान के आदान-प्रदान से जुड़ी अन्य अकादमिक गतिविधियां आयोजित करना है। इसके अलावा, एनएलयू जोधपुर और सी-लैब संयुक्त शोध प्रस्तावों और प्रकाशनों, विषय आधारित कार्य समूह बनाना, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, कार्यशालाओं और सेमिनारों तथा कानून, तकनीक, बाल सुरक्षा और मानवाधिकार से जुड़े ज्ञान भंडार और डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने के लिए भी सहयोग करेंगे। इस समझौते पर नयी दिल्ली में एनएलयू जोधपुर की कुलपति प्रो. (डॉ.) हरप्रीत कौर और इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के ट्रस्टी रजत कुमार ने हस्ताक्षर किये। मौके पर एनएलयू जोधपुर की कुलपति प्रो. (डॉ.) हरप्रीत कौर ने कहा कि सरकार के निर्देश के तहत हमने राजस्थान के एक गांव को गोद लिया और वहां महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों को समझने और उन पर काम करने का फैसला किया। हम कमजोर और असहाय महिलाओं और बुजुर्गों की देखभाल करते हैं, लेकिन इसके साथ ही हम बच्चों की भी देखभाल करेंगे। राजस्थान में बाल विवाह एक बड़ी समस्या है और यहां साक्षरता दर भी काफी कम है। उन्होंने कहा कि हम संस्थान की सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसलिए हमने उन कमजोर वर्गों की समस्याओं को समझने की कोशिश की, जिन्हें सहयोग की जरूरत है और जहां एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में हम मिलकर सहायता, प्रशिक्षण या शोध सामग्री उपलब्ध करा सकते हैं। सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) की प्रमुख प्रियंका ऋभु ने कहा कि एनएलयू जोधपुर जिस तरह का काम कर रहा है, वह इस समझौते के उद्देश्यों से पूरी तरह मेल खाता है। यह समझौता अकादमिक गतिविधियों, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण तथा शोध को शामिल करता है। खासकर बाल संरक्षण, मानवाधिकार और न्याय की अवधारणा से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण के संदर्भ में। हमने जिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनायी है, उनमें बच्चों की आॅनलाइन सुरक्षा और डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर तेजी से विकसित हो रही बहस भी शामिल है। इस खबर से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जीतेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

ऐसा संघर्ष कि रोम रोम रो पड़े...
Published / 2026-10-07 10:03:44
ऐसा संघर्ष कि रोम रोम रो पड़े...

ऐसा संघर्ष कि रोम रोम रो पड़े...एबीएन सोशल डेस्क। ये खबर भी आज सुर्खियों में है। तस्वीर में साड़ी पहनकर दौड़ती हुई महिला का नाम कविता देवी है। रामगढ़ के दुलमी की रहने वाली है। पति गुजरात में मजदूरी करते थे उनका निधन हो गया उसके बाद इसके कंधों पर बहुत बड़ा बोझ आ गया। ईट भट्ठे में मजदूरी कर अपने दो बच्चे और सास ससुर को किसी तरह पाल पोस रही है।सोचिए..आज के दौर में जहां जिम जाने का अलग कपड़ा, रात में सोने का नाइट सूट होता है लोगों के पास, वहीं ये बेचारी अपने भविष्य को किसी तरह सवारने के लिए कड़ी धूप में साड़ी में ही होमगार्ड बहाली का ट्रायल दे रही है और वो भी रेतीली जमीन पर खाली पैर। इस समाचार ने अंदर तक झकझोर दिया।जो भी हो इस बहन की हिम्मत और जज्बे की दाद देनी पड़ेगी कि इतनी कठिन परिस्थितियों में भी इनका हौसला बुलंद है। इस जुझारू मां ने 10 मिनट के दौड़ को 6 मिनट में ही पूरा कर खुद को साबित कर दिया है। भगवान से प्रार्थना है कि इस बहन की बहाली हो जाए। 

नवरात्रि पर प्रणामी मंदिर में सजेगा डांडिया-गरबा का रंग, भजन-संगीत और नृत्य बनेगा आकर्षण
Published / 2026-10-07 09:35:22
नवरात्रि पर प्रणामी मंदिर में सजेगा डांडिया-गरबा का रंग, भजन-संगीत और नृत्य बनेगा आकर्षण

नवरात्रि पर प्रणामी मंदिर में सजेगा डांडिया-गरबा का रंग, भजन-संगीत और नृत्य बनेगा आकर्षणएबीएन सोशल डेस्क। नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं नृत्य श्री डांस स्टूडियो के संयुक्त तत्वावधान में 15 अक्टूबर को पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में भव्य डांडिया एवं गरबा नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम अपराह्न 3 बजे से शाम 6:30 बजे तक चलेगा। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ एवं नृत्य श्री डांस स्टूडियो की निर्देशिका पिंकी सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि नवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह संगीतमय कार्यक्रम श्रद्धालुओं एवं शहरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। कार्यक्रम में पारंपरिक पोशाकों मे डांडिया एवं गरबा नृत्य के साथ भजन, भक्तिमय संगीत और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां लोगों को आध्यात्मिक आनंद के साथ उत्सव के उल्लास से जोड़ेंगी।उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नवरात्रि की धार्मिक भावना के अनुरूप भक्ति और संस्कृति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां कार्यक्रम की विशेषता रहेंगी। डांडिया-गरबा के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति, परंपरा और सामूहिक उत्सव की भावना को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।आयोजकों ने रांचीवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर नवरात्रि के इस पावन अवसर को भक्ति, संगीत और उल्लास के साथ मनाने की अपील की है। कार्यक्रम में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क रहेगा।

झुमरी तिलैया में राधे-राधे इवेंट्स डांडिया नाईट 2.0
Published / 2026-10-06 23:15:54
झुमरी तिलैया में राधे-राधे इवेंट्स डांडिया नाईट 2.0

झुमरी तिलैया में राधे-राधे इवेंट्स डांडिया नाईट 2.0कड़ी सुरक्षा के बीच होगा डांडिया नाइट्स का आयोजनआशिकी फेम राहुल राय करंगे शिरकतएबीएन न्यूज नेटवर्क, झुमरी तिलैया। राधे-राधे इवेंट्स द्वारा आगामी 14 अक्टूबर 2026, को एक भव्य "डांडिया नाइट 2.0 2026" का आयोजन किया जा रहा है। यह शानदार आयोजन दीवान गार्डन, तिलैया थाना के पीछे, झुमरी तिलैया में किया जाएगा, जिसकी शुरुआत शाम 5 बजे से होगी। कार्यक्रम को  लेकर जायका हिटलर में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।इस आयोजन के आयोजक मोनू कुमार पांडेय, राज कुमार नायक, विक्की कुमार और स्वपन विश्वास ने बताया कि इस खास मौके पर बॉलीवुड अभिनेता एवं आशिकी फेम राहुल रॉय सेलिब्रिटी गेस्ट के रूप में उपस्थित रहेंगे। साथ ही बैंगलोर से डीजे पाएल , कोलकाता से डीजे विजय और कोलकाता से एंकर तृषा अपनी शानदार प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगाएंगे।कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण बिंदुउन्होंने बताया कि कार्यक्रमनके दौरान बेस्ट कपल अवॉर्ड, बेस्ट डांसर अवॉर्ड, बेस्ट ड्रेस अवॉर्ड, लकी ड्रॉ - गोल्ड कॉइन, फ्री डांस वर्कशॉप, फ्री डांडिया स्टिक, आकर्षक सेल्फी बूथ, प्रोफेशनल मेल एवं फीमेल बाउंसर, बॉलंटियर्स, ट्रैफिक गार्ड और फूड स्टॉल की व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच इस कार्यक्रम का आयोजन होगा। राधे-राधे इवेंट्स द्वारा आयोजित यह डांडिया नाइट 2.0 2026 शहरवासियों के लिए मनोरंजन, संगीत, गरबा और डांडिया से भरपूर एक यादगार शाम साबित होगी। आयोजकों ने सभी शहरवासियों से अपील की है कि वे इस भव्य आयोजन में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की।

रांची : श्री श्याम मंदिर में रही इंदिरा एकादशी की धूम
Published / 2026-10-06 22:06:03
रांची : श्री श्याम मंदिर में रही इंदिरा एकादशी की धूम

रांची : श्री श्याम मंदिर में रही इंदिरा एकादशी की धूमटीम एबीएन, रांची। अग्रेसन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 06 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी उत्सव अत्यंत भक्तिमय वातावरण में श्रद्धा सहित आयोजित किया गया। प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर लाल पीला गुलाब, बेल, रजनीगंधा, गेंदा व तुलसीदल से श्री श्याम प्रभु का अनुपम श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर में विराजमान बजरंगबली एवम शिव परिवार का इस अवसर पर विशेष शृंगार किया गया। रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु के जयकारों के बीच पावन ज्योत प्रज्वलित कर मंदिर में आये हुए भक्तगण कतारबद्ध हो पावन ज्योत में आहुति प्रदान कर रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने गणेश वंदना के साथ संगीतमय एवं भक्तिमय संकीर्तन का शुभारंभ किया। कभी तेरा दामन न छोड़ेंगे हम, दरबार है निराला खाटू के श्याम का, किसने किया श्रृंगार ओ सांवरे, लो आ गया अब तो श्याम मैं शरण तेरी, मोर छड़ी लहराई रे रसिया ओ सांवरे इत्यादि भजनों की धुन पर भक्तगण श्याम गंगा में गोते लगाते रहे। इस अवसर पर श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान-फल-मेवा एवं रबड़ी का भोग अर्पण किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में गोपी किशन ढांढनीयां, चंद्र प्रकाश बागला, रमेश सारस्वत, धीरज बंका, अभिषेक डालमिया, बालकिशन परसरामपुरिया, अरुण धनुका, जीतेश अग्रवाल, नितेश केजरीवाल, विकाश पाडिया, अजय साबू, नितेश लाखोटिया का सहयोग रहा। श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

लावारिस असहाय को मिला अपना घर आश्रम का सहारा
Published / 2026-10-06 21:19:46
लावारिस असहाय को मिला अपना घर आश्रम का सहारा

लावारिस मिले असहाय को मिला अपना घर आश्रम का सहाराचांदनी चौक से रेस्क्यू कर कराया गया उपचार, आश्रम में निराश्रितों की संख्या 46 हुईएबीएन सोशल डेस्क। परमहंस डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के मार्गदर्शन एवं सान्निध्य में संचालित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, रांची के अंतर्गत श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम, पुंदाग में मंदबुद्धि, दिव्यांग, असहाय एवं निराश्रित लोगों की नि:शुल्क सेवा जनवरी 2024 से निरंतर की जा रही है। इसी सेवा अभियान के क्रम में सोमवार को एक असहाय व्यक्ति को रेस्क्यू कर सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) में आश्रय दिया गया। आश्रम के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि आश्रम की सेवा टीम को सूचना मिली कि कांके रोड स्थित चांदनी चौक के समीप एक असहाय व्यक्ति लावारिस अवस्था में भटक रहा है। वह अत्यंत अस्वच्छ अवस्था में था तथा अपने संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी देने की स्थिति में नहीं था। सूचना मिलते ही आश्रम की टीम ने तत्परता दिखाते हुए उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर आश्रम पहुंचाया।रेस्क्यू अभियान में आश्रम के सेवा साथी मुकुंद यादव, सत्यम कुमार एवं सूरज प्रमाणिक शामिल रहे। आश्रम लाने के बाद व्यक्ति की अस्पताल में चिकित्सकीय जांच करायी गयी। पूछताछ के दौरान उसके नाम, पते एवं परिवार के संबंध में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। उसकी स्मरणशक्ति भी काफी कमजोर पाई गई। आश्रम समिति ने उसकी देखभाल एवं पहचान के लिए उसका नाम बृज किशोर रखा है।आश्रम के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि आश्रम की टीम को सूचना मिलने पर समय-समय पर विभिन्न स्थानों से असहाय एवं निराश्रित लोगों को रेस्क्यू कर आश्रम में लाया जाता है। पिछले एक सप्ताह में ही तीन निराश्रितों को अलग-अलग स्थानों से लाकर आश्रम में आश्रय दिया गया है। इस नये व्यक्ति के आने के साथ आश्रम में रहने वाले निराश्रितों की संख्या बढ़कर 46 हो गयी है। उन्होंने कहा कि गुरुजी सदानंद जी महाराज के सहयोग एवं प्रेरणा से आश्रम में रहने वाले सभी निराश्रितों को परिवार जैसा वातावरण देने का प्रयास किया जाता है। उनके भोजन, चिकित्सा, स्वच्छता, सुरक्षा एवं दैनिक आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। मानव सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। समाज के लोगों से भी अपील की गयी कि कहीं कोई असहाय अथवा निराश्रित व्यक्ति दिखाई दे तो इसकी सूचना आश्रम को दें, ताकि उसे समय पर सुरक्षित आश्रय और आवश्यक सेवा उपलब्ध करायी जा सके।

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