टीम एबीएन, रांची। बजरंग दल झारखंड के आह्वान पर बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी की राष्ट्रीय साहसिक यात्रा के लिए झारखंड के विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं का जत्था मंगलवार को हटिया रेलवे स्टेशन से जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हुआ। रांची महानगर, रांची ग्रामीण, रामगढ़, बोकारो महानगर, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गढ़वा, हजारीबाग एवं कोडरमा सहित कुल 11 जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हुए। हटिया स्टेशन पर आयोजित विदाई कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत सेवा प्रमुख अजय अग्रवाल, बजरंग दल के प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, प्रांत मातृशक्ति प्रमुख अनीमा पाण्डेय, विभाग संयोजक अंकित सिंह, अमर प्रसाद, रेणु अग्रवाल एवं रोबीन कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों ने यात्रियों का स्वागत किया। इस अवसर पर लगभग 250 शिवभक्त श्रद्धालुओं को भगवा अंगवस्त्र प्रदान किया गया तथा तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया गया। इसके बाद अतिथियों ने भगवा ध्वज दिखाकर श्रद्धालुओं के जत्थे को जम्मू-कश्मीर के भगवती नगर बेस कैंप के लिए रवाना किया। बजरंग दल के प्रांत संयोजक एवं यात्रा प्रमुख रंगनाथ महतो ने कहा कि बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी यात्रा वर्ष 2005 से निरंतर आयोजित की जा रही राष्ट्रीय साहसिक एवं धार्मिक यात्रा है। श्रावण मास में देशभर से शिवभक्त इस यात्रा में शामिल होकर बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी के दर्शन करते हैं। इस वर्ष झारखंड से लगभग 250 श्रद्धालु यात्रा पर जा रहे हैं, जिसमें महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में रहने वाले हिंदू समाज के साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश भी देती है। पुंछ जिले में आयोजित होने वाली यह यात्रा भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का माध्यम बनी है। रंगनाथ महतो ने कहा कि यात्रा के माध्यम से श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत से परिचित होते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसी यात्राएँ देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने, राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा, बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी जैसी यात्राएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता को मजबूत करती हैं। निस्संदेह ऐसी यात्राएं विकसित भारत की आधारशिला रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी। यात्रा का नेतृत्व बजरंग दल झारखंड के प्रदेश संयोजक सह यात्रा प्रमुख रंगनाथ महतो, सामाजिक समरसता सह प्रमुख मनोज चंद्रवंशी, दुगार्वाहिनी प्रांत संयोजिका कीर्ति गौरव, महाविद्यालय छात्र सह प्रमुख अमर प्रसाद, प्रांत सह संयोजिका गंगा कुमारी, विभाग संयोजक मुकेश सिंह, रांची महानगर सह मंत्री योगेश खेड़वाल, अनिल तिवारी, विश्वरंजन कुमार, संदीप गुप्ता एवं बिनोद विश्वकर्मा सहित अन्य कार्यकर्ता कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को विदा करने के अवसर पर प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत सेवा प्रमुख अजय अग्रवाल, रांची विभाग संयोजक अंकित सिंह, प्रांत मातृशक्ति प्रमुख अनीमा पाण्डेय, रांची जिला मंत्री लोकनाथ शाहदेव एवं विजयनाथ महतो सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। उक्त जानकारी झारखंड बजरंग दल के प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो ने दी।
टीम एबीएन, रांची। संस्कार भारती, रांची महानगर की ओर से सावन मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कार भारती रांची महानगर के अध्यक्ष रामानुज पाठक एवं शास्त्रीय संगीत साधिका लिली मुखर्जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके पश्चात सुजाता मजूमदार एवं उनकी टीम ने ध्येय गीत प्रस्तुत किया। सुजाता मजूमदार ने कजरी गीतों की श्रृंखला में कैसे खेलन जइबु सावन में कजरिया, बदरिया घेरे आइल ननदी प्रस्तुत कर सावन की लोकपरंपरा को जीवंत कर दिया। लिली मुखर्जी ने सावन झर लागे रे धीरे-धीरे, दादुर मोर पपीहा बोले, पायल मोरा बाजे रे धीरे-धीरे कजरी प्रस्तुत की। अवनिन्दर सिंह ने मोरे राजा केवड़िया खोल, रस के बूंद पड़ी गाकर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया। शाश्वती मुखर्जी ने बादल घिर आए ओ मेरे गुंइयां, जियरा उड़ा जाए तथा इंदु पाराशर ने भी कजरी की प्रस्तुति दी। प्रसिद्ध नृत्यांगना गार्गी शोम ने नृत्य के माध्यम से शिव वंदना एवं सावन की मनोहारी प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की। कार्यक्रम में आयोजित कवि सम्मेलन में सुरिंदर कौर नीलम ने रिमझिम की फुहार, छम-छम बूंद की झंकार, सोंधी माटी का दरबार, सावन आया है सुनाकर सावन की सोंधी अनुभूति को शब्द दिये। आशुतोष प्रसाद ने मेरी कल्पनाओं के क्षितिज पर उगता हुआ वह सूर्य है, जिसकी रोशनी में हर कविता स्वयं को अमर समझने लगती है प्रस्तुत की। कल्पना कुमारी ने देशभक्ति की रचना हाथ में तिरंगा लिए सीमा पर वही तैनात रहते हैं, वतन के वास्ते यारों बड़े जज्बात रखते हैं सुनाई। राकेश रमण ने सावन के रंग में रंगे शहर का चित्र अपनी कविता में उकेरा। सदानंद यादव ने चलो चलो देवघर नगरिया हो भैया, बाबा दुवरिया ना, संगीता यादव ने आया आषाढ़ का महीना, भींगा धरती का कोना-कोना तथा संगीता सहाय ने छज्जे पर मोर बैठे, पपीहा पीहू-पीहू बोले प्रस्तुत किया। किरण सिंह ने मां-बेटी के भावनात्मक रिश्ते को केंद्र में रखते हुए सुनो बिटिया, तुम्हें देख देखूंगी अपना बचपन, तुम्हारी खुशी में जी लूंगी अपना सावन सुनाया। विजय खोवाला ने ताली बजा के नम: शिवाय, हम भी कहें और तुम भी कहो भजन के माध्यम से भक्ति का वातावरण बनाया। खुशबू बरनवाल ने इतिहास पर सवाल उठाती रचना जो हमने इतिहास बनाया, असल बात को छुपा लिया और कायर को ही छाप दिया प्रस्तुत की। रजनी शर्मा ने सावन में बोले छै कोयलिया, त जियरा में हुक उठे छै सुनाया, जबकि अनुराधा अनु ने अपनी गजल प्रस्तुत की। इस अवसर पर संस्कार भारती रांची महानगर की महामंत्री शशिकला पौराणिक, कवयित्री कविता रानी सिंह, दीपमाला, मिथिलेश पाठक, कुमकुम गौड़, अशोक गौड़, वीणा चंद्रा, मधुरेश चंद्रा, शिवपूजन पाठक, कामिनी पाठक, अनूप मजूमदार तथा वर्षा ऋतुराज सहित अनेक साहित्य एवं कला प्रेमी उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन शशिकला पौराणिक ने किया। राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
स्वतंत्रता दिवस पर संजय सर्राफ ने किया रक्तदान टीम एबीएन, रांची। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में अग्रवाल सभा एवं अग्रवाल युवा सभा द्वारा आयोजित मेगा रक्तदान शिविर में सामाजिक कार्यकर्ता एवं झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने रक्तदान कर समाजसेवा और मानवता का प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने स्वयं रक्तदान करने के साथ उपस्थित लोगों से भी अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की। इस अवसर पर संजय सर्राफ ने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन देने का पुण्य कार्य है। दुर्घटना, गंभीर बीमारी, प्रसव अथवा विभिन्न चिकित्सकीय परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता पड़ने पर रक्तदाता का योगदान किसी के लिए जीवन की नई आशा बन सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं सक्षम लोगों को नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए, ताकि अस्पतालों और ब्लड बैंकों में जरूरतमंद मरीजों के लिए पर्याप्त रक्त उपलब्ध रह सके। संजय सर्राफ ने बताया कि वे अब तक 40 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि नियमित रक्तदान से उन्हें आत्मिक संतोष मिलता है और यह भावना और अधिक लोगों को प्रेरित करती है कि वे भी मानव सेवा के इस अभियान से जुड़ें। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रप्रेम, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर है। ऐसे अवसर पर रक्तदान कर किसी अनजान व्यक्ति के जीवन की रक्षा करना सच्चे अर्थों में मानवता और राष्ट्रसेवा है। उन्होंने अग्रवाल सभा के इस मेगा रक्तदान शिविर की सराहना करते हुए सभी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त किया और समाज के युवाओं से विशेष रूप से रक्तदान के लिए आगे आने का आह्वान किया।
नाग पंचमी भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण, जीव-दया, भय पर विजय और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो प्रतिवर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त दिन सोमवार को मनायी गयी। पंचांग के अनुसार इस दिन श्रावण शुक्ल पंचमी है और यह पर्व भगवान शिव की आराधना के साथ भी विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। नाग पंचमी का मूल उद्देश्य नाग देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना, प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना तथा परिवार की सुख-शांति एवं मंगल की कामना करना है। भारतीय संस्कृति में नागों को केवल सर्प के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति की महत्वपूर्ण शक्ति और देवत्व के प्रतीक के रूप में देखा गया है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग तथा भगवान विष्णु की शेषनाग पर शयन मुद्रा नागों की धार्मिक महत्ता को दशार्ती है। नाग पंचमी से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। महाभारत से जुड़ी प्रसिद्ध कथा के अनुसार राजा परीक्षित की मृत्यु सर्पदंश से होने के बाद उनके पुत्र जनमेजय ने नागों के विनाश के लिए विशाल सर्पसत्र यज्ञ कराया। यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग आहुति के रूप में गिरने लगे। तब आस्तिक मुनि ने हस्तक्षेप कर राजा जनमेजय से यज्ञ रोकने का आग्रह किया। उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए सर्पसत्र समाप्त किया गया और नागों की रक्षा हुई। इसी प्रसंग को नाग पंचमी की परंपरा से जोड़ा जाता है। एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग से संबंधित है। मान्यता है कि कालिया नाग के विष से यमुना का जल दूषित हो गया था। बाल कृष्ण ने यमुना में प्रवेश कर कालिया नाग को परास्त किया और उसके फणों पर नृत्य किया। अंतत: कालिया ने श्रीकृष्ण के समक्ष समर्पण किया और यमुना छोड़कर चला गया। यह कथा बुराई पर अच्छाई की विजय और प्रकृति की शुद्धता का संदेश देती है। पूजन की परंपरा और महत्ता नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या नाग मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। दूध, जल, अक्षत, पुष्प, चंदन, हल्दी, फल और मिठाई आदि अर्पित किये जाते हैं। अनेक स्थानों पर भगवान शिव का जलाभिषेक कर नाग देवता की पूजा की जाती है। व्रत रखने और नाग देवता के मंत्रों का जाप करने की भी परंपरा है। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन एवं सह-अस्तित्व का संदेश देता है। नाग खेतों और पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए नाग पंचमी हमें प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, संरक्षण और सम्मान की भावना अपनाने की प्रेरणा देती है। नाग पंचमी केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण, जीव-दया, भय पर विजय और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। इस अवसर पर हमें जीवित सांपों को पकड़कर या उन्हें परेशान कर पूजा करने के बजाय उनके प्राकृतिक आवास और जीवन की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश नाग पंचमी की परंपरा को और अधिक सार्थक बनाता है।नाग पंचमी का संदेश स्पष्ट है प्रकृति का सम्मान करें, जीव-जंतुओं के प्रति करुणा रखें और आस्था को मानवता एवं पर्यावरण संरक्षण से जोड़ें।
महाराजा अग्रसेन भवन में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मेगा ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन, 177 लोगों ने किया रक्तदानटीम एबीएन, रांची। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अग्रवाल सभा एवं अग्रवाल युवा सभा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित मेगा ब्लड डोनेशन कैंप महाराजा अग्रसेन भवन, अप्पर बाजार के परिसर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अग्रवाल सभा के अध्यक्ष मनोज चौधरी के कर कमलों ने झंडोत्तोलन किया। वहां उपस्थित सदस्यों ने महाराजा अग्रसेन एवं स्वतंत्रता सेनानियों को पुष्पांजलि एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर राष्ट्रगान गाया। प्रवक्ता अमित बजाज ने बताया कि अग्रवाल युवा सभा, रांची के 5 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने एवं स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर अग्रवाल सभा एवं अग्रवाल युवा सभा के संयुक्त तत्वधान में अग्रसेन भवन के सभागार में चौथे मेगा ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया। रक्तदान शिविर का उद्घाटन डॉ मृत्युंजय सरावगी ने महाराजा अग्रसेन जी एवं स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलित कर किया। सुबह 11 से संध्या 5 बजे तक चली इस मेगा रक्तदान शिविर में 177 लोगों ने रक्तदान किया। संपूर्ण परिसर तिरंगे के तीनों रंग से सुसज्जित था एवं साज-सज्जा का अवलोकन कर सभी आगंतुक देश प्रेम और समर्पण की भावना से भावाकुल हो गये। अग्रवाल सभा के अध्यक्ष मनोज चौधरी एवं अग्रवाल युवा सभा के अध्यक्ष रोहित सरावगी ने इस अवसर पर हेल्थ प्वाइंट हॉस्पिटल के ब्लड बैंक, बारियातू रोड से आए सभी स्वास्थ्य कर्मियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। ब्लड डोनेशन कैंप कार्यक्रम में दोनों संस्थाओं के सदस्यों एवं उनके साथियों ने रक्तदान किया तथा सभी रक्त दाताओं को प्रस्सति प्रमाण पत्र, प्रतीक चिह्न एवं हेलमेट देकर सम्मानित कर उनका आभार व्यक्त किया। रक्तदान प्रभारी श्रेय जालान, तरुण सराफ एवं आलोक बजाज ने पूरी व्यवस्था को बहुत ही सुसज्जित तरीके से सजाया। इस अवसर पर दोनों संस्थाओं के पदाधिकारीगण, कार्यकारिणीगण एवं अन्य सदस्यगण भारी मात्रा में उपस्थित थे। उक्त जानकारी अग्रवाल युवा सभा, रांची के प्रवक्ता अमित बजाज ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर के प्रांगण में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास एवं देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। समारोह का शुभारंभ सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गायन से हुआ। इसके बाद ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल ने राष्ट्रीय ध्वजारोहण किया तथा उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रगान गाकर देश के वीर शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया।इस अवसर पर राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल ने स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की आजादी असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने सभी से राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं एवं उपस्थित लोगों के बीच मिठाइयों और टॉफियों का वितरण किया गया। साथ ही 80 किलो केसरिया खीर का प्रसाद भी वितरित किया गया। समारोह में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के निराश्रितों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। उनके लिए विभिन्न मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिससे वातावरण आनंद एवं आत्मीयता से भर गया। इस अवसर पर पुंदाग थाना के थाना प्रभारी संजीव कुमार, निर्मल कुमार, उपेंद्र कुमार,ट्रस्ट के सचिव मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, मधुसूदन जाजोदिया, सुरेश अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी, संजय सर्राफ, दीपेश निराला, सुनील पोद्दार, सुरेश चौधरी, अंजनी अग्रवाल, पवन पोद्दार, पुजारी अरविंद पांडे, ज्ञान प्रकाश शर्मा सहित बड़ी संख्या में ट्रस्ट के सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। समारोह ने देशभक्ति के साथ सेवा, समरसता और मानवीय संवेदना का संदेश दिया।
विप्र फाउंडेशन झारखंड जोन 6 के महिला उद्यमी प्रदर्शनी सह तीज महोत्सव का भव्य आयोजन टीम एबीएन, रांची। 15 अगस्त 2026 को विप्र फाउंडेशन झारखंड जोन 6 के तत्वावधान में आज प्रात: 10 बजे से महिला उद्यमी प्रदर्शनी सह तीज महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत फीता काट कर किया गया उद्घाटन उसके उपरांत दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना से हुआ एवं अतिथियों को बुके व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। मारवाड़ी ब्राह्मण सभा,रांची के अध्यक्ष अशोक पुरोहित, मंत्री किशन लाल शर्मा, विप्र फाउंडेशन झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष उअ जयप्रकाश शर्मा एवं झारखंड प्रदेश संगठन महासचिव प्रदीप कुमार शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस प्रदर्शनी में मारवाड़ी ब्राह्मण समाज की महिला उद्यमियों एवं अन्य ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए 10 से 12 स्टॉल लगाये, जिनमें राखी, इमिटेशन ज्वेलरी, परिधान तथा व्यंजन शामिल थे। जबकि मंच संचालन तनुजा शर्मा ने किया। मौके पर इन अतिथियों ने विचार व्यक्त किये जयप्रकाश शर्मा (प्रदेश अध्यक्ष, विप्र फाउंडेशन) हमें नारी शक्ति पर गर्व है। विप्र फाउंडेशन अब महिला उद्यमियों के स्वरोजगार को वैश्विक मंच दिलाने के लिए तत्पर है। मुख्य अतिथि अशोक पुरोहित (अध्यक्ष, मारवाड़ी ब्राह्मण सभा) नारी शक्ति असीम है। महिलाओं का इस तरह व्यावसायिक परिवेश में आत्मनिर्भर होना समाज के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। विशिष्ठ अतिथि किशन लाल शर्मा (मंत्री मारवाड़ी ब्राह्मण सभा) हर बड़े परिवर्तन की शुरूआत छोटे प्रयासों से होती है। संस्था आगे भी ऐसे आयोजनों में हरसंभव सहयोग करेगी। (स्थानीय पार्षद) पार्षद ने भी कार्यक्रम में शिरकत कर महिला उद्यमियों के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम कार्यक्रम में आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के परिणाम इस प्रकार रहे, प्रतियोगिता, प्रथम स्थान, द्वितीय स्थान, तृतीय स्थान नृत्य (जूनियर) आध्या शर्मा, नियति शर्मा, श्रद्धा भारद्वाज, नृत्य (सीनियर) सुमन शर्मा , रश्मि शर्मा , सोनल शर्मा, सावन क्वीन प्रतियोगिता विजेता (सावन क्वीन) सुमन शर्मा फर्स्ट रनर अप: रेखा शर्मा सेकंड रनर अप: तनुजा शर्मा कार्यक्रम को मूर्त रूप देने में रेखा शर्मा और उमंग जोशी का विशेष योगदान रहा। अंत में धन्यवाद ज्ञापन झारखंड प्रदेश संगठन महासचिव प्रदीप कुमार शर्मा ने किया। समारोह को सफल बनाने में अमित मनी शर्मा, जिलाध्यक्ष रमेश चंद शर्मा, अमर शर्मा, राहुल वशिष्ठ, संजीव शर्मा, श्याम सुंदर गोवला, अंजू शर्मा, सुमन शर्मा, प्रभा शर्मा, पिंकी शर्मा, तनुज शर्मा, कविता सारस्वत, रश्मि सारस्वत, नीतू शर्मा तथा पायल शर्मा, श्वेता भारद्वाज का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। (यह जानकारी विप्र फाउंडेशन के अमित मणि शर्मा द्वारा दी गई।)
टीम एबीएन, रांची। गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा परिसर में आज श्रावण मास शुक्ल पक्ष तृतीया को गायत्री परिवार समूह प्रतिनिधित्व में महिला मंडल सदस्यों ने तीसरे पहर में पूजा अर्चन कर बड़े उत्साह उल्लास व धूमधाम से श्रावण मास तीज महोत्सव मनाया। सर्व प्रथम गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ, गुरु-ईश ध्यान वंदना, श्रीगणेश, गौरी माता और भोले शिवशंकर को स्मरण, नमन-वंदन, दीप ज्योति प्रज्ज्वलित कर जयघोष कर सावन महोत्सव शुरू किया गया। इस अवसर पर पीठासीन व्यवस्थापक जटाशंकर झा, सहायक पीएन तिवारी, शारदा प्रसाद, जिला समन्वयक जय नारायण प्रसाद, साधक उमेश कुमार सहित मंजू शर्मा, मंजू रानी, शशिकिरण बहिन ने दीप पूजन व स्वस्तिवाचन पाठ में शामिल रहे। व्यवस्था टीम सदस्यों ने गुरुमाता भगवती देवी का जन्म शताब्दी वर्ष सह दिव्य अखंड ज्योति शताब्दी वर्ष पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। महिलामंडल प्रतिनिधि समूह ने श्रावण महोत्सव की हरियाली, गौरी माता पार्वती और भोले शिवशंकर भगवान का मिलन, प्राकृतिक सौंदर्य श्रृंगार साधन, नारी जागरण, ऊर्जा संरक्षण, पारम्परिक, सांस्कृतिक, श्रावणी हरियाली तथा प्राकृतिक सामाजिक विकास एकता,हरा हरा दृश्य वस्त्राभूषण, साज सज्जा, सोलह श्रृंगार परस्पर एकता भाव व महोत्सव पर अपने अपने विचार व्यक्त किए। फिर भजन-कीर्तन में कुछ फिल्मी गीत संगीत के धून, सावन में बरसे बदरिया, मेरी मां की दूवरिया, आप भी निराले बाबा, रूप भी निराले सोहे, सावन का महीना पवन करे शोर जैसे कई गीत गायन किए ।उसके बाद नृत्य कला, चेयर रेस, कप गेम्स आदि कई खेल का आयोजन कर आनन्द मनाए। सबने एक दूसरे का स्वागत अभिनन्दन किया। संध्याकालीन वंदन आरती व शान्ति-पाठ उपरान्त प्रसाद पैकेट व चाय वितरण कर सबको बधाई और स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्जवल भविष्य की मंगलमय कामना कर समापन किया गया। मंडलीय प्रतिनिधि ने गुरुमाता जी के जन्म शताब्दी की अनुयाज प्रक्रिया अभियान अंतर्गत आगामी 6 सितंबर 26 रविवार को नारी उत्कर्ष , उत्थान के उपलक्ष्य में नारी जागरण सह सशक्तिकरण अंतर्गत शक्तिपीठ सेक्टर टू में ही रांची जिलांतर्गत स्थानीय शहर व प्रखंड स्तरीय मातृ वंदन सम्मेलन समारोह आयोजन की घोषणा की गई। कार्यक्रम में अन्य प्रखंड सहित करीब 40 महिला सदस्यों ने भागीदारी कर सफल बनाया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के मीडिया सहायक जय नारायण प्रसाद और जिला महिला युवा समन्वयक सुलोचना शाहदेव ने दी।
शिव-पार्वती के पावन मिलन,सुहाग और प्रकृति के श्रृंगार का अनुपम पर्व : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सावन मास की हरियाली, रिमझिम फुहारों और प्रकृति के मनोहारी श्रृंगार के बीच मनाया जाने वाला हरियाली तीज हिंदू धर्म का प्रमुख एवं अत्यंत लोकप्रिय पर्व है। इस वर्ष हरियाली तीज का पर्व शनिवार 15 अगस्त को मनाया जायेगा। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम से प्रारंभ होकर 15 अगस्त की शाम तक रहेगी। हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट श्रद्धा, निष्ठा और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी पावन प्रसंग की स्मृति में हरियाली तीज का व्रत और पूजन किया जाता है। यह पर्व दांपत्य प्रेम, समर्पण, निष्ठा और पारिवारिक सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है। हरियाली तीज विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व है। महिलाएं पति की दीघार्यु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहे एवं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना से इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करती हैं। व्रत के अवसर पर महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती तथा गणेशजी की पूजा-अर्चना करती हैं। इस पर्व की सबसे सुंदर विशेषताओं में हरा रंग, मेहंदी, श्रृंगार और झूले प्रमुख हैं। सावन में चारों ओर फैली हरियाली के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। महिलाएं हरे रंग के परिधान, चूड़ियां और आभूषण धारण कर सोलह श्रृंगार करती हैं। हाथों में मेहंदी रचाई जाती है तथा पेड़ों पर झूले डालकर तीज के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। हरा रंग प्रकृति, नवजीवन, समृद्धि और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है हरियाली तीज केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकपरंपरा और नारी शक्ति का उत्सव भी है। इस अवसर पर मायके से बेटियों को सिंधारा भेजने की परंपरा है, जिसमें वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, मिठाइयां, मेहंदी और अन्य उपहार दिए जाते हैं। इससे पारिवारिक स्नेह और रिश्तों की मधुरता और मजबूत होती है। यह पर्व प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देता है। सावन की हरियाली मनुष्य और प्रकृति के गहरे संबंध की याद दिलाती है। इसलिए हरियाली तीज के अवसर पर पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प लेना पर्व की भावना को और सार्थक बनाता है। इस प्रकार हरियाली तीज भक्ति, प्रेम, दांपत्य सौहार्द, नारी सम्मान, लोकसंस्कृति और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम है। शिव-पार्वती के आदर्श दांपत्य से प्रेरणा लेने वाला यह पर्व भारतीय जीवन-मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का संदेश देता है।
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