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हृदय और मन का परिवर्तन, उत्सव का सबसे बड़ा क्षण : महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद
Published / 2025-01-25 17:41:16
हृदय और मन का परिवर्तन, उत्सव का सबसे बड़ा क्षण : महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के कडरू स्थित सिस्टर्स आफ लिटिल फ्लावर (बेथानी धर्मसंघ) की 01 धर्मबहन ने 50वर्षीय एवं 06 धर्मबहनों ने 25वर्षीय अपने समर्पित जीवन का जंयती मनाया। इस जंयती का धन्यवादी मिस्सा बलिदान रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद द्वारा उनके प्रोविंशियल हाऊस कडरू में अर्पित किया गया।  आज बेथानी सिस्टर्स  की 01 धर्मबहन सिस्टर लूसी सेवरीन डिसूजा  ने 50 वर्षीय जयंती एवं 06 धर्मबहनों सिस्टर अग्नेस टेटे, सिस्टर अनीता सोरेन, सिस्टर अनुज्योति, सिस्टर मोनिका डुंगडुंग, सिस्टर रंजना एवं सिस्टर रोजलिन क्लारा ने 25वर्षीय  जंयती मनायी। इस जुबिली अवसर पर धन्यवादी पवित्र मिस्सा बलिदान का आयोजन रहा, जिसकी अगुवाई रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने की। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने अपने धर्मोपदेश में कहा कि हमारे जीवन में विभिन्न उपलक्ष्य का जयंती आनंद का कारण बनता है किन्तु उस से भी बढ़ कर हमारे जीवन में हृदय एवं मन का परिवर्तन सबसे बड़ा आनंद का क्षण होता है। चूंकि आज कैथोलिक कलीसिया प्रेरित संत पौलुस के मन परिवर्तन का पर्व मानती है इसलिए संत पौलुस के मन परिवर्तन का उदाहरण देते हुए रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने सभी जुबिली मानने वाली धर्मबहनों को घमंड से नम्र बनने, आज्ञाकारी बनने एवं सीखने की की इच्छा रखने का संदेश भी दिया।  मिस्सा के पश्चात सभी जुबिली मानने वाली धर्मबहनों के आदर में एक छोटा सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर जुबिली मनाने वाली धर्मबहनों को उनके समर्पित जीवन जीने, सेवा का भाव रखने आदि के लिए विशेष धन्यवाद दिया गया। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने भी बेथानी धर्मबहनों के जुबली के उपलक्ष्य में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया साथ ही आगे भी अच्छे एवं स्वास्थ्य जीवन की कामना करते हुए उन्हें उनके जंयती के अवसर पर बधाईयां एवं शुभकामनाएं देते हुए ईश्वर की आशीष के लिए विशेष प्रार्थना किया। महाधर्माध्यक्ष ने जुबिली मानने वाले सभी धर्मबहनों चादर ओढ़ा कर सम्मानित भी किया।  बेथानी धर्मबहनों के जुबिली के अवसर पर रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद,  संत अल्बर्ट कॉलेज रांची के निर्देशक फाङ्म अजय कुमार खलखो, फाङ्म जॉन क्रस्टा, फाङ्म रोनाल्ड, फाङ्म रेजीनाल्ड, डोरंडा के पल्ली पुरोहित फाङ्म पीटर सांगा, फाङ्म आंद्रियास, फाङ्म ब्राइट, महाधर्माध्यक्ष के सचिव फाङ्म असीम मिंज अन्य पुरोहितगण, बेथानी धर्मसंघ की प्रोविंशियल सिङ्म जेसी मारिया एवं विभिन्न स्थानों में कार्यरत बेथानी धर्मसंघ की धर्मबहनें उपस्थित रहे।

बाल विवाह व बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने वाले मोबाइल वैन को डीएम ने दिखायी हरी झंडी
Published / 2025-01-24 18:06:36
बाल विवाह व बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने वाले मोबाइल वैन को डीएम ने दिखायी हरी झंडी

एबीएन सोशल डेस्क। बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने और भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले को बाल विवाह और बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए गैरसरकारी संगठन काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान के जागरूकता वाहन को बदायूं की जिलाधिकारी निधि श्रीवास्तव ने कलेक्ट्रेट से रवाना किया।काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान (केएसएसवीएस) का यह मोबाइल वाहन जिले की 50 से भी ज्यादा ग्राम पंचायतों में घूम-घूम कर बाल विवाह और बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता का प्रसार करेगा। केएसएसवीएस बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश के 416 जिलों में जमीनी स्तर पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है।गांवों और कस्बों में घूम-घूम कर जागरूकता के प्रसार के लिए नारों और पोस्टरों से सुसज्जित इस मोबाइल वैन में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए पहले से रिकार्ड किए गए संदेश होंगे जो ग्रामीणों को सुनाए जाएंगे। लोगों के किसी सवाल का जवाब देने के लिए वैन में एक सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता भी होगा।इस मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कि देश से बाल विवाह की बुराई समाप्त करने के लिए भारत सरकार ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया है। इसके तहत सभी हितधारकों को साथ लेते हुए ग्राम पंचायतों, स्कूलों और प्रखंडों में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया जायेगा और उन्हें बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई जायेगी। प्रशासन सभी के सहयोग से बदायूं जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मौके पर आकांक्षा समिति की सचिव रूबी शर्मा, एसडीएम कल्पना जायसवाल, एडीएम नम्रता सिंह, बाल कल्याण समिति की सदस्य सविता मालपाणी व नंद किशोर पाठक,  जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार, जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी रवि कुमार व चाइल्डलाइन समन्वयक कमल शर्मा व केएसएसवीएस के समस्त कार्यकर्ता मौजूद थे।केएसएसवीएस सामुदायिक केंद्रों, स्कूलों और यहां तक कि मंदिरों, मस्जिदों, गिरिजाघरों जैसे धार्मिक स्थलों में बाल विवाह और बाल मजदूरी के खिलाफ जागरूकता का प्रसार कर रहा है। पोस्टरों और बाल विवाह एवं बाल श्रम के खिलाफ लोगों को शपथ दिलाने के अलावा इस गैरसरकारी संगठन ने लोगों को बाल विवाह के सामाजिक, कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।इस मौके पर काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान की सचिव मीना सिंह ने कहा कि जागरूकता के प्रसार की दिशा में हम जो भी कदम उठाते हैं, वह बाल विवाह मुक्त भारत की दिशा में उठाया गया कदम है। हम भारत सरकार, सरकारी विभागों और स्थानीय प्रशासन के आभारी हैं जहां हर कोई मिलकर साझा प्रयासों से जिले से जल्द से जल्द बच्चों के प्रति अपराधों के खात्मे के लिए दृढ़संकल्पित है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी के तौर पर हम बाल विवाह और बाल मजदूरी के खात्मे के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस मुहिम में सभी हितधारकों के साथ आने से हम अब अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आश्वस्त हैं। बताते चलें कि काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान ने वर्ष 2024-2025 में ही 300 परिवारों से यह हलफनामा लिया है कि वे अपने बच्चों का विवाह उनकी कानूनी रूप से वैध उम्र से पहले नहीं करेंगे।जमीनी स्तर पर इन प्रयासों का स्वागत करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संयोजक रवि कांत ने कहा- बाल विवाह की बुराई की जड़ें हमारे समाज में गहरे तक पसरी हुई हैं और इसके खात्मे के लिए एक पारिस्थितिकी या परिवेश के अभाव की वजह से यह अब तक जारी है। हालांकि, अब चीजें तेजी से बदल रही हैं। भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के साथ ही अब सभी हितधारक एक साझा लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एकजुट होकर साझे प्रयास कर रहे हैं। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि किस तरह अब हम इस मुद्दे पर हम नीतिगत स्तर से लेकर जमीनी स्तर पर जागरूकता और संवाद के माध्यम से सामूहिक रूप से इस चुनौती का मुकाबला कर रहे हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग ने किया राजू कुमार का दाह संस्कार
Published / 2025-01-23 16:34:21
विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग ने किया राजू कुमार का दाह संस्कार

जिसका कोई नहीं उसका भगवान साथ देते हैंएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग द्वारा हरमू मुक्तिधाम में राजू कुमार का दाह संस्कार किया गया। चौवन वर्षीय राजू कुमार जो जनजातीय समाज से था, उसकी मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हो गयी। राजू कुमार पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से राधारानी कुष्ठ आश्रम में रहते थे।बीमारी के कारण घरवालों ने उन्हे त्याग दिया था और उन्होंने घर को वह खुद भी भूल चुके थे कि वह कहां से है, ठीक होने के बाद वह वहीं आश्रम में रहकर कुष्ठ रोगियों की सेवा किया करते थे। उनका आगे पीछे कोई नहीं था। विश्व हिन्दू परिषद झारखंड के सेवा विभाग के विश्व हिन्दू परिषद झारखंड के प्रांतीय सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल ने उनके विधिवत दाह संस्कार करने का बीड़ा उठाया।नारनौली अग्रवाल समाज के संतोष अग्रवाल जिन्होने अबतक 50 से अधिक अनाथ शवों का दाह संस्कार किया है। अपने अनुज राजेश अग्रवाल के साथ उनको मुखाग्नि दी और चिता को सजाया विजय मिंज ने। प्रकाश बजाज, ओम प्रकाश सर्राफ, जितेन्द्र महतो कांके, अभय मिंज, आशीष मिंज, मनोज मुंडा काटमकुल्ली पिठूरिया, उत्तम साहू राहे, महेन्द्र लोहरा जगन्नाथपुर, विहिप के प्रान्तीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह मुंडा, विहिप रांची महानगर के कैलाश केसरी, सेवा विभाग के प्रांतीय सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल, महेन्द्र अरोड़ा गुरुद्वारा, चन्द्रभान तनेजा राधाकृष्ण मंदिर (बिरला मैदान) रातू रोड़ सूरज झंडई नानक सेवा जत्था सभी ने अंतिम संस्कार के समय उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित की और उनकी सद्गति के लिए प्रार्थना की। विहिप सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि रांची महानगर में किसी भी अनाथ के दाह संस्कार का दायित्व सेवा विभाग विश्व हिन्दू परिषद झारखंड की रांची महानगर शाखा ने उठाया हुआ है। पिछले 10 वर्षों में एक हजार से अधिक मृतकों को विधिवत सनातन रीति से पंचतत्व में विलीन कराया गया है, किसी ने सच ही कहा है जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है। मृतक राजू कुमार के शव को पंचतत्व में विलीन हेतु पूरा समाज उठ खड़ा हुआ।

गायत्री प्रज्ञापीठ बस स्टैंड धूर्वा में हुई साधक-शिष्य मंडल की गोष्ठी
Published / 2025-01-19 20:19:44
गायत्री प्रज्ञापीठ बस स्टैंड धूर्वा में हुई साधक-शिष्य मंडल की गोष्ठी

एबीएन सोशल डेस्क। मकर संक्रांति महापर्व निजी तौर पर मनाये जाने के बाद गायत्री परिवार साधक-शिष्यों और भाई-बहनों ने समूह प्रतिनिधित्व में गायत्री प्रज्ञापीठ बस स्टैंड धूर्वा में 19 जनवरी रविवार को एक सामूहिक गोष्ठी के साथ मकर संक्रांति मनाया। दही चूड़ा गुड़ तिलकूट प्रसाद का समूह आनन्द लिया। इसमें रांची जिला समन्वय समिति के नवगठित सदस्यगण तथा धूर्वा क्षेत्र के प्रज्ञा मंडल, महिला मंडल स्वाध्याय मंडल ने शान्तिकुञ्ज द्वारा प्रतिपादित ज्ञानघट, धर्म घट,ज्ञान रथ, अंशदान, यज्ञीय अनुष्ठान, संस्कार परम्परा, झोला पुस्तकालय, प्रभात फेरी, बाल संस्कारशाला, वृक्षारोपण, नशा मुक्ति आन्दोलन, सामूहिक साधना, मंत्र-जप, मंत्र लेखन, दीवार लेखन, स्वच्छता अभियान, सामूहिक स्वाध्याय व संस्कृति ज्ञान परीक्षा, स्टीकर साटन व अभियान, मासिक पत्रिका-अखंड ज्योति, युग निर्माण योजना, प्रज्ञा अभियान पाक्षिक, युग शक्ति युग प्रवाह और संगठन की रीति नीति, एक मासीय युग शिल्पी शिविर सत्र, नौ दिवसीय सत्र की रचनात्मक क्रिया-कलाप आदि अनेक विषयों पर विचार-विमर्श व चर्चाएं हुईं। नये पुराने मंडलों के सकारात्मक व सक्रिय कार्यक्रम आयोजनों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही रांची शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हुए दिव्य ज्योति व शक्तिकलश रथ-दर्शन भ्रमण यात्रा प्रखंडीय स्तर पर अनुकुल व सकारात्मक समीक्षात्मक विश्लेषण कर बहुत आश्चर्यजनक खुशी जाहिर की गयी। मुख्य ट्रस्टी मनोजकुमार राय, जेएनपी, राजू कुमार सहित, रामवरण सिंह और शोभा दीदी, संजू सरस्वती दीदी, कौशल्या दीदी, विमला दीदी ने शान्तिकुञ्ज की योजनात्मक कार्यक्रम सूत्रों पर  विचार व्यक्त किये। अगले कार्यक्रम की रूप रेखा का शान्तिकुञ्ज मुख्यालय के निर्देशानुसार करने का आश्वासन दिया गया। इस बीच पीछले माह दिवंगत हुए वरिष्ठ साधक एवं  शक्तिपीठ सेक्टर टू के पूर्व व्यवस्थापक व कर्मठ परिजन स्वर्गीय सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा की दिवंगत आत्मा को शत-शत नमन कर दो मिनट का मौन धारण कर शोक व दुख व्यक्त किया गया। कार्यक्रम गुरु-ईश ध्यान नमन वंदन व, प्रज्ञागीत गायन कर शुभारंभ किया गया। साथ ही इस गोष्ठी में चान्हों प्रखंड के समन्वयक नन्दकिशोर साहु ने भागीदारी कर अपने प्रखंड की प्रगतिशील कार्य की चर्चा कर आगे के कार्यक्रम का आमंत्रण दिया और कहा कि समयानुसार नये जनों को जगाते और जोड़ते जाने के अभियान को जारी रखना है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के मनोज कुमार राय, मुख्य ट्रस्टी, गायत्री प्रज्ञापीठ मंदिर एवं जय नारायण प्रसाद, रांची ने दी।

गायत्री परिवार ने दीपयज्ञ विधान से जन्मदिवस संस्कार कराया
Published / 2025-01-18 20:39:52
गायत्री परिवार ने दीपयज्ञ विधान से जन्मदिवस संस्कार कराया

यशस्वी जीवन व उज्जवल भविष्य के वैदिक मंत्रों से आशीर्वचन दिये गयेटीम एबीएन, रांची। गायत्री तीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धुर्वा में महिला मंडल प्रतिनिधियों ने मंजू पाण्डे परिवार में अपने पौत्र शिशु का जन्मदिवस संस्कार दीपयज्ञ में वैदिक विधान से मनाया। इस अवसर पर शक्तिपीठ पुजारी रणवीर कुमार ने जन्मोत्सव मनाने की खूबियों, विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जीवन में जन्मोत्सव भी एक व्रत धारण की तरह है। व्रतों के बंधन में बंधा हुआ व्यक्ति किसी उच्च लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सकने में समर्थ हो सकता है। कहा कि शुभ अवसरों पर भावनात्मक वातावरण में देवताओं की उपस्थिति में, अग्नि की साक्षी में व्रत धारण करना चाहिए और उनका पालन करने के लिए साहस एकत्रित करने चाहिए। डफली पर प्रज्ञागीत गायन कर किया गया और थाली में दीपक सजा कर प्रज्ज्वलित कर पंच तत्वों का पूजन-अर्चन सहित अखंड दीपक की तरह हमें अखंड पात्रता प्राप्त हो, हमारी निष्ठा ऊर्ध्वमुखी हो, हम जीवन को कल्याणकारी मार्ग पर चलायेंगे जैसे सूत्रों से संकल्प कराकर दीपयज्ञ विधान हुआ। दीपयज्ञ विधान के उपरांत जन्मदिवस संस्कार कराया गया। साथ ही बताया कि अपनी कमियों, खामियों व बुराइयों को संकल्पपूर्वक त्यागने के लिए जन्मदिवस का शुभ अवसर बहुत ही उत्तम है। अंत में आत्मबोध व वैदिक मंत्रों से आशीर्वचन पाठ कर शिशु के यशस्वी जीवन व उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना पुष्प वर्षा से सभी ने उनके मंगलमय जीवन की जयघोष किया।  उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।

बच्चों की शिक्षा और बाल विवाह पर रोक को लेकर दो संगठनों ने मिलाया हाथ
Published / 2025-01-18 18:06:29
बच्चों की शिक्षा और बाल विवाह पर रोक को लेकर दो संगठनों ने मिलाया हाथ

नीति आयोग और एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) ने 73 जिलों में बच्चों की शिक्षा व 15,000 गांवों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने के लिए मिलाया हाथ देश के 12 राज्यों के 73 आकांक्षी जिलों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा व सशक्तीकरण सुनिश्चित करने के लिए नीति आयोग करेगा एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन का सहयोग स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चों को शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों से और हाशिये के परिवारों को जनकल्याण योजनाओं से जोड़ा जायेगा  इस साझेदारी का उद्देश्य बाल संरक्षण समितियों को मजबूत करना, आंगनवाड़ी कार्यकतार्ओं के क्षमता निर्माण में सहयोग और समुदायों की लामबंदी  एवीए बच्चों की सुरक्षा और बाल अधिकारों के संरक्षण लिए देश के 416 जिलों में काम कर रहे 200 से अधिक गैरसरकारी संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है  एबीएन सोशल डेस्क। नीति आयोग और एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) ने देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तीकरण और अगले एक साल में देश के 104 प्रखंडों के 15,000 गांवों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने के लिए हाथ मिलाया है। इस आशय के मंतव्य पत्र (एसओआई) पर नई दिल्ली में दस्तखत किये गये। इसके तहत अगले दो सालों में 73 जिलों के आकांक्षी प्रखंडों के इन गांवों के आर्थिक रूप से बेहद कमजोर उन परिवारों के बच्चे जो शोषण, उत्पीड़न, बाल मजदूरी या बाल विवाह दृष्टि से संवेदनशील हैं, के लिए सुरक्षित बाल ग्राम के रूप में एक सुरक्षा घेरा विकसित किया जायेगा। यह पहल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गये आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) के साथ एकरूपता और तालमेल में है, जिसका लक्ष्य देश भर के 112 सबसे अविकसित जिलों में रूपांतरकारी बदलाव लाना है। दो-वर्षीय एसओआई के तहत देश के सबसे अविकसित व संवेदनशील इलाकों में बच्चियों के सशक्तीकरण और शिक्षा की पारिस्थितिकी को मजबूत करने के लिए एक समग्र और व्यापक रणनीति पर अमल किया जायेगा। बाल विवाह और बच्चों की ट्रैफिकिंग की निगरानी और रोकथाम के लिए सभी लक्षित गांवों में पंचायत स्तर पर लोगों की आवाजाही और विवाहों के ब्योरे दर्ज करने के लिए रजिस्टर रखे जायेंगे। स्कूल नहीं जा पाने वाले बच्चों को शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों से जोड़ा जायेगा, जबकि हाशिये के व्यक्तियों और परिवारों को सरकारी जनकल्याण योजनाओं से जोड़ा जायेगा। एवीए बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए देश के 26 राज्यों के 416 जिलों में काम कर रहे 200 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी) का सहयोगी है जिसने समुदायों को शोषण और बाल विवाह से मुक्ति दिलाने के लिए एक समग्र रणनीतिक ढांचा विकसित किया है। एवीए इस रणनीतिक ढांचे पर अमल करते हुए सुरक्षित बाल ग्रामों की स्थापना करेगा। इस अवसर पर एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा कि आज समाज के सबसे कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हम गर्व और कृतज्ञता महसूस कर रहे हैं। साझा प्रयासों से हमारा लक्ष्य 2025 के अंत तक इन प्रखंडों को बाल विवाह मुक्त बनाना और दूसरों के लिए एक मिसाल कायम करना है। यह साझेदारी प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान के अधिकार की रक्षा करने और बाल विवाह जैसे अपराधों के खात्मे की हमारी साझा प्रतिबद्धता का सबूत है। सरकारी निकायों, समुदायों और नागरिक समाज संगठनों राज्य, जिला और प्रखंड जैसे हर स्तरों पर एकजुट होकर काम करने और साझा प्रयासों से सही मायनों में बच्चों की सुरक्षा का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।नीति आयोग जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ सहयोग करेगा, जबकि एवीए संवेदनशील परिवारों की पहचान करने, समय पर हस्तक्षेप के लिए जिला प्रशासन, राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ सहयोग से वास्तविक समय में कठिनाई का सामना कर रहे प्रत्येक बच्चे और परिवार को राहत की दिशा में प्रगति पर नजर रखने के लिए मजबूत डेटाबेस तैयार करेगा। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन चयनित जिलों/ब्लॉकों में बाल मजदूरी, बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल विवाह सहित बच्चों की शिक्षा और संरक्षण से जुड़े प्रमुख संकेतकों पर जिला प्रशासन के साथ मिलकर करीबी सहयोग से काम करेगा। इस पहल में एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के सहयोगी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की भी भागीदारी होगी जिसकी साइबर जगत में बच्चों के आनलाइन यौन शोषण और ट्रैफिकिंग की निगरानी व रोकथाम में विशेषज्ञता है। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन शोध, प्रशिक्षण व निगरानी जैसे रणनीतिक हस्तक्षेपों के जरिए इस परियोजना में मदद करेगा।

एक वर्ष तक ज्योति कलश रथ 42 दिन रांची जिला के प्रखंडों में भ्रमण कर खूंटी जिला के लिए आज रवाना
Published / 2025-01-17 20:26:14
एक वर्ष तक ज्योति कलश रथ 42 दिन रांची जिला के प्रखंडों में भ्रमण कर खूंटी जिला के लिए आज रवाना

घर-घर अलख जगाने की प्रक्रिया दीप यज्ञ माध्यम : जय नारायण प्रसादटीम एबीएन, रांची। अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज तत्वावधान में संचालित दिव्य ज्योति कलश रथ-दर्शन, नमन-वंदन व अभिनंदन की भ्रमण यात्रा रांची जिला के 18 प्रखंडों, कई पंचायत व ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी हुई। सभी स्थलों में शानदार,जोरदार व भव्यरूप से स्वागत अभिनंदन श्रद्धावान, निष्ठावान साधक-शिष्यों एवं ग्रामीण क्षेत्र में श्रद्धालु भक्त जनों ने बड़े उल्लास, उत्साहपूर्वक और कई स्थलों में बैंड बाजे सहित धूमधाम से किया। सुबह से दोपहर तक दर्शन व पूजन-अर्चन, महाकाल का संदेश और संध्याकाल में गायत्री महा दीपयज्ञ विधान से कार्यक्रम आयोजन हुए। इस बीच सभी प्रखंड समन्वय समिति के सदस्यगण एवं गांव के जनमन, गणमान्य जनों, प्रतिनिधि गणों ने श्रद्धा-सम्मान व सहयोग समर्थन किये। दीप यज्ञ कार्यक्रम बीच टीम नायक व  साधकों ने शान्तिकुञ्ज के संदेश व प्रज्ञागीत सुनाए और गुरुवर श्री आचार्य वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन की शताब्दी एवं श्रीगुरुमाता परम पूज्या भगवती देवी की जन्म शताब्दी वर्ष तथा विचार क्रांति अभियान के अनेक संकल्प सूत्रों और आयोजन संदर्भित उज्जवल भविष्य की योजनाओं पर चर्चाएं की। घर-घर अलख जगाने की प्रक्रिया दीप यज्ञ माध्यम जय नारायण प्रसाद ने बताया शान्तिकुञ्ज का संदेश सहित बताया कि जन जागरण के लिए, सभ्य मानव जीवन एवं उत्कर्ष के लिए जागिए, जगाइए और जुड़िए जोड़िए का अभियान हरिद्वार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज से चल पड़ा है। इन दिनों सबसे बड़ा और सबसे  आवश्यक कार्य विचार क्रांति अभियान का विस्तार व व्यापक आयोजन करना है। अवांछनीयता के विपरीत और मानवीय गरिमा के अनुरूप मयार्दाओं का पालन, वर्जनाओं का अनुशासन व अनुपालन आवश्यक है। नवयुग के अवतरण का और सतयुग की वापसी का यही एक मात्र उपाय है। संसार के समस्त भू-भाग व क्षेत्रीय इकाई में लागू होना चाहिए। इस माध्यम से हर एक को लाभान्वित होने का प्रयास करना है। आज इसी धर्म धारणा को महाकाल श्रीप्रज्ञावतार ने प्राणवान और ऊर्जावान, भावनाशील, निष्ठावान समयदानी आध्यात्मिक जन-समूह और प्रतिभावानों को पुकारा है, आमंत्रण दिया है। रांची गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू से 42 दिन गायत्री परिवार की ज्योति कलश रथ-दर्शन भ्रमण यात्रा रांची शहर व ग्रामीण क्षेत्रों से सफल सुफल और  मंगलमय यात्रा से लौटकर आज उपजोन समन्वयक महोदय डी एस पंडितजी के सानिध्य व नेतृत्व में दिव्य ज्योति-कलश रथ का पूजन-अर्चन कर खूंटी जिला के लिए रवाना की गयी। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रदेश प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद और डी एस पंडित ने दी।

महाकुंभ एक दिव्य आस्था का पर्व
Published / 2025-01-16 20:30:32
महाकुंभ एक दिव्य आस्था का पर्व

महाकुंभ भारतीय सभ्यता, संस्कृति और एकता का अद्भुत प्रतीक : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महाकुंभ भारत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक धार्मिक मेलों में से एक है, जो हर बार 12 वर्ष में एक विशेष स्थान पर आयोजित होता है। यह मेला हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें लाखों लोग धार्मिक स्नान के लिए एकत्रित होते हैं। महाकुंभ का आयोजन उन चार प्रमुख स्थानों पर होता है—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक—जिन्हें कुंभ स्थल के रूप में जाना जाता है। इन स्थानों का चयन भारतीय धार्मिक मान्यताओं और पुरानी कथाओं पर आधारित है। महाकुंभ का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है और इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता अत्यधिक है। किवदंती है कि देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन से अमृत कुंभ की प्राप्ति हुई थी और इस अमृत कलश को लेकर देवता और राक्षसों के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान अमृत से भरे कुंभ कलश को लेकर चार स्थानों पर बूंदें गिर पायी- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इन्हीं स्थानों पर हर बार 12 वर्ष के अंतराल में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। महाकुंभ का आयोजन एक अद्भुत धार्मिक उत्सव है, जहां लाखों श्रद्धालु पुण्य की प्राप्ति के लिए गंगा, यमुना, सरस्वती, या अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। इसे एक पुण्य अवसर माना जाता है, जहां एक जीवन में एक बार भाग लेना अनिवार्य माना जाता है। कुंभ स्नान से यह विश्वास होता है कि व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाकुंभ में धार्मिक अनुष्ठान, साधु-संतों की भव्य उपस्थिति, अखाड़ों के शाही स्नान और भव्य श्रद्धा आयोजन होते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। महाकुंभ के समय पूरे देश से लोग एकत्रित होते हैं, और यह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक माना जाता है। महाकुंभ की विशेषता यह है कि यह केवल धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, और एकता का अद्भुत प्रतीक भी है। यह पर्व हमें जीवन के उच्चतम आदर्शों की ओर प्रेरित करता है और समाज मे सामाजिक और सांस्कृतिक सौहार्द की भावना को प्रगाढ़ करता है। इस साल के प्रयागराज पूर्ण महाकुंभ का विशेष महत्व है क्योंकि यह 144 वर्षों के बाद हो रहा है।

महाकुंभ का महास्नान : हर घंटे तीन लाख भक्तों ने लगायी डुबकी
Published / 2025-01-15 18:32:55
महाकुंभ का महास्नान : हर घंटे तीन लाख भक्तों ने लगायी डुबकी

संगम नोज पर हर घंटे में तीन लाख से अधिक ने लगायी डुबकीएबीएन सेंट्रल डेस्क। सुबह के करीब छह बजे थे। अमृत स्नान के लिए सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़े के संत संगम नोज के लिए निकल चुके थे। यह वह वक्त था, जब 80 लाख के करीब श्रद्धालु मेले में प्रवेश कर चुके थे और संगम अपर मार्ग होते हुए तेजी से संगम की ओर बढ़ रहे थे। हालात यह हुए कि संगम नोज टवर नंबर एक से 100 मीटर पहले ही अखाड़ा मार्ग पर बैरिकेडिंग तोड़कर श्रद्धालु अखाड़ा मार्ग पर आ गये।यह देख अफसरों के हाथ-पांव फूल गये। बाद में आईटीबीपी के जवानों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर सुरक्षा घेरा बनाया और फिर सभी ने राहत की सांस ली। मकर संक्रांति पर भीड़ उमड़ेगी, लेकिन तड़के ही श्रद्धालुओं की संख्या 80 लाख को पार कर जायेगी। इसका अंदाजा किसी ने नहीं लगाया था। यही वजह रही कि अखाड़ों के साधु-संतों के अमृत स्नान के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किए गए सारे इंतजाम धरे रह गये।संगम पर उमड़े आस्थावानों के ज्वार के आगे अखाड़ों के अमृत स्नान के लिए निर्धारित मार्ग की बैरिकेडिंग टिक नहीं सकी। टावर नंबर वन के पास स्थित मोड़ से लेकर संगम नोज तक कम से कम 10 जगहों से बैरिकेडिंग तोड़कर श्रद्धालुओं की भीड़ आगे बढ़ गयी। श्रद्धालु अखाड़ा मार्ग से आगे तो बढ़े ही, संगम नोज के बायें साइड में घाट पर पहुंचकर स्नान किया। साथ ही अखाड़ों के साधु-संतों के पांव भी छुए। संतों ने भी उन्हें निराश नहीं किया। आमतौर पर संगम स्नान के लिए जाते वक्त थोड़े भी व्यवधान से नाराज होने वाले साधु-संत मंगलवार को अलग ही रूप में नजर आये। न सिर्फ स्नान के बाद, बल्कि संगम स्नान के लिए जाते वक्त भी कई नागा साधुओं ने रास्ते में रुककर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।

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