रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा संचालित दोनों अन्नपूर्णा सेवा मे 450 लोगों ने किया भोजन,200 कंबल का हुआ वितरणमानव सेवा से बढ़कर कोई भी पुनीत कार्य नहीं : रामावतार नारसरियाटीम एबीएन, रांची। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के द्वारा संचालित पहाड़ी मंदिर रोड स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर अन्नपूर्णा सेवा 230 लोगों ने भोजन प्राप्त किया। तथा दूसरा अन्नपूर्णा केंद्र पुरुलिया रोड स्थित स्वर्णभूमि अन्नपूर्णा सेवा केंद्र में 220 लाभुकों ने भोजन प्राप्त किया। दोनों अन्नपूर्णा सेवा मे 450 लोगों ने भोजन किया। इस अवसर पर कड़ाके की ठंड को देखते हुए दोनों अन्नपूर्णा सेवा मे श्री रामावतार नारसरिया एवं उनके परिवार के द्वारा 200 कंबल निर्धन एवं जरूरतमंदों को वितरण किया गया। मौके पर रामावतार नारसरिया ने कहा की मानव सेवा से बढ़कर कोई भी पुनीत कार्य नहीं है। ठंड में जरूरतमंदों को कंबल मिलने से ठंड से बचाव के साथ बहुत राहत मिलता है। उन्होंने कहा कि कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अन्नपूर्णा सेवा निरंतर चलती रहेगी। मौके पर अन्नपूर्णा सेवा के संयोजक सुरेश चंद्र अग्रवाल मारवाड़ी सम्मेलन के जिला महामंत्री विनोद कुमार जैन, प्रदीप नारसरिया, प्रमोद अग्रवाल, पुरुषोत्तम विजयवर्गीय, मनोज रुइया, द्वारका प्रसाद अग्रवाल, निर्भय शंकर हरित, सांवरमल बुधिया, रमेश बंका, संजय सर्राफ, सहित कई सदस्य उपस्थित थे। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि दोनों अन्नपूर्णा सेवा स्व सत्यनारायण नारसरिया एवं स्व शारदा देवी नारसरिया की स्मृति में एवं रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के द्वारा संचालित है।
प्राकृतिक आहार एवं उपचार के माध्यम से सभी साध्य एवं असाध्य रोगों का होगा उपचार : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। पवित्रम सेवा परिवार के तत्वाधान में 6 दिवसीय पूर्ण आवासीय-शरीर शुद्धि (विषाक्तता निवारण) प्राकृतिक उपचार शिविर 7 जनवरी 2025 से 12 जनवरी तक धनबाद में आयोजित की गयी है। झारखंड में पहली बार आयोजित इस शिविर में देश के कई चिकित्सक विशेषज्ञ तथा चिकित्सा टीम उपचार करने हेतु भाग लेंगे। इस 6 दिवसीय आवासीय उपचार शिविर का उदेश्य आहार, जीवनशैली को ठीक करते हुए प्राकृतिक चिकित्सा शैलियों के माध्यम से शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ करना है। पवित्रम सेवा परिवार के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इस शिविर मे प्राकृतिक आहार एवं उपचार के माध्यम से सभी साध्य एवं असाध्य रोगों का उपचार किया जायेगा। शिविर मे भाग लेने हेतु रजिस्ट्रेशन की प्रकिया शुरू हो गयी है। इस शिविर में चिकित्सा हेतु कुल 80 महिला एवं पुरुषों का रजिस्ट्रेशन किया जायेगा। प्रतिदिन ओपीडी की भी व्यवस्था रखी गयी है। बाकी लोग ओपीडी के माध्यम से लाभ ले सकेंगे, जो नि:शुल्क रहेगा, शिविर के प्रेरणा के मुख्य स्रोत संस्था के संयोजक अजय भरतिया है। इस शिविर मे प्राकृतिक आहार एवं उपचार के माध्यम से सभी साध्य एवं असाध्य रोगों का उपचार मधुमेह, मोटापा, कब्ज, गैस, एसिडिटी, रक्तचाप, हृदय रोग, दमा, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, गर्दन दर्द, आंखों में जलन, त्वचा रोग, सर दर्द, अनिद्रा, तनाव, चिंता, मानसिक रोग आदि अनेक रोगों में स्थायी लाभ होता है। रोग शरीर में एकदम उत्पन्न नहीं होते हैं। शरीर के अंदर लगातार विजातीय पदार्थ (गंदगी) जमा होने से रोगों की उत्पति होती है। घातक रोगों का अंत मृत्यु के रूप में होता है। इन सभी रोगों से बचने के लिए नियमित शरीर शुद्धि आवश्यक है। शिविर में किये जाने वाले उपचार- सूर्यवाष्प स्नान, नस्यपुरन, कल्प उपचार, अग्निहोत्र, प्राकृतिक आहार, जलोपचार, मिट्टी द्वारा उपचार, स्टीमबाथ भाप स्नान, रस्सी उपचार, योग निद्रा, रबर नेति उपचार, गरम पाद स्नान, योग- आसन, जलनेती, वमन (कुंजल) फॉल लपेट उपचार, कंबल लपेट उपचार, शरीर शुद्धि इस प्राकृतिक उपचार शिविर में भाग लेने वाले सभी शिविरार्थियों (साधकों) को एक प्राकृतिक उपचार की किट प्रदान की जायेगी।जिसमें जलपोट, नेति रबर, एनिमा केथेटर, आईवास कप, सूर्य स्नान प्लास्टिक पॉलीथिन, गर्म पट्टी बड़ी, गर्म पट्टी छोटी, कॉटन पट्टी बड़ी, कॉटन पट्टी छोटी, रबर गरम बोतल, सुजोक रिंग, ऐनिमा पॉट, बैग, कॉन्फ्रेंस पैड, बॉल पैन दिया जायेगा। शिविर में भाग लेने वाले लोगों के लिए आवास हेतु सुव्यवस्थित कमरे एवं चिकित्सा की उत्तम व्यवस्था है। पुरुषों एवं महिलाओं की अलग-अलग सामूहिक व्यवस्था है। मात्र छह माह में एक बार शिविर करने से सभी प्रकार के रोगों से स्थायी मुक्ति शरीर के आंतरिक अंग लीवर, किडनी, रक्त, आंतों, हृदय, फेफड़ों की पूरी तरह से सफाई, मन तनाव रहित हो जाता है। आंतरिक आनंद, करुणा, दया, ममता, उत्साह, उमंग आदि गुणों में अद्वितीय वृद्धि होती है। शिविर में भाग लेने हेतु रांची के लोग 3 जनवरी तक संजय सर्राफ से भी संपर्क कर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। उक्त जानकारी पवित्रम सेवा परिवार के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
सफला एकादशी उपवास और भक्ति का पर्व, जीवन मे सुख शांति का वास होता है: संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सफला एकादशी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। यह एक विशेष उपवासी व्रत है जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और परम सुख की प्राप्ति के लिए प्रोत्साहित करता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, जिन्हें संसार के पालनहार के रूप में पूजा जाता है। इस वर्ष पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 25 दिसंबर को रात 10 बजकर 29 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 27 दिसंबर को रात 12 बजकर 43 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 26 दिसंबर दिन गुरुवार को सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।सफला एकादशी का महत्व विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए है जो जीवन में विभिन्न परेशानियों और दुखों से जूझ रहे होते हैं। यह व्रत मानसिक शांति, समृद्धि और भक्ति की ओर मार्गदर्शन करता है। इस दिन उपवासी रहकर भक्ति में लीन रहने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह एकादशी भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का अवसर है, जिनकी उपासना से जीवन में सुख-शांति का वास होता है। व्रत के दौरान श्रद्धालु केवल एक बार भोजन करते हैं और रात को जागरण करते हुए भजन-कीर्तन करते हैं। कुछ लोग इस दिन विशेष रूप से विष्णु सहस्रनाम् का पाठ भी करते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन नियमपूर्वक उपवास रखता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सफला एकादशी का महत्व भारतीय संस्कृति में बहुत गहरा है। यह न केवल एक धार्मिक अवसर है, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति की दिशा में एक अहम कदम भी है। इस दिन को सही रूप से मनाने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं, और यह उसे एक सशक्त और संतुष्ट जीवन की ओर मार्गदर्शन करता है।
एबीएन सोशल डेस्क। बाल अधिकारों पर काम करने वाले देश के एकमात्र मीडिया एवं संचार संगठन को बच्चों के संरक्षण एवं सशक्तीकरण में योगदान के लिए मिला। बाल अधिकारों पर काम करने वाले देश के इकलौते मीडिया एवं संचार संगठन इंडिया फॉर चिल्ड्रेन को बच्चों के संरक्षण एवं सशक्तीकरण में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित द गोल्डन स्टार आइकॉन अवार्ड-2024 (टीजीएसआई) से सम्मानित किया गया है। इंडिया फॉर चिल्ड्रेन का चयन एक प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल ने किया, जिसमें भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ अरिजीत पसायत, निर्णायक मंडल के सदस्य डॉ जयदेव सारंगी, भारत सरकार के पूर्व सचिव तथा आईआईएम लखनऊ में सेंटर फॉर मार्केटिंग इन इमर्जिंग इकोनॉमीज के अध्यक्ष, प्रोफेसर सत्य भूषण दाश शामिल थे। यह पुरस्कार रेडिसन ब्लू कौशांबी, गाजियाबद में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया गया। बाल अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित और निरंतर उच्च मानकों को बनाये रखने के लिए इंडिया फॉर चिल्ड्रेन को 9वें अतिरिक्त पुरस्कार में एक ट्रॉफी और उत्कृष्टता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। अवीवा कीन द्वारा स्थापित, गोल्डन स्टार आइकन अवार्ड्स (टीजीएसआई अवार्ड्स) दुनिया भर के संगठनों और पेशेवरों की उपलब्धियों और सकारात्मक प्रभाव को सम्मानित करके प्रतिष्ठित ब्रांडों, सेवाओं और व्यक्तियों को मान्यता देने के लिए दुनिया के प्रमुख प्लेटफार्मों में से एक के रूप में उभरा है, जिससे उन्हें वह सार्वजनिक मान्यता मिलती है जिसके वे हकदार हैं। बाल अधिकारों पर काम करने वाले भारत के एकमात्र मीडिया एवं संचार संगठन को पुरस्कार मिलने पर इंडिया फॉर चिल्ड्रेन के निदेशक अनिल पांडेय ने कहा कि प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करना एक उपलब्धि है और इससे देश में प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की वकालत करने में आशा की किरण के रूप में उभरने वाले संगठन की विश्वसनीयता स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की मीडिया में बाल अधिकारों के मुद्दों को प्रमुखता से लाने में हमारा मिशन सफल रहा है क्योंकि हम एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने में सक्षम रहे हैं जहां बाल संरक्षण अब डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कवरेज प्राथमिकता बन रहा है। हमारे प्रयासों के परिणाम मिले हैं क्योंकि देश में बच्चों से संबंधित मुद्दों को जगह देने के लिए मीडिया की धारणा में एक स्पष्ट बदलाव आया है। टीजीएसआई अवार्ड्स के सलाहकार पैनल के सदस्य सूर्य नारायण मिश्रा ने कहा कि गोल्डन स्टार आइकन अवार्ड्स विविध व्यावसायिक क्षेत्रों में संबंधों को बढ़ावा देता है तथा आपसी सहयोग और विकास को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा, टीजीएसआई अवार्ड्स उच्च गुणवत्ता वाले शोध, मीडिया सामग्री और ब्रांड निष्ठा बनाने और वितरित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो इसमें शामिल सभी लोगों के लिए निरंतर सफलता को बढ़ावा देता है। इस मंच के माध्यम से, हमारा उद्देश्य प्रतिभा का पोषण करना, उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और प्रतिभागियों को उनकी पेशेवर यात्रा में और भी अधिक ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है।
टीम एबीएन, रांची। आज विश्व ध्यान दिवस के उपलक्ष्य में जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा ने प्रेक्षा-ध्यान की कार्यशाला रखी थी। अपर बाजार स्थित रंजन भेटेरा के निवास स्थान में तेरापंथी सभा रांची के अध्यक्ष विमल दस्सानी के मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। प्रशिक्षिका रूबी बांठिया ने कार्यशाला का संचालन किया। साथ ही प्रेक्षा ध्यान करवाया। प्रेक्षा ध्यान में कायोत्सर्ग, ध्यान आदि के बारे बताया गया एवं उपस्थित लोगों से 30 मिनट का कायोत्सर्ग एवं ध्यान करवाया गया। इसके फायदे के बारे में भी बताया गया। कायोत्सर्ग करने से एकाग्रता बढ़ती है एवं मन को स्थिर रखने के लिए ध्यान बहुत जरूरी है, बताया गया। सोनू-पारख, अनीता भटेरा, नमन एवं रिद्धि ने प्रेक्षा-ध्यान की गीतिका सुनायी। कार्यक्रम में श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष विमल दस्सानी, तेरापंथ युवक परिषद के पूर्व अध्यक्ष ललित सेठिया, धर्मेंद्र बोहरा, रंजन भटेरा आदि उपस्थित हुए। कार्यक्रम के समापन में आभार ज्ञापन का कार्य विमल दस्सानी ने किया।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय सनातन एकता मंच एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि रुक्मणी अष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूरे देश में श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी देवी के साथ जुड़ा हुआ है और विशेष रूप से रुक्मणी जी की पूजा का दिन माना जाता है। प्रत्येक वर्ष पौष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से व्रत रखा जाता है और पूजा का आयोजन किया जाता है। रुक्मिणी अष्टमी पर देवी रुक्मिणी और भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन द्वापर युग में देवी रुक्मिणी का जन्म हुआ था, जो विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं। देवी रुक्मिणी को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। यह मान्यता है कि रुक्मिणी अष्टमी के दिन व्रत करके देवी रुक्मिणी की पूजा करने से मां लक्ष्मी अपने भक्तों पर कृपा करती हैं और उनकी सभी इच्छाएं पूरी करती है। इस वर्ष पौष माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 दिसंबर रविवार को दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो कि 23 दिसंबर, सोमवार को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी का व्रत 23 दिसंबर सोमवार को मनाया जाएगा। रुक्मणी जी भगवान श्री कृष्ण की अर्धांगिनी और उनके साथ उनकी दिव्य लीलाओं में सहभागी रही हैं। रुक्मणी जी का जन्म महाकाव्य भगवद गीता के अनुसार रुक्मणीपुर में हुआ था। रुक्मणी जी को भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त और उनका प्रिय माना जाता है। उनके विवाह की कथा बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें रुक्मणी जी ने अपने स्वप्न में भगवान श्री कृष्ण को देखा और उन्हें अपना जीवन साथी चुना। रुक्मणी जी के विवाह में भगवान कृष्ण द्वारा किए गए साहसिक कार्य और उनकी भक्ति की महानता का बखान किया जाता है। यही कारण है कि रुक्मणी अष्टमी को एक श्रद्धांजलि और भक्ति का पर्व मानते हुए पूजा का आयोजन किया जाता है। रुक्मणी अष्टमी के दिन भक्तगण विशेष रूप से व्रत रखते हैं और पूरे दिन भगवान कृष्ण एवं रुक्मणी देवी की पूजा करते हैं। इस दिन व्रति विशेष रूप से रुक्मणी जी की मूर्ति को रंग-बिरंगे फूलों से सजाते हैं और उन्हें विशेष प्रसाद अर्पित करते हैं। मंदिरों में भव्य पूजा आयोजन होता है, जहां भगवान कृष्ण और रुक्मणी के विवाह की कथा सुनाई जाती है। इस दिन व्रति उपवास रहते हुए भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी जी का ध्यान करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं। रुक्मणी अष्टमी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है,बल्कि यह सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध है। यह पर्व प्रेम, भक्ति और त्याग का प्रतीक है। रुक्मणी और श्री कृष्ण के संबंधों को प्रेम और समर्पण का आदर्श माना जाता है। इस दिन को मनाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में आपसी प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। रुक्मणी अष्टमी,भगवान कृष्ण और रुक्मणी जी के साथ हमारी आत्मीयता और भक्ति को और मजबूत करती है। यह दिन हमें अपने जीवन में सत्य, प्रेम और समर्पण के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है।
स्वामी मुक्तरथ एबीएन सोशल डेस्क। सत्यानंद योग मिशन ने न्यायिक एकेडमी, डीएवी कपिलदेव, सत्यानंद योग मिशन सरोवर नगर में ध्यान दिवस के अवसर पर सामूहिक ध्यान का अभ्यास किया। इस अवसर पर स्वामी मुक्तरथ ने कहा कि योग सही तरह से जीने का विज्ञान है और इसलिए इसे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह हमारे जीवन से जुड़े भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक आदि सभी पहलुओं पर काम करता है।योग का अर्थ एकता या बांधना है। इस शब्द की जड़ है संस्कृत शब्द युज, जिसका मतलब है जुड़ना। आध्यात्मिक स्तर पर इस जुड़ने का अर्थ है सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का एक होना। व्यावहारिक स्तर पर, योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और तालमेल बनाने का एक साधन है। यह योग या एकता आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध, षट्कर्म और ध्यान के अभ्यास के माध्यम से प्राप्त होती है। तो योग जीने का एक तरीका भी है और अपने आप में परम उद्देश्य भी। योग सबसे पहले लाभ पहुंचाता है बाहरी शरीर (फिजिकल बॉडी) को, जो ज्यादातर लोगों के लिए एक व्यावहारिक और परिचित शुरुआती जगह है। जब इस स्तर पर असंतुलन का अनुभव होता है, तो अंग, मांसपेशियां और नसें सद्भाव में काम नहीं करते हैं, बल्कि वे एक-दूसरे के विरोध में कार्य करते हैं। बाहरी शरीर (फिजिकल बॉडी) के बाद योग मानसिक और भावनात्मक स्तरों पर काम करता है। रोजमर्रा की जिंदगी के तनाव और बातचीत के परिणामस्वरूप बहुत से लोग अनेक मानसिक परेशानियों से पीड़ित रहते हैं। योग इनका इलाज शायद तुरंत नहीं प्रदान करता लेकिन इनसे मुकाबला करने के लिए यह सिद्ध विधि है। पिछली सदी में, हठ योग (जो कि योग का सिर्फ एक प्रकार है) बहुत प्रसिद्ध और प्रचलित हो गया था। लेकिन योग के सही मतलब और संपूर्ण ज्ञान के बारे में जागरूकता अब लगातार बढ़ रही है। योग के लाभशारीरिक और मानसिक उपचार योग के सबसे अधिक ज्ञात लाभों में से एक है। यह इतना शक्तिशाली और प्रभावी इसलिए है; क्योंकि यह सद्भाव और एकीकरण के सिद्धांतों पर काम करता है। योग अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप, गठिया, पाचन विकार और अन्य बीमारियों में चिकित्सा के एक सफल विकल्प है, खासतौर से वहां जहां आधुनिक विज्ञान आजतक उपचार देने में सफल नहीं हुआ है। एचआईवी पर योग के प्रभावों पर अनुसंधान वर्तमान में आशाजनक परिणामों के साथ चल रहा है। चिकित्सा वैज्ञानिकों के अनुसार, योग चिकित्सा तंत्रिका और अंत:स्रावी तंत्र में बनाये गये संतुलन के कारण सफल होती है जो शरीर के अन्य सभी प्रणालियों और अंगों को सीधे प्रभावित करती है। अधिकांश लोगों के लिए हालांकि, योग केवल तनावपूर्ण समाज में स्वास्थ्य बनाये रखने का मुख्य साधन हैं। योग बुरी आदतों के प्रभावों को उलट देता है, जैसे कि सारे दिन कुर्सी पर बैठे रहना, मोबाइल फोन को ज्यादा इस्तेमाल करना, व्यायाम न करना, गलत खानपान रखना इत्यादि। इनके अलावा योग के कई आध्यात्मिक लाभ भी हैं। इनका विवरण करना आसान नहीं है, क्योंकि यह आपको स्वयं योग अभ्यास करके हासिल और फिर महसूस करने पड़ेंगे। हर व्यक्ति को योग अलग रूप से लाभ पहुंचाता है। तो योग को अवश्य अपनायें और अपनी मानसिक, भौतिक, आत्मिक और अध्यात्मिक सेहत में सुधार लायें। (लेखक सत्यानंद योग मिशन, रांची के प्रभारी हैं।)
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू से दिव्य ज्योति कलशरथ यात्रा चलकर ओरमांझी प्रखंड के गावों मुहल्लों व दुर्गा मंदिर पास, गायत्री चेतना केंद्र होकर बीआईटी मेसरा पंचौली में निवासी परिजनों, भक्तों ने बैंड बाजा गाजा के साथ गायत्री दिव्य ज्योति कलश का रथ-दर्शन, स्वागत-सत्कार अभिनंदन कर विधिवत त्रिदेव युग शक्ति का खूब उल्लास व उत्साहपूर्वक पूजन-अर्चन किये और जयघोष कर युग शक्ति गायत्री की आरती वंदन व पुष्पांजलि अर्पित की। आज ओरमांझी प्रखंड में कई महिला मंडल के करीब 9/10 क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजन हुए।सायंकालीन समय में बीआईटीटी कॉलेज सुन्दर नगर के देवी दर्शन मंदिर पास गायत्री परिवार आवासीय परिसर में दीपयज्ञ विधान हुआ। आज के कार्यक्रम में सैकड़ों नये भक्तों व परिजनों ने देव स्थापना कराये। इस दौरान शांतिकुञ्ज तत्वावधान में मुख्य प्रतिनिधि त्रिलोचन साहू ने गायत्री महामंत्र जप, यज्ञीय अनुष्ठान, संस्कार प्रकरण पर प्रकाश डालकर गायत्री युग साहित्य का स्वाध्याय करने का संदेश दिये। साथ साथ दीपयज्ञ विधान दौरान मानव शरीर व स्वास्थ्य के प्रति सावधानी रखने और प्राणघातक शत्रु व्यसन प्रयोग पर प्रकाश डाल कहा कि व्यसन मनुष्य के लिए वास्तविक प्राणघातक शत्रु हैं। व्यसन मित्र के रूप में हमारे शरीर में घुसते हैं और शत्रु बनकर दिन-दिन क्षीण कर मारते हैं। अत: नशा नाश का सोपान है। उन्होंने कहा कि शांतिकुञ्ज ने गुरुसत्ताश्री द्वय के विचार, सपना और योजना के अनुसार योगयुक्त जीवन और व्यसन मुक्त भारत का अभियान चलाना है।कांके और ओरमांझी प्रखंड के बाद कल से अनगड़ा और सिल्ली प्रखंड, पंचायत व ग्रामीण क्षेत्र में दिव्य ज्योति कलश रथ-दर्शन कराया जायेगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रदेश प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। परम पूज्य आचार्य गुरुवर 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज का रांची की पावन धरा पर मंगल प्रवेश दिनांक 21-12-2024, शनिवार को प्रात: 8:30 बजे दिगंबर जैन मंदिर, अपर बाजार में होगा। मुनि श्री आज दिनांक 20-12-2024 को दोपहर 2 बजे ओरमांझी पटाखा दुकान (ट्रेड फ्रेंड्स) से विहार करके सायं 4:30 बजे तक भगवान महावीर आई हॉस्पिटल बरियातू पहुंचेंगे। यहीं पर उनका रात्रि विश्राम होगा। दिनांक 21-12-2024, शनिवार को प्रात: 6:45 बजे आई हॉस्पिटल से विहार करके करम टोली चौक पहुंचेंगे जहां से बाजे-गाजे के साथ जुलूस के रूप में कचहरी रोड होते हुए जैन मंदिर में प्रात 8.30 मंगल प्रवेश होगा। आप सभी पुरुषों, महिलाओं युवाओं एवं सभी संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में विहार एवं मंगल प्रवेश में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करें। उक्त जानकारी अध्यक्ष नरेंद्र गंगवाल, संयोजक संजय छाबड़ा और मंत्री पंकज पांड्या ने दी।
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