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कल मनाया जायेगा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
Published / 2025-03-07 21:16:43
कल मनाया जायेगा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

महिला दिवस महिलाओं की समानता, सम्मान और अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष और प्रयासों का प्रतीक : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन एवं पवित्रम सेवा परिवार के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने और जेंडर समानता की ओर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर देने के लिए समर्पित है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और समान अवसरों की ओर दुनिया भर में बदलाव लाना है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास 1900 के दशक की शुरुआत में जुड़ा हुआ है। इसका पहला आयोजन 1909 में हुआ था जब अमेरिका में महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठायी। 1910 में डेनमार्क की कोपेनहेगन शहर में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी महिला सम्मेलन में महिला अधिकारों के आंदोलन को और जोरदार रूप से प्रस्तुत किया गया और तब से यह दिन एक वैश्विक महत्व का दिन बन गया। 1977 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिन को आधिकारिक रूप से मनाने का निर्णय लिया गया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना और समाज में उनके योगदान की सराहना करना है। यह दिन महिलाओं को उनके संघर्ष, मेहनत और सफलता के लिए सम्मानित करने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन के माध्यम से हम महिलाओं की समस्याओं, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, हिंसा, लैंगिक असमानता, और कार्यस्थल पर भेदभाव आदि पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हर साल इस दिन का एक विशिष्ट विषय निर्धारित किया जाता है, जो दुनिया भर में महिलाओं के लिए नये विचारों और परिवर्तनों को प्रेरित करने का काम करता है। महिला दिवस का इस वर्ष का थीम कार्रवाई में तेजी लाना लैंगिक समानता में तीव्र प्रगति का आवाह्न करता है हमें यह याद दिलाता है कि महिलाएं समाज की मजबूत धुरी हैं और उनके बिना कोई भी समाज या राष्ट्र सशक्त नहीं हो सकता। हमें महिलाओं के योगदान को पहचानने और उन्हें समान अधिकार देने की आवश्यकता है। साथ ही, यह दिन समाज में उन सुधारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है जिनकी आवश्यकता महिलाओं के जीवन को बेहतर और समान बनाने के लिए है। इस दिन, विभिन्न देश और संगठन महिलाएं के प्रति अपनी सराहना व्यक्त करने के लिए कार्यक्रम, सेमिनार, रैलियां और कार्यशालाएं आयोजित करते हैं। इस तरह के आयोजनों से समाज में महिला सशक्तिकरण और समानता के प्रति जागरूकता बढ़ती है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की समानता, सम्मान और अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष और प्रयासों का प्रतीक है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम मिलकर एक ऐसा समाज बनायें, जहां हर महिला को अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अधिकार हो।

आदि शक्ति श्री जीण माता का 15वां वार्षिकोत्सव 8-9 को
Published / 2025-03-07 21:15:30
आदि शक्ति श्री जीण माता का 15वां वार्षिकोत्सव 8-9 को

टीम एबीएन, रांची। आदि शक्ति श्री जीण माता जी का  दो दिवसीय 15वां वार्षिकोत्सव 8 एवं 9 मार्च 2025 को श्री जीण माता प्रचार समिति रांची द्वारा स्थानीय मारवाड़ी भवन परिसर हरमू रोड में मनाया जायेगा। दिनांक 8 मार्च 2025 को आदि शक्ति श्री जीण माता जी की निशान यात्रा सेवा सदन पथ लक्ष्मी नारायण मंदिर से दोपहर 2 बजे से प्रारंभ हो कर नगर भ्रमण करते हुए मारवाड़ी भवन पहुंचेगी।जहां सभी निशान आदि शक्ति श्री जीण माता को अर्पित किये जायेंगे। इस निशान यात्रा में 501 निशान उठाये जायेंगे। सभी निशान लक्ष्मी नारायण मंदिर से वितरित किये जायेंगे। इस निशान यात्रा का संचालन मारवाड़ी युवा मंच रांची शाखा, द्वारा किया जाएगा जिसका नेतृत्व अध्यक्ष आशीष अग्रवाल एवं उनकी टीम  द्वारा किया जायेगा।  9 मार्च 2025 को प्रात: 10 बजे श्री जीण माताजी का अभिषेक उत्सव के मुख्य संयोजक श्री विजय पालड़ीवाल एवं सह संयोजक श्री ओम प्रकाश अग्रवाल द्वारा सपरिवार किया जायेगा। अभिषेक के उपरांत भगवान श्रीगणेश का पूजन होगा। इसके बाद दोपहर 1 बजे से शक्ति मंगल पाठ 800 महिलाओं द्वारा किया जायेगा। इस मंगल पाठ में सभी महिलाएं अपने पारम्परिक वेश भूषा में उपस्थित होंगी। मंगल पाठ के वाचन और भजन गायन हेतु जीणधाम से श्री आनंद जी पाराशर, भागलपुर से श्री राहुल सोनी एवं धनबाद से सुश्री तानिया अग्रवाल पधार रहे हैं। इस मंगल पाठ के आयोजन में श्री जीण जन्मोत्सव मनाया जायेगा। विशेष आकर्षण के रूप मे माता को 51 फिट का गजरा एवं 181 फिट की चुनड़ी अर्पित की जायेगी। शक्ति मंगल पाठ का समापन रात्रि 8 बजे महाआरती से होगा। इस वार्षिकोत्सव के निशान एवं मंगल पाठ का कूपन 3 मार्च 2025 से  मारवाड़ी भवन में अपराह्न 3 बजे से संध्या 6 बजे तक वितरित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल, उपाध्यक्ष विजय पालड़ीवाल, सचिव नारायण विजयवर्गीय, कोषाध्यक्ष बजरंग सोमानी, सह सचिव प्रदीप शर्मा, संदीप शर्मा, संदीप अग्रवाल, रमेश सोमानी, कृष्णा अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, संदीप विजयवर्गीय, सुनीता मित्तल, कविता सोमानी, शीतल अग्रवाल, ऊषा शर्मा, संगीता अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, नीरा शर्मा, निधि विजयवर्गीय, नेहा सिंघानिया, सविता शर्मा, नेहा शर्मा आदि सदस्य सहयोग कर रहे हैं।

सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में मंदबुद्धि निराश्रित प्रभु जी को कराया गया भोजन
Published / 2025-03-05 20:51:47
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में मंदबुद्धि निराश्रित प्रभु जी को कराया गया भोजन

टीम एबीएन, रांची। परमहंस डा संत शिरोमणि श्रीश्री 108 स्वामी सदानंद महाराज के सान्निध्य में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वाधान में विगत 1 वर्ष से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज 5 मार्च को समाज के धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं एवं एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के पदाधिकारी गण एवं ट्रस्ट के सदस्यों के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 37 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया। अपना घर आश्रम के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि 19 फरवरी से 28 फरवरी तक 10 दिनों मे लगभग 1880 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। इस पुनीत कार्य को सर्वेश कुमार, प्रेमचंद मिश्रा, अंकित अग्रवाल, आकांक्षा अग्रवाल, मनोज कुमार, मदन प्रसाद सोनी, राहुल कुमार, मधु छावनिका, अंशु अभिषेक, ऋषि कुमार, ज्ञानचंद शर्मा, नवीन मोदी के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गई। सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष निर्मल जालान, राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल सचिव मनोज कुमार चौधरी संस्था के वरिष्ठ सदस्य पुर्णमल सर्राफ, चिरंजीलाल खण्डेलवाल, सुरेश अग्रवाल, सज्जन पाड़िया,नन्द किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान,पवन कुमार पोद्दार, सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन 12 को मारवाड़ी भवन रांची में, तैयारियां जोरों पर
Published / 2025-03-04 19:03:53
अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन 12 को मारवाड़ी भवन रांची में, तैयारियां जोरों पर

एबीएन सोशल डेस्क। कवि सम्मेलन आयोजन समिति रांची के तत्वाधान में 12 मार्च को रात्रि 9 बजे से हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन में होली के अवसर पर अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। कवि सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष अशोक नारसरिया एवं मुख्य संयोजक सुरेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी उत्साह एवं उमंग के पावन पर्व होली के अवसर पर 12 मार्च को आयोजित कवि सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त सुप्रसिद्ध हास्य कवि सुनील पॉल (लाफ्टर चैलेंजर), ठहाको के सरदार जानी बैरागी, हास्य व्यंग कवि रमेश मुस्कान, इटावा वीर रस के कवि गौरव चौहान, श्रृंगार रस की प्रसिद्ध कवयित्री डॉ भुवन मोहिनी, एवं हास्य-व्यंग्य के कवि शशिकांत यादव पधार रहे हैं जो की अपने हास्य रस, वीर रस, श्रृंगार रस, व्यंग कविता प्रस्तुत कर दर्शकों को हंसी के ठहाके की बौछार के साथ-साथ तीखे बाण व्यंग्य का मधुर संगम पेश करेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार आयोजन में समिति द्वारा चार नए सदस्यों अंजय सरावगी, हरिशंकर कनोडिया, निर्भय शंकर हरित एवं चंद्र प्रकाश धेलिया को जोड़ा गया है। निर्वतमान अध्यक्ष विनोद कुमार जैन एवं पूर्व अध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार ने बताया कि कवि सम्मेलन को सफल व्यवस्था हेतु निम्न कमेटी बनायी गयी है। सदस्यों को विभिन्न जिम्मेवारियां  जिसमें- स्वागत सत्कार-पवन शर्मा एवं विनोद जैन, अर्थ-व्यवस्था- ललित कुमार पोद्दार, सभागार व्यवस्था- अनिल कुमार अग्रवाल, सुरक्षा व्यवस्था- पवन पोद्दार एवं कमल जैन, मंच सज्जा रतन मोर एवं मनोज बजाज, प्रशासनिक कार्य किशोर मंत्री एवं कमल जैन, अल्पाहार व्यवस्था- पवन पोद्दार तथा कार्यक्रम मीडिया प्रभारी - संजय सर्राफ को दी गयी है।समिति के सचिव अनिल कुमार अग्रवाल ने कहा कि कवि सम्मेलन में पूर्णतया प्रवेश नि:शुल्क है। तथा महिलाओं को बैठने की विशेष व्यवस्था की गयी है दर्शकों के लिए एलईडी भी मैदान में लगाये जायेंगे। हल्के जलपान की व्यवस्था की गयी है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन के द्वारा पूर्ण सहयोग का आश्वासन मिला है। उक्त जानकारी कार्यक्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी है।

रांची महानगर 151 स्थानों पर मनायेगा रामोत्सव : विहिप
Published / 2025-03-02 20:01:02
रांची महानगर 151 स्थानों पर मनायेगा रामोत्सव : विहिप

एबीएन सोशल डेस्क। आज दिनांक 2 मार्च, 2025 सायं 4:00 बजे विश्व हिंदू परिषद, रांची महानगर की बैठक हरमू रोड रांची स्थित विश्व हिंदू परिषद प्रांत कार्यालय में की गई। बैठक की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी एवं संचालन महानगर मंत्री विश्वरंजन ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू उपस्थित थे।बैठक में आगामी कार्यक्रम रामोत्सव को 30 मार्च से 12 अप्रैल तक मनाने का निर्णय लिया गया। महानगर अंतर्गत सभी 16 नगरों में कार्यक्रम करने के लिए तथा 12 अप्रैल को बलोपासना दिवस के रूप में रांची महानगर के 151 स्थान पर कार्यक्रम करने की योजना बनाई गई। रांची महानगर के सभी नगरों की बैठक 7, 8 एवं 9 मार्च को तय की गयी।बैठक को संबोधित करते हुए डॉ वीरेंद्र साहू ने कहा विश्व हिंदू परिषद के 60 वर्ष पूर्ण होने के कालखंड में भगवान पुरुषोत्तम श्री रामलला जी का भव्य एवं नूतन मंदिर में स्थापित होना सनातन हिंदू समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा षष्ठीपूर्ति वर्ष में ही महाकुंभ में 65 करोड़ से अधिक सनातन हिंदू जनमानस का एकत्र होना हमारी प्राचीन सनातन परंपरा का बड़ा उद्घोष के समान है। डॉ साहू ने विश्व हिंदू परिषद के कार्यों को जन-जन तक ले जाने के लिए समिति बनाने एवं निश्चित कार्यक्रम को करने का आग्रह किया।बैठक में प्रांत सेवा सहप्रमुख अशोक अग्रवाल, महानगर उपाध्यक्ष गोपाल पारीक, सहमंत्री राजेश अग्रवाल व सुमन जी, सामाजिक समरसता प्रमुख मुकेश गिरी, सेवा प्रमुख श्वेता सिंह, महानगर बजरंग दल संयोजक विक्रम साहू, अजय राजगढ़िया, आशुतोष मिश्रा, राम कृष्ण पांडे, अनिल तिवारी, अजय जी, विजय मिश्रा, संजय ठाकुर, संजय वर्मा, राम बालक वर्मा, अरविंद सिंह सहित सभी नगर के अध्यक्ष, मंत्री व बजरंग दल संयोजक उपस्थित थे। उक्त जानकारी रांची महानगर, विहिप के सहमंत्री राजेश अग्रवाल (9304207920) ने दी।

त्रिवेणी महाकुंभ स्नान में मिली अकल्पनीय व अविस्मरणीय अनुभूति : डॉ बिरेन्द्र साहु
Published / 2025-03-01 20:46:00
त्रिवेणी महाकुंभ स्नान में मिली अकल्पनीय व अविस्मरणीय अनुभूति : डॉ बिरेन्द्र साहु

भारतीय हिंदू संस्कृति में भक्ति हीं विज्ञान है, परंपरा हीं समरसता है और सनातन ही विश्वबंधुत्व है एबीएन सोशल डेस्क। 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के पावन स्नान के साथ प्रयाग महाकुंभ 2025 संपन्न हुआ। इस पावन तिथि को पवित्र त्रिवेणी में स्नान करने का मुझे भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुझे प्रयाग त्रिवेणी महाकुंभ स्नान में अकल्पनीय व अविस्मरणीय अनुभूति मिली। मैंने अनुभव किया कि इस महाकुंभ के महास्नान को भारतवर्ष सहित संपूर्ण संसार के सनातन हिंदू अपने जीवन भर संजोय कर अवश्य रखेगा। 45 दिनों में 64 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालुओं के माँ गंगा, यमुना व सरस्वती के त्रिवेणी में स्नान करना मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लगभग 100 करोड़ से अधिक हिंदू सनातनी जनमानस की आस्था का महासागर था। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि विश्व के समस्त सनातन हिंदुओं की आध्यात्मिक ऊर्जा, जाग्रत आत्मविश्वास उत्सव, अनुकरणीय सौहार्द की कड़ी, समरसता का समागम और सामाजिक स्नेह का महासंगम था।  प्रयाग त्रिवेणी में श्रद्धालुओं ने संसार के समस्त जनमानस को यह महसूस कराया कि यह भूमि केवल संतों, ऋषियों और तपस्वियों की ही नहीं, बल्कि हर उस आत्मा की है जो प्रेम और सत्य को धारण करती है। महाकुंभ का विराट आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं का आगमन और उनका कुशल प्रबंधन आज दुनिया के लिए एक आश्चर्य और हम भारतीयों के लिए गौरव का विषय बन गया है। आज दुनिया को यह आभास कराया की भारतीय सनातन हिंदू संस्कृति संसार के समस्त मानव समुदाय का आध्यात्मिकता की केंद्र है। महाकुंभ के माध्यम से विराट प्रबंधन और अनुशासन का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया गया। महाकुंभ ने संसार के जनमानस को बताया कि हमारी परंपराओं की जड़ें मजबूत हैं, हमारी अतीत की संस्कारें गौरवशाली है और हमारी सांस्कृतिक भविष्य उज्ज्वल है। हमारी आध्यात्मिकता में विज्ञान, परंपरा में प्रगति और भक्ति में प्रेम देखता है। महाकुंभ हमें पुन: आत्मविश्वास देकर गया है कि हम अपनी विरासत पर गर्व करें, इसे अपनाएं और इसे संसार तक पहुंचाये। मुझे अनुभव हुआ कि त्रिवेणी के पावन स्थल पर जाति-धर्म को दूर छोड़ कर हर कोई बस सनातन संस्कृति के रंग में रंगा हुआ था। कोई अजनबी नहीं बल्कि सब अपने थे। यह वही भारत है, जो सबको अपनाने और सबको गले लगाने में विश्वास रखता है। महाकुंभ ने हमारी पहचान, हमारी शक्ति, हमारी प्रेम, प्रबंधन कुशलता को एक नई रूप में दुनिया को दिखाया है। वहीं दुनिया को यह बताया कि भारतीय हिंदू संस्कृति में भक्ति हीं विज्ञान है, परंपरा हीं समरसता है और सनातन हीं विश्वबंधुत्व है। (डॉ बिरेन्द्र साहु, झारखण्ड-बिहार विहिप के सहमंत्री हैं।)

विजया एकादशी पर गायत्री साधकों ने किया 24 घंटे का अखंड जप और गायत्री सहस्रनाम का पाठ
Published / 2025-02-24 22:02:00
विजया एकादशी पर गायत्री साधकों ने किया 24 घंटे का अखंड जप और गायत्री सहस्रनाम का पाठ

गायत्री ईश्वरीय दिव्य शक्तियों का एक पुंज है : समूह प्रतिनिधि एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार साधक-शिष्यों ने विजया एकदाशी पावन व्रत पर उपवास एवं जप- अनुष्ठान आज प्रात: चार बजे से कल प्रात:चार बजे तक करने का सुविधानुसार समयदान किया और गृहे गृहे सर्व देव पूजन कर शुभारंभ किया। इसमें झारखंड प्रान्त एवं रांची शक्तिपीठ से जुड़े अनेक साधक- शिष्य  गण शामिल हुए। राष्ट्रीय गायत्री साधक समूह आनलाइन जप- अनुष्ठान समूह संचालक ने आनलाइन संदेश दिया कि इस महती दैव योजना में गृह जप में शामिल हो भारत राष्ट् के उत्थान, नवसृजन, सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन, सबको सद्बुद्धि उज्ज्वल भविष्य के निमित्त प्रार्थना में सभी साधक अपने बहुमूल्य समय का एक अंश देने का संकल्प लें और जाग्रत भाव से जप-अनुष्ठान में योगदान करें।इस पावन अवसर पर शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा परिसर, स्थानीय पीठों एवं मंडल शाखाओं और गृहे-गृहे आवास में साधकों ने भागीदारी की। इसमें साधक सदस्यों ने मंगलाचरण से रक्षा विधान में गुरु, गायत्री, ब्रह्मा विष्णु, महेश तथा सर्वदेव आवाह्न, नमन वंदन सहित विधिवत षोडशोपचार, स्वस्तिवाचन सहित यज्ञ भी किया। अनेक साधकों ने सबके कल्याणार्थ गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र के साथ अन्य सहायक मंत्रों के भी जप किए। इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े अनेक वरिष्ठ साधक, युवा प्रकोष्ठ के सक्रिय साधक तथा कुछ विशिष्ट श्रद्धावान साधक परिजनों ने महामंत्र जप के साथ ध्यान, मंत्र लेखन एवं सामूहिक स्वाध्याय के साथ साथ गायत्री सहस्त्रनाम पाठ भी किये तथा इसके संबंधित विज्ञान पर चर्चा की। इस अवसर पर समूह प्रतिनिधि ने बताया  कि गायत्री ईश्वरीय दिव्य शक्तियों का एक पुंज है। गायत्री सहस्त्रनाम का श्रद्धापूर्वक पाठ का शास्त्रीय महात्म्य है। समूह प्रतिनिधि ने बताया कि सबने इस सामूहिक साधना से उत्पन्न ऊर्जा शक्ति को वेदमाता और गुरुसत्ताश्री के श्रीचरणों में  नवयुग सृजन और विश्व कल्याण के निमित्त समर्पित करना है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह झारखंड प्रदेश प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।

प्रयागराज महाकुंभ में स्नान एक दिव्य अनुभव : संजय सर्राफ
Published / 2025-02-24 21:08:44
प्रयागराज महाकुंभ में स्नान एक दिव्य अनुभव : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने सपरिवार व इष्ट मित्रों के साथ प्रयागराज महाकुंभ के त्रिवेणी संगम में स्नान किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ (जो हिंदू धर्म की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण आस्था का प्रतीक है) न केवल धर्मावलंबियों के लिए एक पुण्य अवसर है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी सहेजने का माध्यम है। महाकुंभ स्नान जो न केवल व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रमाण है, बल्कि सामाजिक एकता और समर्पण का प्रतीक भी है। महाकुंभ का महत्व सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि यह समूचे समाज को एकजुट करने, शांति और सौहार्द बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो समाज में धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यताओं को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। उन्होंने कहा  कि धर्म, संस्कृति और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है और महाकुंभ जैसे पवित्र अवसरों पर भागीदारी हमारी आस्था और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान न केवल व्यक्तिगत आस्था को प्रगाढ़ करते हैं, बल्कि समाज में धार्मिक सद्भावना और आपसी प्रेम का माहौल भी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 60 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालुओं ने प्रयागराज महाकुंभ में स्नान किया है। जो की एक विश्व रिकॉर्ड है। महाकुंभ में परिवार के आनंद अग्रवाल, निर्मल महलका, बद्री सरायका, तुषार, अमित, रजत, अनीता, अनुराधा, सीमा,  अंशु, आयुषी, सहित कई लोगों ने स्नान किया।

आस्था और भक्ति का महापर्व महाशिवरात्रि 26 को
Published / 2025-02-23 20:37:14
आस्था और भक्ति का महापर्व महाशिवरात्रि 26 को

महाशिवरात्रि आत्मिक उन्नति और एकाग्रता का प्रतीक : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण और विशेष पर्व है, जो भगवान शिव की पूजा और आराधना के रूप में मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई जाएगी।वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्‍गुन कृष्‍ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर है। महाशिवरात्रि पर्व 26 फरवरी को मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि की पूजा में रात्रि के प्रहर की पूजा का महत्‍व खास माना जाता है। यह दिन भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए सबसे खास माना जाता है।पौराणिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह दिन खासतौर पर उन भक्तों के लिए एक अत्यधिक पुण्यकारी अवसर होता है, जो भगवान शिव की उपासना में विश्वास रखते हैं। महाशिवरात्रि का अर्थ है शिव की रात और यह दिन भगवान शिव के साथ सम्पूर्ण ब्रह्मांड के रचनाकार, पालनकर्ता और संहारकर्ता के रूप में उनकी पूजा और आराधना के लिए समर्पित होता है। इसे रात्रि के रूप में मनाने का विशेष कारण है कि शिव भक्त इस दिन उपवास रखते हुए रातभर जागरण करते हैं, जिससे उनकी आस्था और समर्पण की गहराई का प्रतीक बनता है। महाशिवरात्रि का महत्व हिन्दू धर्म में बहुत अधिक है क्योंकि इस दिन भगवान शिव का विवाह पार्वती देवी से हुआ था, जिससे यह दिन शिव और पार्वती के मिलन के रूप में भी मनाया जाता है। विशेष रूप से इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करने, व्रत रखने, रात्रि भर जागरण करने और शिव मन्त्रों का उच्चारण करने का महत्व है। ॐ नमः शिवाय जैसे पवित्र मंत्रों के जाप से भक्तों को पुण्य और शांति मिलती है। शिव पूजा के कई पारंपरिक रूप हैं, जैसे- भक्तों द्वारा शिवलिंग पर जल चढ़ाना, बेलपत्र अर्पित करना, और दूध, शहद, गंगाजल आदि से अभिषेक करना। इसके अलावा, कुछ लोग इस दिन रात्रि जागरण करते हुए भजन-कीर्तन करते हैं और भक्ति गीतों के माध्यम से भगवान शिव की महिमा का गान करते हैं।महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से यह विश्वास किया जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा से सभी पापों का नाश होता है और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह दिन आत्मिक उन्नति और एकाग्रता का प्रतीक भी है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था और परंपराओं का अनुसरण करने का एक अवसर है, बल्कि यह समाज में एकता और भक्ति के संदेश को भी फैलाता है।महाशिवरात्रि का यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि हर व्यक्ति को अपने भीतर के शिव को पहचानने और उसकी उपासना करने की आवश्यकता है।इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और जीवन के उच्चतर उद्देश्य की ओर अग्रसर होने का भी एक माध्यम है।

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