श्रेष्ठ कार्य घोषणा पूर्वक किये जाते हैं, संकल्प करने से मनोबल बढ़ता है : रणवीर कुमारएबीएन सोशल डेस्क। चैत्र नवरात्रि महापर्व महोत्सव के पावन अवसर पर गायत्री महामंत्र का जप अनुष्ठान में साधकों ने गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर में नवरात्रि साधना में साधक-शिष्य, भाई-बहनों ने चौबीस हजार गायत्री महामंत्र जप-अनुष्ठान का सामूहिक संकल्प लेकर साधना अनुष्ठान में शामिल हुए। इस क्रम में परिव्राजक रणवीर कुमार ने बताया कि हर महत्त्वपूर्ण कर्मकाण्ड के पूर्व संकल्प कराने की परंपरा है।कहा कि अपना लक्ष्य, उद्देश्य निश्चित होना चाहिए। उसकी घोषणा भी की जानी चाहिए। श्रेष्ठ कार्य घोषणा पूर्वक किये जाते हैं, संकल्प करने से मनोबल बढ़ता है। स्थूल घोषणा से सत्पुरुषों का तथा मन्त्रों द्वारा घोषणा से सत्य शक्तियों का मार्गदर्शन और सहयोग मिलता है। संकल्प में गोत्र का उल्लेख भी किया जाता है। गोत्र ऋषि परम्परा के होते हैं। यह बोध किया जाना चाहिए कि हम ऋषि परम्परा के व्यक्ति हैं, तदनुसार उनके अनुरूप कार्यों को करने का उपक्रम उन्हीं के अन्तर्गत करते हैं। संकल्प धारण में सभी सामाग्री नि:शुल्क थे। प्रतिदिन जप, यज्ञ, एवं संस्कार प्रकरण पर प्रकाश डालकर बताया गया कि सभी संस्कार भी नि:शुल्क होंगे। संकल्प में अधिक परिजन होने से तीन कुण्डीय महायज्ञ आयोजन भी किये गये। गुरुवर श्रीआचार्य के युग निर्माण सत्संकल्प का पाठ भी करने का परामर्श दिया गया और सभी आगंतुकों को हिंदु वैदिक नव वर्ष संवत्सर और चैत्र नवरात्रि महापर्व पर सभी को हार्दिक बधाई और स्वस्थ-सुखद जीवन, शुभ व स्वच्छ वातावरण विस्तार और उज्जवल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह झारखंड प्रदेश प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद और जिला युवा उप समन्वयक राजू कुमार ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर समिति, श्री माहेश्वरी सभा, माहेश्वरी महिला समिति एवं माहेश्वरी युवा संगठन, रांची के संयुक्त सहयोग से, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी समस्त मारवाड़ी समाज द्वारा गणगौर पूजा महोत्सव को हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में मनाया जायेगा। उक्त जानकारी माहेश्वरी समाज के मीडिया प्रभारी अशोक साबू और रश्मि कोठारीमालपानी ने दी। कार्यक्रम विवरण दिनांक: १ अप्रैल २०२५ (मंगलवार) गणगौर पूजा: प्रात: ६:०० बजे से (श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर) नोट:-तृतीया तिथि सुबह 10.00 बजे तक। गणगौर मिलान एवं विसर्जन: अपराह्न २:०० बजे से संध्या ६:०० बजे तक (श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर और विवेकानंद सरोवर) गणगौर मेला (स्वादिष्ट व्यंजनों के संग) स्थान: माहेश्वरी भवन, सेवा सदन पथ, अपर बाजार, रांची समय: अपराह्न ३:०० बजे से रात्रि ९:०० बजे तक
नर सेवा ही नारायण सेवा है : डॉ नारायण टीम एबीएन, रांची। एमआरएस श्रीकृष्ण प्रणामी सेवाधाम ट्रस्ट की शाखा श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम दिव्यांग आश्रम पुंदाग मे परमहंस स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में आज सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में रह रहे मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम मे उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों का शहर के जाने माने न्यूरो सर्जन डॉ एचपी नारायण ने सबों की स्वास्थ्य की संपूर्ण जांच की एवं आवश्यकतानुसार सबको अपनी ओर से नि:शुल्क दवाइयां दी। डॉ नारायण ने स्वास्थ्य की देखभाल एवं निरोग रहने के सभी को पूर्ण जानकारी दी। जांच के समय डॉ नारायण को श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी एवं अशोक ठाकुर ने सहयोग किया। डॉ एचपी नारायण ने आश्रम मे रह रहे लोगों से बातचीत कर संस्था के द्वारा किये जा रहे सेवा के इस महान कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह में 2 रविवार 15 दिनो के अंतराल मे अपना आश्रम आकर सभी के स्वास्थ्य की जांच करेंगे। उन्होंने आश्रम की साफ सफाई की भी तारीफ की। सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि परम पूज्य गुरुजी स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में पीड़ित मानव सेवा का पावन तीर्थ प्रारंभ होने वाला झारखंड का प्रथम आश्रम है। आश्रम में प्रारंभिक दौर मे ऐसे पुरुष जो अपने जीवनकाल में अपने रिश्तेदारो, परिवारजनों से बिछुड गये हो एवं अस्पतालों, सड़क किनारे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों के आसपास असहाय एवं लाचार स्थिति में पड़े रहते हैं।उनको स्थानीय प्रशासन और समाज के प्रबुद्धजनों के सहयोग से एक अच्छा जीवन देने की कोशिश की जा रही है। तथा अभी अपना घर आश्रम में 37 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित लोगों की प्रभु सेवा की जा रही है।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 25/3/2025 को संध्या 5 बजे श्री महावीर मंडल मकचुन्द टोली चुटिया के तत्वावधान में महिलाओं का विशाल मंगलवारी जुलूस पारंपरिक गाजे बाजे, अस्र शस्त्र के साथ निकाली गयी। जो लोअर चुटिया, महादेव मंडा चुटिया मेन रोड होते हुए प्राचीन श्रीराम मंदिर तक गयी। जय श्रीराम के जयघोष और हाथों में तलवार थामे महिलाओं ने अस्र चलाना किया। महिलाओं में गजब का उत्साह था वो पूरी तरह से राम रंग में रंगी दिखीं। राम मंदिर में महिलाओं का स्वागत कैलाश केसरी, विजय साहू, मंदिर के पुजारी ने किया। इस जुलूस में मुख्य रूप से ललिता ओझा, ललीता महतो, नीलम तिवारी, ममता देवी, मोनी देवी, पिंकी सिंह, सोनावती देवी, लक्ष्मी देवी, ज्ञानी महतो, रवि सिंह, राकेश तिवारी, विनोद पाण्डेय, नवीन कुमार, दिनेश महतो, आदित्य सिंह, सिद्धार्थ पाण्डेय, निखिल पाण्डेय, पुष्कर महतो, बादल महतो, हंसिक सिंह आदि शामिल हुए।
बोकारो के मजदूर मैदान में श्री राजन जी महाराज के मुखारविंद से श्री राम कथा की अमृत वर्षा होगी प्रतिदिन कथा का समय अपराह्न 3 बजे से संध्या 7 बजे तक एबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो/ रांची। बड़े खुशी की बात है भगवान श्री राम की अनुपम कृपा एवं अनुकंपा से श्री राम कथा आयोजन ट्रस्ट, बोकारो के सान्निध्य में झारखंड को पुन: श्रीराम कथा का आयोजन करने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। परम पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज के कृपा पात्र एवं श्री राम कथा के समज्ञ पूज्य श्री राजन जी महाराज अपनी अमृतवाणी से श्री राम कथा का रसपान श्रद्धालु भक्तों को 27 मार्च से 4 अप्रैल 2025 तक अपराह्न 3 बजे से 7 बजे तक बोकारो के सेक्टर 4 के मजदूर मैदान में करायेंगे। भागवत प्रेमी रांची निवासी प्रमोद सारस्वत ने बताया 15 जनवरी 2023 को रांची के हरमू मैदान में श्री राजन जी महाराज ने अपने मुखारविंद से श्री राम कथा के रसपान की अमृत वर्षा का लाभ कथा श्रोताओ के बीच दिया था। श्री सारस्वत ने बताया कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि पुन: झारखंड के बोकारो में इनका आगमन 27 मार्च से 4 अप्रैल 2025 के बीच हो रहा है। कथा के प्रथम दिन श्री राम कथा महिमा, शिव पार्वती विवाह, श्री राम जन्मोत्सव, बाल लीला, सीताराम विवाह, श्री राम मंगल यात्रा, केवट प्रसंग, भरत चरित्र, एवं 4 अप्रैल को सुंदरकांड तथा श्रीराम राज्याभिषेक महाराज श्री के मुखारविंद से इन गाथाओं के अमृतवाणी के रसपान का आनंद आप उठा सकेंगे। प्रमोद सारस्वत ने बताया कि कथा में शामिल होने के लिए रांची सहित अन्य जिला से से काफी संख्या में लोग बोकारो कथा श्रवण को जा रहे हैं। रांची से मुख्य रूप से प्रेमचंद श्रीवास्तव (लाला जी), प्रमोद सारस्वत मुकेश काबरा, प्रकाश धेलिया ,सज्जन पाड़िया, निर्मल जालान, राजू पोद्दार नेमीचंद अग्रवाल, आनंद माणिक, दीपक पाठक, गोपाल सोनी, धर्मेंद्र तिवारी सहित काफी संख्या में लोग कथा में शामिल होंगे। आप सभी कथा प्रेमियों से आग्रह कि आप भी सपरिवार, ईस्ट मित्रों संग बोकारो सेक्टर 4 के मजदूर मैदान में पहुंच कर श्री राम कथा गंगा में डुबकी लगाकर अपने जीवन को कृतार्थ करें। उपरोक्त जानकारी प्रमोद सारस्वत (9431325438) ने दी।
हूटूप गौशाला धाम में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के आठवें दिन श्री राम के राज्याभिषेक प्रसंग पर सुंदर कथा का वाचनराज्याभिषेक न केवल एक ऐतिहासिक घटना थी बल्कि यह सत्य, धर्म, नीति और आदर्शों का प्रतीक था : किशोरी जीटीम एबीएन, रांची। हूटूप गौशाला धाम ओरमांझी में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा के आठवें दिन सुप्रसिद्ध कथा वाचक सुश्री संगीता किशोरी जी ने श्री राम के राज्याभिषेक प्रसंग पर मार्मिक एवं बहुत सुंदर कथा का वाचन किया। इस दिन कथा के साथ-साथ विशेष झांकियां भी प्रस्तुत की गयीं, जो श्रद्धालुओं के बीच अत्यधिक सराही गयी। संगीता किशोरी जी ने राम के राज्याभिषेक प्रसंग को अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक तरीके से प्रस्तुत किया।उन्होंने बताया कि श्री राम का राज्याभिषेक न केवल एक ऐतिहासिक घटना थी, बल्कि यह धर्म, नीति और आदर्शों का प्रतीक था। जब श्रीराम के जीवन में वनवास समाप्त हुआ और उन्हें अयोध्या लौटने का अवसर मिला, तो उनके स्वागत के लिए पूरी अयोध्या नगरी सज गयी थी। उनके राज्याभिषेक पर राजा दशरथ की तपस्या और माता कौशल्या के आशीर्वाद की महिमा भी स्पष्ट रूप से दर्शायी गयी। कथा वाचन के दौरान संगीता किशोरी जी ने यह भी बताया कि श्रीराम का राज्याभिषेक केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि यह आदर्श शासक बनने की प्रेरणा देने वाला अवसर था। उनके जीवन में हमेशा सत्य, धर्म और न्याय की प्रतिष्ठा रही, और उनके शासनकाल में अयोध्या एक आदर्श राज्य के रूप में उभरी। उन्होंने बताया कि राम के राज्याभिषेक के समय अयोध्यावासियों ने उनके लौटने को एक नवजीवन के रूप में देखा और पूरा वातावरण उल्लासित हो गया। कथा के बाद झांकियों की प्रस्तुति भी की गयी, जिसमें श्रीराम के राज्याभिषेक, अयोध्या के स्वागत समारोह और श्रीराम के जीवन के अन्य प्रमुख प्रसंगों को जीवंत रूप में दर्शाया गया। झांकियों में कलाकारों ने जीवंत अभिनय, रंग-बिरंगे परिधान और आकर्षक मंच सजावट के माध्यम से राम कथा के दृश्य को प्रस्तुत किया। दर्शक मंत्रमुग्ध होकर इस अद्भुत प्रस्तुति को निहारते रहे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भव्य उत्सव का आनंद लिया और श्री राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। कथा वाचन और झांकी की इस सुंदर प्रस्तुति ने सभी को राम के सत्य, धर्म और कर्तव्य के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा दी। अंत में संगीता किशोरी जी ने सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया और सभी को जीवन में श्री राम के मार्गदर्शन का पालन करने का आह्वान किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और कथा की भव्यता का अनुभव किया। आज श्रीकृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, प्रवक्ता संजय सर्राफ एवं सदस्य विष्णु सोनी ने संगीता किशोरी जी को अंगवस्त्र ओढ़ाकर, साफा व माला पहनाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर अभिनंदन एवं सम्मानित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक वासुदेव भाला एवं मुकेश काबरा, चंद्रकांत रायपत, सोहन दारूका, रवि नारसरिया, राम साबू, मनोज काबरा, राजेश पोद्दार, विपिन भाला, किशन नारसरिया, बनवारी भाला, प्रमोद बजाज, मुकेश पोद्दार, बसंत मुरारका नटवर सिसवाल, मुन्ना शर्मा अशोक सुंधानी, राजेंद्र अग्रवाल, संजय सर्राफ, विष्णु सोनी, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। उक्त जानकारी कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
भगवान शिव के अवतार ऋषि दुर्वासा भारत के पौराणिक इतिहास में अनेक ऐसे ऋषियों, मुनियों का जिक्र है, जिनके पास अलौकिक शक्तियां थीं। वह अपनी इसी शक्ति के कारण चाहे तो श्राप देकर सामने वाले को भस्म कर सकते थे या फिर वरदान के द्वारा किसी का जीवन खुशियों से भर देते थे। यह सब उन्हें क्रोधित करने व प्रसन्न करने से जुड़ा था।ऐसे ही एक महर्षि थे दुर्वासा ऋषि, जो अपने क्रोध के लिए जाने जाते थे। ऋषि दुर्वासा को शिव का अवतार कहा जाता था लेकिन जहां भोले शंकर को प्रसन्न करना बेहद आसान माना जाता है वहीं ऋषि दुर्वासा को प्रसन्न करना शायद सबसे मुश्किल काम था। उनका ज्ञान एवं तपोबल था। वे एक सिद्ध योगी हैं। उन्हें क्रोध और श्राप देने के कारण जाना जाता है।इनके पिता महर्षि अत्रि और माता सती अनुसूइया जी थीं। महर्षि अत्रि जी ब्रह्मा के मानस पुत्र थे और उनकी पत्नी अनुसूया जी पतिव्रता थीं, जिस कारण उनके पातिव्रत धर्म की परीक्षा लेने हेतु देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती ने भगवन ब्रह्मा, विष्णु और महेश को उनके सतीत्व की परीक्षा लेने आग्रह किया।माता सती अनुसूइया ने अपने तपोबल से उन्हें शिशुओं के रूप में बदल दिया। माता सरस्वती, माँ लक्ष्मी और माँ पार्वती के अनुरोध पर सती अनुसूया ने उन्हें मुक्त कर दिया। त्रिदेव ने उन्हें अपने समान पुत्रों की प्राप्ति का वरदान दिया। भगवान् ब्रह्मा जी चंद्रमा के रूप में, भगवान् विष्णु दत्तात्रेय जी के रूप में और भगवान् शिव जी दुर्वासा के रूप में अपने-अपने अंश से माता सटी अनुसूया के पुत्र के रूप में प्रकट हुए।पूर्वकाल में महर्षि अत्रि ने संतान की प्राप्ति के लिए भगवान् ब्रह्मा से प्रार्थना की तो उन्होंने ऋषि अत्री को अपनी पत्नी सती अनुसूइया सहित ऋक्षकुल पर्वत पर पुत्र कामना के लिए कठोर तपस्या करने का आदेश दिया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर त्रिदेव ने प्रकट होकर वरदान दिया कि त्रिदेव उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे।दुर्वासा ऋषि ने अपनी साधना एवं तपस्या द्वारा अनेक सिद्धियों को प्राप्त किया और अष्टांग योग का अवलम्बन कर अनेक महत्वपुर्ण उपलब्धियां प्राप्त कीं। ऋषि दुर्वासा जीवन-भर भक्तों की परीक्षा लेते रहे अपने महा ज्ञानी स्वरूप होने तथा सभी सिद्धियों के बावजूद भी ऋषि दुर्वासा अपने क्रोध को नियंत्रित नहीं कर पाते थे। उन्हें कभी-कभी अकारण ही भयंकर क्रोध भी आ जाता था और अपने क्रोधवश वे किसी को भी श्राप दे देते थे। उनके श्राप के कारण शकुन्तला को अनेक कष्ट झेलने पड़े।एक बार कुंती के अतिथ्य सत्कार से प्रसन्न होकर उन्होंने उसे एक मंत्र प्रदान करते हैं जिसके द्वारा वह किसी भी देवता का आहवान कर सकती थी। इसी वरदान स्वरुप कुंती ने सूर्यदेव का आवाहन किया जिससे परिणाम स्वरूप कुँवारेपन में ही उन्हें कर्ण की प्राप्ति हुई। बाद में पाण्डु के शापग्रस्त होने पर उन्होंने और माद्री ने युधिष्टर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव की प्राप्ति की।दुर्वासा ऋषि ने भगवान् श्री कृष्ण की परीक्षा लेने के लिए उन्हें अपनी जूठी खीर को शरीर पर मलने को कहा। भगवान् श्री कृष्ण ने ऐसा ही किया। ऋषि दुर्वासा ने प्रसन्न होकर भगवान् श्री कृष्ण को वरदान दिया कि सृष्टि का जितना प्रेम अन्न में होगा उतना ही उनमें भी होगा।ऋषि दुर्वासा महाराज अम्बरीष के राजभवन में पधारे। उस दिन राजा अंबरीष निर्जला एकादशी उपरांत द्वादशी व्रत पालन में थे। पूजा पाठ करने के पश्चात राजा ने ऋषि दुर्वासा को प्रसाद ग्रहण करने का निवेदन किया ताकि वे अपना व्रत पूर्ण कर सकें। परंतु ऋषि दुर्वासा यमुना स्नान करके ही कुछ ग्रहण करने की बात कहकर चले गए। इधर पारण का समय समाप्त हो रहा हो रहा था; अतः ब्राह्मणों के परामर्श के अनुसार राजा ने प्रसाद के रूप में चरणामृत ग्रहण कर लिया।ऋषि दुर्वासा ने यह जान कर राजा अम्बरीश को भस्म करने के लिए अपनी जटा से क्रत्या नामक राक्षसी को उत्पन्न किया। राजा ने बिना विचलित हुए भगवान विष्णु का स्मरण किया। सुदर्शन चक्र राजा अंबरीष करते थे।कृत्या जैसे ही राजा पर झपटी उसे सुदर्शन चक्र ने नष्ट कर दिया और अब दुर्वासा ऋषि आगे आगे और सुदर्शन चक्र उनके पीछे पीछे। दुर्वासा जी को अपना पिंड छुड़ाना भारी पड़ गया। तीनों लोकों में भागने के बाद वे भगवान् शिव की शरण में गए तो भगवान् शिव ने अपने असमर्थता प्रकट की और भगवान् विष्णु की शरण में जाने को कहा।भगवान् विष्णु ने उन्हें राजा अम्बरीश से क्षमा मांगने को कहा। ऋषि दुर्वासा राजा अम्बरीश की शरण में गए और अपने आचरण के लिए क्षमा माँगी। महर्षि दुर्वासा की यह दशा देखकर राजा अम्बरीश ने सुदर्शन चक्र की स्तुति कर उन्हें लौट जाने का आग्रह किया।दुर्योधन ने ऋषि दुर्वासा के आगमन पर उनकी बहुत आवभगत की जिससे वे खुश हो गए। उन्हें प्रसन्न कर दुर्योधन ने उन्हें युधिष्टर का आथित्य स्वीकार करने को कहा और ऐसे वक्त जाने का आग्रह किया जब वे भोजन कर चुकें। ऐसा ही हुआ। द्रौपदी ने सूर्यदेव द्वारा दी गई दिव्य बटलोई को माँज दिया था। ऋषि अपने शिष्यों सहित स्नान ध्यान को तत्पर हुए तो द्रौपदी ने भगवान् श्री कृष्ण का स्मरण किया।भगवान् श्री कृष्ण प्रकट हो गए। द्रौपदी ने अपनी समस्या बताई तो उन्होंने बटलोई को माँगा और उसे अन्दर से देखा तो एक साग का पत्ता उन्हें लगा हुआ मिल गया और उन्होंने उसे ही खा लिया। उनके साग के पत्ते को खाते ही दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों की भूख खत्म हो गई और वे सब युधिष्टर के श्राप के भय से वहाँ लौट कर ही नहीं आये।गुरु नानक देव दुर्वासा ऋषि के अंश रूप में पैदा हुए थे।
घर में कबूतर का घोंसला बनाना शुभ या अशुभ, जानिये क्या कहते हैं शास्त्र? एबीएन सोशल डेस्क। वास्तु शास्त्र में पक्षियों के घोंसले और उनके रहने के स्थान के बारे में बताया गया है। इसके साथ ही वास्तु शास्त्र सार और समरांगण सूत्रधार जैसे ग्रंथों में भी पक्षियों के घर पर आने के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों का वर्णन किया गया है। अगर बात करें कबूतर की, तो गरुड़ पुराण में इसको पितरों का प्रतीक माना गया है। वहीं, बृहत संहिता में भी कबूतर का बार-बार घर में घोंसला बनाना शनि या पितृ दोष से जोड़ा जाता है। यहां शुभ होता है कबूतर का घोंसला कुछ मान्यताओं के अनुसार कबूतर को शांति, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। अगर यह घर के बाहरी हिस्से, छत या बालकनी में घोंसला बनाता है तो इसे शुभ माना जाता है। कुछ मान्यताओं में इसे पितरों का आशीर्वाद भी माना गया है। कई जगहों पर माना जाता है कि घर में कबूतर का घोंसला बनना या अंडा देना शुभ घटना घटने का संकेत होता है। अगर कबूतर का घोंसला उत्तर या पूर्व दिशा में हो यह भी धन, सुख और पॉजिटिव एनर्जी लाने वाला माना जाता है। इन दिशाओं को बेहद ही शुभ माना गया है और यहां पक्षियों का वास घर की उन्नति का संकेत हो सकता है। कबूतर का इन जगहों पर घोंसला बनाना होता है अशुभ शास्त्रों के अनुसार अगर कबूतर घर के मेन गेट या खिड़की के पास घोंसला बना ले या अंडा दे तो इसे नकारात्मक संकेत माना जाता है। इससे घर के कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं। इसके साथ ही परिवार के दुखों का कारण बनता है। अगर कबूतर ने रसोईघर या फिर घर के अंदर घोंसला बना लिया है या अंडे दिये हैं तो इससे स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक हानि के योग बनते हैं। वहीं, अगर घर में काफी कबूतर इकट्ठे हो जायें तो यह शनि और राहु दोष को बढ़ाता है और घर में अनचाही परेशानियां आने की संभावना बढ़ जाती है।
फागुन की है फुहार, उमंगों का त्यौहाररंगों का त्यौहार होली लेकर आई गणगौर, प्यारा ये गणगौर का त्यौहारटीम एबीएन, रांची। माहेश्वरी महिला समिति, रांची आप सभी के लिए लेकर आई है गणगौर सिँझारा। समिति अध्यक्ष भारती चितलांगिया एवं सचिव विमला फलोर ने बताया आगामी 24 मार्च शाम 4बजे लक्ष्मी नारायण मंदिर के हॉल मे मारवाड़ी समाज कि महिला, युवतियाँ को सोलह श्रृंगार कर आना है, अगर कोई अपने घर से गणगौर लाना चाहे तो ला सकते हैं। सिँझारा सयोजक पूनम राठी, रितिका लाखोटिया, रश्मि मालपानी, सीमा मालपानी के अनुसार प्रोग्राम मे मारवाड़ी गाने पे डांस और नाटक के साथ, हौज़ी एवं अन्य कई तरह के के गेम्स का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम पास की कीमत 350/- है। गणगौर सिझारा में भाग लेने के लिए पहले से महिला समिति सदस्य से या फिर माहेश्वरी भवन के ऑफिस से पास लेना अनिवार्य है।DATE - 24TH March 2025Time - 4pm onwardPlace - Laxminarayan mandir hallPREBOOK PASSES NECESSARY 350/ -CALL ON GIVEN NO.poonam Rathi 80848 85853Ritika Lakhotia 8002837778Rashmi Malpani 7549099833 Seema Malpani 8603653882*धन्यवाद* *मीडिया प्रभारी* *रश्मि मालपानी*
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