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हुटुप गौशाला के श्रीराम कथा में भक्तों ने सुनी शिव - पार्वती विवाह की पवन कथा
Published / 2025-03-18 18:53:05
हुटुप गौशाला के श्रीराम कथा में भक्तों ने सुनी शिव - पार्वती विवाह की पवन कथा

*प्रेस विज्ञप्ति**हुटुप गौशाला धाम में श्री राम कथा महायज्ञ के दूसरे दिन सुश्री संगीता किशोरी जी ने शिव पार्वती विवाह की मार्मिक कथा सुनाई**मनुष्य अपने जीवन में ईश्वर के प्रति सच्चे प्रेम और श्रद्धा से जुड़े रहे तो उसे जीवन के कठिन राह पर भी सुख और शांति प्राप्त होगी: संगीता किशोरी*रांची के प्रसिद्ध हुटुप गौशाला धाम में चल रहे नौ दिवसीय श्री राम कथा महायज्ञ के दूसरे दिन सुप्रसिद्ध कथा वाचक सुश्री संगीता किशोरी जी ने श्रद्धालुओं को श्री शिव पार्वती विवाह की अद्भुत और मार्मिक कथा सुनाई। इस कथा ने श्रद्धालुओं के हृदय को गहरे तरीके से छुआ और भगवान शिव तथा माता पार्वती के अद्भुत प्रेम और त्याग की गाथा को बताया। कथा में सुश्री संगीता किशोरी जी ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शिव पार्वती का विवाह केवल एक सांसारिक मिलन नहीं था, बल्कि यह एक आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक है, जो भक्तों को सच्चे प्रेम, समर्पण और भक्ति का मार्ग दिखाता है। कथा में उन्होंने विस्तार से वर्णन किया कि कैसे भगवान शिव, जो संन्यासियों के परम प्रतीक माने जाते हैं, ने माता पार्वती से विवाह करके संसारिकता का पालन किया, जबकि पार्वती जी ने अपने कठिन तपस्या और भक्ति से भगवान शिव को प्रसन्न किया।कथा में विशेष रूप से यह बात कही गई कि शिव और पार्वती का विवाह, एक ओर जहां संसारिक जीवन की नश्वरता और त्याग का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर यह एक आदर्श प्रस्तुत करता है कि सच्चे प्रेम और विश्वास से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। सुश्री संगीता किशोरी जी ने यह भी बताया कि शिव पार्वती के विवाह से यह सिखने को मिलता है कि अगर मनुष्य अपने जीवन में ईश्वर के प्रति सच्चे प्रेम और श्रद्धा से जुड़ा रहे, तो उसे जीवन के कठिन रास्तों पर भी सुख और शांति प्राप्त होती है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के हर एक प्रसंग को बड़े ध्यान और श्रद्धा से सुना। कथा में भगवान शिव के अद्वितीय व्यक्तित्व और माता पार्वती के सच्चे प्रेम को दर्शाया गया, जिससे पूरे माहौल में भक्तिमय ऊर्जा का संचार हुआ।इस कथा ने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यधिक संदेश दिया। सुश्री संगीता किशोरी जी के शब्दों ने यह स्पष्ट किया कि केवल भक्ति से ही नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण से ही जीवन में सच्ची शांति और सफलता प्राप्त की जा सकती है। रांची के हुटुप गौशाला धाम में चल रहे इस महायज्ञ में भक्तों का भारी जनसमूह उपस्थित है, जो इस दिव्य कथा का हिस्सा बनकर अपने जीवन को धर्म और भक्ति की राह पर चलने के लिए प्रेरित हो रहा है। उक्त जानकारी देते हुए कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक बासुदेव भाला एवं मुकेश काबरा, बनवारी भाला अशोक सोढ़ानी, किशन साबू, नरेंद्र लखोटिया, उदय शर्मा कपिल भाला, सहित बड़ी संख्या में आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ो  महिलाएं पुरुष उपस्थित थे। 19 मार्च तीसरे दिन श्री राम जन्मोत्सव पर कथा होगा।मुकेश काबरासंजय सर्राफ

सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में दिव्यांग मंदबुद्धि निराश्रित प्रभु जी के बीच मना होली का उत्सव
Published / 2025-03-16 16:13:18
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में दिव्यांग मंदबुद्धि निराश्रित प्रभु जी के बीच मना होली का उत्सव

*प्रेस विज्ञप्ति**सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम मे दिव्यांग मंदबुद्धि निराश्रित प्रभु जी के बीच मना होली का उत्सव*परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य मे श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वाधान मे विगत 1 वर्ष से चल रहे पीडित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) मे श्रद्धालुओ एव ट्रस्ट के सदस्यों ने आश्रम में रह रहे 37 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवाधारी यो के साथ श्री कृष्ण- राधा मंदिर के परिसर में होली खेली गई। होली के मधुर गानों में लोग खूब थरके एवं खूब मस्ती की, सबों ने आपस में अबीर- गुलाल लगाकर गले लगकर होली की शुभकामनाएं दी एवं आशीर्वाद लिया। सबों ने साथ में मिलकर स्वादिष्ट व्यंजनों, पकवानों एवं ठंडाई का भी खूब लुफ्त उठाया।मंदिर के पुजारी अरविंद पांडे ने कहा कि होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार है जो प्रेम, सौहार्द और जीवन की खुशियों का प्रतीक है। इसके संदेश को हम सबों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। सद्गुरु कृपा अपना घर के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा की होली का पर्व सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह त्यौहार हमें बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। इस अवसर पर अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष निर्मल जालान, राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल सचिव मनोज कुमार चौधरी पुर्णमल सर्राफ, चिरंजीलाल खण्डेलवाल, सुरेश अग्रवाल, सज्जन पाड़िया,नन्द किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान,पवन कुमार पोद्दार,सेवा साथी मुरली प्रसाद, मनोज कुमार,सत्यम कुमार,सुधीर कुमार,परमेश्वर साहु,महेश वर्मा, चन्द्रदीप साहु,हरीश कुमार सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।प्रेस प@उक्त जानकारी सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

कांके रोड राम मंदिर के पास का होलिका दहन बना आकर्षण का केंद्र
Published / 2025-03-13 19:44:37
कांके रोड राम मंदिर के पास का होलिका दहन बना आकर्षण का केंद्र

कांके रोड, प्रेमसंस मोटर के पास, राम मंदिर चौक पर, मारवाड़ी समाज की महिलाओं के द्वारा, आज होलिका पूजन का कार्यक्रम, विधि विधान से आयोजित टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी समाज में होलिका दहन की एक विशेष परंपरा है। समाज की महिलाओं द्वारा पूरे विधि विधान के साथ होलिका दहन की परंपरा को पूरा किया जाता है। प्रत्येक घर में महिलाओं के द्वारा गोबर से बना बड़कुला तैयार की जाती है, जिसे पूरे धार्मिक रीति के साथ समाज की कुरीतियों को दूर करने के संकल्प के साथ दहन किया जाता है।  मारवाड़ी महिलाएं होलिका दहन के पूर्व ठंडी होली की पूजा करती है। घर के सभी सदस्य होलिका दहन से पूर्व घर पर पूजा करने के बाद होलिका दहन के लिए प्रस्थान करते हैं। किसी के हाथ में पूजा की थाल, किसी के हाथ में बड़कुल्ला की माला, किसी के हाथ में चना गेहूं की बाली वाला डंडा होता है।  भक्त प्रहलाद के रूप में केले के छोटे थम को लड़कियों के बीच रखा जाता है, जहां स्त्रियां कच्चे धागे से उसका फेरी लेती है। होलिका दहन से पूर्व इस केले की गांछी को निकालने के बाद अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है। शास्त्र संवत वैदिक मंत्रोंचार व पूजा के उपरांत भक्त प्रहलाद के जयकारे के साथ अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है। अग्नि प्रवेश होते ही लोग बाग इसकी परिक्रमा शुरू कर देते हैं। समाज के लोग सुखा गिरी गोला चढ़ाते हैं एवं साथ में लाए गए जो चना गेहूं आदि की बाली को सेंक कर प्रसाद के रूप में घर लेकर लौट जाते हैं। लौटते समय साथ में ले किसी बर्तन में जेल कंडे को ले जाते हैं, जिसमें गूगल डालकर उसके धुएं से घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते है।  मारवाड़ी समाज में नवविवाहितों महिलाओं के लिए अपने मायके में पहली होलिका दहन की पूजा विशेष व महत्व रखती है। होलिका दहन की पूजा के बाद बेटियां अपने सुख में दांपत्य जीवन हेतु इसकी चार परिक्रमा करती है तथा दूसरे दिन इस राख में से थोड़ी राख को एकत्रित कर गणगौर की पूजा आरंभ करती है जो 16 दिनों तक चलती है। गणगौर देवी पार्वती और भगवान शिव के दिव्य प्रेम को प्रदर्शित करने वाला त्यौहार है।  होली हिंदुओं का एक बड़ा महान पर्व है जो असत्य पर सत्य के विजय का प्रतीक है। हर साल फागुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन और अगले दिन होली मनाई जाती है। उक्त जानकारी कांके रोड के वरिष्ठ समाजसेवी किशन गोयल ने दी।

होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत एवं प्रेम, सौहार्द और जीवन में खुशियों का प्रतीक: संजय सर्राफ
Published / 2025-03-12 14:23:30
होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत एवं प्रेम, सौहार्द और जीवन में खुशियों का प्रतीक: संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा-धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि होली हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने गिले शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं और गले मिलकर होली की शुभकामनाएं देते हैं, होली से एक दिन पहले होलिका दहन मनाया जाता है, इस वर्ष होलिका दहन 13 मार्च को होगा। होली 14 एवं 15 मार्च को मनाया जाएगा। होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है,कथा के अनुसार होली का त्योहार भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद की जीत का प्रतीक है प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोकने की कोशिश की लेकिन प्रह्लाद ने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को आग में जलाने के लिए कहा लेकिन भगवान विष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा की और होलिका को आग में जला दिया इस जीत की खुशी मनाने के लिए होली का त्यौहार मनाया जाता है। होली का त्योहार रंगों का त्यौहार है जो प्रेम, सौहार्द और जीवन की खुशियों का प्रतीक है। राधा- कृष्ण के प्रेम का प्रतीक मानी जाने वाली होली की शुरुआत बरसाने में हुई थी।कहा जाता है कि जब राधा और कृष्ण बचपन में थे, तो वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर रंगों से खेलते थे। यह खेल उनके प्रेम और स्नेह का प्रतीक था, जो आज भी होली के रूप में मनाया जाता है।शिवपुराण के अनुसार,पार्वती ने शिव से विवाह के लिए कठोर तपस्या की। इंद्र ने कामदेव को शिव की तपस्या भंग करने के लिए भेजा।कामदेव ने शिव पर अपने पुष्प बाण से प्रहार किया, जिससे शिव की समाधि भंग हो गयी। क्रुद्ध होकर, शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में, देवताओं ने शिव को पार्वती से विवाह के लिए राजी किया। इस घटना को याद करते हुए, फाल्गुन पूर्णिमा को होली के रूप में मनाया जाता है। होली के रंगों का विशेष महत्व होता है यह रंग जीवन में खुशियां समृद्धि और ऊर्जा का प्रतीक है। हरा रंग का अपना एक विशेष अर्थ होता है लाल रंग प्रेम और शक्ति का, हरा रंग समृद्धि और नई शुरुआत का, पीला रंग ज्ञान और बुद्धि का, और नीला रंग शांति और विश्वास का प्रतीक है। होली के रंग न केवल हमारे जीवन को रंगीन बनाते हैं बल्कि यह हमें जीवन की विभिन्न रंगीन पहलुओं को भी सिखाते हैं। होली का त्योहार हमारे जीवन में रंगो, खुशियों और प्रेम की महत्व को दर्शाता है यह त्यौहार हमें बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है और हमें एक दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखने की प्रेरणा देता है। होली का पर्व सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है जो हमारे समाज को और भी मजबूत और खुशहाल बनाता है इसलिए हमें इस त्यौहार को पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाना चाहिए और इसके संदेश को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

श्याम मंदिर में फाल्गुन सतरंगी महोत्सव का शानदार समापन
Published / 2025-03-11 18:08:20
श्याम मंदिर में फाल्गुन सतरंगी महोत्सव का शानदार समापन

टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंडल, रांची द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फाल्गुन सतरंगी महोत्सव का आज तीसरे दिन अग्रसेन पथ स्थित श्याम मंदिर में भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर राजत सिंहासन पर विराजमान श्री श्याम प्रभु का भव्य एवम नैनाभीराम श्रृंगार किया गया। अहले सुबह से ही श्री श्याम प्रभु का द्वादशी दर्शन के लिए अपार जनसमूह उमड़ पड़ा। संपूर्ण दिवस भक्तगण कतारबद्ध होकर श्री श्याम प्रभु का दर्शन कर ज्योत में आहुति प्रदान कर रहे थे।  इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु का प्रिय खीर चूरमा का भोग अर्पित किया गया जो सम्पूर्ण दिवस प्रसाद रूपी मंदिर प्रारंग से भक्तगण के बीच वितरण किया गया। साथ ही संपूर्ण दिवस श्री श्याम मंदिर का परिसर श्याम प्रभु के जयकारों से गूंजता रहा। साथ ही भक्तों द्वारा 401 सवामणि का भोग श्याम प्रभु को निवेदित किया गया। साथ ही  श्याम मंडल के सदस्यों द्वारा रात्रि 8 बजे से संगीतमय संकीर्तन  पूरे मंदिर परिसर को श्याममय बना दिया। रात कल संवारे का ख्वाब आया दरबार अनोखा सरकार अनोखी  श्याम दातार से तू फरियाद तू कर खाटू बुला रहा है कृपा नहीं तो क्या है सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया...  जैसे भावपूर्ण भजनों पे श्याम भक्त झूमने पे मजबूर हो गये।  रात्रि 10 बजे महाआरती एवं प्रसाद वितरण के पश्चात तीन दिवसीय श्री श्याम सतरंगी मोहत्सव का समापन किया गया।  आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेश सारस्वत, बालकिशन परसरामपुरिया, राकेश सारस्वत, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, पप्पी शर्मा, अजय रूंगटा, सुदर्शन चितलंगिया, प्रदीप अग्रवाल, विकास पाड़िया का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मण्डल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

महू के राष्ट्रद्रोही जिहादियों को मिले कठोरतम दंड : बीरेंद्र बिमल
Published / 2025-03-10 21:34:16
महू के राष्ट्रद्रोही जिहादियों को मिले कठोरतम दंड : बीरेंद्र बिमल

टीम एबीएन, रांची। क्रिकेट में भारत के विजय का उत्सव मना रहे राष्ट्रप्रेमियों पर मध्य प्रदेश के महू में जिस प्रकार से जिहादी मुसलमानों ने हमला किया, वह उनकी राष्ट्रद्रोही मानसिकता को ही उजागर करता है। यह बार - बार दिखा है कि भारतीयों और हिंदुओं का हर उत्सव, हर खुशी जिहादियों का निशाना बनती है। चैम्पियंस ट्राफी में भारत की जीत महु के मुसलमानों को इतनी बुरी लगी कि मस्जिद से पत्थर चलने लगे। उत्सव मना रहा हिन्दू समाज, उनके घर, दुकान, मंदिर, गाड़ी आदि सब दंगाइयों के निशाने पर आ गये। हमेशा की तरह वे पत्थर बाजी, तोड़फोड़ तथा आगजनी करने लगे। आज हिन्दू समाज को भी यह समझ लेना चाहिए कि भारत को अन्न- जल पर पलनेवाले और देश की सभी कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लेनेवाले ये जिहादी घोर भारतविरोधी हैं। राज्य सरकारों को भी यह समझना चाहिए कि जब भी हिन्दू समाज का कोई उत्सव हो, पूर्व से ही मुस्लिम बहुल बस्तियों और मस्जिदों को पास पर्याप्त पुलिस बल तैनात करना चाहिए। झारखंड सरकार को भी इस घटना से सबक लेते हुए होली के अवसर पर सभी संवेदनशील स्थानों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए। आज समय की मांग है कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए अलग से कठोर राष्ट्रद्रोह का कानून बने। उस कानून में ऐसी व्यवस्था हो, कि राष्ट्रद्रोही हिंदूविरोधी जिहादी उपद्रवियों की नागरिकता छीन ली जाये। ऐसे तत्वों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित किया जाना चाहिए। जिन्हें भारत से इतनी घृणा है, देश उनका बोझ क्यों उठाये।

युवा मार्गदर्शक डाॅ चिन्मय पंड्या जी का भव्य स्वागत
Published / 2025-03-09 22:08:58
युवा मार्गदर्शक डाॅ चिन्मय पंड्या जी का भव्य स्वागत

एबीएन सोशल डेस्क। शान्तिकुञ्ज मुख्यालय हरिद्वार के युवा मार्गदर्शक डाॅ चिन्मय पण्ड्या का  गायत्री परिवार पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया क्षेत्र के गायत्री शक्तिपीठ में माँ गायत्री का प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर  आगमन हुआ। इस आगमन के अवसर पर उपस्थित युवा दल एवं जन समूह को संबोधित किए। वापसी में साधकों, कार्यकर्ताओं ने गायत्री चेतना केंद्र बेको, नवयुग दल एवं प्रज्ञा महिला मंडल टाटानगर ने डिमना चौक पर भव्य स्वागत किया।साथ ही साथ चंद्रावती नगर, चौका, तमाड़ पास रंगामाटी, बुंडू पास तुन्जु पीठ के प्रवेशद्वार पास के साथ साथ रांची एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया।  सुबह प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत गायत्री शक्तिपीठ चाकुलिया के परिसर मैं GPYG KOLKATA KE युवा साथियों द्वारा अपने 749 वां पौधा रोपण के अवसर पर एक पौधा आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी  के कर-कमलों से लगाया गया।इस पूरे आयोजन मैं डॉ चिन्मय भैया जी के बहुमूल्य समय झारखंड को देने के लिए प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ झारखंड के समन्वयक साधक संतोष कुमार राय और उनकी  पूरी साधक टीम तथा रांची शक्तिपीठों के साधक-शिष्य भाई-बहनों की तरफ से आभार व्यक्त किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार टाटानगर नवयुग दल के मीडिया प्रभारी दीपक कुमार और रांची के जय नारायण प्रसाद ने दी।

गायत्री परिवार ने घर-घर पहुंचाया शांतिकुंज हरिद्वार का संदेश
Published / 2025-03-08 22:08:17
गायत्री परिवार ने घर-घर पहुंचाया शांतिकुंज हरिद्वार का संदेश

एबीएन सोशल डेस्क। रांची गायत्री परिवार के 24 से अधिक सक्रिय भाई बहनों ने मिलकर रांची, बरियातू के जय प्रकाश नगर में घर-घर जाकर संपर्क किया। शांतिकुंज हरिद्वार का संदेश विचार क्रांति अभियान, मानव में देवत्व और धरती पर स्वर्ग का अवतरण का संदेश बताते हुए गुरुदेव रचित साहित्य अखंड ज्योति पत्रिका, हारिए न हिम्मत, गायत्री चालीसा, सनबोर्ड पर लगा हुआ देव स्थापना का फोटो प्रत्येक घर में उस साहित्य का महत्व बताते हुए प्रदान किया  गया। कार्यक्रम के पूर्व वहां स्थानीय शिवमंदिर परिसर में दोपहर एक बैठक हुई और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मातृवत गुरुसत्ता परम वंदनीया गुरुमाता भगवती देवी के जीवन के योजना और क्रिया-कलाप को स्मरण किया गया और महिला मंडल प्रतिनिधियों द्वारा नारी जागरण आन्दोलन और नारी सशक्तिकरण आदि पर प्रकाश डाला गया।  नारी शक्ति परिवार व समाज की नींव है : महिला मंडल प्रतिनिधि  बताया  कि नारी प्रकृति की बेटी है, नारी शक्ति परिवार और समाज की आधारशिला है, नींव है, सृष्टि की परम सौन्दर्यमयी सर्वश्रेष्ठ कृति है। महिला दिवस पर नारी जागरण, सशक्तिकरण, शिक्षण, प्रशिक्षण  पर गायत्री परिवार महिला मंडल प्रतिनिधित्व में कार्यक्रम करते चचार्एं और विचार व्यक्त प्रस्तुत किये गये। आध्यात्मिक माहात्म्य, धार्मिक विश्वास, देव पूजन आदि अनेक विषयों पर संक्षिप्त प्रकाश डाल बताया गया कि सामाजिक व सांस्कृतिक विकास परिदृश्य में नारी का महत्व कम नहीं है, अनेक क्षेत्र में अग्रगण्य एवं उन्नतिशील हैं। कहा कि समाज में फैली विकृति, कुसंसकृति, कुरीति उन्मूलन, अशिक्षा, अंधकार और अंधविश्वास और भटकाव को दूर करना है। अब नारी की उपेक्षणीय स्तिथि एवं दुर्गति, पिछड़ापन असह्य है। गायत्री परिवार मिशन की कार्यपद्धति, क्रिया-कलाप शान्तिकुञ्ज तत्वावधान में चलाए जा रहे अनेक विषयों पर भी चरचाएं कीं। बताया कि गायत्री परिवार शान्तिकुञ्ज तत्वावधान में 21वीं सदी में अनेकानेक प्रायोजित युग परिवर्तन का महान अभियान संचालन में महिला मंडल प्रतिनिधित्व के माध्यम से सर्वतोभावेन मातृ शक्ति को जाग्रत व समुन्नत करना है तथा घर घर अलख जगाकर लक्ष्य  दिव्य वातावरण विस्तार करना है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के दीपक दयाल प्रसाद और जय नारायण प्रसाद ने दी।

शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद  सरस्वती जी महाराज का नागरिक अभिनंदन 20 को मारवाड़ी भवन में
Published / 2025-03-08 22:06:43
शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज का नागरिक अभिनंदन 20 को मारवाड़ी भवन में

टीम एबीएन, रांची। द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज का नागरिक अभिनंदन एवं प्रवचन आगामी 20 मार्च को हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन रांची में होगा। स्वामी सदानंद जी महाराज के नागरिक अभिनंदन की तैयारी हेतु एक शंकराचार्य अभिनंदन कमेटी का गठन प्रसिद्ध उद्योगपति विनय सरावगी के नेतृत्व में किया गया है।  शंकराचार्य अभिनंदन कमेटी की  बैठक कमेटी के मुख्य संयोजक विनय सरावगी की अध्यक्षता में महाराजा श्री अग्रसेन भवन में हुई। बैठक में विस्तृत जानकारी देते हुए विनय सरावगी ने बताया कि जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के शिष्य हैं। तथा स्वामी स्वरूपानंद के ब्रह्मलीन होने के बाद स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज द्वारका शारदापीठाधीश्वर के शंकराचार्य बने। विदित हो कि उनका रांची मे आगमन प्रथम बार होगा। स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज  8 मार्च से 15 मार्च तक विश्व कल्याण आश्रम मनोहरपुर, चक्रधरपुर मे रहेंगे। शंकराचार्य स्वामी स्वधर्मानयन व धर्म संचार यात्रा के तहत गांव-गांव में धर्म संचार सभा कर रहे हैं।  शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी का 20 मार्च को अपराह्न 3 बजे रांची के मारवाड़ी भवन मे विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा नागरिक अभिनंदन व स्वागत किया जायेगा। तत्पश्चात उनका प्रवचन व आशीर्वाद धर्म प्रेमियों को मिलेगा। स्वामी जी के भव्य अभिनंदन समारोह हेतु गठित शंकराचार्य अभिनंदन कमेटी में मुख्य संयोजक विनय सरावगी होंगे एवं संयोजक मंडल सदस्यों में बसंत मित्तल, रवि शंकर शर्मा, ललित कुमार पोद्दार, सुरेश चंद्र अग्रवाल, विनोद कुमार जैन, अशोक पुरोहित, शिव शंकर साबू, मनोज बजाज, राजकुमार मारू, पवन शर्मा, मनोज चौधरी, पवन पोद्दार, प्रमोद अग्रवाल, मनीष लोधा को शामिल किया गया है। कमेटी के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ होगें। बैठक मे सदस्यों को विभिन्न कार्यों हेतु जिम्मेवारियां दी गयी। आज की बैठक मे-सुरेश चंद्र अग्रवाल, रवि शंकर शर्मा, ललित कुमार पोद्दार, विनोद कुमार जैन, पवन पोद्दार, मनोज चौधरी, मनोज बजाज, अनिल कुमार अग्रवाल, कमल कुमार जैन, संजय सर्राफ, प्रमोद सारस्वत, कौशल राजगढ़िया, आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी कमेटी के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी। उक्त जानकारी शंकराचार्य अभिनंदन कमेटी के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

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