मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक सुख नहीं, बल्कि आत्मा की उन्नति एवं परमात्मा से एकत्व की प्राप्ति है : स्वामी सदानंद महाराज टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग रांची में अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर एक दिव्य एवं भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर को सुंदर पुष्पों सजाया गया था, जिससे वातावरण एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण एवं सामूहिक प्रार्थना से हुई, जिसके पश्चात मुख्य आकर्षण के रूप में परमहंस डॉ संत शिरोमणि श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज की पावन उपस्थिति में भजन, सत्संग एवं प्रवचन का आयोजन किया गया। गुरुदेव ने अपनी दिव्य वाणी से श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का अत्यंत भावपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक वर्णन प्रस्तुत किया। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति मार्ग की महत्ता, धर्म की स्थापना एवं जीवन में अध्यात्म के वास्तविक स्वरूप को सरल, सहज एवं प्रेरणादायक शैली में समझाया। सद्गुरु श्री सदानंद जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि- मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक सुख नहीं, बल्कि आत्मा की उन्नति एवं परमात्मा से एकत्व की प्राप्ति है। श्रीमद्भागवत हमें यही शिक्षा देती है कि सेवा, सच्चाई और सत्संग के मार्ग पर चलकर हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बड़े श्रद्धा भाव से प्रवचन श्रवण किया और भजन-कीर्तन में सम्मिलित होकर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सत्संग के उपरांत भव्य गुरु पूजन का आयोजन किया गया, जहां भक्तों ने अपने परम पूज्य गुरुदेव का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु पूजन के बाद प्रसाद वितरण का कार्यक्रम हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर दिव्य अनुभूति प्राप्त की। आयोजन के दौरान अनुशासन, समर्पण और सेवाभाव की झलक हर पहलू में देखने को मिली। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि कार्यक्रम की सफलता ने न केवल भक्ति की भावना को सशक्त किया, बल्कि समाज को एकता, प्रेम, और सेवा का संदेश भी दिया। यह दिव्य आयोजन अनंत चतुर्दशी को आध्यात्मिक पर्व में परिवर्तित कर गया, जिसे श्रद्धालु लंबे समय तक स्मरण करते रहेंगे। इस अवसर पर ट्रस्ट के सह संरक्षक विजय कुमार अग्रवाल, निर्मल छावनिका, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, मनोज चौधरी सज्जन पाड़िया, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, नवल अग्रवाल, विशाल जालान, नंदकिशोर चौधरी, मधुसूदन जाजोदिया, सुरेश अग्रवाल सुरेश चौधरी, मनीष सोनी, सुनील पोद्दार, संजय सर्राफ, पवन पोद्दार, पुजारी अरविंद पांडे, बिमला जालान शीला मुरारका, रमा डोकानिया, कविता गाडोदिया, संतोष देवी, अग्रवाल ललिता पोद्दार, रेखा पोद्दार, मनीषा जालान, सरिता अग्रवाल, प्रमिला पुरोहित, सुधा सुलतानिया, सीता शर्मा, शारदा पोद्दार, मंगला मोदी, उषा मोदी, आशा मुंजाल, दीपिका मोतीका, आशा मिश्रा, आशा सिंह, बिमला मिश्रा, सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में पीएस नरसिम्हा एवं जायमाल्या बागची की पीठ ने शिक्षकों को राष्ट्र की बौद्धिक रीढ़ बताते हुए तल्ख टिप्पणी की कि -शिक्षक ही समाज के शिल्पकार होते हैं। देश के भविष्य और राष्ट्र निर्माता हैं। भगवान और गुरु दोनों सामने हों तो गुरु का वंदन करना चाहिए, जननी और जनक से ज्यादा सम्मान गुरु को देना चाहिए। ऐसे महिमामंडन करने वाले वचनों, कथनों का कोई अर्थ नहीं है अगर उनको सम्मानजनक वेतन नहीं मिलता है ।यह देश में ज्ञान के महत्व को घटाता है। इस टिप्पणी ने तमाम सवालों को जन्म दिया है। शिक्षक का स्तर समाज के सामाजिक -सांस्कृतिक लोकाचार को दशार्ता है। शिक्षा मुक्ति की सांस्कृतिक कार्रवाई है और जब मुक्तिदाता स्वयं समाज में सम्मान, उचित वेतन और अपनी हैसियत की तलाश में हैं तो इससे बड़ी विडंबना क्या होगी? वर्तमान में शिक्षक के प्रति हमारे नजरिए में बदलाव आया है। शिक्षक से आदर्श, चरित्र सादगी की उम्मीद सबको है पर परंपरागत झोलाछाप मास्टर की छवि से इतर शिक्षक का इमेज समाज को गंवारा नहीं है। समाज में आदर्श का पैमाना बदल गया है। आज मिलेनियम, रसूखदार हैसियत वाले हमारे प्रेरणा स्रोत हैं। आखिर शिक्षक के प्रति नजरिया में क्यों बदलाव आया? आज स्कूल शिक्षा का मंदिर कम व्यापार का केंद्र ज्यादा है। अभिभावक ग्राहक, शिक्षा उत्पाद और इस व्यापार में शिक्षक कहां है? सोचिए! साइकिल, पोशाक, छात्रवृत्ति मिड डे मील और कितनी योजना है पर वास्तविक शिक्षा कहां है? खिचड़ी की महक से प्रेरित होकर स्कूल में पहुंचने वाले प्रतियोगी परीक्षाओं में कैसे टिकेंगे? निजी विद्यालय में किताब, कापी, ड्रेस की दुकान है और शिक्षा महंगी। कुकुरमुत्ता की तरह ट्यूशन की दुकान, परचून की दुकान की तरह खुले बीएड, डीएलएड या अन्य शिक्षक शिक्षण विद्यालय से देश में भविष्य का कैसा निर्माण होगा? जब एजुकेशन एक प्रीपेड सर्विस से ज्यादा कुछ नहीं तो कैसे एक आइडियल सोसायटी के निर्माण की आशा की जा सकती है? आज गुरु शिष्य के संबंध में रिसेशन का दौर क्यों है? अब यह रिश्ता इतना पावन क्यों नहीं रहा? शिक्षक या अध्यापक क्या एक वृति है? यह प्रवृत्ति का रूप धारण क्यों नहीं करती? परंतु शिक्षक के चाल चरित्र में आज बदलाव आया है। इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। ई लर्निंग, गूगल गुरु, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भी शिक्षक के महत्व को कम नहीं किया जा सकता है। आज शिक्षक भी सामाजिक बदलाव को स्वीकार कर नए अवतार में हैं। मास्टर साहब आज अपडेट, डिजिटल फिट और हर चुनौती को स्वीकार करने में सक्षम हैं और उचित सम्मान तथा वेतन के हकदार भी हैं।इसलिए शिक्षक दिवस के दिन हम लोगों को शिक्षा, शिक्षक- छात्र संबंध, शिक्षक का सम्मान, वेतन, सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के प्रति सकारात्मक सोच रखते हुए सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक बदलाव की नींव रखने की जरूरत है ताकि देश के भविष्य जिनके हाथ में है वो हाथ मजबूत हो। शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...।
युवाओं को शिक्षा क्षेत्र में मिला तोहफा सभ्यता, संस्कृति और मर्यादा के संगम को ही ब्राह्मण समाज कहते हैं : प्रमोद सारस्वत टीम एबीएन, रांची। विप्र फाउंडेशन के सान्निध्य में जयपुर में श्री परशुराम ज्ञान पीठ सेंटर फॉर एक्सीलेंस एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना की गयी। जिसका उद्घाटन राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कर कमलों द्वारा समाज के लोगों की उपस्थिति में 6 सितंबर 2025 को किया जायेगा। यह रिसर्च सेंटर युवाओं को शिक्षा, संस्कार, रोजगार की दिशा में अग्रसर करेगा। इस संस्था के तहत कौशल विकास, गर्ल्स एग्जाम ट्रेनिंग, गर्ल्स हॉस्टल, वेदिक रिसर्च, कोचिंग क्लासेस, पुरोहित प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण गतिविधियों को संचालित करने में अपना योगदान देगा साथ ही समाज की आवश्यकता को भी पूरा करेगा। उक्त जानकारी विप्र फाउंडेशन झारखंड जोन 6 के उपाध्यक्ष प्रमोद सारस्वत ने दी। श्री सारस्वत ने बताया कि भगवान परशुराम भारतीय संस्कृति में धर्म, ज्ञान, शक्ति के प्रति माने जाते हैं। उनका जीवन हमें संयम, संकल्प, न्याय एवं सद्गुण के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। भगवान परशुराम गुरु शिष्य परंपरा के संग ज्ञान व धर्म की रक्षा का सबसे बड़ा अनुपम उदाहरण है। राष्ट्र एवं समाज को तेजस्विता और सामर्थ्य से परिपूर्ण रखने के पावन उद्देश्य से विप्र फाउंडेशन द्वारा भारत भूमि के पश्चिम में श्री परशुराम ज्ञान पीठ, जयपुर (राजस्थान) में बनाया गया है। सेंटर फॉर एक्सीलेंस एंड रिसर्च सेंटर के माध्यम से सेवा, समर्पण, शिक्षा व संस्कार देकर अपने बच्चों को आई ए एस, आई पी एस बनाकर हम समाज की नींव को मजबूत करें। झारखंड राज्य सहित विभिन्न राज्यों से इस उद्घाटन समारोह में काफी संख्या में विप्र फाउंडेशन के सदस्य शामिल होंगे। विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा सहित राजस्थान सहित भारत वर्ष के विभिन्न राज्यों के पदाधिकारीयो सहित एक-एक सदस्यों के 16 वर्षों की तपस्या का इस रिसर्च सेंटर को समाज को सुपुर्द करने में बहुत बड़ा योगदान रहा है। आने वाले समय में युवा बच्चों को इसका भरपूर लाभ प्राप्त होगा। उक्त जानकारी विप्र फाउंडेशन, जोन 6 झारखंड के उपाध्यक्ष प्रमोद सारस्वत ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में 6 सितंबर अनंत चतुर्दशी के सुअवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। मौके पर श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में 6 सितंबर दिन शनिवार को अपराह्न 3 बजे से सायं 5 बजे तक परमहंस डॉ संत शिरोमणि श्रीश्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज अपनी दिव्य वाणी से भजन सत्संग प्रवचन के माध्यम से अमृत वर्षा का रसपान करायेंगे। तत्पश्चात गुरु पूजन, गुरु महाराज से आशीर्वाद एवं प्रसाद वितरण का कार्यक्रम होगा। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने सभी भक्तगणों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।
यह पर्व हमें अध्यात्म, त्याग श्रद्धा और सामाजिक समरसता का देता है संदेश : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। अनंत चतुर्दशी पर्व 6 सितंबर दिन शनिवार को मनाया जाएगा।श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है हिंदू सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत रूपों की आराधना करने का विधान है, अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस भी कहा जाता है। इस दिन जहां बप्पा श्री गणेश की बड़ी धूमधाम से विदाई की जाती है। दरअसल गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा को घर लाया जाता है और पूरे 10 दिनों तक विधिवत उनकी पूजा अर्चना की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन श्री गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि विधान के साथ की जाती है। इस दिन अनंत सूत्र का भी विशेष महत्व माना गया है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद एक कच्ची रेशम की डोरी को हल्दी या केसर से रंग कर उसके बाद उस डोर में 14 गांठ लगाए और इसे प्रभु श्री हरि के चरणों में अर्पित कर दें।ओम अनंताय नमः मंत्र की जाप करने के बाद इस दिव्य को पुरुष अपने दाएं हाथ में बांधे तथा महिलाएं इस सूत्र को अपने बाएं हाथ में बांधना चाहिए। एवं विधि विधान से पूजा अर्चना, दीपक जलाकर आरती तथा कथा का पाठ, प्रभु को फल और मिठाई समेत चीजों का भोग लगाना चाहिए। रात के समय इस रक्षा सूत्र को उतारकर रख दे और अगले दिन किसी पवित्र नदी या तालाब में प्रवाहित कर दें। माना जाता है कि इस कार्य को करने से साधक के सभी प्रकार के पाप एवं दुख नष्ट होते हैं और उसे आरोग्य जीवन का आशीर्वाद तथा भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। गणेश विसर्जन उत्सव हमें यह शिक्षा देता है कि हर शुरुआत का एक अंत होता है और हर अंत नई शुरुआत की ओर संकेत करता है यह विसर्जन त्याग, समर्पण और परिवर्तन का प्रतीक है। अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह सामाजिक, एकता, सामूहिकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक भी है यह पर्व समुदायों को एक साथ लाता है जहां लोग जाति धर्म या वर्ग से ऊपर उठकर एक साथ उत्सव मनाते हैं। यह पर्व हमें अध्यात्म, त्याग, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन क्षणभंगुर है परंतु विश्वास और भक्ति से हम उसमें अनंत आशा और आनंद भर सकते हैं।
पर्सनल कानूनों की आड़ में जारी बाल विवाह की प्रथा पर रोक लगे और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम सभी धर्मों व संप्रदायों पर समान रूप से लागू हो :भुवन ऋभु एबीएन सोशल डेस्क। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि बाल अधिकारों की सुरक्षा में मध्य प्रदेश अग्रिम मोर्चे पर है और इस राज्य के पास बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने की राष्ट्रीय लड़ाई के नेतृत्व की पूरी क्षमता व संभावना है। मध्य प्रदेश की सात करोड़ तीस लाख की आबादी में 40 प्रतिशत हिस्सा बच्चों का है। ऐसे में राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती है और इसने निर्णायक कदम उठाए हैं। बाल विवाह, ट्रैफिकिंग और यौन हिंसा की चुनौती से निपटने के लिए सरकार और नागरिक समाज ने साथ मिलकर तेजी से कदम उठाये हैं।देश के 250 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सहयोग से अप्रैल 2023 से अगस्त 2025 के बीच मध्य प्रदेश के 41 जिलों में 36,838 बाल विवाह रुकवाये, ट्रैफिकिंग के शिकार 4,777 बच्चों को मुक्त कराया और यौन शोषण के शिकार 1200 से अधिक पीड़ित बच्चों की मदद की।नागरिक समाज संगठनों के पुलिस, अधिवक्ताओं, बाल कल्याण समितियों और समुदायों के साथ तालमेल व समन्वय से काम करने के इस अनूठे माडल ने बच्चों की सुरक्षा की राज्य की क्षमता को मजबूती दी है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य था जिसने बच्चियों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया था। ऋभु ने कहा कि सरकार को यही संकल्प बाल विवाह के खिलाफ भी दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) एक धर्मनिरपेक्ष कानून है जो बच्चों की सुरक्षा के मकसद से बनाया गया था और इसे हर हाल में धार्मिक विश्वासों व पर्सनल लॉ पर तरजीह मिलनी चाहिए। हाल ही में कुछ उच्च न्यायालयों के फैसलों जिसमें पीसीएमए पर पर्सनल लॉ को तरजीह दी गयी थी, का जिक्र करते हुए भुवन ऋभु ने कहा कि मध्य प्रदेश को अगुआई करते हुए इसे सभी के लिए बाध्यकारी बनाना चाहिए।भोपाल में सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भुवन ऋभु ने कहा, सैद्धांतिक रूप से बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम किसी भी पर्सनल लॉ, प्रथा या संहिता से ऊपर है। मध्य प्रदेश सरकार को इस पर अमल की अगुआई करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून बगैर किसी समझौते के हर बच्चे की हिफाजत करे। भुवन ऋभु वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन से मेडल आफ आनर से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय अधिवक्ता हैं। वे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोग से वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन की वैश्विक पहल जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड (जेसीडब्ल्यू) के भी अध्यक्ष हैं। जेसीडब्ल्यू दुनियाभर के अधिवक्ताओं, जजों और न्यायविदों को एक मंच पर लाता है ताकि कानूनी सुधारों व कानून पर अमल के जरिए बच्चों की सुरक्षा को मजबूती दी जा सके। बेस्टसेलर किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन: टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज के लेखक भुवन ऋभु ने कहा, बच्चों की वास्तविक सुरक्षा व संरक्षण तभी संभव है जब कानून एक मजबूत निवारक उपाय का काम करे। उन्होंने कहा, अप्रैल 2023 से जुलाई 2025 के बीच महज इन दो सालों में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के कार्यों से यह साबित होता है कि यदि कानून को उसके उद्देश्य और तात्कालिकता के साथ लागू किया जाये तो बच्चे वास्तव में सुरक्षित होंगे। देश में 3,74,000 बाल विवाह रोक कर, ट्रैफिकिंग के शिकार 1,00,000 से अधिक बच्चों को मुक्त करा कर, यौन शोषण के शिकार 34,000 से भी ज्यादा बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा मुहैया कर और 63,000 से भी ज्यादा मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू कर भारत ने यह साबित किया है कि हम एक ऐसा राष्ट्र बन सकते हैं जहां बच्चों के खिलाफ अपराध करके कोई कानून से नहीं बच पायेगा। यहां तक कि साइबर जगत में बच्चों के आनलाइन यौन शोषण के 1,000 से अधिक मामले दर्ज कर हमने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून का शासन हर बच्चे की सुरक्षा करेगा और हर जगह करेगा। हालांकि मध्य प्रदेश में बाल विवाह की दर 23.1 है जो राष्ट्रीय औसत 23.3 के मुकाबले मामूली कम है लेकिन कुछ जिलों में स्थिति गंभीर है। जैसे राजगढ़ में बाल विवाह की दर 46.0, श्योपुर में 39.5, छतरपुर में 39.2, झाबुआ में 36.5 और आगर मालवा जिले में 35.6 प्रतिशत है। कानून पर सख्ती से अमल के अभाव में बाल विवाह से बच्चियों का पढ़ाई छोड़ना और उनका शोषण व गरीबी के अंतहीन दुष्चक्र में फंसना जारी रहेगा। मध्य प्रदेश में जेआरसी नेटवर्क के 17 सहयोगी संगठन पिछले दो वर्षों से राज्य के 41 जिलों में काम कर रहे हैं। यह नेटवर्क बाल विवाह, बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल यौन शोषण और बाल श्रम की रोकथाम के लिए जागरूकता के प्रसार और कानूनी हस्तक्षेप उपायों की दोहरी रणनीति पर काम करता है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया अभियान के सहयोग में भी अग्रिम मोर्चे पर है जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत से बाल विवाह का खात्मा है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) 2006 बाल विवाह पर पूरी तरह पाबंदी लगाता है। यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के को बच्चे के तौर परिभाषित करता है। इस कानून के तहत बाल विवाह को प्रोत्साहित करने या उसमें किसी भी तरह का सहयोग करने जैसे बारात में शामिल मेहमानों, हलवाई, सजावट करने वाले, बैंड वाले या घोड़ी वाले पर भी सजा व जुमार्ने का प्रावधान है। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (85959 50825) से संपर्क करें।
40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किया दर्शन टीम एबीएन, रांची। पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधा अष्टमी के पावन अवसर पर एक दिव्य एवं भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के सौजन्य से आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुजन शामिल होकर राधारानी के प्राकट्य दिवस का पुण्य लाभ प्राप्त किये। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित किया गया। श्री राधा-कृष्ण का अलौकिक श्रृंगार एवं राधा कृष्ण का झूलन, भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। ट्रस्ट ने 225वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन किया तथा 151 किलो दूध का केसरिया खीर का महाप्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया। अन्नपूर्णा महाप्रसाद का विविध भोग 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडे ने लगायी। कार्यक्रम में दुर्गा जागरण मंडली एवं ट्रस्ट के भजन गायकों ने संगीतमय भजन-जागरण का आयोजन किया, जिसमें श्री राधा-कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हुए भक्तों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया गया। श्याम तेरे राधा दीवानी राधा रानी लागे प्यारी जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। मधुर संगीत, ढोलक की थाप और करताल की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा।भजन कार्यक्रम के पश्चात महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों दीपों से भगवान को आरती अर्पित की गई। पूरे मंदिर परिसर में जय राधे के जयकारों की गूंज से एक दिव्य ऊर्जा का संचार हुआ।इस शुभ अवसर पर महाप्रसाद का विशेष आयोजन भी किया गया, जिसमें केसरिया खीर, चूरमा, मालपुआ, रबड़ी, फल तथा अन्य स्वादिष्ट व्यंजन भक्तों को वितरित किये गये। प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रसन्नता से भक्ति भावपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। ट्रस्ट के सदस्यों ने इस आयोजन को सफल बनाने हेतु समर्पित भाव से सेवा की। कार्यक्रम का उद्देश्य जनमानस में भक्ति, सेवा एवं संस्कारों का जागरण करना रहा। मौके पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि प्रणामी मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। तथा देर रात तक 40 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि श्री राधा अष्टमी हमें प्रेम, करुणा और सेवा की प्रेरणा देती है। हमारा उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को आध्यात्मिकता से जोड़ना है। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक उत्सव था, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का एक सुंदर प्रयास भी रहा।मौके पर ट्रस्ट के सह संरक्षक विजय कुमार अग्रवाल, निर्मल छावनिका, उपाध्यक्ष निर्मल जालान, राजेंद्र अग्रवाल, कोषाध्यक्ष सज्जन पाड़िया, सुरेश अग्रवाल, सुरेश भगत, सुरेश चौधरी, विशाल जालान, मनीष सोनी, नंदकिशोर चौधरी, विशाल अग्रवाल, संजय सिंघानिया, सुशील नारसरीया, सुनील पोद्दार, महेश पोद्दार, महेन्द्र अग्रवाल, विधा देवी अग्रवाल, शोभा जालान, बिमला जालान, प्रमिला परोहीत, सरोज पोद्दार, उर्मिला पाडिया, सुनीता अग्रवाल, आशा मुंजाल, आशा सिंह, आशा मिश्रा, नंद रानी पाठक, सविता देवी, दीपिका मोतिका, कविता गाडोदिया, निकिता अग्रवाल, मंगला मोदी इनके अलावा सैकड़ो सदस्य उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। पर्वाधिराज पर्युषण के समापन के शुभ अवसर पर जैन मंदिर डोरंडा में सकल जैन श्वेतांबर समाज का आज मंदिर में क्षमापना कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर मंदिर डोरंडा से आज दिनांक 31-08-25 को भगवान की शोभायात्रा मंदिर से सुबह 8:30 बजे गाजे बाजे के साथ निकली। शोभा यात्रा में गायक अक्षय सेठिया एवं सहयोगी भजन मंडली के भजनों को सुनकर भक्तगण झूम रहे थे। शोभायात्रा मंदिर जी से निकल कर तुलसी चौक, एजी मोड़, हाई कोर्ट होते हुए वापस मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में काफी संख्या में महिलाएं, बच्चे एवं समाज के लोग शामिल हुए। तत्पश्चात मंदिर में 11 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें बच्चों ने धार्मिक गीत, मनमोहक नृत्य आदि प्रस्तुत किये। साथ ही नाट्य मंचन के माध्यम से मनुष्यों के कर्मों के आधार पर मिलनेवाले स्वर्ग नर्क की झलकियां दिखायी गयी एवं तीर्थंकर भगवान के संदेशों को बताया गया।जिसमें श्रुति, खुशबू, रिद्धि, यशवी, कीर्ति, वंशिका, वेदिका, खुशी, प्रियंका बोथरा, सोनल नाहटा, मिस्टी, नेहा-राखी रामपुरिया, निर्वाण, प्रखर, चिराग, भविष्य, वाणी, प्रेक्षा, काव्या, श्रेयांस, अंजलि आदि ने भाग लिया। तेरापंथ सभा ने 75 वर्ष के आयु वर्ग के ऊपर के सम्मानीय पुरुष एवं महिलाओं को सम्मानित किया। घेवर चंद नाहटा, हर्ष गोलछा, रेणु जैन, रूबी बांठिया ने क्षमापना पर अपने विचार रखे तथा प्रकाश चंद नाहटा ने भगवान महावीर के ऊपर भजन पेश किया। मंच का संचालन सोनल नाहटा ने किया। दोपहर 1 बजे से स्वामीवात्सल्य का कार्यक्रम हुआ। तत्पश्चात कार्यक्रम की समाप्ति हुई। संघ के अध्यक्ष सुभाष बोथरा, मुख्य संरक्षक संपत लाल रामपुरिया, अमरचंद बैंगानी ने सभी को कार्यक्रम सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में छोटे लाल चोरड़िया, लब्धि जैन, राजकुमार रामपुरिया, अनिल कोठारी, राजेश पिंचा, विनय नाहटा, बालवीर बोथरा, संजय कोठारी, संतोष बेगाणी, ज्योति रामपुरिया, शशि कोठारी, सुशीला सेठिया, कंचन भंसाली, कुसुम पारख आदि एवं सम्पूर्ण समाज का योगदान रहा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।
टीम एबीएन, रांची। जैन श्वेतांबर श्री संघ द्वारा कल 31-08-25 को जैन मंदिर, डोरंडा में आयोजित क्षमा याचना कार्यक्रम में सभी को सादर आमंत्रित किया गया है। आप सभी से निवेदन है कि कार्यक्रम में अवश्य पधारें। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी। शोभायात्रा- 8:30 पूर्वाह्न क्षमापना एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम- 10:30 पूर्वाह्न स्वामी वात्सल्य- 12:30 अपराह्न श्वेतांबर जैन मंदिर, डोरंडा
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