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तेरापंथ युवा परिषद कल 18 जगह लगायेगा रक्तदान शिविर
Published / 2025-09-16 19:46:26
तेरापंथ युवा परिषद कल 18 जगह लगायेगा रक्तदान शिविर

तेरापंथ युवक परिषद् रांची के द्वारा 17 सितंबर को रांची एवं आसपास जगह में 18 जगह पर रक्तदान शिविर लगाया जायेगा टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) अपने 61वें स्थापना दिवस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर 17 सितंबर को दुनिया का सबसे बड़ा रक्तदान अभियान चला रहा हैं। अभातेयुप केंद्र सरकार के सहयोग से रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 आयोजित कर रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, रेल मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय भी इस अभियान से जुड़े हैं। अभातेयुप के तत्वाधान मे तेरापंथ युवक परिषद रांची के द्वारा समाजिक संगठनों एवं संस्थाओं के साथ संयुक्त रूप से रांची जिले मे 10 जगह एवं आसपास के जिलों मे 8 शिविर लगाये जा रहे हैं। तेरापंथ युवक परिषद रांची के द्वारा इस बार 1000 यूनिट रक्तदान करवाने का लक्ष्य रखा गया है। रांची सांसद संजय सेठ के विशेष सहयोग से सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत उनके आवास स्थान पर रक्तदान शिविर, राष्ट्रीय सेवा योजना के एनएसएस इकाइयों के सहयोग से विश्वविद्यालयों मे, रेलवे के सहयोग से आरपीएफ कैंप इसके अलावा आईआईएम रांची, सेवा सदन, हेल्थ पॉइंट ब्लड बैंक, मोशन क्लासेस लालपुर, जेबरोनिक्स पीपी कंपाउंड एवं वाईबीएन यूनिवर्सिटी आदि मे शिविर लगाये जा रहे हैं। रिम्स ब्लड बैंक, सदर हॉस्पिटल, हेल्थ पॉइंट हॉस्पिटल, नागरमल मोदी सेवा सदन ब्लड बैंक एवं उनके डॉक्टर्स, तकनीकी टीम आदि का रक्तदान संग्रहित करने मे सहयोग रहेगा। तेरापंथ युवक रांची परिषद के साथ श्री जैन श्वेतांबर ओसवाल संघ रांची, श्री तेरापंथी सभा रांची, साधुमार्गी जैन संघ रांची, तेरापंथ महिला मंडल आदि के संयुक्त सहयोग से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक रक्तदान करवाया जा सके। तेयुप के राज्य संयोजक सिद्धार्थ चोरड़िया एवं विशाल दस्सानी के अनुसार पुरे झारखंड में सामाजिक संगठनों एवं सरकारी एवं निजी संस्थानों के सहयोग से 35-40 शिविर लगाए जा रहे हैं। शिविर के संयोजन में विशाल दस्सानी, ललित सेठिया, विकाश नाहाटा, सुरेश जैन, नेहा बैंगानी, खुशबु दस्सानी, विनय बेगवानी, विकास सुराना, बालबीर बोथरा, अमित बैंगानी, आकाश बैंगानी, प्रिया कोठारी, विवेक दस्सानी, सोनू पारख, ज्योति दूगर, पूजा नाहटा, विशाल सिंघी, रश्मि सिंघी, कीर्ति बोहरा, अरिहंत सिंघवी, रिद्धि बांठिया आदि विशेष सहयोग कर रहे हैं। ऐसा पहली बार है, जब किसी भारतीय संगठन के आह्वान पर देश के अलावा 75 अन्य देशों में रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाएगा और एक नया रिकॉर्ड बनाया जायेगा। विदित हो कि प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) द्वारा  वर्ष 2012 से ही पुरे विश्व भर में रक्तदान शिविर लगाया जाता है। 2022 में पूरे विश्व भर मे 2 लाख 50 हजार यूनिट का संग्रहण हुआ था जो कि गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हैं। उक्त जानकारी तेयुप रांची रक्तदान शिविर संयोजक के सुरेश जैन ने दी।

पश्चिमी सभ्यता के चक्कर में तार-तार होते रिश्ते
Published / 2025-09-16 13:17:15
पश्चिमी सभ्यता के चक्कर में तार-तार होते रिश्ते

राजकुमारी पाण्डेयएबीएन सोशल डेस्क। एक वो दौर था जब पति भाभी को आवाज़ लगाकर अपने घर आने की खबर पत्नी को देता था। पत्नी की छनकती पायल और खनकते कंगन बड़े उतावलेपन के साथ पति का स्वागत करते थे।बाऊजी की बातों का हाँ बाऊजी-जी बाऊजी के अलावा जवाब नही होता था। आज बेटा बाप से बड़ा हो गया, रिश्तों का केवल नाम रह गया। ये समय-समय की नही समझ-समझ की बात है। बीवी को तो दूर बड़ो के सामने हम अपने बच्चों तक को नही बतलाते थे।आज बड़े बैठे रहते है पर सिर्फ बीवी से ही बतियाते है। दादू के कंधे मानो पोतों-पोतियों के लिए आरक्षित होते थे, काका जी ही भतीजों के दोस्त हुआ करते थे। आज वही दादू OLD-HOUSE की पहचान है, काकाजी बस रिश्तेदारों की सूची का एक नाम है।बड़े पापा सभी का ख्याल रखते थे, अपने बेटे के लिए जो खिलौना खरीदा वैसा ही खिलौना परिवार के सभी बच्चों के लिए लाते थे। ताऊजी आज सिर्फ पहचान रह गए और छोटे के बच्चे पता नही कब जवान हो गया? दादी जब बिलोना करती थी। बेटों को भले ही छाछ दे पर मक्खन तो वो केवल पोतों में ही बाँटती थी। दादी के बिलोने ने पोतों की आस छोड़ दी क्योंकि पोतों ने अपनी राह अलग मोड़ दी।राखी पर बुआजी आते थे, घर मे नही मोहल्ले में फूफाजी को चाय-नाश्ते पर बुलाते थे। अब बुआजी बस दादा-दादी के बीमार होने पर आते है, किसी और को उनसे मतलब नही चुपचाप नयननीर बरसाकर वो भी चले जाते है। शायद मेरे शब्दों का कोई महत्व ना हो पर कोशिश करना इस भीड़ में खुद को पहचान ने की कि हम ज़िंदा है या बस जी रहे हैं।ये समय-समय की नही समझ-समझ की बात है। अंग्रेजी ने अपना स्वांग रचा दिया, शिक्षा के चक्कर में हमने संस्कारों को ही भुला दिया। बालक की प्रथम पाठशाला परिवार व पहला शिक्षक उसकी माँ होती थी, आज परिवार ही नही रहे तो पहली शिक्षक का क्या काम? ये समय-समय की नही समझ-समझ की है 

लातेहार : मां उग्रतारा मंदिर में 9 नहीं 16 दिनों तक होती है पूजा
Published / 2025-09-15 20:27:24
लातेहार : मां उग्रतारा मंदिर में 9 नहीं 16 दिनों तक होती है पूजा

झारखंड का एक ऐसा मंदिर जहां 9 नहीं, बल्कि पूरे 16 दिनों तक होती है शारदीय पूजा एबीएन न्यूज नेटवर्क, लातेहार। जिले में मां उग्रतारा मंदिर में 16 दिवसीय दुर्गा पूजा या शारदीय नवरात्रि की सदियों पुरानी परंपरा सोमवार को शुरू हो गयी। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मंदिर के पुजारी पंडित गोविंद वल्लभ मिश्रा ने कहा कि मंदिर में सैकड़ों वर्षों से 16 दिवसीय नवरात्रि पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। इस वर्ष भी हम परंपरा के अनुसार भक्तिभाव के साथ अनुष्ठान कर रहे हैं। मां उग्रतारा मंदिर झारखंड की राजधानी रांची से 110 किलोमीटर दूर स्थित है। मिश्रा ने कहा, इस दौरान भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है। पुजारी भक्तों द्वारा लाया गया प्रसाद गर्भगृह के अंदर देवता को चढ़ाते हैं। प्रसाद में मुख्य रूप से नारियल और मिश्री चढ़ाना होता है। दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में भक्त मंदिर आते हैं। मिश्रा ने कहा, 16 दिवसीय पूजा के अंतिम दिन विजयादशमी पर मां भगवती को पान अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि देवी विसर्जन की अनुमति तभी देती हैं जब पान उनके आसन से गिर जाता है। इसके बाद विसर्जन की रस्में शुरू होती हैं। इस पूजा के दौरान कई अनुष्ठान किये जायेंगे। इनमें नवरात्रि की शुरुआत में कलश की स्थापना की जाती है। 

दुनिया के पहले इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को
Published / 2025-09-15 12:25:19
दुनिया के पहले इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को

दुनिया के पहले इंजीनियर वास्तुकार एवं ब्रह्मांड के निर्माता है भगवान विश्वकर्मा : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भगवान विश्वकर्मा पूजा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 17 सितंबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा, विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू सनातन धर्म का यह एक महत्वपूर्ण पर्व है। धर्म ग्रंथो में विश्वकर्मा को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का वंशज माना गया है। ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म तथा धर्म के पुत्र वास्तुदेव थे। जिन्हें शिल्प शास्त्र का आदि पुरुष माना जाता है। इन्हीं वास्तु देव की अंगिरसी नामक पत्नी से विश्वकर्मा का जन्म हुआ। अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए विश्वकर्मा भी वास्तु कला के महान आचार्य बने। मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी,और देवज्ञ उनके पुत्र है। इन पांचो पुत्र को वास्तु शिल्प की अलग-अलग विधाओं में विशेषज्ञ माना जाता है। विश्वकर्मा शिल्प शास्त्र के आविष्कारक और सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता माने जाते हैं। विश्वकर्मा पूजा एक ऐसा त्यौहार है जिसे शिल्पकार कारीगर,श्रमिक एवं सभी लोग मानते हैं। यह पर्व ब्रह्मांड के दिव्य वास्तुकार और निर्माता भगवान विश्वकर्मा को समर्पित होता है। विश्वकर्मा एक ऐसे देवता है जिन्होंने स्वर्ग और यहां तक की देवताओं के कुछ सबसे बड़े महलों का निर्माण किया, उन्हें कारीगरों शिल्पकारों और इंजीनियरों का देवता के रूप में भी पूजा जाता है। उन्हें सृष्टि का पहला इंजीनियर भी कहा जाता है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा जो भी कोई व्यक्ति करता है उसका घर, दुकान, कारोबार, सभी उन्नति करते हैं। विश्वकर्मा पूजा के दिन सच्चे मन से दान करने से अच्छे कर्म बढ़ते हैं और समृद्धि, सफलता और खुशी मिलती है विश्वकर्मा पूजा पर विशिष्ट वस्तुओं का दान करके भक्त विश्वकर्मा के साथ एक सानिध्य स्थापित करते हैं और विकास के साथ प्रचुरता के लिए दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।विश्वकर्मा दो शब्दों से विश्व (संसार या ब्रह्मांड) और कर्म (निर्माता) से मिलकर बना है इसलिए विश्वकर्मा शब्द का अर्थ है दुनिया का निर्माता यानी दुनिया का निर्माण करने वाले, इसलिए भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहले इंजीनियर और वास्तु कार माना जाता है।

हरिद्वार में अर्धकुंभ 2027 की भव्य तैयारी शुरू
Published / 2025-09-14 21:08:38
हरिद्वार में अर्धकुंभ 2027 की भव्य तैयारी शुरू

अखाड़ों ने किए तीन शाही स्नानों की तिथियों का ऐलान एबीएन सोशल डेस्क। साल 2027 में हरिद्वार में लगने वाला अर्धकुंभ मेला इतिहास रचने जा रहा है। यह आयोजन केवल तीर्थयात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि साधु-संन्यासियों और अखाड़ों के लिए भी विशेष होगा। पहली बार ऐसा होगा जब अर्धकुंभ में संतों और अखाड़ों के द्वारा तीन भव्य शाही स्नान किये जायेंगे। अखाड़ों की भागीदारी से बदलेगा मेला का स्वरूप अब तक हरिद्वार में आयोजित अर्धकुंभ मेलों में मुख्य रूप से आम श्रद्धालु ही स्नान करते आए थे, क्योंकि उसी वर्ष नासिक या उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होता था, जहां अखाड़ों की भागीदारी होती थी। लेकिन इस बार समय में अंतर होने के कारण साधु-संतों की उपस्थिति हरिद्वार में भी देखने को मिलेगी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 2027 के अर्धकुंभ के लिए तीन महत्वपूर्ण शाही स्नानों की तिथियां तय कर दी हैं। पहला शाही स्नान : 6 मार्च 2027, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर। दूसरा शाही स्नान : 8 मार्च 2027, सोमवती अमावस्या के दिन। तीसरा शाही स्नान : 14 मार्च 2027, मेष संक्रांति के शुभ अवसर पर। इसके अलावा, मकर संक्रांति पर भी स्नान होगा, लेकिन उसे शाही स्नान की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। हरिद्वार में दिखेगा अमृत स्नान का दिव्य दृश्य हरिद्वार में होने वाला यह अर्धकुंभ इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस बार साधु-संन्यासियों के शाही स्नान के भव्य दृश्य भी श्रद्धालुओं को देखने को मिलेंगे। अमूमन अर्धकुंभ के दौरान अखाड़े हरिद्वार की बजाय सिंहस्थ पर्व में हिस्सा लेते हैं, लेकिन 2027 में नासिक का सिंहस्थ जुलाई-अगस्त में आयोजित होगा, जिससे अखाड़ों को दोनों मेलों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। सरकारी तैयारियों का इंतजार फिलहाल सरकार की ओर से शाही स्नानों की आधिकारिक घोषणा बाकी है। जैसे ही तिथियों की औपचारिक पुष्टि होगी, स्नान व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

महाराजा अग्रसेन भवन में श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन
Published / 2025-09-13 20:28:13
महाराजा अग्रसेन भवन में श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन

गीता जीवन का ऐसा सार है जो हर धर्म के व्यक्ति को जीने की कला को सीखता है : मां चैतन्य मीरा टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी महिला मंच रांची शाखा की रजत जयंती वर्ष के सुअवसर पर रांची जिला मारवाड़ी महिला सम्मेलन द्वारा महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस में विश्राम आरती के साथ कथा का समापन हुआ। अंतिम दिवस की कथा में मां चैतन्य मीरा ने बताया कि किस प्रकार द्वारकाधीश ने अपने मित्र सुदामा पर कृपा बरसायी। उन्होंने बताया कि यदि मित्र हो तो सुदामा जैसा होना चाहिए। जिसको अपने मित्र के आगे बढ़ने पर प्रसन्नता हो, जिसके मन में ईर्ष्या या द्वेष की भावना नहीं हो और सालों बाद भी यदि अपने मित्र से मिले तो वही प्रेम भावना मन में जागृत हो। मां चैतन्य मीरा ने कहा कि इसी प्रकार निरंतर श्रीमद् भागवत कथा को अपने जीवन में उतरने से सारे पाप नष्ट तो होते ही हैं। परंतु इसके साथ-साथ इसमें इतना ज्ञान भरा है यदि हम इसका वास्तविक में अध्ययन करें तो हम अपनी सारी समस्याओं का समाधान इससे प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को नित्य गीता का पाठ करना चाहिए और गीता को समझना चाहिए। गीता भी एक ऐसा जीवन का सार है जो हर धर्म के व्यक्ति को जीवन जीने की कला को  सीखाता है। संस्था की अध्यक्ष ने बताया कि विश्राम दिवस पर संस्था की सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया। इसके अलावा इसके अतिरिक्त समाज के सभी वर्गों से आए हुए अतिथियों का स्वागत किया गया और स्वागत में सभी को पौधे दिए गए। जिससे कि हर व्यक्ति प्रकृति के महत्व को समझ सके और निरंतर इसी प्रकार वृक्षों को बचाकर अनेकों बीमारियों से छुटकारा पा सके।  कथा के अंत में सभी भक्तों ने आरती की तथा यजमान के द्वारा  कई आचार्य ने हवन कराया। तत्पश्चात सभी को महाप्रसाद महाप्रसाद वितरित की गयी और भंडारे का आयोजन किया गया। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने श्रीमद् भागवत कथा के सफल आयोजन पर मारवाड़ी महिला सम्मेलन के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी रीना सुरेखा ने दी।कथा में नीरा बथवाल, रूपा अग्रवाल, गीता डालमिया, अनसूया नेवटिया, मधु सर्राफ, उर्मिला पाड़िया, अलका सरावगी, रीना सुरेखा, प्रीती पोद्दार, नैना मोर, बीना मोदी, मंजू केडिया, मंजू गाड़ोदिया, प्रीति बंका, शोभा हेतमसरिया, सीमा पोद्दार, सरिता अग्रवाल, बीना बूबना, प्रीति अग्रवाल, रीता केडिया, बबीता नारसरिया, सीमा टांटिया, जया बिजावत, करुणा अग्रवाल, मीरा टिंबडेवाल, ललिता नारसरिया, संगीता गोयल, सुनीता मेवाड़ा, प्रीति केडिया, प्रीति अग्रवाल, रेनू छापड़िया, सुनीता सर्राफ, शोभा जाजू,  साक्षी अग्रवाल, ममता बूबना, आदि बहनें उपस्थित थी।

चैतन्य गुरु मां मीरा जी का श्रीकृष्ण राधा प्रणामी मंदिर और अपना घर आश्रम में भावपूर्ण आगमन
Published / 2025-09-12 18:39:59
चैतन्य गुरु मां मीरा जी का श्रीकृष्ण राधा प्रणामी मंदिर और अपना घर आश्रम में भावपूर्ण आगमन

चैतन्य गुरु मां मीरा जी का श्रीकृष्ण राधा प्रणामी मंदिर एवं अपना घर आश्रम में भावपूर्ण आगमनसेवा, भक्ति और करूणा ही मानव जीवन का है वास्तविक उद्देश्य : गुरु मां मीराटीम एबीएन रांची। आध्यात्मिक जगत की सुप्रसिद्ध कथा वाचक चैतन्य गुरु मां मीरा जी ने झारखंड की राजधानी रांची के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर एवं सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम का दिव्य भ्रमण किया। यह मंदिर झारखंड का सबसे बड़ा श्रीकृष्ण-राधा मंदिर माना जाता है और इसकी भव्यता, शिल्पकला तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देशभर में प्रसिद्ध हो रहा है। गुरु मां के आगमन से मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह देखने योग्य था। उन्होंने मंदिर की नयनाभिराम शिल्पकारी, दिव्यता एवं शांत वातावरण की सराहना की और कहा कि यह स्थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का जीवंत माध्यम है। उन्होंने गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विशेष पूजा अर्पित की। इसके पश्चात गुरु मां ने मंदिर में स्थित सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम का भी अवलोकन किया, जहाँ अनेक दिव्यांग, वृद्ध एवं निराश्रितजन सेवा और स्नेह की छाया में निवास कर रहे हैं।गुरु मां ने आश्रम के सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की और वहां रह रहे लोगों को स्वयं भोजन परोसकर भावविभोर हो गईं। यह दृश्य सभी उपस्थितों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और हृदयस्पर्शी रहा। इस अवसर पर आयोजित विशेष सत्संग में गुरु मां ने व्यास पीठ से संबोधित करते हुए कहा, सेवा, भक्ति और करुणा ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य हैं। भगवान केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि उन चेहरों में भी बसते हैं जो पीड़ा में हैं। उन्हें भोजन कराना, सहारा देना, सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आश्रम समाज के लिए प्रकाश स्तंभ हैं और प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामर्थ्य अनुसार सेवा में योगदान देना चाहिए। गुरु मां के प्रेरणादायक शब्दों और उनकी करुणामयी उपस्थिति ने सभी भक्तों एवं सेवकों के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी, प्रवक्ता संजय सर्राफ एवं पुजारी अरविंद पांडे ने गुरु मां को अंगवस्त्र, राधा कृष्ण की स्मृति चिन्ह और श्रीफल भेंट कर उनका अभिनंदन किया।यह अवसर न केवल एक आध्यात्मिक प्रेरणा बना, बल्कि सेवा, संवेदना और भक्ति के संगम का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उक्त जानकारी ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मना रुक्मणी विवाह
Published / 2025-09-12 18:26:00
श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मना रुक्मणी विवाह

*प्रेस विज्ञप्ति* *श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस मे**रुक्मणी विवाह, महारास और उद्धव गोपी संवाद से भक्त भाव विभोर हुए*रांची । अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला मंच के द्वारा आयोजित *श्रीमद् भागवत कथा* के छठे दिवस में *रुक्मणी विवाह, महारास और उद्धव गोपी संवाद* मां चैतन्य मीरा के द्वारा सुनाया गया । साथ ही *कृष्ण रुक्मणी विवाह* के उपलक्ष में एक जरूरतमंद जोड़े का विवाह भी करवाया गया एवं उसे घर की जरूरत की सामग्री एवं उपहार दिए गए। कथा के प्रारंभ में संस्था के सदस्यों के द्वारा आरती की गई। तत्पश्चात गुरु मां ने सभी को ध्यान के माध्यम से कृष्ण से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने बताया की कुछ क्षण के ध्यान से ही यदि हम शांति महसूस कर सकते हैं, सकारात्मक अनुभूति का अनुभव कर सकते हैं तो सोचिए नित्य यदि हम योग और ध्यान करें तो हमारा शरीर मानसिक तनाव अनिद्रा जैसी बीमारियों से दूर होकर एक अलग आनंद और भक्ति का अनुभव प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि कृष्ण की एक बांसुरी की धुन पर समस्त गोपिया दौड़ी चली आई थी और कई कई समय तक उनके साथ रास रचाती थी । हर गोपी के दो रूप हो गए थे एक शरीर जो महारास में होता था और कन्हैया ने एक ऐसा वातावरण बना दिया था की एक और वही गोपी अपने अपने घरों में अपने दैनिक कार्य करती रहती थी । जब कृष्ण को मथुरा जाना पड़ा तो समस्त गोप गोपी इस प्रकार से हो गए कि उनसे उनका सब कुछ अलग हो रहा है । कई दूर तक वह कृष्ण के साथ उनके रथ के पीछे-पीछे दौड़ते रहे। भक्ति और प्रेम का अद्भुत मिलन क्या है यह हमें बृजवासियों से सीखना चाहिए।आज भी जिस प्रकार से यमुना मैया वृंदावन में सभी को दर्शन दे रही है लोग किस प्रकार से उसका आनंद प्राप्त कर रहे हैं यह प्रेम और भक्ति नहीं तो क्या है।  प्रेम की असली परिभाषा ही गोपियां है जब उद्धव गोपियों को समझने जाते हैं तो गोपियों का प्रेम भाव देखकर उनकी कृष्ण के प्रति प्रेम में भक्ति को सुनकर वह समझ गए कि उनका ज्ञान इस प्रेम के आगे शून्य है।  गुरु मां ने बताया कि जब हम किसी से प्रेम करें तो हमें ज्ञान नहीं लगना चाहिए। आज परिवार में जो लोग एक नहीं हो रहे हैं ।जो आपसी गृह क्लेश चल रहे हैं ।उनका एक ही कारण है वह प्रेम भूल जाते हैं और ज्ञान का ज्यादा उपयोग कर लेते हैं। और यही हमें एक दूसरे से अलग करता है।  कथा के अंत में किस प्रकार से कन्हैया जी ने रुक्मणी जी का हरण किया और उनसे विवाह किया कथा के माध्यम से गुरु मां ने बताया । इस मनोहर झांकी के दर्शन करके सभी भक्त मंत्र मुक्त हो गए । सभी ने आनंद के साथ कृष्ण रुक्मणी की वरमाला करवाई ।मंगल गीत गाए और आपस में सभी ने नृत्य के साथ एक दूसरे को बधाइयां दी। कथा में मुख्य रूप से नीरा बथवाल, रूपा अग्रवाल ,गीता डालमिया, अनसूया नेवटिया, अलका सरावगी, मधु सर्राफ, उर्मिला पाड़िया, रीना सुरेखा,  प्रीती पोद्दार ,बीना मोदी, बीना बूबना, प्रीती बंका, ,प्रीती अग्रवाल, शोभा हेतमसरिया , संगीता गोयल,ममता बूबना, ललिता नारसरिया सीमा पोद्दार सरिता अग्रवाल, सीमा टॉटीया रीता केडिया, मंजू गाड़ोदिया, मंजू केडिया,बबीता नारसरिया,जया बिजावत, सुनीता मेवाड़ा, सुनीता सरावगी, करुणा अग्रवाल, मीरा टिंबरेवाल, शोभा जाजू, रेखा अग्रवाल, अनू पोद्दार, सुनैना लॉयलका, कलावती अग्रवाल सीमा अग्रवाल, विद्या अग्रवाल, रेनू छापड़िया,कमला  विजयवर्गीय, साक्षी अग्रवाल, पुष्पा खेतान, पदमा बंका, कुसुम मोर, नैना मोर आदि बहने उपस्थित थी। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी

14 सितंबर को धूमधाम से मनाया जायेगा जितिया व्रत
Published / 2025-09-11 20:58:13
14 सितंबर को धूमधाम से मनाया जायेगा जितिया व्रत

माताएं संतान की दीघार्यु एवं सुख- समृद्धि के लिए रखती है निर्जला व्रत : संजय सर्राफ  एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि जितिया पर्व 14 सितंबर दिन रविवार को है। जितिया व्रत हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। हिंदू धर्म में जितिया पर्व को जीवित्पुत्रिका व्रत और जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू सनातन धर्म का यह एक  महत्वपूर्ण पर्व है जितिया पर्व  मुख्य रूप से झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश मे बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। इस वर्ष जितिया पर्व का आरंभ 13 सितंबर को नहाय-खाय के साथ होगा। इसके बाद 14 सितंबर को महिलाएं पूरे विधि-विधान से जीवित्पुत्रिका व्रत रखेंगी और अगले दिन यानी 15 सितंबर को व्रत का पारण कर व्रत संपन्न किया जायेगा। यह व्रत माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख समृद्धि के लिए करती है। इस दिन महिलाएं 24 घंटे तक निर्जला व्रत उपवास रखती है। जितिया व्रत की  माताएं संतान की दीघार्यु, सुखी और निरोगी जीवन के लिए जितिया व्रत रखती है, व्रत वाले दिन महिलाएं नये वस्त्र धारण करती है। तथा उपवास के दिन जीमूत वाहन देव की पूजा पूरे विधि विधान से करती है।पूजन पर नारियल, खीरा, चना, खाजा समेत अन्य पूजा सामग्री चढ़ाते हैं। इस दिन व्रत करने के साथ जो माताएं पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ती और सुनती है उन्हें कभी भी संतान वियोग नहीं सहना पड़ता है, हिंदू धर्म मे व्रत से पूर्व संतुलित आहार का बहुत महत्व दिया गया है, जितिया व्रत से पूर्व महिलाओं के खान-पान का पूरा ध्यान रखा जाता है इस संतुलित आहार के कारण लंबी अवधि तक शरीर को ऊर्जा मिलती है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से सभी साधक को सभी प्रकार के कष्टों  से मुक्ति मिलती है। जो माताएं इस व्रत का पालन करती है इस व्रत का फल उनके बच्चों को बुरे स्थिति से बचाता है साथ ही साथ इस व्रत के प्रभाव से संतान की सुखों की प्राप्ति होती है। जितिया व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं है, यह माता पुत्र के अटूट बंधन आस्था तथा त्याग की मूर्ति है इस व्रत के माध्यम से नारी अपने संतान के प्रति अगाध प्यार और समर्पण व्यक्त करती है और यही भावना इस पर्व को जीवंत बनाती है।

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