सह सरकार्यवाह आलोक कुमार का विजयादशमी पर ऐतिहासिक संबोधन टीम एबीएन, कोकर (शिवाजी नगर) रांची। रांची महानगर, दिनांक 25.09.2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने विजयादशमी उत्सव समारोह के अवसर पर कोकर नगर में उपस्थित सैकड़ों स्वयंसेवकों एवं नागरिकों को संबोधित करते हुए एक दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना के शताब्दी वर्ष (2025-2030) को ध्यान में रखते हुए अगले 15 से 20 वर्षों तक स्वयंसेवक समाज में पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख क्षेत्रों में समर्पित रूप से कार्य करें। पंच परिवर्तन की दिशा में संघ का मार्गदर्शन आलोक कुमार ने समाज को सशक्त, स्वावलंबी और समरस बनाने हेतु पांच परिवर्तनकारी कदमों का सूत्रपात किया, जिन्हें हर स्वयंसेवक को अपने जीवन का लक्ष्य बनाना चाहिए: सामाजिक समरसता : छुआछूत का पूर्ण उन्मूलन : जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी कुरीतियों को न केवल व्यवहार से, बल्कि मन और आत्मा से समाप्त करने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक समानता का अनुभव नहीं पहुंचेगा, तब तक समरस राष्ट्र की कल्पना अधूरी रहेगी। पर्यावरण संतुलन : प्रकृति के प्रति संवेदना का विकास : आलोक जी ने बढ़ते पर्यावरण असंतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए शुद्ध वायु, शुद्ध पेयजल, पौधरोपण और अन्न की बर्बादी रोकने जैसे अभियानों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। कुटुम्ब प्रबोधन : परिवार संस्था का सशक्तिकरण : परिवार को समाज की मूल इकाई बताते हुए उन्होंने संबंधों में सम्मान, आपसी संवाद और संयुक्तता को बनाये रखने की अपील की। संवेदनशील, सुसंस्कृत और सशक्त परिवार ही राष्ट्र की नींव को मजबूत करते हैं, उन्होंने कहा। स्वदेशी : आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करना : स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर जोर देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वोकल फॉर लोकल केवल नारा नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक स्वतंत्रता की कुंजी है। जो वस्तुएं भारत में बन सकती हैं, उन्हें विदेश से मंगाना आत्मघाती है, उन्होंने कहा। नागरिक कर्तव्य : अधिकारों से पहले कर्तव्यों की चेतना : उन्होंने बताया कि एक जागरूक नागरिक वह होता है जो अपने कर्तव्यों का पालन पहले करता है, अधिकार अपने आप फलस्वरूप मिलते हैं। हमें शिक्षा, सुरक्षा, स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में अपने दायित्व समझने होंगे। विजयादशमी का संदेश : बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक अपने सारगर्भित उद्बोधन में आलोक कुमार ने विजयादशमी के ऐतिहासिक संदर्भ को जोड़ते हुए बताया कि जैसे मां दुर्गा ने महिषासुर और भगवान राम ने रावण के अहंकार का विनाश किया, वैसे ही हमें अपने अंदर के अहंकार, अज्ञान और नकारात्मकता का अंत कर, ज्ञान, शक्ति और धन को समाजहित में प्रयोग करना चाहिए। घर-घर संपर्क अभियान : समाज जागरण का अगला चरण उन्होंने घोषणा की कि संघ के स्वयंसेवक समाज में जाकर शिक्षा, देशप्रेम, आपदा प्रबंधन और समाज जागरण के लिए घर-घर संपर्क करेंगे। जन-जन तक पहुंच कर राष्ट्रीय चेतना को जाग्रत करना ही संघ का उद्देश्य है, उन्होंने कहा। शस्त्र पूजन और पथ संचलन : परंपरा और अनुशासन का संगम मौके पर मूसलाधार वर्षा के बीच सैकड़ों स्वयंसेवकों ने कोकर नगर में अनुशासित रूप से पथ संचलन किया। इसके साथ ही परंपरागत शस्त्र पूजन किया गया, जो शक्ति और मर्यादा के संतुलन का प्रतीक है। उपस्थित गणमान्यजन समारोह में अनेक प्रमुख कार्यकर्ता एवं सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें विशेष रूप से प्रांत प्रचारक गोपाल जी, विभाग संघचालक विवेक भसीन, नगर संघचालक विजय राज, शशिकांत जी, मुकेश कपूर, मदन राजभर, आनंद दूबे, सच्चिदानंद, राजेंद्र, संजीव विजयवर्गीय पूर्व डिप्टी मेयर, रांची म्युनिसिपल कारपोरेशन सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की गौरवशाली आदिवासी महिला, उद्यमी और डिजाइनर तृप्ति कुमारी लकड़ा ने एक बार फिर अपने जज्बे और मेहनत से राज्य का नाम रोशन किया है। तृप्ति का चयन एलेविटा मिसिज इंडिया वर्ल्ड 2025 के अंतिम चरण के लिए हुआ है। यह वही मंच है, जिसे मिसिज वर्ल्ड जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता का आधिकारिक भारतीय चयन द्वार माना जाता है। संघर्ष से सफलता तक अठारह वर्ष की आयु में पिता को खोने का गहरा आघात झेलने के बावजूद तृप्ति ने हार नहीं मानी। उन्होंने जीवन को एक नए उद्देश्य और दृष्टिकोण के साथ जीना शुरू किया। कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए भी अपने सपनों को थामे रखना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। पालतू पशुओं के लिए ब्रांड डर्टी पॉज पशु-पक्षियों, विशेषकर कुत्तों के प्रति उनके गहरे लगाव ने उन्हें डर्टी पॉज नामक ब्रांड की स्थापना करने के लिए प्रेरित किया। यह ब्रांड न सिर्फ पालतू जानवरों के लिए आभूषण और एक्सेसरीज बनाता है, बल्कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों के लिए रिफ्लेक्टिव कॉलर भी तैयार करता है, ताकि वे रात के समय सड़क दुर्घटनाओं से सुरक्षित रह सकें। यह पहल तृप्ति के सामाजिक सरोकारों को भी उजागर करती है। प्राणिक हीलिंग से जीवन में संतुलन तृप्ति प्राणिक हीलिंग की साधक भी हैं। उनका कहना है कि इस साधना ने उन्हें स्वास्थ्य, प्रेम, समृद्धि और आत्मा के बीच संतुलन साधना सिखाया। तृप्ति का मानना है कि सौंदर्य केवल बाहरी रूप में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और उद्देश्य में भी निहित होता है। व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन का संतुलन हाल ही में विवाह के बाद भी तृप्ति ने अपने सपनों को रुकने नहीं दिया। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि एक महिला अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बनाकर दोनों में सफलता हासिल कर सकती है। अपनी उपलब्धि पर तृप्ति कहती हैं कि यह मंच केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और उद्देश्य का है। मैं चाहती हूं कि मेरी यात्रा से हर महिला यह महसूस करे कि वह असीमित है। झारखंड के लिए गर्व का क्षण एलेविटा मिसिज इंडिया वर्ल्ड 2025 का भव्य समापन आगामी महीनों में होगा। तृप्ति पूरे समर्पण और मेहनत के साथ तैयारी कर रही हैं। उनका यह कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि झारखंड की हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने की राह में संघर्षरत है। झारखंड के लिए यह गर्व का क्षण है कि यहां बेटी अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरने जा रही है।
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के तत्वावधान में एवं नृत्य श्री डांस स्टूडियो, कटहल मोड़ के सौजन्य से कल दिनांक 25 सितंबर, गुरुवार को सायं 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग परिसर में एक भव्य डांडिया एवं गरबा डांस महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया है। आयोजन को लेकर विशेषकर युवाओं और महिलाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इस रंगारंग कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ एवं नृत्य श्री डांस स्टूडियो की संयोजिका पिंकी सिंह ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति की गरिमा और पारंपरिक लोकनृत्य की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रयास है। कार्यक्रम में गरबा और डांडिया की सुंदर प्रस्तुतियों के साथ-साथ पारंपरिक गुजराती वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां आकर्षण का केंद्र होंगे। पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों एवं पारंपरिक सजावट से सुसज्जित किया गया है। नवरात्रि की पावन भावना को जीवंत करती संगीत की मधुर धुनें और तालबद्ध कदमों की गूंज पूरे वातावरण को भक्तिमय एवं उल्लासपूर्ण बना देंगी। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में प्रवेश पूर्णत: नि:शुल्क है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग लेकर भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ सकें। आयोजन को पारिवारिक उत्सव का स्वरूप देने हेतु बच्चों, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों बैठने की समुचित व्यवस्थाएं की गयी हैं। साथ ही स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल्स भी लगाये गये हैं। इस आयोजन के माध्यम से श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं डांस स्टूडियो का उद्देश्य न केवल सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देना है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सौहार्द का वातावरण भी निर्मित करना है। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंदिर में नवरात्र के अवसर पर मां भगवती की पूजा अर्चना व दुर्गा पाठ का आयोजन किया गया है। आश्विन शुक्ल पक्ष की एक से नवमी तिथि तक प्रतिदिन मंदिर के आचार्य द्वारा दुर्गा पाठ किया जाएगा तथा प्रात: कालीन एवं संध्या कालीन आरती उपस्थित भक्त जनों के साथ की जाएगी । यजमानश्री संजीत चौधरी रंजना चौधरी विधि विधान से पूजा अर्चना करवा रहे हैं। प्रथम दिन कलश स्थापना मुहूर्त प्रात 6:15 बजे से प्रारंभ हुआ। जिसमें मंडल के श्याम सुंदर शर्मा के सानिध्य में आचार्य संग मिलकर यजमान ने मां भगवती की आराधना कर वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ मां भगवती को विराजमान करवाया। वैदिक विधि विधान पूजन अर्चना नवग्रह षोडश मात्रिका कलश स्थापना के समस्त पूजन कार्यों के बाद संजीत चौधरी धर्मपत्नी रंजना चौधरी ने प्रात: कालीन आरती की । जिसमें मंडल अध्यक्ष गोपाल मुरारका उपाध्यक्ष श्रवण ढानढनिया सदस्य श्याम सुंदर शर्मा एवं अनेक भक्त उपस्थित थे। 172वां श्री सुंदरकांड श्री हनुमान चालीसा पाठ श्री श्याम मित्र मंडल द्वारा हरमू रोड के श्री श्याम मंदिर में आज 172 वा श्री सुंदरकांड श्री हनुमान चालीसा का पाठ का आयोजन किया गया। और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे के गायन व बजरंग बली की जय जयकारों से हरमू रोड का श्री श्याम मंदिर गूंज रहा था। राजेश ढांढनीया ने अखंड ज्योति एवं पूजन के सभी कार्य सम्पन्न करवाएं। सुनील मोदी ने बालाजी महाराज की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर केसरिया पेड़ा गुड़ चना फल का भोग बालाजी महाराज को अर्पित किया। अरुण खुटेटा ने श्रीरामचरितमानस ग्रंथ की पूजा करके पाठ वाचकों का चंदन वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पाठ वाचक मनीष सारस्वत ओम शर्मा ने अपने सहयोगियों के साथ ढोलक ढपली के स्वर के साथ श्री गणेश वंदना कर श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया। श्री सुंदरकांड का संगीतमय पाठ उपस्थित जनों से करवाया गया। भक्तजन श्री हनुमान जी की आराधना में लीन थे। पाठ के मध्य में भजनों का गायन भी किया गया। श्री सुंदरकांड के पाठ के उपरांत पुन: श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके महाआरती करके भक्तजनों को प्रसाद वितरित किया गया। श्रवण ढानढनिया ने चना प्रसाद सेवा पुष्पा देवी पोद्दार ने केसरिया पेडा सेवा मुकेश मित्तल ने गिरिगोला सेवा एवम राजेश जयसवाल ने फल प्रसाद सेवा निवेदित की। इस अवसर पर अध्यक्ष गोपाल मुरारका महामंत्री गौरव अग्रवाल उपाध्यक्ष श्रवन ढानढनिया अशोक लड़ियां कोषाध्यक्ष मनोज खेतान राजेश ढांढनीया निवर्तमान महामंत्री विश्वनाथ नारसरिया अरुण खूंटेटा सुनील मोदी हर्ष कृष्णा कुमार आदि भक्त उपस्थित थे। केशर चंदन तिलक श्रृंगार खाटूधाम की परंपरा के अनुसार रांची श्याम मंदिर में शुक्रवार 26 सितंबर को खाटू नरेश का केसर चंदन तिलक श्रृंगार मंडल अध्यक्ष गोपाल मुरारका एवं उपाध्यक्ष मनोज खेतान के सानिध्य में किया जाएगा। विशेष श्रृंगार दर्शन 5:30 बजे के उपरांत भक्तगण कर पायेंगे। उपरोक्त सभी जानकारी मंडल के महामंत्री गौरव अग्रवाल ने दी।
टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 23 सितंबर को हम भारत के महान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती मनाते हैं। वे केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रभक्ति के प्रखर प्रवक्ता भी थे। उनका साहित्य आज भी युवाओं में ऊर्जा, साहस और देशप्रेम की भावना का संचार करता है। दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में हुआ था। वे एक साधारण कृषक परिवार से थे। बचपन में ही पिता का देहांत हो गया, लेकिन कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक किया और इसके बाद वे शिक्षक, पत्रकार और फिर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गये। उनकी कविताओं में ओज, शौर्य और क्रांति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। दिनकर जी को विशेष रूप से वीर रस के कवि के रूप में जाना जाता है। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में संस्कृति के चार अध्याय, परशुराम की प्रतीक्षा, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी आदि शामिल हैं। रश्मिरथी में कर्ण की पीड़ा और संघर्ष का मार्मिक चित्रण है, तो कुरुक्षेत्र में युद्ध और शांति की गूढ़ दार्शनिकता को दर्शाया गया है। वहीं उर्वशी जैसी रचना में उन्होंने प्रेम और सौंदर्य को उच्च स्तर पर उठाया। दिनकर जी का साहित्य समाज की जटिलताओं को उजागर करता है और न्याय, समानता एवं राष्ट्रहित की बात करता है। दिनकर जी को उनकी साहित्यिक सेवा के लिए कई सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म भूषण, और राज्यसभा सदस्य जैसे गौरवपूर्ण पद प्राप्त हुए। वर्ष 1972 में उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी लेखनी सत्ता से भी टकराने का साहस रखती थी। उन्हें जनकवि भी कहा जाता है क्योंकि वे जनता की आवाज बनकर उभरे। आज जब देश को पुन: जागरूकता, नैतिकता और राष्ट्रीयता की आवश्यकता है, तब दिनकर जी की कविताएं नयी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी जयंती पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं और उनके अमर साहित्य को स्मरण कर देशभक्ति की ज्योति को प्रज्ज्वलित करते हैं।
टीम एबीएन, रांची। आगामी 26/9/25 दिन शुक्रवार को कांके रोड स्थित वाटिका वेकेंट हॉल में नवरात्र के शुभ अवसर पर डांडिया नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। माता भवानी को स्टेप फिटनेश स्टूडियो के तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिभागियों को डांडिया नृत्य के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा।
नवरात्रि शक्ति, भक्ति, श्रद्धा, संयम, साधना और संस्कारों का महान पर्व : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत एक ऐसा देश है जहां हर पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक उन्नयन का संदेश होता है। ऐसा ही एक पर्व है शारदीय नवरात्रि, जो इस वर्ष 22 सितंबर दिन सोमवार से आरंभ हो रहा है। यह पर्व माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का महापर्व है, जो आत्मशुद्धि, शक्ति और भक्ति का प्रतीक है।नव-रात्रि का अर्थ है नौ रातों का उत्सव, जिसमें देवी दुर्गा के नवदुर्गा रूपों की पूजा होती है। यह पर्व अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चलता है। माना जाता है कि इन नौ दिनों में देवी शक्ति पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और असुरों का संहार करती हैं। शारदीय नवरात्र को देवी शक्ति की आराधना का श्रेष्ठ काल कहा गया है। यह न केवल धर्म और आस्था का पर्व है, बल्कि यह आत्मनिरीक्षण, संयम और साधना का भी समय है। इन नौ दिनों में माँ नव दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है:-1. शैलपुत्री-आरंभिक ऊर्जा का प्रतीक,2. ब्रह्मचारिणी-तपस्या और साधना की देवी,3.चंद्रघंटा- शांति और शक्ति का संतुलन, 4. कूष्मांडा-ब्रह्मांड सृजन करने वाली,5. स्कंदमाता- मातृत्व और संरक्षण की देवी, 6.कात्यायनी-दुर्गा का युद्ध रूप,7.कालरात्रि- नकारात्मकता का नाश करने वाली, 8. महागौरी- करुणा और शुद्धता की प्रतीक, 9. सिद्धिदात्री – ज्ञान और सिद्धियों की दात्री, नवरात्रि में लोग सात्विक भोजन करते हैं और मानसिक एवं शारीरिक शुद्धता बनाए रखते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित कर देवी का आवाह्न किया जाता है। दुर्गा सप्तशती पाठ प्रतिदिन देवी के मंत्रों, स्तुतियों और पाठ का आयोजन होता है। डांडिया एवं गरबा, गुजरात और पश्चिम भारत में यह सांस्कृतिक रूप से अत्यंत लोकप्रिय है।अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं को देवी के रूप में पूजकर भोजन कराया जाता है। नवरात्रि केवल देवी की पूजा भर नहीं है, यह आत्मा को ऊर्जा देने वाला पर्व है। यह समय है अपने अंदर की नकारात्मकता को खत्म कर सकारात्मकता का दीप जलाने का। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में हर असुर (अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह) पर विजय पाई जा सकती है, यदि श्रद्धा, संयम और शक्ति हमारे साथ हो। यह पावन पर्व, हम सभी को एक अवसर देता है—धार्मिक आस्था के साथ-साथ आत्मचिंतन और आत्मविकास का। आइए इस नवरात्रि, देवी माँ से यही प्रार्थना करें कि वे हमें शक्ति दें, सद्बुद्धि दें और जीवन में धर्म, भक्ति एवं सेवा की भावना बनाए रखें।
हम स्वयं को बदलें, युग प्रवाह को पलटें, प्रवाह में न बहें... विषय पर स्वाध्याय पाठ किया : गायत्री परिवार एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार एवं युगतीर्थ शांतिकुञ्ज के संस्थापक, युगप्रवर्तक, मार्गदर्शक गुरुसत्ता परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की जयंती बड़े उत्साह उल्लास व आनंदमय वातावरण में गायत्री साधक-शिष्य व भाई-बहनों ने अपनी आवासीय तपोवन, गायत्री शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ, चरण पीठ और प्रज्ञा मंडल महिला, मंडल प्रतिनिधित्व इकाइयों में विधिवत पूजन-अर्चन, यज्ञ, जप- अनुष्ठान विधान से मनायी। कई साधक-शिष्यों ने गुरुवर श्रीपूज्यवर का वास्तविक जन्म हिन्दी कैलेंडर तिथि आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तथा बहुतों ने अंग्रेजी दिनांक 20 सितंबर इन दोनों दिवसों को श्रद्धा-सामीप्य में मनाया। साथ ही इस महती अवतारी चेतना स्वरूप प्रज्ञावतार युगपुरुष, नवयुग सृजक, युगद्रष्टा के जन्म दिवसोत्सव, मालवीय जी द्वारा गायत्री महामंत्र से दीक्षित, यज्ञोपवित धारण तथा आगे वसंतोत्सव पर्व पर घटित विशिष्ट उनके आध्यात्मिक सद्गुरुदेवजी के प्रकाशपुंज रूप साक्षात्कार में पूर्व के 3 जन्मों का साथ व पहचान, इस जन्म में भी मार्गदर्शन, दिशानिर्देश, दिव्य अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन, 24-24 लाख का महा पुरश्चक्रण श्रृखला सहित तपश्चर्या, स्वतंत्रता संग्राम संलग्नता व जेल यात्रा भागीदारी और निर्धारित युग निर्माण, नव युग का मैनिफेस्टो स्वरूप सत्संकल्प पाठ, लाल मशाल, प्रज्ञा अभियान, विचार क्रांति, अभियान संबंधित प्रतिपादित सूत्र आध्यात्म तत्वदर्शन, उनके भारतीय धराधाम पर सद्गुरु रूप में अवतरण, ईश्वरीय अनुशासन को जीवन में अनुकरण, 3 हजार से अधिक पुस्तक लेखन, 4 हजार से अधिक शक्तिपीठों का स्थापन, सारी विश्व वसुधा को धर्म- अध्यात्म से अनुप्राणित करने, सबको योगमय व यज्ञमय जीवन जीने की कला पर विश्वास दृढ़ कराने के सूत्र आदि वृतांत स्मरण कर गहन चर्चाएं की गयी। टाटानगर शक्तिपीठ भालूबासा गायत्री ज्ञान मंदिर नवयुग दल व महिला मंडल प्रतिनिधित्व ने गुरुदेव की अवतरण जयन्ती मनाने का समाचार बताया और स्वस्थ-सुखद जीवन व प्रगतिशील वातावरण विस्तार तथा उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय मनोरथ कर गुरुदेव श्री के चरणों में नमन-वंदन किये। उक्त जानकारी वरिष्ठ-साधक एवं प्रचारक प्रसारक जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। एक पर्यटक एक होटल में पहुँचा।पर्यटक ने 2,500 रुपये होटल के काउंटर पर रखते हुए कहा – यह पैसा आप रख लीजिए, मैं पहले कमरा देखकर आता हूँ।पैसा मिलते ही होटल का मालिक दौड़कर घी वाले की दुकान पर गया और उसे देने वाले 2,500 रुपये चुका कर हिसाब बराबर कर दिया।घीवाला दौड़कर दूधवाले के पास गया और उसे देने वाले 2,500 रुपये चुका कर हिसाब बराबर कर दिया।दूधवाला दौड़कर गायवाले के पास गया और उसे देने वाले 2,500 रुपये चुका कर हिसाब बराबर कर दिया।गायवाला दौड़कर दानावाले (चारा बेचने वाले) के पास गया और हिसाब में से 2,500 रुपये घटा लाया।अंत में, दानावाला उसी होटल में पहुँचा, जहाँ से वह ज़रूरत पड़ने पर उधार लिया करता था।उसने होटल मालिक को 2,500 रुपये देकर अपना हिसाब बराबर कर दिया।तभी पर्यटक कमरा देखकर लौटा और बोला – मुझे कमरा पसंद नहीं आया।इतना कहकर उसने अपनी जमा की हुई 2,500 रुपये की रकम वापस ले ली और चला गया।देखिए, इतनी दौड़-धूप में न किसी ने कुछ पाया, न किसी ने कुछ खोया, लेकिन सबका हिसाब बराबर हो गया।यहाँ कहाँ गड़बड़ी हुई?कहीं कोई गड़बड़ नहीं हुई। लेकिन यहाँ सबको यह भ्रम था कि रुपये हमारे हैं।असलियत यह है कि हमें यह समझना ज़रूरी है – हम सब खाली हाथ आए हैं और खाली हाथ ही जाना है।
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