Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
होम देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन

समाज

View All
करवा चौथ का पावन पर्व 10 अक्टूबर को
Published / 2025-10-07 21:07:07
करवा चौथ का पावन पर्व 10 अक्टूबर को

करवा चौथ अखंड सौभाग्य, नारी शक्ति के त्याग, प्रेम और समर्पण का है प्रतीक :  संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि करवा चौथ भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण एवं भावनात्मक पर्व है, जो विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु, सुख- समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष करवा चौथ का पावन पर्व 10 अक्टूबर दिन शुक्रवार को मनाया जायेगा। करवा चौथ की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस पर्व से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से वीरवती की कथा सर्वाधिक प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि वीरवती ने सच्चे मन से करवा चौथ का व्रत किया था और कुछ भ्रम के कारण व्रत अधूरा छोड़ने पर उसके पति की मृत्यु हो गई थी। उसकी श्रद्धा, तपस्या और भक्ति से देवी पार्वती प्रसन्न हुईं और उन्होंने वीरवती को उसका पति पुन: जीवित कर लौटाया। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य की कामना के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। करवा चौथ पर सुहागन स्त्रियां निर्जला उपवास रखती हैं, यानी वे दिन भर जल भी ग्रहण नहीं करतीं। वे प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व सांझी (सरगी) ग्रहण करती हैं, जो कि सास द्वारा बहू को दिया जाता है। दिन भर व्रत रखने के बाद संध्या समय चंद्रमा के उदय पर, चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर पूजा की जाती है। पूजन में करवा (मिट्टी का घड़ा), दीपक, रोली, चावल, मिठाई आदि का विशेष महत्व होता है। स्त्रियां सोलह श्रृंगार कर पारंपरिक परिधानों में सजती हैं और एकत्र होकर कथा सुनती हैं। चंद्रमा के दर्शन कर छलनी से अपने पति को देखकर व्रत खोला जाता है। पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर व्रत संपन्न करवाते हैं। करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि यह नारी शक्ति के त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और अटूट बंधन को सुदृढ़ करता है। इसके माध्यम से भारतीय समाज में स्त्रियों की भूमिका, उनकी आस्था और परिवार के प्रति उनका समर्पण उजागर होता है। आजकल यह पर्व शहरी जीवन में भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जहां पति भी पत्नी के साथ व्रत रखकर समानता एवं प्रेम का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।करवा चौथ एक ऐसा पर्व है जो न केवल वैवाहिक प्रेम और नारी समर्पण का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी संस्कृति की गहराई, परंपराओं की गरिमा, और आध्यात्मिक भावनाओं को भी उजागर करता है। आधुनिक समय में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है, जो हमारी सनातन परंपराओं की अमरता को सिद्ध करती है।

शरद पूर्णिमा महोत्सव श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में उल्लासपूर्वक संपन्न
Published / 2025-10-07 12:53:29
शरद पूर्णिमा महोत्सव श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में उल्लासपूर्वक संपन्न

टीम एबीएन, रांची। पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा शरद पूर्णिमा का पर्व हर्षोल्लास एवं भक्ति भाव से मनाया गया। इस पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण दिव्य अलोकिकता से आलोकित हो उठा, जब श्री राज श्यामा जी का श्वेत वस्त्रों एवं आभूषणों से अलौकिक श्रृंगार किया गया। श्रृंगार दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा की गूंज सुनाई देने लगी। रात्रि में मंदिर प्रांगण में भजन कीर्तन एवं सामूहिक आरती का विशेष आयोजन हुआ। ट्रस्ट के भजन गायको द्वारा मनमोहक भजन प्रस्तुत किए गए प्रभु श्रीकृष्ण एवं राधा रानी के मधुर भजनों ने समस्त वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। आरती के समय दीपों की पंक्तियाँ और चंद्रमा की चांदनी ने माहौल को अत्यंत आध्यात्मिक एवं दिव्य बना दिया।शरद पूर्णिमा की रात्रि को विशेष महत्व प्राप्त है, क्योंकि इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात्रि चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होता है और उसकी चांदनी में औषधीय गुण होते हैं। इसी मान्यता के अनुसार मंदिर में 101 किलो दूध से बनी खीर का विशेष भोग तैयार किया गया, जिसे रात्रि भर चंद्रमा की रोशनी में रखा गया। श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को बड़े श्रद्धाभाव से निहारा। आज सुबह मंदिर के मुख्य पुजारी अरविंद पांडे  ने विधिपूर्वक खीर का भोग लगाया और तत्पश्चात इसे उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रेमपूर्वक वितरित किया गया। इस दिव्य प्रसाद को पाने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने शरद पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व आत्मशुद्धि, भक्ति एवं शांति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा न केवल भगवान श्रीकृष्ण के रास लीला का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन का भी संदेश देती है। पूरे कार्यक्रम का आयोजन ट्रस्ट के सदस्य एवं स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से अत्यंत अनुशासित और भव्य रूप से संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने इसे एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा इस प्रकार का आयोजन न केवल धार्मिक भावनाओं को पुष्ट करता है, बल्कि समाज में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना को भी जागृत करता है। शरद पूर्णिमा का यह पर्व एकता, श्रद्धा और सेवा की भावना के साथ सम्पन्न हुआ। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह  मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में मंदबुद्धि निराश्रितों की सेवा और कराया गया भोजन
Published / 2025-10-06 20:55:22
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में मंदबुद्धि निराश्रितों की सेवा और कराया गया भोजन

अपना घर आश्रम मे समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। परमहंस डॉ संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य मे श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में संचालित विगत 21 माह से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज एसडीए ग्रुप के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 40 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया। अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 10 सितंबर से 6 अक्टूबर तक 27 दिनों मे 5560 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में रेणु देवी, ललिता पोद्दार, मंजू देवी अग्रवाल, सुशील ड्रोलिया, मुरलीधर प्रसाद, भरत कुमार, अजय बजाज, पवन अग्रवाल, मंजू देवी बोडा, शिव भगवान अग्रवाल, डूंगरमल अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, रोहित कुमार चौधरी, अनीश गुप्ता, नील कौशल, मुकेश जालान, निर्मल छावनिका, रोहित कुमार, पंकज कुमार, प्रीति मकवाना, निर्भय कुमार सिंह, सीताराम जी, लक्की सिन्हा, कविता अग्रवाल, ओमप्रकाश हेलीवाल, नंदकिशोर पाटोदिया के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गई। सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि ऐसे सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष निर्मल जालान, राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल,नन्द किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया,पवन कुमार पोद्दार, विष्णु सोनी, सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

श्री राधा- कृष्ण मंदिर के अन्नपूर्णा महाप्रसाद में 2 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने किया प्रसाद ग्रहण
Published / 2025-10-05 17:35:21
श्री राधा- कृष्ण मंदिर के अन्नपूर्णा महाप्रसाद में 2 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने किया प्रसाद ग्रहण

किसने सजाया मुरली वाले को बड़ा प्यारा लागे...भजन संध्या के मनमोहक भजनों में भक्तगण खूब झूमेटीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग मे श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम में 230वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद भंडारा का आयोजन किया गया। आज का श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा भंडारे समाजसेवी नंदकिशोर पाटोदिया एवं उनके परिवार के सौजन्य से आयोजित किया गया। अन्नपूर्णा महाप्रसाद का विधिवत भोग दोपहर 12:30 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडे द्वारा लगाई गई, तत्पश्चात मंदिर परिसर में उपस्थित दो हज़ार से भी अधिक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आज के महाप्रसाद में केसरिया खीर, पुड़ी आलू चना सब्जी, जीरा राइस, चिप्स, आदि का वितरण किया गया।तत्पश्चात भजन- संध्या के कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी के गाये मनमोहक सुमधुर भजनों में ये सुंदर श्रृंगार सुहाना लगता है भक्तों को तो दिल दीवाना लगता है..., श्याम देने वाले हैं हम लेने वाले हैं आज खाली हाथ नहीं जाना है..., किसने सजाया मुरली वाले को बड़ा प्यारा लागे... अमृत गंगा का रसपान कराते हुए श्रोताओं को खूब झुमाया।श्री राधा कृष्ण के जयकारा से पूरा वातावरण कृष्णमय एवं भक्तिमय बन गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती की गई‌। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि संस्था द्वारा श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर मे आज अन्नपूर्णा महाप्रसाद एवं भजन संध्या में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं का भीड़ लगा रहा। तथा भगवान श्री राधा कृष्ण मंदिर मे 5 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये।इस अवसर पर-ट्रस्ट के  उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल छावनिका, पूरणमल सर्राफ , सुरेश चौधरी, सुरेश भगत, विशाल पाटोदिया, सुप्रिया पाटोदिया,अंश अमायरा पाटोदिया, डॉ आशुतोष पांडे, चंदन कुमार, हेमंत प्रजापति, विष्णु सोनी, विजय कुमार अग्रवाल, पवन पोद्दार, मुरली प्रसाद, हरीश कुमार, परमेश्वर साहू, बसंत वर्मा, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ने किया संगम-गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन कार्यक्रम
Published / 2025-10-05 17:31:14
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ने किया संगम-गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन कार्यक्रम

टीम एबीएन, रांची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस सप्ताह में  संगम-गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए राजेंद्र मिश्रा अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि हर प्रकार की यात्रा की तैयारी करनी पड़ती है और इस जीवन यात्रा की तैयारी तो वाल्यकाल से ही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झुरियाँ हमारे माथे पर पड़नी ही है परंतु उन्हें हृदय पर मत पड़ने दीजिए क्योंकि हृदय स्रोत है उमंग उत्साह का। वास्तव में आत्मा न बूढ़ी होती है, न जवान।कार्यक्रम में उपस्थित डा० प्रियदर्शनी विजयलक्ष्मी पूर्व विभागाध्यक्ष दर्शनशास्त्र ने कहा प्रकृति सिर के बालों को तो सफेद कर देती है परंतु अपने मन को हमें स्वयं ही स्वच्छ बनाना होगा। अब तो पूरी सृष्टि ही वानप्रस्थी हो गई है। कोई भी यात्रा के अंतिम पड़ाव पर पहुँचता है तो प्रसन्नता का अनुभव करता है परंतु आज की परिस्थिति में यात्रा का अंतिम पड़ाव यदि दुखदायी है तो उसके कारणों को समझना होगा।कार्यक्रम में उपस्थित सत्येंद्र kishor  पूर्व जीएम कोल इंडिया ने कहा वृद्ध तो केवल शरीर है आत्माएँ तो अजर हैं। जितना जितना देहभान छोड़ आत्मस्मृति का अभ्यास किया जाएगा, उतना उम्र के नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रह सकेंगे। मन का सकारात्मक चिंतन, उमंग उत्साह धैर्य आदि गुण शारीरिक उम्र की अधिकता के असर को समाप्त कर देंगे जिस प्रकार राजयोग के निरंतर अभ्यास से कर्मभोग को कर्मयोग में बदला जा सकता है उसी प्रकार इस अभ्यास से वृद्ध अवस्था को भी वरदानी अवस्था में बदला जा सकता है।डा० प्रोफेसर सुनीता ठाकुर ने कहा कि सदा याद रखिये अब आप वरदानी बन गये हैं। अब आपको यही करना है। निरंतर भगवान शिव से लेते रहो और अन्य सभी को देते रहो। ईश्वरीय ज्ञान, योग, धारणा सेवा में अपने को इतना व्यस्त रखें जो जीवन सार्थक बन जाये व सफल हो जाये और लोगों को आप वृद्ध नहीं लेकिन वरदानी-मूर्ति नजर आयें।कार्यक्रम में उपस्थित सुधा लील्हा निदेशक दीपशिखा संस्था ने कहा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आपने जीवन भर जो अच्छे कार्य किये हैं उसके फल को पाने की इच्छा रखने के वजाय ये सोचिए कि पुण्य कर्म जमा है उसका पुण्य खाता अभी नहीं तो आगे जरूर प्राप्त होगा। सदा याद रखिये, आप वृद्ध नहीं वरदानी आत्मा हैं। अभी से पहले आप तन और धन से देने वाले दानी थे लेकिन अब आपको मन से भी दुआ और आशीर्वाद देने में व्यस्त रहना है।किशन साबू माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष ने कहा कि शरीर को धारण करने वाली आत्मा तो आज भी वैसी ही है जैसी कि गर्भ प्रवेश के समय थी तो बुढ़ापा कैसा । जो थकान, निराशा, खीझ अनुभव करता है वास्तव में वह बूढ़ा है, जिसमें आशा उत्साह हिम्मत मौजूद है वही जवान है। महात्मा गांधी, मदर टेरेसा, दादी प्रकाशमणि कभी बूढ़े नहीं दिखाई पड़े। जिसने अपनी आदतें इच्छाएँ और गतिविधियाँ ऊँचे स्तर की रखी है उन्हें कभी बुढ़ापा नहीं देखना पड़ा है।ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि जीवन गतिशील है। गतिशील जीवन के चार पड़ाव हैं - बचपन, जवानी, वृद्धावस्था एवं मृत्यु। इनमें से दो को वरदान और अंतिम दो को अभिशाप माना जाता है परंतु जीवन तो जीवन ही है और उसका हर पल उपयोगी है। संसार में अनेक ऐसे लोग हुए हैं, जिनके श्रेष्ठ कर्मों का आरंभ ही वृद्धावस्था में हुआ और उन्होंने वृद्ध अवस्था को वरदानिया अवस्था बना कर नया इतिहास रच डाला। वृद्धजनों के लिए विशेष गौरव की बात यह है कि सृष्टि के आदि कर्ता के रूप में जिस प्रथम पुरुष की चर्चा की जाती है उन्हें वृद्ध दिखाया गया है। फिर उसे चाहे एडम कहें, आदम कहें या ब्रह्मा। दाढ़ी युक्त व्यक्तित्व वाला यह प्रथम पुरुष देवता भी कहलाया जबकि वास्तव में देवता न वृद्ध होते हैं, न दाढ़ी वाले।सत्यनारायण की कथा जो भारत में बहुत प्रचलित है, उसमें भी भगवान को बूढ़े ब्राह्मण के रूप में कंचन महल देते हुए दिखाया है। ये सभी यादगारें यही बताती है कि भगवान सृष्टि परिवर्तन के कार्य में वृद्धों के अनुभव और उनके पिता समान प्यार का विशेष उपयोग करते हैं। प्रजापिता ब्रह्माबाबा ने यही करके दिखाया, 93 वर्ष तक की आयु भी उनके ऊँचे कार्यों के लिए छोटी पड़ गई। इसलिए आज वे अव्यक्त शरीर द्वारा विश्व परिवर्तन के कार्य को प्रैक्टिकल स्वरूप दे रहे हैं।कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत नृत्य के साथ किया गया। गाइडेड मेडिटेशन के द्वारा राजयोग का अभ्यास कराया गया। सभा में उपस्थित सभी वृद्धजनों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में अशोक सिन्हा सीनियर मैनेजर उषा मार्टिन, अजय वर्मा डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर, साकेत बिहारी पूर्व बैंक प्रबंधक, सत्य नारायण शर्मा, समाजसेवी, अमरेन्द्र विष्णुपुरी, समाजसेवी, रतन मोदी समाज सेवी, ले० कर्नल रोबिन देव, विनोद कुमार पाण्डेय, पूर्व जी०एम० सीएमपीडीआई इत्यादि के साथ साथ 80 से भी अधिक वृद्धजन उपस्थित थे।ज्ञातव्य हो कि राजयोग का निःशुल्क प्रशिक्षण ब्रह्माकुमारी केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड में प्रतिदिन प्रातः 7.00 बजे से 10.00 बजे तक और संध्या 3.00 बजे से 7.00 बजे तक दिया जाता है। उक्त जनकारी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की केंद्र प्रशासिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने दी।

शरद पूर्णिमा उत्सव छह अक्टूबर को
Published / 2025-10-04 20:30:32
शरद पूर्णिमा उत्सव छह अक्टूबर को

शरद पूर्णिमा एक सांस्कृतिक धार्मिक एवं वैज्ञानिक पर्व : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष 6 अक्टूबर दिन सोमवार को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इसे अत्यंत पवित्र एवं फलदायक रात्रि माना जाता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा तथा लक्ष्मी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस रात्रि को देवी लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और जो व्यक्ति जागरण करता है व मां लक्ष्मी की आराधना करता है, उस पर मां की विशेष कृपा होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी रात्रि को वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था, जो भक्ति, प्रेम और अध्यात्म की पराकाष्ठा मानी जाती है। यह तिथि देवी लक्ष्मी की पूजा हेतु विशेष मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने, रात्रि जागरण करने एवं खीर का सेवन करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। लक्ष्मी पूजन करने से दरिद्रता दूर होती है। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से औषधीय गुणों का संचार होता है। इसीलिए खीर को चांदनी में रखने की परंपरा है ताकि वह प्राकृतिक ऊर्जा से युक्त होकर स्वास्थ्यवर्धक बने।इस खीर को अमृत के समान माना जाता है कहते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर खाने से इंसान का भाग्योदय होता है और रोग बीमारियों से मुक्ति मिलती है। कई क्षेत्रों में यह रात्रि प्रेम और भक्ति की प्रतीक मानी जाती है। उत्तर भारत में जगह-जगह कीर्तन, रासलीला, कथा एवं भजन संध्याओं का आयोजन होता है। इस दिन व्रती व्यक्ति दिनभर उपवास रखता है। रात्रि को देवी लक्ष्मी का पूजन कर घर में दीप जलाये जाते हैं। खीर बनाकर उसे चांदनी में रखकर भगवान को अर्पित किया जाता है। रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। शरद पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, विज्ञान और संस्कृति का संगम है। यह दिन आत्मिक शुद्धि, सामाजिक समरसता और भक्ति के भाव को पुष्ट करता है। इस शुभ अवसर पर हम सभी मां लक्ष्मी से सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें।

चांदन द्वादशी पर खाटू नरेश श्याम बाबा को भोग लगा खीर चूरमा
Published / 2025-10-04 20:29:33
चांदन द्वादशी पर खाटू नरेश श्याम बाबा को भोग लगा खीर चूरमा

टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंडल, रांची ने अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में आज दिनांक 4 अक्टूबर  2025 को खाटू नरेश श्याम बाबा को चांदन द्वादशी के पावन अवसर पर संध्या 6:30 बजे से 9 बजे तक श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया गया।  आज के भोग के मुख्य यजमान श्याम सुंदर पोद्दार ने पूरे परिवार पार्वती देवी पोद्दार, ज्योति पोद्दार, ऋतु पोद्दार, रोहित पोद्दार, पूजा पोद्दार, अभिषेक, अभिराज, सृष्टि, अर्पण, अनिल अग्रवाल, ममता अग्रवाल, आयुष, आदित्य ने श्याम बाबा को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया।  सर्वप्रथम मंडल के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश बागला, मंत्री धीरज बंका एवं पोद्दार परिवार ने गणेश पूजन कर मंदिर में विराजे वीर बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी पूजन कर विभिन्न प्रकार के फल एवं मिष्ठान अर्पित कर श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमे का भोग अर्पित किया। मौके पर पूरा मंदिर परिसर हारे के सहारे की जय-लखदातार के जय जयकारों के गूंज उठा।  द्वादशी के दिन श्री श्याम प्रभु का प्रिय भोग खीर चूरमा को लेने भक्तगण कतारबद्ध होकर प्राप्त कर रहे थे। साथ ही श्री श्याम मंडल के कार्यकर्ता आये हुए भक्तजनों को शुद्ध पेयजल का वितरण कर रहे थे तथा उनके चरण पादुका को रखने की उत्तम व्यवस्था बनी हुई थी। आज के खीर चूरमा का भोग श्री श्याम मंदिर में ही निर्मित किया गया तथा 500 से ज्यादा भक्तजनों प्रसाद प्राप्त किया।  आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेश सारस्वत, प्रदीप अग्रवाल, प्रियांश पोद्दार, जितेश अग्रवाल, अजय साबू, नितेश लखोटिया, महेश सारस्वत, अमित जलान का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन मार्ग रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

श्री राधा कृष्ण मंदिर में नारी शक्ति को 151 तलवार का वितरण
Published / 2025-10-03 16:50:46
श्री राधा कृष्ण मंदिर में नारी शक्ति को 151 तलवार का वितरण

विजय दशमी पर श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में भव्य शस्त्र पूजन एवं धार्मिक आयोजन टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में संत शिरोमणि परमहंस डॉ सदानंद जी महाराज द्वारा संचालित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग रांची में विजय दशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर एक भव्य एवं दिव्य धार्मिक आयोजन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। जिसमें नगर के श्रद्धालुजनों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। इस पावन अवसर पर पुजारी अरविंद पांडे द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पूरे विधि विधान के साथ शस्त्र पूजन की पूजा-अर्चना की गई, जिसमें परंपरागत अस्त्र-शस्त्रों की विशेष रूप से आराधना की गई। शास्त्रों के अनुसार शस्त्र पूजन आत्मबल, धर्म रक्षा और विजय के प्रतीक रूप में किया जाता है।इसके उपरांत सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ एवं भजन जागरण का आयोजन हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। ट्रस्ट के भजन गायक सज्जन पाड़िया एवं उर्मिला पाड़िया द्वारा प्रभु श्रीराम, हनुमान जी, श्री कृष्ण एवं मां दुर्गे की भजनों एवं स्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि शहर के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. एच.पी. नारायण थे, जिन्होंने अपने उद्बोधन में धर्म, सेवा और आत्मबल की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस शुभ अवसर पर नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 151 महिलाओं को आत्मरक्षा हेतु प्रतीकस्वरूप तलवारें वितरित की गईं। यह पहल समाज में नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास के रूप में सराही गई। ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष सज्जन पाड़िया ने भी अपने विचार साझा करते हुए धर्म, सेवा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कुशलता पूर्वक किया तथा उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज में एकजुटता, आध्यात्मिक जागरूकता एवं सांस्कृतिक मूल्यों को प्रोत्साहन देने वाला सिद्ध हुआ। ट्रस्ट का यह आयोजन आने वाले समय में समाज को धर्म, सेवा एवं सशक्तिकरण के पथ पर अग्रसर करने के लिए प्रेरणा देता रहेगा। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी महाभोग प्रसाद का भंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। मौके पर साध्वी मीणा महाराज, साध्वी पूर्णा महाराज, प्रणामी मंदिर भिवानी के पुजारी दिलीप कुमार, डूंगरमल अग्रवाल पूरणमल सर्राफ, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी, विष्णु सोनी, सुरेश अग्रवाल, संजय सर्राफ, मधुसूदन जाजोदिया, अंजनी अग्रवाल, विश्वनाथ बागला, दीपक पोद्दार, अनिल बजाज, सुनीता अग्रवाल, सुमन चौधरी, संतोष अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, करुणा बागला, अंजू बजाज, अनीता अग्रवाल, पिंकी सिंह, आरव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

लोहरदगा : सनातनी पद्धति से 1501 कन्याओं का हुआ कन्या पूजन
Published / 2025-10-03 16:24:36
लोहरदगा : सनातनी पद्धति से 1501 कन्याओं का हुआ कन्या पूजन

​​लोहरदगा : सनातनी पद्धति से 1501 कन्याओं का हुआ  कन्या पूजनएबीएन न्यूज नेटवर्क लोहरदगा। 1501 कन्याएं 5 से 15 वर्ष की संथाल, भूमिज, सबर, मुंडा, गोराई, मंडल आदि जनजातियों के पटमदा प्रखंड, जिला सिंहभूमि, झारखंड के निवासियों का सनातनी पद्धति से सनातन धर्मनूसार नवरात्रि के दिन जम्मूआल बाबा के अनुष्ठान से संपन्न हुआ।जनजातीय समाज के प्रमुख शरद सिंह सरदार, रामचंद्र शहीद, विधायक एवं पूर्व मंत्री झारखंड सरकार, कृपा प्रसाद सिंह,ग्राम विकास कार्यकर्ता एवं पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, वनवासी कल्याण आश्रम, राजेंद्र कुमार झुनझुनवाला, वनवासी कल्याण केन्द्र, सुधीर लाल संघ कार्यकर्ता ने सामूहिक रूप से माता दुर्गा के समक्ष दीप प्रज्वलित कन्या पूजन प्रारंभ किया। देवी के सभी रूपों का ध्यान करते हुए सभी कन्याओं को देवी रूप प्रदान करने का कार्य प्रारंभ हुआ। जलाशय से स्नान करने के पश्चात देवी यात्रा करते हुए सभी कन्याओं पैर रंगाई हेतु पंक्ति बद्ध होकर 150 की 10 पंक्तियों में बैठी। चुनरी टीका आदि से सजावट के पश्चात दुर्गा अष्टमी मंत्रों के साथ पूजन होने के पश्चात प्रत्येक कन्या को T shirt एवं हॉफ पेंट एवं एक तौलिया एवं नगद 20 रुपए की राशि सभी को भेट की गयी। सभी कन्याओं को खीर का भोजन साथ में खिचड़ी आदि खिलाया गया। इस कार्यक्रम से सनातन धर्म, देवी एवं कन्या का महत्व, सनातन जीवन पद्धति का जीवंत  प्रदर्शन, कन्या को पैर छू कर प्रणाम करना एवं सुसंस्कृत एवं श्रेष्ठ समाज की अनुभूति लोगो को कराई गई। Women empowerment evam girl child education का वनवासी कल्याण आश्रम का यह एक व्यावहारिक प्रयोग तथा RSS के 100 वे वर्ष के समरस्ता अभियान के जीवंत प्रयोग देखने लायक है।वनवासी कल्याण केन्द्र का गत 16 वर्षों से यह एक सतही सेवा का प्रयोग सामाजिक परिवर्तन का एक साक्षात उदाहरण है। 4000 वनवासी महिला पुरुष, नगरवासी, ग्रामवासी के एक साथ बैठ कर पत्ते के थाल में भोजन भोजन सामाजिक समरसता का अनूठा प्रयास है।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.