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डॉ मोहन भागवत के हाथों डॉ सदानंद जी महाराज सम्मानित
Published / 2025-12-20 20:23:19
डॉ मोहन भागवत के हाथों डॉ सदानंद जी महाराज सम्मानित

राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान हेतु स्वामी डॉ सदानंद जी महाराज को सर संघचालक डॉ मोहन भागवत ने किया सम्मानित टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत के सिलीगुड़ी प्रवास के दौरान आध्यात्मिक बैठक संपन्न हुई। डॉ भागवत ने श्री कृष्ण प्रणामी विश्व परिषद् के अध्यक्ष एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के संस्थापक संत शिरोमणि परमहंस डॉ स्वामी श्री 108 सदानंद महाराज से भेंट कर राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान की सराहना की। इस दौरान  सरसंघचालक ने स्वामी सदानंद महाराज को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान स्वामी जी ने गो-सेवा, स्वास्थ्य (चिकित्सा), शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने के लिए किये जा रहे निरंतर प्रयासों के प्रति कृतज्ञता स्वरूप दिया। श्रीकृष्ण प्रणामी विश्व परिषद के राष्ट्रीय सचिव एवं प्रवक्ता डॉ मुरलीधर शास्त्री ने बताया कि दोनों विभूतियों के बीच हुई इस आध्यात्मिक चर्चा में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई, जिसमें राष्ट्र निर्माण में सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता की अनिवार्य भूमिका, मानव कल्याण और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के लिए सनातन मूल्यों को आधुनिक समाज से जोड़ा, वर्तमान सामाजिक संकटों के समाधान हेतु आध्यात्मिक मार्गदर्शन की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा हुई। स्वामी सदानंद महाराज ने जिस प्रकार शिक्षा और चिकित्सा को सेवा का माध्यम बनाकर समाज को संस्कारित किया है, वह राष्ट्र निर्माण की नींव है। डॉ भागवत के हाथों उन्हें सम्मानित किया जाना यह संदेश देता है कि जब आध्यात्मिक अधिष्ठान और सेवा का संकल्प एक होते हैं, तो भारत को परम वैभव पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। समाज में नैतिकता, सद्भाव और सेवा भावना को मजबूत करने में आध्यात्मिक चिंतन की अहम भूमिका है। यह मुलाकात ना केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित होगा। स्वामी डॉ सदानंद महाराज ने 8 हजार जरूरतमंद परिवार की कन्याओं का सामूहिक विवाह जैसा पुनीत कार्य अपने कर कमलों से पूर्ण किया है। गौवंश संरक्षण के लिए लगभग 118 गौशालाओं के निर्माण कार्य से 80 हजार बेसहारा गायों व नंदियों को आश्रय देने का पुण्य कार्य किया है। स्वामी जी के तत्वावधान में एक लाख पौधों का रोपण भी किया जा चुका है। यही नहीं एक लाख 25 हजार पोलियोग्रस्त रोगियां का निरीक्षण करके 35 हजार पोलियों रोगियों का आॅप्रेशन के अलावा 45 हजार कैलीपर्स वितरण कर मानव सेवा के अग्रदूत कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यही नहीं स्वामी सदानंद महाराज द्वारा भारतीय सेना, थैलीसीमिया व कैंसर पीड़ितों के लिए 121 रक्तदान शिविरों के माध्यम से 19 हजार 500 यूनिट रक्त एकत्रित करके भी मानवता की सेवा की जा चुकी है। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट झारखंड के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि स्वामी सदानंद महाराज ने समाज में बेसहारा, मंदबुद्धि व्यक्तियों के लिए रांची झारखंड सहित सदगुरू कृपा अपना घर आश्रम की भी विभिन्न आश्रमों की स्थापना की और उनके भोजन एवं दवाइयों की व्यवस्था का सदप्रयास भी किया है। उन्होंने नारी शक्ति के उत्थान के लिए विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों का भी शुभारंभ किया है। प्रधानमंत्री के आह्वान पर स्वामी जी ने भारत को टीबी मुक्त अभियान के तहत 200 मरीजों को गोद लिया और उनका ईलाज करवाया। कोविड-19 महामारी के दौरान स्वामी जी ने जनकल्यण के भारत सरकार को एक करोड़ 25 लाख 25 हजार 525 रुपये तथा राज्यों में  हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल को 11-11 लख रुपये का आर्थिक सहयोग भी किया था। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट झारखंड के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, झारखंड प्रदेश के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

विहिप ने मेरठ में की संगठन की मजबूती पर चर्चा
Published / 2025-12-20 20:17:52
विहिप ने मेरठ में की संगठन की मजबूती पर चर्चा

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 20 दिसंबर 2025 विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रन्यासी मंडल की त्रिदिवसीय बैठक मेरठ प्रांत के जम्बूद्वीप परिसर, हस्तिनापुर में संपन्न हुए। बैठक में विभिन्न संगठनात्मक विषयों के अतिरिक्त दो विषयों पर गंभीरता से चर्चा की गयी, जिसमें से एक राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ से संबंधित है। वहीं दूसरी ओर सदन ने यह तय किया कि मंदिर की दान की राशि व चल अचल संपत्ति का उपयोग हिंदू समाज के लिए ही हो।बैठक में धर्मांतरण को रोकने और घर वापसी परावर्तन को व्यापक रूप से प्रोत्साहित करने हेतु भी एक कार्य योजना बनी तथा इन विषयों पर एक पुस्तक घर वापसी - क्यों और कैसे के हिंदी व अंग्रेजी संस्करण का विमोचन किया गया। बैठक में गौ रक्षा व गौ संवर्धन पर बल देते हुए चर्चा हुई तथा इन विषय पर संगठन द्वारा निकाले जाने वाली मासिक पत्रिका गऊ संपदा के ताजा अंक का भी विमोचन किया गया। समापन सत्र में देश के कई अधिकारियों को नवीन दायित्व दी गयी। जिसमें केंद्रीय बजरंग दल संयोजक किशन प्रजापत तथा केंद्रीय सहसंयोजक विवेक कुलकर्णी को बनाया गया। वहीं पटना क्षेत्र के लिए चितरंजन कुमार को झारखंड प्रांत संगठन मंत्री, नागेंद्र पांडे समर्थ को दक्षिण बिहार प्रांत संगठन मंत्री एवं देवी सिंह को उत्तर बिहार प्रांत संगठन मंत्री दायित्व दिये गये। इस बैठक में पटना क्षेत्र से प्रतिनिधि के रूप में क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु, क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार के साथ-साथ झारखंड प्रांत से देवी सिंह मनोज पोद्दार, रामनरेश सिंह, दक्षिण बिहार से चितरंजन कुमार, संतोष सिसोदिया तथा उत्तर बिहार से नागेंद्र पांडे समर्थ, रणवीर सिंह व इंदु शेखर उपस्थित थे। भवदीय उक्त जानकारी विहिप के (झारखंड-बिहार) पटना क्षेत्र के क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू (7033541040) ने दी।

जनसेवा के कार्यों में रांची महिला शाखा को कुल 16 अवार्ड मिले
Published / 2025-12-19 22:01:08
जनसेवा के कार्यों में रांची महिला शाखा को कुल 16 अवार्ड मिले

प्रांतीय अधिवेशन में रांची मारवाड़ी महिला सम्मेलन को मिला झारखंड का सर्वश्रेष्ठ शाखा का अवार्डएबीएन सोशल डेस्क। अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन झारखंड प्रदेश का द्वादश‌ अधिवेशन शक्ति संगम राज विलास रिसोर्ट धनबाद में संपन्न हुई। इस अधिवेशन में सत्र- 2024- 26 हेतु अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा को झारखंड का बेस्ट शाखा का अवार्ड दिया गया। रांची शाखा की सचिव उर्मिला पाड़िया को झारखंड की सर्वश्रेष्ठ सचिव का अवार्ड से नवाजा गया। तथा जन सेवा हेतु 5 लाख का सहयोग राशि गौशाला समिति को देने पर रांची शाखा अध्यक्ष मधु सर्राफ को, तथा नेत्रदान कराने हेतु, एवं महिला सृजन शाखा रांची एवं सिमडेगा में नई महिला शाखा खुलवाने पर मीडिया प्रभारी रीना सुरेखा को विशेष अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा को कुल 16 अवार्ड मिला। जिसमें मुख्य रूप से जन सेवा के कार्यों में मिलने वाले अवार्ड्स में  राधा रानी शिक्षा कोर्स गठन करने के लिए एवं उसमें 51000 के सहयोग राशि देने, रिम्स में रोटी बैंक मशीन देने,रांची शाखा में सबसे ज्यादा ठंडा पानी का मशीन लगाने पर, सर्वप्रथम कल्पतरू का पौधा लगाने हेतु, राम जानकी विवाह के उपलक्ष्य में जगन्नाथपुर मंदिर में दो बार सफलतापूर्वक सामूहिक विवाह कराने हेतु, गुरु मां चैतन्य मीरा के द्वारा सामूहिक भागवत एवं सेवा कार्य के लिए, पारसनाथ मंदिर में 1000 पौधा लगाने के लिए अवॉर्ड दिया गया। मारवाड़ी सम्मेलन का ट्रस्टी बनने के लिए, प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्रि में सदर अस्पताल में नवजात कन्याओं का पूजन एवं सामग्री देने पर, तथा अन्य समाजसेवा एवं जनकल्याणकारी कार्यों के लिए अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। प्रांतीय अधिवेशन में सत्र 2026- 28 के लिए रांची महिला शाखा की अलका सरावगी को झारखंड अंचल प्रमुख का पद दिया गया। तथा रीना सुरेखा एवं नैना मोर को झारखंड जनसंपर्क मीडिया प्रमुख का पद से सुशोभित किया गया। इस अधिवेशन में रांची से अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रूपा अग्रवाल, रांची शाखा अध्यक्ष मधु सर्राफ, शाखा सचिव उर्मिला पाड़िया, सह सचिव प्रीति बंका, अलका सरावगी, रीना सुरेखा, सुनीता सरावगी,प्रीति पोद्दार, छाया अग्रवाल, करुणा अग्रवाल‌, नैना मोर,सरिता अग्रवाल, सृजन रांची शाखा अध्यक्ष नेहा सरावगी, सचिव रीता मोदी आदि उपस्थित थी। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने मारवाड़ी महिला सम्मेलन रांची शाखा को झारखंड का सर्वश्रेष्ठ शाखा का अवार्ड सहित 16 अवार्ड्स मिलने पर हर्ष व्यक्त करते हुए, अध्यक्ष, सचिव सहित सभी सदस्यों को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी रीना सुरेखा ने दी।

संत अलोइस मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चों ने बांटी क्रिसमस की खुशियां
Published / 2025-12-19 20:50:37
संत अलोइस मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चों ने बांटी क्रिसमस की खुशियां

संत अलोइस मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चों ने बांटी क्रिसमस व नव वर्ष की खुशियांप्रेम शांति और भाईचारे का पर्व है क्रिसमस: ब्रदर माइकटीम एबीएन, रांची। डॉक्टर कामिल बुल्के पथ स्थित संत अलोइस  मोंटसरी स्कूल के कक्षा नर्सरी और यूकेजी के 150 नन्हे बच्चों ने बड़े ही अनोखे अंदाज में लोगों के साथ क्रिसमस और नववर्ष की खुशियां साझा की। लोगों के साथ इस खुशी को बांटने के लिए संत अलोइस  मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चे  आज सांता क्लास की तरह लाल लाल पोशाक धारण किए खुशी और उत्साह के साथ दोनों हाथों को हिलाते हुए और मैरी क्रिसमस गाते हुए लोगों का अभिवादन कर रहे थे और खुशियां बांट रहे थे। सांता क्लास की वेशभूषा में स्कूल के नन्हे बच्चे गेट के बाहर कतार बंद होकर सड़क पर आने जाने वाले तमाम लोगों को हैप्पी क्रिसमस एंड हैप्पी न्यू ईयर का कर उनका अभिवादन करते नजर आए उनके इस अभिवादन पर उक्त बाग से गुजरने वाले बड़े महिला पुरुष और युवक की भर्तियां रुक कर उनसे हाथ मिलाकर जवाब में हैप्पी क्रिसमस एंड हैप्पी न्यू ईयर का रहे थे। इस कार्यक्रम में संत ऑलवेज मोंटेसरी स्कूल के सभी शिक्षक वृद्ध का विशेष योगदान रहा जिसमें मुख्य रूप से शिक्षक मिलन मेंस और सुमित बारला के संयुक्त नेतृत्व में बच्चे उच्च मार्ग से गुजरने वाले हर लोगों को क्रिसमस और नव वर्ष की बधाइयां दे रहे थे इस अवसर पर विद्यालय परिसर में जीसस क्राइस्ट के जन्म पर आधारित एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई जहां गौशाला में प्रभु यीशु मसीह का जन्म दिखाया गया।स्कूल के प्रिंसिपल ब्रदर माइक जेत्रोम ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा क्रिसमस प्रेम शांति दया क्षमा और भाईचारे का पर्व है उन्होंने कहा किया पर मानवता को एक दूसरे के साथ प्रेम और खुशी बांटने की सीख देता है जिस तरह ईश्वर ने अपने इकलौते बेटे को इस संसार में भेज कर हमें जीवन का सही मार्ग दिखाया इस तरह हमें भी दूसरों के साथ प्रेम दया शांति और भाईचारा जी बांटने का संदेश देता है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने रंगारंग संस्कृति कार्यक्रम से उपस्थित तमाम पेरेंट्स को झूम और हाथ हिलाने को विवश किया बच्चों के पेरेंट्स सांता क्लास की टोपी पहन कर दोनों हाथ हिलाते हुए बच्चों के प्रस्तुति का आनंद ले रहे थे और उनका उत्साह भी बढ़ते हुए देखे गए इस अवसर पर शिक्षकों ने उपस्थित अभिभावकों के बीच चॉकलेट आदि बताकर उन्हें क्रिसमस की बधाइयां दी।

संत अलोइस मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चों ने बांटी क्रिसमस की खुशियां
Published / 2025-12-19 20:46:29
संत अलोइस मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चों ने बांटी क्रिसमस की खुशियां

संत अलोइस मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चों ने बांटी क्रिसमस व नव वर्ष की खुशियांप्रेम शांति और भाईचारे का पर्व है क्रिसमस: ब्रदर माइकटीम एबीएन, रांची। डॉक्टर कामिल बुल्के पथ स्थित संत अलोइस  मोंटसरी स्कूल के कक्षा नर्सरी और यूकेजी के 150 नन्हे बच्चों ने बड़े ही अनोखे अंदाज में लोगों के साथ क्रिसमस और नववर्ष की खुशियां साझा की। लोगों के साथ इस खुशी को बांटने के लिए संत अलोइस  मोंटसरी स्कूल के नन्हे बच्चे  आज सांता क्लास की तरह लाल लाल पोशाक धारण किए खुशी और उत्साह के साथ दोनों हाथों को हिलाते हुए और मैरी क्रिसमस गाते हुए लोगों का अभिवादन कर रहे थे और खुशियां बांट रहे थे। सांता क्लास की वेशभूषा में स्कूल के नन्हे बच्चे गेट के बाहर कतार बंद होकर सड़क पर आने जाने वाले तमाम लोगों को हैप्पी क्रिसमस एंड हैप्पी न्यू ईयर का कर उनका अभिवादन करते नजर आए उनके इस अभिवादन पर उक्त बाग से गुजरने वाले बड़े महिला पुरुष और युवक की भर्तियां रुक कर उनसे हाथ मिलाकर जवाब में हैप्पी क्रिसमस एंड हैप्पी न्यू ईयर का रहे थे। इस कार्यक्रम में संत ऑलवेज मोंटेसरी स्कूल के सभी शिक्षक वृद्ध का विशेष योगदान रहा जिसमें मुख्य रूप से शिक्षक मिलन मेंस और सुमित बारला के संयुक्त नेतृत्व में बच्चे उच्च मार्ग से गुजरने वाले हर लोगों को क्रिसमस और नव वर्ष की बधाइयां दे रहे थे इस अवसर पर विद्यालय परिसर में जीसस क्राइस्ट के जन्म पर आधारित एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई जहां गौशाला में प्रभु यीशु मसीह का जन्म दिखाया गया।स्कूल के प्रिंसिपल ब्रदर माइक जेत्रोम ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा क्रिसमस प्रेम शांति दया क्षमा और भाईचारे का पर्व है उन्होंने कहा किया पर मानवता को एक दूसरे के साथ प्रेम और खुशी बांटने की सीख देता है जिस तरह ईश्वर ने अपने इकलौते बेटे को इस संसार में भेज कर हमें जीवन का सही मार्ग दिखाया इस तरह हमें भी दूसरों के साथ प्रेम दया शांति और भाईचारा जी बांटने का संदेश देता है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने रंगारंग संस्कृति कार्यक्रम से उपस्थित तमाम पेरेंट्स को झूम और हाथ हिलाने को विवश किया बच्चों के पेरेंट्स सांता क्लास की टोपी पहन कर दोनों हाथ हिलाते हुए बच्चों के प्रस्तुति का आनंद ले रहे थे और उनका उत्साह भी बढ़ते हुए देखे गए इस अवसर पर शिक्षकों ने उपस्थित अभिभावकों के बीच चॉकलेट आदि बताकर उन्हें क्रिसमस की बधाइयां दी।

विश्व भर में रामराज्य की पुनर्स्थापना हो : स्वामी विवेकानंद जी महाराज
Published / 2025-12-17 23:09:33
विश्व भर में रामराज्य की पुनर्स्थापना हो : स्वामी विवेकानंद जी महाराज

संघ शताब्दी वर्ष में इसी संकल्प को लेकर प्रन्यासी मंडल बैठक प्रारंभविश्व हिंदू परिषद की प्रन्यासी मंडल बैठक के उद्घाटन सत्र में संतों का ओजस्वी संदेशदेश-विदेश से पहुंचे प्रन्यासी, हस्तिनापुर की पावन धरा से रामराज का शंखनादएबीएन सेंट्रल डेस्क, हस्तिनापुर (मेरठ)। भारत वर्ष की महाभारत कालीन नगरी हस्तिनापुर में विश्व हिंदू परिषद की प्रन्यासी मंडल बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए परम पूजनीय स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने कहा कि भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में मानवता पर आधारित रामराज की पुन: स्थापना ही हमारा परम लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर निर्माण केवल एक चरण है, वास्तविक उद्देश्य पूरे विश्व में रामराज की स्थापना है। संघ शताब्दी वर्ष में इसी संकल्प को लेकर प्रन्यासी मंडल बैठक प्रारंभ हुई। विश्व हिंदू परिषद की हस्तिनापुर में आज से प्रारंभ हुई प्रन्यासी मंडल बैठक का शुभारंभ ब्रह्मनाथ, संघ प्रार्थना व भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के बाद हुआ। बैठक को संबोधित करते हुए स्वामी विवेकानंद जी महाराज (गुरुकुल संस्थापक भोला की झाल) ने कहा कि जब-जब असुरी शक्तियां संगठित होती हैं, तब-तब देवशक्ति का एकत्र होना अनिवार्य हो जाता है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम के वनगमन के समय राक्षसी शक्तियां संगठित हुई थीं, उसी प्रकार आज भी अधर्म का स्वरूप सामने है। ऐसे में धर्म की स्थापना के लिए वैदिक विचारधारा को मानने वालों का संगठित होना समय की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर की से पांचजन्य की रणभेरी बजेगी तो असुर पुन: भयभीत होंगे। यह पावन धरा साक्षी रही है यहीं से धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का संदेश निकला था। आज उसी ऐतिहासिक भूमि पर देश-विदेश से आए वैदिक धर्मावलंबी एकत्र हुए हैं, जो आने वाले समय में असुरी शक्तियों के अंत का कारण बनेंगे। स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का स्मरण करते हुए कहा जब उन्होंने धर्म स्थापना के उद्देश्य से संघ की नींव रखी थी, तब एक विदेशी पत्रकार ने लिखा था कि अब विश्व को खतरा उत्पन्न हो गया है, क्योंकि वैदिक धर्म को मानने वाली शक्तियां संगठित होने लगी थीं। यह संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है। उन्होंने कहा कि देव शक्तियों का संगठित होना स्वाभाविक रूप से असुरों के लिए भय का कारण बनता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि आज बालकृष्ण नहीं, बल्कि सुदर्शनधारी श्रीकृष्ण की आवश्यकता है, जो अधर्म का विनाश कर सकें। हस्तिनापुर वही धरा है, जहां से भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म के अंत का मार्ग प्रशस्त किया था।स्वामी रविन्द्र कीर्ति जी ने कहा भारतीय संस्कृति में आदि काल से वैदिक परम्परा चली आ रही है जिसमे सनातन, जैन व बौद्ध इन सभी का जन्म भारत में ही हुआ है। हस्तिनापुर जैन,बौद्ध और वैदिक परंपरा के इतिहास से जुड़ा हुआ है। हस्तिनापुर में जैन परम्परा के प्रथम तीर्थकर भगवान आदिनाथ ने अयोध्या से चलकर राजा श्रेयांश से प्रथम आहार ग्रहण किया। भगवान आदिनाथ ने संसार का कल्याण करने का कार्य किया आज विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता उसी कार्य को कर रहे हैं।विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमान बजरंग बांगड़ा जी ने कहा विश्व हिंदू परिषद के 61 वर्षों का उपक्रम यही रहा कि सम्पूर्ण विश्व में शांति हो। असुर सतयुग, त्रेता एवं द्वापर में भी थे और आज भी हैं। बस उनका स्वरूप बदल गया है, आज असुर संगठित है, हमे सुप्त अवस्था में पड़ी अपनी देवसेना (सात्विक शक्तियों) का  जागरण करना है ओर संतों के आशीर्वाद से विजयी होना है।उन्होंने कहा परिवारों में संस्कार के अभाव में श्रद्धा का भाव कम हो रहा है, परिवारों में संस्कार बढ़े इसके लिए हमारे विभिन्न कार्यक्रम चल रहे है। विश्व की अनेकों संस्कृति समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन सनातन अपनी कुटुंब व्यवस्था कारण आज भी टीका है। संस्कारों की कमी से  कुटुंब टूट रहे हैं। इस दिशा में संगठन कार्य कर रहा है जिसका परिणाम शीघ्र मिलना शुरू हो जायेगा। उन्होंने परिवारों में संख्या बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा वामपंथी विचारधारा ने कट्टरता का चोला छोड़ उदारवाद का चोला पहन पूरे विश्व को भ्रमित किया जा रहा है। हमारा जोर है किस प्रकार भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को बचाया जा सके। राम मंदिर आंदोलन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा एवं ध्वजारोहण तक समाज ने हमे अपना आशीर्वाद दिया। हमारा मथुरा काशी का विषय सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिस प्रकार हमने राममंदिर का लक्ष्य पूरा किया उसी प्रकार हम संतों के आशीर्वाद से मथुरा एवं काशी को प्राप्त करेंगे।इस वर्ष वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस गीत ने आजादी की लड़ाई में अनेकों वीरो को प्रेरणा देकर स्वतंत्रता संग्राम में मुख्य भूमिका निभायी है। हिंदू बहुसंख्यकों ने अल्पसंख्यकों को कभी पीड़ित नहीं किया। उस समय के अनुसार सही सोच कर उनको ये अधिकार संविधान ने दिए होंगे, लेकिन आज उनकी जनसंख्या 22 से 25 करोड़ हो गई है। अब अल्पसंख्यक के अधिकारो का दुरुपयोग किया जा रहा है। अब अल्पसंख्यकों की परिभाषा पुन: बदलने की आवश्यकता है।संघ के 100 वर्षी के जागरण को कैसे बढ़ाया जाये। प्राचीन गौरव मथुरा एवं काशी पर समाज को संगठित करके निर्णय लिए जाये क्योंकि सामूहिक चर्चा सामूहिक निर्णय लेकर आगे बढ़ने  की हमारी संस्कृति रही है। संगठन के एक वर्ष के कार्यवृत्त को देते हुए अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री ने बताया इस वर्ष हमने 263467 गौ माताओ को बचाया। 21467 लोगों को अपने मूल धर्म में वापस लेकर आए, 349927 लोगों को धर्मांतरण से बचाया,11654 युवाओ को रोजगार दिया एवं त्रिशूल दीक्षा के माध्यम से एक लाख से ज्यादा युवाओ को जोड़ा।उद्घाटन सत्र में मंच पर पधारे परम पूज्य संत श्री स्वामी विवेकानंद जी महाराज, पूज्य संत स्वामी रविंद्र कीर्ति जी महाराज, केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, केंद्रीय उपाध्यक्ष राम तीर्थ न्यास क्षेत्र के महामंत्री आदरणीय चंपत राय, केंद्रीय उपाध्यक्ष सुशील, केंद्रीय उपाध्यक्ष मोहन मांगनानी, डॉ विजयलक्ष्मी, केंद्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघल, केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा, केंद्रीय संगठन मंत्री मिलिंद परांडे, केंद्रीय कोषाध्यक्ष रमेश गुप्ता, मनोज अरोड़ा, दीपक राज गोयल सहित मेरठ प्रांत अध्यक्ष चौधरी अमन सिंह, मेरठ प्रांत मंत्री राजकुमार मंच पर उपस्थित रहे।केंद्रीय अधिकारी व प्रन्यासी प्रतिनिधियों का भव्य स्वागतउद्घाटन सत्र से पूर्व पहुंचे सभी केंद्रीय अधिकारियों व प्रन्यासी प्रतिनिधियों का दिगंबर जैन मंदिर जम्बूद्वीप परिसर में पगड़ी पहना व अंगवस्त्र पहनाकर, ढोल नगाड़ों व पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री दिनेश उपाध्याय, प्रांत संगठन मंत्री अरुण कुमार, प्रांत मंत्री राजकुमार डूंगर, सर्वव्यवस्था प्रमुख प्रेम कुमार, सह प्रमुख निवेश वशिष्ठ आदि ने सभी व्यवस्थाओं को संभाले रखा।परिसर हुआ भगवा मय विश्व हिंदू परिषद की सुरक्षा व ध्वज व्यवस्था में लगी टोली ने प्रन्यासी मंडल की बैठक से पूर्व पूरे परिसर को भगवा ध्वज लगाकर भगवा में कर दिया गया। परिसर गेट, परिसर मार्ग, बैठक मंडप तक सैकड़ो ध्वज लगाये गये। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय प्रचार प्रसार प्रमुख विजय शंकर तिवारी ने दी।

सत्संकल्प लेकर अपने विवाह दिवसोत्सव संस्कार गायत्री युग संस्कार पद्धति से मनाया गया
Published / 2025-12-17 20:31:16
सत्संकल्प लेकर अपने विवाह दिवसोत्सव संस्कार गायत्री युग संस्कार पद्धति से मनाया गया

एक दूसरे को सम्मान देंगे और सुयोग्य बनायेंगे : दंपत्ति एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार शाखा रांची के साधक अपने प्रवास काल में गायत्री परिवार के दो दिवसीय कार्यक्रम में भागीदारी की। इस बार की सफला एकदाशी पर आनलाइन गायत्री-परिवार साधक अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्वाध्याय पाठ संवाद समूह में 24 घंटे के गायत्री महामंत्र के अखंड जप-अनुष्ठान अभियान में शामिल हुए। दूसरे दिन बच्चों के साथ एनसीआर में सोल्लास सोत्साह दीप यज्ञीय विधान व युग संस्कार पद्धति से पुत्र व पुत्रवधु के विवाह संस्कार दिवसोत्सव में भागीदारी की और उसमें गायत्री युग यज्ञ विधान और युग संस्कार पद्धति से सालगिरह मनाया गया। इस क्रम में परिवार सदस्यों ने दो दिवसीय कार्यक्रम में संलग्न रखा। अगले क्रम में दंपति ने शादी सालगिरह के पावन अवसर पर अखंड दीप प्रज्ज्वलित किया, इस शुभ दिन विधिवत गायत्री सहस्रनाम का पाठ सस्वर किया गया और संध्या बेला में विधिवत संध्या वंदन में गुरु-ईश वंदना, ध्यान, पूजन-अर्चन, सर्वदेव आवाहन, पंचोपचार पूजन, स्वस्तिवाचन सहित जप-अनुष्ठान कर सायंकाल दीपयज्ञ विधान सहित युग संस्कार पद्धति अनुसार इसके एक एक सूक्ष्म सूत्र पर ध्यान आकर्षित एवं प्रकाश डालकर वैवाहिक जीवन की महिमा गरिमा तथा इसकी संबंधित प्रक्रिया में विशेषकर ग्रंथि बन्धन, पाणिग्रहण, प्रतिज्ञा व्रत, पुष्पोपहार, सप्तपदी के सूत्र निर्वाह आदि की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। दंपति ने इस प्रक्रिया को सराहते हूए सबको इसी विधान को अपनाने, मित्र मंडली में विधान को बताने का विचार व्यक्त  किया। दीपयज्ञ उपरान्त दम्पति को विधान अभिनन्दन कर वेदमंत्रों के मंगलमय आशीर्वचन पाठ, शांति पाठ  व जयघोष कर समापन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक पूजा देवी और जय नारायण प्रसाद ने दी।

परमेश्वर स्वरुप आचार्य गरीबदास साहेब की बानी...
Published / 2025-12-15 22:56:29
परमेश्वर स्वरुप आचार्य गरीबदास साहेब की बानी...

एक तत्व, नौ तत्व और चौबीस तत्व कौनसे हैं?एबीएन सोशल डेस्क। सत्यपुरुष सद्गुरु बंदीछोड़ गरीब दास साहेब जी की वाणी हमें जीवन के गहरे रहस्यों को समझने और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होने का मार्ग दिखाती है। सद्गुरु जी की वाणी की यह साखी आध्यात्मिक सत्य को उजागर करता है:-गरीब, एक तत के नौ बने, नौ तत के चौबीस।चौबीसो का एक है, सुमर शोध जगदीश।।आइए, सद्गुरु जी की इस दिव्य वाणी में छिपे एक तत्व, नौ तत्व और चौबीस तत्व के मर्म को विस्तार से समझते हैं।एक तत्व: आत्म तत्वइस साखी में एक तत्व से अभिप्राय आत्म तत्व से है। यह हमारी चेतना का मूल स्रोत है, वह अविनाशी अंश जो हमें जीवन प्रदान करता है। इसे आत्मा, रूह, या स्वयं का सार भी कह सकते हैं। यह परम सत्ता, यानी परमात्मा का ही एक सूक्ष्म हिस्सा है। नौ तत्व: सूक्ष्म शरीर (लिंग शरीर)आत्म तत्व से ही नौ तत्वों का उद्भव होता है, जिन्हें सूक्ष्म शरीर या लिंग शरीर के नाम से जाना जाता है। ये वो मानसिक और संवेदी उपकरण हैं जिनके माध्यम से आत्मा इस संसार का अनुभव करती है। ये नौ तत्व निम्नलिखित हैं:मन: विचार करने, संकल्प-विकल्प करने की शक्ति।बुद्धि: निर्णय लेने और विवेक का उपयोग करने की क्षमता।चित्त: स्मरण और ध्यान का आधार।अहंकार: मैं होने का बोध, व्यक्तिगत पहचान।शब्द: ध्वनि का अनुभव करने वाली इंद्रिय शक्ति। स्पर्श का अनुभव करने वाली इंद्रिय शक्ति।रूप: दृश्य का अनुभव करने वाली इंद्रिय शक्ति।रस: स्वाद का अनुभव करने वाली इंद्रिय शक्ति।गंध: गंध का अनुभव करने वाली इंद्रिय शक्ति। यह सूक्ष्म शरीर ही है जो मृत्यु के बाद आत्मा के साथ यात्रा करता है, हमारे कर्मों के संस्कारों को अपने साथ लिए हुए, ताकि अगले जन्म में अनुभव कर सके।चौबीस तत्व: स्थूल शरीर + सूक्ष्म शरीरजब यह नौ तत्वों वाला सूक्ष्म शरीर, 15 तत्वों के स्थूल शरीर को धारण करता है, तब कुल मिलकर चौबीस तत्व बनते हैं। यह हमारा भौतिक शरीर है जिसे हम देख और छू सकते हैं।स्थूल शरीर के 15 तत्व इस प्रकार हैं:पंच महाभूत (५ तत्व):अग्नि: शरीर की ऊर्जा और ऊष्मा।वायु: श्वास और गति।जल: शरीर में तरल पदार्थ।पृथ्वी: शरीर का ठोस ढाँचा।आकाश: शरीर में खाली स्थान।दश इंद्रियां (१० इंद्रियां):ज्ञानेंद्रियां : आँखें, कान, नाक, जीभ, त्वचा (ज्ञान प्राप्त करने वाली इंद्रियां)।कर्मेन्द्रियां : वाणी, हाथ, पैर, गुदा, उपस्थ (कर्म करने वाली इंद्रियां)। इस प्रकार, नौ (सूक्ष्म शरीर) और पंद्रह (स्थूल शरीर) मिलकर चौबीस तत्वों का यह शरीर बनता है जिसके माध्यम से हम इस संसार में जीवन जीते हैं।परम तत्व : ब्रह्म या परमात्मा, साखी की अंतिम पंक्ति चौबीसो का एक है, सुमर शोध जगदीश बताती है कि इन सभी चौबीस तत्वों का भी एक परम आधार है, जिसे ब्रह्म या परमात्मा कहते हैं। यही परम सत्ता संपूर्ण सृष्टि का मूल कारण और अंतिम गंतव्य है।मोक्ष की अलौकिक यात्रासद्गुरु गरीब दास साहेब जी के अनुसार, मोक्ष की प्रक्रिया अत्यंत सुंदर और वैज्ञानिक है: मृत्यु के समय, सूक्ष्म शरीर के नौ तत्व उसी आत्मा में विलीन हो जाते हैं जिससे वे उत्पन्न हुए थे। स्थूल शरीर के पाँच महाभूत अपने मूल तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) में समा जाते हैं।और अंत में, आत्मा स्वयं परमात्मा में समा जाती है, क्योंकि वह उसी का अंश है। यही स्थिति मोक्ष कहलाती है – आवागमन के चक्र से मुक्ति, जन्म और मृत्यु के बंधन से परे, परम शांति और परम आनंद की अवस्था। जब कोई व्यक्ति देह त्यागता है, तो आत्मा, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर (जो अगले जन्म का कारण बनता है) तीनों एक साथ निकलते हैं। सूक्ष्म शरीर आत्मा के साथ मिलकर एक नया शरीर धारण करने का माध्यम बनता है, जब तक कि आत्मा को मोक्ष प्राप्त न हो जाए।

संत रामपाल जी महाराज के विशेष सत्संग में 150 ने ली दीक्षा
Published / 2025-12-15 22:35:10
संत रामपाल जी महाराज के विशेष सत्संग में 150 ने ली दीक्षा

19 साल बाद सतलोक आश्रम करोंथा में हुआ संत रामपाल जी महाराज का विशेष सत्संग, लगभग 150 लोगों ने ली नाम दीक्षाएबीएन सेंट्रल डेस्क। हरियाणा के करोंथा स्थित सतलोक आश्रम में सत्संग का पुनः आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर को संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने सत्य की जीत और धैर्य का फल बताया है, जिसे इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में अंकित किए जाने वाला दिन कहा जा रहा है।पूर्व में, संत रामपाल जी महाराज का जो भारी विरोध हुआ था, वह झूठी अफवाहों और गलतफहमी के कारण फैलाया गया था। भक्तों के अनुसार, विरोधियों ने सत्य को दबाने का प्रयास किया, लेकिन आज यह सत्य सूर्य की तरह प्रकाशित हुआ है, जिसने विरोध के अंधकार को दूर कर दिया है। संत रामपाल जी महाराज के बताए मार्ग पर चलने के लिए लाखों लोग जुड़ रहे हैं, जिससे उनके जीवन में अभूतपूर्व सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। उनके मुख्य सामाजिक सुधारों ने समाज में एक नई लहर पैदा की है, लाखों लोगों ने नशीले पदार्थों का सेवन छोड़ दिया है।सादगीपूर्ण और दहेज-रहित विवाहों की परंपरा स्थापित की जा रही है। अब वही लोग उनके ज्ञान की महत्ता को समझने लगे हैं, जो पहले उनका विरोध करते थे। उनके सिद्धांतों से प्रेरित अनुयायी अत्यंत सभ्य और साधारण जीवनशैली अपना रहे हैं, जो यह सिद्ध करता है कि सच्चा आनंद असभ्यता या नशा-पार्टियों में नहीं, बल्कि सात्विक जीवन में है।संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत जरूरतमंदों की निस्वार्थ भाव से मदद की है, जिसमें उनके कट्टर विरोधी भी शामिल थे। अनुयायियों ने बताया कि उन्होंने कभी यह भेद नहीं किया कि कौन उनका भक्त है और कौन नहीं। उनकी विचारधारा जो तो काटा बोए ताको बोतू फूल (अर्थात बुराई करने वाले के साथ भी भलाई करनी चाहिए) पर आधारित है।यह व्यापक मुहिम रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान प्रदान करके गरीब-जरूरतमंदों की सहायता करती है, जो कि किसी भी सरकार या बड़े अमीर व्यक्ति के लिए भी चलाना एक कठिन कार्य हैसंत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित निस्वार्थ सेवा और व्यापक सामाजिक कार्यों को देखने के बाद, करोंथा गांव के निवासियों का भी हृदय परिवर्तन हुआ है।वे अब आश्रम आकर न केवल अपनी पिछली गलतियों के लिए माफ़ी मांग रहे हैं बल्कि भंडारे में भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। मीडिया में फैली झूठी अफवाहों की सच्चाई जानने के बाद, गांव वाले भी अब उनके ज्ञान से जुड़ रहे हैं। इस व्यापक हृदय परिवर्तन को उनकी करुणा और ज्ञान का प्रत्यक्ष प्रमाण माना जा रहा है, और अनुयायी उन्हें सबके पिता और साक्षात् भगवान के रूप में सम्मान देते हैं। सतलोक आश्रम करोथा में सत्संग होने के बाद लगभग डेढ़ सौ श्रद्धालुओं ने संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ग्रहण की पत्रकार कमल सिंह लोधा।

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