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मुनि श्री 108 आराध्य सागर जी महाराज ने बताया जीवन का वास्तविक मार्ग
Published / 2026-03-01 23:14:10
मुनि श्री 108 आराध्य सागर जी महाराज ने बताया जीवन का वास्तविक मार्ग

आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 आराध्य सागर जी महाराज संघ राँची अपर बाजार जैन मंदिर में विराजमान हैंप्रातः 8.15 बजे प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि सम्यक्त्रय की साधना : जीवन का वास्तविक मार्गएबीएन सोशल डेस्क। आज प्रातःकालीन वंदनीय वाणी में गुरुदेव ने जैन दर्शन के मूल तत्व सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की महिमा का अत्यंत सरल और गूढ़ विवेचन किया। पहले दर्शन, फिर ज्ञान, फिर चरित्र, मुनी श्री ने स्पष्ट कहा - आध्यात्मिक उन्नति का क्रम उल्टा नहीं होता पहले सम्यक दर्शन होता है सही दृष्टिकोण, सही श्रद्धा। उसके बाद सम्यक ज्ञान प्रकट होता है। वस्तु को जैसी है वैसी जानना। जब ज्ञान शुद्ध हो जाता है, तब चरित्र स्वतः सम्यक बन जाता है। यदि दृष्टि ही विकृत हो, तो ज्ञान भी विकृत होगा और आचरण भी असंतुलित रहेगा। इसलिए जैन धर्म में सबसे पहले श्रद्धा की शुद्धि पर बल दिया गया है। उन्होंने दर्पण का उदाहरण से बताया की आत्मा का स्वभाव किस प्रकार का होता हैं। गुरुदेव ने अत्यंत सुंदर उदाहरण दिया दर्पण का कार्य छवि को झलकाना नहीं है, बल्कि उसका स्वभाव ही ऐसा है कि जो उसके संपर्क में आता है, वह प्रतिबिंबित हो जाता है। इसी प्रकार आत्मा का स्वभाव शुद्ध, चेतन और ज्ञानमय है। परंतु जब वह कर्मों के संपर्क में आती है, तो उसकी शुद्धता ढँक जाती है। दर्पण स्वयं गंदा नहीं होता, उस पर धूल जम जाती है। आत्मा अशुद्ध नहीं होती, उस पर कर्मों का आवरण आ जाता है। इसलिए हमें दर्पण को तोड़ना नहीं, बल्कि धूल हटानी है। उसी प्रकार आत्मा को बदलना नहीं, कर्मों को क्षीण करना है।यह देह नहीं, यह नाम नहीं, यह संबंध नहीं, इन सब से परे जो चेतना है, वही आत्मा स्वरूप मैं हूँ। फिर प्रश्न आता है मैं कौन हूँ? क्या मैं शरीर हूँ? क्या मैं पद-प्रतिष्ठा हूँ? या मैं शुद्ध, अनंत ज्ञान-स्वरूप आत्मा हूँ? जब यह विवेक जागता है, तब तीसरा प्रश्न उठता है मुझे क्या करना है? और यहीं से साधना प्रारंभ होती है । जैन आगमों में कहा गया है कि मोक्ष का मार्ग सम्यक्त्रय से ही प्रशस्त होता है।सही श्रद्धा, सही ज्ञान, सही आचरण। यदि श्रद्धा दृढ़ है, तो ज्ञान प्रकाशित होगा। यदि ज्ञान प्रकाशित है, तो आचरण पवित्र होगा। और जब आचरण पवित्र होगा, तब आत्मा का स्वभाव स्वतः प्रकट होगा। आज के प्रवचन का सार यही है हम बाहर की दुनिया को बदलने में लगे हैं, परंतु वास्तविक साधना भीतर की है। दर्पण को साफ कीजिए, प्रतिबिंब स्वयं उज्ज्वल होगा। आत्मा को कर्म मल से मुक्त कीजिए, अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन और अनंत सुख स्वयं प्रकट हो जाएगा। प्रवचन के दौरान मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा, अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल, प्रमोद झाँझरी, विनोद झाँझरी , धर्मचन्द पाटोदी, के अलावा कई श्रद्धालु उपस्थित थे।यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

रांची : चुटिया के विराट हिंदू सम्मेलन में गरजता दिखा हिंदुत्व
Published / 2026-03-01 21:25:22
रांची : चुटिया के विराट हिंदू सम्मेलन में गरजता दिखा हिंदुत्व

टीम एबीएन, रांची। श्रीराम नगर, चुटिया स्थित श्री राम मंदिर परिसर में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन श्रद्धा, उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में एकता, समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना बताया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ चुटिया स्थित्त राममंदिर के प्रांगण से कलश यात्रा निकली गयी, जिसमें बड़ी संख्या में मत्री शक्ति ने बढ़ चढ़ कर भाग लियो एवं इस शोभा यात्रा में हनुमान गाढ़ी में महंत एवं राम मंदिर के महंत जी को रथ पर बिठाकर कार्यक्रम स्थल तक गाजे बजे के साथ लाया गया। कार्यक्रम वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रारंभिक संबोधन में श्री राम मंदिर, चुटिया के महंत ने कहा कि सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह केवल संख्या नहीं, बल्कि जागृत और संगठित समाज की प्रतीक शक्ति है। उन्होंने वेद मंत्र संगच्छध्वं संवदध्वं का उल्लेख करते हुए कहा कि साथ चलना, साथ बोलना और एक लक्ष्य के लिए संगठित होना ही समाज की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सनातन समाज को संगठित करने की आवश्यकता पहले से अधिक है और ऐसे सम्मेलन समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। अयोध्या के हनुमान गढ़ी के महंत श्री राजू दास जी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में आयोजित इस सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों में संघ ने समाज को संगठित करने, राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करने का निरंतर प्रयास किया है। उन्होंने प्रश्न रखा कि देश सुरक्षित कैसे रहे, आने वाली पीढ़ियां अपनी पहचान और परंपरा से जुड़ी कैसे रहें और भारत पुन: किसी प्रकार की दासता का शिकार न हो—इन सभी विषयों पर संघ ने निरंतर चिंतन और कार्य किया है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हुए दीर्घकालिक संघर्ष और लाखों रामभक्तों के त्याग एवं बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल मंदिर निर्माण का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक संघर्षों की स्मृति हमें संगठित रहने और अपनी आस्था व परंपराओं की रक्षा करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर देश के लगभग एक लाख गांवों में हिंदू सम्मेलन आयोजित किये जा रहे हैं, जिनमें करोड़ों लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। संघ के सह-सरकार्यवाह आलोक जी ने अपने विस्तृत संबोधन में संगठन की शक्ति और एकता के महत्व को महाभारत के प्रसंग के माध्यम से स्पष्ट किया। उन्होंने देवताओं और असुरों के युद्ध की कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि बिखराव पराजय का कारण बनता है, जबकि एकता विजय का मार्ग प्रशस्त करती है। संगच्छध्वं संवदध्वं संवो मनांसि जानताम् मंत्र का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब लोग साथ चलते और साथ बोलते हैं, तो उनके मन भी एक हो जाते हैं और यही एकता किसी भी चुनौती का सामना करने की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज अपनी विविधता और उदारता के लिए जाना जाता है। अलग-अलग उपासना पद्धतियां, देवी-देवताओं के प्रति अलग-अलग आस्थाएं और विभिन्न परंपराएं हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं। किंतु समय-समय पर एक नाम और एक उद्देश्य के लिए संगठित होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक समरसता पर बल देते हुए छुआछूत की भावना समाप्त करने का आह्वान किया। संत रविदास, मीराबाई और महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुषों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में जन्म नहीं, बल्कि कर्म और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने पंच परिवर्तन की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज में समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्य का पालन ये सभी परिवर्तन आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि परिवार भारतीय समाज की मूल इकाई है और परिवार में संवाद, संस्कार एवं सामूहिकता की परंपरा को पुनर्जीवित करना समय की आवश्यकता है। भारत ने अनेक आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक पहचान को इसलिए सुरक्षित रखा क्योंकि परिवारों ने अपने मूल्यों को जीवित रखा। पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने रांची की बदलती पर्यावरणीय स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि जो शहर कभी स्वच्छ वातावरण के लिए प्रसिद्ध था, वहां आज वायु गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर पहुंच रही है। इसे संतुलित करने के लिए सामूहिक जागरूकता और प्रयास आवश्यक हैं। साथ ही उन्होंने संविधान के अनुरूप नागरिक कर्तव्यों के पालन, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक आचरण को समाज की प्रगति का आधार बताया। कार्यकम मे बच्चों द्वारा रानी लक्ष्मीबाई  की वीरता  एवं लव जेहाद पर प्रस्तुत किये गये लघु नाटिका आकर्षण का केंद्र रही। सम्मेलन में संत समाज के प्रतिनिधियों, मातृ शक्ति, गायत्री परिवार, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, मंदा पूजा समिति चुटिया तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में गिरधारीलाल महतो, विशाल जी, गोपाल शर्मा, मिथिलेश्वर मिश्र, अशोक प्रधान, राजीव बिट्टू, विजय कुमार, राजू शर्मा, शिवम केशरी, शंकर सिंह, रत्न केशरी, शैलेंद्र कुमार, अरुण कुमार,  विक्रम शर्मा, महेंद्र जी एवं विभाग प्रचारक मंटू जी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत एवं सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें समाज की एकता, समरसता और राष्ट्रभक्ति को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया। सम्मेलन ने उपस्थित जनसमूह में संगठन, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करने का संदेश दिया।

धूमधाम से मना श्री जैन श्वेतांबर ओसवाल संघ का होली मिलन समारोह
Published / 2026-03-01 18:58:29
धूमधाम से मना श्री जैन श्वेतांबर ओसवाल संघ का होली मिलन समारोह

टीम एबीएन, रांची। श्री जैन श्वेतांबर ओसवाल संघ का होली मिलन समारोह आज धूमधाम से डोरंडा कन्या पाठशाला में संपन्न हुआ। आज के कार्यक्रम में सभी ने एक- दूसरे को रंग लगाकर उनका स्वागत किया! बच्चों एवं बच्चियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ साथ होली के नृत्य पेश किया। रिद्धि बांठिया ने नवकार महामंत्र के साथ नृत्य प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। राजस्थान से पधारे कलाकार  पंकज दोजख, रवि दोजख एवं उनके साथी कलाकारों ने चंग, ढ़ोल बजाते हुए होली के मन भावन गीतों को प्रस्तुत किया तथा मनोहर नृत्य प्रस्तुत किये गये। होली के पारंपरिक गीतों में मुख्य रूप से बाईसा रा वीरा... जयपुर आता तों लाज्यो... तारा री चुनरी, थारे साथे कोनी चालू... ओ रे बालम रसिया, रंग बरसे... भीगे चुनर वाली..., झीनी-झीनी उड़े रे गुलाल आज म्हारे आंगन में...  आदि मधुर गीत कलाकारों ने प्रस्तुत किये। साथ ही बच्चों में आयशा, दर्शिका, दिविषा, एलीना, जयेश, लाव्या, ईशा, रूही, वेदिका, शिवानी, दीपिका, ट्विंकल, पूजा आदि ने भी मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। मंच का संचालन सोनू पारख, ज्योति दस्सानी ने संयुक्त रूप से किया। रांची मंडल के अध्यक्ष बालबीर बोथरा तथा मंत्री संजय कोठारी ने बताया कि होली में हर वर्ष कि भांति मधुबन शिखर जी, पारसनाथ में आयोजित समारोह में होली कल सुबह 6 बजे बस से भारी संख्या में रांची संघ के लोग  प्रस्थान करेंगे। ओसवाल संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद बोथरा, सचिव विमल दस्साणी ने समाज के सभी लोगों को कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में छोटे लाल चोरड़िया, घेवर चंद नाहटा, अशोक सुराणा, लब्धि जैन, प्रकाश चंद नाहटा, अमर चंद बैंगानी, विनय नाहटा, राजेश पींचा, अक्षय सेठिया आदि ने मुख्य रूप से योगदान दिया। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट विद्यार्थियों को दिये गये प्रशस्ति पत्र
Published / 2026-02-28 21:29:00
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट विद्यार्थियों को दिये गये प्रशस्ति पत्र

अध्यापक युग निर्माता, छात्र राष्ट्र के भाग्य विधाता पर गायत्री परिवार ने प्रकाश डाला एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्रीपरिवार शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा  पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र वितरण समारोह सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम संत माइकल स्कूल छोटा मुरी, सिल्ली प्रखंड में किया गया। साथ ही सिल्ली प्रखंड के दो और स्कूल चिराग नर्सरी काशीडीह और मां वैष्णवी विद्या मंदिर छोटा मुरी में भी पुरस्कार वितरण समारोह सह प्रमाण पत्र वितरण किया गया।जिसमें विद्यालय के प्रिसिंपल छोटे लाल प्रजापति, दिनेश महतो, कंचन पांडे के साथ विद्यालय के शिक्षक ममता गोस्वामी, वी के वेंकट सर, मंजू कुमारी, मनीषा कुमारी, श्रेया कुमारी ने भी साथ दिया।गायत्री परिवार की बहनों में कोशिला महतो, अनीता ठाकुर, लक्ष्मी देवी, संगीता देवी ने युग कल्याण, नव निर्माण, समाज कल्याण और शताब्दी समारोह के साथ परम पूज्य गुरुदेव के सत्संकल्प तथा भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की आवश्यकता, शिक्षा के साथ विद्या का सार्थक समन्वय, साधना, स्वाध्याय, स्वावलंबन विषय पर प्रकाश डाला गया। गायत्री परिवार के प्रतिनिधि मंडल ने अध्यापक है युग निर्माता-छात्र राष्ट्र के भाग्य विधाता पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों में पुन: भारतीय संस्कृति  का गौरव बोध कराना, वैज्ञानिक आध्यात्मवाद को प्रतिपादित करने एवं समस्त विश्व की पीड़ित,अशांत मानवता को जागृत करने तथा स्थाई शांति एवं खुशहाली के लिए यह परीक्षा मील का पत्थर सिद्ध होगी। विद्यार्थियों में दूरदर्शी-विवेकशीलता एवं उच्चस्ततरीय संवेदनशीलता को जागृत करने, साथ, प्रेम एवं न्याय का पाठ पढ़ाना, समय और प्रतिभा का उचित उपयोग सिखाना तथा जीवन जीने की कला में प्रवीणता लाने हेतु यह परीक्षा सार्थक है। कीर्ति दीदी ने बताया कि तीनों विद्यालय के कुल करीबन दो सौ विद्यार्थी शामिल हुए थे। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।

होलिका दहन अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का है दिव्य प्रतीक : संजय सर्राफ
Published / 2026-02-28 21:28:07
होलिका दहन अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का है दिव्य प्रतीक : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का दिव्य प्रतीक है। इस दिन संध्या समय विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है और भक्तजन अपने जीवन से नकारात्मकता, पाप और अहंकार को दूर करने का संकल्प लेते हैं।इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा एवं खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 2 मार्च को शाम 5:18 बजे से हो रही है होलिका दहन 2 मार्च को रात 12:50 बजे के बाद होगा, अगले दिन 4 मार्च को धुलेंडी पर रंगों का त्योहार मनाया जायेगा। होलिका दहन की कथा का वर्णन श्रीमद् भागवत और अन्य पुराणों में मिलता है। हिरण्यकशिपु नामक अत्याचारी असुरराज ने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया था। उसका पुत्र भक्त प्रह्लाद भगवान श्रीहरि विष्णु का परम भक्त था। यह बात हिरण्यकशिपु को स्वीकार नहीं थी। उसने कई बार प्रह्लाद को मृत्यु के मुख में धकेलने का प्रयास किया, किंतु हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे। अंतत: हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था) से प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। लेकिन भगवान के कृपा आगे होलिका को प्राप्त वरदान निष्फल हो गया। होलिका अग्नि में भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आये। यही घटना होलिका दहन के रूप में आज भी मनाई जाती है। होलिका दहन को पापों के दहन और नव जीवन के आरंभ का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि हमारे भीतर जो भी नकारात्मक भाव जैसे क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, अहंकार आदि हैं, उन्हें इस अग्नि में समर्पित कर देना चाहिए। अग्नि देवता को साक्षी मानकर जब हम होलिका की परिक्रमा करते हैं, तो यह हमारे आत्मशुद्धि का संकल्प होता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग सूखी लकड़ियां और उपले अग्नि में अर्पित करते हैं। जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और समृद्धि की प्रार्थना का प्रतीक है। होलिका दहन स्थल को शुद्ध करके वहां लकड़ियों या उपलों का ढेर सजायें। रोली, अक्षत, पुष्प, जल, गुड़, हल्दी, मूंग, गेहूं की बालियां आदि से पूजन करें। कच्चा सूत (मौली) होलिका के चारों ओर लपेटे। भक्तजन श्रद्धा से परिक्रमा करते हुए सुख-समृद्धि और संतानों की रक्षा हेतु कामना करें। होलिका की अग्नि की राख को माथे पर लगाएं। इससे नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।होलिका दहन धार्मिक त्यौहार के साथ ही सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस दिन लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ एकत्रित होते हैं। गांवों और मोहल्लों में सामूहिक रूप से होलिका दहन किया जाता है, जिससे भाईचारा और एकता की भावना प्रबल होती है। यह पर्व हमें बताता है कि अहंकार का अंत निश्चित है। हिरण्यकशिपु का अभिमान नष्ट हुआ और अंतत: भगवान श्रीनृसिंह ने उसका वध कर धर्म की स्थापना की, होलिका दहन हमें सदैव विनम्रता, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। होलिका दहन की ज्वाला केवल बाहर की लकड़ियों को नहीं जलाती, बल्कि हमारे भीतर के अज्ञान को भी भस्म करने का संकेत देती है। यदि हम इस पर्व को आत्ममंथन का अवसर समझें, तो इसका वास्तविक लाभ प्राप्त होगा। होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक दिव्य उत्सव है, जो हमें यह संदेश देता है कि धर्म की विजय निश्चित है और ईश्वर अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। यह पर्व हमें आत्मशुद्धि, सकारात्मकता और समाज में प्रेम-एकता स्थापित करने का संदेश देता है।

एक मार्च को मारवाड़ी भवन में कवि सम्मेलन
Published / 2026-02-26 22:03:20
एक मार्च को मारवाड़ी भवन में कवि सम्मेलन

टीम एबीएन, रांची। कवि सम्मेलन आयोजन समिति द्वारा आगामी 01 मार्च 2026 (रविवार) को स्थानीय मारवाड़ी भवन, हरमू रोड, रांची परिसर में भव्य कवि सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। यह आयोजन पूर्णत: नि:शुल्क है, जिसमें शहर के सभी वर्ग के आम जनता सादर आमंत्रित है। उपरोक्त जानकारी महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुख्य संयोजक पवन शर्मा ने दी।कहा कि आयोजन की सफलता हेतु विभिन्न उपसमितियों का गठन किया गया है, जिसमें क्रमश: मंच सभागार एवं सुरक्षा व्यवस्था- अनिल अग्रवाल एवं निर्भय शंकर हरित, स्वागत सत्कार- किशोर मंत्री एवं कमल जैन, अर्थ संग्रह- ललित पोद्दार एवं प्रकाश धेलिया, प्रशासनिक कार्य- अशोक नारसरिया एवं किशोर मंत्री, अल्पाहार- विनोद जैन एवं अनुप अग्रवाल, प्रेस एवं मीडिया प्रवक्ता मनोज बजाज को मनोनीत किया गया। समिति में प्रवक्ता सह कोषाध्यक्ष मनोज बजाज ने कहा कि इस कवि सम्मेलन में देश के सुप्रसिद्ध व प्रख्यात कवि-कवित्रियों का आगमन होगा जिसमें अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कवियों- श्रृंगाररंस विष्णु सक्सेना (यू.पी), हास्यरस आदित्य जैन (कोटा), सुनील जोेगी (नई दिल्ली) हास्यरस श्री ख्याली शरण (राजस्थान) हास्यरस श्रद्धया सोर्या पीपुल (नागपुर), वीररस पार्थ नवीन (प्रतापगढ़) से पधार रहे है। हास्यरस, वीररस एवं श्रृंगाररस की त्रिवेणी गंगा के प्रवाह से श्रोताओं को रंसपान करायेगें एवं शहरवासी होली के रंग में रंगकर, लोटपोट होगे एवं हास्यरस में डुबकी लगायेंगे। समिति के अध्यक्ष पवन पोद्दार ने कहा कि होली के पावन अवसर पर हास्य कवि सम्मेलन आयोजन का इंतजार रांची शहरवासियों को सालभर से रहता है। आयोजन समिति की व्यवस्था व कवियों का चयन व आतिथ्य देखते ही बनती है।  आयोजन समिति के मंत्री अंजय सरावगी ने जानकारी देते हुए कहा कि कुछ खास अंदाज में मंच सजाया गया है। शहर में प्रचार-प्रसार के लिए होर्डिग, पोस्टर, एस.एम.एस, सोशल मिडिया व समाचार पत्रों से लोगों को सूचना प्रेषित किया जा रहा है।  आयोजन समिति में मुख्यत: अध्यक्ष पवन पोद्दार, सचिव अंजय सरावगी, कार्यक्रम संयोजक पवन शर्मा, पूर्व अध्यक्ष सुरेश चन्द्र अग्रवाल, ललित पोद्दार, विनोद जैन, अशोक नारसरिया, कोषाध्यक्ष मनोज बजाज, कार्यकारिणी सदस्य रतन मोर, किशोर मंत्री, अनिल अग्रवाल, हरि कानोडिया, कमल जैन, पुनीत पोद्दार, निर्भय शंकर हारित, प्रकाश धेलिया, राजेश भरतीया, पुनीत अग्रवाल, अनुप अग्रवाल आदि आयोजन को मूर्त रूप दे रहे है। उक्त जानकारी प्रवक्ता सह कोषाध्यक्ष मनोज बजाज (94311 01240) ने दी।

फाल्गुन रंगभरी एकादशी पर श्री धोली सती दादी जी का महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया
Published / 2026-02-26 21:22:44
फाल्गुन रंगभरी एकादशी पर श्री धोली सती दादी जी का महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया

रंग बरसे दादी के आंगन में ... मेरी दादी की होली निराली... एबीएन सोशल डेस्क। फाल्गुन मास की पावन रंगभरी एकादशी के शुभ अवसर पर श्री धोली सती दादी महिला समिति द्वारा रातू रोड, रांची स्थित कृष्णा अपार्टमेंट में संदीप सर्राफ के आवास पर भक्तिभाव और उल्लास के साथ भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। वातावरण पूरी तरह भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से ओत-प्रोत नजर आया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूरे विधि विधान से दादी जी की ज्योत प्रज्वलित कर किया गया। दादी जी के अलौकिक श्रृंगार से हुआ।सुगंधित पुष्पों,रंग बिरंगी चुनरियों,पोशाक और आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित दादी जी की प्रतिमा एवं श्रीकृष्ण लड्डू गोपाल की मूर्ति दिव्य आभा बिखेर रही थी। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। सामूहिक रूप से गूंजते मंगलाचरण और स्तुति ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।इस अवसर पर समिति की सक्रिय सदस्य शशि सर्राफ एवं सविता सर्राफ ने दादी जी, राधा कृष्ण एवं होली से जुड़े मनमोहक संगीतमय भजनों की प्रस्तुति दी। दादी तेरे दरबार में आया हूं....,रंग बरसे दादी के आंगन में....,मेरी दादी की होली निराली.... जैसे भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। तालियों और ढोलक की थाप पर भक्तों ने भक्ति-रस में डूबकर आनंद की अनुभूति की।रंगभरी एकादशी का यह पर्व फाल्गुन मास में होली के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से देवी-देवताओं को अबीर-गुलाल अर्पित कर रंगोत्सव की शुरूआत की जाती है। इसी परंपरा के तहत समिति की महिलाओं ने दादी जी के चरणों में पुष्प अर्पित कर अबीर गुलाल एवं फूलों की होली खेली। वातावरण में उड़ते रंग-बिरंगे पुष्प और जय दादी की के जयकारों ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती की गई, जिसमें सभी भक्तों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता निभायी। आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। उपस्थित महिलाओं और श्रद्धालुओं ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे सामाजिक एवं धार्मिक एकता का प्रतीक बताया, इस अवसर पर-सविता सर्राफ, शशि सर्राफ, आशा सर्राफ, आशू सर्राफ, अनुराधा सर्राफ, मंजू सर्राफ, रिंकू सर्राफ रितु सर्राफ, संचिता सर्राफ, राज राजगढ़िया, शशि सर्राफ, करुणा बागला, स्नेहा सर्राफ, कविता सर्राफ, श्वेता सर्राफ, उर्मिला सर्राफ, शारदा पोद्दार, रेनू सर्राफ, मनीषा सर्राफ, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थी। श्री धोली सती दादी प्रचार समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, आपसी प्रेम और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश देते हैं। उक्त जानकारी श्री धोली सती दादी प्रचार समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम
Published / 2026-02-24 18:48:20
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम

पूज्यवरश्री की पाती घर-घर पहुंचाने का समय आ गया है : गायत्री परिवार एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शाखा सिल्ली प्रखंड अंतर्गत मूरी महिला मंडल प्रतिनिधित्व में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आदर्श उच्च विद्यालय छोटा मुरी (सिल्ली प्रखंड) रांची झारखंड में  किया गया। इसमें  कक्षा 7, 8 एवं 9वीं के छात्र, छात्राएं भाग लिये थे। विद्यालय की प्रिंसपल पुष्पा महतो, शिक्षकगण प्रतिमा कुमारी, रानो देवी, लक्ष्मी देवी ने भी साथ दिया और गायत्री परिवार की महिलामंडल संचालिका बहन कोशिला महतो के सान्निध्य में अनीता देवी, लक्षमी देवी साथ ही भाई फणीभूषण महतो ने भी इस कार्यक्रम आयोजन में भाग लिया। गायत्री परिवार के भाई बहिन टीम  के द्वारा आज की युवा पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य और 21 वी सदी के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गयी। बताया गया कि पूज्यवरश्री की पाती घर-घर पंचुचाने का समय आ गया है। विद्यार्थियों को जीवन का सही लक्ष्य एवं सही बोध होना तथा आदर्शमय जीवन आवश्यक है। साथ ही अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रधान संस्थान युग तीर्थ शान्तिकुञ्ज हरिद्वार तथा उससे संबद्ध देव संस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षा, ब्रह्म वर्चस शोध संस्थान, गायत्री तपोभूमि व युग निर्माण विद्यालय मथुरा, गुरु ग्राम आंवलखेड़ा आगरा सहित कई इकाई में चल रहे युग निर्माण योजना, ऋषि चिंतन, संस्कार परम्परा और विचार क्राति अभियान के साथ गत माह बैरागी द्वीप कैम्प समारोह शान्तिकुञ्ज के कार्यक्रम दिव्य अखंड ज्योति, दिव्य कलश रथ सह, साधनात्मक पुरश्चक्रण व गुरुमाता जन्म शताब्दी वसंतोत्सव समारोह का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर बच्चों व अध्यापन टीम को युग साहित्य का स्वाध्याय करने का भी सुझाव दिया गया। कार्यक्रम गायत्री मंत्र पाठ व गुरु-ईश वंदना सहित शुभारंभ किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के कोशिला महतो और जय नारायण प्रसाद ने दी।

एकल श्रीहरि ने किया भव्य सत्संग प्रतियोगिता का आयोजन
Published / 2026-02-24 18:47:25
एकल श्रीहरि ने किया भव्य सत्संग प्रतियोगिता का आयोजन

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 24 फरवरी 2026 को दक्षिण झारखंड संभाग स्तरीय सत्संग मंडली प्रतियोगिता का आयोजन मारवाड़ी आरोग्य भवन बरियातू रोड रांची में किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आदित्य मल्होत्रा चैंबर्स आफ कॉमर्स के अध्यक्ष, डॉ ललन कुमार शर्मा एकल अभियान राष्ट्रीय महामंत्री एवं राष्ट्रीय अभियान प्रमुख तथा राष्ट्रीय ग्रामोत्थान योजना प्रमुख, सतीश तुलस्यान श्री हरि कथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, रेखा जैन बंबंधु परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, उषा जलन अकाल ग्राम संगठन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, मुकेश अग्रवाल केंद्रीय कोषाध्यक्ष अकाल ग्राम उत्थान एवं संभाग अध्यक्ष दक्षिण झारखंड, बबीता जलन अकाल श्रीहरि सचिव एवं संभाग उपाध्यक्ष दक्षिण झारखंड के द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में सत्संग प्रतियोगिता की भूमिका श्रीमान जीतू पाहन राष्ट्रीय सह अभियान प्रमुख एवं राष्ट्रीय श्री हरि कथा योजना प्रमुख के द्वारा सत्संग की महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी। साथ ही इस सैतान पत्ता के माध्यम से ग्रामीण समाज में अपने धर्म संस्कृति बरकरार रहे इस निमित्त कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम स्तर से लेकर प्रांत स्तर तक किया गया और प्रांत स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को राष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगिता श्री अयोध्या धाम में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त लेने का सौभाग्य झारखंड प्रांत को मिला है।इस कार्यक्रम में विभिन्न अंचलों गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, सिमडेगा, रातू, रामगढ़, खूंटी, चाईबासा, सरायकेला, एवं जमशेदपुर के सत्संग मंत्रियों ने भाग लिया एवं एक से बढ़कर एक सत्संग भजन कीर्तन की प्रस्तुति हुई, इस कार्यक्रम में सभी टीमों ने अपनी-अपने क्षमता एवं विद्य नृत्य का शानदार प्रस्तुति करते हुए रामगढ़ अंचल के सत्संग मंडलियों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया एवं दूसरे स्थान पर गुमला अंचल के सत्संग मंडली नया स्थान ग्रहण किया तथा तीसरे स्थान पर पलामू पांकी अंचल के सत्संग मंडलियों ने अपनी अपनी जगह बनायी। बाकी सभी टीमों ने अपनी-अपनी शानदार प्रस्तुति दी। समापन सत्र में राष्ट्रीय महामंत्री डॉ ललन कुमार शर्मा ने एकल अभियान समस्त विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। श्री हरि कथा प्रसार योजना आज के प्रस्तुति में एक अच्छे काम का स्वरूप है ग्रामीण समाज में तैयार कर रही है जिससे कि समाज में आज एक अच्छी संस्कृति का पुनर्जागरण हो सके और आने वाला दिनों में हमारे पूरे समाज एक दूसरे के साथ हंसता मुस्कुराता हुआ है।समाज को दिशा निर्देश देने का काम करें एक स्थान पर बैठकर सभी समाज के लोग एक साथ जुड़ कर रहे और राष्ट्रीय हित में एक जूटता दिखायें। शुगर बनवासी क्षेत्र में रहने वाले समाज को सत्संग से जोड़ना और अपना धर्म संस्कृति बचा रहे इस और अग्रसर करना यह श्री हरि सत्संग प्रतियोगिता के माध्यम से समाज में एक कुत्ता लाना यह एकल अभियान का एक उद्देश्य है।इस कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रांत के समितियां की उपस्थिति रही रमेश धरनीधरका राष्ट्रीय अध्यक्ष बंबंधु परिषद, अंचल किंगर अध्यक्ष रांची चैप्टर, पायल अग्रवाल सचिन श्रीहरि एवं संभाग की मां, श्रीमान मुदित धरणीधरका, इस कार्यक्रम के जज के रूप में उदय नारायण शुक्ला, संस्कार शिक्षा प्रभारी दक्षिण झारखंड, संजय साहू केंद्रीय प्रमुख हरि मूल्यांकन, अमरेंद्र विष्णुपुरी केंद्रीय साहित्य विभाग प्रमुख, चंद्रकांत रायपत ग्राम उठाने योजना के ट्रस्टी, उत्सव पाराशर, विशेष केडिया, राजकुमारी जैन, सुनीता मांसारिया, डॉ एस भट्ट एवं विभिन्न जिलों से टोली के रूप में 167 एवं संभाग, भाग टोली तथा व्यवस्था टोली के कार्यकर्ता और संचालन समिति से लगभग 40 से अधिक समितियों की उपस्थिति रही अंत में भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की गयी। उक्त जानकारी वनबन्धु परिषद रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

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