टीम एबीएन, रांची। श्री राधाकृष्ण मंदिर कृष्णा नगर कॉलोनी में आज दिनांक 12/03/2026 को रामनवमी एवं नवरात्र महोत्सव धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया। रामनवमी के उपलक्ष में कलश यात्रा निकालने निर्णय लिया गया। 18/03/2026 दिन बुधवार को सुबह 7 बजे से शिव दुर्गा मंदिर से 108 महिलाओं द्वारा कलश उठाया जायेगा। जो कलश यात्रा हरि ओम मंदिर होते हुए, काली मंदिर होते हुए, भक्ति चौक, झंडा चौक होते हुए राधाकृष्ण मंदिर कृष्णा नगर कॉलोनी पहुंचेगी। उसके पश्चात मां का विशाल भंडारा भक्तों के बीच में वितरण किया जायेगा एवं कलश यात्रा में मुख्य आकर्षण माता की संजीव झांकी एवं श्री दुर्गा जागरण मंडली के सदस्यों के द्वारा भजनों का कार्यक्रम होगा। 19/3/2026 संध्या 4 बजे से सुंदर कांड का सामूहिक पाठ मंदिर प्रांगण में होगा। मीडिया प्रभारी अरुण जसूजा से प्राप्त जानकारी के अनुसार नवरात्र नवरात्रों के दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ 19/03/2026 से 26/03/2026 तक प्रात 7 बजे से 10 बजे तक होगी एवं मां की अखंड ज्योत जलायी जायेगी। महा अष्टमी के दिन रात्रि में 9 बजे 1008 ज्योत प्रज्ज्वलित की जायेगी और भजन कीर्तन का कार्यक्रम रात्रि 11 बजे तक होगी। 27 को रामनवमी महोत्सव कार्यकम 11 से दोपहर 3 बजे तक भजन कीर्तन का कार्यक्रम एवं विशाल भंडारा होगा। दसमी के दिन सुबह 10 बजे से हवंन एवं ज्योत विसर्जन का कार्यक्रम होगा। मौके पर प्रधान नंदकिशोर, अरोड़ा मुखी, राधेश्याम किंगर, चंद्रभान तलेजा, रामचंद्र तलेजा, मनोहर लाल जसुजा, सुनील कटारिया, चंदन सिराणा, किशोरी पपनेजा, अंचल किंगर, निखिल घेई, हरिश मनुजा, अरुण जसुजा, मनीष मुंजल, कमल घई, विनीत अरोड़ा, अनिल मुंजल, विकास घई, रोहित तलेजा, चंद्रभान मनुज, जिमी अरोड़ा, पवन पापनेजा, विजय जसुजा एवं समाज के बहुत सारे लोग उपस्थित हुए।
गर्भस्थ शिशु परिवार,समाज व राष्ट्र का सौभाग्य व गौरव का कारण बने : गायत्री-परिवार एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में आज दो पुंसवन संस्कार दो परिवार द्वारा कराये गए। इस दौरान वर्तमान समय में पुंसवन संस्कार की आवश्यकता, गरिमा, महत्व व अपेक्षा पर प्रकाश डाला गया। यज्ञीय पुरोहित ने समय की अपेक्षा पर चर्चा करते हुए बताया कि गर्भस्थ शिशु परिवार, समाज, राष्ट्र का सौभाग्य, यश व गौरव का कारण बने। माता पिता अभिभावकों का ध्यान आकर्षित कर बताया गया कि गर्भस्थ शिशु में शारीरिक, बौद्धिक, तथा भावनात्मक नव-निर्माण व विकास के लिए अनुकूल वातावरण, खान-पान, आचार-विचार का, शुचिता पवित्रता का निर्धारण आवश्यक व आकर्षक होना चाहिए। पूर्व के कुसंस्कारों का निवारण तथा सुसंस्कारों की मंगलमय स्थापना, ग्रहण और विकास के लिए सत्संकल्प, सत्प्रयोजन, सत्पुरुषार्थ एवं देव अनुग्रह के संयोग का प्रयास रूचिकर व तीव्रतर होना चाहिए। गायत्री यज्ञ अनुष्ठान दौरान इस प्रकार दिशा-निर्देश व संकल्प साथ अच्छी तरह बताकर षटकर्म, देवपूजन, सर्व देव नमस्कार, स्वस्तिवाचन पाठ, रक्षा विधान कराकर शेष संस्कार विधिवत सोल्लास, एक बुराई परित्याग एवं एक अच्छाई ग्रहण कराकर संस्कार विधान संपन्न कराये गये। उक्त जानकारी गायत्री-परिवार रांची शक्तिपीठ के प्रमोद कुमार और जय नारायण प्रसाद ने दी।
सद्गुरु, सत्संग और सत्सानिध्य...त्रिवेणी दासएबीएन सोशल डेस्क। अध्यात्म के उपासना, साधना एवं आराधना के महाविज्ञान में सद्गुरु, सत्संग और सत्सानिध्य का ही प्रमुख महत्व है और उनके ही माध्यम से साधक स्वयं का परिमार्जन करता है। सद्गुरु उन्हें कहा जाता है जिनका सत्य के साथ एकात्मकता स्थापित हो जाती है। व्यक्ति एवं सत्य में विभेद ना रह जाए ऐसे व्यक्ति सद्गुरु के उच्च पद पर प्रस्थापित हो जाते हैं। सतगुरु से सशरीर सानिध्य सर्वोत्तम तो होता है परंतु यह भी आवश्यक नहीं है कि सद्गुरु से हर घड़ी शारीरिक निकटता बनी रहे। जब गुरु एवं शिष्य का सानिध्य गहन एवं सघन हो जाती है तब आत्म-मिलन और आत्म-एकाकार की अद्भुत घटना घटित होती है। सद्गुरु अपने शिष्य के सूक्ष्म शरीर में स्थापित हो जाते हैं और उनकी उपस्थिति का तरंग श्वास, प्रश्वास तथा हृदय की धड़कन के साथ संपूर्ण स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर में प्रवाहित होते रहता है। इंद्रियों के द्वारा अनुभूति तथा ग्रहण करने की क्षमता सीमित होती है, जबकि शारीरिक संरचना के अंदर अदृश्य संस्थाओं से उठने वाले तरंगों का प्रभाव व्यापक एवं स्थाई होता है। सत्य का अन्वेषण बुद्धि, विवेक एवं तर्क के आधार पर नहीं किया जा सकता है। सत्य के अन्वेषण के लिए श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और निष्ठा का मिश्रित शक्तिशाली आधार चाहिए। जैसे ही सत्य की ओर यात्रा प्रारंभ होती है जीवन में अद्भुत घटित होने लगती है जिसे भौतिक जगत में चमत्कार के रूप में देखा और समझा जाता है।जबकि सत्य के अन्वेषक को इन चमत्कारों से कोई लेना-देना नहीं रहता है वह तो सत्य से एकाकार बाद ही गुरु के ऋण से मुक्त हो पता है। मनुष्य की इच्छा अनंत है जिसकी पूर्ति शायद ही हो पाती है। इच्छाओं का, क्रिया प्रतिक्रिया का और असंतोष का भारी बोझ ढोने से कहीं अच्छा है सत्य के सानिध्य में जीवन की यात्रा को पूरी की जाय।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नीले आकाश का सच एक ऐसी पुस्तक है, जो बिहार और झारखंड की राजनीति, सत्ता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तंत्र की जटिल सच्चाइयों को उजागर करती है। यह किताब सिर्फ घटनाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक ऐसी पत्रकारिक यात्रा है, जो बताती है कि सत्ता के गलियारों में कैसे फैसले होते हैं, किस तरह घोटालों की गूंज लोकतंत्र के स्तंभों को हिलाती है और कैसे जनता की उम्मीदें राजनीतिक समीकरणों में गुम हो जाती हैं। किताब की शुरुआत बिहार विभाजन और झारखंड गठन से होती है, जिसमें झारखंड आंदोलन की पृष्ठभूमि, संघर्ष और अंतत: राज्य निर्माण की राजनीतिक खींचतान को विस्तार से बताया गया है। यह अध्याय दिखाता है कि कैसे राजनीतिक समीकरणों के चलते वरिष्ठ नेता कड़िया मुंडा मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचते-पहुंचते रह गये और बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बन गये। दूसरा अध्याय पशुपालन घोटाला और लालू प्रसाद बिहार की राजनीति के सबसे बड़े भ्रष्टाचार की कहानी कहता है। इसमें बताया गया है कि किस तरह करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से फर्जी बिलों और घोटालों के जरिये निकाले गये और किस तरह इस घोटाला से बिहार की राजनीति का चेहरा बदल गया। तीसरा अध्याय लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के रोचक किस्से बिहार की सत्ता के दिलचस्प और कभी-कभी हास्यपूर्ण पहलुओं को सामने लाता है। इसमें सत्ता के भीतर के कई ऐसे किस्से हैं जो राजनीति के मानवीय और नाटकीय दोनों रूपों को दिखाते हैं। चौथा अध्याय सचिवालय का सच और रिपोर्टिंग की यात्रा लेखक की पत्रकारिक दृष्टि का परिचायक है। यह अध्याय सरकारी फाइलों, प्रशासनिक गड़बड़ियों और जमीनी रिपोर्टिंग के अनुभवों से भरा है। इसके बाद पांचवां अध्याय में बिहार के घोटालों से नहीं सीख लिया झारखंड ने में बताया गया है कि कैसे झारखंड ने बिहार की गलतियों को दोहराया। नये राज्य में भ्रष्टाचार, गुप्त फंड के दुरुपयोग और सत्ता की राजनीति ने जनता की उम्मीदों को धूमिल कर दिया। गुप्त फंड का गुप्त उपयोग, खान और उद्योग, और शराब पर खेल जैसे अध्याय सत्ता और व्यवसाय के गठजोड़ को उजागर करते हैं। ये दिखाते हैं कि किस तरह प्राकृतिक संसाधनों और योजनाओं को निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया गया। पानी के पाइप में बह रहा भ्रष्टाचार अध्याय में जलापूर्ति योजनाओं में हुए घोटालों का खुलासा किया गया है, जबकि रघुवर दास, मैनहर्ट और राज्यपाल का संयोग सत्ता के ऊपरी स्तर पर चल रही अदृश्य राजनीतिक ताकतों का चित्रण करता है। अंतिम 11 वां अध्याय द गार्डियंस बाबूलाल से हेमंत तक झारखंड की राजनीतिक यात्रा को समेटता है। इसमें राज्य के मुख्यमंत्रियों की भूमिका, उनके फैसले, और विकास बनाम राजनीति की जंग का सटीक विश्लेषण है। कुल मिलाकर, नीले आकाश का सच बिहार और झारखंड की राजनीति की मिट्टी से निकली वह कहानी है जिसमें सत्ता की सच्चाई, घोटालों की गंध, और उम्मीदों के नीले आकाश की तलाश एक साथ चलती है। यह किताब पत्रकारिता, राजनीति और समाज के उन अदृश्य सूत्रों को जोड़ती है जिनसे भारत के लोकतंत्र की असल तस्वीर उभरती है।
भारत से उठी मांग, बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस घोषित करे संयुक्त राष्ट्र एबीएन सोशल डेस्क। दुनिया भर में जारी बाल विवाह की समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विधिवेत्ता भुवन ऋभु ने संयुक्त राष्ट्र से बाल विवाह के उन्मूलन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र के कमीशन आन द स्टैटस आफ वूमन (सीएसडब्ल्यू) के 70वें सत्र के मौके पर एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत में बाल विवाह में उल्लेखनीय कमी आयी है, लेकिन आज भी दुनिया में हर तीन सेकेंड में कहीं न कहीं एक बाल विवाह हो रहा है। बाल विवाह जो कि बच्चों से बलात्कार है, कि रोकथाम के लिए वैश्विक स्तर पर जवाबदेही और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के वास्ते एक समर्पित दिवस की आवश्यकता पर जोर देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, भारत ने दिखाया है कि बाल विवाह का अंत संभव है।रोकथाम, संरक्षण, अभियोजन व बच्चों, समुदायों और धर्मगुरुओं की भागीदारी पर आधारित संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण के साथ हमारा देश 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत में तीन वर्षों से भी कम समय में बाल विवाह की दर 23 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गयी है। बाल विवाह दरअसल एक बच्चे के साथ होने वाले बलात्कार और यौन शोषण से कम नहीं है, जिसे अक्सर संस्कृति या परंपरा की आड़ में छिपा दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र को बाल विवाह उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा करनी चाहिए, ताकि इसके खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता व जवाबदेही मजबूत हो और दुनिया भर की सरकारें तथा समाज इस अपराध को समाप्त करने के लिए संगठित हों। कार्यक्रम में मौजूद सिएरा लियोन की प्रथम महिला डॉ. फातिमा मादा बायो, नेपाल की महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मंत्री श्रद्धा श्रेष्ठ एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने बाल विवाह के खात्मे के लिए एक समर्पित अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग का पुरजोर समर्थन किया। वर्ल्ड लॉ कांग्रेस 2025 में वर्ल्ड जूरिस्ट एसोसिएशन की ओर से मेडल आफ आनर से सम्मानित होने वाले पहले पहले भारतीय अधिवक्ता भुवन ऋभु ने इस कार्यक्रम को आनलाइन संबोधित किया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने यह कार्यक्रम सिएरा लियोन की प्रथम महिला तथा आर्गनाइजेशन आफ अफ्रीकन फर्स्ट लेडीज फॉर डेवलपमेंट की अध्यक्ष डॉ. फातिमा मादा बायो के कार्यालय के साथ साझेदारी में आयोजित किया था। कार्यक्रम में नेपाल सरकार की महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मंत्री शारदा श्रेष्ठ; संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के सहायक महासचिव और कार्यक्रम निदेशक पियो स्मिथ; फ्रांस सरकार की मानवाधिकार राजदूत इसाबेल रोम; जर्मनी के उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत थॉमस जाहनाइजेन; अफ्रीकी संघ की ओर से डॉ. एंजेला मार्टिन्स; डोमिनिकन गणराज्य सरकार के राष्ट्रीय बाल एवं किशोर परिषद की कार्यकारी अध्यक्ष लिजिया जेनेट पेरेज पेना; द डिप्लोमैटिक कूरियर की संस्थापक एवं सीईओ एना रोल्ड; यूएन वूमेन की क्षेत्रीय राजदूत और रीजेनरेटिव हब्स की संस्थापक जहा दुकुरेह; इक्वेलिटी नाउ की एंडिंग जेंडर-बेस्ड वायलेंस निदेशक दिव्या श्रीनिवासन और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की जनरल काउंसिल रचना त्यागी सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम में मौजूद मंत्रियों, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों, विधिवेत्ताओं, नागरिक समाज के नेताओं और भुक्तभोगियों के पैरोकारों ने एक स्वर में सदस्य देशों से बाल विवाह समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा की मांग की। उनका कहना था कि इससे बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि कई देशों में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानूनी ढांचे पहले से मौजूद हैं लेकिन उनके कमजोर क्रियान्वयन के कारण यह प्रथा अब भी जारी है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करने वाले नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है जिसके 250 से भी अधिक सहयोगी संगठन 2030 तक भारत से बाल विवाह के खात्मे के लिए 451 जिलों में जमीन पर काम कर रहे हैं। इस नेटवर्क ने सरकारी एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के सहयोग से पिछले तीन वर्षों में भारत में लगभग 500,000 बाल विवाह रुकवाये हैं। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
19वें पुराण पावन प्रज्ञा पुराण कथा एवं 9 कुंडीय गायत्री महायज्ञ मंगलकलश की रथयात्रा सहित कई कार्यक्रम 10 से 15 मार्च 2026 तक गणेश मैदान (रेलवे कॉलोनी) महानगर रांची में यज्ञीय अनुष्ठान शुभारंभ एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्रीपरिवार के विचार क्रांति अभियान अंतर्गत मनुष्य में देवत्व का उदय एवं धरती पर स्वर्ग के अवतरण लक्ष्याधीन में नये युग के वैचारिक प्रदूषण एवं उनसे उपजी समस्याओं से निपटने के लिए 19 वां पावन प्रज्ञा पुराण का नवसूजन कर युग प्रणेता परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के आध्यात्मिक समाधान पर मंच संचालन करते हुए रांची जिला सप्त आंदोलन समन्वयक नीरज कुमार ने संक्षिप्त प्रकाश डाला। प्रमोद कुमार एवं रणवीर कुमार ने दिव्य कलश पूजन पूर्व जयघोष, मंत्र पाठ, सद्गुरु वंदना कर प्रज्ञा गीतों के माध्यम से माहोल सृजन कर तीन गीत गाये। मां गायत्री प्रज्ञामाता! देकर हमें सहारा अपना लीजिए, बेड़ा पार कीजिए मां! हमें तार दीजिए। मनुज देवता बने, बने यह धरती स्वर्ग समान, यही संकल्प हमारा। कलश पूजन दौरान प्रज्ञा गीत में आओ आओ बहिन सुहागिन, दिव्य कलश सिर धारण करो। कलश के मुख में श्रीविष्णु सोहें, कण्ठ में शंकर जी सोहें, ब्रह्माजी मूलाधार में सोहें। फिर दिव्य ज्योति-कलश रथ सहित पीताम्बरी माताओं बहनों ने कलश पूजनोपरांत वार्ड नं 46 की पार्षद आरती देवी के सान्निध्य व झंडा प्रदर्शन में बैंड बाजा सहित मंगलकलश यात्राकार्य शुभारंभ हुआ। रथ यात्रा कार्यक्रम स्थल गणेश मैदान से निकलकर स्थानीय काली मंदिर, कृष्णापुरी रोड नं 1 व 7 होते हुए पुन: वापिस कार्यक्रम स्थल पर हुई। आज कार्यक्रम में स्थानीय महिला मंडल, प्रज्ञा मंडल,रांची मुख्य शक्तिपीठ, अल्कापुरी शक्तिपीठ, मंडलों और समन्वय समितिगठन के परिजन, कार्यकर्ता भाई-बहनों ने कार्यक्रम को सजाया, संभाला। रेणु सिन्हा बहिन ने बताया कि आज से कार्यक्रम विवरण है:- प्रथम दिवस मंगलवार 10 मार्च प्रात: 9 बजे से मंगल कलश यात्रा + सायं 5 बजे से 8 बजे तक पावन प्रज्ञा पुराण की कथा। कलश यात्रा में 551 कलशधारी रहीं। इनके वापस आने पर सबकी अक्षत पुष्प वर्षा से स्वागत अभिनन्दन करके महा आरती की गयी। अंत में दिव्य कलश जल से सबको अभिसिंचन व शांति-पाठ तथा भोजनोपरान्त दोपहर विराम दिया गया। यह कार्यक्रम 9 से 12:30 बजे हुआ। सायंकाल में प्रज्ञापुराण कथा वाचन कार्यक्रम मुख्य पुरोहित टीम नायक संतोष कुमार संगम ने शुभारंभ किया। प्रथम भाग के प्रथम चरण में श्रीविष्णु भगवान एवं देवर्षि नारदजी मध्य सद्ज्ञान-सूत्र संवाद पर प्रकाश डाला। टीम सहायक व गीत संगीत में हारमोनियम वादक रंजन कुमार और तबला वादक रीकू सूदन जी ने सहयोग दिया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के कार्यक्रम प्रचारक प्रसारक जय नारायण प्रसाद ने दी।
योग की शक्ति को हजारों वर्ष पूर्व दुनिया अनुभव कर चुका है : स्वामी मुक्तरथआज सिंह मोड़, हटिया में एक योग केन्द्र का शुभारंभझारखण्ड के प्रख्यात योग गुरु स्वामी मुक्तरथ केन्द्र का किये उद्घाटनटीम एबीएन, रांची। आज दिनाँक 08 मार्च,रबिवार को राँची के पटेल नगर,हटिया में योग केन्द्र का श्रीगणेश स्वामी मुक्तरथ जी ने फीता काट कर किया। इस केन्द्र की निदेशक नित्या मिश्रा ने स्वामी मुक्तरथ का स्वागत कीं।उन्होंने कहा कि इस योग केन्द्र में प्रातःकालीन और सांध्यकालीन योग कक्षा नियमित रूप से संचालित होगा। यह केन्द्र प्रख्यात योग गुरु स्वामी मुक्तरथ के सान्निध्य में चलेगा जहाँ योगासन,प्राणायाम, मुद्रा, ध्यान,और हठयोग की क्रियायें सिखलायी जाएगी।स्वामी मुक्तरथ जी ने कहा कि भारत का योग दुनिया को हजारों वर्ष पूर्व भी दिशानिर्देशित किया है और आज लंबे अवधि के बाद भी योग स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभा रही है। आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत बड़ी चुनौती है। पीठ दर्द, कब्ज, मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, कैंसर, अवसाद, चिन्ता जैसी कठिन रोगों के निदान में योग उपचार का एक शक्तिशाली माध्यम साबित हुआ है। तनाव जनित समस्याओं का मुख्य उपाय है योग। स्वामी मुक्तरथ ने कहा कि स्वामी सत्यानन्द सरस्वती की खोज यह प्रमाणित किया है कि हराजों वर्ष पूर्व योग दुनियाँ में फैला था, कोलम्बिया (ऑस्ट्रेलिया) में योग बहुत ज्यादा प्रचलित था। आज पुनः योग दुनियाँ को दिशा दे रही है। शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में, विज्ञान के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में योग दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहा है। भारतीय योग का डिमांड दुनियाँ में काफी बढ़ रहा है।
पंडरा के चटकपुर में उमड़ा जनसैलाबविराट हिंदू सम्मेलन में गूंजा सामाजिक समरसता और एकता का मंत्रटीम एबीएन, रांची (पंडरा)। पंडरा के चटकपुर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ऐतिहासिक उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। हजारों हिंदू समाज के सदस्य एकत्रित हुए, जहां वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक संरक्षण और छुआछूत मुक्त समाज के संकल्प को दोहराया।स्वामी परिपूर्णानंद सरस्वती जी का आशीर्वचनचिन्मय आश्रम, रांची के स्वामी परिपूर्णानंद सरस्वती जी ने मुख्य वक्ता के रूप में समाज को संबोधित किया। उन्होंने कहा, हिंदू समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। बच्चों को संस्कारवान और योग्य बनाने, परंपराओं जैसे तिलक-जनेऊ का गर्व से पालन करने तथा धन का सदुपयोग समाज-धर्म कार्यों में करने पर जोर दिया। अतिथि सत्कार और दान को सौभाग्य बताते हुए उन्होंने एकजुट समाज की अपील की।सुश्री सुनीता ताई हल्देकर का ओजस्वी संबोधनअखिल भारतीय सह कार्यवाहिका एवं मुख्य वक्ता सुश्री सुनीता ताई हल्देकर ने हिंदू समाज को विश्व का सबसे उदार समाज बताया। रघुकुल रीति का स्मरण कराते हुए उन्होंने नारी शक्ति के विस्तार, भारत माता की प्रतिष्ठा और सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, मंदिर, श्मशान और जल स्रोतों पर सभी का समान अधिकार हो भेदभाव मुक्त समाज बनाएं। पंच परिवर्तन से व्यक्ति निर्माण और सुदृढ़ परिवार व्यवस्था पर बल दिया।एकता का संकल्पसम्मेलन का मुख्य संदेश रहा विविधता में एकता। महाकुंभ की तुलना देते हुए वक्ताओं ने जीवन के हर क्षेत्र में एकजुट रहने का आह्वान किया। समापन राष्ट्रव्यापी भाव मैं रहूँ या न रहूँ, मेरा समाज रहे गीत के एवं भारत माता की आरती के साथ संपन्न हुआ। यह सम्मेलन हिंदू समाज की एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बना। उक्त जानकारी सकल हिंदू समाज, पंडरा के प्रचार व्यवस्था प्रमुख आलोक मिश्र ने दी।
बाल विवाह मुक्ति रथ ने झारखंड के 2,364 गांवों में 11.8 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचाया बाल विवाह के खिलाफ संदेशएबीएन सोशल डेस्क। पहियों पर चलकर राज्य के 2,364 गांवों में 11,81,876 से अधिक लोगों तक बाल विवाह मुक्त झारखंड का संदेश पहुंचाने वाले अपनी तरह के अनूठे अभियान बाल विवाह मुक्ति रथ का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर समापन हुआ। इस दौरान रथ ने राज्यभर में 36,482 किलोमीटर की यात्रा की। बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान को मजबूती देने के लिए देशभर में 500 से अधिक ऐसे ही बाल विवाह मुक्ति रथ निकाले थे, जिन्होंने देश के कोने-कोने में जाकर जनसमुदाय को बाल विवाह के खिलाफ बने कानूनों के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के 22 सहयोगी झारखंड में जमीन पर काम कर रहे हैं।जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के 22 सहयोगी संगठनों के इस अभियान को पूरे राज्य में अभूतपूर्व समर्थन मिला। जाति, धर्म और विचारधारा के बंधन को तोड़ते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, महिला भुक्तभोगियों, नागरिक समाज संगठनों, पुलिस और धर्मगुरुओं ने एकजुट होकर बाल विवाह के खात्मे के सामूहिक संकल्प को दोहराया।राज्यभर में एक महीने तक चली इस यात्रा के दौरान बाल विवाह मुक्ति रथ स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचा व 1,524 कार्यक्रमों के जरिए बाल विवाह के खिलाफ संदेश पहुंचाया। इनमें रैलियां, नुक्कड़ नाटक, शपथ समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और महिला भुक्तभोगियों की कहानियां शामिल थीं। बाल विवाह मुक्ति रथ इस दौरान 1,242 से अधिक स्कूलों व कॉलेजों एवं 1,213 धार्मिक स्थलों तक पहुंचा। अभियान में 2,96,825 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के साथ-साथ 1,313 धर्मगुरुओं ने भागीदारी की। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019–21 की अवधि में झारखंड में बाल विवाह की दर 32.2 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत से काफी अधिक है।देश के विभिन्न राज्यों में इन रथों को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सांसद, जिलाधिकारी और कई राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने-अपने राज्यों में बाल विवाह मुक्ति रथ को रवाना किया। राज्यों के 49 मंत्रियों, 82 सांसदों और 154 विधायकों के अलावा 99 जिलाधिकारियों ने विभिन्न जिलों में इस रथ को रवाना किया। एक महीने की इस यात्रा के दौरान देशभर में बाल विवाह मुक्ति रथ ने 28 राज्यों के 66,344 गांवों में पहुंचते हुए 6,79,077 किलोमीटर की यात्रा की और 5,22,68,033 लोगों तक बाल विवाह के खिलाफ संदेश पहुंचाया।अभियान की सफलता और भारत के बाल विवाह के खिलाफ दृढ़ संकल्प के बाबत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सीनियर एडवाइजर (पॉलिसी) ज्योति माथुर ने कहा, यह रथ केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय का वाहक है। यह जनसमुदाय तक कानून, संरक्षण और जवाबदेही का संदेश लेकर जाता है, ताकि सरकार की मंशा जमीन पर वास्तविक सुरक्षा में तब्दील हो सके। इस अभियान में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर शिक्षाविदों और महिला भुक्तभोगियों तक सभी ने उत्साह से भागीदारी की। खास तौर पर जमीनी स्तर के महिला नेतृत्व का अग्रिम मोर्चे से इस संदेश को आगे ले जाते देखना बेहद प्रेरक रहा। ऐसी व्यापक भागीदारी और तात्कालिकता के साथ हमें विश्वास है कि भारत 2030 की वैश्विक समयसीमा से पहले ही बाल विवाह जैसे अपराध से मुक्त हो जाएगा।उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय की एक हालिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, हमारा हौसला बढ़ाने वाली बात यह है कि दुनिया अब उसे स्वीकार कर रही है जो हम एक दशक से कह रहे हैं कि बाल विवाह दरअसल हमारे बच्चों से बलात्कार है और इसे उसी रूप में देखा और समझा जाना चाहिए।जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अपने सहयोगी संगठनों, स्थानीय प्रशासन, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, सामुदायिक नेताओं व बाल विवाह में सेवाएं प्रदान करने वाले बैंड बाजा, घोड़ी, सजावट, डीजे व खाना बनाने वाले कैटर्रस के समन्वित प्रयासों से पिछले एक वर्ष में ही झारखंड में 16,348 बाल विवाह रुकवाए हैं।पोस्टरों, प्रभावशाली नारों, लाउडस्पीकर और शपथ हस्ताक्षर बोर्ड से सुसज्जित बाल विवाह मुक्ति रथ को इस तरह तैयार किया गया था कि यह रास्ते में आने वाले दूरदराज और हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक पहुंच सके। जहां बेहतर सड़कों वाले इलाकों में चार पहिया वाहनों के माध्यम से अभियान चलाया गया, वहीं सबसे दूरस्थ गांवों तक मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए संदेश पहुंचाया गया। यात्रा के दौरान बाल विवाह मुक्ति रथ ने पंचायतों, जिला प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर समुदायों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया और बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई।और जानकारी के लिए संपर्क करेंजितेंद्र परमार8595950825
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