रामनवमी महापर्व 27 मार्च कोभारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व जो आस्था, मर्यादा और आदर्शों का देता है संदेश: संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में अनेक पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें महा रामनवमी का विशेष स्थान है। यह पावन पर्व भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष रामनवमी का पर्व 27 मार्च को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है, जो हिंदू नववर्ष के आरंभिक दिनों में पड़ता है और नए संकल्पों, धर्म एवं सत्य के पालन का संदेश देता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ के यहां लंबे समय तक संतान नहीं थी। उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसके फलस्वरूप उनके यहां चार पुत्रों का जन्म हुआ, जिनमें भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को हुआ। भगवान राम को विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है, जिन्होंने पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए जन्म लिया। उनका जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्शों का अनुपम उदाहरण है।रामनवमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा भी है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में हर रिश्ते और कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। उन्होंने एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई और आदर्श राजा के रूप में समाज को दिशा दी। आज के युग में जब नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, तब रामनवमी हमें सत्य, न्याय और अनुशासन का पालन करने की प्रेरणा देती है।रामनवमी के दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और रामचरितमानस का पाठ होता है। विशेष रूप से अयोध्या में इस दिन भव्य आयोजन होते हैं, जहां सरयू नदी में स्नान कर भक्त भगवान राम के जन्मोत्सव में भाग लेते हैं। जब राम जन्म का मुहूर्त होता है, मंदिरों में घंटा-घड़ियाल बजाकर और जयकारों के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।इस दिन शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, झांकियां सजाई जाती हैं और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। कई स्थानों पर रामलीला का मंचन भी किया जाता है, जिससे लोगों को भगवान राम के जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं से परिचित कराया जाता है।आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में रामनवमी का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह पर्व हमें अपने जीवन में संयम, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा अपनाने की सीख देता है। भगवान राम का जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। महारामनवमी भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो आस्था, मर्यादा और आदर्शों का संगम है। यह न केवल भगवान राम के जन्म का उत्सव है, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर भी है। यदि हम उनके जीवन के सिद्धांतों को अपनाएं, तो समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता का विस्तार संभव है। यही इस महान पर्व का वास्तविक उद्देश्य है।
डॉ राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि राम मनोहर लोहिया जयंती हर वर्ष 23 मार्च को मनाई जाती है। यह दिन भारत के महान समाजवादी चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर वक्ता डॉ. लोहिया के जन्म (23 मार्च 1910) की स्मृति में समर्पित है। डॉ लोहिया का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर मे हुआ था। डॉ लोहिया जयंती के अवसर पर देशभर में उनके विचारों, सिद्धांतों और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया जाता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभायी, लेकिन बाद में समाजवादी विचारधारा को मजबूत करने के लिए स्वतंत्र मार्ग अपनाया। वे सामाजिक समानता, आर्थिक न्याय और जातिवाद के विरोध के प्रबल समर्थक थे। लोहिया जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य उनके आदर्शों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने सप्त क्रांति का सिद्धांत दिया, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, लैंगिक और राजनीतिक असमानताओं को समाप्त करने का आह्वान किया गया। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं, विशेषकर ऐसे समय में जब समाज विभिन्न प्रकार की असमानताओं से जूझ रहा है। डॉ. लोहिया का मानना था कि सच्चा लोकतंत्र तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिले। उन्होंने ग्रामीण विकास, महिलाओं के अधिकार और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर विशेष जोर दिया। उनका जीवन सादगी, संघर्ष और जनसेवा का अद्भुत उदाहरण रहा है।लोहिया जयंती के अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक मंचों पर विचार गोष्ठियों, सेमिनारों और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।आज के दौर में जब समाज में असमानता, बेरोजगारी और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, तब डॉ. लोहिया के विचार मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। उनका संदेश स्पष्ट था-समाज में न्याय, समानता और भाईचारे की स्थापना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। अत: लोहिया जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प दिवस है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में मारवाड़ी एवं राजस्थानी समाज द्वारा मनाया जाने वाला पारंपरिक पर्व गणगौर महोत्सव इस वर्ष भी हर्षोल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने अपने-अपने घरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता गणगौर की विधिवत पूजा-अर्चना की।सुबह से ही महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधानों-लहंगा, ओढ़नी और आभूषणों से सुसज्जित होकर माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतीक गणगौर कीप्रतिमाओं का श्रृंगार किया। घर-घर में मंगल गीतों की गूंज सुनाई दी और सुहागिन महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि एवं अखंड सौभाग्य की कामना की, वहीं अविवाहित युवतियों ने मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए पूजा की।संध्या समय शहर के विभिन्न तालाबों एवं जलाशयों के किनारे महिलाओं का समूह एकत्रित हुआ, जहां पारंपरिक लोकगीतों और नृत्य के बीच गणगौर की प्रतिमाओं का विधिपूर्वक विसर्जन किया गया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि गणगौर महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को भी सुदृढ़ करता है। इस पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।इस प्रकार रांची सहित पूरे झारखंड में गणगौर महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ, जिसने शहर के सांस्कृतिक वातावरण को और भी समृद्ध बना दिया।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय संस्कृति के नवोदय का प्रतीक : डॉ अंकन संस्कार भारती का भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर साहित्यिक कार्यक्रम संपन्न टीम एबीएन, रांची। भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के अवसर पर संस्कार भारती, रांची महानगर ने एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसका शुभारंभ सुजाता मजूमदार एवं उनकी टीम ने ध्येय गीत एवं सरस्वती वंदना से की। दीप प्रज्ज्वलन झारखंड प्रांत अध्यक्ष डॉ. सुशील अंकन ने किया। डॉ. अंकन ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय संस्कृति के नवोदय का प्रतीक है और ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त करते हैं। संगीत प्रस्तुति में सुजाता मजूमदार, जेपी सिंह, इंदु पराशर, बबीता शर्मा, मृदुला पाठक एवं विजय खोवाला ने मधुर गायन प्रस्तुत किया्। तबले पर अनूप कुमार ने अपना सहयोग दिया। भरतनाट्यम नृत्यांगना गार्गी शोम ने देवी के विभिन्न स्वरूपों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। काव्य गोष्ठी में कवियों ने नववर्ष की अपनी मंगल भावनाएं व्यक्त की आशुतोष प्रसाद— नव अरुणिम आभा लेकर, फिर वर्ष नया मुस्काया है... जवाहरलाल— चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा का हुआ आगमन... रेणु झा रेणुका— जगमग ज्योत देख, आये तेरे द्वार है दुर्गा महारानी... ऋतुराज वर्षा- जप लो श्रीराम का नाम सुनीता अग्रवाल— हे मर्यादा पुरुषोत्तम राम... रंजना वर्मा उन्मुक्त— मन-मन दीप जला दो आज... विभा वर्मा— शिवांगी बन भवानी मां... रेणु बाला धार— नव वर्ष अभिनंदन... निर्मला कर्ण— सजा है माता का दरबार... खुशबू बरनवाल सीपी— शुद्ध रखो मन वंदन को... आदि ने अपनी स्वरचित रचनाओं को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष रामानुज पाठक ने कहा कि भारतीय नववर्ष हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। भूतपूर्व सदस्य जेपी श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का संचालन शशिकला पौराणिक ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन आशुतोष प्रसाद ने दिया।इस अवसर पर डॉ. सुजाता मजूमदार, अनूप मजूमदार, बिंदिया कुमारी, अंश सिद्धार्थ, अभिनव सिद्धार्थ, नवेन्दु उन्मेष, कुमकुम गौड़, मिथिलेश पाठक एवं शिव कुमार पाठक सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
नवरात्रि के 9 दिनों में देवी मां को चढ़ाएं ये खास नौ फूल, मिलेगी विशेष कृपा एबीएन सोशल डेस्क। आज यानी 19 मार्च 2026, गुरुवार से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व 27 मार्च को राम नवमी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और हर दिन उन्हें विशेष फूल अर्पित करने का महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही फूलों से पूजा करने पर माता रानी जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। आइये जानते हैं नौ दिनों तक किस देवी को कौन सा फूल अर्पित करना चाहिए। नौ दिनों तक देवी मां को अर्पित करें ये खास फूल। पहला दिन मां शैलपुत्री नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें सफेद कनेर और गुड़हल का फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। इस दिन उन्हें चमेली या कोई भी सफेद फूल अर्पित करना शुभ और लाभकारी माना जाता है, जिससे साधक को तप, संयम और आत्मबल की प्राप्ति होती है। तीसरा दिन मां चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें कमल या शंखपुष्पी का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे साहस, शांति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की प्राप्ति होती है। चौथा दिन मां कुष्मांडा नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें गेंदे के फूल और पीले रंग के पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पांचवां दिन मां स्कंदमाता नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें पीला गुलाब या चंपा का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे भक्तों को संतोष, सुख और संतान से जुड़ी खुशियों की प्राप्ति होती है। छठा दिन मां कात्यायनी नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। इस दिन उन्हें लाल गुलाब या लाल गेंदे के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे साहस, शक्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने की क्षमता प्राप्त होती है। सातवां दिन मां कालरात्रि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें कृष्ण कमल या रात की रानी के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और भय व बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आठवां दिन मां महागौरी नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें मोगरा या बेला के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में शांति, सौंदर्य और पवित्रता का संचार होता है। नौवां दिन मां सिद्धिदात्री नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन उन्हें लाल कमल या चंपा के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे भक्तों को सिद्धि, सफलता और मनचाही इच्छाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आप नवरात्रि के किसी भी दिन माता रानी को लाल गुलाब अर्पित कर सकते हैं। इसे प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में नववर्ष केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि नयी ऊर्जा, नयी आशाओं और नए संकल्पों का आरंभ होता है। हिंदू नववर्ष, जिसे विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष विक्रम संवत 2083 के रूप में मनाया जायेगा। यह पावन पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है, इस वर्ष नवसंवत्सर 19 मार्च से प्रारंभ हो रहा है तथा इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार नवसंवत्सर का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि की रचना भगवान ब्रह्मा द्वारा की गयी थी, इसलिए इसे सृष्टि का प्रथम दिवस भी माना जाता है।साथ ही, यह भी कहा जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त कर विक्रम संवत की स्थापना की थी, जिसके कारण यह कालगणना भारतीय परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित है। नववर्ष का यह पर्व भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादि, कश्मीर में नवरेह और सिंधी समाज में चेटीचंड के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। इन सभी उत्सवों में एक समान भाव है- नयी शुरुआत और सकारात्मकता का स्वागत, नवसंवत्सर का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में अनुशासन,संयम और आत्मचिंतन का संदेश देता है। इस दिन लोग प्रात:काल स्नान कर घरों में ध्वज या पताका लगाते हैं, मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। यह दिन यह भी सिखाता है कि बीते वर्ष की गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। इस पर्व की महत्ता सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह लोगों को एकजुट करता है, आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देता है तथा भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का कार्य करता है। नववर्ष के अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और समृद्धि, सुख-शांति की कामना करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस अवधि में प्रकृति में परिवर्तन होता है। वसंत ऋतु अपने चरम पर होती है, पेड़-पौधों में नई कोंपलें फूटती हैं और वातावरण में नवजीवन का संचार होता है। यह प्रकृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है, जो मानव जीवन में भी नयी ऊर्जा भरता है। अत: हिंदू नववर्ष विक्रम संवत केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई, आस्था और जीवन दर्शन का प्रतीक है। यह हमें हर वर्ष नयी शुरुआत करने, सकारात्मक सोच अपनाने और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता है।
विभिन्न दलों के 20 से अधिक सांसद एमपीज फॉर चिल्ड्रेन के बैनर तले 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य के लिए एकजुट हुए। एमपीज फॉर चिल्ड्रेन की पहल को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का समर्थन हैं, जो बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता लावू श्रीकृष्ण देवरायालु सहित सभी सांसदों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर प्रगतिशील और उम्र के अनुरूप प्रतिबंध लागू करने की भी मांग की एबीएन सोशल डेस्क। एक नायाब और मजबूत पहल में 2030 तक भारत को बाल विवाह से मुक्त करने की रणनीति तय करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी के कांस्टीट्यूशन क्लब में एमपीज फॉर चिल्ड्रेन के बैनर तले विभिन्न राजनीतिक दलों के 20 से ज्यादा सांसद एक साथ जुटे। बाल विवाह और सोशल मीडिया से जुड़े खतरों को बच्चों के लिए बड़ी चुनौती करार देते हुए सांसदों ने इन मुद्दों को आगे लाने के लिए शून्य काल का इस्तेमाल, निजी विधेयक लाए जाएं और अपने संसदीय क्षेत्रों में इसे मजबूती से उठाया जाये। एमपीज फॉर चिल्ड्रेन की शुरुआत 17 नवंबर 2024 को हुई थी और बाल विवाह एवं बाल यौन शोषण पर चिंता जताते हुए 38 सांसदों ने इसका समर्थन किया। इसे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का समर्थन प्राप्त है, जो बाल अधिकारों के संरक्षण का देश का नागरिक समाज संगठनों का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इसके 250 से ज्यादा सहयोगी संगठन देश के 450 से अधिक जिलों में काम कर रहे हैं। डायलॉग विद पार्लियामेंटेरियंस आन अचीविंग चाइल्ड फुल पोटेंशियल में बोलते हुए तेलुगु देशम पार्टी के नेता और एमपीज फर चिल्ड्रेन के संयोजक लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा, बाल विवाह किसी एक पार्टी या धर्म का मुद्दा नहीं है। इसे खत्म करने पर सभी दलों में आम सहमति है। भारत ने दिखाया है कि जब भी हम सामूहिक संकल्प के साथ काम करते हैं, हमने नतीजे हासिल किए हैं। हमने पोलियो खत्म किया, बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया। कोई वजह नहीं कि उसी संकल्प के साथ हम 2030 तक बाल विवाह का खात्मा नहीं कर पाएं। तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता देवरायलु ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र के आधार पर रोक लगाने की जरूरत बतायी। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 को मजबूत बनाने के लिए हाल ही में लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया। बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए इस विधेयक में सख्त सजा, विशेष बाल विवाह निषेध अधिकारी, विशेष अदालतें और एक डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल का प्रावधान है। समर्थन के लिए सभी सांसदों का आभार जताते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, हम एमपीज फॉर चिल्ड्रेन फोरम को उनके नेतृत्व के लिए धन्यवाद देते हैं और इस बात की सराहना करते हैं कि उन्होंने संसद तथा संबंधित सरकारी एजेंसियों के भीतर बाल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया। बाल संरक्षण केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। बच्चों को आनलाइन और आफलाइन, दोनों ही तरह के खतरों से सुरक्षित रखना राष्ट्र निर्माण की बुनियादी शर्त है।भुवन ऋभु ने आगे कहा, हम सांसदों के आभारी हैं कि उन्होंने इस बात पर सहमति जतायी कि भारत सरकार को बाल विवाह मुक्त भारत दिवस घोषित करना चाहिए। एक राष्ट्रीय दिवस की घोषणा न केवल इस अपराध के खात्मे की तात्कालिकता को रेखांकित करेगी, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी बच्चा विवाह के लिए मजबूर न हो, पूरी सरकार और पूरे समाज; दोनों की साझा जवाबदेही को भी सुदृढ़ करेगी। एमपीज फॉर चिल्ड्रेन संवाद में अन्य सांसदों में भीम सिंह (भाजपा), डॉ धर्मवीर गांधी (कांग्रेस), राजा राम सिंह कुशवाहा (सीपीआई एमएल), लुंबा राम चौधरी (भाजपा), पुष्पेंद्र सरोज (सपा), जोथिमानी (कांग्रेस), डग्गुमल्ला प्रसाद राव (टीडीपी), गजेंद्र पटेल (भाजपा), जॉन ब्रिटास (सीपीएम), अरुण नेहरू (डीएमके), छोटेलाल खरवार (सपा), इकरा चौधरी (सपा), जुगल किशोर शर्मा (भाजपा), महुआ माजी (जेएमएम), संगीता बलवंत (भाजपा), विजयलक्ष्मी देवी (जनता दल (यूनाइटेड), वी शिवदासन (सीपीआई), पीवी अब्दुल वहाब (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग), बीधा मस्थान राव यादव (टीडीपी) और कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी (भाजपा) शामिल थे। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने बाल विवाह के खिलाफ भारत सरकार के 100 दिन के गहन जागरूकता अभियान को मजबूती देने के लिए बाल विवाह मुक्ति रथ निकाले थे। पहियों पर चलने वाले इस अभियान को इस तरह से तैयार किया गया था कि यह गांवों और जनसमुदाय तक बाल विवाह के खिलाफ संदेश को सीधा उन तक पहुंचा सके। देश के 28 राज्यों और 439 जिलों में 500 से ज्यादा रथ निकाले गए। इस अभियान में 104 से ज्यादा सांसदों ने अपने क्षेत्रों में रथ यात्रा का नेतृत्व किया या उसे रवाना किया। इसके अलावा दो मुख्यमंत्रियों, तीन उपमुख्यमंत्रियों, तीन विधानसभा अध्यक्षों, तीन उपाध्यक्षों, 49 राज्य मंत्रियों, 154 विधायकों और 99 जिला कलेक्टरों ने भी अलग-अलग जिलों में बाल विवाह मुक्ति रथों को हरी झंडी दिखायी। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
गणगौर पर्व प्रेम, विश्वास, आस्था, सौभाग्य और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक होते हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख पर्व है गणगौर, जो विशेष रूप से राजस्थान और मारवाड़ी समाज में बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। गणगौर पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। इस वर्ष गणगौर पर्व 21 मार्च दिन शनिवार को मनाया जायेगा। गणगौर पर्व भगवान शिव (गण) और माता पार्वती (गौर) को समर्पित है। यह पर्व मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति के दीघार्यु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए तथा अविवाहित कन्याओं द्वारा योग्य वर की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। गण का अर्थ शिव और गौर का अर्थ पार्वती है, इसलिए यह पर्व शिव-पार्वती के अटूट दांपत्य प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। गणगौर उत्सव होली के दूसरे दिन से प्रारंभ होकर लगभग 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान महिलाएं प्रतिदिन माता गौरी की पूजा करती हैं, सुंदर गीत गाती हैं और मिट्टी या लकड़ी की बनी गणगौर प्रतिमाओं को सजाती हैं। अंतिम दिन शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें सजी-धजी महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में गणगौर की प्रतिमाओं को जल में विसर्जित करती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाया। विवाह के बाद माता पार्वती ने पृथ्वी पर आकर स्त्रियों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया। तभी से महिलाएं गणगौर पर्व मनाकर माता गौरी से अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।एक अन्य कथा के अनुसार, माता पार्वती ने साधारण स्त्रियों को अपनी सच्ची भक्ति के कारण विशेष आशीर्वाद दिया, जिससे यह पर्व सामाजिक समानता और नारी शक्ति का भी प्रतीक बन गया। गणगौर पर्व का मुख्य उद्देश्य वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण को मजबूत करना है। यह पर्व नारी शक्ति, त्याग और धैर्य का प्रतीक है। साथ ही यह समाज में सांस्कृतिक एकताऔर पारंपरिक मूल्यों को सहेजने का संदेश देता है। मारवाड़ी समाज में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है, जहां लोकगीत, नृत्य और सामूहिक आयोजन इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं। गणगौर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान और उसकी भावनाओं को भी अभिव्यक्त करता है। गणगौर पर्व भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपराओं का प्रतीक है, जो प्रेम, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। यह त्योहार हर वर्ष लोगों के जीवन में नयी आशा, सुख और सौभाग्य लेकर आता है तथा हमारी सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाता है।
डॉ बिरेन्द्र साहु को अध्यक्ष, बसकुमार साहू को मंत्री व मनोज कुमार को बनाया गया कोषाध्यक्ष दूसरे मंगलवारी के पावन बेला में बड़ागांई मुख्य अखाड़ा बेलटंगरा सहित सभी 9 अखाड़ों में महावीर पताका लगाकर किया गया महोत्सव का शुभारंभ टीम एबीएन, रांची। श्री महावीर मंडल, बड़ागांई की आम सभा बेलटंगरा स्थित श्री श्री पंचदेव मंदिर परिसर में अखाड़े धारी सहित समस्त ग्रामीणों की रखी गयी। आम सभा में विहिप के क्षेत्र मंत्री व श्री महाबीर मंडल, बड़ागांई के अध्यक्ष डॉ बिरेन्द्र साहु ने कहा कि श्री रामनवमी महोत्सव रांची का एक पारंपरिक, सांस्कृतिक, धार्मिक व ऐतिहासिक धरोहर है। बड़ागांई से निकलने वाली शोभायात्रा इसकी एक प्रमुख कड़ी है। 1956 से लगातार प्रतिवर्ष बड़ागांई ग्राम भ्रमण कर रांची के मुख्य शोभा यात्रा में शामिल होकर तपोवन श्रीराम मंदिर तक जाती है। इस वर्ष भी 27 मार्च को ग्राम के सभी अखाड़े के रामभक्तों द्वारा पारंपरिक गाजे-बाजे, अस्त्र-शस्त्रों, महावीरी पताकों व झांकी के साथ निकाली जायेगी। आमसभा में सर्वसम्मति से डॉ बिरेन्द्र साहु को 17वीं बार अध्यक्ष के साथ बसकुमार साहू को मंत्री व मनोज कुमार को कोषाध्यक्ष बनाया गया। वहीं उपाध्याय के रूप में डॉ जीवादन प्रसाद, रामदास साहू, बैजनाथ महतो, विनोद महतो, बलशाय महतो, रामदास महतो, कालीचरण साहू, बनू पाहन, नेपाल महतो, रामचंद्र साहू, महेश साहू, रंजीत साहू, जीतराम साहू, अशोक साहू, सुदेश साहू, बिगलू उरांव, फागु प्रसाद, कामेश्वर प्रसाद, अखिलेशवर प्रसाद, प्रकाश साहू को वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में धनसू साहू, नागेश्वर साहू, बालक लोहरा, बालेश्वर लोहरा, गोवर्धन साहू, गोपाल प्रमाणिक, रामसेवक लोहरा, सागर साहू, बलित महतो, अर्जुन महतो, गणेश महतो, पंचम महतो को, सहमंत्री के रूप में नकुल महतो, प्रताप साहू, संजय साहू, दिलीप पहन, आमोद तिर्की, सुनील पहान, रामधनी साहू, संजय महतो, रमेश महतो, अशोक तिर्की, अजय महतो, रोहित साहू, बसंत साहू, दिनेश साहू, अरविंद साहू, शेखर साहू, दीपक साहू, विजय साहू, डब्लू नायक, प्रेम लोहरा को सहकोषाध्यक्ष के रूप में धीरन साहू, उमेश साहू, बसंत साहू, रामलाल महतो, पवन साहू, रामानंद साहू, मनीष सिंह, नरेश साहू, विकास कुमार, शिव प्रसाद साहू को तथा प्रचार मंत्री के रूप राजेश साहू, मनीष साहू, बजरंग रजक, मनोहर साहू, सोनू साहू, एवं प्रेम कुमार को मनोनीत किये गये। श्री रामनवमी महोत्सव का शुभारंभ आज दूसरे मंगलवारी के पावन बेला में बड़ागांई मुख्य अखाड़ा बेलटंगरा सहित सभी अखाड़ों में पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा व सुन्दर कांड पाठ कर गाजे-बाजे के साथ महावीरी पताका खड़ा कर किया गया। सभा में 19 मार्च को श्री श्री पंचदेव मंदिर में महाआरती, 24 मार्च को श्री रामनवमी महोत्सव मिलन समरोह, 28 मार्च की संध्या 8 बजे से परम्परागत गाजे-बाजे, अस्त्र-शस्त्रों के साथ महावीरी पताकों खड़ा करने व झांकी निकलने का निर्णय लिये गये। उक्त जानकारी श्री महावीर मंडल, बड़ागांई के मंत्री बस कुमार साहु (96312 09285) ने दी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.