Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
होम देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन

समाज

View All
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट विद्यार्थियों को दिये गये प्रशस्ति पत्र
Published / 2026-02-28 21:29:00
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट विद्यार्थियों को दिये गये प्रशस्ति पत्र

अध्यापक युग निर्माता, छात्र राष्ट्र के भाग्य विधाता पर गायत्री परिवार ने प्रकाश डाला एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्रीपरिवार शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा  पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र वितरण समारोह सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम संत माइकल स्कूल छोटा मुरी, सिल्ली प्रखंड में किया गया। साथ ही सिल्ली प्रखंड के दो और स्कूल चिराग नर्सरी काशीडीह और मां वैष्णवी विद्या मंदिर छोटा मुरी में भी पुरस्कार वितरण समारोह सह प्रमाण पत्र वितरण किया गया।जिसमें विद्यालय के प्रिसिंपल छोटे लाल प्रजापति, दिनेश महतो, कंचन पांडे के साथ विद्यालय के शिक्षक ममता गोस्वामी, वी के वेंकट सर, मंजू कुमारी, मनीषा कुमारी, श्रेया कुमारी ने भी साथ दिया।गायत्री परिवार की बहनों में कोशिला महतो, अनीता ठाकुर, लक्ष्मी देवी, संगीता देवी ने युग कल्याण, नव निर्माण, समाज कल्याण और शताब्दी समारोह के साथ परम पूज्य गुरुदेव के सत्संकल्प तथा भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की आवश्यकता, शिक्षा के साथ विद्या का सार्थक समन्वय, साधना, स्वाध्याय, स्वावलंबन विषय पर प्रकाश डाला गया। गायत्री परिवार के प्रतिनिधि मंडल ने अध्यापक है युग निर्माता-छात्र राष्ट्र के भाग्य विधाता पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों में पुन: भारतीय संस्कृति  का गौरव बोध कराना, वैज्ञानिक आध्यात्मवाद को प्रतिपादित करने एवं समस्त विश्व की पीड़ित,अशांत मानवता को जागृत करने तथा स्थाई शांति एवं खुशहाली के लिए यह परीक्षा मील का पत्थर सिद्ध होगी। विद्यार्थियों में दूरदर्शी-विवेकशीलता एवं उच्चस्ततरीय संवेदनशीलता को जागृत करने, साथ, प्रेम एवं न्याय का पाठ पढ़ाना, समय और प्रतिभा का उचित उपयोग सिखाना तथा जीवन जीने की कला में प्रवीणता लाने हेतु यह परीक्षा सार्थक है। कीर्ति दीदी ने बताया कि तीनों विद्यालय के कुल करीबन दो सौ विद्यार्थी शामिल हुए थे। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।

होलिका दहन अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का है दिव्य प्रतीक : संजय सर्राफ
Published / 2026-02-28 21:28:07
होलिका दहन अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का है दिव्य प्रतीक : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का दिव्य प्रतीक है। इस दिन संध्या समय विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है और भक्तजन अपने जीवन से नकारात्मकता, पाप और अहंकार को दूर करने का संकल्प लेते हैं।इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा एवं खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 2 मार्च को शाम 5:18 बजे से हो रही है होलिका दहन 2 मार्च को रात 12:50 बजे के बाद होगा, अगले दिन 4 मार्च को धुलेंडी पर रंगों का त्योहार मनाया जायेगा। होलिका दहन की कथा का वर्णन श्रीमद् भागवत और अन्य पुराणों में मिलता है। हिरण्यकशिपु नामक अत्याचारी असुरराज ने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया था। उसका पुत्र भक्त प्रह्लाद भगवान श्रीहरि विष्णु का परम भक्त था। यह बात हिरण्यकशिपु को स्वीकार नहीं थी। उसने कई बार प्रह्लाद को मृत्यु के मुख में धकेलने का प्रयास किया, किंतु हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे। अंतत: हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था) से प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। लेकिन भगवान के कृपा आगे होलिका को प्राप्त वरदान निष्फल हो गया। होलिका अग्नि में भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आये। यही घटना होलिका दहन के रूप में आज भी मनाई जाती है। होलिका दहन को पापों के दहन और नव जीवन के आरंभ का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि हमारे भीतर जो भी नकारात्मक भाव जैसे क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, अहंकार आदि हैं, उन्हें इस अग्नि में समर्पित कर देना चाहिए। अग्नि देवता को साक्षी मानकर जब हम होलिका की परिक्रमा करते हैं, तो यह हमारे आत्मशुद्धि का संकल्प होता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग सूखी लकड़ियां और उपले अग्नि में अर्पित करते हैं। जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और समृद्धि की प्रार्थना का प्रतीक है। होलिका दहन स्थल को शुद्ध करके वहां लकड़ियों या उपलों का ढेर सजायें। रोली, अक्षत, पुष्प, जल, गुड़, हल्दी, मूंग, गेहूं की बालियां आदि से पूजन करें। कच्चा सूत (मौली) होलिका के चारों ओर लपेटे। भक्तजन श्रद्धा से परिक्रमा करते हुए सुख-समृद्धि और संतानों की रक्षा हेतु कामना करें। होलिका की अग्नि की राख को माथे पर लगाएं। इससे नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।होलिका दहन धार्मिक त्यौहार के साथ ही सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस दिन लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ एकत्रित होते हैं। गांवों और मोहल्लों में सामूहिक रूप से होलिका दहन किया जाता है, जिससे भाईचारा और एकता की भावना प्रबल होती है। यह पर्व हमें बताता है कि अहंकार का अंत निश्चित है। हिरण्यकशिपु का अभिमान नष्ट हुआ और अंतत: भगवान श्रीनृसिंह ने उसका वध कर धर्म की स्थापना की, होलिका दहन हमें सदैव विनम्रता, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। होलिका दहन की ज्वाला केवल बाहर की लकड़ियों को नहीं जलाती, बल्कि हमारे भीतर के अज्ञान को भी भस्म करने का संकेत देती है। यदि हम इस पर्व को आत्ममंथन का अवसर समझें, तो इसका वास्तविक लाभ प्राप्त होगा। होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक दिव्य उत्सव है, जो हमें यह संदेश देता है कि धर्म की विजय निश्चित है और ईश्वर अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। यह पर्व हमें आत्मशुद्धि, सकारात्मकता और समाज में प्रेम-एकता स्थापित करने का संदेश देता है।

एक मार्च को मारवाड़ी भवन में कवि सम्मेलन
Published / 2026-02-26 22:03:20
एक मार्च को मारवाड़ी भवन में कवि सम्मेलन

टीम एबीएन, रांची। कवि सम्मेलन आयोजन समिति द्वारा आगामी 01 मार्च 2026 (रविवार) को स्थानीय मारवाड़ी भवन, हरमू रोड, रांची परिसर में भव्य कवि सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। यह आयोजन पूर्णत: नि:शुल्क है, जिसमें शहर के सभी वर्ग के आम जनता सादर आमंत्रित है। उपरोक्त जानकारी महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुख्य संयोजक पवन शर्मा ने दी।कहा कि आयोजन की सफलता हेतु विभिन्न उपसमितियों का गठन किया गया है, जिसमें क्रमश: मंच सभागार एवं सुरक्षा व्यवस्था- अनिल अग्रवाल एवं निर्भय शंकर हरित, स्वागत सत्कार- किशोर मंत्री एवं कमल जैन, अर्थ संग्रह- ललित पोद्दार एवं प्रकाश धेलिया, प्रशासनिक कार्य- अशोक नारसरिया एवं किशोर मंत्री, अल्पाहार- विनोद जैन एवं अनुप अग्रवाल, प्रेस एवं मीडिया प्रवक्ता मनोज बजाज को मनोनीत किया गया। समिति में प्रवक्ता सह कोषाध्यक्ष मनोज बजाज ने कहा कि इस कवि सम्मेलन में देश के सुप्रसिद्ध व प्रख्यात कवि-कवित्रियों का आगमन होगा जिसमें अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कवियों- श्रृंगाररंस विष्णु सक्सेना (यू.पी), हास्यरस आदित्य जैन (कोटा), सुनील जोेगी (नई दिल्ली) हास्यरस श्री ख्याली शरण (राजस्थान) हास्यरस श्रद्धया सोर्या पीपुल (नागपुर), वीररस पार्थ नवीन (प्रतापगढ़) से पधार रहे है। हास्यरस, वीररस एवं श्रृंगाररस की त्रिवेणी गंगा के प्रवाह से श्रोताओं को रंसपान करायेगें एवं शहरवासी होली के रंग में रंगकर, लोटपोट होगे एवं हास्यरस में डुबकी लगायेंगे। समिति के अध्यक्ष पवन पोद्दार ने कहा कि होली के पावन अवसर पर हास्य कवि सम्मेलन आयोजन का इंतजार रांची शहरवासियों को सालभर से रहता है। आयोजन समिति की व्यवस्था व कवियों का चयन व आतिथ्य देखते ही बनती है।  आयोजन समिति के मंत्री अंजय सरावगी ने जानकारी देते हुए कहा कि कुछ खास अंदाज में मंच सजाया गया है। शहर में प्रचार-प्रसार के लिए होर्डिग, पोस्टर, एस.एम.एस, सोशल मिडिया व समाचार पत्रों से लोगों को सूचना प्रेषित किया जा रहा है।  आयोजन समिति में मुख्यत: अध्यक्ष पवन पोद्दार, सचिव अंजय सरावगी, कार्यक्रम संयोजक पवन शर्मा, पूर्व अध्यक्ष सुरेश चन्द्र अग्रवाल, ललित पोद्दार, विनोद जैन, अशोक नारसरिया, कोषाध्यक्ष मनोज बजाज, कार्यकारिणी सदस्य रतन मोर, किशोर मंत्री, अनिल अग्रवाल, हरि कानोडिया, कमल जैन, पुनीत पोद्दार, निर्भय शंकर हारित, प्रकाश धेलिया, राजेश भरतीया, पुनीत अग्रवाल, अनुप अग्रवाल आदि आयोजन को मूर्त रूप दे रहे है। उक्त जानकारी प्रवक्ता सह कोषाध्यक्ष मनोज बजाज (94311 01240) ने दी।

फाल्गुन रंगभरी एकादशी पर श्री धोली सती दादी जी का महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया
Published / 2026-02-26 21:22:44
फाल्गुन रंगभरी एकादशी पर श्री धोली सती दादी जी का महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया

रंग बरसे दादी के आंगन में ... मेरी दादी की होली निराली... एबीएन सोशल डेस्क। फाल्गुन मास की पावन रंगभरी एकादशी के शुभ अवसर पर श्री धोली सती दादी महिला समिति द्वारा रातू रोड, रांची स्थित कृष्णा अपार्टमेंट में संदीप सर्राफ के आवास पर भक्तिभाव और उल्लास के साथ भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। वातावरण पूरी तरह भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से ओत-प्रोत नजर आया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूरे विधि विधान से दादी जी की ज्योत प्रज्वलित कर किया गया। दादी जी के अलौकिक श्रृंगार से हुआ।सुगंधित पुष्पों,रंग बिरंगी चुनरियों,पोशाक और आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित दादी जी की प्रतिमा एवं श्रीकृष्ण लड्डू गोपाल की मूर्ति दिव्य आभा बिखेर रही थी। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। सामूहिक रूप से गूंजते मंगलाचरण और स्तुति ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।इस अवसर पर समिति की सक्रिय सदस्य शशि सर्राफ एवं सविता सर्राफ ने दादी जी, राधा कृष्ण एवं होली से जुड़े मनमोहक संगीतमय भजनों की प्रस्तुति दी। दादी तेरे दरबार में आया हूं....,रंग बरसे दादी के आंगन में....,मेरी दादी की होली निराली.... जैसे भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। तालियों और ढोलक की थाप पर भक्तों ने भक्ति-रस में डूबकर आनंद की अनुभूति की।रंगभरी एकादशी का यह पर्व फाल्गुन मास में होली के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से देवी-देवताओं को अबीर-गुलाल अर्पित कर रंगोत्सव की शुरूआत की जाती है। इसी परंपरा के तहत समिति की महिलाओं ने दादी जी के चरणों में पुष्प अर्पित कर अबीर गुलाल एवं फूलों की होली खेली। वातावरण में उड़ते रंग-बिरंगे पुष्प और जय दादी की के जयकारों ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती की गई, जिसमें सभी भक्तों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता निभायी। आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। उपस्थित महिलाओं और श्रद्धालुओं ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे सामाजिक एवं धार्मिक एकता का प्रतीक बताया, इस अवसर पर-सविता सर्राफ, शशि सर्राफ, आशा सर्राफ, आशू सर्राफ, अनुराधा सर्राफ, मंजू सर्राफ, रिंकू सर्राफ रितु सर्राफ, संचिता सर्राफ, राज राजगढ़िया, शशि सर्राफ, करुणा बागला, स्नेहा सर्राफ, कविता सर्राफ, श्वेता सर्राफ, उर्मिला सर्राफ, शारदा पोद्दार, रेनू सर्राफ, मनीषा सर्राफ, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थी। श्री धोली सती दादी प्रचार समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, आपसी प्रेम और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश देते हैं। उक्त जानकारी श्री धोली सती दादी प्रचार समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम
Published / 2026-02-24 18:48:20
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम

पूज्यवरश्री की पाती घर-घर पहुंचाने का समय आ गया है : गायत्री परिवार एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शाखा सिल्ली प्रखंड अंतर्गत मूरी महिला मंडल प्रतिनिधित्व में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह सह प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आदर्श उच्च विद्यालय छोटा मुरी (सिल्ली प्रखंड) रांची झारखंड में  किया गया। इसमें  कक्षा 7, 8 एवं 9वीं के छात्र, छात्राएं भाग लिये थे। विद्यालय की प्रिंसपल पुष्पा महतो, शिक्षकगण प्रतिमा कुमारी, रानो देवी, लक्ष्मी देवी ने भी साथ दिया और गायत्री परिवार की महिलामंडल संचालिका बहन कोशिला महतो के सान्निध्य में अनीता देवी, लक्षमी देवी साथ ही भाई फणीभूषण महतो ने भी इस कार्यक्रम आयोजन में भाग लिया। गायत्री परिवार के भाई बहिन टीम  के द्वारा आज की युवा पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य और 21 वी सदी के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गयी। बताया गया कि पूज्यवरश्री की पाती घर-घर पंचुचाने का समय आ गया है। विद्यार्थियों को जीवन का सही लक्ष्य एवं सही बोध होना तथा आदर्शमय जीवन आवश्यक है। साथ ही अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रधान संस्थान युग तीर्थ शान्तिकुञ्ज हरिद्वार तथा उससे संबद्ध देव संस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षा, ब्रह्म वर्चस शोध संस्थान, गायत्री तपोभूमि व युग निर्माण विद्यालय मथुरा, गुरु ग्राम आंवलखेड़ा आगरा सहित कई इकाई में चल रहे युग निर्माण योजना, ऋषि चिंतन, संस्कार परम्परा और विचार क्राति अभियान के साथ गत माह बैरागी द्वीप कैम्प समारोह शान्तिकुञ्ज के कार्यक्रम दिव्य अखंड ज्योति, दिव्य कलश रथ सह, साधनात्मक पुरश्चक्रण व गुरुमाता जन्म शताब्दी वसंतोत्सव समारोह का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर बच्चों व अध्यापन टीम को युग साहित्य का स्वाध्याय करने का भी सुझाव दिया गया। कार्यक्रम गायत्री मंत्र पाठ व गुरु-ईश वंदना सहित शुभारंभ किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के कोशिला महतो और जय नारायण प्रसाद ने दी।

एकल श्रीहरि ने किया भव्य सत्संग प्रतियोगिता का आयोजन
Published / 2026-02-24 18:47:25
एकल श्रीहरि ने किया भव्य सत्संग प्रतियोगिता का आयोजन

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 24 फरवरी 2026 को दक्षिण झारखंड संभाग स्तरीय सत्संग मंडली प्रतियोगिता का आयोजन मारवाड़ी आरोग्य भवन बरियातू रोड रांची में किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आदित्य मल्होत्रा चैंबर्स आफ कॉमर्स के अध्यक्ष, डॉ ललन कुमार शर्मा एकल अभियान राष्ट्रीय महामंत्री एवं राष्ट्रीय अभियान प्रमुख तथा राष्ट्रीय ग्रामोत्थान योजना प्रमुख, सतीश तुलस्यान श्री हरि कथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, रेखा जैन बंबंधु परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, उषा जलन अकाल ग्राम संगठन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, मुकेश अग्रवाल केंद्रीय कोषाध्यक्ष अकाल ग्राम उत्थान एवं संभाग अध्यक्ष दक्षिण झारखंड, बबीता जलन अकाल श्रीहरि सचिव एवं संभाग उपाध्यक्ष दक्षिण झारखंड के द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में सत्संग प्रतियोगिता की भूमिका श्रीमान जीतू पाहन राष्ट्रीय सह अभियान प्रमुख एवं राष्ट्रीय श्री हरि कथा योजना प्रमुख के द्वारा सत्संग की महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी। साथ ही इस सैतान पत्ता के माध्यम से ग्रामीण समाज में अपने धर्म संस्कृति बरकरार रहे इस निमित्त कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम स्तर से लेकर प्रांत स्तर तक किया गया और प्रांत स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को राष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगिता श्री अयोध्या धाम में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त लेने का सौभाग्य झारखंड प्रांत को मिला है।इस कार्यक्रम में विभिन्न अंचलों गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, सिमडेगा, रातू, रामगढ़, खूंटी, चाईबासा, सरायकेला, एवं जमशेदपुर के सत्संग मंत्रियों ने भाग लिया एवं एक से बढ़कर एक सत्संग भजन कीर्तन की प्रस्तुति हुई, इस कार्यक्रम में सभी टीमों ने अपनी-अपने क्षमता एवं विद्य नृत्य का शानदार प्रस्तुति करते हुए रामगढ़ अंचल के सत्संग मंडलियों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया एवं दूसरे स्थान पर गुमला अंचल के सत्संग मंडली नया स्थान ग्रहण किया तथा तीसरे स्थान पर पलामू पांकी अंचल के सत्संग मंडलियों ने अपनी अपनी जगह बनायी। बाकी सभी टीमों ने अपनी-अपनी शानदार प्रस्तुति दी। समापन सत्र में राष्ट्रीय महामंत्री डॉ ललन कुमार शर्मा ने एकल अभियान समस्त विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। श्री हरि कथा प्रसार योजना आज के प्रस्तुति में एक अच्छे काम का स्वरूप है ग्रामीण समाज में तैयार कर रही है जिससे कि समाज में आज एक अच्छी संस्कृति का पुनर्जागरण हो सके और आने वाला दिनों में हमारे पूरे समाज एक दूसरे के साथ हंसता मुस्कुराता हुआ है।समाज को दिशा निर्देश देने का काम करें एक स्थान पर बैठकर सभी समाज के लोग एक साथ जुड़ कर रहे और राष्ट्रीय हित में एक जूटता दिखायें। शुगर बनवासी क्षेत्र में रहने वाले समाज को सत्संग से जोड़ना और अपना धर्म संस्कृति बचा रहे इस और अग्रसर करना यह श्री हरि सत्संग प्रतियोगिता के माध्यम से समाज में एक कुत्ता लाना यह एकल अभियान का एक उद्देश्य है।इस कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रांत के समितियां की उपस्थिति रही रमेश धरनीधरका राष्ट्रीय अध्यक्ष बंबंधु परिषद, अंचल किंगर अध्यक्ष रांची चैप्टर, पायल अग्रवाल सचिन श्रीहरि एवं संभाग की मां, श्रीमान मुदित धरणीधरका, इस कार्यक्रम के जज के रूप में उदय नारायण शुक्ला, संस्कार शिक्षा प्रभारी दक्षिण झारखंड, संजय साहू केंद्रीय प्रमुख हरि मूल्यांकन, अमरेंद्र विष्णुपुरी केंद्रीय साहित्य विभाग प्रमुख, चंद्रकांत रायपत ग्राम उठाने योजना के ट्रस्टी, उत्सव पाराशर, विशेष केडिया, राजकुमारी जैन, सुनीता मांसारिया, डॉ एस भट्ट एवं विभिन्न जिलों से टोली के रूप में 167 एवं संभाग, भाग टोली तथा व्यवस्था टोली के कार्यकर्ता और संचालन समिति से लगभग 40 से अधिक समितियों की उपस्थिति रही अंत में भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की गयी। उक्त जानकारी वनबन्धु परिषद रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

रंगभरी आमलकी एकादशी 27 को, आस्था, भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम
Published / 2026-02-24 14:51:56
रंगभरी आमलकी एकादशी 27 को, आस्था, भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम

रंगभरी आमलकी एकादशी 27 को, आस्था, भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगमयह पर्व हमें प्रकृति, धर्म और सामाजिक एकता के महत्व का देता है संदेश : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट व विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी, जिसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है, इस वर्ष रंगभरी एकादशी 27 फरवरी दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। यह एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु और आंवला (आमलकी) वृक्ष की पूजा के लिए समर्पित है तथा होली के उत्सव की आधिकारिक शुरुआत का भी प्रतीक मानी जाती है।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु का आंवले के वृक्ष में वास होता है। इसलिए आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा, परिक्रमा और उसके नीचे बैठकर विष्णु स्तुति करने का विशेष महत्व बताया गया है। पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार एक बार एक निर्धन ब्राह्मण ने इस व्रत को श्रद्धा से किया, जिसके प्रभाव से उसे अगले जन्म में राजा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और पापों से मुक्ति प्रदान करता है। रंगभरी एकादशी का विशेष संबंध काशी विश्वनाथ मंदिर से भी है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव माता पार्वती को विवाह के बाद पहली बार काशी लेकर आए थे और बाबा  विश्वनाथ का गुलाल एवं अबीर से भव्य श्रृंगार किया गया था। इसी कारण इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इस दिन वाराणसी में विशेष शोभायात्रा निकाली जाती है और मंदिरों में अबीर-गुलाल अर्पित कर भक्तगण होली के रंगों की शुरुआत करते हैं।आमलकी एकादशी का व्रत प्रातः स्नान, संकल्प और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा से आरंभ होता है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं तथा सायंकाल कथा-श्रवण और भजन-कीर्तन करते हैं। इस दिन श्रीहरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत के पालन से सहस्र गोदान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।आंवला वृक्ष को आयुर्वेद में भी अत्यंत पवित्र और औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। यह वृक्ष दीर्घायु,स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन आंवले का सेवन तथा दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सामाजिक दृष्टि से भी यह पर्व लोगों में सद्भाव, भक्ति और उत्साह का संचार करता है तथा होली जैसे रंगोत्सव के आगमन का संदेश देता है।समग्र रूप से देखा जाए तो रंगभरी आमलकी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और उल्लास का अद्भुत संगम है। यह पर्व हमें प्रकृति, धर्म और सामाजिक एकता के महत्व का संदेश देता है। भक्तिभाव और श्रद्धा से किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

रांची में विराट हिन्दू सम्मेलनों की धूम
Published / 2026-02-22 20:59:08
रांची में विराट हिन्दू सम्मेलनों की धूम

रांची में विराट हिंदू सम्मेलनों की धूम: 27 फरवरी को सिद्रोल, 1 मार्च को चुटिया व हेथू, 8 मार्च को चटकपुर, तथा 15 मार्च को टाटीशिल्वे व डुमरदगा में आयोजनटीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राजधानी रांची में उत्साह का वातावरण व्याप्त है। संघ द्वारा आयोजित विराट हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला में विभिन्न क्षेत्रों में भव्य कार्यक्रम व शोभा यात्राएं निकाली जाएंगी।27 फरवरी: सिद्रोल में हिंदू सम्मेलनश्रृंखला की शुरुआत 27 फरवरी को सिद्रोल में हिंदू सम्मेलन के साथ होगी। स्थानीय समाज इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है।1 मार्च: चुटिया में सह-सरकार्यवाह आलोक कुमार का संबोधन। आयोजन का मुख्य शुभारंभ 1 मार्च को चुटिया में होगा। मुख्य वक्ता: संघ के सह-सरकार्यवाह श्री आलोक कुमार जी कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। वे 28 फरवरी को सेवा अंकुर कार्यक्रम के बाद सम्मेलन में शामिल होंगे। विशिष्ट अतिथि: अयोध्या से पधार रहे पूज्य राजू दास जी अपना आशीर्वचन देंगे। चुटिया का हिंदू समाज इस भव्य आयोजन की तैयारियों में तन्मयता से लगा है। उसी दिन हेथू गांव में भी हिंदू सम्मेलन आयोजित होगा।8 मार्च: चटकपुर में उमड़ेगा जनसैलाबचटकपुर के पंचायत भवन मैदान में विराट हिंदू सम्मेलन संपन्न होगा। दोपहर 2 बजे से छाता टोंगरी, झिरी, सुंडिल व चटकपुर से भव्य शोभा यात्राएं निकलेंगी, जो पंचायत भवन के निकट मुख्य स्थल पर संगमित होंगी। वहां धर्म सभा का आयोजन होगा।15 मार्च: टाटीशिल्वे व डुमरदगा में शक्ति प्रदर्शन। टाटीशिल्वे (EEF मैदान): दोपहर 2 बजे से भव्य शोभा यात्रा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। आयोजन समिति ने रूपरेखा तैयार कर ली है। डुमरदगा: यहां भी विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन सुनिश्चित है।मुख्य आकर्षणसंघ शताब्दी वर्ष में हिंदू समाज की एकजुटता का प्रदर्शन। विभिन्न क्षेत्रों से शोभा यात्राएं व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां।

रांची : श्री श्याम मंडल ने श्री श्याम मंदिर में मनाया श्री श्याम फागुन सतरंगी महोत्सव
Published / 2026-02-22 16:59:08
रांची : श्री श्याम मंडल ने श्री श्याम मंदिर में मनाया श्री श्याम फागुन सतरंगी महोत्सव

टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मण्डल, रांची का तीन दिवसीय श्री श्याम फाल्गुन सतरंगी महोत्सव आज दिनांक 22 फरवरी 2026 को  विराट निशान शोभा यात्रा के साथ अत्यंत धूमधाम से प्रारम्भ हुआ। सर्वप्रथम प्रातः श्री श्याम प्रभु का भव्य शृंगार किया गया, जिसमें बाबा को स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर विभिन्न प्रकार के खुशबूदार फूलों से अलंकृत किया गया।मंदिर में विराजे वीर बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी विशेष शृंगार किया गया। श्री श्याम मण्डल द्वारा निर्मित श्री श्याम मन्दिर में प्रथम बार बाबा के मंड में स्थापित होने वाले रजत निशान (ध्वजा) का प्रातः 11 बजे आचार्य श्री श्याम सुंदर भारद्वाज के नेतृत्व में मण्डल के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश बागला ने विधि विधान से श्याम मन्दिर में पूजन किया।यह रजत निशान बाबा के रथ पर नगर भ्रमण कर मन्दिर में स्थापित होगा। रजत निशान पूजन के पश्चात दोपहर 2 बजे श्री लक्ष्मी नारायण मन्दिर से निशान यात्रा प्रारंभ की गई जिसमें श्री श्याम प्रभु के गगन भेदी जयकारों के बीच 750 भक्तगण अत्यन्त श्रद्धा के साथ अपने अपने कन्धे श्री श्याम निशान लेकर झूमते नाचते श्री श्याम प्रभु को निशान अर्पित करने निकल पड़े। निशान धारियों के अलावा बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ शोभायात्रा के साथ चल रही थी।दिव्य रथ पर विराजमान हो श्री श्याम प्रभु नगरवासियों को आशीष प्रदान कर रहे थे साथ ही श्री श्याम मण्डल की दो टोलियां संगीतमय भजन डोरी खींच राखिजो यो है बाबा को निशान, श्याम रंगीला पलका उघाड़ों फाल्गुन आ गयो, लेकर चलो श्याम के पावन निशान को, मस्ती में तुम भी चलो धाम को, फागण आया होली आई, ढोल बजे रे मृदंग, श्याम धणी से होली खेलन, आये मस्त मलंग, हर फागण में श्याम धणी, हम पहुंचे खाटू धाम हो, हाथों में निशान हो, सामने मेरा श्याम हो गाकर पूरे वातावरण को श्याम मय बना रही थी।इस अवसर पर पूरे मार्ग में रंग अबीर गुलाल एवम भजनों की मस्ती लेते भक्तगण शोभायात्रा में शामिल थे। इस अवसर पर विभिन्न जगहों पर श्याम प्रेमी अपने घर से एवम प्रतिष्ठान, धार्मिक संस्था के द्वारा श्री श्याम प्रभु का स्वागत पारंपरिक आरती व भोग एवम पुष्प वर्षा से किया।सम्पूर्ण मार्ग में श्री श्याम मण्डल रांची द्वारा प्रसाद वितरण एवम शुद्ध जल, जूस का वितरण धर्म प्रेमियों में किया गया। निशान यात्रा अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर जैसे ही पहुंची सभी श्याम भक्तों का उत्साह बड़े ही भाव विभोर के साथ श्री श्याम प्रभु को निशान अर्पित किया।समापन आरती के साथ आज के कार्यक्रम का समापन हुआ। इस निशान यात्रा को सफल बनाने में अनिल केजरीवाल, अशोक लाठ, मनोज सिंघानिया, ज्ञान प्रकाश बागला, सुनील मोदी, प्रदीप अग्रवाल, विकाश पडिया, अभिषेक डालमिया, प्रमोद बगड़िया, राकेश मुरारका, राकेश सारस्वत, मनोज ढांढनीयां का सहयोग रहा। दिनांक 27 फरवरी 2026 को मन्दिर में रात्रि 9 बजे से मुख्य कार्यक्रम प्रारम्भ होगा। श्री श्याम प्रभु का विराट श्रृंगार, छप्पन भोग, सवामनी भोग, भजन पुस्तिका विमोचन, केसरिया होली समारोह का मुख्य आकर्षण होगा। उक्त जानकारी श्री श्याम मण्डल श्री श्याम मन्दिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.