श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में भक्ति, भजन और अन्नपूर्णा महाप्रसाद का भव्य आयोजन टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित एमआर एस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम श्रीराधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के सान्निध्य में 265 वें श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। मौके पर मंदिर परिसर को भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया गया। मंदिर में श्री राधा रानी जी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार आकर्षक आभूषणों एवं मनोहारी पुष्पों से किया गया, जिसकी छटा देखते ही बन रही थी। दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ महाप्रसाद का भोग लगाया गया। इसके पश्चात शिव भगवान अग्रवाल के सौजन्य से मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, जलजीरा शर्बत एवं सत्तू पानी का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग 1500 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया।भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन संध्या कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी ने राधे राधे बरसाने वाली राधे, कान्हा रे कान्हा, तूने लाखों का जीवन संवारा एवं अच्युतम केशवम् कृष्ण दामोदरम् जैसे सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे तथा पूरा मंदिर परिसर राधे-कृष्ण एवं श्याम के जयकारों से कृष्णमय एवं भक्तिमय हो गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान श्री राधा-कृष्ण की आराधना की। वातावरण पूरी तरहआध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्तिरस से सराबोर हो उठा। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा लगभग 3 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान के दर्शन किये। उन्होंने जानकारी दी कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है, जिसमें प्रतिदिन 400 से अधिक श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, विशाल जालान, विष्णु सोनी, मनीष सोनी, पवन पोद्दार, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, हरीश सोनी सहित अनेक श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कलशयात्रा के साथ आरंभ हुआ भागवत प्रतिष्ठा सह श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ जय श्री राधे के नारे से गूंज उठा भंडरा गांवएबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा। कलशयात्रा के साथ भंडरा पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। सात दिवसीय श्री भागवत प्रतिष्ठा सह श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के मद्देनजर शुक्रवार सुबह भंडरा ठाकुरबाड़ी मंदिर प्रांगण से एक हजार से अधिक महिलाओं ने जय श्री कृष्ण के जयघोष के साथ कलशयात्रा निकाला। इसमें प्रखंड के तमाम गावों के लोग शामिल हुए। यज्ञाचार्य रमाकांत शास्त्री जी महाराज और गौरव कृष्णजी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कलशयात्रा में पुरुषों की संख्या भी काफी अधिक थी। भगवान के जयघोष के साथ सभी भौरो नदी पहुंचे जहां यज्ञाचार्य द्वारा मंत्रोचारण के बाद कलश में जल भर कर भगवा रंग से सजे सभी महिला व पुरुषों ने श्री राधे के जयघोष के साथ नगर भ्रमण करते हुए ठाकुर बाड़ी स्थित यज्ञ स्थल पहुंचे। यहां कलश स्थापन के पश्चात मृदाहरण का अनुष्ठान हुआ। तत्पश्चात भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक राधा मोहन शर्मा ने बताया कि नौ मई को पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश, अग्निमंथन व जलाधिवास का अनुष्ठान होगा।जलयात्रा के दौरान ईश्वरी मोहन शर्मा, किशोरी मोहन शर्मा, राजु शर्मा, कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, आनंद दुबे, भीम साहू, अनित कुमार कुंदन, श्रीकांत, बसंत साहू, सुरेश साहू, अजीत अग्रवाल, आनंद साहू दिनेश, भीम नाथ शाहदेव, बिंदु साहू रुपेश मिश्रा, संतोष साहू, शंकर साहू, श्रवण गुप्ता, अनिल साहू, सुरेन्द्र यादव, ललन सोनार, उतम गुप्ता आदि मुख्य रुप से शामिल हुए।
श्री श्याम मंदिर में स्वामी सदानंद महाराज ने श्री कृष्ण कथा का अमृतमय रस बरसायाटीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंदिर परिसर गिरिडीह में श्याम सेवा समिति ट्रस्ट द्वारा एक दिवसीय भव्य श्री कृष्ण कथा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कथा वाचक एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज ने अपने मुखारविंद से भगवान श्री कृष्ण के जीवन, उनके आदर्शो, धर्म स्थापना और मानव कल्याण के संदेशों का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया।उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के बाल्यकाल, माखन चोरी,गोवर्धन पूजा, रासलीला, कंस वध तथा महाभारत में दिए गए गीता ज्ञान का अत्यंत प्रभावशाली ढंग से वर्णन किया कथा के माध्यम से उन्होंने मानव जीवन में प्रेम, सेवा, सत्य एवं धर्म के महत्व को भी रेखांकित किया।कार्यक्रम के दौरान संगीतमय भजनों की मधुर प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। साथ ही भगवान श्री कृष्ण की जीवंत झांकियों ने उपस्थित भक्तों का मन मोह लिया। पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे एवं जय श्री कृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर कथा एवं भजनों का आनंद लेते रहे। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर रांची से ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल एवं मनीष सोनी विशेष रूप से गिरिडीह पहुंचे। सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वामी सदानंद जी महाराज ने उन्हें श्री राधा कृष्ण का पावन दुपट्टा ओढ़ाकर आशीर्वाद प्रदान किया। कथा आयोजन में श्याम सेवा समिति ट्रस्ट के काशी अग्रवाल, किशन बगड़िया, पवन चूड़ीवाला, विनोद धागेच, रामगोपाल खंडेलवाल एवं पिंटू खंडेलवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मातृ दिवस 10 मई को... मां का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है उनका स्थान सदैव सर्वोपरि रहेगा : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, ममता, करुणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप होती है। संसार में मां का स्थान सर्वोच्च माना गया है।मां अपने बच्चों के जीवन को संवारने, संस्कार देने और हर परिस्थिति में उनका साथ निभाने का कार्य करती है। इसी मातृत्व, त्याग और असीम प्रेम के प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष मातृ दिवस अर्थात मदर्स डे मनाया जाता है। मातृ दिवस प्रत्येक वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस 10 मई को मनाया जाएगा। यह दिन दुनिया भर में माताओं के सम्मान, उनके योगदान और परिवार एवं समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्मरण करने के लिए समर्पित होता है।मातृ दिवस मनाने की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। इसकी शुरुआत का श्रेय अमेरिकी महिला एना जार्विस को दिया जाता है। उन्होंने अपनी मां की स्मृति में माताओं के सम्मान हेतु विशेष दिवस मनाने का अभियान चलाया था। उनके प्रयासों से वर्ष 1914 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने मई के दूसरे रविवार को आधिकारिक रूप से मातृ दिवस घोषित किया।इसके बाद धीरे-धीरे यह दिवस विश्व के अनेक देशों में मनाया जाने लगा। मातृ दिवस का मुख्य उद्देश्य माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करना है। मां अपने बच्चों केपालन-पोषण में अपना पूरा जीवन समर्पित कर देती है। वह परिवार की आधारशिला होती है, जो बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चों के सुख-दुख में सदैव साथ खड़ी रहती है। यह दिवस हमें मां के त्याग, संघर्ष और प्रेम को समझने तथा उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। इस दिन लोग अपनी माताओं को उपहार देकर, शुभकामनाएं भेजकर,उनके साथ समय बिताकर तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्मान प्रकट करते हैं। विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं एवं विभिन्न संगठनों द्वारा भी माताओं के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर मातृ शक्ति को सम्मानित कर समाज में उनके योगदान को सराहा जाता है।भारतीय संस्कृति में मां को देवी के समान माना गया है। हमारे धर्मग्रंथों में भी मातृ देवो भवः का संदेश दिया गया है, जिसका अर्थ है -मां को देवता के समान सम्मान देना।मां ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, जो उसे जीवन के नैतिक मूल्यों और संस्कारों की शिक्षा देती है।इसलिए मातृ दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मां के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है।आज के आधुनिक एवं व्यस्त जीवन में परिवारों के बीच बढ़ती दूरियों के कारण यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मां का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि जीवन के हर दिन किया जाना चाहिए। मां का प्रेम अनमोल होता है, जिसकी तुलना संसार की किसी भी वस्तु से नहीं की जा सकती, निस्संदेह, मातृ दिवस हमें मां के त्याग और ममता को स्मरण कर उनके प्रति आदर, सेवा और प्रेम व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। मां का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और उनका स्थान सदैव सर्वोपरि रहेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड चित्रांश विचार मंच का एक प्रतिनिधिमंडल आज राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन में शिष्टाचार भेंट कर मंच द्वारा प्रकाशित चित्रांश मंजूषा-3 स्मारिका उन्हें सप्रेम भेंट की। मौके पर राज्यपाल के साथ मंच की गतिविधियों, उसके सामाजिक योगदान एवं समाज में उसकी भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई। मंच के उपाध्यक्ष सह पत्रिका संपादक राजीव सहाय ने कहा कि चित्रांश मंजूषा-3 समाज की संवेदनाओं, संस्कारों एवं सृजनशीलता का सजीव दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि मंच का उद्देश्य साहित्य, कला एवं सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। प्रतिनिधिमंडल में राजीव सहाय, प्रखर जयपुरियार, संजय पीपरवाल, प्रमोद कुमार सिन्हा एवं साकेत बिहारी शरण शामिल थे। उक्त जानकारी झारखंड चित्रांश विचार मंच के उपाध्यक्ष राजीव सहाय ने दी।
अब झारखंड में बांग्लादेशी और रोहिंग्या का भारी मात्रा में होगा घुसपैठ, राज्य एवं देश की सुरक्षा के लिए है खतरा। टीम एबीएन, रांची। झारखंड में बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या का भारी मात्रा में घुसपैठ की आशंका जताते हुए विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही यह तय है कि पश्चिम बंगाल में रहने वाले बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या घुसपैठ झारखंड -बिहार में सर्वाधिक हो सकती है।झारखंड सहित अन्य प्रदेशों में रहने वाले बांग्लादेशियों का सुरक्षित स्थान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद है। मुर्शिदाबाद अब बांग्लादेशियों एवं रोहिंग्यों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं रह गया है क्योंकि नयी सरकार के गठन होने के साथ ही रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठ को समाप्त करने का संकल्प है। झारखंड के किसी भी क्षेत्र में रहने वाले इन रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी घुसपैठियों से बात करने पर वे हमेशा मुर्शिदाबाद से आने का ही नाम लेते रहे हैं। ऐसे में मुर्शिदाबाद से सटे साहिबगंज व पाकुड़ के रास्ते झारखंड के विभिन्न जिलों में भारी मात्रा में आना तय है। यूँ तो देश के अनेक जिलों में घुसपैठियों का वर्चस्व है। झारखंड का साहिबगंज एवं पाकुड़ इसका ज्वलंत उदाहरण है। झारखंड में यदि घुसपैठियों को रोकने का कड़े कदम नहीं उठाये जाते हैं तो आने वाला समय में पश्चिम बंगाल के जैसा ही झारखंड का वातावरण बनने में देर नहीं लगेगी। साहिबगंज- पाकुड़ सहित कई जिलों में इस प्रकार की गतिविधियां आज देखने को मिल भी रही है जिसका नजर अंदाज करना प्रदेश एवं देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ेगी।
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती साहित्य, संस्कृति और मानवता का अमर उत्सव : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क । हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान साहित्यकार, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती हर वर्ष बड़े सम्मान और उत्साह के साथ 7 मई को मनाई जाती है। जबकि बंगाली पंचांग के अनुसार यह 25 बैशाख के दिन आती है। वर्ष 1861 में कोलकाता में जन्मे टैगोर ने भारतीय साहित्य और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई।टैगोर जयंती उनके साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान को याद करने के लिए मनाई जाती है। उन्होंने कविता, उपन्यास, नाटक, संगीत और चित्रकला के माध्यम से मानवता, प्रकृति और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संदेश दिया। उनकी प्रसिद्ध कृति गीतांजलि के लिए उन्हें 1913 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ, जिससे वे एशिया के पहले नोबेल विजेता बने। उनके द्वारा रचित भारत का राष्ट्रगान जन गण मन आज भी हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति का संचार करता है। रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती भारतीय साहित्य और कला के गौरव को पुनर्जीवित करने का अवसर है। यह दिन हमें उनकी विचारधारा स्वतंत्रता, शिक्षा, समानता और मानवता को समझने और अपनाने की प्रेरणा देता है। टैगोर ने शिक्षा को केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास का माध्यम माना। इसी उद्देश्य से उन्होंने विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज भी उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र है।इस जयंती का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को टैगोर के आदर्शों से परिचित कराना है। उनके लेखन में प्रकृति के प्रति प्रेम, समाज सुधार और मानवता की गहरी भावना झलकती है। वे मानते थे कि शिक्षा और संस्कृति के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें एक बेहतर समाज बनाने की दिशा में प्रेरित करते हैं।रविंद्र टैगोर जयंती के अवसर पर देशभर, विशेषकर पश्चिम बंगाल और शांतिनिकेतन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और साहित्यिक संस्थानों में उनकी कविताओं, गीतों और नाटकों का मंचन होता है। रवीन्द्र संगीत की मधुर प्रस्तुतियां वातावरण को भावविभोर कर देती हैं। इस दिन लोग उनकी रचनाओं का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती केवल एक जन्मदिन नहीं,बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और मानवता के मूल्यों का उत्सव है। यह दिन हमें उनकी शिक्षाओं को अपनाकर समाज में प्रेम, शांति और समरसता फैलाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। गुरुदेव टैगोर की विरासत सदैव हमारे मार्गदर्शन का प्रकाश बनी रहेगी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। आगामी 18/19/20 मई 2026 को आयोजित तीन दिवसीय विशु सेंदरा में ग्रामीणों की उपस्थिति सुनिश्चित हो इसके लिए पांच पडहा वरंदा भरनो सिसई में सुधु पहान की अध्यक्षता में बैठक किया गया। इस बैठक में जिला राजी पड़हा व्यवस्था के वेल लक्ष्मीनारायण भगत, मीडिया प्रमुख जगदीप भगत, उप वेल बुद्धेश्वर उरांव ने संयुक्त रूप से कहा कि सामाजिक, सांकृतिक, विधि विधान की जानकारी के लिए आदिवासी समाज खास कर आदिवासी छात्र छात्राओं को सामाजिक बैठक में उपस्थिति सुनिश्चित करना होगा। इसके लिए परिवार के अभिभावक अपने बच्चों को विशेष रूप से बैठक में उपस्थित होने के लिए प्रेरित करना होगा ताकि आदिवासी समाज में हो रही कुरीति एवं बदलाव और होने वाले दूरगामी परिणाम से अवगत कराया जा सके। बैठक में पहाड़केसा के संजय उरांव, कपिल उरांव, बच्चू उरांव, दुखिया उरांव, बुधवा उरांव जतरगढ़ी के जयराम उरांव, कृष्णा मुंडा, कार्तिक उरांव, प्रमोद उरांव, रुसुवा उरांव, फगुवा उरांव, बंधना उरांव आदि ग्रामीण उपस्थित थे
बाल संस्कारशाला में कलात्मक प्रदर्शन करके वार्षिकोत्सव सोल्लास मनाया टीम एबीएन, रांची। रांची जिलांतर्गत कांके प्रखंड समन्वय के तहत गायत्री प्रज्ञा केंद्र में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित वार्षिक महोत्सव बाल संस्कारशाला कांके में भव्य रूप से मनाया। संस्कारशाला के बच्चों द्वारा उद्देश्यपूर्ण अभिनय जैसे आॅपरेशन सिंदूर नाटक, नशा मुक्त भारत नाटक, मोबाईल उपयोगी शो जैसी प्रस्तुति की गई।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेजेल डेविस (रोटरी क्लब आॅफ रांची नार्थ सदस्य, संजुक्ता विश्वास काम आलाप संगीत संस्थान की संस्थापक एवं शास्त्रीय संगीत की शिक्षका) और मेरी आवाज, मेरी पहचान के संचालक एवं मुख्य सदस्यगण तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भी निरंजन सिंह (परिव्राजक गायत्री परिवार, टाटानगर) उपस्थित थे। सभी बच्चों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें बाल संस्कारशाला कांके की ओर से मेडल तथा पारितोषिक वितरण किया गया। इसकी संचालिका सुलोचना शाहदेव, सहायक में कृति शाहदेव, सुरुचि रंजन, रेणु श्रीवास्तव सहित टीम सदस्यों ने खूबसूरत ढंग से मनाया। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर बहुत से कार्यक्रम हुए, जिसमें संगीत, नृत्य, नाटक, प्रज्ञा योग जैसे कार्यक्रम में बच्चों ने भाग लिया और उनके प्रोत्साहन के लिए उन्हें पुरस्कार और उपहार देकर उनका मनोबल बढ़ाया गया। इस अवसर पर अखंड दीप प्रज्ज्वलित कर गुरुसत्ता, मातृ सत्ता का ध्यान, गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ व वंदना सहित बच्चों में सुसंस्कारिता संवर्धन प्रकरण पर प्रकाश डाला गया। सुलोचना शाहदेव ने बताया कि कुसंस्कारों को हटाकर नये संस्कार स्थापित करना है। युग परिवर्तन की इस पवित्र बेला में यह अति आवश्यक हो गया है कि हमारी नयी पीढ़ी सुसंस्कारवान बने। बताया गया कि सही संस्कार व परामर्श सही समय पर मिले तो उसका परिणाम श्रेष्ठ निकलता है। इसके लिए यह संजीवनी विद्यायुक्त संस्कार विभूति सबके लिए है। इसका लाभ सबको मिले, यही हमारे बाल संस्कार का लक्ष्य है। समाज में अनगढ़ लोग बहुत रहते हैं और सुयोग्यों की कमी पायी जाती है। विचार क्रान्ति अभियान अंतर्गत शिशु, बालक, माता-पिता, कुल परिवार, तथा समाज के लिए विडंबना न बने, बल्कि सौभाग्य व गौरव का कारण बने। आज उनके शारीरिक, बौद्धिक, नैतिक तथा भावनात्मक नव-निर्माण व विकास के लिए शिशुओं में संस्कार प्रकरण व संस्कारवान बनना आवश्यक है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार की जिला महिला युवा समन्वयक सुलोचना शाहदेव और जय नारायण प्रसाद ने दी।
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